NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 12: संस्कृति

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 12 ‘संस्कृति’ (लेखक – भदंत आनंद कौसल्यायन) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) अध्याय: 12 लेखक: भदंत आनंद कौसल्यायन विधा: निबंध सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – भदंत आनंद कौसल्यायन

भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म सन् 1905 में पंजाब के अंबाला जिले के सोहाना गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम हरनाम दास था। उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया। आगे चलकर वे बौद्ध भिक्षु बने और बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने देश-विदेश की अनेक यात्राएँ कीं तथा अपना समूचा जीवन इसी ध्येय को समर्पित कर दिया। वे लंबे समय तक महात्मा गांधी के साथ वर्धा में रहे और गांधी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से विशेष प्रभावित थे। हिंदी के अनन्य सेवी कौसल्यायन ने हिंदी साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) तथा राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (वर्धा) के माध्यम से हिंदी के प्रचार का महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उनकी बीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें भिक्षु के पत्र, जो भूल न सका, आह! ऐसी दरिद्रता, बहानेबाजी, यदि बाबा न होते, रेल का टिकट, कहाँ क्या देखा आदि प्रमुख हैं। जातक कथाओं का उनका अनुवाद विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सरल, सहज बोलचाल की भाषा में लिखे उनके निबंध, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत खूब चर्चित रहे। सन् 1988 में उनका निधन हो गया।

पाठ का सार

‘संस्कृति’ भदंत आनंद कौसल्यायन द्वारा लिखा गया एक विचारात्मक निबंध है, जो हमें सभ्यता और संस्कृति से जुड़े अनेक जटिल प्रश्नों से टकराने की प्रेरणा देता है। लेखक कहते हैं कि ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ दो ऐसे शब्द हैं जो सबसे कम समझ में आते हैं, फिर भी जिनका प्रयोग सबसे अधिक होता है। जब इनके साथ भौतिक-संस्कृति, आध्यात्मिक-संस्कृति जैसे अनेक विशेषण जुड़ जाते हैं, तब इनका जो थोड़ा-बहुत अर्थ समझ में आता है, वह भी गड़बड़ा जाता है।

लेखक आग और सुई-धागे के उदाहरणों से अपनी बात स्पष्ट करते हैं। जिस व्यक्ति ने सबसे पहले आग या सुई-धागे का आविष्कार किया, उसमें वह विशेष योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा थी जिसके बल पर यह आविष्कार हुआ – वही उस व्यक्ति की संस्कृति है; और उस संस्कृति के द्वारा जो वस्तु बनी, वह है सभ्यता। इस प्रकार संस्कृति आविष्कार करने की शक्ति है और सभ्यता उसका परिणाम।

लेखक के अनुसार जिस व्यक्ति की बुद्धि या विवेक ने किसी नए तथ्य का दर्शन किया, वही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया, इसलिए वह संस्कृत मानव था; जबकि आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन से अधिक जानकर भी न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कहलाता, क्योंकि वह ज्ञान उसे पूर्वजों से सहज ही प्राप्त हुआ है।

लेखक यह भी बताते हैं कि सभी आविष्कारों के पीछे केवल पेट और तन की भौतिक प्रेरणा नहीं होती। तारों को देखकर सोचने वाला मनीषी, दूसरे के मुँह में कौर डालने के लिए अपना कौर छोड़ देने वाला, रोगी बच्चे को गोद में लेकर रात भर जागने वाली माता, लेनिन, कार्ल मार्क्स तथा सिद्धार्थ (बुद्ध) जैसे महामानव – ये सब ज्ञानेप्सा और कल्याण-भावना से प्रेरित संस्कृति के उदाहरण हैं। अंत में लेखक स्थापित करते हैं कि मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है। यदि संस्कृति का नाता कल्याण की भावना से टूट जाए तो वह असंस्कृति बन जाती है और उसका अनिवार्य परिणाम असभ्यता ही होगा। मानव-संस्कृति में जितना अंश कल्याण का है, वह अकल्याणकारी अंश की अपेक्षा श्रेष्ठ भी है और स्थायी भी।

पाठ का मूलभाव

इस निबंध में लेखक सिद्ध करते हैं कि संस्कृति मनुष्य की वह योग्यता एवं विवेक है जो उसे नए आविष्कार और तथ्य-दर्शन की प्रेरणा देती है, जबकि सभ्यता उसी संस्कृति का परिणाम है। संस्कृति का संबंध कल्याण की भावना से है – जैसे ही यह संबंध टूटता है, वह असंस्कृति और असभ्यता में बदल जाती है। लेखक संस्कृति को मानवता के लिए अविभाज्य और सार्वभौमिक मानते हुए उसके विभाजन (जैसे हिंदू-मुस्लिम, पूर्व-पश्चिम) का विरोध करते हैं।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
संस्कृतिनए तथ्य/आविष्कार की ओर ले जाने वाली योग्यता, प्रवृत्ति एवं विवेक
सभ्यतासंस्कृति का परिणाम; जीवन के तौर-तरीके (खान-पान, रहन-सहन, यातायात आदि)
आविष्कर्ताआविष्कार करने वाला
परिष्कृतजिसका परिष्कार किया गया हो, शुद्ध किया हुआ, साफ़ किया हुआ
आध्यात्मिकपरमात्मा या आत्मा से संबंध रखने वाला; मन से संबंध रखने वाला
साक्षात्आँखों के सामने, प्रत्यक्ष, सीधे
अनायासबिना प्रयास के, आसानी से
कदाचित्कभी, शायद
शीतोष्णठंडा और गरम
निठल्लाबेकार, अकर्मण्य, बिना काम-धंधे का, खाली बैठा हुआ
मनीषीविद्वान, विचारशील व्यक्ति
मनीषियोंविद्वानों, विचारशील जनों
वशीभूतवश में होना, अधीन
तृष्णाप्यास, लोभ, अतृप्त कामना
अवश्यंभावीजिसका होना निश्चित हो
अविभाज्यजो बाँटा न जा सके
ज्ञानेप्साज्ञान पाने की इच्छा
प्रज्ञाबुद्धि, विवेक
मैत्रीमित्रता, सद्भाव
भाग्यविधाताभाग्य का निर्माण करने वाला
कूड़े-करकटव्यर्थ की वस्तुएँ, कचरा

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

प्रश्न 1. लेखक की दृष्टि में ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?

उत्तरलेखक के अनुसार ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ ऐसे दो शब्द हैं जो सबसे कम समझ में आते हैं, फिर भी जिनका प्रयोग सबसे अधिक होता है।इन शब्दों के साथ जब अनेक विशेषण जोड़ दिए जाते हैं – जैसे भौतिक-सभ्यता, आध्यात्मिक-सभ्यता, भौतिक-संस्कृति, आध्यात्मिक-संस्कृति आदि – तब इनका जो थोड़ा-बहुत अर्थ समझ में आता है, वह भी गड़बड़ा जाता है।लोग इन दोनों शब्दों को कभी एक मान लेते हैं तो कभी अलग, परंतु इनके वास्तविक अंतर पर गंभीरता से विचार नहीं करते।इसी अस्पष्टता और लापरवाही भरे प्रयोग के कारण इन शब्दों की सही समझ अब तक नहीं बन पाई है।

प्रश्न 2. आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे?

उत्तरआग की खोज मानव-इतिहास की एक क्रांतिकारी घटना थी, क्योंकि इसने मनुष्य के जीवन को पूरी तरह बदल दिया।आग से मनुष्य ने भोजन पकाना, ठंड से बचना, प्रकाश पाना तथा हिंसक पशुओं से रक्षा करना सीखा। इसी से आगे चलकर धातुओं को गलाने और अनेक नए आविष्कारों का मार्ग खुला; इसीलिए इसे एक बहुत बड़ी खोज माना जाता है।लेखक के अनुसार इस खोज के पीछे मुख्य प्रेरणा संभवतः पेट की ज्वाला अर्थात् भूख रही होगी – भोजन को पकाकर सुपाच्य बनाने तथा शीत से बचने की आवश्यकता।इसके साथ ही मनुष्य की जिज्ञासा और नए तथ्य को जानने की भीतरी प्रवृत्ति (संस्कृति) भी इसकी प्रेरणा रही होगी।

प्रश्न 3. वास्तविक अर्थों में ‘संस्कृत व्यक्ति’ किसे कहा जा सकता है?

उत्तरवास्तविक अर्थों में संस्कृत व्यक्ति वही है जिसकी बुद्धि अथवा विवेक ने किसी नए तथ्य का दर्शन किया हो, अर्थात् जिसने स्वयं किसी नई वस्तु, विचार या सत्य की खोज की हो।जैसे आग और सुई-धागे का आविष्कार करने वाले व्यक्ति, अथवा न्यूटन जिसने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत की खोज की – ये सब संस्कृत व्यक्ति हैं।जिस व्यक्ति को कोई खोज या ज्ञान अपने पूर्वजों से अनायास ही प्राप्त हो जाता है, वह भले ही सभ्य बन जाए, किंतु संस्कृत नहीं कहला सकता।

प्रश्न 4. न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन से तर्क दिए गए हैं? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?

उत्तरन्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। उसने अपनी बुद्धि और विवेक से एक बिल्कुल नए तथ्य का दर्शन किया, जो उससे पहले किसी को ज्ञात नहीं था। इसी आधार पर लेखक उसे संस्कृत मानव कहते हैं।आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी या विद्वान न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण को तो जानते ही हैं, साथ ही ऐसी अनेक बातें भी जानते हैं जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा होगा।फिर भी वे न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्योंकि यह सारा ज्ञान उन्हें अपने पूर्वजों से अनायास ही, बना-बनाया प्राप्त हुआ है। उन्होंने स्वयं किसी नए तथ्य का दर्शन नहीं किया।संस्कृति किसी नई वस्तु की मौलिक खोज में है, बने-बनाए ज्ञान को ग्रहण करने में नहीं। इसलिए वे अधिक सभ्य भले ही कहे जाएँ, परंतु न्यूटन जितने संस्कृत नहीं।

प्रश्न 5. किन महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुई-धागे का आविष्कार हुआ होगा?

उत्तरलेखक के अनुसार सुई-धागे का आविष्कार दो प्रमुख आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हुआ होगा –(क) शीतोष्ण से बचने की आवश्यकता: कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर वस्त्र सिलने से मनुष्य सर्दी-गर्मी से अपने शरीर की रक्षा कर सका।(ख) शरीर को सजाने की प्रवृत्ति: मनुष्य में स्वयं को सुंदर एवं व्यवस्थित दिखाने की सहज इच्छा रही, जिसके लिए सिले हुए वस्त्रों की आवश्यकता पड़ी।इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी ने लोहे के टुकड़े को घिसकर, उसके एक सिरे को छेदकर और छेद में धागा पिरोकर सुई-धागे का आविष्कार किया होगा।

प्रश्न 6. “मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।” किन्हीं दो प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जब—(क) मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ की गईं।(ख) जब मानव संस्कृति ने अपने एक होने का प्रमाण दिया।

उत्तर(क) संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ –1. धर्म, जाति, वर्ण तथा संप्रदाय के नाम पर मनुष्यों को बाँटकर संस्कृति को भी हिंदू-संस्कृति, मुस्लिम-संस्कृति आदि में विभाजित करने का प्रयास किया गया।2. भौतिक-संस्कृति और आध्यात्मिक-संस्कृति तथा पूर्व-पश्चिम जैसे भेद करके संस्कृति को टुकड़ों में बाँटा गया।(ख) संस्कृति के एक होने का प्रमाण –1. लेनिन ने अपनी डेस्क में रखी रोटी के सूखे टुकड़े स्वयं न खाकर दूसरों को खिला दिए तथा कार्ल मार्क्स ने मजदूरों को सुखी देखने के स्वप्न में अपना सारा जीवन दुख में बिता दिया।2. सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) ने दुखी मानवता के कल्याण के लिए अपना घर त्याग दिया। ये सभी कल्याण की भावना से प्रेरित थे, जो दर्शाता है कि संस्कृति देश-काल और जाति की सीमाओं से परे एक ही है।

प्रश्न 7. आशय स्पष्ट कीजिए—(क) मानव की जो योग्यता उससे आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसकी संस्कृति कहें या असंस्कृति?

उत्तरइस कथन के द्वारा लेखक यह कहना चाहते हैं कि मनुष्य की वह योग्यता जो उससे विनाशकारी हथियारों (जैसे बम, अस्त्र-शस्त्र) का आविष्कार कराती है, उसे संस्कृति नहीं कहा जा सकता।सच्ची संस्कृति का संबंध सदैव कल्याण की भावना से होता है। जो योग्यता मानव-कल्याण के स्थान पर मानव के आत्म-विनाश की ओर ले जाए, वह संस्कृति नहीं, बल्कि असंस्कृति है।जैसे ही संस्कृति का नाता कल्याण-भावना से टूटता है, वह असंस्कृति बन जाती है और उसका अनिवार्य परिणाम असभ्यता ही होता है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8. लेखक ने अपने दृष्टिकोण से सभ्यता और संस्कृति की एक परिभाषा दी है। आप सभ्यता और संस्कृति के बारे में क्या सोचते हैं, लिखिए।

उत्तरमेरे विचार से संस्कृति मनुष्य की वह आंतरिक चेतना, विवेक और मूल्य-दृष्टि है जो उसे अच्छे-बुरे की पहचान कराती है और नए विचारों, आविष्कारों तथा कल्याणकारी कार्यों की प्रेरणा देती है। यह मनुष्य के आचार-विचार, संस्कार और भावनाओं में प्रकट होती है।सभ्यता इसी संस्कृति का बाह्य रूप एवं परिणाम है – अर्थात् हमारे खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा, यातायात के साधन और जीवन जीने के तौर-तरीके।मैं मानता/मानती हूँ कि संस्कृति आत्मा है और सभ्यता शरीर। सच्ची संस्कृति वही है जो मानव-कल्याण से जुड़ी हो; कल्याण-भावना से रहित होने पर वह असंस्कृति बन जाती है। (विद्यार्थी अपने विचार भी जोड़ सकते हैं।)

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 9. निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करके समास का भेद भी लिखिए—गलत-सलत, आत्म-विनाश, महामानव, पददलित, हिंदू-मुस्लिम, यथोचित, सप्तर्षि, सुलोचना।

उत्तर
सामासिक पदसमास-विग्रहसमास का भेद
गलत-सलतगलत और सलत (गलत-वलत)द्वंद्व समास
आत्म-विनाशआत्म (स्वयं) का विनाशतत्पुरुष समास (संबंध)
महामानवमहान है जो मानवकर्मधारय समास
पददलितपद से दलित (कुचला हुआ)तत्पुरुष समास (करण)
हिंदू-मुस्लिमहिंदू और मुस्लिमद्वंद्व समास
यथोचितजैसा उचित होअव्ययीभाव समास
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूहद्विगु समास
सुलोचनासुंदर हैं लोचन (नेत्र) जिसकेबहुव्रीहि समास

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. लेखक संस्कृति और सभ्यता में क्या संबंध मानते हैं?

उत्तरलेखक के अनुसार संस्कृति मनुष्य की वह योग्यता एवं विवेक है जो उसे नए आविष्कार और तथ्य-दर्शन की प्रेरणा देती है, जबकि सभ्यता उसी संस्कृति का परिणाम है। संक्षेप में, संस्कृति कारण है और सभ्यता उसका कार्य या परिणाम।

2. लेखक ने किन महामानवों के उदाहरण देकर संस्कृति को कल्याण-भावना से जोड़ा है?

उत्तरलेखक ने लेनिन, कार्ल मार्क्स तथा सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के उदाहरण दिए हैं। लेनिन ने अपनी रोटी दूसरों को खिला दी, मार्क्स ने मजदूरों के सुख के लिए जीवन दुख में बिताया और सिद्धार्थ ने मानव-कल्याण के लिए गृह-त्याग किया।

3. तारों को देखकर न सो सकने वाले मनीषी से लेखक का क्या तात्पर्य है?

उत्तरपेट भरा और तन ढका होने पर भी जो व्यक्ति रात के तारों को देखकर उनके रहस्य जानने की जिज्ञासा से व्याकुल रहता है, वही ज्ञानेप्सा से प्रेरित संस्कृत मनीषी है। लेखक उसे मानव-ज्ञान का प्रथम पुरस्कर्ता मानते हैं।

4. लेखक संस्कृति के विभाजन के विरुद्ध क्यों हैं?

उत्तरलेखक मानव-संस्कृति को एक अविभाज्य वस्तु मानते हैं। संस्कृति कल्याण की भावना पर टिकी है, जो सभी मनुष्यों में समान रूप से पाई जाती है; इसलिए उसे धर्म, जाति या देश के आधार पर बाँटना अनुचित और अनर्थकारी है।

5. असंस्कृति और असभ्यता का परस्पर क्या संबंध है?

उत्तरलेखक के अनुसार जब संस्कृति का नाता कल्याण की भावना से टूट जाता है, तब वह असंस्कृति बन जाती है। ऐसी असंस्कृति का अवश्यंभावी परिणाम असभ्यता ही होता है, क्योंकि सभ्यता तो संस्कृति का परिणाम-मात्र है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. आग और सुई-धागे के उदाहरणों के माध्यम से लेखक संस्कृति और सभ्यता का अंतर किस प्रकार स्पष्ट करते हैं?

उत्तरलेखक आग और सुई-धागे के उदाहरणों से संस्कृति और सभ्यता का सूक्ष्म अंतर समझाते हैं। आग के उदाहरण में दो बातें हैं – एक, किसी व्यक्ति विशेष की आग का आविष्कार कर सकने की शक्ति, और दूसरी, आग का वास्तविक आविष्कार।इसी प्रकार सुई-धागे के उदाहरण में एक है उसे बनाने की योग्यता और दूसरी है स्वयं सुई-धागे का आविष्कार।जिस योग्यता, प्रवृत्ति या प्रेरणा के बल पर ये आविष्कार हुए, वही उस व्यक्ति की संस्कृति है; और उस संस्कृति द्वारा जो वस्तु बनी तथा अपने एवं दूसरों के लिए काम आई, उसका नाम है सभ्यताइस प्रकार संस्कृति आविष्कार करने की भीतरी शक्ति है और सभ्यता उसका मूर्त परिणाम।

7. ‘मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है’ – इस कथन के आलोक में लेखक के विचारों की समीक्षा कीजिए।

उत्तरलेखक दृढ़ता से मानते हैं कि मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है, जिसे किसी भी आधार पर बाँटा नहीं जा सकता। संस्कृति का मूल आधार कल्याण की भावना है, जो सभी मनुष्यों में समान रूप से विद्यमान है।मनुष्य ने जब-जब प्रज्ञा और मैत्री-भाव से किसी नए तथ्य का दर्शन किया, तब उसने ऐसी कोई वस्तु नहीं देखी जिसकी रक्षा के लिए दलबंदी की आवश्यकता हो।जो लोग संस्कृति को हिंदू-मुस्लिम या पूर्व-पश्चिम में बाँटते हैं, उन पर लेखक को आश्चर्य और दुख दोनों होते हैं।उनके अनुसार संस्कृति में जितना अंश कल्याण का है, वह अकल्याणकारी अंश से न केवल श्रेष्ठ है बल्कि स्थायी भी। अतः संस्कृति समस्त मानवता की साझी एवं अविभाज्य धरोहर है।

8. लेखक के अनुसार वास्तविक संस्कृत व्यक्ति की पहचान क्या है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरलेखक के अनुसार वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वही है जिसकी बुद्धि अथवा विवेक ने किसी नए तथ्य का स्वयं दर्शन किया हो अथवा किसी नई वस्तु की मौलिक खोज की हो।जिसने सबसे पहले आग या सुई-धागे का आविष्कार किया, अथवा न्यूटन जिसने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत खोजा – ये सब संस्कृत व्यक्ति हैं।इसके विपरीत जिसे यही ज्ञान अपने पूर्वजों से अनायास, बना-बनाया मिल गया, वह भले ही अधिक सभ्य कहलाए, संस्कृत नहीं।इतना ही नहीं, संस्कृति का संबंध कल्याण-भावना से भी है; अतः लेनिन, मार्क्स और बुद्ध जैसे कल्याण-भावना से प्रेरित महामानव भी वास्तविक संस्कृत व्यक्ति हैं। इस प्रकार मौलिक खोज और कल्याण-भावना ही संस्कृत व्यक्ति की सच्ची पहचान है।

अभ्यास MCQ

1. ‘संस्कृति’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) रामवृक्ष बेनीपुरी

(ख) भदंत आनंद कौसल्यायन

(ग) यतींद्र मिश्र

(घ) महावीरप्रसाद द्विवेदी

उत्तर(ख) भदंत आनंद कौसल्यायन।

2. भदंत आनंद कौसल्यायन के बचपन का नाम क्या था?

(क) धनपत राय

(ख) हरनाम दास

(ग) सिद्धार्थ

(घ) आनंद कुमार

उत्तर(ख) हरनाम दास।

3. लेखक के अनुसार ‘सभ्यता’ क्या है?

(क) आविष्कार करने की शक्ति

(ख) संस्कृति का परिणाम

(ग) केवल आध्यात्मिक ज्ञान

(घ) पूर्वजों से मिली वस्तु

उत्तर(ख) संस्कृति का परिणाम।

4. लेखक ने किसे ‘संस्कृत मानव’ का उदाहरण बताया है?

(क) आइंस्टीन

(ख) गैलीलियो

(ग) न्यूटन

(घ) आर्किमिडीज

उत्तर(ग) न्यूटन।

5. लेखक के अनुसार आग के आविष्कार की मुख्य प्रेरणा क्या रही होगी?

(क) शरीर को सजाने की प्रवृत्ति

(ख) पेट की ज्वाला (भूख)

(ग) तारों का रहस्य जानना

(घ) युद्ध की आवश्यकता

उत्तर(ख) पेट की ज्वाला (भूख)।

6. लेखक के अनुसार सुई-धागे के आविष्कार की प्रेरणा क्या रही होगी?

(क) शीतोष्ण से बचना और शरीर को सजाना

(ख) भोजन पकाना

(ग) प्रकाश प्राप्त करना

(घ) धातु गलाना

उत्तर(क) शीतोष्ण से बचना और शरीर को सजाना।

7. लेखक के अनुसार मानव-संस्कृति कैसी वस्तु है?

(क) विभाज्य

(ख) अविभाज्य

(ग) नश्वर

(घ) निरर्थक

उत्तर(ख) अविभाज्य।

8. किसने मजदूरों को सुखी देखने के स्वप्न में अपना सारा जीवन दुख में बिता दिया?

(क) लेनिन

(ख) कार्ल मार्क्स

(ग) सिद्धार्थ

(घ) न्यूटन

उत्तर(ख) कार्ल मार्क्स।

9. लेखक के अनुसार संस्कृति कब असंस्कृति बन जाती है?

(क) जब वह पुरानी हो जाए

(ख) जब उसका नाता कल्याण की भावना से टूट जाए

(ग) जब उसे बाँट दिया जाए

(घ) जब वह विदेशी हो

उत्तर(ख) जब उसका नाता कल्याण की भावना से टूट जाए।

10. ‘संस्कृति’ पाठ किस विधा की रचना है?

(क) कहानी

(ख) निबंध

(ग) संस्मरण

(घ) कविता

उत्तर(ख) निबंध।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(क), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)।

अभिकथन-कारण

निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लेखक न्यूटन को संस्कृत मानव मानते हैं।

कारण (R): न्यूटन ने अपने विवेक से गुरुत्वाकर्षण के एक नए तथ्य का दर्शन किया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): आज का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकता।

कारण (R): उसे यह ज्ञान अपने पूर्वजों से अनायास, बना-बनाया प्राप्त हुआ है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): सभ्यता संस्कृति का परिणाम है।

कारण (R): संस्कृति आविष्कार करने की शक्ति है और उससे बनी वस्तु सभ्यता कहलाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): लेखक संस्कृति को हिंदू-मुस्लिम के आधार पर बाँटना उचित मानते हैं।

कारण (R): मानव-संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – लेखक संस्कृति के ऐसे विभाजन का विरोध करते हैं क्योंकि वह अविभाज्य है।

5. अभिकथन (A): आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराने वाली योग्यता को लेखक संस्कृति मानते हैं।

कारण (R): संस्कृति का संबंध सदैव कल्याण की भावना से होता है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – कल्याण-भावना से रहित होने पर वह योग्यता संस्कृति नहीं, असंस्कृति है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(क), 3-(क), 4-(घ), 5-(घ)।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • संस्कृति = आविष्कार करने की शक्ति/योग्यता; सभ्यता = उसका परिणाम – यह मूल अंतर एक वाक्य में याद रखें।
  • आग, सुई-धागा तथा न्यूटन के उदाहरण उत्तर में अवश्य जोड़ें – इनसे उत्तर ठोस बनता है।
  • लेनिन, कार्ल मार्क्स और सिद्धार्थ के नाम कल्याण-भावना सिद्ध करने के लिए याद रखें।
  • ‘आशय स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्न में पंक्ति का सीधा-सरल अर्थ देकर फिर लेखक का संदेश लिखें।
  • समास-विग्रह में पहले विग्रह, फिर भेद – दोनों लिखना न भूलें।

सामान्य गलतियाँ

  • संस्कृति और सभ्यता की परिभाषा को आपस में उलट देना (कारण-परिणाम का भ्रम)।
  • न्यूटन को संस्कृत कहने का कारण भूलकर केवल गुरुत्वाकर्षण लिख देना।
  • ‘सप्तर्षि’ को द्वंद्व तथा ‘सुलोचना’ को कर्मधारय लिख देना – ये क्रमशः द्विगु एवं बहुव्रीहि हैं।
  • लेखक का नाम ‘आनंद कौसल्यायन’ की जगह कोई अन्य लिख देना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘संस्कृति’ पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक भदंत आनंद कौसल्यायन हैं, जो प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु, हिंदी सेवी एवं निबंधकार थे।

लेखक के अनुसार संस्कृति और सभ्यता में क्या अंतर है?

संस्कृति आविष्कार करने की योग्यता एवं विवेक है, जबकि सभ्यता उसी संस्कृति का परिणाम (जीवन के तौर-तरीके) है।

लेखक मानव-संस्कृति को अविभाज्य क्यों मानते हैं?

क्योंकि संस्कृति का आधार कल्याण की भावना है, जो सभी मनुष्यों में समान रूप से पाई जाती है; इसे धर्म, जाति या देश के आधार पर बाँटा नहीं जा सकता।

प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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