NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 12: संस्कृति
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 12 ‘संस्कृति’ (लेखक – भदंत आनंद कौसल्यायन) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – भदंत आनंद कौसल्यायन
भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म सन् 1905 में पंजाब के अंबाला जिले के सोहाना गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम हरनाम दास था। उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया। आगे चलकर वे बौद्ध भिक्षु बने और बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने देश-विदेश की अनेक यात्राएँ कीं तथा अपना समूचा जीवन इसी ध्येय को समर्पित कर दिया। वे लंबे समय तक महात्मा गांधी के साथ वर्धा में रहे और गांधी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से विशेष प्रभावित थे। हिंदी के अनन्य सेवी कौसल्यायन ने हिंदी साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) तथा राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (वर्धा) के माध्यम से हिंदी के प्रचार का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उनकी बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें भिक्षु के पत्र, जो भूल न सका, आह! ऐसी दरिद्रता, बहानेबाजी, यदि बाबा न होते, रेल का टिकट, कहाँ क्या देखा आदि प्रमुख हैं। जातक कथाओं का उनका अनुवाद विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सरल, सहज बोलचाल की भाषा में लिखे उनके निबंध, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत खूब चर्चित रहे। सन् 1988 में उनका निधन हो गया।
पाठ का सार
‘संस्कृति’ भदंत आनंद कौसल्यायन द्वारा लिखा गया एक विचारात्मक निबंध है, जो हमें सभ्यता और संस्कृति से जुड़े अनेक जटिल प्रश्नों से टकराने की प्रेरणा देता है। लेखक कहते हैं कि ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ दो ऐसे शब्द हैं जो सबसे कम समझ में आते हैं, फिर भी जिनका प्रयोग सबसे अधिक होता है। जब इनके साथ भौतिक-संस्कृति, आध्यात्मिक-संस्कृति जैसे अनेक विशेषण जुड़ जाते हैं, तब इनका जो थोड़ा-बहुत अर्थ समझ में आता है, वह भी गड़बड़ा जाता है।
लेखक आग और सुई-धागे के उदाहरणों से अपनी बात स्पष्ट करते हैं। जिस व्यक्ति ने सबसे पहले आग या सुई-धागे का आविष्कार किया, उसमें वह विशेष योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा थी जिसके बल पर यह आविष्कार हुआ – वही उस व्यक्ति की संस्कृति है; और उस संस्कृति के द्वारा जो वस्तु बनी, वह है सभ्यता। इस प्रकार संस्कृति आविष्कार करने की शक्ति है और सभ्यता उसका परिणाम।
लेखक के अनुसार जिस व्यक्ति की बुद्धि या विवेक ने किसी नए तथ्य का दर्शन किया, वही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया, इसलिए वह संस्कृत मानव था; जबकि आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन से अधिक जानकर भी न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कहलाता, क्योंकि वह ज्ञान उसे पूर्वजों से सहज ही प्राप्त हुआ है।
लेखक यह भी बताते हैं कि सभी आविष्कारों के पीछे केवल पेट और तन की भौतिक प्रेरणा नहीं होती। तारों को देखकर सोचने वाला मनीषी, दूसरे के मुँह में कौर डालने के लिए अपना कौर छोड़ देने वाला, रोगी बच्चे को गोद में लेकर रात भर जागने वाली माता, लेनिन, कार्ल मार्क्स तथा सिद्धार्थ (बुद्ध) जैसे महामानव – ये सब ज्ञानेप्सा और कल्याण-भावना से प्रेरित संस्कृति के उदाहरण हैं। अंत में लेखक स्थापित करते हैं कि मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है। यदि संस्कृति का नाता कल्याण की भावना से टूट जाए तो वह असंस्कृति बन जाती है और उसका अनिवार्य परिणाम असभ्यता ही होगा। मानव-संस्कृति में जितना अंश कल्याण का है, वह अकल्याणकारी अंश की अपेक्षा श्रेष्ठ भी है और स्थायी भी।
पाठ का मूलभाव
इस निबंध में लेखक सिद्ध करते हैं कि संस्कृति मनुष्य की वह योग्यता एवं विवेक है जो उसे नए आविष्कार और तथ्य-दर्शन की प्रेरणा देती है, जबकि सभ्यता उसी संस्कृति का परिणाम है। संस्कृति का संबंध कल्याण की भावना से है – जैसे ही यह संबंध टूटता है, वह असंस्कृति और असभ्यता में बदल जाती है। लेखक संस्कृति को मानवता के लिए अविभाज्य और सार्वभौमिक मानते हुए उसके विभाजन (जैसे हिंदू-मुस्लिम, पूर्व-पश्चिम) का विरोध करते हैं।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संस्कृति | नए तथ्य/आविष्कार की ओर ले जाने वाली योग्यता, प्रवृत्ति एवं विवेक |
| सभ्यता | संस्कृति का परिणाम; जीवन के तौर-तरीके (खान-पान, रहन-सहन, यातायात आदि) |
| आविष्कर्ता | आविष्कार करने वाला |
| परिष्कृत | जिसका परिष्कार किया गया हो, शुद्ध किया हुआ, साफ़ किया हुआ |
| आध्यात्मिक | परमात्मा या आत्मा से संबंध रखने वाला; मन से संबंध रखने वाला |
| साक्षात् | आँखों के सामने, प्रत्यक्ष, सीधे |
| अनायास | बिना प्रयास के, आसानी से |
| कदाचित् | कभी, शायद |
| शीतोष्ण | ठंडा और गरम |
| निठल्ला | बेकार, अकर्मण्य, बिना काम-धंधे का, खाली बैठा हुआ |
| मनीषी | विद्वान, विचारशील व्यक्ति |
| मनीषियों | विद्वानों, विचारशील जनों |
| वशीभूत | वश में होना, अधीन |
| तृष्णा | प्यास, लोभ, अतृप्त कामना |
| अवश्यंभावी | जिसका होना निश्चित हो |
| अविभाज्य | जो बाँटा न जा सके |
| ज्ञानेप्सा | ज्ञान पाने की इच्छा |
| प्रज्ञा | बुद्धि, विवेक |
| मैत्री | मित्रता, सद्भाव |
| भाग्यविधाता | भाग्य का निर्माण करने वाला |
| कूड़े-करकट | व्यर्थ की वस्तुएँ, कचरा |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
प्रश्न 1. लेखक की दृष्टि में ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?
प्रश्न 2. आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे?
प्रश्न 3. वास्तविक अर्थों में ‘संस्कृत व्यक्ति’ किसे कहा जा सकता है?
प्रश्न 4. न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन से तर्क दिए गए हैं? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?
प्रश्न 5. किन महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुई-धागे का आविष्कार हुआ होगा?
प्रश्न 6. “मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।” किन्हीं दो प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जब—(क) मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ की गईं।(ख) जब मानव संस्कृति ने अपने एक होने का प्रमाण दिया।
प्रश्न 7. आशय स्पष्ट कीजिए—(क) मानव की जो योग्यता उससे आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसकी संस्कृति कहें या असंस्कृति?
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 8. लेखक ने अपने दृष्टिकोण से सभ्यता और संस्कृति की एक परिभाषा दी है। आप सभ्यता और संस्कृति के बारे में क्या सोचते हैं, लिखिए।
भाषा-अध्ययन
प्रश्न 9. निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करके समास का भेद भी लिखिए—गलत-सलत, आत्म-विनाश, महामानव, पददलित, हिंदू-मुस्लिम, यथोचित, सप्तर्षि, सुलोचना।
| सामासिक पद | समास-विग्रह | समास का भेद |
|---|---|---|
| गलत-सलत | गलत और सलत (गलत-वलत) | द्वंद्व समास |
| आत्म-विनाश | आत्म (स्वयं) का विनाश | तत्पुरुष समास (संबंध) |
| महामानव | महान है जो मानव | कर्मधारय समास |
| पददलित | पद से दलित (कुचला हुआ) | तत्पुरुष समास (करण) |
| हिंदू-मुस्लिम | हिंदू और मुस्लिम | द्वंद्व समास |
| यथोचित | जैसा उचित हो | अव्ययीभाव समास |
| सप्तर्षि | सात ऋषियों का समूह | द्विगु समास |
| सुलोचना | सुंदर हैं लोचन (नेत्र) जिसके | बहुव्रीहि समास |
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. लेखक संस्कृति और सभ्यता में क्या संबंध मानते हैं?
2. लेखक ने किन महामानवों के उदाहरण देकर संस्कृति को कल्याण-भावना से जोड़ा है?
3. तारों को देखकर न सो सकने वाले मनीषी से लेखक का क्या तात्पर्य है?
4. लेखक संस्कृति के विभाजन के विरुद्ध क्यों हैं?
5. असंस्कृति और असभ्यता का परस्पर क्या संबंध है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. आग और सुई-धागे के उदाहरणों के माध्यम से लेखक संस्कृति और सभ्यता का अंतर किस प्रकार स्पष्ट करते हैं?
7. ‘मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है’ – इस कथन के आलोक में लेखक के विचारों की समीक्षा कीजिए।
8. लेखक के अनुसार वास्तविक संस्कृत व्यक्ति की पहचान क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ
1. ‘संस्कृति’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) रामवृक्ष बेनीपुरी
(ख) भदंत आनंद कौसल्यायन
(ग) यतींद्र मिश्र
(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी
2. भदंत आनंद कौसल्यायन के बचपन का नाम क्या था?
(क) धनपत राय
(ख) हरनाम दास
(ग) सिद्धार्थ
(घ) आनंद कुमार
3. लेखक के अनुसार ‘सभ्यता’ क्या है?
(क) आविष्कार करने की शक्ति
(ख) संस्कृति का परिणाम
(ग) केवल आध्यात्मिक ज्ञान
(घ) पूर्वजों से मिली वस्तु
4. लेखक ने किसे ‘संस्कृत मानव’ का उदाहरण बताया है?
(क) आइंस्टीन
(ख) गैलीलियो
(ग) न्यूटन
(घ) आर्किमिडीज
5. लेखक के अनुसार आग के आविष्कार की मुख्य प्रेरणा क्या रही होगी?
(क) शरीर को सजाने की प्रवृत्ति
(ख) पेट की ज्वाला (भूख)
(ग) तारों का रहस्य जानना
(घ) युद्ध की आवश्यकता
6. लेखक के अनुसार सुई-धागे के आविष्कार की प्रेरणा क्या रही होगी?
(क) शीतोष्ण से बचना और शरीर को सजाना
(ख) भोजन पकाना
(ग) प्रकाश प्राप्त करना
(घ) धातु गलाना
7. लेखक के अनुसार मानव-संस्कृति कैसी वस्तु है?
(क) विभाज्य
(ख) अविभाज्य
(ग) नश्वर
(घ) निरर्थक
8. किसने मजदूरों को सुखी देखने के स्वप्न में अपना सारा जीवन दुख में बिता दिया?
(क) लेनिन
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) सिद्धार्थ
(घ) न्यूटन
9. लेखक के अनुसार संस्कृति कब असंस्कृति बन जाती है?
(क) जब वह पुरानी हो जाए
(ख) जब उसका नाता कल्याण की भावना से टूट जाए
(ग) जब उसे बाँट दिया जाए
(घ) जब वह विदेशी हो
10. ‘संस्कृति’ पाठ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) संस्मरण
(घ) कविता
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक न्यूटन को संस्कृत मानव मानते हैं।
कारण (R): न्यूटन ने अपने विवेक से गुरुत्वाकर्षण के एक नए तथ्य का दर्शन किया।
2. अभिकथन (A): आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकता।
कारण (R): उसे यह ज्ञान अपने पूर्वजों से अनायास, बना-बनाया प्राप्त हुआ है।
3. अभिकथन (A): सभ्यता संस्कृति का परिणाम है।
कारण (R): संस्कृति आविष्कार करने की शक्ति है और उससे बनी वस्तु सभ्यता कहलाती है।
4. अभिकथन (A): लेखक संस्कृति को हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बाँटना उचित मानते हैं।
कारण (R): मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।
5. अभिकथन (A): आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराने वाली योग्यता को लेखक संस्कृति मानते हैं।
कारण (R): संस्कृति का संबंध सदैव कल्याण की भावना से होता है।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- संस्कृति = आविष्कार करने की शक्ति/योग्यता; सभ्यता = उसका परिणाम – यह मूल अंतर एक वाक्य में याद रखें।
- आग, सुई-धागा तथा न्यूटन के उदाहरण उत्तर में अवश्य जोड़ें – इनसे उत्तर ठोस बनता है।
- लेनिन, कार्ल मार्क्स और सिद्धार्थ के नाम कल्याण-भावना सिद्ध करने के लिए याद रखें।
- ‘आशय स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्न में पंक्ति का सीधा-सरल अर्थ देकर फिर लेखक का संदेश लिखें।
- समास-विग्रह में पहले विग्रह, फिर भेद – दोनों लिखना न भूलें।
सामान्य गलतियाँ
- संस्कृति और सभ्यता की परिभाषा को आपस में उलट देना (कारण-परिणाम का भ्रम)।
- न्यूटन को संस्कृत कहने का कारण भूलकर केवल गुरुत्वाकर्षण लिख देना।
- ‘सप्तर्षि’ को द्वंद्व तथा ‘सुलोचना’ को कर्मधारय लिख देना – ये क्रमशः द्विगु एवं बहुव्रीहि हैं।
- लेखक का नाम ‘आनंद कौसल्यायन’ की जगह कोई अन्य लिख देना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘संस्कृति’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन हैं, जो प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु, हिंदी सेवी एवं निबंधकार थे।
लेखक के अनुसार संस्कृति और सभ्यता में क्या अंतर है?
संस्कृति आविष्कार करने की योग्यता एवं विवेक है, जबकि सभ्यता उसी संस्कृति का परिणाम (जीवन के तौर-तरीके) है।
लेखक मानव-संस्कृति को अविभाज्य क्यों मानते हैं?
क्योंकि संस्कृति का आधार कल्याण की भावना है, जो सभी मनुष्यों में समान रूप से पाई जाती है; इसे धर्म, जाति या देश के आधार पर बाँटा नहीं जा सकता।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
