NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 4: उत्साह तथा अट नहीं रही है (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’) – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 4 की दो कविताओं ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ (कवि – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, कविता का सार, शब्द-संपदा, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं परीक्षा-युक्तियाँ।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) अध्याय: 4 कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ विधा: कविता (उत्साह, अट नहीं रही है) सत्र: 2026–27

कवि परिचय – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल (जिला मेदिनीपुर) में हुआ था। वे मूलतः गढ़ाकोला (जिला उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। उनकी औपचारिक शिक्षा नौवीं तक महिषादल में ही हुई; आगे का संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी का गहन ज्ञान उन्होंने स्वाध्याय से अर्जित किया। संगीत और दर्शनशास्त्र के भी वे गहरे अध्येता थे। रामकृष्ण परमहंस तथा विवेकानंद की विचारधारा का उन पर विशेष प्रभाव पड़ा। उनका पारिवारिक जीवन दुखों और संघर्षों से भरा रहा। अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता तथा नए पत्ते उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं; उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध-लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। छायावादी रचनाकारों में उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। शोषित एवं पीड़ित जन के प्रति गहरी सहानुभूति और सत्ता-शोषक वर्ग के प्रति प्रचंड प्रतिकार उनकी कविता की विशेषता है। सन् 1961 में उनका देहांत हुआ।

कविताओं का सार

1. उत्साह (कविता का सार)

‘उत्साह’ एक आह्वान-गीत है जो बादल को संबोधित है। बादल निराला का प्रिय विषय है। कवि बादल से बार-बार ‘गरजने’ का आग्रह करता है, क्योंकि बादल एक ओर पीड़ित-प्यासे जन की आकांक्षा (प्यास और अन्न की चाह) को पूरा करने वाला है, तो दूसरी ओर वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना को संभव करने वाला भी है। कवि बादल को ‘ललित-ललित, काले घुँघराले’, ‘बाल-कल्पना के-से पाले’ तथा हृदय में बिजली की छवि छिपाए ‘नवजीवन वाले’ कहकर पुकारता है, जिसके भीतर वज्र छिपा है और जो ‘नूतन कविता’ भर सकता है। तप्त धरती और विकल-उन्मन जन को बादल ही जल से शीतल कर सकता है। इस प्रकार कवि जीवन को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखता है। कविता में ललित कल्पना और क्रांति-चेतना दोनों एक साथ उपस्थित हैं – बादल सौंदर्य का भी प्रतीक है और परिवर्तन-क्रांति का भी। मुक्त छंद, ओजपूर्ण भाषा और नाद-सौंदर्य इस कविता को विशेष बनाते हैं।

2. अट नहीं रही है (कविता का सार)

इस कविता में निराला फागुन के सर्वव्यापी सौंदर्य में डूब जाते हैं। फागुन की शोभा इतनी अधिक है कि वह कहीं समा (अट) नहीं रही है, उसकी आभा कवि के तन पर भी टिक नहीं रही। पेड़-पौधों की डालियाँ पत्तों से लदी हैं – कहीं हरी, कहीं लाल; कहीं हृदय में मंद-गंध-पुष्प-माल पड़ी है। पाट-पाट (जगह-जगह) फागुन की शोभा-श्री इतनी फैली है कि वह संभाले नहीं संभल रही (पट नहीं रही है)। फागुन का सौंदर्य घर-घर में भर रहा है, आकाश में उड़ने को मानो पर लगा रहा है। कवि की आँख इस सुंदरता से हट ही नहीं पाती। फागुन में आमों में बौर फूट पड़े हैं, भौंरे वन-वन मँडरा रहे हैं, ठौर-ठौर होली मची है और सब बंधन छूट गए हैं। इस प्रकार कवि ने फागुन के माध्यम से प्रकृति की व्यापकता, उल्लास और सौंदर्य का सजीव चित्रण किया है। सुंदर शब्द-चयन और लय ने कविता को भी फागुन की तरह ही सुंदर एवं ललित बना दिया है।

मूलभाव / भावार्थ

उत्साह – “बादल, गरजो!” की बार-बार पुकार में कवि का संदेश है कि कोमलता (वर्षा, शीतलता, नवजीवन) और क्रांति (वज्र, विध्वंस, विप्लव) दोनों एक साथ संभव हैं। बादल नवजीवन और नूतन कविता का प्रतीक है; जैसे बादल तप्त धरती को शीतल कर देता है, वैसे ही नई चेतना समाज के विकल जन को नया जीवन देती है।

अट नहीं रही है – फागुन का सौंदर्य इतना अपार और सर्वव्यापी है कि वह किसी सीमा में नहीं अँटता। प्रकृति की यह शोभा कवि के मन-तन को पूरी तरह आच्छादित कर देती है। मूलभाव यह है कि वसंत/फागुन का उल्लास जीवन के कण-कण में नई स्फूर्ति और आनंद भर देता है।

शब्द-संपदा (शब्दार्थ)

शब्दअर्थ
धाराधरबादल
घेर-घेर घोर गगनआकाश को घनघोर रूप से घेरकर
ललितसुंदर, मनोहर, कोमल
घुँघरालेघुँघरदार, लहरदार (काले बादलों के लिए)
विद्युत-छविबिजली की चमक/छवि
उरहृदय, छाती
नवजीवननया जीवन, नई स्फूर्ति
वज्रकठोर, भीषण; इंद्र का अस्त्र
नूतननया, नवीन
विकलव्याकुल, बेचैन
उन्मनकहीं मन न टिकने की स्थिति, अनमनापन
निदाघगर्मी, ग्रीष्म-ताप
सकलसब, सारे
अनंतजिसका अंत न हो, असीम
घनबादल
तप्त धरागर्म/तपी हुई धरती
शीतलठंडा, शांत
आभाचमक, कांति
अटसमाना, अँटना, प्रविष्ट होना
पाट-पाटजगह-जगह, चारों ओर
शोभा-श्रीसौंदर्य से भरपूर शोभा
पटसमा नहीं रही है, ढक नहीं रही
मंद-गंध-पुष्प-मालहलकी सुगंध वाले फूलों की माला
बौरआम के पेड़ पर आने वाली मंजरी/फूल
अबीर / गुलालहोली पर उड़ाया जाने वाला रंग-चूर्ण

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

उत्साह

1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?

उत्तर‘उत्साह’ एक आह्वान-गीत है, जिसका उद्देश्य केवल वर्षा कराना नहीं, बल्कि लोगों में नई चेतना, जोश और क्रांति-भावना जगाना है।फुहार, रिमझिम या साधारण बरसना कोमलता और शांति का प्रतीक है, जबकि ‘गरजना’ ओज, उत्साह, विद्रोह और परिवर्तन का प्रतीक है।कवि चाहता है कि बादल की गर्जना से तप्त, विकल और पीड़ित जन में नवजीवन और क्रांति की चेतना भर जाए; इसीलिए वह कोमल वर्षा के स्थान पर बादल से ‘गरजने’ के लिए कहता है।

2. कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ क्यों रखा गया है?

उत्तरयह कविता बादल के माध्यम से जोश, ऊर्जा और क्रांति-चेतना का संचार करती है।पूरी कविता में कवि बादल को बार-बार गरजने के लिए ललकारता है, ताकि वह नवजीवन, नई कल्पना और परिवर्तन को संभव कर सके।यह उमंग, ओज और नई शक्ति जगाने वाला आह्वान-गीत है; इसमें निराशा या शिथिलता का नहीं, बल्कि उत्साह और प्रेरणा का स्वर है – इसीलिए इसका शीर्षक ‘उत्साह’ रखा गया है, जो पूर्णतः सार्थक है।

3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

उत्तरकविता में बादल अनेक अर्थों की ओर संकेत करता है–(क) जलवर्षक के रूप में – पीड़ित और प्यासे जन की प्यास बुझाने तथा तप्त धरती को शीतल करने वाला।(ख) नवजीवन एवं नई कल्पना के रूप में – नए अंकुर, नई सृष्टि और ‘नूतन कविता’ को जन्म देने वाला।(ग) क्रांति एवं परिवर्तन के रूप में – अपने भीतर वज्र छिपाए हुए विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना का प्रतीक।(घ) पीड़ित जन के मसीहा के रूप में – विकल-उन्मन जन को नई शक्ति और आशा देने वाला।

4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। ‘उत्साह’ कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।

उत्तर‘उत्साह’ कविता में नाद-सौंदर्य वाले प्रमुख शब्द/पंक्तियाँ इस प्रकार हैं–• “बादल, गरजो!”• “घेर-घेर घोर गगन, धाराधर ओ!”• “ललित-ललित, काले घुँघराले”• “बाल-कल्पना के-से पाले”• “विकल-विकल, उन्मन थे उन्मन”इन शब्दों में ‘घ’, ‘ल’ आदि की आवृत्ति तथा पुनरुक्ति से एक विशेष ध्वन्यात्मक लय और ओज उत्पन्न होता है, जो नाद-सौंदर्य का सुंदर उदाहरण है।

5. (रचना और अभिव्यक्ति) जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।

उत्तर (सर्जनात्मक)यह विद्यार्थी की अपनी कल्पना एवं अनुभूति पर आधारित सृजनात्मक कार्य है। उदाहरण-स्वरूप वर्षा-ऋतु पर आधारित छोटी कविता–“घिर आए घन काले-काले, / मन में उठते भाव निराले।
बूँदें टपकीं धरती हँसी, / हरियाली ने ली अँगड़ाई-सी।
मोर नाचता वन-उपवन में, / उल्लास भरा मेरे जीवन में।”
(विद्यार्थी किसी पर्वत, नदी, सूर्योदय, वर्षा या वसंत पर अपने भाव कविता में उतार सकते हैं।)

अट नहीं रही है

1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।

उत्तरनिम्न पंक्तियों में बाहरी प्रकृति (फागुन की शोभा) और कवि के अंतर्मन के भावों का सुंदर सामंजस्य दिखाई देता है–• “कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो” – यहाँ फागुन की आभा को मानवीय रूप में, कवि के भीतर और बाहर दोनों जगह व्याप्त दिखाया गया है।• “कहीं पड़ी है उर में मंद-गंध-पुष्प-माल” – बाहर खिले फूलों की शोभा कवि के ‘उर’ (हृदय) में बस गई है।• “आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है” – बाह्य सौंदर्य ने कवि के मन को पूरी तरह बाँध लिया है।इन पंक्तियों में प्रकृति का बाह्य सौंदर्य कवि की आंतरिक अनुभूति से एकाकार हो गया है।

2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

उत्तरफागुन में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है – चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, आमों का बौर और होली का उल्लास छाया रहता है।यह सौंदर्य इतना मोहक और सर्वव्यापी है कि वह कवि के मन-तन में समा (अट) नहीं रहा।इस अनुपम शोभा ने कवि को इतना मुग्ध कर दिया है कि वह चाहकर भी अपनी आँख इससे नहीं हटा पाता – इसीलिए कवि की आँख फागुन की सुंदरता से नहीं हट रही है।

3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तरकवि ने फागुन के माध्यम से प्रकृति की व्यापकता का चित्रण अनेक रूपों में किया है–(क) फागुन की आभा का तन पर न समाना और घर-घर में भर जाना।(ख) पत्तों से लदी डालियाँ – कहीं हरी, कहीं लाल।(ग) मंद सुगंध वाले फूलों की मालाएँ।(घ) पाट-पाट (जगह-जगह) फैली शोभा-श्री जो संभाले नहीं संभलती।(ङ) आमों में फूटा बौर, वन-वन मँडराते भौंरे और ठौर-ठौर मची होली।इस प्रकार फागुन का सौंदर्य धरती से आकाश तक, घर-घर और वन-वन में सर्वत्र व्याप्त दिखाया गया है।

4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तरफागुन (वसंत) में प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम उत्कर्ष पर होता है, जो इसे अन्य ऋतुओं से भिन्न बनाता है–पेड़-पौधे नए पत्तों और रंग-बिरंगे फूलों से लद जाते हैं; आमों में बौर आ जाता है और भौंरे मँडराने लगते हैं।वातावरण में मंद सुगंध फैल जाती है तथा होली के रंग-उल्लास से चारों ओर उमंग छा जाती है।इस ऋतु का सौंदर्य इतना व्यापक और मादक होता है कि वह कहीं समाता नहीं – यही फागुन की विशेषता इसे शेष ऋतुओं से अलग करती है।

5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की प्रमुख विशेषताएँ–(क) मुक्त छंद का प्रयोग – निराला छायावादी कवियों में मुक्त छंद के प्रवर्तक हैं; उनकी कविता परंपरागत छंद-बंधनों से मुक्त है।(ख) नाद-सौंदर्य – पुनरुक्ति और शब्दों के चयन से ध्वन्यात्मक लय एवं ओज उत्पन्न होता है (जैसे ‘ललित-ललित’, ‘घेर-घेर घोर गगन’)।(ग) लाक्षणिकता एवं प्रतीकात्मकता – बादल को क्रांति-चेतना का प्रतीक बनाना।(घ) प्रकृति-चित्रण – फागुन और बादल के सजीव, व्यापक चित्र।(ङ) ओज एवं कोमलता का समन्वय – क्रांति-चेतना और ललित कल्पना दोनों एक साथ; तत्सम-प्रधान, सुगठित एवं भावपूर्ण भाषा।

6. (रचना और अभिव्यक्ति) होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।

उत्तरहोली के आसपास (फागुन में) प्रकृति में अनेक सुंदर परिवर्तन दिखाई देते हैं–सर्दी कम होकर मौसम सुहावना हो जाता है और हलकी गरमाहट आने लगती है।पेड़ पुराने पत्ते गिराकर नई कोंपलों और हरे-लाल पत्तों से भर जाते हैं; आमों में बौर आ जाता है।सरसों के पीले फूल, टेसू (पलाश) के लाल फूल और रंग-बिरंगे पुष्प खिल उठते हैं; भौंरे और तितलियाँ मँडराने लगती हैं।वातावरण में सुगंध, उल्लास और रंगों की मस्ती छा जाती है – चारों ओर उमंग और उत्सव का माहौल बन जाता है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय (लगभग 30–40 शब्द)

1. ‘उत्साह’ कविता किस प्रकार का गीत है और किसे संबोधित है?

उत्तर‘उत्साह’ एक आह्वान-गीत है, जो बादल को संबोधित है। इसमें कवि बादल को बार-बार गरजने के लिए ललकारता है, ताकि वह पीड़ित जन को नवजीवन दे और क्रांति-चेतना जगाए।

2. कवि ने बादल को ‘नवजीवन वाले’ क्यों कहा है?

उत्तरबादल वर्षा करके सूखी-तप्त धरती और प्यासे जन को नया जीवन देता है तथा नए अंकुर, नई कल्पना और नई सृष्टि को जन्म देता है; इसीलिए कवि ने उसे ‘नवजीवन वाले’ कहा है।

3. ‘अट नहीं रही है’ का क्या आशय है?

उत्तर‘अट नहीं रही है’ का आशय है – फागुन की शोभा इतनी अधिक और व्यापक है कि वह किसी सीमा में समा (अँट) नहीं रही; उसकी आभा कवि के तन और मन पर भी टिक नहीं पा रही।

4. ‘पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइसका भाव है कि फागुन की शोभा-श्री (सौंदर्य) जगह-जगह इतनी अधिक फैली हुई है कि वह संभाले नहीं संभल रही, अर्थात् फागुन का सौंदर्य अपार और सर्वव्यापी है।

5. निराला छायावादी कवियों में किस विशेषता के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं?

उत्तरनिराला छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग करने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने कविता को परंपरागत छंद-बंधनों से मुक्त कर भाव और शिल्प में नए प्रयोग किए।

दीर्घ उत्तरीय (लगभग 100–120 शब्द)

6. ‘उत्साह’ कविता में बादल के दोहरे रूप का वर्णन कीजिए।

उत्तर‘उत्साह’ कविता में बादल का दोहरा रूप उभरकर आता है। एक ओर बादल कोमलता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है – वह ‘ललित-ललित, काले घुँघराले’ तथा ‘बाल-कल्पना के-से पाले’ है, जो वर्षा करके तप्त धरती को शीतल करता है, प्यासे-पीड़ित जन की प्यास बुझाता है और नवजीवन प्रदान करता है। दूसरी ओर वही बादल क्रांति, ओज और परिवर्तन का प्रतीक है – उसके हृदय में ‘विद्युत-छवि’ और ‘वज्र’ छिपा है, जो विध्वंस, विप्लव और नई चेतना को संभव करता है। इस प्रकार बादल में कोमलता और प्रचंडता दोनों गुण विद्यमान हैं; वह सौंदर्य का भी स्रोत है और क्रांति-चेतना का भी। इसी दोहरे रूप के माध्यम से कवि जीवन को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखता है।

7. ‘अट नहीं रही है’ कविता में फागुन के सौंदर्य का चित्रण कीजिए।

उत्तर‘अट नहीं रही है’ में निराला ने फागुन के सर्वव्यापी सौंदर्य का सजीव चित्रण किया है। फागुन की शोभा इतनी अधिक है कि वह कहीं समा नहीं रही – उसकी आभा कवि के तन पर भी टिक नहीं रही और घर-घर में भर रही है। पेड़ों की डालियाँ पत्तों से लदी हैं – कहीं हरी, कहीं लाल; चारों ओर मंद सुगंध वाले फूलों की मालाएँ हैं। पाट-पाट फैली शोभा-श्री संभाले नहीं संभलती। आमों में बौर फूट पड़ा है, भौंरे वन-वन मँडरा रहे हैं और ठौर-ठौर होली मची है, जिससे सब बंधन छूट गए हैं। इस प्रकार धरती से आकाश तक फागुन का उल्लास, रंग और सौंदर्य सर्वत्र व्याप्त है, जिसने कवि के मन को पूरी तरह मुग्ध कर लिया है।

8. दोनों कविताओं में प्रकृति के प्रति निराला के दृष्टिकोण की तुलना कीजिए।

उत्तरदोनों कविताओं में निराला प्रकृति-प्रेमी कवि के रूप में सामने आते हैं, किंतु उनका दृष्टिकोण भिन्न है। ‘उत्साह’ में प्रकृति (बादल) को कवि गतिशील, ओजपूर्ण और क्रांतिकारी रूप में देखता है – यहाँ प्रकृति केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि परिवर्तन, नवजीवन और क्रांति-चेतना की प्रेरक शक्ति है। इसके विपरीत ‘अट नहीं रही है’ में प्रकृति (फागुन) कोमल, सौंदर्यमयी और उल्लासपूर्ण रूप में चित्रित है – यहाँ कवि उसके मादक सौंदर्य में डूब जाता है। पहली कविता में ओज और क्रांति प्रधान है, तो दूसरी में लालित्य और सौंदर्य। दोनों में समानता यह है कि निराला प्रकृति को सजीव, व्यापक और मानवीय भावों से जुड़ी हुई शक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं और उसमें अपने अंतर्मन के भावों का सामंजस्य बिठाते हैं।

अभ्यास MCQ & उत्तर-कुंजी

1. ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ कविताओं के कवि कौन हैं?

(क) जयशंकर प्रसाद

(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(ग) सुमित्रानंदन पंत

(घ) महादेवी वर्मा

2. ‘उत्साह’ कविता किसे संबोधित है?

(क) सूर्य को

(ख) वायु को

(ग) बादल को

(घ) नदी को

3. ‘उत्साह’ किस प्रकार का गीत है?

(क) विरह-गीत

(ख) आह्वान-गीत

(ग) शोक-गीत

(घ) प्रणय-गीत

4. ‘धाराधर’ शब्द का अर्थ है–

(क) नदी

(ख) बादल

(ग) पर्वत

(घ) बिजली

5. कवि बादल के हृदय में क्या छिपा हुआ बताता है?

(क) वज्र

(ख) मोती

(ग) फूल

(घ) जल

6. छायावादी कवियों में मुक्त छंद का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?

(क) पंत

(ख) प्रसाद

(ग) निराला

(घ) महादेवी

7. ‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु/मास के सौंदर्य का वर्णन है?

(क) सावन

(ख) फागुन

(ग) कार्तिक

(घ) पूस

8. ‘अट’ शब्द का अर्थ है–

(क) रुकना

(ख) समाना/अँटना

(ग) चमकना

(घ) उड़ना

9. फागुन में आमों में क्या फूट पड़ा है?

(क) पत्ते

(ख) बौर

(ग) फल

(घ) काँटे

10. ‘निदाघ’ शब्द का अर्थ है–

(क) सर्दी

(ख) गर्मी

(ग) वर्षा

(घ) कुहासा

उत्तर-कुंजी: 1→(ख), 2→(ग), 3→(ख), 4→(ख), 5→(क), 6→(ग), 7→(ख), 8→(ख), 9→(ख), 10→(ख)

अभिकथन-कारण

निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): ‘उत्साह’ कविता में कवि बादल से गरजने का आग्रह करता है।

कारण (R): कवि बादल के माध्यम से जोश, उत्साह और क्रांति-चेतना जगाना चाहता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ‘अट नहीं रही है’ में फागुन की शोभा कहीं समा नहीं रही।

कारण (R): फागुन का सौंदर्य अत्यंत अल्प और सीमित होता है।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – फागुन का सौंदर्य अपार एवं सर्वव्यापी होता है, इसीलिए वह समा नहीं रहा।

3. अभिकथन (A): निराला ने अपनी कविताओं में मुक्त छंद का प्रयोग किया है।

कारण (R): वे छायावादी कवियों में मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘उत्साह’ में बादल केवल वर्षा करने वाला साधारण बादल है।

कारण (R): कविता में बादल नवजीवन एवं क्रांति-चेतना का प्रतीक भी है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – बादल केवल वर्षक नहीं, बल्कि नवजीवन और क्रांति का प्रतीक भी है।

5. अभिकथन (A): ‘अट नहीं रही है’ में प्रकृति और कवि के अंतर्मन के भावों का सामंजस्य है।

कारण (R): अंतर्मन के भावों का बाहरी दुनिया से सामंजस्य छायावाद की एक विशेषता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
उत्तर-कुंजी (अभिकथन-कारण): 1→(क), 2→(ग), 3→(क), 4→(घ), 5→(क)

परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • ‘उत्साह’ को आह्वान-गीत तथा बादल को नवजीवन एवं क्रांति का प्रतीक – ये दो बिंदु अवश्य याद रखें; ये अक्सर पूछे जाते हैं।
  • नाद-सौंदर्य के उदाहरण (‘ललित-ललित’, ‘घेर-घेर घोर गगन’) पंक्ति-सहित लिखें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।
  • निराला के काव्य-शिल्प में ‘मुक्त छंद का प्रवर्तक’ अवश्य लिखें।
  • दोनों कविताओं का अंतर (ओज बनाम लालित्य) तुलनात्मक प्रश्न में स्पष्ट करें।
  • उत्तर बिंदुवार लिखें और कठिन शब्दों के अर्थ साथ देते रहें।

सामान्य गलतियाँ

  • ‘अट’ का अर्थ ‘रुकना’ लिख देना – सही अर्थ है ‘समाना/अँटना’।
  • निराला को ‘प्रगतिवादी’ कवि मान लेना; वे मूलतः छायावादी कवि हैं।
  • ‘उत्साह’ में बादल को केवल वर्षा का बादल समझना, उसके क्रांति-प्रतीक रूप को छोड़ देना।
  • शब्दार्थ में ‘निदाघ’ (गर्मी) और ‘धाराधर’ (बादल) को आपस में उलझा देना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्षितिज अध्याय 4 की दोनों कविताओं के कवि कौन हैं?

दोनों कविताओं ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं, जो छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।

‘उत्साह’ कविता में बादल किसका प्रतीक है?

‘उत्साह’ में बादल एक ओर वर्षा एवं नवजीवन का तथा दूसरी ओर विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना का प्रतीक है।

‘अट नहीं रही है’ में किसके सौंदर्य का वर्णन है?

इस कविता में फागुन (वसंत) के सर्वव्यापी सौंदर्य का वर्णन है, जो इतना अधिक है कि वह कहीं समा (अट) नहीं रहा।

प्रश्न NCERT क्षितिज (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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