NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 6: संगतकार
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 6 ‘संगतकार’ (कवि – मंगलेश डबराल) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के विस्तृत उत्तर, कविता का सार, मूलभाव, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण।
कवि परिचय – मंगलेश डबराल
मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के काफलपानी गाँव में हुआ और शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। दिल्ली आकर उन्होंने ‘हिंदी पैट्रियट’, ‘प्रतिपक्ष’ तथा ‘आसपास’ में काम किया और भोपाल में भारत भवन से प्रकाशित ‘पूर्वग्रह’ में सहायक संपादक रहे। बाद में वे ‘जनसत्ता’ अखबार में साहित्य संपादक तथा नेशनल बुक ट्रस्ट से भी जुड़े रहे। उनके चार कविता-संग्रह प्रकाशित हुए – पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं और आवाज़ भी एक जगह है। साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पहल सम्मान से सम्मानित मंगलेश डबराल की ख्याति एक श्रेष्ठ अनुवादक के रूप में भी है। उनकी कविताओं की भाषा पारदर्शी तथा सौंदर्यबोध सूक्ष्म है। सन् 2020 में उनका निधन हुआ।
कविता का सार
‘संगतकार’ मंगलेश डबराल की एक मार्मिक कविता है, जो संगीत के मंच पर मुख्य गायक का साथ देने वाले उस गुमनाम सहयोगी – संगतकार – के महत्त्व पर विचार करती है। कवि बताते हैं कि मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी और गंभीर स्वर के साथ एक दूसरी आवाज़ भी सुनाई देती है, जो सुंदर तो है पर कमज़ोर और काँपती हुई है। यह आवाज़ संगतकार की है – वह मुख्य गायक का छोटा भाई, उसका शिष्य या पैदल चलकर सीखने आने वाला कोई दूर का रिश्तेदार हो सकता है।
कवि कहते हैं कि संगतकार अपनी गूँज को मुख्य गायक की गरज में प्राचीन काल से मिलाता आया है। जब गायक अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो जाता है या अपने ही सरगम को लाँघकर भटकता हुआ अनहद में चला जाता है, तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है। वह मुख्य गायक के पीछे छूटे हुए सामान को समेटने और उसे उसका बचपन याद दिलाने जैसा काम करता है। जब तार सप्तक की ऊँचाई पर गायक का गला बैठने लगता है, उत्साह अस्त होने लगता है और आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरने लगता है, तभी कहीं से संगतकार का स्वर आकर मुख्य गायक को ढाढ़स बँधाता है।
संगतकार कभी-कभी यों ही गायक का साथ देता है, केवल यह जताने के लिए कि वह अकेला नहीं है और गीत फिर से गाया जा सकता है। वह जानबूझकर अपने स्वर को ऊँचा नहीं उठाता और गाए जा चुके राग को धीरे-धीरे दोहराता रहता है। कवि अंत में कहते हैं कि उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है और अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है, उसे विफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। इस प्रकार कविता हर सफलता के पीछे खड़े गुमनाम सहयोगियों के योगदान और उनकी विनम्रता को सम्मान देती है।
मूलभाव / केंद्रीय भाव
इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि किसी भी क्षेत्र में – संगीत, नाटक, फ़िल्म, नृत्य, खेल या समाज और इतिहास में – जब कोई व्यक्ति शिखर तक पहुँचता है, तो उसके पीछे अनेक गुमनाम सहयोगियों का योगदान छिपा होता है। संगतकार इन्हीं अनाम सहयोगियों का प्रतीक है। कवि बताते हैं कि संगतकार का सामने न आना, अपने स्वर को ऊँचा न उठाना उसकी कमज़ोरी या विफलता नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और मनुष्यता है। कविता यह संवेदनशीलता विकसित करती है कि हमें प्रत्येक सहयोगी के मौन योगदान का आदर करना चाहिए।
शब्द-संपदा (शब्दार्थ)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संगतकार | मुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने वाला कलाकार, सहयोगी |
| गरज | ऊँची, गंभीर आवाज़ |
| अंतरा | स्थायी या टेक को छोड़कर गीत का चरण |
| जटिल | कठिन, उलझा हुआ |
| तान | संगीत में स्वर का विस्तार |
| नौसिखिया | जिसने अभी सीखना आरंभ किया हो |
| राख जैसा कुछ गिरता हुआ | बुझता हुआ (कमज़ोर पड़ता हुआ) स्वर |
| ढाढ़स बँधाना | तसल्ली देना, सांत्वना देना |
| स्थायी | गीत का मुख्य पद या टेक जो बार-बार दोहराया जाता है |
| सरगम | संगीत के सात स्वर – सा, रे, ग, म, प, ध, नि |
| तारसप्तक | मध्य सप्तक से ऊपर का सप्तक (बहुत ऊँची ध्वनि) |
| अनहद | जिसकी कोई सीमा न हो; असीम, अनंत नाद |
| गूँज | प्रतिध्वनि, स्वर की अनुगूँज |
| हिचक | झिझक, संकोच |
| विफलता | असफलता |
| मनुष्यता | मानवीयता, इंसानियत |
| प्रेरणा | उत्साह बढ़ाने वाली शक्ति, उत्प्रेरणा |
| उत्साह अस्त होना | जोश/उमंग का समाप्त होने लगना |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
1. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?
2. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?
3. संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?
4. भाव स्पष्ट कीजिए— और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है उसे विफलता नहीं उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।
5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
6. कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
7. सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?
रचना और अभिव्यक्ति
8. कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाएँ— (क) ऐसे में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए। (ख) ऐसी परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?
9. आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए।
10. किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर क्यों नहीं पहुँच पाते होंगे?
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ‘संगतकार’ कविता के कवि कौन हैं और इसमें संगतकार किसका प्रतीक है?
2. संगतकार मुख्य गायक का क्या-क्या सम्बन्धी हो सकता है, जैसा कविता में बताया गया है?
3. ‘राख जैसा कुछ गिरता हुआ’ पंक्ति का क्या आशय है?
4. संगतकार ‘स्थायी’ को क्यों सँभाले रखता है?
5. कवि ने संगतकार की हिचक को विफलता क्यों नहीं माना?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. ‘संगतकार’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं? विस्तार से लिखिए।
7. संगतकार और मुख्य गायक के संबंध की तुलना जीवन के किसी अन्य संबंध से कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘संगतकार’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) नागार्जुन
(ख) मंगलेश डबराल
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(घ) ऋतुराज
2. कविता में संगतकार किसका प्रतीक है?
(क) मुख्य गायक का
(ख) श्रोताओं का
(ग) गुमनाम सहयोगियों का
(घ) संगीत-गुरु का
3. मुख्य गायक का गला कब बैठने लगता है?
(क) मंद्र सप्तक में
(ख) मध्य सप्तक में
(ग) तार सप्तक की ऊँचाई पर
(घ) स्थायी गाते समय
4. ‘ढाढ़स बँधाना’ का अर्थ है—
(क) क्रोध करना
(ख) तसल्ली/सांत्वना देना
(ग) डाँटना
(घ) चुप रहना
5. कविता के अनुसार संगतकार अपनी गूँज कब से मिलाता आया है?
(क) आधुनिक काल से
(ख) मध्यकाल से
(ग) प्राचीन काल से
(घ) अभी कुछ वर्षों से
6. कविता में मुख्य गायक का स्वर कैसा बताया गया है?
(क) काँपता हुआ कमज़ोर
(ख) चट्टान जैसा भारी और गंभीर
(ग) हिचकता हुआ
(घ) धीमा एवं मद्धम
7. ‘अनहद’ शब्द का अर्थ है—
(क) सीमित ध्वनि
(ख) असीम/अनंत नाद
(ग) टूटता स्वर
(घ) मधुर तान
8. संगतकार के स्वर में जो हिचक है, उसे कवि क्या मानने के लिए कहते हैं?
(क) विफलता
(ख) कमज़ोरी
(ग) मनुष्यता
(घ) घमंड
9. कविता के अनुसार संगतकार स्थायी को क्यों सँभाले रहता है?
(क) अपना स्वर ऊँचा दिखाने के लिए
(ख) गायक के भटक जाने पर धुन बनाए रखने के लिए
(ग) श्रोताओं को रिझाने के लिए
(घ) पुरस्कार पाने के लिए
10. ‘संगतकार’ कविता क्षितिज भाग 2 के किस खंड में संकलित है?
(क) गद्य खंड
(ख) काव्य खंड
(ग) पूरक पाठ्यपुस्तक
(घ) व्याकरण खंड
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): संगतकार अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता।
कारण (R): वह मुख्य गायक का महत्त्व बनाए रखना चाहता है और विनम्र है।
2. अभिकथन (A): तार सप्तक पर मुख्य गायक का स्वर बिखरने लगता है।
कारण (R): तार सप्तक संगीत का सबसे नीचा (मंद्र) सप्तक होता है।
3. अभिकथन (A): संगतकार का स्वर मुख्य गायक को ढाढ़स बँधाता है।
कारण (R): वह गायक को यह विश्वास दिलाता है कि वह अकेला नहीं है और गीत फिर से गाया जा सकता है।
4. अभिकथन (A): कवि संगतकार की हिचक को उसकी मनुष्यता मानते हैं।
कारण (R): संगतकार गायन में पूरी तरह असफल कलाकार है।
5. अभिकथन (A): संगतकार केवल संगीत के क्षेत्र तक सीमित होता है।
कारण (R): संगतकार जैसे सहयोगी फ़िल्म, नाटक, नृत्य, खेल तथा समाज और इतिहास में भी दिखाई देते हैं।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- ‘संगतकार’ में प्रतीक एवं केंद्रीय भाव (गुमनाम सहयोगियों का सम्मान) को अवश्य याद रखें – यही अधिकांश प्रश्नों का आधार है।
- ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ प्रश्न में पहले शब्दार्थ, फिर पंक्ति का सरल भाव और अंत में निष्कर्ष लिखें।
- स्थायी, अंतरा, सरगम, तार सप्तक, अनहद जैसे संगीत-शब्दों के अर्थ कंठस्थ रखें; इनसे शब्दार्थ व MCQ बनते हैं।
- कवि-परिचय में जन्म-वर्ष (1948), जन्म-स्थान (काफलपानी, टिहरी गढ़वाल), प्रमुख रचनाएँ एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार अवश्य लिखें।
सामान्य गलतियाँ
- तार सप्तक को सबसे नीचा सप्तक मान लेना – वास्तव में यह सबसे ऊँचा सप्तक है (सबसे नीचा मंद्र सप्तक है)।
- संगतकार को केवल कमज़ोर/असफल गायक समझ लेना – कवि उसे विनम्र एवं महान सहयोगी मानते हैं।
- कवि का नाम ‘मंगलेश डबराल’ के स्थान पर गलत लिखना (वर्तनी सावधानी से लिखें)।
- उत्तर में पाठ का सार लिख देना, जबकि प्रश्न भाव या भूमिका पूछ रहा हो – प्रश्न के अनुसार ही उत्तर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘संगतकार’ कविता के कवि कौन हैं?
‘संगतकार’ कविता के कवि मंगलेश डबराल हैं, जिनका जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) में हुआ था और जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कविता में ‘संगतकार’ किसका प्रतीक है?
संगतकार उन सभी गुमनाम सहयोगियों का प्रतीक है, जो किसी की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हुए भी स्वयं अनाम और छाया में रहते हैं।
कवि संगतकार की हिचक को क्या मानने के लिए कहते हैं?
कवि कहते हैं कि संगतकार की आवाज़ की हिचक और स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश उसकी विफलता नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और मनुष्यता है।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
