NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 7: नेताजी का चश्मा (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 7 ‘नेताजी का चश्मा’ (लेखक – स्वयं प्रकाश) का पूरा एवं प्रामाणिक समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश
स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की और उनका बचपन तथा नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता। वे चर्चित साहित्यिक पत्रिका ‘वसुधा’ के संपादन से भी जुड़े रहे। आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश समकालीन कहानी के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनके तेरह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी और संधान उल्लेखनीय हैं; बीच में विनय तथा ईंधन उनके चर्चित उपन्यास हैं। उन्हें पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार तथा राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया। मध्यवर्गीय जीवन और वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना उनकी कहानियों का मूल स्वर है। सन् 2019 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘नेताजी का चश्मा’ देशभक्ति की भावना को सहज एवं मार्मिक ढंग से व्यक्त करने वाली कहानी है। हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में एक छोटे-से कस्बे से गुज़रना पड़ता था। उस कस्बे की नगरपालिका ने मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की एक सुंदर मूर्ति लगवा दी थी। मूर्ति बहुत सुंदर थी, पर उसमें एक कमी थी – नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था; उसकी जगह एक सचमुच का काले फ्रेमवाला चश्मा पहना दिया गया था।
हालदार साहब हर बार चौराहे पर रुककर पान खाते और मूर्ति को ध्यान से देखते। उन्होंने पाया कि मूर्ति पर लगा चश्मा हर बार बदल जाता है – कभी गोल, कभी चौकोर, कभी काला तो कभी धूप का। जिज्ञासावश उन्होंने पानवाले से पूछा तो पता चला कि यह काम कैप्टन चश्मेवाला करता है। कैप्टन एक बूढ़ा, मरियल-सा, लँगड़ा फेरीवाला था जो गली-गली घूमकर चश्मे बेचता था। नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के उसे अधूरी और दुखदायी लगती थी, इसलिए वह अपने पास उपलब्ध चश्मों में से एक मूर्ति पर लगा देता; ग्राहक के माँगने पर वही फ्रेम उतारकर बेच देता और मूर्ति पर दूसरा लगा देता।
मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल पत्थर का चश्मा बनाना भूल गए थे, इसलिए कैप्टन ने यह कमी पूरी कर दी थी। हालदार साहब इस साधारण-से लगने वाले फेरीवाले की देशभक्ति देखकर अभिभूत हो गए। पानवाला उसका मज़ाक उड़ाता था कि वह लँगड़ा फ़ौज में क्या जाएगा, पर हालदार साहब को यह बात अच्छी नहीं लगी।
दो साल तक यही क्रम चलता रहा। फिर एक बार हालदार साहब ने देखा कि कैप्टन की मृत्यु हो गई है और मूर्ति की आँखों पर कोई चश्मा नहीं है। यह जानकर वे बहुत दुखी हुए और सोचने लगे कि देश पर सब कुछ न्योछावर करने वालों पर भी जो कौम हँसती है, उसका क्या होगा। पंद्रह दिन बाद जब वे फिर उसी रास्ते से गुज़रे, तो उन्होंने तय किया कि इस बार न रुकेंगे, न मूर्ति की ओर देखेंगे। परंतु आदत से मजबूर उनकी आँखें मूर्ति की ओर उठ गईं। उन्होंने देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना एक छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। यह दृश्य देखकर हालदार साहब की आँखें भर आईं – देशभक्ति की भावना नई पीढ़ी में भी जीवित थी।
मूलभाव / संदेश
चारों ओर सीमाओं से घिरे भूभाग का नाम ही देश नहीं होता; देश उसमें रहने वाले नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों से बनता है – इन सबसे प्रेम करना तथा इनकी समृद्धि के लिए प्रयास करना ही देशभक्ति है। कहानी कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से देश के उन करोड़ों साधारण नागरिकों के योगदान को रेखांकित करती है जो अपने-अपने तरीके से देश-निर्माण में सहयोग देते हैं। यह कहानी यह भी कहती है कि देशभक्ति केवल बड़ों तक सीमित नहीं – बच्चे भी (सरकंडे का चश्मा बनाकर) इसमें शामिल हैं।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कस्बा | छोटा शहर, गाँव से बड़ी पर शहर से छोटी बस्ती |
| नगरपालिका | नगर का प्रबंध करने वाली स्थानीय शासन-संस्था |
| प्रतिमा / मूर्ति | किसी की बनी हुई आकृति, बुत |
| संगमरमर | एक प्रकार का सफ़ेद, चमकीला बहुमूल्य पत्थर |
| ऊहापोह | दुविधा, असमंजस, सोच-विचार |
| शासनावधि | शासन करने की अवधि, कार्यकाल |
| कौतुक | कुतूहल, अचंभा, मनोरंजक बात |
| कौतूहल | जानने की उत्सुकता, जिज्ञासा |
| दुर्दमनीय | जिसे दबाना या रोकना कठिन हो |
| खुशमिज़ाज | प्रसन्न रहने वाला, हँसमुख |
| तोंद | निकला हुआ बड़ा पेट |
| बत्तीसी | दाँतों की पंक्ति |
| दरकार | आवश्यकता, ज़रूरत |
| पारदर्शी | आर-पार दिखाई देने वाला, जिसके आर-पार देखा जा सके |
| द्रवित | पिघला हुआ, करुणा से भरा, भावुक |
| नतमस्तक | सिर झुकाए हुए, श्रद्धा से झुका हुआ |
| हतप्रभ / अवाक् | हक्का-बक्का, चकित रह जाना, बोलती बंद हो जाना |
| मरियल | दुबला-पतला, कमज़ोर |
| फेरी लगाना | गली-गली घूमकर सामान बेचना |
| सरकंडा | एक प्रकार का पतला, लंबा पौधा/तिनका जिससे कलम आदि बनाई जाती है |
| भावुक | भावनाओं से शीघ्र प्रभावित होने वाला |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
2. हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा—
(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
3. आशय स्पष्ट कीजिए—
“बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।”
4. पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
5. “वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!”
कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
6. निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं—
(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।
(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुआ बोला—साहब! कैप्टन मर गया।
(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
7. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
8. कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है—
(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
9. सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे—सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।
10. निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए—
“कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।”
11. ‘भई खूब! क्या आइडिया है।’ इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?
भाषा-अध्ययन
12. निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए—
13. निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए—
→ उसके द्वारा अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर (एक फ्रेम) फिट कर दिया जाता है।(ख) पानवाला नया पान खा रहा था।
→ पानवाले द्वारा नया पान खाया जा रहा था।(ग) पानवाले ने साफ़ बता दिया था।
→ पानवाले के द्वारा साफ़ बता दिया गया था।(घ) ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे।
→ ड्राइवर के द्वारा ज़ोर से ब्रेक मारे गए।(ङ) नेताजी ने देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।
→ नेताजी के द्वारा देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया गया।(च) हालदार साहब ने चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया।
→ हालदार साहब के द्वारा चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया गया।
14. नीचे लिखे वाक्यों को भाववाच्य में बदलिए—
जैसे—अब चलते हैं। – अब चला जाए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. हालदार साहब को कस्बे के चौराहे से कितने अंतराल पर गुज़रना पड़ता था और वहाँ की मूर्ति में क्या विशेषता थी?
2. मूर्ति पर लगा चश्मा बार-बार क्यों बदल जाता था?
3. मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल कौन था और मूर्ति में क्या कमी रह गई थी?
4. कैप्टन की मृत्यु का समाचार पानवाले ने किस प्रकार दिया?
5. कहानी के अंत में हालदार साहब ने मूर्ति पर क्या देखा और उसका उन पर क्या प्रभाव पड़ा?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मूल भाव/संदेश स्पष्ट कीजिए।
7. कैप्टन चश्मेवाले के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
8. इस कहानी के शीर्षक ‘नेताजी का चश्मा’ की सार्थकता पर विचार कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) स्वयं प्रकाश
(ग) यशपाल
(घ) मन्नू भंडारी
2. कहानी में किस नेता की मूर्ति की चर्चा की गई है?
(क) महात्मा गांधी
(ख) जवाहरलाल नेहरू
(ग) नेताजी सुभाषचंद्र बोस
(घ) भगत सिंह
3. हालदार साहब कितने दिनों के अंतराल पर उस कस्बे से गुज़रते थे?
(क) हर सातवें दिन
(ख) हर दसवें दिन
(ग) हर पंद्रहवें दिन
(घ) हर महीने
4. नेताजी की मूर्ति किस पत्थर की बनी थी?
(क) ग्रेनाइट
(ख) संगमरमर
(ग) बलुआ पत्थर
(घ) चूना-पत्थर
5. मूर्ति बनाने का काम किसे सौंपा गया था?
(क) कैप्टन को
(ख) पानवाले को
(ग) मास्टर मोतीलाल को
(घ) नगरपालिका अध्यक्ष को
6. मूर्ति में कौन-सी कमी रह गई थी?
(क) सिर पर टोपी नहीं थी
(ख) आँखों पर पत्थर का चश्मा नहीं था
(ग) हाथ टूटा हुआ था
(घ) वर्दी नहीं बनी थी
7. मूर्ति पर चश्मा कौन बदलता रहता था?
(क) हालदार साहब
(ख) पानवाला
(ग) कैप्टन चश्मेवाला
(घ) मास्टर मोतीलाल
8. कैप्टन वास्तव में क्या काम करता था?
(क) फ़ौजी सिपाही था
(ख) चश्मे बेचने वाला फेरीवाला था
(ग) मूर्तिकार था
(घ) अध्यापक था
9. कहानी के अंत में मूर्ति पर किस चीज़ का चश्मा रखा हुआ था?
(क) काँच का
(ख) सरकंडे का
(ग) धूप का
(घ) तार के फ्रेम का
10. कहानी का मुख्य भाव क्या है?
(क) हास्य-व्यंग्य
(ख) प्रेम-कहानी
(ग) देशभक्ति की भावना
(घ) प्रकृति-चित्रण
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लोग चश्मेवाले को ‘कैप्टन’ कहकर पुकारते थे।
कारण (R): वह आज़ाद हिंद फ़ौज का कैप्टन रह चुका था।
2. अभिकथन (A): नेताजी की मूर्ति पर लगा चश्मा बार-बार बदल जाता था।
कारण (R): कैप्टन ग्राहक की माँग पर मूर्ति का फ्रेम बेच देता और दूसरा फ्रेम लगा देता था।
3. अभिकथन (A): मूर्ति में पत्थर का चश्मा नहीं बन पाया था।
कारण (R): मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल पत्थर का पारदर्शी चश्मा बनाने में असमर्थ रहे।
4. अभिकथन (A): कहानी के अंत में हालदार साहब की आँखें भर आईं।
कारण (R): मूर्ति पर बच्चे द्वारा बनाया सरकंडे का चश्मा देखकर उन्हें देशभक्ति जीवित होने का अनुभव हुआ।
5. अभिकथन (A): पानवाला कैप्टन की मृत्यु का समाचार देते समय उदास हो गया।
कारण (R): पानवाला कैप्टन से ईर्ष्या करता था और उसकी मृत्यु से प्रसन्न था।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- लेखक का नाम स्वयं प्रकाश तथा विधा कहानी अवश्य याद रखें; जन्म 1947 (इंदौर), निधन 2019।
- मुख्य पात्र क्रम से याद रखें – हालदार साहब, कैप्टन (चश्मेवाला), पानवाला एवं मास्टर मोतीलाल।
- आशय/व्याख्या वाले प्रश्नों में पहले कथन का सरल अर्थ, फिर लेखक का संदेश लिखें।
- ‘सरकंडे का चश्मा’ प्रसंग एवं उसका प्रतीकार्थ (नई पीढ़ी में जीवित देशभक्ति) बार-बार पूछा जाता है।
- वाच्य-परिवर्तन (कर्मवाच्य/भाववाच्य) के नियम अभ्यास से पक्के करें – यह सुनिश्चित अंक दिलाता है।
सामान्य गलतियाँ
- कैप्टन को सचमुच का फ़ौजी समझ लेना – वह केवल देशभक्त फेरीवाला था।
- मूर्तिकार का नाम भूल जाना अथवा कैप्टन को ही मूर्तिकार मान लेना (मूर्तिकार – मास्टर मोतीलाल)।
- भाववाच्य में कर्ता के साथ ‘से’ (माँ से बैठा नहीं जाता) लगाना भूल जाना।
- स्थानीय बोली के वाक्यों को मानक हिंदी में बदलते समय शब्दशः अनुवाद कर देना।
- निपात (ही, भी, तक, तो) और कारक/संबंधबोधक में अंतर न कर पाना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश हैं। उनका जन्म 1947 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ और निधन 2019 में हुआ। वे समकालीन हिंदी कहानी के महत्त्वपूर्ण लेखक माने जाते हैं।
लोग चश्मेवाले को ‘कैप्टन’ क्यों कहते थे?
चश्मेवाला सैनिक नहीं था, फिर भी नेताजी के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा एवं सच्ची देशभक्ति के कारण लोग आदरपूर्वक उसे ‘कैप्टन’ कहते थे।
कहानी के अंत में सरकंडे का चश्मा क्या दर्शाता है?
मूर्ति पर बच्चे द्वारा बनाया सरकंडे का छोटा-सा चश्मा यह दर्शाता है कि देशभक्ति की भावना अभी मरी नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी और बच्चों में भी जीवित है।
प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
