कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 6 – एक टोकरी भर मिट्टी (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 6 ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ (लेखक – माधवराव सप्रे) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, पुस्तक की सभी अभ्यास-गतिविधियों के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (गद्य) अध्याय: 6 लेखक: माधवराव सप्रे विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – माधवराव सप्रे

हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ का उल्लेख प्रायः किया जाता है और इसके लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) हैं। उनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था और उनकी मातृभाषा मराठी थी। ऐसा माना जाता है कि वे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए थे। उन्होंने लोकमान्य तिलक के चर्चित ग्रंथ गीता-रहस्य का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था। स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उनकी कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि समाज के ताने-बाने में गाँठ बनकर अटके अनेक प्रश्नों को सहज ढंग से उठाती हैं। ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ भी ऐसी ही कहानी है, जो लोभ, अन्याय, करुणा और आत्मबोध जैसे गहरे प्रश्नों को एक छोटी-सी टोकरी के बहाने हमारे सामने रख देती है।

पाठ का सार

किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार की इच्छा हुई कि वह अपने महल का अहाता उसी झोंपड़ी तक बढ़ा ले। उसने वृद्धा से बहुत कहा कि वह अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़मानों से वहीं बसी थी। उसी झोंपड़ी में उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र मर चुके थे, पतोहू भी पाँच बरस की एक कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब वही पोती उसके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी।

वृद्धा के न मानने पर ज़मींदार ने ज़मींदारी चाल चली। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम करके उसने अदालत से उस झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। बेचारी अनाथ पास-पड़ोस में कहीं रहने लगी। जब से झोंपड़ी छूटी, तब से वृद्धा की पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया और जिद करने लगी कि वह अपने घर में ही रोटी खाएगी।

एक दिन वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर ज़मींदार के पास पहुँची और विनती की कि वह झोंपड़ी की एक टोकरी भर मिट्टी ले जाए, ताकि उसी का चूल्हा बनाकर पोती के लिए रोटी पका सके और पोती खाना खाने लगे। ज़मींदार ने आज्ञा दे दी। वृद्धा ने मिट्टी से टोकरी भरी और फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि महाराज ज़रा टोकरी को हाथ लगा दें, जिससे वह उसे सिर पर रख ले।

ज़मींदार पहले तो बहुत नाराज हुआ, पर बार-बार हाथ जोड़ने और पैरों पर गिरने से उसके मन में दया आ गई। उसने स्वयं टोकरी उठानी चाही, पर वह एक हाथ भी ऊँची न हुई। तब वृद्धा ने कहा – जब आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठती, तो इस झोंपड़ी की हजारों टोकरियों मिट्टी का भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? यह सुनते ही धन-मद में डूबे ज़मींदार की आँखें खुल गईं। उसने अपने किए पर पश्चाताप किया, वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी। इस प्रकार एक छोटी-सी टोकरी ने अन्याय के नैतिक भार का बोध कराकर बड़ा परिवर्तन ला दिया।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
श्रीमान्संपन्न, धनी एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति; पुरुषों के नाम के पूर्व आदर-सूचक शब्द
अहाताचारदीवारी से घिरा खुला आँगन या परिसर
वृद्धाबूढ़ी स्त्री
झोंपड़ीघास-फूस या मिट्टी की बनी छोटी कुटिया
पतोहूपुत्रवधू, बहू
पूर्वस्थितिपहले की दशा या हालत
मृतप्रायजो लगभग मरने जैसी स्थिति में हो
निष्फलव्यर्थ, असफल
बाल की खाल निकालनाकिसी बात की अत्यधिक छानबीन या नुक्ताचीनी करना
थैली गरम करनारिश्वत देना, पैसे से वश में करना
कब्जाअधिकार में लेना, हथिया लेना
गिड़गिड़ानादीनता से बार-बार विनती करना
विनतीनम्र प्रार्थना, निवेदन
स्मरणयाद, सुधि
आंतरिकभीतर का, मन के भीतर का
प्रार्थनाविनम्र निवेदन, याचना
लज्जितशर्मिंदा, संकोच में पड़ा हुआ
धन-मदधन-संपत्ति का घमंड
गर्वितअभिमान से भरा हुआ
कर्तव्यकरने योग्य कार्य, फर्ज
कृतकर्मकिया हुआ काम (विशेषतः बुरा काम)
पश्चातापकिए पर पछतावा, अनुताप
क्षमामाफी, अपराध को क्षमा करना

नीचे पुस्तक ‘मल्हार’ की सभी अभ्यास-गतिविधियाँ उसी क्रम एवं शीर्षक के साथ दी गई हैं। प्रश्न पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर मौलिक हैं। कुछ गतिविधियाँ विद्यार्थी की अपनी कल्पना/अनुभव पर आधारित हैं, जिनके लिए संकेत-सहित नमूना उत्तर दिए गए हैं।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?• झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था

उत्तरसही विकल्प – ‘वह अहाते का विस्तार करना चाहता था’।ज़मींदार के मन में अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई थी, इसीलिए उसने झोंपड़ी हटवानी चाही। शेष विकल्प पाठ में कहीं नहीं आए हैं।

(2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?• क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुमति लेकर • विनती और नम्रता से • चुपचाप उठाकर ले गई

उत्तरसही विकल्प – ‘विनती और नम्रता से’।वृद्धा हाथ जोड़कर, गिड़गिड़ाकर बोली – “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है”। उसने पूरी नम्रता एवं प्रार्थना के साथ मिट्टी ले जाने की आज्ञा माँगी।

(3) वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?• दया • लगाव • गुस्सा • डर

उत्तरसही विकल्प – ‘लगाव’ (अपने घर से मोह)।पोती ने इसी कारण खाना-पीना छोड़ दिया और जिद की कि वह अपने ही घर में रोटी खाएगी – यह उसका अपने घर के प्रति गहरा लगाव और अपनापन दर्शाता है। (कुछ विद्यार्थी इसमें जिद/हठ का भाव भी देख सकते हैं।)

(4) कहानी का अंत कैसा है?• दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक

उत्तरसही विकल्प – ‘सुखद’, ‘प्रेरणादायक’ एवं ‘सकारात्मक’ (एक से अधिक उत्तर)।अंत में ज़मींदार को अपनी भूल का बोध होता है, वह क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा देता है। यह अंत सुखद भी है, सकारात्मक भी और हृदय-परिवर्तन का संदेश देने के कारण प्रेरणादायक भी।

(ख) हो सकता है आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों – अपने मित्रों से चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने। (समूह-चर्चा गतिविधि।)

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ में से चुने कुछ वाक्यों के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। प्रत्येक का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष से मिलान नीचे दिया गया है।

क्रमपाठ में से वाक्यसर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष
1अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी।
2बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दाँव-पेच से झोंपड़ी पर कब्जा किया।
3आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है।वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया।
4ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था।
5कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी।
6उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है।
7कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया।
8उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई।

(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्ष चुने और क्यों। (समूह-चर्चा गतिविधि।)

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनी कुछ पंक्तियों का भाव नीचे स्पष्ट किया गया है।

(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”

भाववृद्धा यहाँ केवल मिट्टी के भौतिक भार की बात नहीं कर रही; वह ‘मिट्टी’ को अन्याय के नैतिक भार का प्रतीक बना देती है।जब एक टोकरी भर मिट्टी ही नहीं उठती, तो पूरी झोंपड़ी छीनने के पाप (अन्याय) का बोझ जीवन-भर कैसे उठाया जा सकेगा – यह प्रश्न ज़मींदार की अंतरात्मा को झकझोर देता है।

(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”

भावइन पंक्तियों में ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखता है – वृद्धा की दीनता देखकर उसके कठोर मन में दया जागती है और वह स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ता है।टोकरी का न उठना केवल शारीरिक असमर्थता नहीं, बल्कि उस अन्याय के भार का प्रतीक है जिसे वह उठा नहीं सकता – यही घटना उसके आत्मबोध और पश्चाताप का कारण बनती है।

सोच-विचार के लिए

(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?

उत्तरकहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है।वह गरीब, अनाथ और असहाय होते हुए भी न क्रोध करती है, न झगड़ा; बल्कि विनम्रता और बुद्धिमत्ता से ‘एक टोकरी मिट्टी’ के प्रतीक द्वारा शक्तिशाली ज़मींदार को उसके अन्याय का बोध करा देती है।उसकी सूझबूझ ही कहानी को मोड़ देती है और ज़मींदार का हृदय बदलती है – इसी कारण वह सबसे प्रभावशाली पात्र है। (विद्यार्थी चाहें तो अपने तर्क से ज़मींदार को भी चुन सकते हैं।)

(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?

उत्तरपोती को अपने पुश्तैनी घर से गहरा लगाव था। झोंपड़ी छिन जाने के दुख में उसने खाना-पीना छोड़ दिया और जिद करने लगी कि वह अपने ही घर में रोटी खाएगी।

(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?

उत्तरवृद्धा के न मानने पर ज़मींदार ने ज़मींदारी चाल चली। उसने बाल की खाल निकालने वाले (अत्यंत चालाक) वकीलों को पैसे देकर अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा करवा लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया – अर्थात् छल और कानूनी दाँव-पेच से अन्यायपूर्वक कब्जा किया।

(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…”। यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?

उत्तरयहाँ सिर हिलाना ‘हाँ’ अथवा सहमति का संकेत है। इसका अर्थ है कि ज़मींदार ने मौन रहकर वृद्धा को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी – अर्थात् ‘कहो, क्या कहना है’।

(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तरपहले: ज़मींदार धन-मद से भरा, अहंकारी और निर्दयी था। उसने छल से गरीब वृद्धा का घर छीन लिया और उसे ‘हटा दो’ कहकर तिरस्कृत किया।परिवर्तन: वृद्धा की दीनता से उसके मन में दया जागी; वह स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ा। टोकरी न उठने और वृद्धा के मार्मिक प्रश्न से उसकी आँखें खुल गईं, उसे पश्चाताप हुआ और उसने क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा दी – अर्थात् अहंकारी ज़मींदार करुणाशील एवं न्यायप्रिय बन गया।

(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?

उत्तरवृद्धा के मार्मिक वचनों ने ज़मींदार को यह बोध कराया कि जब एक टोकरी मिट्टी का भार उससे नहीं उठता, तो अन्याय का नैतिक भार वह जीवन-भर कैसे ढोएगा।इस आत्मबोध से उसका अहंकार टूट गया और उसे अपने कृतकर्म पर गहरा पश्चाताप हुआ; इसी कारण उसने क्षमा माँगी और झोंपड़ी लौटा दी।

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?

उत्तर (संभावित)वह कहती – “महाराज, यह झोंपड़ी ही मेरा घर और मेरी दुनिया है। यहीं मेरे पुरखे रहे, यहीं मेरी यादें बसी हैं।आपके पास तो बड़ा महल है, फिर इस छोटी-सी झोंपड़ी के लिए हम बेसहारा क्यों किए जाएँ? कृपया हमारा घर हमें लौटा दीजिए।”

(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?

उत्तर (संभावित)यदि मैं ज़मींदार होता तो किसी गरीब, अनाथ वृद्धा का घर कभी न छीनता।अहाता बढ़ाने के लिए मैं या तो दूसरा रास्ता चुनता या वृद्धा को उचित मुआवजा एवं रहने का बेहतर स्थान देता – क्योंकि सच्ची शक्ति दया और न्याय में है, अन्याय में नहीं।

(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?

उत्तरवस्तुतः एक टोकरी भर मिट्टी इतनी भारी नहीं थी कि उठ ही न सके। यह घटना प्रतीकात्मक है।वह मिट्टी अन्याय और पाप के नैतिक भार का प्रतीक थी; अपने अपराध-बोध के कारण ज़मींदार को वह टोकरी असह्य बोझ-सी लगी और वह उसे उठा न सका।

(घ) “झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है…”। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है? (संकेत— मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)

उत्तरयहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं है; मिट्टी अन्याय, पाप और नैतिक उत्तरदायित्व के भार का प्रतीक है।मिट्टी के बहाने वृद्धा यह कहना चाहती है कि जब एक टोकरी मिट्टी ही नहीं उठती, तो पूरी झोंपड़ी छीनने के अन्याय का बोझ ज़मींदार जीवन-भर अपनी आत्मा पर कैसे उठा सकेगा – अर्थात् बुरे कर्म का बोझ सबसे भारी होता है।

(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?

उत्तरउस समय अकेली, विधवा या अनाथ स्त्री को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता था; उसके पास आय और संपत्ति के स्वतंत्र अधिकार प्रायः नहीं होते थे।शक्तिशाली व धनी लोग छल-बल से उनकी संपत्ति हड़प लेते थे और न्याय पाना कठिन था।शिक्षा एवं सामाजिक सहारे के अभाव में उन्हें दया पर निर्भर रहना पड़ता था – इस प्रकार उन्हें अन्याय, उपेक्षा और असहायता जैसी अनेक चुनौतियाँ झेलनी पड़ती होंगी।

बदली कहानी

कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती – यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता; यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता; यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता; यदि ज़मींदार एक स्त्री होती; यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती। नीचे एक स्थिति का नमूना दिया गया है –

स्थिति – यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता: यदि ज़मींदार वह टोकरी सहज ही उठा लेता, तो वृद्धा का प्रतीकात्मक तर्क अधूरा रह जाता। तब शायद वृद्धा सीधे शब्दों में कहती – “महाराज, टोकरी का भार तो आपने उठा लिया, पर मेरे पूरे घर और मेरी पोती के आँसुओं का भार भी क्या आप उठा सकेंगे?” इस पर ज़मींदार सोच में पड़ जाता और संभवतः अपनी भूल समझकर झोंपड़ी लौटा देता – कहानी का संदेश तब भी न्याय और करुणा की ओर ही मुड़ता।

अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए और बदली हुई कहानी मिलकर लिखिए। (समूह-लेखन गतिविधि।)

‘कि’ और ‘की’ का उपयोग

‘कि’ एक संयोजक (जोड़ने वाला) शब्द है, जबकि ‘की’ संबंधसूचक कारक शब्द है। नीचे रिक्त स्थानों की पूर्ति की गई है।

क्रमवाक्य (सही शब्द सहित)
1वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
2वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।
3वृद्धा ने प्रार्थना की कि टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
4पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
5झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
6उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
7वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
8उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
9वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
10ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
11उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी।

मुहावरे

“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।” (क) इस वाक्य में दो मुहावरे हैं – बाल की खाल निकालना और थैली गरम करना। (ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग नीचे दिए गए हैं।

मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
बाल की खाल निकालनाकिसी बात की अत्यधिक छानबीन या नुक्ताचीनी करनाहर बात में बाल की खाल निकालने से समय व्यर्थ होता है।
थैली गरम करनारिश्वत देना, पैसे से वश में करनाउसने अधिकारी की थैली गरम करके अपना काम करवा लिया।
बाल बाँका न होनाकुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना; पूर्णतः सुरक्षित रहनादुर्घटना भयंकर थी, फिर भी उसका बाल बाँका न हुआ।
बाल बराबरबहुत सूक्ष्म; बहुत महीन या पतलादोनों मित्रों के विचारों में बाल बराबर भी अंतर नहीं है।
बाल बराबर फर्क होनाज़रा-सा भी भेद होना; सूक्ष्मतम अंतर होनादोनों चित्रों में बाल बराबर फर्क भी दिखाई नहीं देता।
बाल-बाल बचनाविपत्ति या हानि से बहुत थोड़ी कमी से बच जानातेज ब्रेक लगाने से वह दुर्घटना में बाल-बाल बच गया।

काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य का समय (कब हुआ, हो रहा है या होगा) पता चले, उसे काल कहते हैं। काल तीन प्रकार के होते हैं – भूतकाल, वर्तमान काल एवं भविष्य काल। नीचे दिए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदला गया है।

मूल वाक्य (भूतकाल)वर्तमान कालभविष्य काल
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।वह गिड़गिड़ाकर बोलती है।वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।श्रीमान् आज्ञा देते हैं।श्रीमान् आज्ञा देंगे।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगती है।उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी।
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होती है।ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।वे वृद्धा से क्षमा माँगते हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे देते हैं।वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस दे देंगे।

वचन की पहचान

शब्द में केवल एक अनुस्वार-भर के अंतर से अर्थ (एकवचन/बहुवचन) बदल जाता है, जैसे – ‘गई’ (एकवचन) / ‘गईं’ (बहुवचन)। नीचे रिक्त स्थानों की उपयुक्त पूर्ति दी गई है।

क्रमवाक्य (सही शब्द सहित)
(क)वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई
(ख)वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली
(ग)पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है
(घ)उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी
(ङ)उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई
(च)झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं
(छ)पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं

कहानी की रचना

लेखक ने ‘…’ जैसे प्रयोगों, संवादों और भावपूर्ण वर्णन से कहानी को प्रभावशाली बनाया है। नीचे कहानी की कुछ विशेषताओं के उदाहरण कहानी से चुनकर दिए गए हैं।

कहानी की विशेषताकहानी से उदाहरण
1. प्रश्नोत्तरी शैली (सोचने पर विवश करने वाले प्रश्न)“उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।”
2. वर्णनात्मकता (दृश्य खींचने वाला वर्णन)“थकी हुई-सी वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची” तथा झोंपड़ी एवं महल का चित्रण।
3. भावात्मकता (करुणा, पछतावा, प्रेम)“उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।”
4. संवादात्मकता (संवादों से कथा का बढ़ना)“महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ…”
5. नाटकीयता (नाटक जैसे प्रभावशाली दृश्य)ज़मींदार का स्वयं आगे बढ़कर टोकरी उठाने की चेष्टा करना और उसका न उठ पाना।
6. चरित्र चित्रण (पात्रों के गुण-स्वभाव की झलक)अहंकारी किंतु अंततः पश्चातापी ज़मींदार और विनम्र, बुद्धिमती वृद्धा का चित्रण।

शब्दकोश का उपयोग

नीचे दिए शब्दों के अनेक अर्थों में से कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त अर्थ चुना गया है।

वाक्यउपयुक्त अर्थ
1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए।श्रीमान् – धनी/संपत्तिशाली व्यक्ति (तथा पुरुषों के नाम के पूर्व आदर-सूचक शब्द)।
2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी।कन्या – (छोटी) लड़की।
3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।महल – राजा या रईस के रहने का बहुत बड़ा एवं बढ़िया मकान, प्रासाद।
4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी।ज़माने – बहुत अधिक समय/काल।
5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।आधार – सहारा, आश्रय देने वाला/पालन करने वाला।

भावों की पहचान

नीचे दी पंक्तियों में प्रकट हो रहे भाव (भाववाचक संज्ञा) से मिलान किया गया है।

क्रमपंक्तिभाववाचक संज्ञा
1वह लज्जित होकर कहने लगे— ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’लज्जा / पछतावा
2वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं।बोध / आत्मज्ञान
3उनके मन में कुछ दया आ गई।करुणा / दया
4इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी।आस्था / विश्वास
5महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।विनम्रता / विनय
6अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।ममता / स्नेह
7ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।अहंकार / घमंड
8उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी।जुड़ाव / मोह
9जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी।दुख / पीड़ा
10बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।क्रूरता / अन्याय

वाक्य विस्तार

नीचे दिए छोटे वाक्यों का, कहानी को ध्यान में रखते हुए, लगभग 15–20 शब्दों में विस्तार किया गया है।

छोटा वाक्यविस्तार
1. एक झोंपड़ी थी।किसी श्रीमान् ज़मींदार के विशाल महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की छोटी-सी पुरानी झोंपड़ी थी।
2. श्रीमान् टहल रहे थे।एक दिन श्रीमान् ज़मींदार उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और अपने नौकरों को काम बतला रहे थे।
3. वह खाने लगेगी।वृद्धा को विश्वास था कि अपने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर उसकी पोती फिर से रोटी खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई।आज्ञा पाकर वह वृद्धा अपनी पुरानी झोंपड़ी के भीतर गई तो बीते दिनों की यादों से उसकी आँखें भर आईं।
5. आगे बढ़े।दया से भरकर ज़मींदार किसी नौकर से न कहकर स्वयं ही वह टोकरी उठाने को आगे बढ़े।

संवाद फोन पर / पोती की भावनाएँ / आपकी बात

पुस्तक की निम्न गतिविधियाँ विद्यार्थी की कल्पना एवं अनुभव पर आधारित हैं। नीचे संक्षिप्त संकेत एवं नमूने दिए गए हैं।

संवाद फोन पर (नमूना): ज़मींदार पोती को फोन करके समझाता है – “बेटी, जिद छोड़ दो, खाना खा लो। मैं तुम्हारा घर लौटा दूँगा।” पोती कहती है – “महाराज, घर सिर्फ ईंट-मिट्टी नहीं, हमारी यादें हैं; अगर सचमुच घर मिल जाए तो मैं ज़रूर खाना खा लूँगी।” (मोबाइल पर लिखित चर्चा में भाव-मुद्रा/इमोजी भी जोड़ी जा सकती है।)

पोती की भावनाएँ (संकेत): (क) अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को नम्र भाषा में पत्र – विषय, अभिवादन, समस्या (घर छिनना), विनम्र प्रार्थना और धन्यवाद सहित लिखें। (ख) पोती की डायरी – “आज हमारा घर छिन गया… मेरा मन भारी है… पर विश्वास है कि न्याय अवश्य मिलेगा।”

आपकी बात (संकेत): अपने घर/किसी प्रिय स्थान या वस्तु से लगाव का अनुभव; किसी को अपने किए पर पश्चाताप करते देखने का अनुभव; और “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है” पर अपने विचार – ये विद्यार्थी अपने अनुभव से लिखें।

पुस्तक की अन्य गतिविधियाँ – ‘घर-घर की कहानी’, ‘न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता’ (नागरिक शिकायत: pgportal.gov.in, जनसुनवाई आदि), ‘आज की पहेली’ (अक्षरों से शब्द: 2. याद, 3. वकील, 4. झोंपड़ी, 5. ज़मींदार, 6. कलाई) तथा ‘खोजबीन के लिए’ (हितोपदेश की कहानियाँ पढ़ना) – ये व्यावहारिक एवं समूह गतिविधियाँ हैं, जिन्हें विद्यार्थी कक्षा/पुस्तकालय में करें।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु / लघु उत्तरीय

1. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के लेखक कौन हैं और वे कहाँ के निवासी थे?

उत्तरइस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। उनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था और उनकी मातृभाषा मराठी थी।

2. वृद्धा ज़मींदार से केवल एक टोकरी भर मिट्टी क्यों ले जाना चाहती थी?

उत्तरवृद्धा अपनी झोंपड़ी की एक टोकरी मिट्टी से चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी, क्योंकि उसे विश्वास था कि अपने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर उसकी जिद्दी पोती फिर से खाना खाने लगेगी।

3. ज़मींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास किसी नौकर से क्यों नहीं कराया?

उत्तरवृद्धा के बार-बार हाथ जोड़ने और पैरों पर गिरने से ज़मींदार के मन में दया आ गई थी; इसी करुणा-भाव के कारण उसने किसी नौकर को न कहकर स्वयं ही टोकरी उठाने का प्रयास किया।

4. ज़मींदार की आँखें किस बात से खुलीं?

उत्तरजब वृद्धा ने कहा कि जब एक टोकरी भर मिट्टी ही नहीं उठती, तो पूरी झोंपड़ी (हजारों टोकरियों मिट्टी) के अन्याय का भार जन्म-भर कैसे उठाया जाएगा – इस मार्मिक प्रश्न ने ज़मींदार को उसके पाप का बोध करा दिया और उसकी आँखें खुल गईं।

5. कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?

उत्तरकहानी में ‘मिट्टी’ अन्याय, पाप तथा नैतिक उत्तरदायित्व के भार का प्रतीक है, जिसे ज़मींदार उठा नहीं पाता।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का उद्देश्य एवं संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तरयह कहानी धन और सत्ता के अहंकार में डूबे व्यक्ति के हृदय-परिवर्तन की मार्मिक कथा है।ज़मींदार लोभवश एक असहाय वृद्धा का घर छीन लेता है, पर एक गरीब स्त्री अपनी बुद्धिमत्ता एवं विनम्रता से ‘एक टोकरी मिट्टी’ के प्रतीक द्वारा उसे यह अनुभव कराती है कि अन्याय का नैतिक भार सबसे भारी होता है।कहानी का संदेश है कि सच्ची शक्ति दया और न्याय में है; धन एवं बल का दुरुपयोग कर किसी असहाय का अधिकार छीनना सबसे बड़ा पाप है, और सच्चे पश्चाताप से उसका प्रायश्चित किया जा सकता है।

7. ज़मींदार के चरित्र में आरंभ से अंत तक किस प्रकार परिवर्तन आता है? सोदाहरण लिखिए।

उत्तरआरंभ में ज़मींदार धन-मद से भरा, अहंकारी, स्वार्थी और निर्दयी है। वह अहाता बढ़ाने के लोभ में छल-बल से गरीब वृद्धा की झोंपड़ी हड़प लेता है और उसे ‘यहाँ से हटा दो’ कहकर तिरस्कृत करता है।मध्य में वृद्धा की दीनता और प्रार्थना से उसके कठोर मन में दया का अंकुर फूटता है; वह स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ता है।अंत में टोकरी न उठने और वृद्धा के मार्मिक प्रश्न से उसका अहंकार टूट जाता है। उसे गहरा पश्चाताप होता है, वह क्षमा माँगता है और झोंपड़ी लौटा देता है – इस प्रकार एक अहंकारी ज़मींदार करुणाशील एवं न्यायप्रिय व्यक्ति बन जाता है।

8. इस कहानी के आलोक में बताइए कि समाज में स्त्रियों, विशेषकर असहाय एवं अकेली स्त्रियों, के अधिकारों की रक्षा क्यों आवश्यक है?

उत्तरकहानी में दिखाया गया है कि शक्तिशाली व्यक्ति आसानी से अकेली, गरीब एवं अनाथ स्त्री की संपत्ति छल से छीन सकते हैं और न्याय पाना उसके लिए कठिन होता है।यदि समाज और कानून ऐसी स्त्रियों के घर, संपत्ति और सम्मान के अधिकारों की रक्षा न करें, तो वे शोषण और अन्याय का सहज शिकार बन जाती हैं।अतः शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा, संपत्ति के समान अधिकार और सुलभ न्याय-व्यवस्था के द्वारा उनके अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है, ताकि समाज में समता और न्याय बना रहे।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) माधवराव सप्रे

(ग) जयशंकर प्रसाद

(घ) महादेवी वर्मा

उत्तर(ख) माधवराव सप्रे।

2. ज़मींदार झोंपड़ी क्यों हटवाना चाहता था?

(क) झोंपड़ी जर्जर थी

(ख) वृद्धा से पुराना झगड़ा था

(ग) अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए

(घ) वहाँ सड़क बनानी थी

उत्तर(ग) अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए।

3. वृद्धा झोंपड़ी से क्या ले जाना चाहती थी?

(क) एक टोकरी भर अनाज

(ख) एक टोकरी भर मिट्टी

(ग) पुराना चूल्हा

(घ) अपने कुछ बर्तन

उत्तर(ख) एक टोकरी भर मिट्टी।

4. वृद्धावस्था में वृद्धा का एकमात्र सहारा कौन थी?

(क) उसका पुत्र

(ख) उसकी पतोहू

(ग) उसकी पोती

(घ) ज़मींदार

उत्तर(ग) उसकी पोती।

5. ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा किस प्रकार किया?

(क) वृद्धा से खरीदकर

(ख) वकीलों को रिश्वत देकर अदालत के द्वारा

(ग) बलपूर्वक मारपीट करके

(घ) पंचायत के निर्णय से

उत्तर(ख) वकीलों को रिश्वत देकर अदालत के द्वारा।

6. पोती ने खाना-पीना क्यों छोड़ दिया था?

(क) वह बीमार थी

(ख) उसे भोजन पसंद नहीं था

(ग) अपने घर के छिन जाने के दुख और जिद में

(घ) ज़मींदार के डर से

उत्तर(ग) अपने घर के छिन जाने के दुख और जिद में।

7. टोकरी न उठा पाने पर ज़मींदार का भाव कैसा हुआ?

(क) वह क्रोधित हुआ

(ख) वह लज्जित एवं चिंतित हुआ

(ग) वह प्रसन्न हुआ

(घ) वह भयभीत हुआ

उत्तर(ख) वह लज्जित एवं चिंतित हुआ – “नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।”

8. कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?

(क) धन-संपत्ति का

(ख) अन्याय एवं पाप के नैतिक भार का

(ग) खेती का

(घ) समय का

उत्तर(ख) अन्याय एवं पाप के नैतिक भार का।

9. कहानी का अंत किस प्रकार का है?

(क) दुखद

(ख) सुखद एवं प्रेरणादायक

(ग) रहस्यमय

(घ) अनिर्णीत

उत्तर(ख) सुखद एवं प्रेरणादायक – ज़मींदार पश्चाताप कर झोंपड़ी लौटा देता है।

10. कहानी का प्रमुख संदेश क्या है?

(क) धन ही सबसे बड़ा है

(ख) सच्ची शक्ति दया और न्याय में है

(ग) बल से सब कुछ पाया जा सकता है

(घ) गरीबों को चुप रहना चाहिए

उत्तर(ख) सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): वृद्धा झोंपड़ी से केवल एक टोकरी भर मिट्टी ले जाना चाहती थी।

कारण (R): वह उस मिट्टी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाना चाहती थी, ताकि पोती फिर खाना खाने लगे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ज़मींदार टोकरी भर मिट्टी को उठा नहीं सका।

कारण (R): वह शारीरिक रूप से बहुत दुर्बल एवं रोगी था।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – टोकरी का न उठना अन्याय के नैतिक भार का प्रतीक था, उसकी दुर्बलता का नहीं।

3. अभिकथन (A): अंत में ज़मींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा दी।

कारण (R): वृद्धा के वचनों से उसे अपने अन्याय का बोध हुआ और गहरा पश्चाताप हुआ।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): वृद्धा की पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया था।

कारण (R): उसे अपने पुश्तैनी घर (झोंपड़ी) से गहरा लगाव था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कानून का सहारा लेकर न्यायपूर्वक कब्जा किया।

कारण (R): उसने वकीलों को रिश्वत देकर अदालत से अनुचित ढंग से कब्जा करवाया था।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – कब्जा न्यायपूर्वक नहीं, बल्कि छल एवं रिश्वत से किया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘एक टोकरी भर मिट्टी’ के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे (1871–1926) हैं, जिनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था।

कहानी में ‘मिट्टी’ किसका प्रतीक है?

कहानी में ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ अन्याय, पाप और नैतिक उत्तरदायित्व के भार का प्रतीक है, जिसे ज़मींदार उठा नहीं पाता।

ज़मींदार ने अंत में झोंपड़ी क्यों लौटा दी?

वृद्धा के मार्मिक प्रश्न से ज़मींदार को अपने अन्याय का बोध हुआ; पश्चाताप से उसका हृदय बदल गया और उसने क्षमा माँगकर झोंपड़ी वापस दे दी।

इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?

कहानी सिखाती है कि सच्ची शक्ति दया और न्याय में है; धन-बल के घमंड में किसी असहाय का अधिकार छीनना सबसे बड़ा पाप है और सच्चे पश्चाताप से उसका प्रायश्चित संभव है।

प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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