कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 8 — नए मेहमान प्रश्न उत्तर और सार
नए मेहमान प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 8 की एकांकी का सार, पात्र, शब्दार्थ, अभ्यास, संवाद, मुहावरे, ही–तो और पाठ से आगे की गतिविधियाँ पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 8 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 105–125, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
लेखक परिचय – उदयशंकर भट्ट
इस एकांकी के लेखक उदयशंकर भट्ट (1898–1966) हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। परिवार में साहित्यिक वातावरण होने के कारण इनकी रुचि आरंभ से ही साहित्य में अधिक थी। इन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे तथा नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। यद्यपि इन्होंने कविता और उपन्यास भी लिखे, किंतु नाटक एवं एकांकी के क्षेत्र में इन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली। इनका लोक-परलोक उपन्यास तथा पर्दे के पीछे एकांकी-संग्रह बहुत चर्चित रहे। हिंदी एकांकी को लोकप्रिय बनाने वाले रचनाकारों में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नए मेहमान’ एकांकी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं और भारतीय आतिथ्य-भाव का जीवंत चित्रण किया है।
पाठ का सार
‘नए मेहमान’ एकांकी का दृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की एक रात आठ बजे का है। विश्वनाथ (गृहपति) किराये के एक छोटे, बंद और तपते मकान में अपनी पत्नी रेवती और बच्चों के साथ रहता है। भीषण गरमी से सब बेहाल हैं – पुराना पंखा हवा कम देता है, पानी से प्यास नहीं बुझती और छत इतनी छोटी है कि सब बच्चे समा नहीं पाते। निर्दयी पड़ोसी खाली छत पर भी खाट नहीं बिछाने देता। दोनों पति-पत्नी सोने की व्यवस्था को लेकर बहस ही कर रहे होते हैं कि रेवती कह उठती है – “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।”
तभी दरवाजा खटखटाता है और दो अपरिचित व्यक्ति – नन्हेमल और बाबूलाल – बिस्तर तथा संदूक लेकर घर में घुस आते हैं। वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर इतने अपनेपन से बातें करते हैं, मानो वर्षों से परिचित हों। वे ठंडा पानी, नहाने का प्रबंध और भोजन माँगते हैं और बार-बार कहते हैं कि वे ‘घर के ही’ हैं। विश्वनाथ संकोचवश उन्हें रोक नहीं पाता, यद्यपि वह उन्हें पहचानता ही नहीं।
विश्वनाथ और रेवती परेशान हो जाते हैं – सिर में दर्द, गरमी और ऊपर से अतिथियों का भोजन! पूछताछ करने पर मेहमान गोलमोल उत्तर देते हैं – कभी संपतराम, कभी जगदीशप्रसाद का नाम लेते हैं, पर न चिट्ठी है, न पता ठीक से याद। इसी बीच पड़ोसी फिर शिकायत लेकर आता है कि मेहमानों ने उसकी छत पर पानी फैला दिया। अंततः विश्वनाथ के बेटे प्रमोद की बात से पता चलता है कि वे वस्तुतः पिछली गली के ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए। भूल समझते ही दोनों ‘राम-राम’ कहकर चले जाते हैं।
तभी नीचे से आवाज आती है – यह रेवती का असली भाई (आगंतुक) है, जो झाँसी से तार भेजकर आया था, पर तार समय पर न मिलने के कारण घंटों मकान ढूँढ़ता रहा। थका हुआ भाई कहता है कि इस गरमी में खाना रहने दो, वह केवल पानी पीकर सो जाएगा। पर रेवती, जो थोड़ी देर पहले मेहमानों के लिए खाना बनाने से इनकार कर रही थी, अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है – “भैया भूखे नहीं सो सकते।” इस प्रकार यह एकांकी हास्य के साथ-साथ शहरी मध्यवर्ग की कठिनाइयों और भारतीय आतिथ्य-भाव की विशेषताओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।
पात्र और घटना समझें
| पात्र | पाठ में भूमिका |
|---|---|
| विश्वनाथ | गृहपति, छोटे किराए के घर में रहने वाले |
| रेवती | विश्वनाथ की पत्नी; गरमी और सिरदर्द से परेशान |
| नन्हेमल और बाबूलाल | बिजनौर से आए अतिथि; गलत घर पहुँचते हैं |
| प्रमोद और किरण | विश्वनाथ के बच्चे; संवादों में पानी/पंखे आदि का सहयोग |
| पड़ोसी | अपनी छत पर पानी फैलने की शिकायत करता है |
| आगंतुक | रेवती का भाई; झाँसी से तार भेजता है |
एक छोटा सोता बच्चा और उषा का उल्लेख भी आता है। सभी बच्चों को केवल दो घोषित पात्रों तक सीमित न मानें। अंत में जाने का सही स्थान ‘कविराज रामलाल वैद्य’ पहचाना जाता है। यह मूल कथा की गलत पहचान का खुलना है, अपराध की सिद्ध योजना नहीं।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| एकांकी | एक ही अंक वाला छोटा नाटक |
| गृहपति | घर का स्वामी, घर का मुखिया |
| आगंतुक | आने वाला व्यक्ति, अतिथि |
| ऋतु | मौसम, समय-विशेष |
| भट्टी | आग जलाने का चूल्हा; अत्यधिक गरम स्थान |
| जेलखाना | कारागार, बंदीगृह (यहाँ – घुटन भरा घर) |
| सुकुमार | कोमल, सुंदर एवं नाजुक |
| संपन्न | धनवान, समृद्ध |
| ठग | धोखा देकर लूटने वाला |
| निचोड़ना | दबाकर रस/पानी निकालना |
| बंडी | बिना बाँह की छोटी जैकेट/कुरती |
| अंटी | कमर में धोती की गाँठ जहाँ रुपये रखे जाते हैं |
| हबड़-तबड़ | हड़बड़ी, जल्दबाजी एवं अव्यवस्था |
| सकपकाना | घबरा जाना, झेंप जाना |
| खीझना | झल्ला जाना, चिढ़ जाना |
| कदाचित | शायद, संभवतः |
| नेपथ्य | रंगमंच के पीछे का भाग; पर्दे के पीछे से आती आवाज |
| यवनिका | रंगमंच का परदा (परदा गिरना – दृश्य की समाप्ति) |
| तार | टेलीग्राफ द्वारा शीघ्र भेजा जाने वाला संदेश |
| धर्मशाला | यात्रियों के ठहरने का निःशुल्क/सस्ता स्थान |
| आतिथ्य | अतिथि का सत्कार, मेहमाननवाजी |
| प्रकोप | तीव्रता, उग्रता (गरमी का प्रकोप) |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
• अतिथियों की सेवा करने के कारण
• किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
• आज्ञाकारिता के भाव के कारण
• गरमी को चुपचाप सहने के कारण
2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
• अतिथियों का अपमान करते हैं
3. “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
• मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
• उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
• पानी की कमी होने की
• पड़ोसियों के चिल्लाने की
• मेहमानों के आने की
• गरमी के कारण बीमारी की
5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
• संवाद
• कथा
• वर्णन
• मंचन
(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियों का अर्थ नीचे दिया गया है।
1. “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
2. “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
3. “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
4. “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 118 के दाएँ स्तंभ के मूल क्रमांक के अनुसार:
| बाएँ क्रमांक / पंक्ति | दाएँ क्रमांक | भाव |
|---|---|---|
| 1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए | 3 | समृद्ध व्यक्ति बरबाद हो गए |
| 2. धोती चर्रा रही है | 4 | पसीने से कपड़ा पुराने जैसा हो गया |
| 3. माल-मसाला अंटी में | 5 | धन सुरक्षित है न? |
| 4. खाने में देर-दार | 1 | भोजन कब तक तैयार होगा? |
| 5. पहले आत्मा फिर परमात्मा | 2 | पहले अपना ध्यान, फिर दूसरा काम |
कुंजी: 1→3, 2→4, 3→5, 4→1, 5→2।
सोच-विचार के लिए
(क) ‘ऐसे ही मकान’
नन्हेमल उस छोटे शहरी घर का अनुमान लगाते हैं—कमरा, पीछे आँगन और ऊपर छत। यह पात्र का सामान्यीकरण है; सभी वर्तमान शहरी घर ऐसे हैं, इसका प्रमाण नहीं।
(ख) पड़ोसी की शिकायत
मेहमानों ने उसकी छत पर गंदा पानी फैलाया और पहले एक मेहमान उसकी खाट पर लेटा था। राय का नमूना: स्वच्छता और अपने स्थान की चिंता उचित है, पर ताने देने के बजाय शांत बातचीत उपयोगी होती। दूसरे तर्क भी स्वीकार्य हैं।
(ग) अनजान अतिथियों को आने देना
मेहमान परिचित होने जैसा व्यवहार करते हैं। संकोच, किसी जानने वाले द्वारा भेजे होने की संभावना और आतिथ्य की भावना से विश्वनाथ स्पष्ट मना नहीं कर पाते। यह पात्र की दुविधा है, अनजान व्यक्ति को बिना परिचय घर में बुलाने का नियम नहीं।
(घ) अपरिचय के संवाद
विश्वनाथ: ‘मैं संपतराम को नहीं जानता।’ रेवती: ‘ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।’ विश्वनाथ: ‘न जाने कौन हैं।’ बाद में मेहमान जिन्हें मिलने आए उनका नाम/काम ठीक से याद नहीं कर पाते; अंत में गलत घर का पता चलता है।
(ङ) गरमी की पंक्तियाँ
‘मकान है कि भट्टी!’ ‘पत्ता तक नहीं हिल रहा है।’ ‘सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।’ ‘चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।’ इनमें बिंब और अतिशयोक्ति से गरमी का प्रभाव प्रकट है।
अनुमान और कल्पना से
(क) विश्वनाथ ने स्वयं भोजन क्यों नहीं बनाया?
अनुमान: घरेलू काम की पारंपरिक बाँट या अनुभव की कमी कारण हो सकते हैं। उनका निश्चित निजी कारण पाठ नहीं बताता। पत्नी के स्वास्थ्य और सभी सदस्यों की सुविधा के लिए भोजन का काम साझा करना उचित विकल्प है।
(ख) प्रमोद के उत्तरदायित्व
बड़ा बच्चा होने और माता-पिता व्यस्त होने से उसे पानी/बरफ लाने और छोटी बहन का ध्यान रखने के छोटे काम दिए होंगे। पुस्तक में उषा के रोने पर उसका सहयोग भी आता है। बच्चों का सहयोग आयु और सुरक्षा के अनुसार हो; सारी देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर न डालें।
(ग) भाई के लिए भोजन
भाई का परिचय स्पष्ट और उससे अपनापन है; रेवती उसे भूखा सुलाना नहीं चाहतीं। यह उनका स्नेहपूर्ण निर्णय है। अस्वस्थ व्यक्ति को हमेशा अपनी तकलीफ अनदेखी करके सेवा करनी चाहिए, ऐसा संदेश नहीं।
(घ) सर्दी और वर्षा के वाक्य — नौ नमूने
ये रचनात्मक रूपांतरण हैं, मूल एकांकी के संवाद नहीं।
| क्रम / गरमी का संकेत | सर्दी | वर्षा |
|---|---|---|
| 1. गरमी में भुन रहा है | सर्दी में जम गया। | वर्षा में भीग रहा है। |
| 2. बरफ कहाँ तक पिए | रजाई कहाँ तक ओढ़े। | छाता कहाँ तक थामे। |
| 3. आग बरस रही हो | मानो शहर बर्फ में डूबा हो। | मानो आसमान फट पड़ा हो। |
| 4. प्यास नहीं बुझती | ठिठुरन नहीं मिटती। | बरसात नहीं थमती। |
| 5. दीवारें तप रही हैं | दीवारें ठंडी पड़ी हैं। | दीवारें सीली पड़ी हैं। |
| 6. ठंडा पानी, प्राण सूखे | गरम पानी दो, हाथ जम रहे हैं। | सूखा कपड़ा दो, शरीर भीग गया है। |
| 7. गरमी में पानी जान है | सर्दी में गरम कपड़ा राहत है। | बरसात में सुरक्षित आश्रय राहत है। |
| 8. भाड़ में चने-सा भुनना | मानो हिम में ठिठुरते हैं। | मानो बादलों के नीचे नहाते हैं। |
| 9. पसीने से नहा गया | ठंड से काँप गया। | बारिश से भीग गया। |
एकांकी की रचना
एकांकी एक प्रकार का नाटक है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है और किसी कहानी या घटना को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिए जाते हैं; कोष्ठक में दिए गए संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं और पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं।
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ और जो सही नहीं लग रहे, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।
| वाक्य | हाँ/नहीं |
|---|---|
| 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। | हाँ |
| 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। | नहीं |
| 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। | हाँ |
| 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। | नहीं |
| 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। | नहीं |
| 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। | हाँ |
| 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। | हाँ |
अभिनय की बारी
(क) यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। कौन किस पात्र का अभिनय करेगा, यह तय कीजिए।
भाषा की बात
शब्दों से विशेष प्रभाव
‘मकान है कि भट्टी’, ‘शरीर… उबल उठा’, ‘होंठ सूख रहे हैं’ जैसे प्रयोग गरमी का तीव्र अनुभव दिखाते हैं। ‘जेलखाने’ में घर की घुटन का लाक्षणिक भाव है, वास्तविक जेल नहीं।
मुहावरे — अर्थ और अपना वाक्य
| मुहावरा | अर्थ | नमूना वाक्य |
|---|---|---|
| दिन-रात एक करना | बहुत मेहनत करना | दल ने प्रदर्शनी तैयार करने में दिन-रात एक कर दिया। |
| खाक में मिलना | बरबाद होना | आग में उसका सामान खाक में मिल गया। |
| जान में जान आना | राहत मिलना | खोया साथी मिल गया तो जान में जान आई। |
| प्राण सूखना | बहुत घबराना/व्याकुल होना | दुर्घटना की खबर सुनकर हमारे प्राण सूख गए। |
| धुन सवार होना | किसी बात में बहुत लग जाना | उसे बाँसुरी सीखने की धुन सवार हो गई। |
बात पर बल देना — ‘ही’
(क) ‘मैं भी ढूँढ़कर ही रहा’ में यह जोर है कि बिना खोजे नहीं छोड़ा/अंततः खोज लिया। ‘ही’ हटाने पर यह जोर कम होता है। (ख) तीन अर्थ:
- विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे। — किसी और के नहीं
- विश्वनाथ के अतिथि यहीं रुकेंगे। — कहीं और नहीं
- विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही। — रुकना निश्चित
‘तो’ का स्थान
‘तुम नहाने तो जाओ’—पहले नहाने के आग्रह पर जोर। ‘तुम तो नहाने जाओ’—तुम पर विशेष बल। ‘तुम नहाने जाओ तो’—संदर्भ अनुसार आग्रह/शर्त का अधूरा रूप; जैसे ‘तुम जाओ तो मैं कमरा ठीक करूँ’। अपने वाक्य: ‘मैं ही यह काम करूँगा।’ ‘पहले बात सुन तो लो।’
आपकी बात
(क) “रेवती – ये लोग कौन हैं? … विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।” इस संवाद से विश्वनाथ की दुविधा प्रकट होती है। क्या आपके सामने कभी ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
(ख) एकांकी से लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
सावधानी और सुरक्षा
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
सृजन / पाठ से आगे
सृजन — कहानी अपने शब्दों में
नमूना: गरमी की रात में परिवार छोटे घर की कठिनाइयों से परेशान था। दो अनजान अतिथि आए और परिचित मानकर पानी तथा भोजन माँगने लगे। पूछने पर उनके उत्तर स्पष्ट न हुए। अंत में वे रामलाल वैद्य का घर खोज रहे थे, यह पता चला। वे चले गए तो रेवती का भाई पहुँचा। रेवती उसके लिए भोजन बनाने लगीं। संवाद, गलत पहचान और अंतिम मोड़ से हास्य पैदा होता है। अपना विवरण सार के आधार पर विस्तार दें।
गरमी का प्रकोप
पाँच विद्यार्थियों के समूह में पढ़े सुझावों का पोस्टर बनाएँ। सरकारी मार्गदर्शन के मुख्य संकेत: तेज धूप के समय बाहर जाने से बचें, पर्याप्त सुरक्षित पानी पिएँ, हल्के ढीले सूती वस्त्र पहनें और बाहर सिर ढकें। NDMA के सुझावों पर महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का पृष्ठ देखें। यह स्वास्थ्य-संबंधी जागरूकता का कार्य है; गरमी से अस्वस्थ होने पर वयस्क को बताएँ और उचित सहायता लें।
तार से संदेश — चार कार्य
(क) केवल ‘तार’ से रचना का सटीक वर्ष या ‘70–80 साल पहले’ तय नहीं होता। इतना अनुमान उचित है कि इसमें तार के प्रचलन वाले समय का परिवेश है। लेखक का जीवन 1898–1966 पुस्तक में दिया है; रचना की तारीख अलग स्रोत से खोजनी होगी। (ख) आज फोन, एसएमएस, ईमेल, वीडियो-कॉल और संदेश-ऐप सुलभ साधन हो सकते हैं। (ग) अपना सबसे अधिक प्रयुक्त माध्यम और उसका कारण लिखें। (घ) प्रिय व्यक्ति को संबोधन, अपनी खबर, उनका हाल और नाम/तारीख वाला पत्र लिखें; अभिभावक की सहायता से सही पते पर डाक से भेजने की प्रक्रिया सीखें। उदाहरण पत्र को सचमुच भेजा हुआ न बताएँ।
नाप, तौल और मुद्राएँ
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| (क) एक रुपये में आने | पुरानी प्रणाली में 16 आने |
| (ख) चार आने में पैसे | 1 आना = 4 पुराने पैसे (pice), अतः 4 आने = 16 पुराने पैसे। दशमलव प्रणाली में रुपये के चौथाई भाग का समतुल्य 25 नए पैसे है। दोनों इकाइयों को न मिलाएँ। |
| (ग) ‘गज’ का स्थानीय प्रयोग | नमूना: कपड़े की लंबाई मापना। अपने आसपास पूछकर वास्तविक संदर्भ लिखें। |
| (घ) एक गज में फीट | मानक yard वाले अर्थ में 3 फीट (0.9144 मीटर) |
पुरानी मुद्रा का संदर्भ: PIB — दशमलव सिक्कों का इतिहास। आधुनिक और पुराने ‘पैसे’ अलग इकाइयाँ हैं।
झरोखे से — निराला का आतिथ्य
पृष्ठ 125 पर महादेवी वर्मा की ‘पथ के साथी’ से निराला के सत्कार का अंश है। सामान कम होने पर भी निराला अतिथि के लिए स्वयं तैयारी करते हैं। लेखिका दिखावटी सामाजिक व्यवहार से उसकी तुलना करती हैं। ‘नए मेहमान’ में अपरिचय और असुविधा का हास्य है; यहाँ परिचित साहित्यकार का स्नेहपूर्ण सत्कार।
साझी समझ
अपनी भाषा में स्वागत का नमूना: ‘नमस्ते, आपका स्वागत है। सफर कैसा रहा?’ अपने क्षेत्र का एक व्यंजन चुनें और क्यों खिलाना चाहेंगे बताएँ। भोजन अतिथि की पसंद और सुविधा के अनुसार हो।
खोजबीन
पुस्तकालय/शिक्षक से ‘आना’, ‘गज’ और ‘तार’ के पुराने उपयोग खोजें। स्रोत और इकाई/काल लिखें; इनके आधुनिक दूसरे अर्थ से भ्रम न करें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
अति लघु / लघु उत्तरीय
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?
2. एकांकी का दृश्य कहाँ और किस समय का है?
3. विश्वनाथ के घर अनजाने में आए दोनों मेहमानों के क्या नाम हैं?
4. अंत में पता चलता है कि मेहमान वास्तव में किसके यहाँ जाना चाहते थे?
5. रेवती अंत में अपने भाई के लिए खाना बनाने को तुरंत क्यों तैयार हो जाती है?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘नए मेहमान’ एकांकी किस प्रकार शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।
7. इस एकांकी में भारतीय आतिथ्य-भाव किस रूप में प्रकट हुआ है? उदाहरण सहित लिखिए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) उदयशंकर भट्ट
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
2. विश्वनाथ की पत्नी का क्या नाम है?
(क) किरण
(ख) उषा
(ग) रेवती
(घ) महादेवी
3. एकांकी में ‘यवनिका’ शब्द का क्या अर्थ है?
(क) रंगमंच का परदा
(ख) पात्र-परिचय
(ग) संवाद
(घ) पंखा
4. रेवती का भाई (आगंतुक) कहाँ से और किस माध्यम से सूचना भेजकर आया था?
(क) बिजनौर से, पत्र द्वारा
(ख) झाँसी से, तार द्वारा
(ग) मुरादाबाद से, फोन द्वारा
(घ) शिमला से, तार द्वारा
5. नन्हेमल और बाबूलाल कहाँ से आए थे?
(क) झाँसी
(ख) मुरादाबाद
(ग) बिजनौर
(घ) लखनऊ
6. एकांकी की मुख्य पृष्ठभूमि (मौसम) क्या है?
(क) कड़ाके की सर्दी
(ख) मूसलाधार वर्षा
(ग) भीषण गरमी
(घ) सुहावना बसंत
7. पड़ोसी की विश्वनाथ से मुख्य शिकायत क्या थी?
(क) तेज आवाज में रेडियो बजाना
(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर पानी फैलाना
(ग) किराया न देना
(घ) बच्चों का शोर मचाना
8. विश्वनाथ का बड़ा बेटा, जो मेहमानों के लिए पानी-बरफ लाता है, उसका नाम क्या है?
(क) प्रमोद
(ख) बाबूलाल
(ग) नन्हेमल
(घ) भैरों
9. किसी रचना को मुख्य रूप से नाटक/एकांकी का रूप कौन-सी बात देती है?
(क) वर्णन
(ख) संवाद एवं मंचन
(ग) लंबे अनुच्छेद
(घ) कविता
10. कोष्ठक में दिए गए अभिनय/स्थान-समय संबंधी संकेतों को क्या कहते हैं?
(क) संवाद
(ख) रंगमंच-निर्देश
(ग) पात्र-परिचय
(घ) सार
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): रेवती मन ही मन कामना करती है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए।
कारण (R): छोटे गरम मकान में जगह की कमी है और वह स्वयं भी बीमार एवं थकी हुई है।
2. अभिकथन (A): नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ के घनिष्ठ परिचित मित्र थे।
कारण (R): वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर बहुत अपनेपन से बातें करते थे।
3. अभिकथन (A): रेवती अंत में अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है।
कारण (R): भाई के प्रति स्नेह से वह भोजन बनाना चाहती है।
4. अभिकथन (A): एकांकी की पूरी कथा एक ही स्थान और एक ही रात में घटित होती है।
कारण (R): एकांकी में केवल एक ही अंक होता है, जिसमें घटना संक्षेप में दिखाई जाती है।
5. अभिकथन (A): विश्वनाथ अपरिचित होने पर भी मेहमानों को घर से तुरंत नहीं निकालता।
कारण (R): भारतीय संस्कृति में अतिथि का सत्कार महत्त्वपूर्ण माना जाता है और संकोचवश वह इनकार नहीं कर पाता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘नए मेहमान’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?
‘नए मेहमान’ एक एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है, जिसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं।
‘नए मेहमान’ एकांकी का मुख्य कथानक क्या है?
गरमी की एक रात विश्वनाथ के छोटे शहरी घर में दो अपरिचित मेहमान (नन्हेमल और बाबूलाल) गलती से चढ़ आते हैं। बाद में पता चलता है कि वे पड़ोस के कविराज वैद्य के यहाँ जाना चाहते थे। उनके जाते ही रेवती का असली भाई आ पहुँचता है।
इस एकांकी से क्या संदेश मिलता है?
यह एकांकी हास्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की आवास-समस्या एवं कठिनाइयों को उजागर करती है और भारतीय आतिथ्य-भाव (अतिथि देवो भव) तथा अपनों के प्रति स्नेह को दर्शाती है।
एकांकी में ‘रंगमंच-निर्देश’ और ‘संवाद’ क्या होते हैं?
कोष्ठक में दिए गए स्थान, समय एवं अभिनय संबंधी संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं, जबकि पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं। एकांकी की कथा मुख्यतः संवादों से ही आगे बढ़ती है।
प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
