कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 6 — एक टोकरी भर मिट्टी प्रश्न उत्तर और सार
एक टोकरी भर मिट्टी प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 6 की कहानी का सार, शब्दार्थ, अभ्यास, कि–की, मुहावरे, काल, वचन और रचनात्मक गतिविधियों के नमूने पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 6 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 76–90, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
- लेखक परिचय – माधवराव सप्रे
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- बदली कहानी
- ‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
- मुहावरे
- काल
- वचन की पहचान
- कहानी की रचना
- शब्दकोश का उपयोग
- भावों की पहचान
- वाक्य विस्तार
- संवाद फोन पर / पोती की भावनाएँ / आपकी बात
- पाठ से आगे
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक परिचय – माधवराव सप्रे
हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ का उल्लेख प्रायः किया जाता है और इसके लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) हैं। उनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था और उनकी मातृभाषा मराठी थी। ऐसा माना जाता है कि वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए थे। उन्होंने लोकमान्य तिलक के चर्चित ग्रंथ गीता-रहस्य का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था। स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उनकी कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि समाज के ताने-बाने में गाँठ बनकर अटके अनेक प्रश्नों को सहज ढंग से उठाती हैं। ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ भी ऐसी ही कहानी है, जो लोभ, अन्याय, करुणा और आत्मबोध जैसे गहरे प्रश्नों को एक छोटी-सी टोकरी के बहाने हमारे सामने रख देती है।
पाठ का सार
किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार की इच्छा हुई कि वह अपने महल का अहाता उसी झोंपड़ी तक बढ़ा ले। उसने वृद्धा से बहुत कहा कि वह अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़मानों से वहीं बसी थी। उसी झोंपड़ी में उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र मर चुके थे, पतोहू भी पाँच बरस की एक कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब वही पोती उसके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी।
वृद्धा के न मानने पर ज़मींदार ने ज़मींदारी चाल चली। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम करके उसने अदालत से उस झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। बेचारी अनाथ पास-पड़ोस में कहीं रहने लगी। जब से झोंपड़ी छूटी, तब से वृद्धा की पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया और जिद करने लगी कि वह अपने घर में ही रोटी खाएगी।
एक दिन वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर ज़मींदार के पास पहुँची और विनती की कि वह झोंपड़ी की एक टोकरी भर मिट्टी ले जाए, ताकि उसी का चूल्हा बनाकर पोती के लिए रोटी पका सके और पोती खाना खाने लगे। ज़मींदार ने आज्ञा दे दी। वृद्धा ने मिट्टी से टोकरी भरी और फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि महाराज ज़रा टोकरी को हाथ लगा दें, जिससे वह उसे सिर पर रख ले।
ज़मींदार पहले तो बहुत नाराज हुआ, पर बार-बार हाथ जोड़ने और पैरों पर गिरने से उसके मन में दया आ गई। उसने स्वयं टोकरी उठानी चाही, पर वह एक हाथ भी ऊँची न हुई। तब वृद्धा ने कहा – जब आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठती, तो इस झोंपड़ी की हजारों टोकरियों मिट्टी का भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? यह सुनते ही धन-मद में डूबे ज़मींदार की आँखें खुल गईं। उसने अपने किए पर पश्चाताप किया, वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी। इस प्रकार एक छोटी-सी टोकरी ने अन्याय के नैतिक भार का बोध कराकर बड़ा परिवर्तन ला दिया।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| श्रीमान् | संपन्न, धनी एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति; पुरुषों के नाम के पूर्व आदर-सूचक शब्द |
| अहाता | चारदीवारी से घिरा खुला आँगन या परिसर |
| वृद्धा | बूढ़ी स्त्री |
| झोंपड़ी | घास-फूस या मिट्टी की बनी छोटी कुटिया |
| पतोहू | पुत्रवधू, बहू |
| पूर्वस्थिति | पहले की दशा या हालत |
| मृतप्राय | जो लगभग मरने जैसी स्थिति में हो |
| निष्फल | व्यर्थ, असफल |
| बाल की खाल निकालना | किसी बात की अत्यधिक छानबीन या नुक्ताचीनी करना |
| थैली गरम करना | रिश्वत देना, पैसे से वश में करना |
| कब्जा | अधिकार में लेना, हथिया लेना |
| गिड़गिड़ाना | दीनता से बार-बार विनती करना |
| विनती | नम्र प्रार्थना, निवेदन |
| स्मरण | याद, सुधि |
| आंतरिक | भीतर का, मन के भीतर का |
| प्रार्थना | विनम्र निवेदन, याचना |
| लज्जित | शर्मिंदा, संकोच में पड़ा हुआ |
| धन-मद | धन-संपत्ति का घमंड |
| गर्वित | अभिमान से भरा हुआ |
| कर्तव्य | करने योग्य कार्य, फर्ज |
| कृतकर्म | किया हुआ काम (विशेषतः बुरा काम) |
| पश्चाताप | किए पर पछतावा, अनुताप |
| क्षमा | माफी, अपराध को क्षमा करना |
नीचे पुस्तक ‘मल्हार’ की सभी अभ्यास-गतिविधियाँ उसी क्रम एवं शीर्षक के साथ दी गई हैं। अभ्यास के क्रम और विषय पुस्तक के अनुरूप हैं; उत्तर मौलिक अध्ययन-सहायता हैं। कुछ गतिविधियाँ विद्यार्थी की अपनी कल्पना/अनुभव पर आधारित हैं, जिनके लिए संकेत-सहित नमूना उत्तर दिए गए हैं।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?• झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
(2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?• क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुमति लेकर • विनती और नम्रता से • चुपचाप उठाकर ले गई
(3) वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?• दया • लगाव • गुस्सा • डर
(4) कहानी का अंत कैसा है?• दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक
(ख) हो सकता है आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों – अपने मित्रों से चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने। (समूह-चर्चा गतिविधि।)
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुने कुछ वाक्यों के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। प्रत्येक का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष से मिलान नीचे दिया गया है।
| क्रम | पाठ में से वाक्य | सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष |
|---|---|---|
| 1 | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2 | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाँव-पेच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3 | आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4 | ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। |
| 5 | कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी। |
| 6 | उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। |
| 7 | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8 | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। |
पृष्ठ 79 में प्रत्येक जोड़ी का सही विकल्प क्रम: 1, 2, 2, 1, 2, 1, 2, 1।
(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्ष चुने और क्यों। (समूह-चर्चा गतिविधि।)
पृष्ठ 79: सही विकल्पों का क्रम: 1, 2, 2, 1, 2, 1, 2, 1। मूल दो-दो निष्कर्षों के अनुसार।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनी कुछ पंक्तियों का भाव नीचे स्पष्ट किया गया है।
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
सोच-विचार के लिए
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…”। यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
अनुमान और कल्पना से
ये अनुमान/कल्पना के प्रश्न हैं। पाठ में न कही बात को निश्चित घटना न बनाएँ।
(क) पोती की बात
नमूना: ‘यह हमारा घर है। दादी की यादें यहीं बसी हैं। कृपया इसे हमें लौटा दीजिए।’
(ख) मेरी जगह ज़मींदार
मैं किसी का घर अन्याय से न छीनता। विस्तार का दूसरा रास्ता खोजता और वृद्धा के रहने के अधिकार तथा इच्छा का सम्मान करता। सहायता या विकल्प थोपा नहीं जाना चाहिए।
(ग) टोकरी क्यों नहीं उठी?
कहानी कहती है कि ज़मींदार पूरी ताकत लगाकर भी टोकरी नहीं उठा सके। उसका वास्तविक वजन, स्वास्थ्य या कोई अलौकिक कारण पाठ नहीं बताता। भौतिक कारण पर अनुमान हो सकता है; साहित्यिक स्तर पर घटना उनके अन्याय के नैतिक भार का बोध कराने का माध्यम है। अपराध-बोध को पहले से टोकरी न उठने का निश्चित कारण न लिखें; वृद्धा के वचन सुनकर अंत में उनकी आँखें खुलती हैं।
(घ) मिट्टी का दूसरा अर्थ
घर की मिट्टी स्मृति और लगाव से जुड़ी है; ‘हजारों टोकरियों’ का भार पूरे घर को छीनने की नैतिक जिम्मेदारी का संकेत बनता है।
(ङ) स्त्रियों की चुनौतियाँ
कथा से अनुमान है कि अकेली वृद्धा को सहारे की कमी, आर्थिक असुरक्षा, प्रभावशाली व्यक्ति का अन्याय और अपनी बात मनवाने में कठिनाई झेलनी पड़ी। एक कहानी से उस काल की सभी स्त्रियों की स्थिति या संपत्ति-कानून तय नहीं किए जा सकते। इसे सामाजिक चर्चा का आधार मानें।
बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती – यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता; यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता; यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता; यदि ज़मींदार एक स्त्री होती; यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती। नीचे एक स्थिति का नमूना दिया गया है –
स्थिति – यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता: यदि ज़मींदार वह टोकरी सहज ही उठा लेता, तो वृद्धा का प्रतीकात्मक तर्क अधूरा रह जाता। तब शायद वृद्धा सीधे शब्दों में कहती – “महाराज, टोकरी का भार तो आपने उठा लिया, पर मेरे पूरे घर और मेरी पोती के आँसुओं का भार भी क्या आप उठा सकेंगे?” इस पर ज़मींदार सोच में पड़ जाता और संभवतः अपनी भूल समझकर झोंपड़ी लौटा देता – कहानी का संदेश तब भी न्याय और करुणा की ओर ही मुड़ता।
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए और बदली हुई कहानी मिलकर लिखिए। (समूह-लेखन गतिविधि।)
‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
‘कि’ संयोजक है। ‘की’ संबंधसूचक रूप हो सकता है; ‘प्रार्थना की’ में ‘की’ करना क्रिया का भूत रूप है। नीचे रिक्त स्थानों की पूर्ति की गई है।
| क्रम | वाक्य (सही शब्द सहित) |
|---|---|
| 1 | वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है। |
| 2 | वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी। |
| 3 | वृद्धा ने प्रार्थना की कि टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए। |
| 4 | पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी। |
| 5 | झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी। |
| 6 | उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी। |
| 7 | वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी। |
| 8 | उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी। |
| 9 | वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी। |
| 10 | ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली। |
| 11 | उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी। |
मुहावरे
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।” (क) इस वाक्य में दो मुहावरे हैं – बाल की खाल निकालना और थैली गरम करना। (ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग नीचे दिए गए हैं।
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| बाल की खाल निकालना | किसी बात की अत्यधिक छानबीन या नुक्ताचीनी करना | हर बात में बाल की खाल निकालने से समय व्यर्थ होता है। |
| थैली गरम करना | रिश्वत देना, पैसे से वश में करना | उसने अधिकारी की थैली गरम करके अपना काम करवा लिया। |
| बाल बाँका न होना | कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना; पूर्णतः सुरक्षित रहना | दुर्घटना भयंकर थी, फिर भी उसका बाल बाँका न हुआ। |
| बाल बराबर | बहुत सूक्ष्म; बहुत महीन या पतला | दोनों मित्रों के विचारों में बाल बराबर भी अंतर नहीं है। |
| बाल बराबर फर्क होना | ज़रा-सा भी भेद होना; सूक्ष्मतम अंतर होना | दोनों चित्रों में बाल बराबर फर्क भी दिखाई नहीं देता। |
| बाल-बाल बचना | बहुत कम अंतर से विपत्ति या हानि से बच जाना | तेज ब्रेक लगाने से वह दुर्घटना में बाल-बाल बच गया। |
काल
क्रिया के जिस रूप से कार्य का समय (कब हुआ, हो रहा है या होगा) पता चले, उसे काल कहते हैं। काल तीन प्रकार के होते हैं – भूतकाल, वर्तमान काल एवं भविष्य काल। नीचे दिए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदला गया है।
| मूल वाक्य (भूतकाल) | वर्तमान काल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| (क) वह गिड़गिड़ाकर बोली। | वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। | वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी। |
| (ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी। | श्रीमान् आज्ञा देते हैं। | श्रीमान् आज्ञा देंगे। |
| (ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगती है। | उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी। |
| (घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होती है। | ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी। |
| (ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी। | वे वृद्धा से क्षमा माँगते हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे देते हैं। | वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस दे देंगे। |
वचन की पहचान
इन स्त्रीलिंग क्रिया-रूपों में नासिक्य चिह्न के अंतर से वचन का अंतर दिखता है; सम्मान के लिए भी बहुवचन हो सकता है, जैसे – ‘गई’ (एकवचन) / ‘गईं’ (बहुवचन)। नीचे रिक्त स्थानों की उपयुक्त पूर्ति दी गई है।
| क्रम | वाक्य (सही शब्द सहित) |
|---|---|
| (क) | वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। |
| (ख) | वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली। |
| (ग) | पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। |
| (घ) | उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी। |
| (ङ) | उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई। |
| (च) | झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं। |
| (छ) | पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं। |
कहानी की रचना
(क) कहानी की विशेषताएँ
संक्षिप्त कथा में आरंभिक समस्या, घटना-क्रम, संवाद, टोकरी का प्रतीक, चरित्र का परिवर्तन और अंत में समाधान जुड़ते हैं। ‘महाराज, नाराज न हों तो…’ का अधूरा वाक्य संवाद की झिझक/नाटकीयता दिखाता है।
(ख) छह विशेषताओं के उदाहरण
| विशेषता | पाठ का उदाहरण / प्रसंग |
|---|---|
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली | ‘उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?’ — चिंतन कराने वाला प्रश्न |
| 2. वर्णनात्मकता | ‘किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी।’ |
| 3. भावात्मकता | पुरानी बातों का स्मरण होने पर वृद्धा के आँसू बहने का प्रसंग |
| 4. संवादात्मकता | ‘महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ।’ |
| 5. नाटकीयता | स्वयं टोकरी उठाने का प्रयास और उसके बाद वृद्धा का मार्मिक प्रश्न |
| 6. चरित्र चित्रण | अहंकारी ज़मींदार का पश्चाताप करके घर लौटाना; वृद्धा की विनम्रता और सूझबूझ |
कहीं उद्धरण, कहीं प्रसंग का सार दिया है। ‘थकी हुई-सी…’ जैसा वाक्य मूल कहानी का उद्धरण नहीं; अपनी कल्पना को उद्धरण-चिह्नों में मूल पाठ न बताएँ।
शब्दकोश का उपयोग
नीचे दिए शब्दों के अनेक अर्थों में से कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त अर्थ चुना गया है।
| वाक्य | उपयुक्त अर्थ |
|---|---|
| 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए। | श्रीमान् – धनी/संपत्तिशाली व्यक्ति (तथा पुरुषों के नाम के पूर्व आदर-सूचक शब्द)। |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | कन्या – (छोटी) लड़की। |
| 3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | महल – राजा या रईस के रहने का बहुत बड़ा एवं बढ़िया मकान, प्रासाद। |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। | ज़माने – बहुत अधिक समय/काल। |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | आधार – सहारा, आश्रय देने वाला/पालन करने वाला। |
भावों की पहचान
नीचे दी पंक्तियों में प्रकट हो रहे भाव (भाववाचक संज्ञा) से मिलान किया गया है।
| क्रम | पंक्ति | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|---|
| 1 | वह लज्जित होकर कहने लगे— ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | लज्जा / पछतावा |
| 2 | वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। | बोध / आत्मज्ञान |
| 3 | उनके मन में कुछ दया आ गई। | करुणा / दया |
| 4 | इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | आस्था / विश्वास |
| 5 | महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | विनम्रता / विनय |
| 6 | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | ममता / स्नेह |
| 7 | ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | अहंकार / घमंड |
| 8 | उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | जुड़ाव / मोह |
| 9 | जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | दुख / पीड़ा |
| 10 | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | क्रूरता / अन्याय |
वाक्य विस्तार
नीचे दिए छोटे वाक्यों का, कहानी को ध्यान में रखते हुए, लगभग 15–20 शब्दों में विस्तार किया गया है।
| छोटा वाक्य | विस्तार |
|---|---|
| 1. एक झोंपड़ी थी। | किसी श्रीमान् ज़मींदार के विशाल महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की छोटी-सी पुरानी झोंपड़ी थी। |
| 2. श्रीमान् टहल रहे थे। | एक दिन श्रीमान् ज़मींदार उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और अपने नौकरों को काम बतला रहे थे। |
| 3. वह खाने लगेगी। | वृद्धा को विश्वास था कि अपने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर उसकी पोती फिर से रोटी खाने लगेगी। |
| 4. वृद्धा भीतर गई। | आज्ञा पाकर वह वृद्धा अपनी पुरानी झोंपड़ी के भीतर गई तो बीते दिनों की यादों से उसकी आँखें भर आईं। |
| 5. आगे बढ़े। | दया से भरकर ज़मींदार किसी नौकर से न कहकर स्वयं ही वह टोकरी उठाने को आगे बढ़े। |
संवाद फोन पर / पोती की भावनाएँ / आपकी बात
संवाद फोन पर — आधुनिक कल्पना
(क) नमूना:
ज़मींदार: बेटी, मुझे बताया गया कि तुम दुखी हो। थोड़ा भोजन कर लो।
पोती: मुझे घर की याद आती है। आप हमारा घर क्यों ले रहे हैं?
ज़मींदार: मैंने तुम्हारा दुख नहीं समझा था। इसे सुधारने के बारे में सोचूँगा।
यह आधुनिक कल्पना है; मूल कहानी में फोन नहीं। भोजन छोड़ना समाधान की सलाह नहीं।
(ख) संदेश का नमूना:
मित्र: 😟 घर छीनने से उनका जीवन कठिन होगा। अहाता बढ़ाने का दूसरा रास्ता देखो।
ज़मींदार: 😠 अभी मुझे सलाह नहीं चाहिए।
मित्र: 🤝 शांत होकर उनकी स्थिति समझो; किसी का नुकसान करके विस्तार उचित नहीं।
ज़मींदार: 😔 शायद मैं गलत हूँ; मुझे बात करनी चाहिए।
पोती की भावनाएँ
(क) जिलाधिकारी को पत्र का कल्पनात्मक नमूना:
सेवा में, जिलाधिकारी, [स्थान]
विषय: हमारी झोंपड़ी छिनने की समस्या पर सहायता का निवेदन
महोदय/महोदया,
मैं अपनी वृद्ध दादी के साथ रहती हूँ। हमारे घर पर अन्यायपूर्वक कब्जा होने से हमें दूसरी जगह रहना पड़ रहा है। घर से हमारा गहरा लगाव है। कृपया हमारी स्थिति की जाँच कर उचित सहायता प्रदान करें।
धन्यवाद।
भवदीया, [पोती का नाम]
[कल्पित तारीख और स्थान]
यह भाषा-अभ्यास है; वास्तविक शिकायत का तैयार कानूनी प्रारूप नहीं।
(ख) डायरी का नमूना: 2 मई—दादी परेशान लौटीं। उन्होंने बताया कि हमारा घर छिन गया। मुझे पुरानी झोंपड़ी की बहुत याद आई। कुछ दिन बाद—दादी मिट्टी लेने गईं। लौटकर बताया कि ज़मींदार ने क्षमा माँगी और घर लौटा दिया। मैं खुश हूँ कि दादी की बात सुनी गई। तारीख पुस्तक के दिए उदाहरण से ली है, ऐतिहासिक घटना का प्रमाण नहीं।
पाठ से आगे
आपकी बात — चार नमूने
(क) मेरे घर के आँगन से लगाव है क्योंकि हम वहाँ साथ बैठते हैं। (ख) प्रिय पुस्तक छोड़ना कठिन लगा क्योंकि उससे सीख जुड़ी थी। (ग) मित्र ने गलती मानकर उधार ली वस्तु लौटाई तो भरोसा बढ़ा। (घ) मैंने गुस्से में कठोर बात कही, फिर क्षमा माँगी और शांत ढंग से बोलना सीखा। अपने वास्तविक अनुभव लिखें; अनुभव न हो तो यही बताएँ।
न्याय और समता
(क) देखे/पढ़े किसी अन्याय का स्रोत और घटना लिखें; सुनी अफवाह को तथ्य न बताएँ। (ख) विश्वसनीय वयस्क को बताना, प्रभावित व्यक्ति की बात सुनना और सही सहायता की जानकारी जुटाना उपयोगी है। (ग) सच्ची शक्ति का अर्थ दूसरों को दबाना नहीं, न्याय और करुणा से जिम्मेदारी निभाना है।
घर-घर की कहानी
परिवार से सहमति लेकर पूछें: घर कब बना/कब रहने आए? किसने प्रयास किए? कौन-सी यादें जुड़ी हैं? अपने शब्दों में लिखें। किराए का घर, बदला हुआ घर या अन्य निवास भी अपना घर हो सकता है। निजी पता या निजी आर्थिक बातें कक्षा में साझा करना जरूरी नहीं।
न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
पृष्ठ 89 में दिए पोर्टल पढ़कर उनके उपयोग और सीमाएँ समझें। CPGRAMS सार्वजनिक प्राधिकरणों की सेवा-वितरण संबंधी शिकायतों के लिए है; उसका मुखपृष्ठ अदालत-संबंधी/विचाराधीन मामले इसके दायरे से बाहर बताता है। जनसुनवाई–समाधान यहाँ दिया उत्तर प्रदेश का पोर्टल है, हर राज्य का यही पता नहीं। सामाजिक-सुरक्षा योजनाओं की जानकारी के लिए ई-श्रम की योजना-सूची देखें। वास्तविक प्रक्रिया, क्षेत्र और शर्तें आधिकारिक साइट पर पढ़ें; यह पाठ्य गतिविधि है।
आज की पहेली — अक्षर जोड़ें
1. टोकरी (पुस्तक में उदाहरण); 2. याद; 3. वकील; 4. झोंपड़ी; 5. ज़मींदार; 6. कलाई। दिए अक्षरों/मात्राओं को सही क्रम में रखें।
खोजबीन के लिए
पुस्तकालय से हितोपदेश की एक कहानी चुनें। शीर्षक और स्रोत, पात्र, मुख्य समस्या, घटनाएँ और सीख लिखें; फिर अपने शब्दों में कक्षा में सुनाएँ। किसी दूसरी लोककथा को बिना जाँच हितोपदेश की रचना न कहें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
अति लघु / लघु उत्तरीय
1. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के लेखक कौन हैं और वे कहाँ के निवासी थे?
2. वृद्धा ज़मींदार से केवल एक टोकरी भर मिट्टी क्यों ले जाना चाहती थी?
3. ज़मींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास किसी नौकर से क्यों नहीं कराया?
4. ज़मींदार की आँखें किस बात से खुलीं?
5. कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का उद्देश्य एवं संदेश स्पष्ट कीजिए।
7. ज़मींदार के चरित्र में आरंभ से अंत तक किस प्रकार परिवर्तन आता है? सोदाहरण लिखिए।
8. इस कहानी के आलोक में बताइए कि समाज में स्त्रियों, विशेषकर अकेली या सहायता की जरूरत वाली स्त्रियों, के सम्मान और न्याय की रक्षा क्यों आवश्यक है?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) माधवराव सप्रे
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) महादेवी वर्मा
2. ज़मींदार झोंपड़ी क्यों हटवाना चाहता था?
(क) झोंपड़ी जर्जर थी
(ख) वृद्धा से पुराना झगड़ा था
(ग) अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए
(घ) वहाँ सड़क बनानी थी
3. वृद्धा झोंपड़ी से क्या ले जाना चाहती थी?
(क) एक टोकरी भर अनाज
(ख) एक टोकरी भर मिट्टी
(ग) पुराना चूल्हा
(घ) अपने कुछ बर्तन
4. वृद्धावस्था में वृद्धा का एकमात्र सहारा कौन थी?
(क) उसका पुत्र
(ख) उसकी पतोहू
(ग) उसकी पोती
(घ) ज़मींदार
5. ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा किस प्रकार किया?
(क) वृद्धा से खरीदकर
(ख) वकीलों को रिश्वत देकर अदालत के द्वारा
(ग) बलपूर्वक मारपीट करके
(घ) पंचायत के निर्णय से
6. पोती ने खाना-पीना क्यों छोड़ दिया था?
(क) वह बीमार थी
(ख) उसे भोजन पसंद नहीं था
(ग) अपने घर के छिन जाने के दुख और जिद में
(घ) ज़मींदार के डर से
7. टोकरी न उठा पाने पर ज़मींदार का भाव कैसा हुआ?
(क) वह क्रोधित हुआ
(ख) वह लज्जित एवं चिंतित हुआ
(ग) वह प्रसन्न हुआ
(घ) वह भयभीत हुआ
8. कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?
(क) धन-संपत्ति का
(ख) अन्याय एवं पाप के नैतिक भार का
(ग) खेती का
(घ) समय का
9. कहानी का अंत किस प्रकार का है?
(क) दुखद
(ख) सुखद एवं प्रेरणादायक
(ग) रहस्यमय
(घ) अनिर्णीत
10. कहानी का प्रमुख संदेश क्या है?
(क) धन ही सबसे बड़ा है
(ख) सच्ची शक्ति दया और न्याय में है
(ग) बल से सब कुछ पाया जा सकता है
(घ) गरीबों को चुप रहना चाहिए
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): वृद्धा झोंपड़ी से केवल एक टोकरी भर मिट्टी ले जाना चाहती थी।
कारण (R): वह उस मिट्टी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी, ताकि पोती फिर खाना खाने लगे।
2. अभिकथन (A): ज़मींदार टोकरी भर मिट्टी को उठा नहीं सका।
कारण (R): वह शारीरिक रूप से बहुत दुर्बल एवं रोगी था।
3. अभिकथन (A): अंत में ज़मींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा दी।
कारण (R): वृद्धा के वचनों से उसे अपने अन्याय का बोध हुआ और गहरा पश्चाताप हुआ।
4. अभिकथन (A): वृद्धा की पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया था।
कारण (R): उसे अपने पुश्तैनी घर (झोंपड़ी) से गहरा लगाव था।
5. अभिकथन (A): ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कानून का सहारा लेकर न्यायपूर्वक कब्जा किया।
कारण (R): उसने वकीलों को रिश्वत देकर अदालत से अनुचित ढंग से कब्जा करवाया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) हैं, जिनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था।
कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?
कहानी में ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ अन्याय, पाप और नैतिक उत्तरदायित्व के भार का प्रतीक है, जिसे ज़मींदार उठा नहीं पाता।
ज़मींदार ने अंत में झोंपड़ी क्यों लौटा दी?
वृद्धा के मार्मिक प्रश्न से ज़मींदार को अपने अन्याय का बोध हुआ; पश्चाताप से उसका हृदय बदल गया और उसने क्षमा माँगकर झोंपड़ी वापस दे दी।
इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
कहानी सिखाती है कि सच्ची शक्ति दया और न्याय में है; धन-बल के घमंड में किसी असहाय का अधिकार छीनना सबसे बड़ा पाप है और सच्चे पश्चाताप से उसका प्रायश्चित संभव है।
प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
