NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 10: एक कहानी यह भी (मन्नू भंडारी) – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 10 ‘एक कहानी यह भी’ (लेखिका – मन्नू भंडारी) का पूरा एवं प्रामाणिक समाधान प्रस्तुत करता है। यहाँ पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, सार, लेखिका-परिचय, कठिन शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा परीक्षा-युक्तियाँ दी गई हैं।
लेखिका परिचय – मन्नू भंडारी
मन्नू भंडारी का जन्म सन् 1931 में मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था, किंतु उनकी आरंभिक शिक्षा-दीक्षा राजस्थान के अजमेर शहर में हुई। बाद में उन्होंने हिंदी में एम.ए. किया और दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापन कार्य किया। सन् 2021 में उनका देहांत हुआ। स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथा-साहित्य की वे प्रमुख हस्ताक्षर मानी जाती हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, यही सच है, त्रिशंकु (कहानी-संग्रह); आपका बंटी, महाभोज (उपन्यास)। उन्होंने फ़िल्म एवं टेलीविजन धारावाहिकों के लिए पटकथाएँ भी लिखीं तथा एक कहानी यह भी नाम से आत्मकथ्य का प्रकाशन किया। उनकी रचनाओं में भाषा और शिल्प की सादगी, प्रामाणिक अनुभूति तथा स्त्री-मन से जुड़ी संवेदनाएँ विशेष रूप से मिलती हैं। उन्हें हिंदी अकादमी का शिखर सम्मान सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए।
पाठ का सार
‘एक कहानी यह भी’ मन्नू भंडारी का आत्मकथात्मक संस्मरण है, जिसमें उन्होंने सिलसिलेवार आत्मकथा न लिखकर अपने लेखकीय जीवन से जुड़े व्यक्तियों और घटनाओं को याद किया है। इस संकलित अंश में मुख्यतः उनके किशोर जीवन, उनके पिताजी तथा उनकी कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का व्यक्तित्व उभरकर आता है, जिन्होंने उनके लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेखिका का जन्म भानपुरा में हुआ, पर उनकी यादें अजमेर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले के उस दो-मंज़िले मकान से जुड़ी हैं, जहाँ ऊपरी मंज़िल पर पिताजी का ‘साम्राज्य’ था और नीचे भाई-बहनों के साथ बेपढ़ी-लिखी, सहनशील माँ रहती थीं। पिताजी इंदौर में प्रतिष्ठित, कांग्रेस तथा समाज-सुधार से जुड़े और दानशील व्यक्ति थे, किंतु एक बड़े आर्थिक झटके के बाद अजमेर आकर वे शक्की, अहंवादी और क्रोधी हो गए थे। यश की प्रबल लालसा उनके जीवन की धुरी थी।
लेखिका स्वयं को काली और दुबली मानती थीं; गोरी, स्वस्थ बहन सुशीला से बार-बार तुलना ने उनके मन में गहरी हीन-भावना की ग्रंथि पैदा कर दी थी। पिताजी चाहते थे कि वे रसोई (‘भटियारखाना’) से दूर रहकर घर में होने वाली राजनीतिक बहसों में बैठें, सुनें और देश की स्थिति समझें। दसवीं तक वे बिना विशेष समझ के बहसें सुनती और किताबें पढ़ती रहीं।
फ़र्स्ट इयर में हिंदी की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल से परिचय ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने न केवल लेखिका को चुन-चुनकर अच्छी पुस्तकें पढ़ाईं, बल्कि देश की स्थितियों में सक्रिय भागीदारी की ओर प्रेरित किया। सन् 1946–47 के स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका ने जुलूस, हड़ताल, भाषण और नारेबाजी में बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे पिताजी से वैचारिक टकराव बढ़ता गया। अंततः जब डॉ. अंबालाल जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति ने उनके भाषण की प्रशंसा की तो पिताजी का असंतोष गर्व में बदल गया। पाठ का समापन 15 अगस्त 1947 की स्वतंत्रता-प्राप्ति को ‘शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि’ कहकर होता है। इस प्रकार यह आत्मकथ्य एक साधारण लड़की के असाधारण बनने के आरंभिक पड़ावों को बहुत सहजता और ईमानदारी से प्रकट करता है।
मूलभाव / केंद्रीय विचार
इस आत्मकथ्य का मूलभाव यह है कि व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके परिवेश, परिवार और कुछ विशेष व्यक्तियों के प्रभाव से गढ़ा जाता है। पिता की खूबियाँ और कमजोरियाँ दोनों लेखिका के व्यक्तित्व के ताने-बाने में गुँथी हैं, तो शीला अग्रवाल ने उन्हें पठन से सक्रिय सामाजिक भागीदारी की ओर मोड़ा। पाठ यह भी दर्शाता है कि स्वतंत्रता आंदोलन ने एक छोटे शहर की किशोरी को भी अछूता नहीं छोड़ा और उसके भीतर आत्मविश्वास, ओज तथा संगठन-क्षमता जगा दी। साथ ही यह ‘पड़ोस-कल्चर’ के महत्त्व और हीन-भावना से उबरने के संघर्ष को भी उजागर करता है।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अहंवादी | घमंडी, अहंकारी |
| भग्नावशेष | खंडहर, टूटे-फूटे हिस्से |
| विस्फारित | और अधिक फैलना (बढ़ना) |
| आक्रांत | कष्टग्रस्त, घिरा हुआ |
| निषिद्ध | जिस पर रोक लगाई गई हो |
| वर्चस्व | प्रभुत्व, दबदबा |
| भटियारखाना | (यहाँ) रसोई के लिए प्रयुक्त तिरस्कारपूर्ण शब्द |
| हीन-भाव / ग्रंथि | स्वयं को दूसरों से तुच्छ मानने की मानसिक गाँठ |
| दरियादिली | उदारता, दानशीलता |
| संवेदनशील | भावुक, दूसरों के दुख-सुख को अनुभव करने वाला |
| विश्वासघात | भरोसे को तोड़ना, धोखा देना |
| शक्की | संदेह करने वाला, शंकालु |
| नवाबी आदतें | शान-शौकत भरी, विलासितापूर्ण आदतें |
| महत्त्वाकांक्षा | बड़ा बनने या ऊँचा पद पाने की प्रबल इच्छा |
| यश-लिप्सा | नाम-प्रसिद्धि पाने की तीव्र लालसा |
| सहिष्णुता | सहनशीलता |
| प्रतिच्छाया | प्रतिबिंब, परछाईं |
| हुड़दंग | शोरगुल, उपद्रव, हंगामा |
| प्रभात-फेरी | सवेरे निकाला जाने वाला जुलूस (देशभक्ति-गीत गाते हुए) |
| लावा | (यहाँ) जोश एवं आवेश से उबलता रक्त |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
प्रश्न-अभ्यास
1. लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?
2. इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को ‘भटियारखाना’ कहकर क्यों संबोधित किया है?
3. वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?
4. लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
5. इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
रचना और अभिव्यक्ति
6. लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
7. मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्त्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः ‘पड़ोस कल्चर’ से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।
8. लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।
9. आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।
भाषा-अध्ययन
10. इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ—(क) इस बीच पिता जी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिता जी की लू उतारी।(ख) वे तो आग लगाकर चले गए और पिता जी सारे दिन भभकते रहे।(ग) बस अब यही रह गया है कि लोग घर आकर थू-थू करके चले जाएँ।(घ) पत्र पढ़ते ही पिता जी आग-बबूला।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (5)
1. लेखिका मन्नू भंडारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
2. लेखिका के मन में हीन-भावना की ग्रंथि कैसे उत्पन्न हुई?
3. शीला अग्रवाल कौन थीं और उन्होंने लेखिका के लिए क्या किया?
4. लेखिका के पिता का स्वभाव अजमेर आने के बाद क्यों बदल गया?
5. पाठ में 9 वर्षीय शिवांक की डायरी क्यों दी गई है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3)
6. ‘एक कहानी यह भी’ पाठ के आधार पर लेखिका के पिता के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।
7. इस आत्मकथ्य में लेखिका ने अपनी माँ का चित्रण किस रूप में किया है? पिता और माँ के व्यक्तित्व की तुलना कीजिए।
8. पाठ के आधार पर बताइए कि स्वतंत्रता आंदोलन ने लेखिका के व्यक्तित्व को किस प्रकार प्रभावित और परिवर्तित किया?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘एक कहानी यह भी’ पाठ की विधा क्या है?
(क) कहानी
(ख) आत्मकथ्य (संस्मरण)
(ग) निबंध
(घ) रेखाचित्र
2. लेखिका का जन्म किस स्थान पर हुआ था?
(क) अजमेर
(ख) इंदौर
(ग) भानपुरा (मध्य प्रदेश)
(घ) दिल्ली
3. लेखिका के पिता रसोई को किस नाम से पुकारते थे?
(क) भंडारगृह
(ख) भटियारखाना
(ग) पाकशाला
(घ) रसोईघर
4. लेखिका को साहित्य की दुनिया से किसने परिचित कराया?
(क) उनके पिता
(ख) उनकी माँ
(ग) शीला अग्रवाल
(घ) डॉ. अंबालाल
5. लेखिका के मन में हीन-भावना का मुख्य कारण क्या था?
(क) पढ़ाई में कमजोर होना
(ख) गोरी बहन सुशीला से बार-बार तुलना
(ग) गरीबी
(घ) माँ की डाँट
6. लेखिका के अनुसार उनके पिता के जीवन की सबसे बड़ी दुर्बलता क्या थी?
(क) यश-लिप्सा
(ख) कंजूसी
(ग) आलस्य
(घ) भीरुता
7. चौपड़ पर भाषण देने पर किसने घर आकर पिताजी को बधाई दी?
(क) शीला अग्रवाल
(ख) प्रिंसिपल
(ग) डॉ. अंबालाल
(घ) राजेंद्र यादव
8. पाठ के अंत में किस तिथि को ‘शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि’ कहा गया है?
(क) 26 जनवरी 1950
(ख) 15 अगस्त 1947
(ग) 2 अक्तूबर 1869
(घ) 14 अगस्त 1947
9. लेखिका ने अज्ञेय का कौन-सा उपन्यास पढ़ा, जिसने उनके मन को बहुत बाँधा?
(क) सुनीता
(ख) चित्रलेखा
(ग) नदी के द्वीप
(घ) त्यागपत्र
10. लेखिका की माँ का मुख्य गुण क्या था?
(क) क्रोध
(ख) महत्त्वाकांक्षा
(ग) धैर्य एवं सहनशीलता (त्याग)
(घ) वाक्पटुता
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखिका के पिता ने रसोई को ‘भटियारखाना’ कहा।
कारण (R): वे चाहते थे कि उनकी बेटी रसोई तक सीमित न रहकर पढ़ाई और बहसों में रुचि ले।
2. अभिकथन (A): शीला अग्रवाल ने लेखिका के लेखकीय व्यक्तित्व को गढ़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कारण (R): शीला अग्रवाल लेखिका की सगी बहन थीं।
3. अभिकथन (A): लेखिका के मन में हीन-भावना की ग्रंथि उत्पन्न हो गई थी।
कारण (R): पिताजी बार-बार उनकी तुलना गोरी एवं स्वस्थ बहन सुशीला से करते थे।
4. अभिकथन (A): स्वाधीनता आंदोलन में लेखिका की सक्रियता से पिताजी से वैचारिक टकराव बढ़ा।
कारण (R): पिताजी पूर्णतः रूढ़िवादी थे और बेटी की किसी भी प्रकार की शिक्षा के विरुद्ध थे।
5. अभिकथन (A): चौपड़ पर लेखिका के भाषण के बाद पिताजी का असंतोष गर्व में बदल गया।
कारण (R): प्रतिष्ठित डॉ. अंबालाल ने घर आकर लेखिका के भाषण की प्रशंसा की और पिताजी को बधाई दी।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- पाठ की विधा (आत्मकथ्य) और लेखिका मन्नू भंडारी का नाम सही याद रखें – यह बहुधा पूछा जाता है।
- पिता, माँ और शीला अग्रवाल के व्यक्तित्व के 3–4 गुण बिंदुवार लिखें; उत्तर में पाठ से उदाहरण अवश्य जोड़ें।
- स्वाधीनता आंदोलन वाले प्रश्न में परिदृश्य (प्रभात-फेरी, हड़ताल, जुलूस) और मन्नू जी की भूमिका – दोनों भाग अलग-अलग लिखें।
- भाषा-अध्ययन में मुहावरे का अर्थ लिखकर ही नया वाक्य बनाएँ, ताकि पूरे अंक मिलें।
सामान्य गलतियाँ
- शीला अग्रवाल को लेखिका की बहन समझ लेना – वे कॉलेज की प्राध्यापिका थीं।
- स्वतंत्रता की तिथि 15 अगस्त 1947 की जगह कोई अन्य तिथि लिख देना।
- पिता को केवल नकारात्मक या केवल सकारात्मक रूप में दिखाना – उनका व्यक्तित्व गुण-दोष दोनों का मिश्रण था।
- आत्मकथ्य को ‘कहानी’ (काल्पनिक) समझना – यह लेखिका के अपने जीवन का वास्तविक संस्मरण है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘एक कहानी यह भी’ पाठ की लेखिका कौन हैं?
इस आत्मकथ्य की लेखिका प्रसिद्ध कथाकार मन्नू भंडारी हैं, जिनकी प्रमुख रचनाओं में ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ शामिल हैं।
शीला अग्रवाल कौन थीं?
शीला अग्रवाल लेखिका के कॉलेज में हिंदी की प्राध्यापिका थीं, जिन्होंने लेखिका को साहित्य से परिचित कराया और स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
पिताजी ने रसोई को ‘भटियारखाना’ क्यों कहा?
वे चाहते थे कि उनकी बेटी रसोई के संकुचित दायरे तक सीमित न रहकर पढ़ाई और देश-दुनिया की बातों में रुचि ले; इसीलिए उन्होंने तिरस्कारपूर्वक रसोई को ‘भटियारखाना’ कहा।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
