NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kritika 2) अध्याय 3: मैं क्यों लिखता हूँ?
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका (भाग 2) के अध्याय 3 ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ (लेखक – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’) का पूरा एवं परीक्षा-केंद्रित समाधान देता है – पाठ का सार, कठिन शब्दार्थ, सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – अज्ञेय
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का जन्म सन् 1911 में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रयोगवादी एवं ‘नई कविता’ आंदोलन के अग्रणी रचनाकार माने जाते हैं। मूलतः विज्ञान के विद्यार्थी रहे अज्ञेय ने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, यात्रा-वृत्तांत और संपादन – सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। आँगन के पार द्वार, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं तथा शेखर: एक जीवनी और नदी के द्वीप उनके चर्चित उपन्यास हैं। उन्होंने ‘तार सप्तक’ का संपादन करके अनेक नए कवियों को मंच दिया। उनकी रचनाओं में बौद्धिकता, संवेदनशीलता और गहरी अनुभूति का अनूठा मेल मिलता है। उन्हें आँगन के पार द्वार पर साहित्य अकादमी तथा कितनी नावों में कितनी बार पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। सन् 1987 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ अज्ञेय का आत्मकथात्मक निबंध है, जिसमें लेखक रचना-प्रक्रिया के पीछे छिपे कारणों की पड़ताल करते हैं। लेखक मानते हैं कि ‘मैं क्यों लिखता हूँ’ प्रश्न देखने में जितना सरल है, उत्तर देने में उतना ही कठिन है, क्योंकि इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन से जुड़ा होता है।
उनके अनुसार वे इसलिए लिखते हैं क्योंकि वे स्वयं जानना चाहते हैं कि वे क्यों लिखते हैं – और लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता। दरअसल लेखक अपने भीतर की एक ‘आंतरिक विवशता’ से मुक्ति पाने के लिए लिखता है; लिखकर ही वह उस विवशता को पहचानता है और उससे मुक्त होता है। यह आंतरिक प्रेरणा ही सच्ची रचना का मूल है।
लेखक स्वीकार करते हैं कि ख्याति मिलने के बाद कुछ बाहरी दबावों – संपादक का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा, आर्थिक आवश्यकता – से भी लिखा जाता है। किंतु सच्चा रचनाकार सदा यह भेद बनाए रखता है कि कौन-सी रचना भीतरी प्रेरणा का फल है और कौन-सी बाहरी दबाव की। कभी-कभी बाहरी दबाव भी भीतरी उन्मेष (प्रकाश) का निमित्त बन जाता है।
अपनी बात स्पष्ट करने के लिए वे हिरोशिमा पर लिखी अपनी कविता का उदाहरण देते हैं। विज्ञान के विद्यार्थी होने के नाते अणु-विस्फोट और रेडियम-धर्मिता का सैद्धांतिक ज्ञान उन्हें था; हिरोशिमा पर अणु-बम गिरने के समाचार और उसके दुष्प्रभाव भी उन्होंने पढ़े। विज्ञान के इस दुरुपयोग के प्रति उनकी बुद्धि ने विद्रोह किया और उन्होंने लेख भी लिखे, पर कविता नहीं लिखी, क्योंकि कविता बौद्धिक पकड़ से आगे ‘अनुभूति’ की चीज़ है। जापान जाने पर उन्होंने हिरोशिमा और रेडियम से पीड़ित रोगियों का अस्पताल देखा – यह प्रत्यक्ष अनुभव था।
परंतु अनुभव से अनुभूति गहरी चीज़ है। एक दिन सड़क पर घूमते हुए उन्होंने एक जले हुए पत्थर पर मनुष्य की लंबी उजली छाया देखी – विस्फोट के समय वहाँ खड़ा कोई व्यक्ति वाष्प बनकर उड़ गया था और उसकी छाया पत्थर पर अंकित रह गई। उस छाया को देखकर लेखक को मानो एक थप्पड़-सा लगा; उसी क्षण अणु-विस्फोट उनकी अनुभूति-प्रत्यक्ष बन गया और वे स्वयं को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता अनुभव करने लगे। इसी अनुभूति से वह विवशता जागी, जो बुद्धि के क्षेत्र से बढ़कर संवेदना के क्षेत्र में आ गई और भारत लौटकर रेलगाड़ी में बैठे-बैठे उन्होंने हिरोशिमा पर कविता लिखी। उनके लिए वह कविता अच्छी है या बुरी – यह महत्त्वपूर्ण नहीं; महत्त्वपूर्ण यह है कि वह अनुभूति-प्रसूत (अनुभूति से उत्पन्न) सच है।
मूलभाव एवं हिरोशिमा कविता
इस पाठ का मूलभाव यह है कि सच्चा लेखन भीतरी प्रेरणा एवं गहरी अनुभूति से जन्म लेता है, न कि केवल बाहरी जानकारी या दबाव से। लेखक ‘अनुभव’ (घटित का प्रत्यक्ष देखना) और ‘अनुभूति’ (कल्पना और संवेदना द्वारा सत्य को आत्मसात करना) में अंतर करते हैं और सिद्ध करते हैं कि रचनाकार के लिए अनुभूति अधिक मूल्यवान है। पाठ के अंत में लेखक की वही प्रसिद्ध कविता ‘हिरोशिमा’ दी गई है (सन् 1959 के काव्य-संग्रह अरी ओ करुणा प्रभामय से), जिसमें मानव-निर्मित ‘सूरज’ (अणु-बम) के विस्फोट का मार्मिक चित्र है – नगर के चौक से उगा सूरज मनुष्यों को भाप बनाकर सोख गया और पत्थरों पर अंकित जली हुई छायाएँ ही मानव की एकमात्र साक्षी बनकर रह गईं।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आभ्यंतर | भीतर का, अंदरूनी |
| विवशता | मजबूरी, लाचारी, बाध्यता |
| तटस्थ | निरपेक्ष, उदासीन, अलग रहकर |
| कृतिकार | श्रेष्ठ रचना (कृति) करने वाला, सच्चा रचनाकार |
| ख्याति | प्रसिद्धि, यश, नाम |
| तकाजा | किसी काम के लिए बार-बार किया जाने वाला आग्रह/माँग |
| उन्मेष | प्रकाश, दीप्ति, खिलना |
| निमित्त | कारण, हेतु, साधन |
| आत्मानुशासन | स्वयं पर अनुशासन, आत्मनियंत्रण |
| समर्पित | पूरी तरह सौंप दिया हुआ, अर्पित |
| भौतिक यथार्थ | स्थूल/सांसारिक सच्चाई |
| रेडियम-धर्मी | रेडियोऐक्टिव, विकिरण छोड़ने वाले (तत्व) |
| भेदन | तोड़ना, विभाजन, चीरना |
| विद्रोह | विरोध, बगावत |
| तर्क-संगति | तर्क के अनुसार ठीक बैठना, युक्ति-युक्तता |
| अनुभव | घटित घटना का प्रत्यक्ष ज्ञान |
| अनुभूति | संवेदना व कल्पना से सत्य को भीतर तक महसूस करना |
| आत्मसात करना | पूरी तरह अपने भीतर समा लेना, ग्रहण करना |
| ज्वलंत | प्रदीप्त, धधकता हुआ, प्रत्यक्ष |
| भोक्ता | भोगने वाला, झेलने वाला |
| व्यथा | पीड़ा, दुख, वेदना |
| अनुभूति-प्रसूत | अनुभूति से उत्पन्न |
| रुद्ध | बंद हो जाना, रुक जाना, फँस जाना |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
नीचे NCERT कृतिका पुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के सभी प्रश्न ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं; प्रत्येक का परीक्षा-उपयोगी मौलिक उत्तर साथ में है।
1. लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?
2. लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?
3. ‘मैं क्यों लिखता हूँ’? के आधार पर बताइए कि—(क) लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?(ख) किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं?
4. कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति/स्वयं के अनुभव के साथ-साथ बाह्य दबाव भी महत्त्वपूर्ण होता है। ये बाह्य दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं?
5. क्या बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे?
6. हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंत: व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है यह आप कैसे कह सकते हैं?
7. हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह से हो रहा है।
8. एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है?
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. लेखक के अनुसार वे क्यों लिखते हैं?
2. ‘अनुभव’ और ‘अनुभूति’ में क्या अंतर है?
3. हिरोशिमा कविता लेखक ने कहाँ और कब लिखी?
4. हिरोशिमा में जले पत्थर पर लेखक ने क्या देखा?
5. लेखक की दृष्टि में हिरोशिमा कविता का महत्त्व किसमें है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. ‘आंतरिक विवशता’ से लेखक का क्या आशय है? सच्ची रचना में इसका क्या महत्त्व है?
7. विज्ञान का सदुपयोग और दुरुपयोग दोनों संभव हैं – पाठ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
8. ‘हिरोशिमा’ कविता का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & उत्तर-कुंजी
1. ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ग) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
(घ) यशपाल
2. लेखक मूलतः किस विषय के विद्यार्थी रहे थे?
(क) साहित्य
(ख) विज्ञान
(ग) इतिहास
(घ) वाणिज्य
3. लेखक के अनुसार सच्ची रचना का मूल कारण क्या है?
(क) आर्थिक आवश्यकता
(ख) संपादक का आग्रह
(ग) आंतरिक विवशता
(घ) प्रकाशक का तकाजा
4. निम्न में से कौन-सा बाह्य दबाव है?
(क) भीतरी प्रेरणा
(ख) अनुभूति
(ग) आत्मानुशासन
(घ) प्रकाशक का तकाजा
5. लेखक के अनुसार रचनाकार के लिए अधिक गहरी चीज़ क्या है?
(क) अनुभव
(ख) अनुभूति
(ग) ख्याति
(घ) बौद्धिक ज्ञान
6. हिरोशिमा में जले हुए पत्थर पर लेखक ने क्या देखा?
(क) मनुष्य की लंबी उजली छाया
(ख) एक चित्र
(ग) खून के धब्बे
(घ) लिखा हुआ संदेश
7. लेखक ने हिरोशिमा पर कविता कहाँ बैठकर लिखी?
(क) जापान के अस्पताल में
(ख) अपने घर में
(ग) भारत लौटते समय रेलगाड़ी में
(घ) हिरोशिमा की सड़क पर
8. ‘हिरोशिमा’ कविता किस काव्य-संग्रह में संकलित है?
(क) आँगन के पार द्वार
(ख) अरी ओ करुणा प्रभामय
(ग) हरी घास पर क्षण भर
(घ) बावरा अहेरी
9. कविता में ‘मानव का रचा हुआ सूरज’ किसका प्रतीक है?
(क) वास्तविक सूर्य
(ख) अणु-बम का विस्फोट
(ग) बिजली
(घ) आग
10. हिरोशिमा की घटना को लेखक ने किसका भयानकतम उदाहरण कहा है?
(क) प्राकृतिक आपदा का
(ख) विज्ञान के दुरुपयोग का
(ग) युद्ध-नीति का
(घ) मानवीय भूल का
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक स्वयं जानने के लिए लिखता है कि वह क्यों लिखता है।
कारण (R): लिखे बिना इस प्रश्न का सच्चा उत्तर नहीं मिल सकता।
2. अभिकथन (A): लेखक ने हिरोशिमा देखकर तुरंत कविता लिख दी।
कारण (R): प्रत्यक्ष अनुभव अनुभूति की अपेक्षा अधिक गहरा होता है।
3. अभिकथन (A): विज्ञान के दुरुपयोग के प्रति लेखक की बुद्धि ने विद्रोह किया।
कारण (R): हिरोशिमा पर अणु-बम गिराना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग था।
4. अभिकथन (A): कभी-कभी बाहरी दबाव भी भीतरी उन्मेष का निमित्त बन जाता है।
कारण (R): हर बाहरी दबाव से लिखी गई रचना अनुभूति-प्रसूत होती है।
5. अभिकथन (A): जले पत्थर पर अंकित छाया देखकर लेखक स्वयं को विस्फोट का भोक्ता अनुभव करने लगा।
कारण (R): उस क्षण अणु-विस्फोट उनकी अनुभूति-प्रत्यक्ष में आ गया।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- ‘अनुभव’ और ‘अनुभूति’ का अंतर तथा लेखक द्वारा अनुभूति को श्रेष्ठ मानने का कारण याद रखें – यह सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
- जले पत्थर पर मनुष्य की छाया वाली घटना को क्रम से लिखें; यही पाठ का मर्म है।
- आंतरिक विवशता बनाम बाह्य दबाव – दोनों को उदाहरण सहित स्पष्ट रूप से अलग करके लिखें।
- विज्ञान के दुरुपयोग वाले उत्तर में 3–4 ठोस उदाहरण (हथियार, प्रदूषण, साइबर-अपराध, कन्या-भ्रूण हत्या) अवश्य दें।
सामान्य गलतियाँ
- ‘अनुभव’ और ‘अनुभूति’ को एक ही मान लेना – ये भिन्न हैं।
- यह लिखना कि लेखक ने हिरोशिमा में ही तुरंत कविता लिख दी – उन्होंने भारत लौटते समय रेलगाड़ी में लिखी।
- लेखक का नाम ‘प्रसाद’ या ‘निराला’ लिख देना – सही नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ है।
- विज्ञान को ही दोषी ठहराना – दोष विज्ञान का नहीं, उसके दुरुपयोग करने वाले मनुष्य का है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ हैं, जो प्रयोगवाद एवं ‘नई कविता’ के प्रमुख रचनाकार माने जाते हैं।
लेखक के अनुसार वे क्यों लिखते हैं?
लेखक अपनी आंतरिक विवशता से मुक्ति पाने के लिए और स्वयं यह जानने के लिए लिखते हैं कि वे क्यों लिखते हैं; क्योंकि लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता।
अनुभव और अनुभूति में क्या अंतर है?
अनुभव घटित घटना का प्रत्यक्ष ज्ञान है, जबकि अनुभूति संवेदना व कल्पना द्वारा सत्य को भीतर तक महसूस करना है। लेखक अनुभूति को अनुभव से अधिक गहरी और रचना में अधिक सहायक मानते हैं।
प्रश्न NCERT कृतिका (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
