कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 7 – मत बाँधो (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 7 ‘मत बाँधो’ (कवयित्री – महादेवी वर्मा) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा ‘मेरी समझ से’, ‘पंक्तियों पर चर्चा’, ‘मिलकर करें मिलान’, ‘सोच-विचार के लिए’ आदि सभी अभ्यास-गतिविधियों के उत्तर।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (काव्य) अध्याय: 7 कवयित्री: महादेवी वर्मा विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवयित्री परिचय – महादेवी वर्मा

हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभ मानी जाती हैं तथा अपनी करुणा एवं वेदना से भरी रचनाओं के कारण उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ भी कहा जाता है। बच्चों के लिए उन्होंने बारहमासा, आज खरीदेंगे हम ज्वाला, अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी जैसी अनेक कविताएँ लिखीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावपूर्ण गद्य – मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ तथा पथ के साथी की भी रचना की; उनके गद्य के चरित्र पाठकों को सदा याद रह जाते हैं। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत एवं दीपशिखा उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं। सन् 1987 में उनका निधन हुआ।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता सपनों की स्वतंत्रता का संदेश देती है। कवयित्री आग्रह करती हैं कि किसी के सपनों के पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए।

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!

सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!
सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!

मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो!

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
— महादेवी वर्मा

भावार्थ

कवयित्री महादेवी वर्मा इस कविता में सपनों की स्वतंत्रता की रक्षा का आग्रह करती हैं। वे कहती हैं कि किसी के सपनों के ‘पंख’ मत काटो और उनकी गति को मत बाँधो; सपने पंखों की भाँति उड़ान भरते हैं, अतः उन्हें मुक्त रहने दो। जिस प्रकार सुगंध (सौरभ) एक बार आकाश में उड़ जाने पर लौटकर नहीं आती, और धूल में गिरा बीज फिर आकाश में नहीं उड़ पाता – उसी प्रकार दबा या बाँधा हुआ सपना भी अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।

कवयित्री बताती हैं कि अग्नि सदा धरती पर जलती है, किंतु उसका धुआँ आकाश में फैलता है – अर्थात् सपनों में भी दोनों गतियाँ (नीचे टिकना और ऊपर उठना) विद्यमान रहती हैं। सपना ऊपर उठता है (आरोहण) और फिर अनुभव/व्यवहार में लौटकर आँखों में साकार होता है (अवरोहण)। इसलिए वे कहती हैं कि सपने के आरोहण को मत रोको और उसके अवरोहण को मत बाँधो – अर्थात् उसके उठने और साकार होने, दोनों में बाधा मत डालो।

कवयित्री विश्वास व्यक्त करती हैं कि यदि सपने को मुक्त आकाश में विचरण करने दिया जाए तो वह तारों में मिलकर मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर पुनः धरती पर लौट आएगा और स्वर्ग जैसा सुंदर संसार रचने का शिल्प (कला) भूमि को सिखा देगा। इसलिए सपनों को नभ तक जाने से मत रोको और उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। संक्षेप में, यह कविता संदेश देती है कि मनुष्य की कल्पनाशीलता एवं स्वप्न-शक्ति को बाँधना नहीं चाहिए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही सुंदर, समृद्ध एवं प्रगतिशील संसार की नींव बनते हैं।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सपनेस्वप्न, कल्पनाएँ, आकांक्षाएँ
पंखपर, उड़ने का साधन
गतिचाल, प्रवाह, बढ़ने की शक्ति
सौरभसुगंध, खुशबू
नभआकाश, गगन
धूलिधूल, मिट्टी
अग्निआग
धूमधुआँ
गगनआकाश, नभ
मँडरानाचारों ओर घूमना/फैलना
आरोहणनीचे से ऊपर की ओर जाना, चढ़ना
अवरोहणऊपर से नीचे की ओर आना, उतरना
मुक्तस्वतंत्र, बंधनरहित
विचरणघूमना-फिरना, भ्रमण करना
मेघबादल
किरणप्रकाश की रेखा, रश्मि
दीप्तिचमक, प्रकाश, आभा
भू / भूमिधरती, पृथ्वी
शिल्पकारीगरी, कला, रचना-कौशल
स्वर्गसुखद स्थान, सुख-शांति का लोक

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?

• सपने मात्र कल्पनाएँ हैं

• सपनों को भूल जाना चाहिए

• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए

• सपने देखना अच्छी बात है

उत्तर• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए (तथा • सपने देखना अच्छी बात है)।कविता का मुख्य भाव यही है कि सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए – कवयित्री बार-बार सपनों के पंख न काटने तथा उनकी गति न बाँधने का आग्रह करती हैं, साथ ही सपने देखना एक सकारात्मक, अच्छी बात भी मानती हैं।

2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?

• प्रेम की

• शिक्षा की

• सपनों की

• अधिकारों की

उत्तर• सपनों की।पूरी कविता सपनों (स्वप्नों एवं कल्पनाओं) की स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश देती है।

3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं

• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं

• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं

• सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं

उत्तर• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं (तथा • सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं)।पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के विशाल आकाश में भ्रमण कराते हैं – इसीलिए सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना की गई है।

4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?

• जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो

• जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो

• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो

• जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों

उत्तर• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो (तथा • जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों)।यहाँ ‘स्वर्ग’ का अर्थ कोई भौतिक धन-वैभव वाला स्थान नहीं, बल्कि वह सुखद संसार है जहाँ आपसी सहयोग, सद्भाव एवं संवेदनशीलता हो।

5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?

• वह बहुत तेजी से उड़ सकता है

• वह और गहरा हो सकता है

• उसकी उड़ान रुक सकती है

• वह बढ़कर पौधा बन सकता है

उत्तर• उसकी उड़ान रुक सकती है (तथा • वह बढ़कर पौधा बन सकता है)।कविता के संदर्भ में धूल में गिरा बीज नभ में नहीं उड़ पाता – अर्थात् उसकी उड़ान रुक जाती है। वहीं दूसरी ओर, अनुकूल परिस्थिति मिलने पर वही बीज बढ़कर पौधा भी बन सकता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

सुझावयह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। अपने उत्तर का कारण कविता की पंक्तियों के आधार पर बताइए – जैसे ‘सपनों की स्वतंत्रता’ इसलिए चुना क्योंकि कवयित्री बार-बार ‘मत बाँधो’ कहती हैं। मित्रों के अलग उत्तर सुनकर अपने तर्क की पुष्टि या पुनर्विचार कीजिए।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है? / बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?”

उत्तरइन पंक्तियों में कवयित्री दो उदाहरणों से सपनों की स्वतंत्रता का महत्व समझाती हैं। सुगंध (सौरभ) जब एक बार आकाश में उड़ जाती है तो लौटकर नहीं आती – वह स्वतंत्र होकर दूर तक फैल जाती है।दूसरी ओर, जो बीज धूल में गिरकर दब जाता है, वह कभी आकाश में नहीं उड़ पाता।इसी तरह सपनों को भी मुक्त रहने देना चाहिए; यदि उन्हें दबा या बाँध दिया जाए तो वे अपनी ऊँचाई तक नहीं पहुँच पाते।

(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह / तारों में फिर मिल जायेगा, / मेघों से रंग औ’ किरणों से / दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”

उत्तरइन पंक्तियों का अर्थ है कि यदि सपने को स्वतंत्र आकाश में विचरण करने दिया जाए तो वह तारों तक पहुँचेगा अर्थात् ऊँचे आदर्शों से जुड़ेगा।वह बादलों से रंग और सूर्य की किरणों से चमक (दीप्ति) ग्रहण कर के पुनः धरती पर लौट आएगा।अर्थात् स्वतंत्र सपना नई सुंदरता, नया तेज और नई प्रेरणा लेकर वास्तविकता में साकार होता है और संसार को समृद्ध करता है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनी कुछ पंक्तियाँ (स्तंभ 1) तथा उनके भाव/संदर्भ (स्तंभ 2) नीचे दिए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।

क्रमस्तंभ 1 (पंक्ति)सही भाव (स्तंभ 2)
1.इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। (स्तंभ 2 का बिंदु 3)
2.सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है!सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। (बिंदु 5)
3.इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। (बिंदु 1)
4.नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो!सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। (बिंदु 2)
5.स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। (बिंदु 4)

सोच-विचार के लिए

(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?

उत्तरये संबोधन उन सभी लोगों के लिए किए गए होंगे जो दूसरों के सपनों, कल्पनाओं एवं स्वतंत्रता पर रोक लगाते हैं – जैसे बंधन डालने वाला समाज, कठोर नियम, अथवा वे बड़े (माता-पिता, बुजुर्ग) जो बच्चों की उड़ान को सीमित करना चाहते हैं।कवयित्री इन सबसे आग्रह करती हैं कि वे किसी की स्वप्न-शक्ति एवं कल्पनाशीलता को न रोकें।

(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?

उत्तरसपनों की गति ही व्यक्ति को आगे बढ़ने, कुछ नया करने और ऊँचाइयाँ छूने की प्रेरणा देती है।यदि सपनों की गति बाँध दी जाए तो मनुष्य की कल्पनाशीलता, उत्साह एवं संभावनाएँ रुक जाती हैं और वह आगे नहीं बढ़ पाता – इसीलिए कवयित्री सपनों की गति न बाँधने की बात कहती हैं।

(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?

उत्तरसौरभ या धुआँ एक बार उड़ जाने पर लौटते नहीं, बीज दबने पर उड़ नहीं पाता; किंतु सपनों में दोनों गतियाँ हैं – वे ऊपर उठते भी हैं और साकार होकर लौटते भी हैं।सपनों की अन्य विशेषताएँ – वे असीमित होते हैं, कभी समाप्त नहीं होते; वे एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकते हैं; वे साकार होकर वास्तविकता बन सकते हैं तथा समाज को बदलने की शक्ति रखते हैं।

(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?

उत्तरआरोहण (ऊपर उठना): जैसे किसी विद्यार्थी का परिश्रम करके धीरे-धीरे अच्छे अंक पाना, या पर्वतारोही का चोटी तक चढ़ना – यह सार्थक आरोहण है।अवरोहण (नीचे आना/लौटना): जैसे ऊँचे पद पर पहुँचा व्यक्ति विनम्रता से सामान्य लोगों के बीच लौटकर उनकी सहायता करे, या नदी पर्वत से उतरकर खेतों को सींचे – यह सार्थक अवरोहण है। दोनों ही जीवन में आवश्यक एवं उपयोगी हैं।

(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है / उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।

उत्तरहाँ, मैं सहमत हूँ। जो सपना मन में जन्म लेता है, वही परिश्रम से वास्तविकता बन जाता है – अर्थात् वह ‘आँखों में लौटकर’ साकार हो जाता है।उदाहरण – डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बचपन में वैज्ञानिक बनने का सपना देखा और कठोर परिश्रम से उसे साकार किया। इसी प्रकार किसी छात्र का डॉक्टर/इंजीनियर बनने का सपना मेहनत से सच होता देखा जा सकता है।

शीर्षक

कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।

उत्तरमैं इस कविता को ‘सपनों की उड़ान’ अथवा ‘मुक्त सपने’ नाम देना चाहूँगा/चाहूँगी।यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि पूरी कविता का मुख्य भाव सपनों को स्वतंत्र रखने और उनकी उड़ान न रोकने का है। यह शीर्षक कविता के केंद्रीय संदेश – सपनों की स्वतंत्रता – को सीधे व्यक्त करता है।

अनुमान और कल्पना से

(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

उत्तरमैं अपने नए संसार में रखना चाहूँगा/चाहूँगी – प्रेम, समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण, परस्पर सहयोग एवं सद्भाव, क्योंकि इन्हीं से संसार सुखद एवं स्वर्ग-समान बनता है।नहीं रखना चाहूँगा/चाहूँगी – युद्ध, भेदभाव, हिंसा, अन्याय, प्रदूषण एवं अशिक्षा, क्योंकि ये मनुष्य की उन्नति एवं शांति में बाधक हैं।

(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा?

उत्तरमैं चित्रकला (अथवा संगीत/लेखन) सीखना चाहूँगा/चाहूँगी।इससे मेरी कल्पनाशीलता बढ़ेगी, मन में सकारात्मकता आएगी और मैं अपने विचारों एवं भावनाओं को सुंदर रूप में व्यक्त कर सकूँगा/सकूँगी। कला से जीवन में आनंद, धैर्य एवं सौंदर्य-दृष्टि विकसित होती है।

(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?

उत्तरयदि अवसर मिले तो मैं अपने बीते समय में और अधिक अनुशासन एवं नियमित अध्ययन करता/करती, समय बर्बाद न करता/करती, अपने माता-पिता एवं शिक्षकों का अधिक आदर करता/करती तथा अच्छी आदतें पहले ही अपनाता/अपनाती।साथ ही उन गलतियों से बचता/बचती जिनसे किसी को कष्ट हुआ। ऐसा करने से मेरा वर्तमान और भी बेहतर होता।

(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि)

उत्तरयदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने (साकार होने) के लिए चाहिए – धूप अर्थात् कठोर परिश्रम, पानी अर्थात् लगन एवं निरंतर अभ्यास, उपजाऊ मिट्टी अर्थात् उचित अवसर एवं वातावरणइसके साथ धैर्य, आत्मविश्वास, सही मार्गदर्शन और परिवार-समाज का सहयोग भी आवश्यक है। इन्हीं के मिलने पर सपना रूपी बीज बढ़कर फलदायी वृक्ष बनता है।

(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?

उत्तरजैसे अच्छे विचारों से संसार सुंदर एवं स्वर्ग-समान बनता है, वैसे ही बुरे सपनों एवं विचारों से समाज में घृणा, हिंसा, भय एवं विनाश फैलता है – संसार नरक-समान बन जाता है।बुरे विचारों से बचने के लिए अच्छी संगति रखनी चाहिए, सद्ग्रंथ पढ़ने चाहिए, सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए, मन को रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए तथा बड़ों एवं शिक्षकों से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?

उत्तरयदि सबको सपने देखने एवं पूरा करने की स्वतंत्रता मिले तो दुनिया में नए-नए आविष्कार होंगे, हर व्यक्ति अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ेगा और समाज प्रगतिशील, सुखी एवं रचनात्मक बनेगा।उस दुनिया में समानता, परस्पर सम्मान, स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी, शिक्षा एवं सहयोग जैसी बातें सबसे महत्वपूर्ण होंगी, ताकि एक की स्वतंत्रता दूसरे के लिए बाधा न बने।

(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?

उत्तरमेरे विचार से यह एक विनम्र आग्रह एवं प्रार्थना है, जिसमें थोड़ा सुझाव का भाव भी है। कवयित्री किसी को कठोरता से आदेश नहीं देतीं, बल्कि कोमलता से अनुरोध करती हैं।यह बात उन सभी लोगों से कही जा रही है जो दूसरों के सपनों, कल्पनाओं एवं स्वतंत्रता पर रोक लगाते हैं – विशेषकर बड़ों, समाज एवं उन सबसे, जिनके हाथ में किसी की उड़ान सीमित करने की शक्ति है।

कविता की रचना

(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।

क्रमकविता की विशेषतासही पंक्ति
1.एक-दूसरे के विपरीत अर्थवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है।इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! (आरोहण × अवरोहण)
2.एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है।नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! (‘मत’ की पुनरावृत्ति)
3.समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है।दीप्ति लिए भू पर आयेगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! (भू = भूमि)
4.प्रश्न पूछा गया है।वह नभ में कब उड़ पाता है?
5.संबोधन का प्रयोग किया गया है।इन सपनों के पंख न काटो
6.सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है (मानवीकरण)।स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!

शब्दों की बात

“इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!” – ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण = नीचे से ऊपर की ओर जाना/चढ़ना; अवरोहण = ऊपर से नीचे की ओर आना/उतरना।

(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।

उत्तर• पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।• नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।• अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।

(ख) “वह नभ में कब उड़ पाता है?” / “धूम गगन में मँडराता है।” – ‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए।

उत्तर (उदाहरण)• वह अंबर में कब उड़ पाता है?• धूम आकाश में मँडराता है।(नभ/गगन के समानार्थी – अंबर, आकाश, व्योम, आसमान।) लय बनाए रखने के लिए शब्द के मात्रा-भार के अनुसार थोड़ा समायोजन करना पड़ सकता है।

(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? (संकेत— ‘मत डरो’)

उत्तरमत डरो, मत रुको, मत झुको, मत हारो, मत रोओ, मत भागो, मत छोड़ो, मत भूलो, मत झगड़ो, मत घबराओ।

(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? (संकेत— जोड़ना)

उत्तर‘बाँधने’ से मिलती-जुलती क्रियाएँ – जोड़ना, कसना, गाँठना, लपेटना, जकड़ना, नत्थी करना, पिरोना।वाक्य: माँ ने उपहार को रंगीन रिबन से बाँध दिया। • उसने सारी रस्सियाँ आपस में जोड़ दीं। • पहलवान ने कमर में लंगोट कस ली।

(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से बनता है ‘तम’ (अर्थ – अँधेरा)। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।

उत्तरनभ → भन (कुछ बोलियों में ‘भनभनाना’ से संबंधित)रंग → गंर/गिरना के निकट – इसके अतिरिक्त सरल उदाहरण – राजजार, नदीदीन के निकट; पाठ-आधारित स्पष्ट उदाहरण – मततम(विद्यार्थी ‘कब’ → ‘बक’, ‘रस’ → ‘सर’ जैसे शब्द-उलट उदाहरण भी ढूँढ़ सकते हैं।)

काल परिवर्तन

“सौरभ उड़ जाता है नभ में” – यह वर्तमान काल की पंक्ति है। इसे भूतकाल एवं भविष्य काल में बदलिए तथा कविता की अन्य वर्तमानकालीन पंक्तियों को भी इन कालों में लिखिए।

वर्तमान कालभूतकालभविष्य काल
सौरभ उड़ जाता है नभ में।सौरभ उड़ गया है नभ में।सौरभ उड़ जाएगा नभ में।
धूम गगन में मँडराता है।धूम गगन में मँडराया है।धूम गगन में मँडराएगा।
अग्नि सदा धरती पर जलती (है)।अग्नि धरती पर जली है।अग्नि धरती पर जलेगी।
उड़ कर आँखों में आता है।उड़ कर आँखों में आया है।उड़ कर आँखों में आएगा।

शब्दकोश से

“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” – शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ के अर्थ हैं – हाथ से चीज बनाने का काम (दस्तकारी/हुनर), कला-संबंधी व्यवसाय, दक्षता/कौशल, निर्माण/रचना आदि। नीचे ‘शिल्प’ से जुड़े शब्दों के अर्थ दिए गए हैं।

शब्दअर्थ
शिल्पकार / शिल्पी / शिल्पजीवी / शिल्पकारीहस्तकला से वस्तुएँ बनाने वाला कारीगर; दस्तकार
शिल्पकलाहाथ से सुंदर वस्तुएँ बनाने की कला; हस्तकला
शिल्पकौशलशिल्प/कारीगरी में निपुणता एवं दक्षता
शिल्पगृह / शिल्पगेहवह स्थान जहाँ शिल्प-कार्य किया जाता है; कारखाना/कार्यशाला
शिल्पविद्याशिल्प (कारीगरी) से संबंधित ज्ञान/विद्या
शिल्पशाला / शिल्पालयशिल्प/कलाकृति बनाने का स्थान या विद्यालय

आपकी बात (पाठ से आगे)

(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? (संकेत— गाँठ बाँधना)

उत्तर• गाँठ बाँधना, जूते का फीता बाँधना, बस्ता बाँधना, पगड़ी बाँधना।• पशु को रस्सी से बाँधना, पुल बाँधना, घाव पर पट्टी बाँधना।• लाक्षणिक प्रयोग – समाँ बाँधना, मन में आशा बाँधना, किसी को नियमों में बाँधना।

(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए।

उत्तरघर: बड़ों का आदर करना, छोटों से स्नेह, घर को स्वच्छ रखना, घर के कामों में सहयोग, झगड़े न करना।आस-पड़ोस: पड़ोसियों की सहायता करना, सफाई बनाए रखना, पेड़-पौधे लगाना, मिल-जुलकर रहना।विद्यालय: शिक्षकों का सम्मान, सहपाठियों से मित्रता एवं सहयोग, अनुशासन का पालन, कक्षा एवं परिसर स्वच्छ रखना।

(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।

उत्तरमेरा सपना है कि मैं डॉक्टर/शिक्षक/समाजसेवी बनूँ। यदि यह सपना सच हो जाए तो मैं निर्धन एवं जरूरतमंद लोगों की निःशुल्क सहायता करूँगा/करूँगी।डॉक्टर बनकर बीमारों का उपचार, शिक्षक बनकर गरीब बच्चों को शिक्षा, और समाजसेवी बनकर वंचितों की भलाई कर सकता/सकती हूँ – इस प्रकार मेरा सपना अनेक लोगों के जीवन को बेहतर बनाएगा।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘मत बाँधो’ कविता की रचयिता कौन हैं?

उत्तरइस कविता की रचयिता महादेवी वर्मा हैं।

2. कविता किसकी स्वतंत्रता का संदेश देती है?

उत्तरयह कविता सपनों (स्वप्नों एवं कल्पनाओं) की स्वतंत्रता का संदेश देती है।

3. ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों का अर्थ बताइए।

उत्तरआरोहण = नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना); अवरोहण = ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)।

4. कविता में कौन-सी पंक्ति आरंभ और अंत दोनों में आती है?

उत्तर“इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!”

लघु उत्तरीय

5. कवयित्री ने सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की है?

उत्तरपंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। सपने भी पंखों की भाँति मनुष्य के मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के विशाल आकाश में भ्रमण कराते हैं।पंख कटने पर पक्षी उड़ नहीं सकता; इसी प्रकार सपनों पर रोक लगने से व्यक्ति की प्रगति रुक जाती है – यही भाव व्यक्त करने के लिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।

6. “सौरभ उड़ जाता है नभ में” उदाहरण से कवयित्री क्या समझाना चाहती हैं?

उत्तरसुगंध एक बार आकाश में उड़ जाने पर लौटकर नहीं आती – वह स्वतंत्र होकर दूर तक फैलती है।इसी प्रकार सपनों को भी मुक्त रहने देना चाहिए; बाँधे जाने पर वे अपनी ऊँचाई एवं विस्तार खो देते हैं। इस उदाहरण से कवयित्री सपनों की स्वतंत्रता का महत्व समझाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय

7. ‘मत बाँधो’ कविता का केंद्रीय भाव एवं उसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरकेंद्रीय भाव: कविता का मूल संदेश है कि मनुष्य के सपनों, कल्पनाओं एवं स्वतंत्र विचारों को बाँधना नहीं चाहिए; स्वतंत्र सपने ही प्रगति, सौंदर्य एवं सुखद संसार की नींव बनते हैं।प्रतीकात्मकता: सौरभ, बीज, अग्नि, धुआँ, तारे, मेघ आदि प्रतीकों से सपनों की स्वतंत्रता समझाई गई है।मानवीकरण: सपने को मनुष्य की भाँति विचरण करते एवं शिल्प सिखाते दिखाया गया है।लय एवं पुनरावृत्ति: ‘मत’ की पुनरावृत्ति तथा आरंभ-अंत में दोहराई गई टेक कविता को गेयता एवं प्रभाव देती है; भाषा सरल, भावपूर्ण एवं प्रेरक है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) महादेवी वर्मा

(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(घ) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर(ख) महादेवी वर्मा।

2. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—

(क) सुंदरता

(ख) सुगंध

(ग) सूर्य

(घ) सपना

उत्तर(ख) सुगंध।

3. ‘नभ’ का समानार्थी शब्द है—

(क) धरती

(ख) सागर

(ग) गगन

(घ) पर्वत

उत्तर(ग) गगन।

4. ‘आरोहण’ का विपरीतार्थक शब्द है—

(क) चढ़ना

(ख) अवरोहण

(ग) विचरण

(घ) मँडराना

उत्तर(ख) अवरोहण।

5. कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज क्या नहीं कर पाता?

(क) पौधा बनना

(ख) नभ में उड़ना

(ग) अंकुरित होना

(घ) रंग बदलना

उत्तर(ख) नभ में उड़ना।

6. कविता में किसकी स्वतंत्रता न बाँधने का आग्रह है?

(क) पक्षियों की

(ख) नदियों की

(ग) सपनों की

(घ) हवाओं की

उत्तर(ग) सपनों की।

7. ‘दीप्ति’ शब्द का अर्थ है—

(क) अंधकार

(ख) चमक/आभा

(ग) बादल

(घ) धुआँ

उत्तर(ख) चमक/आभा।

8. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” में ‘शिल्प’ का आशय है—

(क) धन

(ख) रचना-कौशल/कला

(ग) युद्ध

(घ) यात्रा

उत्तर(ख) रचना-कौशल/कला।

9. महादेवी वर्मा को किस उपनाम से जाना जाता है?

(क) महाकवि

(ख) आधुनिक मीरा

(ग) राष्ट्रकवि

(घ) कविगुरु

उत्तर(ख) आधुनिक मीरा।

10. कविता में ‘मत’ शब्द को उलटने पर बनता है—

(क) तम (अँधेरा)

(ख) मन

(ग) तप

(घ) तन

उत्तर(क) तम (अँधेरा)।
उत्तर-कुंजी: 1-ख, 2-ख, 3-ग, 4-ख, 5-ख, 6-ग, 7-ख, 8-ख, 9-ख, 10-क।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): कवयित्री सपनों के पंख न काटने का आग्रह करती हैं।

कारण (R): सपनों की स्वतंत्रता ही व्यक्ति को प्रगति एवं ऊँचाई की ओर ले जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): धूल में गिरा बीज आकाश में उड़ जाता है।

कारण (R): दबा या बाँधा हुआ सपना अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।

उत्तर(घ) A गलत है (कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज नभ में उड़ नहीं पाता), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों गतियाँ होती हैं।

कारण (R): सपना विचार की तरह जन्म लेता है (ऊपर उठता है) और व्यवहार में साकार होकर लौटता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘मत बाँधो’ एक कठोर आदेश है।

कारण (R): कवयित्री विनम्र भाव से सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह/प्रार्थना करती हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (यह कठोर आदेश नहीं, कोमल आग्रह/प्रार्थना है), जबकि R सही है।

5. अभिकथन (A): ‘नभ’ और ‘गगन’ समानार्थी शब्द हैं।

कारण (R): दोनों का अर्थ ‘आकाश’ है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-क, 2-घ, 3-क, 4-घ, 5-क।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?

इस कविता की रचयिता हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा हैं।

‘मत बाँधो’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव है कि मनुष्य के सपनों एवं कल्पनाओं की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; उनके पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही प्रगति एवं सुंदर संसार की नींव बनते हैं।

‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का क्या अर्थ है?

आरोहण का अर्थ है नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना) तथा अवरोहण का अर्थ है ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)। ये एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं।

सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी पंखों की भाँति मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के आकाश में भ्रमण कराते हैं, इसीलिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।

कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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