कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 8 — नए मेहमान प्रश्न उत्तर और सार

नए मेहमान प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 8 की एकांकी का सार, पात्र, शब्दार्थ, अभ्यास, संवाद, मुहावरे, ही–तो और पाठ से आगे की गतिविधियाँ पढ़ें।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार अध्याय: 8 लेखक: उदयशंकर भट्ट विधा: एकांकी स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 8 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 105–125, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

लेखक परिचय – उदयशंकर भट्ट

इस एकांकी के लेखक उदयशंकर भट्ट (1898–1966) हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। परिवार में साहित्यिक वातावरण होने के कारण इनकी रुचि आरंभ से ही साहित्य में अधिक थी। इन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे तथा नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। यद्यपि इन्होंने कविता और उपन्यास भी लिखे, किंतु नाटक एवं एकांकी के क्षेत्र में इन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली। इनका लोक-परलोक उपन्यास तथा पर्दे के पीछे एकांकी-संग्रह बहुत चर्चित रहे। हिंदी एकांकी को लोकप्रिय बनाने वाले रचनाकारों में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नए मेहमान’ एकांकी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं और भारतीय आतिथ्य-भाव का जीवंत चित्रण किया है।

पाठ का सार

‘नए मेहमान’ एकांकी का दृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की एक रात आठ बजे का है। विश्वनाथ (गृहपति) किराये के एक छोटे, बंद और तपते मकान में अपनी पत्नी रेवती और बच्चों के साथ रहता है। भीषण गरमी से सब बेहाल हैं – पुराना पंखा हवा कम देता है, पानी से प्यास नहीं बुझती और छत इतनी छोटी है कि सब बच्चे समा नहीं पाते। निर्दयी पड़ोसी खाली छत पर भी खाट नहीं बिछाने देता। दोनों पति-पत्नी सोने की व्यवस्था को लेकर बहस ही कर रहे होते हैं कि रेवती कह उठती है – “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।”

तभी दरवाजा खटखटाता है और दो अपरिचित व्यक्ति – नन्हेमल और बाबूलाल – बिस्तर तथा संदूक लेकर घर में घुस आते हैं। वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर इतने अपनेपन से बातें करते हैं, मानो वर्षों से परिचित हों। वे ठंडा पानी, नहाने का प्रबंध और भोजन माँगते हैं और बार-बार कहते हैं कि वे ‘घर के ही’ हैं। विश्वनाथ संकोचवश उन्हें रोक नहीं पाता, यद्यपि वह उन्हें पहचानता ही नहीं।

विश्वनाथ और रेवती परेशान हो जाते हैं – सिर में दर्द, गरमी और ऊपर से अतिथियों का भोजन! पूछताछ करने पर मेहमान गोलमोल उत्तर देते हैं – कभी संपतराम, कभी जगदीशप्रसाद का नाम लेते हैं, पर न चिट्ठी है, न पता ठीक से याद। इसी बीच पड़ोसी फिर शिकायत लेकर आता है कि मेहमानों ने उसकी छत पर पानी फैला दिया। अंततः विश्वनाथ के बेटे प्रमोद की बात से पता चलता है कि वे वस्तुतः पिछली गली के ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए। भूल समझते ही दोनों ‘राम-राम’ कहकर चले जाते हैं।

तभी नीचे से आवाज आती है – यह रेवती का असली भाई (आगंतुक) है, जो झाँसी से तार भेजकर आया था, पर तार समय पर न मिलने के कारण घंटों मकान ढूँढ़ता रहा। थका हुआ भाई कहता है कि इस गरमी में खाना रहने दो, वह केवल पानी पीकर सो जाएगा। पर रेवती, जो थोड़ी देर पहले मेहमानों के लिए खाना बनाने से इनकार कर रही थी, अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है – “भैया भूखे नहीं सो सकते।” इस प्रकार यह एकांकी हास्य के साथ-साथ शहरी मध्यवर्ग की कठिनाइयों और भारतीय आतिथ्य-भाव की विशेषताओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

पात्र और घटना समझें

पात्रपाठ में भूमिका
विश्वनाथगृहपति, छोटे किराए के घर में रहने वाले
रेवतीविश्वनाथ की पत्नी; गरमी और सिरदर्द से परेशान
नन्हेमल और बाबूलालबिजनौर से आए अतिथि; गलत घर पहुँचते हैं
प्रमोद और किरणविश्वनाथ के बच्चे; संवादों में पानी/पंखे आदि का सहयोग
पड़ोसीअपनी छत पर पानी फैलने की शिकायत करता है
आगंतुकरेवती का भाई; झाँसी से तार भेजता है

एक छोटा सोता बच्चा और उषा का उल्लेख भी आता है। सभी बच्चों को केवल दो घोषित पात्रों तक सीमित न मानें। अंत में जाने का सही स्थान ‘कविराज रामलाल वैद्य’ पहचाना जाता है। यह मूल कथा की गलत पहचान का खुलना है, अपराध की सिद्ध योजना नहीं।

छोटे शहरी कमरे में उलझन में विश्वनाथ और बिस्तर-संदूक लिए नन्हेमल-बाबूलाल का कल्पनात्मक दृश्य
‘नए मेहमान’ की गलत पहचान वाली स्थिति पर आधारित AI कथा-दृश्य। पात्रों की वेशभूषा और सामान पाठ के संकेतों से प्रेरित हैं; यह वास्तविक मंचन का फोटो या लेखक के घर का दृश्य नहीं।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
एकांकीएक ही अंक वाला छोटा नाटक
गृहपतिघर का स्वामी, घर का मुखिया
आगंतुकआने वाला व्यक्ति, अतिथि
ऋतुमौसम, समय-विशेष
भट्टीआग जलाने का चूल्हा; अत्यधिक गरम स्थान
जेलखानाकारागार, बंदीगृह (यहाँ – घुटन भरा घर)
सुकुमारकोमल, सुंदर एवं नाजुक
संपन्नधनवान, समृद्ध
ठगधोखा देकर लूटने वाला
निचोड़नादबाकर रस/पानी निकालना
बंडीबिना बाँह की छोटी जैकेट/कुरती
अंटीकमर में धोती की गाँठ जहाँ रुपये रखे जाते हैं
हबड़-तबड़हड़बड़ी, जल्दबाजी एवं अव्यवस्था
सकपकानाघबरा जाना, झेंप जाना
खीझनाझल्ला जाना, चिढ़ जाना
कदाचितशायद, संभवतः
नेपथ्यरंगमंच के पीछे का भाग; पर्दे के पीछे से आती आवाज
यवनिकारंगमंच का परदा (परदा गिरना – दृश्य की समाप्ति)
तारटेलीग्राफ द्वारा शीघ्र भेजा जाने वाला संदेश
धर्मशालायात्रियों के ठहरने का निःशुल्क/सस्ता स्थान
आतिथ्यअतिथि का सत्कार, मेहमाननवाजी
प्रकोपतीव्रता, उग्रता (गरमी का प्रकोप)

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?

• अतिथियों की सेवा करने के कारण

• किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण

• आज्ञाकारिता के भाव के कारण

• गरमी को चुपचाप सहने के कारण

उत्तरसर्वाधिक उपयुक्त उत्तर ★ ‘अतिथियों की सेवा करने के कारण’ तथा ★ ‘किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण’ हैं।बच्चे चुपचाप पानी और बरफ लाते रहे, बिना यह पूछे कि ये मेहमान कौन हैं और क्यों आए हैं। उनकी इसी सरल, सेवाभावी और प्रश्न न करने वाली प्रवृत्ति को देखकर नन्हेमल ने उन्हें ‘सीधे लड़के’ कहा।

2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?

• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं

• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं

• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं

• अतिथियों का अपमान करते हैं

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं’ तथा ★ ‘पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं’ हैं।पड़ोसी खाली पड़ी छत पर भी बच्चों के लिए एक खाट नहीं बिछाने देते और दूसरों को मुसीबत में देखकर खुश होते हैं। इसी असहयोगी एवं स्वार्थी व्यवहार के कारण विश्वनाथ ने उन्हें निर्दयी कहा।

3. “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?

• मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण

• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण

• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण

• उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ पहले तीनों हैं – ‘ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण’, ‘स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण’ तथा ‘घर का कार्य बढ़ जाने के कारण’।छोटे, गरम मकान में जगह की कमी है, रेवती पंद्रह दिन से सिरदर्द से परेशान है और गरमी में मेहमान के लिए भोजन बनाना उसके लिए और कष्टकर है – इसीलिए वह ऐसी कामना करती है।

4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

• पानी की कमी होने की

• पड़ोसियों के चिल्लाने की

• मेहमानों के आने की

• गरमी के कारण बीमारी की

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘मेहमानों के आने की’ है।जैसे ही दरवाजा खटखटाता है, रेवती के मन में डर बैठ जाता है कि कहीं कोई मेहमान न आ गया हो, क्योंकि ऐसी गरमी और बीमारी की हालत में मेहमान का आना उसके लिए बड़ी मुसीबत होगी।

5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

• संवाद

• कथा

• वर्णन

• मंचन

उत्तरउपयुक्त उत्तर ★ ‘संवाद’ तथा ★ ‘मंचन’ हैं।नाटक या एकांकी मुख्यतः पात्रों के संवादों से आगे बढ़ता है और मंच पर अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इसी एकांकी में भी पूरी कथा विश्वनाथ, रेवती, मेहमानों आदि के संवादों के माध्यम से ही खुलती है।

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (संकेत)यह कक्षा-गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी एकांकी के संवादों और घटनाओं से उदाहरण देते हुए अपने चुने उत्तर का कारण बताए।चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि एक ही प्रश्न के एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं और सबके तर्क सुनकर हमारी समझ और गहरी हो जाती है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियों का अर्थ नीचे दिया गया है।

1. “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

अर्थगरमी इतनी अधिक है कि बार-बार पानी पीने पर भी प्यास नहीं बुझती; पेट पानी से भर जाता है पर शरीर की तपन और प्यास ज्यों-की-त्यों बनी रहती है। यह पंक्ति गरमी की भीषणता को दर्शाती है।

2. “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

अर्थपूरे शहर में इतनी तेज गरमी और लू है, मानो आसमान से आग बरस रही हो। यह अतिशयोक्ति गरमी की तीव्रता को सजीव रूप से प्रकट करती है।

3. “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

अर्थगरीब लोग गरमी से बचने के लिए कहीं नहीं जा सकते और चने के समान भट्ठी (भाड़) में भुनते रहते हैं। इस पंक्ति में गरीबों की विवशता और भीषण गरमी की पीड़ा झलकती है।

4. “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

अर्थठंडा पानी पीते ही गरमी से व्याकुल व्यक्ति को राहत मिल जाती है, मानो उसमें फिर से जान आ गई हो। यह पंक्ति बताती है कि भीषण गरमी में पानी ही जीवनदायी है।

मिलकर करें मिलान

पृष्ठ 118 के दाएँ स्तंभ के मूल क्रमांक के अनुसार:

बाएँ क्रमांक / पंक्तिदाएँ क्रमांकभाव
1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए3समृद्ध व्यक्ति बरबाद हो गए
2. धोती चर्रा रही है4पसीने से कपड़ा पुराने जैसा हो गया
3. माल-मसाला अंटी में5धन सुरक्षित है न?
4. खाने में देर-दार1भोजन कब तक तैयार होगा?
5. पहले आत्मा फिर परमात्मा2पहले अपना ध्यान, फिर दूसरा काम

कुंजी: 1→3, 2→4, 3→5, 4→1, 5→2।

सोच-विचार के लिए

(क) ‘ऐसे ही मकान’

नन्हेमल उस छोटे शहरी घर का अनुमान लगाते हैं—कमरा, पीछे आँगन और ऊपर छत। यह पात्र का सामान्यीकरण है; सभी वर्तमान शहरी घर ऐसे हैं, इसका प्रमाण नहीं।

(ख) पड़ोसी की शिकायत

मेहमानों ने उसकी छत पर गंदा पानी फैलाया और पहले एक मेहमान उसकी खाट पर लेटा था। राय का नमूना: स्वच्छता और अपने स्थान की चिंता उचित है, पर ताने देने के बजाय शांत बातचीत उपयोगी होती। दूसरे तर्क भी स्वीकार्य हैं।

(ग) अनजान अतिथियों को आने देना

मेहमान परिचित होने जैसा व्यवहार करते हैं। संकोच, किसी जानने वाले द्वारा भेजे होने की संभावना और आतिथ्य की भावना से विश्वनाथ स्पष्ट मना नहीं कर पाते। यह पात्र की दुविधा है, अनजान व्यक्ति को बिना परिचय घर में बुलाने का नियम नहीं।

(घ) अपरिचय के संवाद

विश्वनाथ: ‘मैं संपतराम को नहीं जानता।’ रेवती: ‘ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।’ विश्वनाथ: ‘न जाने कौन हैं।’ बाद में मेहमान जिन्हें मिलने आए उनका नाम/काम ठीक से याद नहीं कर पाते; अंत में गलत घर का पता चलता है।

(ङ) गरमी की पंक्तियाँ

‘मकान है कि भट्टी!’ ‘पत्ता तक नहीं हिल रहा है।’ ‘सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।’ ‘चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।’ इनमें बिंब और अतिशयोक्ति से गरमी का प्रभाव प्रकट है।

अनुमान और कल्पना से

(क) विश्वनाथ ने स्वयं भोजन क्यों नहीं बनाया?

अनुमान: घरेलू काम की पारंपरिक बाँट या अनुभव की कमी कारण हो सकते हैं। उनका निश्चित निजी कारण पाठ नहीं बताता। पत्नी के स्वास्थ्य और सभी सदस्यों की सुविधा के लिए भोजन का काम साझा करना उचित विकल्प है।

(ख) प्रमोद के उत्तरदायित्व

बड़ा बच्चा होने और माता-पिता व्यस्त होने से उसे पानी/बरफ लाने और छोटी बहन का ध्यान रखने के छोटे काम दिए होंगे। पुस्तक में उषा के रोने पर उसका सहयोग भी आता है। बच्चों का सहयोग आयु और सुरक्षा के अनुसार हो; सारी देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर न डालें।

(ग) भाई के लिए भोजन

भाई का परिचय स्पष्ट और उससे अपनापन है; रेवती उसे भूखा सुलाना नहीं चाहतीं। यह उनका स्नेहपूर्ण निर्णय है। अस्वस्थ व्यक्ति को हमेशा अपनी तकलीफ अनदेखी करके सेवा करनी चाहिए, ऐसा संदेश नहीं।

(घ) सर्दी और वर्षा के वाक्य — नौ नमूने

ये रचनात्मक रूपांतरण हैं, मूल एकांकी के संवाद नहीं।

क्रम / गरमी का संकेतसर्दीवर्षा
1. गरमी में भुन रहा हैसर्दी में जम गया।वर्षा में भीग रहा है।
2. बरफ कहाँ तक पिएरजाई कहाँ तक ओढ़े।छाता कहाँ तक थामे।
3. आग बरस रही होमानो शहर बर्फ में डूबा हो।मानो आसमान फट पड़ा हो।
4. प्यास नहीं बुझतीठिठुरन नहीं मिटती।बरसात नहीं थमती।
5. दीवारें तप रही हैंदीवारें ठंडी पड़ी हैं।दीवारें सीली पड़ी हैं।
6. ठंडा पानी, प्राण सूखेगरम पानी दो, हाथ जम रहे हैं।सूखा कपड़ा दो, शरीर भीग गया है।
7. गरमी में पानी जान हैसर्दी में गरम कपड़ा राहत है।बरसात में सुरक्षित आश्रय राहत है।
8. भाड़ में चने-सा भुननामानो हिम में ठिठुरते हैं।मानो बादलों के नीचे नहाते हैं।
9. पसीने से नहा गयाठंड से काँप गया।बारिश से भीग गया।

एकांकी की रचना

एकांकी एक प्रकार का नाटक है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है और किसी कहानी या घटना को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिए जाते हैं; कोष्ठक में दिए गए संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं और पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं।

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर (संकेत)(1) पूरी कथा एक ही स्थान (विश्वनाथ का घर) पर एक ही रात में घटित होती है।(2) कथा मुख्यतः संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।(3) आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिया गया है।(4) कोष्ठक में रंगमंच-निर्देश, अभिनय-संकेत और वेशभूषा संबंधी निर्देश हैं।(5) पात्रों की संख्या सीमित है तथा इसमें हास्य के साथ एक रोचक कहानी छिपी है।

(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ और जो सही नहीं लग रहे, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।

उत्तर
वाक्यहाँ/नहीं
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है।हाँ
2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है।नहीं
3. एकांकी में एक कहानी छिपी है।हाँ
4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है।नहीं
5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं।नहीं
6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है।हाँ
7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं।हाँ

अभिनय की बारी

(क) यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?

उत्तर (संकेत)सबसे पहले पात्रों का चयन करूँगा – विश्वनाथ, रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल, प्रमोद, किरण, पड़ोसी और आगंतुक।मंच पर एक साधारण कमरा सजाऊँगा – मेज, दो कुर्सियाँ, एक पलंग/खाट और एक पंखा रखूँगा; पात्रों की वेशभूषा (कुरता-धोती, साड़ी, बंडी-पगड़ी आदि) तैयार करूँगा।रोचक बनाने के लिए गरमी का प्रभाव दिखाने हेतु पसीना पोंछना, पंखा झलना जैसे अभिनय और हल्का हास्य जोड़ूँगा; संवादों का अभ्यास कराऊँगा और प्रकाश-ध्वनि की व्यवस्था करूँगा। (विद्यार्थी अपने विचार जोड़ें।)

(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। कौन किस पात्र का अभिनय करेगा, यह तय कीजिए।

उत्तरयह व्यावहारिक समूह-गतिविधि है। विद्यार्थी आपस में पात्र बाँट लें, संवाद याद करें और शिक्षक द्वारा निर्धारित समय (जैसे 10–15 मिनट) में बारी-बारी से एकांकी का मंचन करें।स्थान की कमी हो तो अपने स्थान पर खड़े होकर भी संवाद बोले जा सकते हैं और चाहें तो अभिनय को रिकॉर्ड करके परिवार के साथ साझा किया जा सकता है।

भाषा की बात

शब्दों से विशेष प्रभाव

‘मकान है कि भट्टी’, ‘शरीर… उबल उठा’, ‘होंठ सूख रहे हैं’ जैसे प्रयोग गरमी का तीव्र अनुभव दिखाते हैं। ‘जेलखाने’ में घर की घुटन का लाक्षणिक भाव है, वास्तविक जेल नहीं।

मुहावरे — अर्थ और अपना वाक्य

मुहावराअर्थनमूना वाक्य
दिन-रात एक करनाबहुत मेहनत करनादल ने प्रदर्शनी तैयार करने में दिन-रात एक कर दिया।
खाक में मिलनाबरबाद होनाआग में उसका सामान खाक में मिल गया।
जान में जान आनाराहत मिलनाखोया साथी मिल गया तो जान में जान आई।
प्राण सूखनाबहुत घबराना/व्याकुल होनादुर्घटना की खबर सुनकर हमारे प्राण सूख गए।
धुन सवार होनाकिसी बात में बहुत लग जानाउसे बाँसुरी सीखने की धुन सवार हो गई।

बात पर बल देना — ‘ही’

(क) ‘मैं भी ढूँढ़कर ही रहा’ में यह जोर है कि बिना खोजे नहीं छोड़ा/अंततः खोज लिया। ‘ही’ हटाने पर यह जोर कम होता है। (ख) तीन अर्थ:

  1. विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे। — किसी और के नहीं
  2. विश्वनाथ के अतिथि यहीं रुकेंगे। — कहीं और नहीं
  3. विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही। — रुकना निश्चित

‘तो’ का स्थान

‘तुम नहाने तो जाओ’—पहले नहाने के आग्रह पर जोर। ‘तुम तो नहाने जाओ’—तुम पर विशेष बल। ‘तुम नहाने जाओ तो’—संदर्भ अनुसार आग्रह/शर्त का अधूरा रूप; जैसे ‘तुम जाओ तो मैं कमरा ठीक करूँ’। अपने वाक्य: ‘मैं ही यह काम करूँगा।’ ‘पहले बात सुन तो लो।’

आपकी बात

(क) “रेवती – ये लोग कौन हैं? … विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।” इस संवाद से विश्वनाथ की दुविधा प्रकट होती है। क्या आपके सामने कभी ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है? अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर (संभावित)हाँ, एक बार मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि अपने मित्र की गलती मैं शिक्षक को बताऊँ या नहीं – बताने पर मित्रता बिगड़ने का डर था और न बताने पर सच छिपाने जैसा लगता था।अंत में मैंने मित्र को समझाकर स्वयं सच स्वीकार करने को कहा। ऐसी दुविधा में धैर्य से सोचना और बड़ों से सलाह लेना उचित रहता है। (विद्यार्थी अपना अनुभव लिखें।)

(ख) एकांकी से लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?

उत्तर (संभावित)मेरे अच्छे मित्र मेरे सहपाठी हैं, जो सुख-दुख में मेरा साथ देते हैं। वे मुझे इसलिए प्रिय हैं क्योंकि वे ईमानदार, सहयोगी और भरोसेमंद हैं तथा कठिनाई में मेरी मदद करते हैं। (विद्यार्थी अपने मित्रों के नाम व गुण लिखें।)

(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?

उत्तरजाने से पहले फोन/संदेश द्वारा उन्हें सूचित करता हूँ ताकि उन्हें असुविधा न हो; आवश्यक कपड़े और सामान व्यवस्थित कर लेता हूँ।यदि रुकना हो तो अपनी आवश्यक वस्तुएँ साथ ले जाता हूँ और छोटे बच्चों या बड़ों के लिए कुछ उपहार ले जाने का प्रयास करता हूँ, ताकि अनावश्यक रूप से मेजबान पर बोझ न पड़े।

(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?

उत्तरमैं अपने पड़ोसियों से मिल-जुलकर रहता हूँ; उनके बीमार या बाहर जाने पर उनके घर का ध्यान रखता हूँ।आवश्यकता पड़ने पर सामान, औज़ार या जानकारी साझा करता हूँ और किसी उत्सव या कठिनाई में उनकी मदद करता हूँ – इसी से पड़ोस में सद्भाव बना रहता है।

(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?

उत्तरअतिथियों को मेजबान के घर जाने से पहले सूचना देनी चाहिए और बिना बुलाए या गलत पते पर नहीं जाना चाहिए।उन्हें संयमित, विनम्र और संतोषी होना चाहिए – अनावश्यक माँगें न करें, मेजबान की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखें और कम-से-कम कष्ट दें। अतिथि का व्यवहार ऐसा हो कि उसका आना मेजबान को बोझ नहीं, प्रसन्नता लगे।

सावधानी और सुरक्षा

(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?

उत्तरमैं पहले द्वार पर ही उनसे उनका नाम, परिचय और आने का कारण विनम्रता से पूछता।यह जानने का प्रयास करता कि वे किसके भेजे हुए हैं और किसके यहाँ जाना चाहते हैं; संतुष्ट होने पर ही उन्हें भीतर आने देता। अनजान व्यक्ति को बिना जाँच-पड़ताल के घर में ठहराना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

उत्तरदरवाजा खोलने से पहले पहचान करूँगा और जंजीर/पीप-होल का उपयोग करूँगा।अपरिचित को घर के भीतर नहीं आने दूँगा; उसका नाम-काम पूछकर माता-पिता को फोन से सूचित करूँगा।किसी संदेह की स्थिति में पड़ोसी या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को बुला लूँगा और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को सूचना दूँगा। अपनी व घर की जानकारी अजनबी को नहीं दूँगा।

सृजन / पाठ से आगे

सृजन — कहानी अपने शब्दों में

नमूना: गरमी की रात में परिवार छोटे घर की कठिनाइयों से परेशान था। दो अनजान अतिथि आए और परिचित मानकर पानी तथा भोजन माँगने लगे। पूछने पर उनके उत्तर स्पष्ट न हुए। अंत में वे रामलाल वैद्य का घर खोज रहे थे, यह पता चला। वे चले गए तो रेवती का भाई पहुँचा। रेवती उसके लिए भोजन बनाने लगीं। संवाद, गलत पहचान और अंतिम मोड़ से हास्य पैदा होता है। अपना विवरण सार के आधार पर विस्तार दें।

गरमी का प्रकोप

पाँच विद्यार्थियों के समूह में पढ़े सुझावों का पोस्टर बनाएँ। सरकारी मार्गदर्शन के मुख्य संकेत: तेज धूप के समय बाहर जाने से बचें, पर्याप्त सुरक्षित पानी पिएँ, हल्के ढीले सूती वस्त्र पहनें और बाहर सिर ढकें। NDMA के सुझावों पर महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पृष्ठ देखें। यह स्वास्थ्य-संबंधी जागरूकता का कार्य है; गरमी से अस्वस्थ होने पर वयस्क को बताएँ और उचित सहायता लें।

तार से संदेश — चार कार्य

(क) केवल ‘तार’ से रचना का सटीक वर्ष या ‘70–80 साल पहले’ तय नहीं होता। इतना अनुमान उचित है कि इसमें तार के प्रचलन वाले समय का परिवेश है। लेखक का जीवन 1898–1966 पुस्तक में दिया है; रचना की तारीख अलग स्रोत से खोजनी होगी। (ख) आज फोन, एसएमएस, ईमेल, वीडियो-कॉल और संदेश-ऐप सुलभ साधन हो सकते हैं। (ग) अपना सबसे अधिक प्रयुक्त माध्यम और उसका कारण लिखें। (घ) प्रिय व्यक्ति को संबोधन, अपनी खबर, उनका हाल और नाम/तारीख वाला पत्र लिखें; अभिभावक की सहायता से सही पते पर डाक से भेजने की प्रक्रिया सीखें। उदाहरण पत्र को सचमुच भेजा हुआ न बताएँ।

नाप, तौल और मुद्राएँ

प्रश्नउत्तर
(क) एक रुपये में आनेपुरानी प्रणाली में 16 आने
(ख) चार आने में पैसे1 आना = 4 पुराने पैसे (pice), अतः 4 आने = 16 पुराने पैसे। दशमलव प्रणाली में रुपये के चौथाई भाग का समतुल्य 25 नए पैसे है। दोनों इकाइयों को न मिलाएँ।
(ग) ‘गज’ का स्थानीय प्रयोगनमूना: कपड़े की लंबाई मापना। अपने आसपास पूछकर वास्तविक संदर्भ लिखें।
(घ) एक गज में फीटमानक yard वाले अर्थ में 3 फीट (0.9144 मीटर)

पुरानी मुद्रा का संदर्भ: PIB — दशमलव सिक्कों का इतिहास। आधुनिक और पुराने ‘पैसे’ अलग इकाइयाँ हैं।

झरोखे से — निराला का आतिथ्य

पृष्ठ 125 पर महादेवी वर्मा की ‘पथ के साथी’ से निराला के सत्कार का अंश है। सामान कम होने पर भी निराला अतिथि के लिए स्वयं तैयारी करते हैं। लेखिका दिखावटी सामाजिक व्यवहार से उसकी तुलना करती हैं। ‘नए मेहमान’ में अपरिचय और असुविधा का हास्य है; यहाँ परिचित साहित्यकार का स्नेहपूर्ण सत्कार।

साझी समझ

अपनी भाषा में स्वागत का नमूना: ‘नमस्ते, आपका स्वागत है। सफर कैसा रहा?’ अपने क्षेत्र का एक व्यंजन चुनें और क्यों खिलाना चाहेंगे बताएँ। भोजन अतिथि की पसंद और सुविधा के अनुसार हो।

खोजबीन

पुस्तकालय/शिक्षक से ‘आना’, ‘गज’ और ‘तार’ के पुराने उपयोग खोजें। स्रोत और इकाई/काल लिखें; इनके आधुनिक दूसरे अर्थ से भ्रम न करें।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

अति लघु / लघु उत्तरीय

1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?

उत्तरइसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं और इसकी विधा एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है।

2. एकांकी का दृश्य कहाँ और किस समय का है?

उत्तरदृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की रात लगभग आठ बजे का है, जो विश्वनाथ के छोटे किराये के मकान में घटित होता है।

3. विश्वनाथ के घर अनजाने में आए दोनों मेहमानों के क्या नाम हैं?

उत्तरदोनों मेहमानों के नाम नन्हेमल (बड़ा) और बाबूलाल (छोटा) हैं।

4. अंत में पता चलता है कि मेहमान वास्तव में किसके यहाँ जाना चाहते थे?

उत्तरवे वास्तव में पिछली गली में रहने वाले ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए थे।

5. रेवती अंत में अपने भाई के लिए खाना बनाने को तुरंत क्यों तैयार हो जाती है?

उत्तरआगंतुक उसका सगा भाई है; अपने भाई के प्रति स्नेह और इस भाव से कि “भैया भूखे नहीं सो सकते”, वह थकान और सिरदर्द भुलाकर खाना बनाने को तैयार हो जाती है।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘नए मेहमान’ एकांकी किस प्रकार शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरएकांकी में विश्वनाथ का परिवार किराये के छोटे, बंद और तपते मकान में रहता है, जहाँ हवा-पानी की कमी और भीषण गरमी से सब बेहाल हैं।मकान दो साल से ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलता, छत इतनी छोटी है कि बच्चे समा नहीं पाते और निर्दयी पड़ोसी जरा-सा सहयोग भी नहीं करता।नौकर नहीं टिकता, बीमारी का भय बना रहता है और ऊपर से अनचाहे मेहमान आ जाते हैं – जिनका सत्कार करना भी विवशता बन जाता है।इस प्रकार लेखक ने हास्य के साथ शहरी मध्यवर्गीय जीवन की आर्थिक तंगी, आवास-समस्या और सामाजिक दबावों को बड़े यथार्थपूर्ण ढंग से उजागर किया है।

7. इस एकांकी में भारतीय आतिथ्य-भाव किस रूप में प्रकट हुआ है? उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तरभारतीय संस्कृति में ‘अतिथि देवो भव’ की भावना है। विश्वनाथ अपरिचित मेहमानों को भी संकोचवश घर में आने और ठहरने देता है तथा उनके लिए पानी, बरफ और भोजन की व्यवस्था करने को कहता है।यद्यपि गरमी और बीमारी में यह कठिन है, फिर भी मेहमान को भूखा-प्यासा लौटाना उन्हें अशिष्ट लगता है।सबसे स्पष्ट उदाहरण अंत में मिलता है, जब रेवती सिरदर्द के बावजूद अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है। इस प्रकार एकांकी भारतीय परिवारों के सहज आतिथ्य और त्याग-भाव को दर्शाती है।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) उदयशंकर भट्ट

(ग) महादेवी वर्मा

(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

उत्तर(ख) उदयशंकर भट्ट।

2. विश्वनाथ की पत्नी का क्या नाम है?

(क) किरण

(ख) उषा

(ग) रेवती

(घ) महादेवी

उत्तर(ग) रेवती।

3. एकांकी में ‘यवनिका’ शब्द का क्या अर्थ है?

(क) रंगमंच का परदा

(ख) पात्र-परिचय

(ग) संवाद

(घ) पंखा

उत्तर(क) रंगमंच का परदा (परदा गिरने का अर्थ – दृश्य/एकांकी की समाप्ति)।

4. रेवती का भाई (आगंतुक) कहाँ से और किस माध्यम से सूचना भेजकर आया था?

(क) बिजनौर से, पत्र द्वारा

(ख) झाँसी से, तार द्वारा

(ग) मुरादाबाद से, फोन द्वारा

(घ) शिमला से, तार द्वारा

उत्तर(ख) झाँसी से, तार द्वारा (किंतु तार समय पर नहीं मिला)।

5. नन्हेमल और बाबूलाल कहाँ से आए थे?

(क) झाँसी

(ख) मुरादाबाद

(ग) बिजनौर

(घ) लखनऊ

उत्तर(ग) बिजनौर।

6. एकांकी की मुख्य पृष्ठभूमि (मौसम) क्या है?

(क) कड़ाके की सर्दी

(ख) मूसलाधार वर्षा

(ग) भीषण गरमी

(घ) सुहावना बसंत

उत्तर(ग) भीषण गरमी।

7. पड़ोसी की विश्वनाथ से मुख्य शिकायत क्या थी?

(क) तेज आवाज में रेडियो बजाना

(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर पानी फैलाना

(ग) किराया न देना

(घ) बच्चों का शोर मचाना

उत्तर(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर गंदा पानी फैलाना।

8. विश्वनाथ का बड़ा बेटा, जो मेहमानों के लिए पानी-बरफ लाता है, उसका नाम क्या है?

(क) प्रमोद

(ख) बाबूलाल

(ग) नन्हेमल

(घ) भैरों

उत्तर(क) प्रमोद।

9. किसी रचना को मुख्य रूप से नाटक/एकांकी का रूप कौन-सी बात देती है?

(क) वर्णन

(ख) संवाद एवं मंचन

(ग) लंबे अनुच्छेद

(घ) कविता

उत्तर(ख) संवाद एवं मंचन।

10. कोष्ठक में दिए गए अभिनय/स्थान-समय संबंधी संकेतों को क्या कहते हैं?

(क) संवाद

(ख) रंगमंच-निर्देश

(ग) पात्र-परिचय

(घ) सार

उत्तर(ख) रंगमंच-निर्देश।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(क), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ग), 7-(ख), 8-(क), 9-(ख), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): रेवती मन ही मन कामना करती है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए।

कारण (R): छोटे गरम मकान में जगह की कमी है और वह स्वयं भी बीमार एवं थकी हुई है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ के घनिष्ठ परिचित मित्र थे।

कारण (R): वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर बहुत अपनेपन से बातें करते थे।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है। वे केवल अपनेपन से बातें करते थे, परिचित बिलकुल नहीं थे – वस्तुतः वे गलत घर आ गए थे।

3. अभिकथन (A): रेवती अंत में अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है।

कारण (R): भाई के प्रति स्नेह से वह भोजन बनाना चाहती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): एकांकी की पूरी कथा एक ही स्थान और एक ही रात में घटित होती है।

कारण (R): एकांकी में केवल एक ही अंक होता है, जिसमें घटना संक्षेप में दिखाई जाती है।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। एक अंक होने से समय/स्थान की एकता अपने-आप अनिवार्य नहीं; इस विशेष एकांकी के दृश्य में वे एक हैं।

5. अभिकथन (A): विश्वनाथ अपरिचित होने पर भी मेहमानों को घर से तुरंत नहीं निकालता।

कारण (R): भारतीय संस्कृति में अतिथि का सत्कार महत्त्वपूर्ण माना जाता है और संकोचवश वह इनकार नहीं कर पाता।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘नए मेहमान’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?

‘नए मेहमान’ एक एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है, जिसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं।

‘नए मेहमान’ एकांकी का मुख्य कथानक क्या है?

गरमी की एक रात विश्वनाथ के छोटे शहरी घर में दो अपरिचित मेहमान (नन्हेमल और बाबूलाल) गलती से चढ़ आते हैं। बाद में पता चलता है कि वे पड़ोस के कविराज वैद्य के यहाँ जाना चाहते थे। उनके जाते ही रेवती का असली भाई आ पहुँचता है।

इस एकांकी से क्या संदेश मिलता है?

यह एकांकी हास्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की आवास-समस्या एवं कठिनाइयों को उजागर करती है और भारतीय आतिथ्य-भाव (अतिथि देवो भव) तथा अपनों के प्रति स्नेह को दर्शाती है।

एकांकी में ‘रंगमंच-निर्देश’ और ‘संवाद’ क्या होते हैं?

कोष्ठक में दिए गए स्थान, समय एवं अभिनय संबंधी संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं, जबकि पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं। एकांकी की कथा मुख्यतः संवादों से ही आगे बढ़ती है।

प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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