NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 3: आत्मकथ्य – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 3 ‘आत्मकथ्य’ (कवि – जयशंकर प्रसाद) का पूरा समाधान देता है – कविता का सार, भावार्थ, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण।
कवि परिचय – जयशंकर प्रसाद
जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में काशी (वाराणसी) में हुआ था। काशी के प्रसिद्ध क्वींस कॉलेज में उनकी आरंभिक शिक्षा हुई, परंतु परिस्थितियाँ अनुकूल न होने के कारण वे आठवीं से आगे विद्यालय में नहीं पढ़ सके; बाद में उन्होंने घर पर ही संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी का गहन अध्ययन किया। वे छायावादी काव्य-धारा के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं – चित्राधार, कानन-कुसुम, झरना, आँसू, लहर और महाकाव्य कामायनी, जिसे आधुनिक हिंदी की श्रेष्ठतम काव्य-कृति माना जाता है और जिस पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया। वे सफल नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार भी थे – चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी आदि उनके नाटक तथा कंकाल, तितली, इरावती उपन्यास हैं। सन् 1937 में उनका निधन हो गया।
कविता का सार
‘आत्मकथ्य’ कविता जयशंकर प्रसाद की छायावादी शैली में रची गई एक मार्मिक रचना है। प्रेमचंद के संपादन में निकलने वाली पत्रिका ‘हंस’ का एक आत्मकथा-विशेषांक निकलना तय हुआ था। प्रसाद जी के मित्रों ने उनसे आग्रह किया कि वे भी अपनी आत्मकथा लिखें, किंतु प्रसाद जी इससे सहमत नहीं थे। इसी असहमति के तर्क से यह कविता जन्मी, जो पहली बार सन् 1932 में ‘हंस’ के आत्मकथा-विशेषांक में प्रकाशित हुई।
कविता के आरंभ में कवि प्रकृति के माध्यम से बताते हैं कि जब मन रूपी भौंरा गुनगुनाकर अपनी कहानी कहता-सा प्रतीत होता है और पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं, तब इस अनंत नीले आकाश के नीचे असंख्य जीवन-इतिहास भरे पड़े हैं, जो परस्पर एक-दूसरे का व्यंग्य-भरा उपहास ही करते रहते हैं। ऐसे में अपनी दुर्बलताओं और बीती पीड़ा को सार्वजनिक करना कवि को उचित नहीं लगता।
कवि कहते हैं कि उनका जीवन एक सामान्य व्यक्ति का जीवन है; उसमें ऐसा कुछ भी महान या रोचक नहीं है कि लोग उसे सुनकर वाह-वाह करें। वे सरलता का उपहास नहीं उड़ाना चाहते, न ही अपनी भूलें या दूसरों की प्रवंचना (धोखे) दिखाना चाहते हैं। मधुर चाँदनी रातों और खिलखिलाकर हँसने वाले सुखद क्षणों की उज्ज्वल गाथा वे इसलिए नहीं गा सकते, क्योंकि जिस सुख का स्वप्न उन्होंने देखा था वह आलिंगन में आते-आते मुसकराकर भाग गया – अर्थात् वह कभी प्राप्त ही न हुआ।
उस अधूरे सुख की स्मृति ही थके हुए पथिक के मार्ग का संबल (पाथेय) बन गई है। कवि कहते हैं कि वे अपने इस छोटे-से जीवन की बड़ी-बड़ी कथाएँ अभी क्यों कहें; अच्छा तो यही है कि वे मौन रहकर दूसरों की बातें सुनें। उनकी अपनी मौन व्यथा अभी थककर सोई हुई है, इसलिए अभी आत्मकथा कहने का समय भी नहीं है। इस प्रकार कविता में एक ओर यथार्थ की स्वीकृति है तो दूसरी ओर एक महान कवि की विनम्रता भी झलकती है।
कविता का मूलभाव / भावार्थ
इस कविता का मूलभाव यह है कि प्रसाद जी अपनी आत्मकथा लिखने से विनम्रतापूर्वक इनकार करते हैं। उनका मानना है कि उनका जीवन साधारण है, उसमें कोई असाधारण उपलब्धि नहीं; उल्टे उसमें अभाव, पीड़ा और अधूरे सपनों की कथा है। संसार दूसरों की कमजोरियाँ सुनकर उपहास उड़ाता है, इसलिए अपनी निजी पीड़ा और दुर्बलताओं को उजागर करना कवि को व्यर्थ लगता है। अधूरे रह गए सुख की स्मृति ही उनके जीवन-पथ का सहारा है। कवि “अभी समय भी नहीं” कहकर भविष्य के लिए संभावना भी छोड़ देते हैं। इस प्रकार यह कविता यथार्थ की स्वीकृति, आत्म-विश्लेषण और एक श्रेष्ठ कवि की सहज विनम्रता का सुंदर उदाहरण है।
शब्द-संपदा (शब्दार्थ)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मधुप | भौंरा; यहाँ मन रूपी भौंरा |
| अनंत-नीलिमा | अनंत नीला आकाश, अंतहीन विस्तार |
| व्यंग्य-मलिन | खराब/बुरे ढंग से किया गया व्यंग्य या निंदा |
| मलिन उपहास | मलिन (बुरी) हँसी-मखौल, ओछा मज़ाक |
| गागर रीती | खाली घड़ा; ऐसा मन जिसमें कोई भाव शेष न हो |
| प्रवंचना | धोखा, छल, ठगी |
| विडंबना | विसंगति, उपहासजनक स्थिति |
| सरलते | सरलता (का संबोधन); भोलापन |
| मुसक्या कर | मुसकराकर |
| अरुण-कपोल | लाल गाल |
| मतवाली | मस्त, उन्मत्त, नशीली |
| अनुरागिनी उषा | प्रेम से भरी हुई प्रभात-वेला (भोर) |
| निज सुहाग | अपना सौभाग्य/श्रृंगार |
| मधुमाया | मधुर माया, मीठा मोहजाल |
| स्मृति पाथेय | स्मृति रूपी संबल; मार्ग का सहारा (राह का भोजन) |
| थके पथिक की पंथा | थके हुए राही का रास्ता |
| सीवन उधेड़ना | सिलाई खोलना; यहाँ भीतरी रहस्य/पीड़ा प्रकट करना |
| कंथा | गुदड़ी; यहाँ अंतर्मन, भीतर का जीवन |
| आत्म-कथा | अपने जीवन की कथा स्वयं लिखना |
| मौन व्यथा | चुपचाप सही गई पीड़ा, अनकही वेदना |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
सभी प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 (अध्याय 3 ‘आत्मकथ्य’) से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से, परीक्षा-उपयोगी शैली में तैयार किए गए हैं।
1. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
2. आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है?
3. स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?
4. भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) “मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।”
(ख) “जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”
5. ‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’—कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
6. ‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
7. कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था, उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?
रचना और अभिव्यक्ति
8. इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
9. आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?
10. कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना ज़रूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा ‘आलो आँधारि’ बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘आत्मकथ्य’ कविता का प्रसंग (पृष्ठभूमि) क्या है?
2. ‘मधुप’ और ‘मुरझाई पत्तियों’ के बिंब से कवि क्या व्यंजित करता है?
3. कवि ‘सरलते’ की हँसी क्यों नहीं उड़ाना चाहता?
4. ‘यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास’ पंक्ति का आशय लिखिए।
5. कविता के अंत में कवि का स्वर कैसा है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘आत्मकथ्य’ कविता को छायावादी कविता क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
7. ‘आत्मकथ्य’ में यथार्थ की स्वीकृति और कवि की विनम्रता – दोनों किस प्रकार झलकती हैं? विवेचना कीजिए।
8. ‘स्मृति पाथेय’ की संकल्पना के आधार पर बताइए कि अधूरे सुख की स्मृति कवि के जीवन में क्या भूमिका निभाती है?
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘आत्मकथ्य’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) जयशंकर प्रसाद
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) महादेवी वर्मा
2. यह कविता पहली बार किस पत्रिका के किस विशेषांक में प्रकाशित हुई?
(क) सरस्वती के काव्य-विशेषांक में
(ख) हंस के आत्मकथा-विशेषांक में
(ग) धर्मयुग के दीपावली-अंक में
(घ) कादंबिनी के कहानी-अंक में
3. ‘मधुप’ शब्द का कविता में क्या अर्थ है?
(क) मधु (शहद)
(ख) मन रूपी भौंरा
(ग) कोयल
(घ) फूल
4. कवि किस काव्य-धारा (वाद) के प्रमुख कवि माने जाते हैं?
(क) प्रगतिवाद
(ख) प्रयोगवाद
(ग) छायावाद
(घ) रहस्यवाद
5. ‘गागर रीती’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
(क) टूटा हुआ घड़ा
(ख) भावों से भरा मन
(ग) भावशून्य, खाली मन
(घ) जल से भरा घड़ा
6. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
(क) उसे लिखना नहीं आता
(ख) उसका जीवन सामान्य है और उसमें कुछ महान-रोचक नहीं
(ग) उसके पास समय की कमी है
(घ) वह प्रसिद्धि नहीं चाहता
7. कवि के अनुसार उसके जीवन-पथ का सहारा (पाथेय) क्या बना है?
(क) धन-संपत्ति
(ख) अधूरे सुख की स्मृति
(ग) मित्रों का साथ
(घ) यश और प्रशंसा
8. ‘आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया’ – यहाँ क्या भाग गया?
(क) कवि की प्रियतमा
(ख) कवि का देखा हुआ सुख का स्वप्न
(ग) कवि का मित्र
(घ) उषा की लालिमा
9. इनमें से कौन-सी रचना जयशंकर प्रसाद की नहीं है?
(क) कामायनी
(ख) आँसू
(ग) झरना
(घ) साकेत
10. ‘अभी समय भी नहीं’ कहकर कवि क्या प्रकट करता है?
(क) उसे जल्दी है
(ख) आत्मकथा कहने का उपयुक्त समय अभी नहीं आया
(ग) उसकी मृत्यु निकट है
(घ) वह व्यस्त है
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही हैं, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। (ग) A सही है, R गलत है। (घ) A गलत है, R सही है।
1. अभिकथन (A): कवि अपनी आत्मकथा लिखने से इनकार कर देता है।
कारण (R): कवि अपने जीवन को सामान्य मानता है और उसमें कोई महान या रोचक बात नहीं देखता।
2. अभिकथन (A): कवि ‘अभी समय भी नहीं’ कहकर आत्मकथा को टाल देता है।
कारण (R): कवि को लेखन-कला का कोई ज्ञान नहीं था।
3. अभिकथन (A): ‘आत्मकथ्य’ एक छायावादी कविता है।
कारण (R): इसमें कोमल कल्पना, प्रतीक, मानवीकरण एवं सूक्ष्म सौंदर्य-चित्रण की प्रधानता है।
4. अभिकथन (A): अधूरे सुख की स्मृति कवि के जीवन-पथ का पाथेय बन गई है।
कारण (R): वह सुख कवि को पूरी तरह प्राप्त हो चुका था।
5. अभिकथन (A): संसार के लोग दूसरों की व्यथा सुनकर उसका उपहास उड़ाते हैं।
कारण (R): इसीलिए कवि अपनी निजी पीड़ा को सार्वजनिक करने से बचता है।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- भाव स्पष्ट करते समय पहले पंक्ति का सीधा अर्थ, फिर उसमें छिपा भाव और अंत में प्रयुक्त बिंब/अलंकार लिखें।
- कवि-परिचय में जन्म-वर्ष (1889), छायावाद, ‘कामायनी’ एवं मंगलाप्रसाद पारितोषिक अवश्य लिखें।
- काव्यभाषा की विशेषताएँ पूछे जाने पर प्रतीक, मानवीकरण एवं लाक्षणिकता के उदाहरण कविता से उद्धृत करें।
- ‘मधुप, गागर रीती, स्मृति पाथेय, कंथा’ जैसे कठिन शब्दों के अर्थ याद रखें – इन पर सीधे प्रश्न बनते हैं।
सामान्य गलतियाँ
- यह न लिखें कि कवि को सुख मिल गया था – सुख ‘आते-आते भाग गया’, अर्थात् मिला ही नहीं।
- ‘मधुप’ का अर्थ केवल ‘शहद’ लिखना गलत है; यहाँ इसका अर्थ ‘मन रूपी भौंरा’ है।
- कविता को रसखान/तुलसी जैसी भक्ति-कविता न समझें – यह छायावादी आत्म-कथ्य है।
- देवनागरी की मात्राओं (अरुण-कपोल, अनुरागिनी, पाथेय) में त्रुटि न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘आत्मकथ्य’ कविता के कवि कौन हैं?
‘आत्मकथ्य’ कविता के रचयिता छायावाद के प्रमुख कवि जयशंकर प्रसाद हैं, जिनका जन्म सन् 1889 में काशी (वाराणसी) में हुआ था।
कवि आत्मकथा लिखने से क्यों इनकार करता है?
कवि अपने जीवन को सामान्य मानता है, जिसमें कोई महान या रोचक बात नहीं; उसमें अभाव और अधूरे सपनों की कथा है। संसार दूसरों की पीड़ा का उपहास उड़ाता है, इसलिए वह अपनी निजी व्यथा प्रकट करना उचित नहीं समझता।
‘स्मृति पाथेय’ का क्या आशय है?
‘पाथेय’ अर्थात् मार्ग का संबल। कवि के अधूरे सुख की मधुर स्मृति ही उसके थके हुए जीवन-पथ का सहारा बन गई है, जो उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा एवं शक्ति देती है।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
