कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 8 – नए मेहमान (एकांकी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 8 ‘नए मेहमान’ (लेखक – उदयशंकर भट्ट) का पूरा समाधान देता है। यह एक एकांकी है, जिसमें एक शहरी मध्यवर्गीय परिवार पर अचानक आ पड़े अपरिचित मेहमानों की रोचक कथा है। नीचे एकांकी का सार, शब्दार्थ, पुस्तक की सभी अभ्यास-गतिविधियों के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं FAQ दिए गए हैं।
लेखक परिचय – उदयशंकर भट्ट
इस एकांकी के लेखक उदयशंकर भट्ट (1898–1966) हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा में हुआ था। परिवार में साहित्यिक वातावरण होने के कारण इनकी रुचि आरंभ से ही साहित्य में अधिक थी। इन्होंने रेडियो के लिए अनेक नाटक लिखे तथा नाटकों और फिल्मों में अभिनय भी किया। यद्यपि इन्होंने कविता और उपन्यास भी लिखे, किंतु नाटक एवं एकांकी के क्षेत्र में इन्हें विशेष प्रसिद्धि मिली। इनका लोक-परलोक उपन्यास तथा पर्दे के पीछे एकांकी-संग्रह बहुत चर्चित रहे। हिंदी एकांकी को लोकप्रिय बनाने वाले रचनाकारों में इनका महत्त्वपूर्ण स्थान है। ‘नए मेहमान’ एकांकी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं और भारतीय आतिथ्य-भाव का जीवंत चित्रण किया है।
पाठ का सार
‘नए मेहमान’ एकांकी का दृश्य भारत के किसी बड़े नगर में, गरमी की एक रात आठ बजे का है। विश्वनाथ (गृहपति) किराये के एक छोटे, बंद और तपते मकान में अपनी पत्नी रेवती और बच्चों के साथ रहता है। भीषण गरमी से सब बेहाल हैं – पुराना पंखा हवा कम देता है, पानी से प्यास नहीं बुझती और छत इतनी छोटी है कि सब बच्चे समा नहीं पाते। निर्दयी पड़ोसी खाली छत पर भी खाट नहीं बिछाने देता। दोनों पति-पत्नी सोने की व्यवस्था को लेकर बहस ही कर रहे होते हैं कि रेवती कह उठती है – “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।”
तभी दरवाजा खटखटाता है और दो अपरिचित व्यक्ति – नन्हेमल और बाबूलाल – बिस्तर तथा संदूक लेकर घर में घुस आते हैं। वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर इतने अपनेपन से बातें करते हैं, मानो वर्षों से परिचित हों। वे ठंडा पानी, नहाने का प्रबंध और भोजन माँगते हैं और बार-बार कहते हैं कि वे ‘घर के ही’ हैं। विश्वनाथ संकोचवश उन्हें रोक नहीं पाता, यद्यपि वह उन्हें पहचानता ही नहीं।
विश्वनाथ और रेवती परेशान हो जाते हैं – सिर में दर्द, गरमी और ऊपर से अतिथियों का भोजन! पूछताछ करने पर मेहमान गोलमोल उत्तर देते हैं – कभी संपतराम, कभी जगदीशप्रसाद का नाम लेते हैं, पर न चिट्ठी है, न पता ठीक से याद। इसी बीच पड़ोसी फिर शिकायत लेकर आता है कि मेहमानों ने उसकी छत पर पानी फैला दिया। अंततः विश्वनाथ के बेटे प्रमोद की बात से पता चलता है कि वे वस्तुतः पिछली गली के ‘कविराज रामलाल वैद्य’ के यहाँ जाना चाहते थे, पर गलती से विश्वनाथ के घर चढ़ आए। भूल समझते ही दोनों ‘राम-राम’ कहकर चले जाते हैं।
तभी नीचे से आवाज आती है – यह रेवती का असली भाई (आगंतुक) है, जो झाँसी से तार भेजकर आया था, पर तार समय पर न मिलने के कारण घंटों मकान ढूँढ़ता रहा। थका हुआ भाई कहता है कि इस गरमी में खाना रहने दो, वह केवल पानी पीकर सो जाएगा। पर रेवती, जो थोड़ी देर पहले मेहमानों के लिए खाना बनाने से इनकार कर रही थी, अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है – “भैया भूखे नहीं सो सकते।” इस प्रकार यह एकांकी हास्य के साथ-साथ शहरी मध्यवर्ग की कठिनाइयों और भारतीय आतिथ्य-भाव की विशेषताओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| एकांकी | एक ही अंक वाला छोटा नाटक |
| गृहपति | घर का स्वामी, घर का मुखिया |
| आगंतुक | आने वाला व्यक्ति, अतिथि |
| ॠतु | मौसम, समय-विशेष |
| भट्टी | आग जलाने का चूल्हा; अत्यधिक गरम स्थान |
| जेलखाना | कारागार, बंदीगृह (यहाँ – घुटन भरा घर) |
| सुकुमार | कोमल, सुंदर एवं नाजुक |
| संपन्न | धनवान, समृद्ध |
| ठग | धोखा देकर लूटने वाला |
| निचोड़ना | दबाकर रस/पानी निकालना |
| बंडी | बिना बाँह की छोटी जैकेट/कुरती |
| अंटी | कमर में धोती की गाँठ जहाँ रुपये रखे जाते हैं |
| हबड़-तबड़ | हड़बड़ी, जल्दबाजी एवं अव्यवस्था |
| सकपकाना | घबरा जाना, झेंप जाना |
| खीझना | झल्ला जाना, चिढ़ जाना |
| कदाचित | शायद, संभवतः |
| नेपथ्य | रंगमंच के पीछे का भाग; पर्दे के पीछे से आती आवाज |
| यवनिका | रंगमंच का परदा (परदा गिरना – दृश्य की समाप्ति) |
| तार | टेलीग्राफ द्वारा शीघ्र भेजा जाने वाला संदेश |
| धर्मशाला | यात्रियों के ठहरने का निःशुल्क/सस्ता स्थान |
| आतिथ्य | अतिथि का सत्कार, मेहमाननवाजी |
| प्रकोप | तीव्रता, उग्रता (गरमी का प्रकोप) |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
• अतिथियों की सेवा करने के कारण
• किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
• आज्ञाकारिता के भाव के कारण
• गरमी को चुपचाप सहने के कारण
2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
• उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
• पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
• लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
• अतिथियों का अपमान करते हैं
3. “ईश्वर करे इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
• मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
• रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
• अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
• उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
• पानी की कमी होने की
• पड़ोसियों के चिल्लाने की
• मेहमानों के आने की
• गरमी के कारण बीमारी की
5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
• संवाद
• कथा
• वर्णन
• मंचन
(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियों का अर्थ नीचे दिया गया है।
1. “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
2. “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
3. “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
4. “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के सही भाव से मिलाइए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (भाव) |
|---|---|
| 1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए। | बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है। |
| 2. धोती ऐसी चर्रा रही है, जैसे पुरानी हो। | कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है। |
| 3. माल-मसाला तो अंटी में है न? | धनराशि सुरक्षित तो है न! |
| 4. खाने में क्या देर-दार है। | भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी। |
| 5. पहले आत्मा फिर परमात्मा। | पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम। |
सोच-विचार के लिए
एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने को कहता है तथा रेवती की अस्वस्थता देखकर भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
(ग) “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ।” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं?
| गरमी की भीषणता | सर्दी की भीषणता | वर्षा की भीषणता |
|---|---|---|
| 1. यह गरमी में भुन रहा है। | यह सर्दी में जम गया। | यह वर्षा में भीग रहा है। |
| 2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए। | पर रजाई भी कोई कहाँ तक ओढ़े। | पर छाता भी कोई कहाँ तक थामे। |
| 3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो। | सारे शहर में जैसे बर्फ़ जम रही हो। | सारे शहर में जैसे आसमान फट पड़ा हो। |
| 4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती। | ठिठुरन है कि मिटने का नाम नहीं लेती। | बारिश है कि थमने का नाम नहीं लेती। |
| 5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं। | चारों तरफ दीवारें ठंडी पड़ी हैं। | चारों तरफ दीवारें सीली पड़ी हैं। |
एकांकी की रचना
एकांकी एक प्रकार का नाटक है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है और किसी कहानी या घटना को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान और समय दिए जाते हैं; कोष्ठक में दिए गए संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं और पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं।
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ और जो सही नहीं लग रहे, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।
| वाक्य | हाँ/नहीं |
|---|---|
| 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। | हाँ |
| 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। | नहीं |
| 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। | हाँ |
| 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। | नहीं |
| 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। | नहीं |
| 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। | हाँ |
| 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। | हाँ |
अभिनय की बारी
(क) यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?
(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। कौन किस पात्र का अभिनय करेगा, यह तय कीजिए।
भाषा की बात
शब्दों से विशेष प्रभाव
“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”, “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”, “चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।” – इन रेखांकित शब्दों जैसे और प्रयोग छाँटिए जो गरमी की प्रचंडता दर्शाते हैं।
मुहावरे
“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”, “लाखों के आदमी खाक में मिल गए।” – एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके अर्थ लिखिए और अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| दिन-रात एक करना | निरंतर कठोर परिश्रम करना | परीक्षा में सफल होने के लिए मोहन ने दिन-रात एक कर दिया। |
| खाक में मिलना | नष्ट हो जाना, बरबाद हो जाना | आग लगने से व्यापारी का सारा माल खाक में मिल गया। |
| जान में जान आना | राहत/चैन मिलना, घबराहट दूर होना | बेटे का फोन आते ही माँ की जान में जान आई। |
| प्राण सूखना | बहुत भयभीत या व्याकुल हो जाना | शेर को सामने देखकर सबके प्राण सूख गए। |
| आग बरसना | अत्यधिक गरमी पड़ना | जेठ की दोपहर में मानो आसमान से आग बरस रही थी। |
बात पर बल देना – ‘ही’ और ‘तो’ का प्रयोग
(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगें—
“तुम नहाने तो जाओ।” में ‘तो’ का स्थान बदलने पर अर्थ में परिवर्तन देखिए तथा ‘ही’/‘तो’ के और वाक्य बनाइए।
आपकी बात
(क) “रेवती – ये लोग कौन हैं? … विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।” इस संवाद से विश्वनाथ की दुविधा प्रकट होती है। क्या आपके सामने कभी ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
(ख) एकांकी से लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
सावधानी और सुरक्षा
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
सृजन / पाठ से आगे
(सृजन) इस एकांकी में कही गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।
(गरमी का प्रकोप) आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
(तार से संदेश) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाइए कि यह एकांकी कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी? आजकल संदेश भेजने के कौन-से साधन सुलभ हैं?
(नाप, तौल और मुद्राएँ) एक रुपये में कितने आने होते हैं? चार आने में कितने पैसे होते हैं? एक गज में कितनी फीट होती हैं?
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु / लघु उत्तरीय
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?
2. एकांकी का दृश्य कहाँ और किस समय का है?
3. विश्वनाथ के घर अनजाने में आए दोनों मेहमानों के क्या नाम हैं?
4. अंत में पता चलता है कि मेहमान वास्तव में किसके यहाँ जाना चाहते थे?
5. रेवती अंत में अपने भाई के लिए खाना बनाने को तुरंत क्यों तैयार हो जाती है?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘नए मेहमान’ एकांकी किस प्रकार शहरी मध्यवर्ग की समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।
7. इस एकांकी में भारतीय आतिथ्य-भाव किस रूप में प्रकट हुआ है? उदाहरण सहित लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘नए मेहमान’ एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) उदयशंकर भट्ट
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
2. विश्वनाथ की पत्नी का क्या नाम है?
(क) किरण
(ख) उषा
(ग) रेवती
(घ) महादेवी
3. एकांकी में ‘यवनिका’ शब्द का क्या अर्थ है?
(क) रंगमंच का परदा
(ख) पात्र-परिचय
(ग) संवाद
(घ) पंखा
4. रेवती का भाई (आगंतुक) कहाँ से और किस माध्यम से सूचना भेजकर आया था?
(क) बिजनौर से, पत्र द्वारा
(ख) झाँसी से, तार द्वारा
(ग) मुरादाबाद से, फोन द्वारा
(घ) शिमला से, तार द्वारा
5. नन्हेमल और बाबूलाल कहाँ से आए थे?
(क) झाँसी
(ख) मुरादाबाद
(ग) बिजनौर
(घ) लखनऊ
6. एकांकी की मुख्य पृष्ठभूमि (मौसम) क्या है?
(क) कड़ाके की सर्दी
(ख) मूसलाधार वर्षा
(ग) भीषण गरमी
(घ) सुहावना बसंत
7. पड़ोसी की विश्वनाथ से मुख्य शिकायत क्या थी?
(क) तेज आवाज में रेडियो बजाना
(ख) मेहमानों द्वारा उसकी छत पर पानी फैलाना
(ग) किराया न देना
(घ) बच्चों का शोर मचाना
8. विश्वनाथ का बड़ा बेटा, जो मेहमानों के लिए पानी-बरफ लाता है, उसका नाम क्या है?
(क) प्रमोद
(ख) बाबूलाल
(ग) नन्हेमल
(घ) भैरों
9. किसी रचना को मुख्य रूप से नाटक/एकांकी का रूप कौन-सी बात देती है?
(क) वर्णन
(ख) संवाद एवं मंचन
(ग) लंबे अनुच्छेद
(घ) कविता
10. कोष्ठक में दिए गए अभिनय/स्थान-समय संबंधी संकेतों को क्या कहते हैं?
(क) संवाद
(ख) रंगमंच-निर्देश
(ग) पात्र-परिचय
(घ) सार
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): रेवती मन ही मन कामना करती है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए।
कारण (R): छोटे गरम मकान में जगह की कमी है और वह स्वयं भी बीमार एवं थकी हुई है।
2. अभिकथन (A): नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ के घनिष्ठ परिचित मित्र थे।
कारण (R): वे विश्वनाथ को ‘पंडित जी’ कहकर बहुत अपनेपन से बातें करते थे।
3. अभिकथन (A): रेवती अंत में अपने भाई के लिए तुरंत खाना बनाने को तैयार हो जाती है।
कारण (R): भाई के प्रति स्नेह के कारण वह थकान और सिरदर्द को भुला देती है।
4. अभिकथन (A): एकांकी की पूरी कथा एक ही स्थान और एक ही रात में घटित होती है।
कारण (R): एकांकी में केवल एक ही अंक होता है, जिसमें घटना संक्षेप में दिखाई जाती है।
5. अभिकथन (A): विश्वनाथ अपरिचित होने पर भी मेहमानों को घर से तुरंत नहीं निकालता।
कारण (R): भारतीय संस्कृति में अतिथि का सत्कार महत्त्वपूर्ण माना जाता है और संकोचवश वह इनकार नहीं कर पाता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘नए मेहमान’ पाठ की विधा क्या है और इसके लेखक कौन हैं?
‘नए मेहमान’ एक एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है, जिसके लेखक उदयशंकर भट्ट हैं।
‘नए मेहमान’ एकांकी का मुख्य कथानक क्या है?
गरमी की एक रात विश्वनाथ के छोटे शहरी घर में दो अपरिचित मेहमान (नन्हेमल और बाबूलाल) गलती से चढ़ आते हैं। बाद में पता चलता है कि वे पड़ोस के कविराज वैद्य के यहाँ जाना चाहते थे। उनके जाते ही रेवती का असली भाई आ पहुँचता है।
इस एकांकी से क्या संदेश मिलता है?
यह एकांकी हास्य के साथ शहरी मध्यवर्ग की आवास-समस्या एवं कठिनाइयों को उजागर करती है और भारतीय आतिथ्य-भाव (अतिथि देवो भव) तथा अपनों के प्रति स्नेह को दर्शाती है।
एकांकी में ‘रंगमंच-निर्देश’ और ‘संवाद’ क्या होते हैं?
कोष्ठक में दिए गए स्थान, समय एवं अभिनय संबंधी संकेत रंगमंच-निर्देश कहलाते हैं, जबकि पात्रों द्वारा कही गई बातें संवाद कहलाती हैं। एकांकी की कथा मुख्यतः संवादों से ही आगे बढ़ती है।
प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
