NCERT Solutions for Class 10 Hindi (कृतिका 2) अध्याय 1: माता का अँचल – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका (भाग 2) के अध्याय 1 ‘माता का अँचल’ (लेखक – शिवपूजन सहाय) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – शिवपूजन सहाय
शिवपूजन सहाय का जन्म सन् 1893 में बिहार के शाहाबाद (अब भोजपुर) जिले के उनवाँस गाँव में हुआ था। वे हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार, संपादक और गद्य-शिल्पी थे। उन्होंने अध्यापन और पत्रकारिता से जीवन आरंभ किया तथा मतवाला, माधुरी, गंगा, हिमालय, बालक आदि अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। उनकी भाषा में ग्रामीण जीवन की सहजता, आंचलिक शब्दों की मिठास और चित्रात्मकता मिलती है। देहाती दुनिया उनका प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास है, जिसे हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास माना जाता है; प्रस्तुत पाठ ‘माता का अँचल’ इसी उपन्यास का एक अंश है। उनकी रचनाओं में बिहार के ग्रामीण जीवन, वहाँ के रीति-रिवाज़ और बाल-मनोविज्ञान का जीवंत चित्रण मिलता है। हिंदी-सेवा के लिए उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। सन् 1963 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘माता का अँचल’ शिवपूजन सहाय के आंचलिक उपन्यास देहाती दुनिया का एक अंश है, जिसमें तीस के दशक के ग्रामीण जीवन और बाल-मन का सजीव चित्रण हुआ है। पाठ का नायक एक छोटा बालक है, जिसका असली नाम तारकेश्वरनाथ है, पर पिता उसे प्यार से ‘भोलानाथ’ कहकर पुकारते हैं। वह अपने पिता (बाबू जी) से बहुत जुड़ा हुआ है; माँ से उसका नाता केवल दूध पीने तक का है।
बाबू जी प्रातः उठकर स्नान-पूजा करते और बालक को भी साथ नहलाकर माथे पर त्रिपुंड एवं भभूत लगा देते, जिससे वह ‘बम-भोला’ जैसा दिखने लगता। पूजा-पाठ के बाद वे राम-नाम लिखते, आटे की गोलियों में राम-नाम लपेटकर गंगा की मछलियों को खिलाते और बालक को कंधे पर बिठाए घूमते। कभी कुश्ती लड़ते, कभी झूला झुलाते और भोजन के समय तरह-तरह के पशु-पक्षियों के नाम लेकर कौर बनाकर खिलाते। मइया कहती कि पिता बच्चे को ठीक से नहीं खिलाते।
बालक अपने हमजोलियों के साथ तरह-तरह के नाटक खेलता था – मिठाई की दुकान लगाना, घरौंदा बनाना, बारात का जुलूस निकालना, खेती करना और तुकबंदी गाना। बच्चों की यह दुनिया भोली, स्वाभाविक और कल्पना से भरी थी। एक दिन आँधी-वर्षा के बाद बाग में बिच्छू निकल आए और बच्चों ने बूढ़े मूसन तिवारी को चिढ़ाया, जिस पर वे उन्हें खदेड़ने लगे।
अंत में टीले पर चूहों के बिल से पानी उलीचते समय एक साँप निकल आया। डर के मारे बच्चे बेतहाशा भागे, गिरे-पड़े और लहूलुहान हो गए। भयभीत बालक दौड़कर घर पहुँचा। उस समय बाबू जी ओसारे में हुक्का पी रहे थे और उन्होंने उसे पुकारा भी, पर बालक उनकी अनसुनी कर सीधे मइया की गोद में जा छिपा। माँ उसे काँपता देख रो पड़ी, उसके घावों पर हल्दी थोपी और प्यार से सहलाने लगी। बाबू जी ने भी दौड़कर उसे अपनी गोद में लेना चाहा, पर बालक ने माँ के अँचल की – प्रेम और शांति के चँदोवे की – छाया नहीं छोड़ी। इस प्रकार पाठ यह मार्मिक सत्य उद्घाटित करता है कि संकट के क्षण में बच्चे को सबसे सुरक्षित आश्रय माँ का अँचल ही लगता है।
मूलभाव
पाठ का मूलभाव यह है कि बालक का जुड़ाव चाहे पिता से कितना ही गहरा क्यों न हो, विपत्ति और भय के क्षण में उसे माँ की गोद और अँचल ही सबसे सुरक्षित शरण-स्थल लगते हैं। साथ ही यह पाठ तीस के दशक की ग्राम्य-संस्कृति, बच्चों के भोले खेल-तमाशे और माता-पिता के निश्छल वात्सल्य का जीवंत एवं मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अँचल | साड़ी का छोर, आँचल |
| मृदंग | एक प्रकार का वाद्य यंत्र, ढोलक |
| तड़के | प्रभात, सवेरा, भोर |
| ललाट | माथा |
| त्रिपुंड | एक प्रकार का तिलक जिसमें ललाट पर तीन आड़ी या अर्धचंद्राकार रेखाएँ बनाई जाती हैं |
| भभूत | राख, विभूति (शिव-भक्तों द्वारा शरीर पर लगाई जाने वाली) |
| निहारना | ध्यान से देखना, ताकना |
| उतान | पीठ के बल लेटना |
| सानना | मिलाना, लपेटना, गूँधना |
| अफर जाना | भरपेट से अधिक खा लेना |
| ठौर | स्थान, अवसर |
| महतारी | माता, माँ |
| चँदोवा | छोटा शामियाना, चँदवा |
| ज्योनार | भोज, दावत |
| जीमना | भोजन करना |
| ओहार | परदे के लिए डाला हुआ कपड़ा |
| अमोला | आम का उगता हुआ पौधा |
| कसोरा | मिट्टी का बना छिछला कटोरा |
| अँटई | कुत्ते के शरीर में चिपके रहने वाले छोटे कीड़े, किलनी |
| चिरौरी | दीनतापूर्वक की जाने वाली प्रार्थना, विनती |
| रजेरी (रहरी) | अरहर |
| ओसारा | बरामदा |
| अमनिया करना | साफ़, शुद्ध करना (अनाज बीनना) |
| बेतहाशा | बदहवास होकर, बहुत तेजी से |
| लहूलुहान | खून से लथपथ |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
नीचे NCERT कृतिका (भाग 2) के ‘प्रश्न-अभ्यास’ के सभी प्रश्न ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं; प्रत्येक का उत्तर परीक्षा-उपयोगी हिंदी में दिया गया है।
1. प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?
2. आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
3. आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
4. भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?
5. पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों।
6. इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।
7. पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
8. यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
9. माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
10. बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?
11. इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
12. फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़िए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (अतिरिक्त)
1. पाठ के बालक का असली नाम क्या था और पिता उसे किस नाम से पुकारते थे?
2. बाबू जी प्रतिदिन पूजा-पाठ के बाद क्या करते थे?
3. मइया बच्चे को खिलाने के विषय में बाबू जी से क्या कहती थी?
4. बाग में आँधी-वर्षा के बाद बच्चे क्यों डरकर भागे?
5. टीले पर खेलते समय कौन-सी घटना घटी जिससे बच्चे लहूलुहान हो गए?
दीर्घ उत्तरीय (अतिरिक्त)
6. ‘माता का अँचल’ पाठ के आधार पर माँ के वात्सल्य की मार्मिकता का वर्णन कीजिए।
7. प्रस्तुत पाठ में तीस के दशक की ग्राम्य-संस्कृति किस प्रकार उभरकर आती है? सोदाहरण लिखिए।
8. इस पाठ के आधार पर बाल-मनोविज्ञान की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘माता का अँचल’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) शिवपूजन सहाय
(ग) फणीश्वरनाथ रेणु
(घ) नागार्जुन
2. पाठ के बालक का असली नाम क्या था?
(क) भोलानाथ
(ख) बैजू
(ग) तारकेश्वरनाथ
(घ) मूसन
3. बालक अपनी माता को किस नाम से पुकारता था?
(क) माँ
(ख) मइया
(ग) महतारी
(घ) अम्मा
4. बाबू जी पूजा के बाद किसे आटे की गोलियाँ खिलाते थे?
(क) पक्षियों को
(ख) गाय को
(ग) गंगा की मछलियों को
(घ) कुत्तों को
5. ‘त्रिपुंड’ का अर्थ है–
(क) एक प्रकार का वाद्य यंत्र
(ख) ललाट पर तीन आड़ी रेखाओं वाला तिलक
(ग) एक प्रकार का भोजन
(घ) पूजा का बर्तन
6. बालक के माथे पर बाबू जी क्या लगाते थे, जिससे वह ‘बम-भोला’ बन जाता था?
(क) रोली
(ख) चंदन
(ग) भभूत
(घ) हल्दी
7. बच्चों को बूढ़े मूसन तिवारी को किसने चिढ़ाया?
(क) भोलानाथ ने
(ख) बैजू ने
(ग) बाबू जी ने
(घ) मइया ने
8. टीले पर पानी उलीचते समय बच्चों के सामने क्या निकल आया?
(क) बिच्छू
(ख) चूहा
(ग) साँप
(घ) कुत्ता
9. भयभीत होकर भागने पर बालक अंत में किसकी गोद में जा छिपा?
(क) बाबू जी की
(ख) मइया की
(ग) बैजू की
(घ) गुरु जी की
10. माँ ने बालक के घावों पर क्या लगाया?
(क) तेल
(ख) भभूत
(ग) हल्दी
(घ) चंदन
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): विपत्ति के समय बालक पिता के पास न जाकर माँ की गोद में जा छिपा।
कारण (R): भय और पीड़ा के क्षण में बालक को माँ का अँचल सबसे सुरक्षित आश्रय लगता है।
2. अभिकथन (A): भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना भूल जाता है।
कारण (R): बच्चों का दुख क्षणिक होता है और उनका मन शीघ्र ही खेल की ओर मुड़ जाता है।
3. अभिकथन (A): ‘माता का अँचल’ शीर्षक पाठ के लिए पूर्णतः उपयुक्त है।
कारण (R): पाठ में बालक का अधिकांश समय केवल माँ के साथ ही बीतता है।
4. अभिकथन (A): बच्चे प्रकृति और घर-आँगन की साधारण वस्तुओं से ही खेल और खिलौने बना लेते थे।
कारण (R): उस समय गाँव में बने-बनाए आधुनिक खिलौने सहज ही उपलब्ध थे।
5. अभिकथन (A): बाबू जी का बालक के प्रति प्रेम खेल और दुलार से भरा हुआ था।
कारण (R): वे बालक के साथ कुश्ती लड़ते, झूला झुलाते और तरह-तरह के नाम लेकर कौर बनाकर खिलाते थे।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- लेखक का नाम शिवपूजन सहाय और पाठ का स्रोत आंचलिक उपन्यास देहाती दुनिया अवश्य याद रखें।
- पाठ का केंद्रीय भाव – “संकट के समय माँ का अँचल ही सबसे सुरक्षित आश्रय” – हर बड़े प्रश्न में जोड़ें।
- उत्तर लिखते समय पाठ के प्रसंग (कुश्ती, मछलियों को खिलाना, घरौंदा, साँप वाली घटना) उदाहरण के रूप में दें।
- आंचलिक शब्दों (मइया, अँचल, ज्योनार, ओसारा) के अर्थ शब्दार्थ-तालिका से याद कर लें।
- शीर्षक की उपयुक्तता वाले प्रश्न में अन्य शीर्षक सुझाना न भूलें।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को प्रेमचंद या रेणु लिख देना – यह पाठ शिवपूजन सहाय का है।
- बालक के असली नाम (तारकेश्वरनाथ) और पुकारू नाम (भोलानाथ) को आपस में मिला देना।
- यह मान लेना कि बालक का जुड़ाव माँ से अधिक था – वस्तुतः उसका दिन-भर का जुड़ाव पिता से अधिक था।
- आंचलिक शब्दों का गलत अर्थ या गलत वर्तनी लिखना।
- व्यक्तिगत/अनुभव-आधारित प्रश्नों (तुकबंदी, डायरी) में उदाहरण न देना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘माता का अँचल’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक शिवपूजन सहाय हैं। यह उनके प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास ‘देहाती दुनिया’ का एक अंश है।
पाठ के बालक का असली नाम क्या था?
बालक का असली नाम तारकेश्वरनाथ था, पर उसके पिता उसे प्यार से ‘भोलानाथ’ कहकर पुकारते थे।
विपत्ति के समय बालक पिता के पास न जाकर माँ की शरण क्यों लेता है?
दिन-भर पिता से जुड़े रहने पर भी, भय और पीड़ा के क्षण में बालक को माँ का अँचल ही सबसे सुरक्षित और ममतामयी आश्रय लगता है, इसलिए वह माँ की गोद में जा छिपता है।
प्रश्न NCERT कृतिका पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
