NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 4: उत्साह तथा अट नहीं रही है (सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’) – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 4 की दो कविताओं ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ (कवि – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, कविता का सार, शब्द-संपदा, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं परीक्षा-युक्तियाँ।
कवि परिचय – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल (जिला मेदिनीपुर) में हुआ था। वे मूलतः गढ़ाकोला (जिला उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे। उनकी औपचारिक शिक्षा नौवीं तक महिषादल में ही हुई; आगे का संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी का गहन ज्ञान उन्होंने स्वाध्याय से अर्जित किया। संगीत और दर्शनशास्त्र के भी वे गहरे अध्येता थे। रामकृष्ण परमहंस तथा विवेकानंद की विचारधारा का उन पर विशेष प्रभाव पड़ा। उनका पारिवारिक जीवन दुखों और संघर्षों से भरा रहा। अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता तथा नए पत्ते उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं; उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध-लेखन में भी उनकी ख्याति अविस्मरणीय है। छायावादी रचनाकारों में उन्होंने सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया। शोषित एवं पीड़ित जन के प्रति गहरी सहानुभूति और सत्ता-शोषक वर्ग के प्रति प्रचंड प्रतिकार उनकी कविता की विशेषता है। सन् 1961 में उनका देहांत हुआ।
कविताओं का सार
1. उत्साह (कविता का सार)
‘उत्साह’ एक आह्वान-गीत है जो बादल को संबोधित है। बादल निराला का प्रिय विषय है। कवि बादल से बार-बार ‘गरजने’ का आग्रह करता है, क्योंकि बादल एक ओर पीड़ित-प्यासे जन की आकांक्षा (प्यास और अन्न की चाह) को पूरा करने वाला है, तो दूसरी ओर वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना को संभव करने वाला भी है। कवि बादल को ‘ललित-ललित, काले घुँघराले’, ‘बाल-कल्पना के-से पाले’ तथा हृदय में बिजली की छवि छिपाए ‘नवजीवन वाले’ कहकर पुकारता है, जिसके भीतर वज्र छिपा है और जो ‘नूतन कविता’ भर सकता है। तप्त धरती और विकल-उन्मन जन को बादल ही जल से शीतल कर सकता है। इस प्रकार कवि जीवन को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखता है। कविता में ललित कल्पना और क्रांति-चेतना दोनों एक साथ उपस्थित हैं – बादल सौंदर्य का भी प्रतीक है और परिवर्तन-क्रांति का भी। मुक्त छंद, ओजपूर्ण भाषा और नाद-सौंदर्य इस कविता को विशेष बनाते हैं।
2. अट नहीं रही है (कविता का सार)
इस कविता में निराला फागुन के सर्वव्यापी सौंदर्य में डूब जाते हैं। फागुन की शोभा इतनी अधिक है कि वह कहीं समा (अट) नहीं रही है, उसकी आभा कवि के तन पर भी टिक नहीं रही। पेड़-पौधों की डालियाँ पत्तों से लदी हैं – कहीं हरी, कहीं लाल; कहीं हृदय में मंद-गंध-पुष्प-माल पड़ी है। पाट-पाट (जगह-जगह) फागुन की शोभा-श्री इतनी फैली है कि वह संभाले नहीं संभल रही (पट नहीं रही है)। फागुन का सौंदर्य घर-घर में भर रहा है, आकाश में उड़ने को मानो पर लगा रहा है। कवि की आँख इस सुंदरता से हट ही नहीं पाती। फागुन में आमों में बौर फूट पड़े हैं, भौंरे वन-वन मँडरा रहे हैं, ठौर-ठौर होली मची है और सब बंधन छूट गए हैं। इस प्रकार कवि ने फागुन के माध्यम से प्रकृति की व्यापकता, उल्लास और सौंदर्य का सजीव चित्रण किया है। सुंदर शब्द-चयन और लय ने कविता को भी फागुन की तरह ही सुंदर एवं ललित बना दिया है।
मूलभाव / भावार्थ
उत्साह – “बादल, गरजो!” की बार-बार पुकार में कवि का संदेश है कि कोमलता (वर्षा, शीतलता, नवजीवन) और क्रांति (वज्र, विध्वंस, विप्लव) दोनों एक साथ संभव हैं। बादल नवजीवन और नूतन कविता का प्रतीक है; जैसे बादल तप्त धरती को शीतल कर देता है, वैसे ही नई चेतना समाज के विकल जन को नया जीवन देती है।
अट नहीं रही है – फागुन का सौंदर्य इतना अपार और सर्वव्यापी है कि वह किसी सीमा में नहीं अँटता। प्रकृति की यह शोभा कवि के मन-तन को पूरी तरह आच्छादित कर देती है। मूलभाव यह है कि वसंत/फागुन का उल्लास जीवन के कण-कण में नई स्फूर्ति और आनंद भर देता है।
शब्द-संपदा (शब्दार्थ)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| धाराधर | बादल |
| घेर-घेर घोर गगन | आकाश को घनघोर रूप से घेरकर |
| ललित | सुंदर, मनोहर, कोमल |
| घुँघराले | घुँघरदार, लहरदार (काले बादलों के लिए) |
| विद्युत-छवि | बिजली की चमक/छवि |
| उर | हृदय, छाती |
| नवजीवन | नया जीवन, नई स्फूर्ति |
| वज्र | कठोर, भीषण; इंद्र का अस्त्र |
| नूतन | नया, नवीन |
| विकल | व्याकुल, बेचैन |
| उन्मन | कहीं मन न टिकने की स्थिति, अनमनापन |
| निदाघ | गर्मी, ग्रीष्म-ताप |
| सकल | सब, सारे |
| अनंत | जिसका अंत न हो, असीम |
| घन | बादल |
| तप्त धरा | गर्म/तपी हुई धरती |
| शीतल | ठंडा, शांत |
| आभा | चमक, कांति |
| अट | समाना, अँटना, प्रविष्ट होना |
| पाट-पाट | जगह-जगह, चारों ओर |
| शोभा-श्री | सौंदर्य से भरपूर शोभा |
| पट | समा नहीं रही है, ढक नहीं रही |
| मंद-गंध-पुष्प-माल | हलकी सुगंध वाले फूलों की माला |
| बौर | आम के पेड़ पर आने वाली मंजरी/फूल |
| अबीर / गुलाल | होली पर उड़ाया जाने वाला रंग-चूर्ण |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
उत्साह
1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?
2. कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ क्यों रखा गया है?
3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। ‘उत्साह’ कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
5. (रचना और अभिव्यक्ति) जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।
बूँदें टपकीं धरती हँसी, / हरियाली ने ली अँगड़ाई-सी।
मोर नाचता वन-उपवन में, / उल्लास भरा मेरे जीवन में।”(विद्यार्थी किसी पर्वत, नदी, सूर्योदय, वर्षा या वसंत पर अपने भाव कविता में उतार सकते हैं।)
अट नहीं रही है
1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।
2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
6. (रचना और अभिव्यक्ति) होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (लगभग 30–40 शब्द)
1. ‘उत्साह’ कविता किस प्रकार का गीत है और किसे संबोधित है?
2. कवि ने बादल को ‘नवजीवन वाले’ क्यों कहा है?
3. ‘अट नहीं रही है’ का क्या आशय है?
4. ‘पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
5. निराला छायावादी कवियों में किस विशेषता के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं?
दीर्घ उत्तरीय (लगभग 100–120 शब्द)
6. ‘उत्साह’ कविता में बादल के दोहरे रूप का वर्णन कीजिए।
7. ‘अट नहीं रही है’ कविता में फागुन के सौंदर्य का चित्रण कीजिए।
8. दोनों कविताओं में प्रकृति के प्रति निराला के दृष्टिकोण की तुलना कीजिए।
अभ्यास MCQ & उत्तर-कुंजी
1. ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ कविताओं के कवि कौन हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) महादेवी वर्मा
2. ‘उत्साह’ कविता किसे संबोधित है?
(क) सूर्य को
(ख) वायु को
(ग) बादल को
(घ) नदी को
3. ‘उत्साह’ किस प्रकार का गीत है?
(क) विरह-गीत
(ख) आह्वान-गीत
(ग) शोक-गीत
(घ) प्रणय-गीत
4. ‘धाराधर’ शब्द का अर्थ है–
(क) नदी
(ख) बादल
(ग) पर्वत
(घ) बिजली
5. कवि बादल के हृदय में क्या छिपा हुआ बताता है?
(क) वज्र
(ख) मोती
(ग) फूल
(घ) जल
6. छायावादी कवियों में मुक्त छंद का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?
(क) पंत
(ख) प्रसाद
(ग) निराला
(घ) महादेवी
7. ‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु/मास के सौंदर्य का वर्णन है?
(क) सावन
(ख) फागुन
(ग) कार्तिक
(घ) पूस
8. ‘अट’ शब्द का अर्थ है–
(क) रुकना
(ख) समाना/अँटना
(ग) चमकना
(घ) उड़ना
9. फागुन में आमों में क्या फूट पड़ा है?
(क) पत्ते
(ख) बौर
(ग) फल
(घ) काँटे
10. ‘निदाघ’ शब्द का अर्थ है–
(क) सर्दी
(ख) गर्मी
(ग) वर्षा
(घ) कुहासा
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘उत्साह’ कविता में कवि बादल से गरजने का आग्रह करता है।
कारण (R): कवि बादल के माध्यम से जोश, उत्साह और क्रांति-चेतना जगाना चाहता है।
2. अभिकथन (A): ‘अट नहीं रही है’ में फागुन की शोभा कहीं समा नहीं रही।
कारण (R): फागुन का सौंदर्य अत्यंत अल्प और सीमित होता है।
3. अभिकथन (A): निराला ने अपनी कविताओं में मुक्त छंद का प्रयोग किया है।
कारण (R): वे छायावादी कवियों में मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं।
4. अभिकथन (A): ‘उत्साह’ में बादल केवल वर्षा करने वाला साधारण बादल है।
कारण (R): कविता में बादल नवजीवन एवं क्रांति-चेतना का प्रतीक भी है।
5. अभिकथन (A): ‘अट नहीं रही है’ में प्रकृति और कवि के अंतर्मन के भावों का सामंजस्य है।
कारण (R): अंतर्मन के भावों का बाहरी दुनिया से सामंजस्य छायावाद की एक विशेषता है।
परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- ‘उत्साह’ को आह्वान-गीत तथा बादल को नवजीवन एवं क्रांति का प्रतीक – ये दो बिंदु अवश्य याद रखें; ये अक्सर पूछे जाते हैं।
- नाद-सौंदर्य के उदाहरण (‘ललित-ललित’, ‘घेर-घेर घोर गगन’) पंक्ति-सहित लिखें, इससे पूरे अंक मिलते हैं।
- निराला के काव्य-शिल्प में ‘मुक्त छंद का प्रवर्तक’ अवश्य लिखें।
- दोनों कविताओं का अंतर (ओज बनाम लालित्य) तुलनात्मक प्रश्न में स्पष्ट करें।
- उत्तर बिंदुवार लिखें और कठिन शब्दों के अर्थ साथ देते रहें।
सामान्य गलतियाँ
- ‘अट’ का अर्थ ‘रुकना’ लिख देना – सही अर्थ है ‘समाना/अँटना’।
- निराला को ‘प्रगतिवादी’ कवि मान लेना; वे मूलतः छायावादी कवि हैं।
- ‘उत्साह’ में बादल को केवल वर्षा का बादल समझना, उसके क्रांति-प्रतीक रूप को छोड़ देना।
- शब्दार्थ में ‘निदाघ’ (गर्मी) और ‘धाराधर’ (बादल) को आपस में उलझा देना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्षितिज अध्याय 4 की दोनों कविताओं के कवि कौन हैं?
दोनों कविताओं ‘उत्साह’ तथा ‘अट नहीं रही है’ के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ हैं, जो छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
‘उत्साह’ कविता में बादल किसका प्रतीक है?
‘उत्साह’ में बादल एक ओर वर्षा एवं नवजीवन का तथा दूसरी ओर विध्वंस, विप्लव और क्रांति-चेतना का प्रतीक है।
‘अट नहीं रही है’ में किसके सौंदर्य का वर्णन है?
इस कविता में फागुन (वसंत) के सर्वव्यापी सौंदर्य का वर्णन है, जो इतना अधिक है कि वह कहीं समा (अट) नहीं रहा।
प्रश्न NCERT क्षितिज (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
