NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 5: नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान एवं फसल (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 5 की दोनों कविताओं ‘यह दंतुरित मुसकान’ तथा ‘फसल’ (कवि – नागार्जुन) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, सार, भावार्थ, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण सहित।
कवि परिचय – नागार्जुन
नागार्जुन का जन्म सन् 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। आरंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में पाने के बाद वे अध्ययन हेतु बनारस और कोलकाता गए तथा 1936 में श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव के नागार्जुन ने अनेक बार पूरे भारत की यात्रा की। हिंदी और मैथिली दोनों में समान रूप से लिखने वाले इस जनकवि ने बाँग्ला तथा संस्कृत में भी कविताएँ रचीं; मातृभाषा मैथिली में वे ‘यात्री’ नाम से प्रतिष्ठित हैं। लोकजीवन से गहरे जुड़े, व्यंग्य में माहिर नागार्जुन को ‘आधुनिक कबीर’ भी कहा जाता है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, हिंदी अकादमी दिल्ली का शिखर सम्मान आदि से सम्मानित किया गया। सन् 1998 में उनका देहांत हुआ। प्रमुख कृतियाँ – युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हजार-हजार बाँहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस आदि।
कविता का सार – यह दंतुरित मुसकान
‘यह दंतुरित मुसकान’ में कवि नागार्जुन ने एक छोटे शिशु की नवदंत निकली मनोहारी मुसकान को देखकर अपने मन में उमड़ने वाले कोमल भावों को अनेक बिंबों के माध्यम से प्रकट किया है। कवि कहते हैं कि बच्चे की यह दंतुरित मुसकान इतनी प्राणवान है कि वह मृत व्यक्ति में भी जान डाल सकती है। धूल-धूसरित शरीर वाला यह शिशु ऐसा प्रतीत होता है मानो तालाब छोड़कर कमल के फूल कवि की झोंपड़ी में ही खिल उठे हों। शिशु के स्पर्श से कठोर पत्थर भी पिघलकर जल बन जाता है। बच्चे का स्पर्श पाकर कवि को लगता है मानो उनके भीतर शेफालिका के फूल झर पड़े हों।
कवि इस शिशु से पहली बार मिल रहे हैं, अतः बच्चा पहले उन्हें अपरिचित मानकर एकटक (अनिमेष) देखता रहता है। कवि उससे कहते हैं कि यदि उसकी माँ माध्यम न बनती तो वे इस अनोखी मुसकान को न तो देख पाते और न जान पाते। इसलिए कवि शिशु को और उसकी माँ दोनों को धन्य मानते हैं। चिर-प्रवासी होने के कारण कवि स्वयं को इस घर में ‘इतर’ और ‘अन्य’ अनुभव करते हैं। जब माँ उँगली के स्पर्श से उस अतिथि-समान कवि से बच्चे का परिचय कराती है और दोनों की आँखें मिलती हैं, तब वह दंतुरित मुसकान कवि को अत्यंत छविमान (सुंदर) लगती है। इस प्रकार कविता शिशु-सौंदर्य और वात्सल्य की कोमल अनुभूति को बड़े मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है।
कविता का सार – फसल
‘फसल’ कविता में नागार्जुन ने यह बताया है कि फसल कोई एक तत्व की देन नहीं, बल्कि अनेक तत्वों के सहयोग का परिणाम है। कवि प्रश्न उठाते हैं कि आखिर फसल है क्या और उसे पैदा करने में किन-किन तत्वों का योगदान होता है। वे बताते हैं कि फसल एक या दो नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू है; एक या दो नहीं, बल्कि लाख-लाख, कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा है; और हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है।
कवि कहते हैं कि फसल और कुछ नहीं, वह नदियों के पानी का जादू, मानव-श्रम (हाथों के स्पर्श) की महिमा तथा भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण-धर्म है। साथ ही वह सूरज की किरणों का रूपांतर और हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच भी है। इस प्रकार कवि यह रेखांकित करते हैं कि फसल मनुष्य के सामूहिक श्रम तथा प्रकृति (जल, मिट्टी, सूर्य, वायु) के सहयोग से ही उपजती है। उपभोक्ता-संस्कृति के इस दौर में यह कविता हमें कृषि-संस्कृति के निकट ले जाती है और श्रम तथा प्रकृति की महत्ता का बोध कराती है। बोलचाल की सहज भाषा, गति और लय इस कविता को विशेष प्रभावशाली बनाती है।
मूलभाव / भावार्थ
यह दंतुरित मुसकान – शिशु की निश्छल, नवदंत मुसकान इतनी मोहक और प्राणवान है कि वह निर्जीव में भी जान फूँक देती है और कठोरतम हृदय को भी पिघला देती है। कवि वात्सल्य-भाव से अभिभूत होकर शिशु एवं उसकी माँ दोनों को धन्य मानते हैं। संदेश यह है कि इसी कोमल सुंदरता में जीवन का असली रस और संदेश छिपा है।
फसल – फसल किसी एक तत्व की उपज नहीं, बल्कि जल, मिट्टी, सूर्य, वायु जैसी प्रकृति-शक्तियों और करोड़ों किसानों के सामूहिक श्रम का सम्मिलित परिणाम है। कविता श्रम की गरिमा, प्रकृति-मनुष्य के सहयोग तथा कृषि-संस्कृति के महत्व को उजागर करती है।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दंतुरित | बच्चों के नए-नए दाँत निकलने की अवस्था; नवदंत |
| मुसकान | हल्की हँसी, मंद हास्य |
| मृतक | मरा हुआ व्यक्ति, निर्जीव |
| धूलि-धूसर गात | धूल-मिट्टी से सने हुए अंग-प्रत्यंग |
| जलजात | कमल का फूल (जो जल में उत्पन्न होता है) |
| परस / स्पर्श | छूना, संपर्क |
| पाषाण | पत्थर, चट्टान |
| शेफालिका | हरसिंगार का सफेद-केसरिया सुगंधित फूल |
| अनिमेष | बिना पलक झपकाए लगातार देखना, एकटक |
| परिचित | जाना-पहचाना |
| माध्यम | जरिया, साधन |
| धन्य | सराहनीय, कृतार्थ, भाग्यशाली |
| चिर प्रवासी | लंबे समय से परदेश में रहने वाला |
| इतर | दूसरा, भिन्न |
| अन्य | दूसरा, पराया |
| अतिथि | मेहमान |
| संपर्क | मेल-जोल, संबंध |
| मधुपर्क | दही, घी, शहद, जल और दूध का योग (पंचामृत) जो देवता-अतिथि के सम्मान में दिया जाता है; यहाँ माँ के स्नेहमय प्यार का प्रतीक |
| कनखी | तिरछी निगाह से देखना, आँख का इशारा |
| छविमान | सुंदर, मनोहर |
| गरिमा / महिमा | गौरव, बड़प्पन, श्रेष्ठता |
| गुण-धर्म | स्वाभाविक विशेषता एवं गुण |
| संदली | चंदन के रंग की (हल्की पीली-भूरी) |
| रूपांतर | एक रूप का दूसरे रूप में बदलना |
| थिरकन | हल्की-सी गति, लहराहट, नृत्य जैसी हलचल |
| संकोच | सिमटाव, झिझक |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
यह दंतुरित मुसकान
1. बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
2. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है?
4. भाव स्पष्ट कीजिए—(क) छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।(ख) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल / बाँस था कि बबूल?
रचना और अभिव्यक्ति
5. मुसकान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।
6. दंतुरित मुसकान से बच्चे की उम्र का अनुमान लगाइए और तर्क सहित उत्तर दीजिए।
7. बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द-चित्र उपस्थित हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
फसल
1. कवि के अनुसार फसल क्या है?
2. कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?
3. फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
4. भाव स्पष्ट कीजिए—(क) रूपांतर है सूरज की किरणों का / सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
रचना और अभिव्यक्ति
5. कवि ने फसल को हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है—(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. नागार्जुन का मूल नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ था?
2. कवि को अपने घर में ‘इतर’ और ‘अन्य’ क्यों लगता है?
3. ‘फसल’ कविता का केंद्रीय भाव क्या है?
4. ‘यह दंतुरित मुसकान’ में माँ की क्या भूमिका है?
5. नागार्जुन को ‘आधुनिक कबीर’ और ‘जनकवि’ क्यों कहा जाता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. ‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता में निहित वात्सल्य-भाव का वर्णन कीजिए।
7. ‘फसल’ कविता के माध्यम से कवि श्रम और प्रकृति के संबंध को किस प्रकार उजागर करता है?
8. ‘यह दंतुरित मुसकान’ और ‘फसल’ – दोनों कविताओं के भाव-सौंदर्य एवं संदेश की तुलना कीजिए।
अभ्यास MCQ & उत्तर-कुंजी
1. ‘यह दंतुरित मुसकान’ और ‘फसल’ कविताओं के रचयिता कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) नागार्जुन
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) सुमित्रानंदन पंत
2. नागार्जुन का मूल नाम क्या था?
(क) वैद्यनाथ मिश्र
(ख) धनपत राय
(ग) रामधारी सिंह
(घ) हरिवंश राय
3. ‘दंतुरित’ शब्द का अर्थ है—
(क) बिना दाँत वाला
(ख) टूटे दाँत वाला
(ग) नए-नए दाँत निकलने वाला
(घ) पीले दाँत वाला
4. कवि के अनुसार बच्चे की मुसकान किसमें भी जान डाल सकती है?
(क) पशु में
(ख) मृतक में
(ग) वृक्ष में
(घ) नदी में
5. ‘जलजात’ का अर्थ है—
(क) बादल
(ख) कमल का फूल
(ग) मछली
(घ) झरना
6. शिशु के स्पर्श से कवि को किन फूलों के झरने का अनुभव होता है?
(क) गुलाब
(ख) चमेली
(ग) शेफालिका (हरसिंगार)
(घ) कमल
7. कवि और शिशु के बीच परिचय का माध्यम कौन बनती है?
(क) पिता
(ख) दादी
(ग) माँ
(घ) पड़ोसी
8. ‘फसल’ कविता के अनुसार फसल किसका जादू है?
(क) मशीनों का
(ख) ढेर सारी नदियों के पानी का
(ग) बादलों का
(घ) खाद का
9. कवि ने फसल को हजार-हजार खेतों की किसका गुण-धर्म कहा है?
(क) पानी का
(ख) हवा का
(ग) मिट्टी का
(घ) सूरज का
10. ‘फसल’ कविता में ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ किसकी ओर संकेत करती है?
(क) मशीनी उत्पादन की
(ख) मानव-श्रम की महत्ता की
(ग) व्यापार की
(घ) पूँजी की
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
निर्देश— नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बच्चे की दंतुरित मुसकान मृतक में भी जान डाल सकती है।
कारण (R): शिशु की मुसकान सहज, निश्छल और अत्यंत प्राणवान होती है।
2. अभिकथन (A): कवि स्वयं को अपने घर में ‘इतर’ और ‘अन्य’ अनुभव करते हैं।
कारण (R): कवि चिर-प्रवासी हैं और शिशु उन्हें पहचानता नहीं।
3. अभिकथन (A): माँ कवि और शिशु के बीच परिचय का माध्यम बनती है।
कारण (R): बच्चा कवि से पूर्व-परिचित था और स्वयं ही मुसकरा उठा।
4. अभिकथन (A): फसल केवल मानव-श्रम का परिणाम है।
कारण (R): फसल जल, मिट्टी, सूर्य, वायु और मानव-श्रम के सम्मिलित योगदान से उपजती है।
5. अभिकथन (A): ‘फसल’ कविता मानव-श्रम की गरिमा को रेखांकित करती है।
कारण (R): कवि फसल को लाख-लाख, कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा एवं महिमा कहते हैं।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- दोनों कविताओं के कवि – नागार्जुन (मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र) – और जन्म-स्थान (सतलखा, दरभंगा, बिहार) याद रखें।
- ‘यह दंतुरित मुसकान’ के बिंब (कमल/जलजात, पाषाण का पिघलना, शेफालिका के फूल) और ‘फसल’ के पाँच तत्व (पानी, श्रम, मिट्टी, सूरज, हवा) क्रमवार लिखें – इन पर सीधे प्रश्न आते हैं।
- ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्न में पहले पंक्ति का सरल अर्थ, फिर उसका भाव/संदेश लिखें।
- उत्तर सटीक एवं बिंदुवार लिखें; कविता की प्रमुख पंक्तियों को उद्धरण के रूप में जोड़ें।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- नागार्जुन को प्रेमचंद या किसी गद्यकार से न जोड़ें – ये दोनों कविताएँ हैं।
- ‘दंतुरित’ का अर्थ ‘बिना दाँत’ लिखना गलत है – इसका अर्थ है ‘नए-नए दाँत निकलने वाला’।
- ‘फसल’ को केवल मिट्टी या केवल श्रम की देन बताना अधूरा उत्तर है – सभी पाँच तत्वों का उल्लेख करें।
- देवनागरी में मात्रा एवं वर्तनी (जैसे शेफालिका, मधुपर्क, संदली) सावधानी से लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्षितिज भाग 2 अध्याय 5 की कविताएँ कौन-सी हैं और इनके कवि कौन हैं?
इस अध्याय में नागार्जुन की दो कविताएँ – ‘यह दंतुरित मुसकान’ और ‘फसल’ – संकलित हैं। नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
यह कविता शिशु की निश्छल, नवदंत मुसकान और उससे जागे वात्सल्य-भाव को अनेक बिंबों के माध्यम से व्यक्त करती है; इसी कोमल सुंदरता में जीवन का संदेश छिपा है।
‘फसल’ कविता के अनुसार फसल किन तत्वों से बनती है?
फसल नदियों के पानी, लाखों-करोड़ों किसानों के हाथों के श्रम, मिट्टी के गुण-धर्म, सूरज की किरणों और हवा की थिरकन – अर्थात् जल, श्रम, मिट्टी, सूर्य एवं वायु के सम्मिलित योगदान से बनती है।
प्रश्न NCERT क्षितिज पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
