NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 7: नेताजी का चश्मा (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) के अध्याय 7 ‘नेताजी का चश्मा’ (लेखक – स्वयं प्रकाश) का पूरा एवं प्रामाणिक समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: क्षितिज भाग 2 (गद्य खंड) अध्याय: 7 – नेताजी का चश्मा लेखक: स्वयं प्रकाश विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की और उनका बचपन तथा नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता। वे चर्चित साहित्यिक पत्रिका ‘वसुधा’ के संपादन से भी जुड़े रहे। आठवें दशक में उभरे स्वयं प्रकाश समकालीन कहानी के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनके तेरह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें सूरज कब निकलेगा, आएँगे अच्छे दिन भी, आदमी जात का आदमी और संधान उल्लेखनीय हैं; बीच में विनय तथा ईंधन उनके चर्चित उपन्यास हैं। उन्हें पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार तथा राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया। मध्यवर्गीय जीवन और वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना उनकी कहानियों का मूल स्वर है। सन् 2019 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘नेताजी का चश्मा’ देशभक्ति की भावना को सहज एवं मार्मिक ढंग से व्यक्त करने वाली कहानी है। हालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में एक छोटे-से कस्बे से गुज़रना पड़ता था। उस कस्बे की नगरपालिका ने मुख्य चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की एक सुंदर मूर्ति लगवा दी थी। मूर्ति बहुत सुंदर थी, पर उसमें एक कमी थी – नेताजी की आँखों पर संगमरमर का चश्मा नहीं था; उसकी जगह एक सचमुच का काले फ्रेमवाला चश्मा पहना दिया गया था।

हालदार साहब हर बार चौराहे पर रुककर पान खाते और मूर्ति को ध्यान से देखते। उन्होंने पाया कि मूर्ति पर लगा चश्मा हर बार बदल जाता है – कभी गोल, कभी चौकोर, कभी काला तो कभी धूप का। जिज्ञासावश उन्होंने पानवाले से पूछा तो पता चला कि यह काम कैप्टन चश्मेवाला करता है। कैप्टन एक बूढ़ा, मरियल-सा, लँगड़ा फेरीवाला था जो गली-गली घूमकर चश्मे बेचता था। नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के उसे अधूरी और दुखदायी लगती थी, इसलिए वह अपने पास उपलब्ध चश्मों में से एक मूर्ति पर लगा देता; ग्राहक के माँगने पर वही फ्रेम उतारकर बेच देता और मूर्ति पर दूसरा लगा देता।

मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल पत्थर का चश्मा बनाना भूल गए थे, इसलिए कैप्टन ने यह कमी पूरी कर दी थी। हालदार साहब इस साधारण-से लगने वाले फेरीवाले की देशभक्ति देखकर अभिभूत हो गए। पानवाला उसका मज़ाक उड़ाता था कि वह लँगड़ा फ़ौज में क्या जाएगा, पर हालदार साहब को यह बात अच्छी नहीं लगी।

दो साल तक यही क्रम चलता रहा। फिर एक बार हालदार साहब ने देखा कि कैप्टन की मृत्यु हो गई है और मूर्ति की आँखों पर कोई चश्मा नहीं है। यह जानकर वे बहुत दुखी हुए और सोचने लगे कि देश पर सब कुछ न्योछावर करने वालों पर भी जो कौम हँसती है, उसका क्या होगा। पंद्रह दिन बाद जब वे फिर उसी रास्ते से गुज़रे, तो उन्होंने तय किया कि इस बार न रुकेंगे, न मूर्ति की ओर देखेंगे। परंतु आदत से मजबूर उनकी आँखें मूर्ति की ओर उठ गईं। उन्होंने देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना एक छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। यह दृश्य देखकर हालदार साहब की आँखें भर आईं – देशभक्ति की भावना नई पीढ़ी में भी जीवित थी।

मूलभाव / संदेश

चारों ओर सीमाओं से घिरे भूभाग का नाम ही देश नहीं होता; देश उसमें रहने वाले नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों से बनता है – इन सबसे प्रेम करना तथा इनकी समृद्धि के लिए प्रयास करना ही देशभक्ति है। कहानी कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से देश के उन करोड़ों साधारण नागरिकों के योगदान को रेखांकित करती है जो अपने-अपने तरीके से देश-निर्माण में सहयोग देते हैं। यह कहानी यह भी कहती है कि देशभक्ति केवल बड़ों तक सीमित नहीं – बच्चे भी (सरकंडे का चश्मा बनाकर) इसमें शामिल हैं।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
कस्बाछोटा शहर, गाँव से बड़ी पर शहर से छोटी बस्ती
नगरपालिकानगर का प्रबंध करने वाली स्थानीय शासन-संस्था
प्रतिमा / मूर्तिकिसी की बनी हुई आकृति, बुत
संगमरमरएक प्रकार का सफ़ेद, चमकीला बहुमूल्य पत्थर
ऊहापोहदुविधा, असमंजस, सोच-विचार
शासनावधिशासन करने की अवधि, कार्यकाल
कौतुककुतूहल, अचंभा, मनोरंजक बात
कौतूहलजानने की उत्सुकता, जिज्ञासा
दुर्दमनीयजिसे दबाना या रोकना कठिन हो
खुशमिज़ाजप्रसन्न रहने वाला, हँसमुख
तोंदनिकला हुआ बड़ा पेट
बत्तीसीदाँतों की पंक्ति
दरकारआवश्यकता, ज़रूरत
पारदर्शीआर-पार दिखाई देने वाला, जिसके आर-पार देखा जा सके
द्रवितपिघला हुआ, करुणा से भरा, भावुक
नतमस्तकसिर झुकाए हुए, श्रद्धा से झुका हुआ
हतप्रभ / अवाक्हक्का-बक्का, चकित रह जाना, बोलती बंद हो जाना
मरियलदुबला-पतला, कमज़ोर
फेरी लगानागली-गली घूमकर सामान बेचना
सरकंडाएक प्रकार का पतला, लंबा पौधा/तिनका जिससे कलम आदि बनाई जाती है
भावुकभावनाओं से शीघ्र प्रभावित होने वाला

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

1. सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?

उत्तरचश्मेवाला कोई सैनिक या सेनानी नहीं था; वह एक बूढ़ा, लँगड़ा और मरियल-सा फेरीवाला था जो गली-गली घूमकर चश्मे बेचता था।फिर भी उसके मन में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रति गहरी श्रद्धा एवं देशभक्ति की भावना थी। नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के उसे अधूरी लगती थी, इसलिए वह अपने पास के चश्मों में से एक मूर्ति पर लगा देता था।देश के प्रति इसी सच्ची भावना, त्याग और लगन के कारण लोग आदरपूर्वक एवं स्नेह से उसे ‘कैप्टन’ कहते थे। यह नाम उसके देशभक्तिपूर्ण आचरण के सम्मान का प्रतीक था, उसके पद का नहीं।

2. हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा—

(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?

उत्तरहालदार साहब को पता चला था कि कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु हो गई है और इसी कारण मूर्ति की आँखों पर अब कोई चश्मा नहीं रहता।उन्हें यह सोचकर दुख हुआ कि देश पर अपना सब कुछ न्योछावर करने वालों पर भी लोग हँसते हैं और देशभक्ति मज़ाक की चीज़ बनती जा रही है। इसी निराशा के कारण उन्होंने मन बना लिया था कि अब वे चौराहे पर न रुकेंगे और न मूर्ति की ओर देखेंगे, इसलिए वे मायूस हो गए थे।

(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?

उत्तरमूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना छोटा-सा चश्मा, जैसा बच्चे बना लेते हैं, यह उम्मीद जगाता है कि देशभक्ति की भावना अभी मरी नहीं है।कैप्टन के न रहने पर भी किसी मासूम बच्चे ने नेताजी की मूर्ति को अधूरा नहीं रहने दिया। इससे आशा बँधती है कि देश-प्रेम की यह भावना नई पीढ़ी में भी जीवित है और आगे भी बनी रहेगी।

(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?

उत्तरहालदार साहब को लगता था कि कैप्टन के बाद नेताजी की मूर्ति सदा बिना चश्मे की ही रहेगी, क्योंकि देशभक्ति की कद्र कम होती जा रही है।परंतु जब उन्होंने देखा कि किसी बच्चे ने सरकंडे का चश्मा बनाकर मूर्ति पर रख दिया है, तो उन्हें अनुभव हुआ कि देश-प्रेम की भावना नई पीढ़ी में भी मौजूद है। इस मासूम किंतु गहरे देश-प्रेम को देखकर वे भावुक हो उठे और उनकी आँखें भर आईं।

3. आशय स्पष्ट कीजिए—
“बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-ज़िंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।”

उत्तरइस कथन में लेखक देश की उस मानसिकता पर चिंता व्यक्त करता है जो देशभक्तों के बलिदान का सम्मान करने के बजाय उनका उपहास करती है।नेताजी जैसे अनेक देशभक्तों ने देश के लिए अपना घर-परिवार, जवानी और सारा जीवन हवन कर दिया, फिर भी लोग ऐसे त्यागियों पर हँसते हैं और स्वयं स्वार्थ में बिकने के अवसर खोजते हैं।लेखक का आशय है कि जिस कौम (राष्ट्र) में देशभक्ति का सम्मान न रहे और स्वार्थ बढ़ जाए, उसका भविष्य अंधकारमय एवं चिंताजनक होता है। इसलिए हमें त्याग और बलिदान का आदर करना चाहिए।

4. पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।

उत्तरपानवाला एक काला, मोटा और खुशमिज़ाज व्यक्ति था। उसकी बड़ी तोंद थी, जो हँसते समय थिरकने लगती थी।उसके मुँह में हमेशा पान ठुँसा रहता था और बोलते समय वह अपनी लाल-काली बत्तीसी दिखाकर मुस्कुराता था।वह हँसमुख तो था, पर कैप्टन जैसे देशभक्त का मज़ाक उड़ाने वाला, थोड़ा असंवेदनशील व्यक्ति भी था। उसकी बातचीत में स्थानीय बोली और व्यंग्य की झलक मिलती थी। कुल मिलाकर वह एक मसखरा किंतु संवेदनहीन पात्र है।

5. “वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!”
कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।

उत्तरपानवाले की यह टिप्पणी असंवेदनशील, ओछी और निंदनीय है। वह कैप्टन की शारीरिक अक्षमता का उपहास करता है और उसकी देशभक्ति को नहीं समझ पाता।मेरी दृष्टि में देशभक्ति शरीर से नहीं, मन की भावना से होती है। कैप्टन भले ही लँगड़ा और बूढ़ा था, पर उसका हृदय नेताजी के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं देश-प्रेम से भरा था।किसी की शारीरिक कमी पर हँसना अनुचित है; हमें व्यक्ति को उसके गुणों, त्याग और भावनाओं से आँकना चाहिए, न कि शरीर से। अतः पानवाले की टिप्पणी पूर्णतः गलत एवं अशोभनीय है।

6. निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं—

(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।

उत्तरयह वाक्य हालदार साहब की देशभक्ति, संवेदनशीलता तथा नेताजी एवं उनसे जुड़ी हर बात के प्रति गहरी रुचि और जिज्ञासु स्वभाव की ओर संकेत करता है।

(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुआ बोला—साहब! कैप्टन मर गया।

उत्तरयह वाक्य पानवाले की भीतरी संवेदनशीलता की ओर संकेत करता है। जो व्यक्ति पहले कैप्टन का मज़ाक उड़ाता था, वही उसकी मृत्यु पर उदास हो जाता है और आँसू पोंछता है।इससे पता चलता है कि कठोर एवं मसखरा दिखने वाले व्यक्ति के हृदय में भी संवेदना एवं दुख की भावना छिपी रहती है।

(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।

उत्तरयह वाक्य कैप्टन की सच्ची देशभक्ति, नेताजी के प्रति अगाध श्रद्धा तथा कर्तव्यनिष्ठा की ओर संकेत करता है। वह नेताजी की मूर्ति को अधूरा देखना सहन नहीं कर पाता था, इसलिए बार-बार उस पर चश्मा लगा देता था।

7. जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात् देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।

उत्तरकैप्टन को साक्षात् देखने से पहले हालदार साहब के मन में उसका चित्र किसी हृष्ट-पुष्ट, सजीले एवं रोबीले फ़ौजी का रहा होगा।‘कैप्टन’ नाम सुनकर उन्होंने कल्पना की होगी कि वह आज़ाद हिंद फ़ौज का कोई भूतपूर्व सिपाही या नेताजी का साथी रहा होगा – एक स्वस्थ, बहादुर, अनुशासित और देशभक्त सैनिक, जो वर्दी पहने और सिर ऊँचा किए दृढ़ता से खड़ा हो।परंतु जब उन्होंने उसे वास्तव में देखा, तो वह एक बूढ़ा, मरियल-सा, लँगड़ा फेरीवाला निकला, जिसने उनकी कल्पना को बिल्कुल बदल दिया।

8. कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है—

(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?

उत्तरमहापुरुषों, देशभक्तों एवं प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्ति लगाने के मुख्य उद्देश्य हैं – उनके त्याग एवं योगदान का सम्मान करना तथा उनकी स्मृति को जीवित रखना।साथ ही नई पीढ़ी को उनके आदर्शों, बलिदान एवं जीवन-मूल्यों से प्रेरणा देना और चौराहे या स्थान की शोभा बढ़ाना भी इसके उद्देश्य हैं।

(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर (संभावित)मैं अपने इलाके के चौराहे पर महात्मा गांधी जी की मूर्ति स्थापित करवाना चाहूँगा।क्योंकि उन्होंने सत्य, अहिंसा एवं प्रेम के मार्ग पर चलकर देश को स्वतंत्रता दिलाई। उनकी मूर्ति लोगों को, विशेषकर बच्चों को, सत्य, अहिंसा, सादगी एवं देश-प्रेम की प्रेरणा देती रहेगी। (विद्यार्थी अपनी पसंद का कोई महापुरुष चुनकर कारण लिख सकते हैं।)

(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?

उत्तर(क) मूर्ति की स्वच्छता एवं देखभाल करना तथा उसे गंदा न होने देना।(ख) मूर्ति का सम्मान करना और उसे किसी प्रकार की क्षति न पहुँचाना।(ग) उस महापुरुष के आदर्शों एवं विचारों को अपने जीवन में अपनाना।(घ) मूर्ति को विकृत या खंडित करने वालों को रोकना तथा दूसरों को भी सम्मान करने के लिए प्रेरित करना।

9. सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे—सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।

उत्तरहम अपने दैनिक जीवन में अनेक छोटे-छोटे कार्यों से देश-प्रेम प्रकट कर सकते हैं –(क) सार्वजनिक संपत्ति (बस, रेल, पार्क, सड़कें) को नुकसान न पहुँचाना।(ख) पेड़-पौधे लगाना तथा पर्यावरण एवं जल का संरक्षण करना।(ग) अपने आस-पास सफ़ाई रखना और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना।(घ) ईमानदारी से कर (टैक्स) चुकाना, यातायात-नियमों का पालन करना तथा बिजली-पानी का अपव्यय न करना।(ङ) देश की एकता-अखंडता बनाए रखना और मन लगाकर अपना कर्तव्य निभाना। इन कार्यों पर हमें स्वयं अमल भी करना चाहिए।

10. निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए—
“कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।”

उत्तर (मानक हिंदी)“मान लो, कोई ग्राहक आ गया। उसको चौड़े चौखट (फ्रेम) का चश्मा चाहिए। तो कैप्टन वैसा चश्मा कहाँ से लाएगा? इसलिए उसने मूर्ति पर लगा हुआ चश्मा उतारकर उस ग्राहक को दे दिया और मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा दिया।”

11. ‘भई खूब! क्या आइडिया है।’ इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?

उत्तरएक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों (जैसे ‘आइडिया’, ‘कैप्टन’, ‘फ्रेम’) के आने से भाषा अधिक सहज, सजीव एवं प्रभावशाली बन जाती है।इससे भाषा का शब्द-भंडार समृद्ध होता है तथा बात को कम शब्दों में, सरलता से कहना संभव हो जाता है। ये शब्द कथन को रोचक एवं स्वाभाविक बनाते हैं और बोलचाल के अनुरूप ढल जाते हैं।इससे विभिन्न भाषा-भाषियों में आपसी संपर्क एवं समझ बढ़ती है। इस तरह भाषाएँ एक-दूसरे को समृद्ध करती हैं।

भाषा-अध्ययन

12. निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए—

उत्तर(क) नगरपालिका थी तो कुछ न कुछ करती भी रहती थी। – निपात: भी। नया वाक्य: मैंने तुम्हें कई बार समझाया भी(ख) किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा। – निपात: ही। नया वाक्य: यह काम तुम ही कर सकते हो।(ग) यानी चश्मा तो था ही लेकिन संगमरमर का नहीं था। – निपात: ही (तथा ‘तो’)। नया वाक्य: वह आते ही चला गया।(घ) हालदार साहब अब भी नहीं समझ पाए। – निपात: भी। नया वाक्य: इतना समझाने पर भी वह नहीं माना।(ङ) दो साल तक ही हालदार साहब अपने काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुज़रते रहे। – निपात: यहाँ बल देने वाला निपात तक है (अवधि-सीमा)। नया वाक्य: वह रात भर तक पढ़ता रहा।

13. निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए—

उत्तर(क) वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है।
→ उसके द्वारा अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर (एक फ्रेम) फिट कर दिया जाता है।
(ख) पानवाला नया पान खा रहा था।
→ पानवाले द्वारा नया पान खाया जा रहा था।
(ग) पानवाले ने साफ़ बता दिया था।
→ पानवाले के द्वारा साफ़ बता दिया गया था।
(घ) ड्राइवर ने ज़ोर से ब्रेक मारे।
→ ड्राइवर के द्वारा ज़ोर से ब्रेक मारे गए।
(ङ) नेताजी ने देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।
→ नेताजी के द्वारा देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया गया।
(च) हालदार साहब ने चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया।
→ हालदार साहब के द्वारा चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया गया।

14. नीचे लिखे वाक्यों को भाववाच्य में बदलिए—
जैसे—अब चलते हैं। – अब चला जाए।

उत्तर(क) माँ बैठ नहीं सकती। → माँ से बैठा नहीं जाता।(ख) मैं देख नहीं सकती। → मुझसे देखा नहीं जाता।(ग) चलो, अब सोते हैं। → चलो, अब सोया जाए।(घ) माँ रो भी नहीं सकती। → माँ से रोया भी नहीं जाता।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. हालदार साहब को कस्बे के चौराहे से कितने अंतराल पर गुज़रना पड़ता था और वहाँ की मूर्ति में क्या विशेषता थी?

उत्तरहालदार साहब को हर पंद्रहवें दिन कंपनी के काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुज़रना पड़ता था। चौराहे पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की सुंदर मूर्ति लगी थी, जिसकी एक विशेषता यह थी कि उस पर पत्थर का नहीं, बल्कि सचमुच का काले फ्रेमवाला चश्मा लगा हुआ था।

2. मूर्ति पर लगा चश्मा बार-बार क्यों बदल जाता था?

उत्तरमूर्ति पर लगा चश्मा कैप्टन का था। जब किसी ग्राहक को उसी प्रकार का फ्रेम चाहिए होता, जैसा मूर्ति पर लगा था, तो कैप्टन वह फ्रेम मूर्ति से उतारकर ग्राहक को बेच देता और मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता। इसी कारण चश्मा बार-बार बदल जाता था।

3. मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल कौन था और मूर्ति में क्या कमी रह गई थी?

उत्तरमास्टर मोतीलाल कस्बे के इकलौते हाई स्कूल के इकलौते ड्राइंग मास्टर (चित्रकला अध्यापक) थे, जिन्हें यह मूर्ति बनाने का काम सौंपा गया था। वे पत्थर का पारदर्शी चश्मा नहीं बना सके अथवा बनाते-बनाते वह टूट गया, इसलिए मूर्ति की आँखों पर चश्मा बनाना रह गया।

4. कैप्टन की मृत्यु का समाचार पानवाले ने किस प्रकार दिया?

उत्तरजब हालदार साहब ने पूछा कि आज नेताजी की आँखों पर चश्मा क्यों नहीं है, तो पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुआ बोला – “साहब! कैप्टन मर गया।”

5. कहानी के अंत में हालदार साहब ने मूर्ति पर क्या देखा और उसका उन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तरकहानी के अंत में हालदार साहब ने देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे से बना एक छोटा-सा चश्मा रखा हुआ था, जैसा बच्चे बना लेते हैं। इतनी-सी बात पर वे भावुक हो उठे और उनकी आँखें भर आईं, क्योंकि उन्हें विश्वास हो गया कि देशभक्ति की भावना नई पीढ़ी में भी जीवित है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मूल भाव/संदेश स्पष्ट कीजिए।

उत्तर‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मूल संदेश यह है कि देशभक्ति किसी पद, धन या शारीरिक बल पर निर्भर नहीं होती, बल्कि वह मन की सच्ची भावना है।कैप्टन जैसा साधारण, बूढ़ा एवं लँगड़ा फेरीवाला भी अपने ढंग से नेताजी के प्रति श्रद्धा एवं देश-प्रेम प्रकट करता है। कहानी बताती है कि देश-निर्माण में आम नागरिकों का योगदान भी अमूल्य है।अंत में बच्चे द्वारा बनाया सरकंडे का चश्मा यह आशा जगाता है कि देशभक्ति की भावना नई पीढ़ी में भी जीवित है। साथ ही लेखक यह चेतावनी भी देता है कि देशभक्तों के त्याग का उपहास करने वाली कौम का भविष्य उज्ज्वल नहीं होता। अतः हमें देश-प्रेम एवं बलिदान का सम्मान करना चाहिए।

7. कैप्टन चश्मेवाले के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरसच्चा देशभक्त– कैप्टन के हृदय में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के प्रति अगाध श्रद्धा एवं देश-प्रेम था। नेताजी की मूर्ति बिना चश्मे के उसे अधूरी लगती थी।कर्तव्यनिष्ठ एवं संवेदनशील– अपनी छोटी-सी दुकान से वह बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगाता रहता था, मानो यह उसका कर्तव्य हो।निर्धन किंतु स्वाभिमानी– वह एक बूढ़ा, लँगड़ा, मरियल-सा फेरीवाला था, फिर भी उसने अपनी देशभक्ति को कभी कम नहीं होने दिया।दृढ़ संकल्प– लोगों के उपहास की परवाह किए बिना वह अपने काम में लगा रहा। इस प्रकार कैप्टन एक साधारण दिखने वाला किंतु असाधारण देशभक्त पात्र है, जो प्रेरणा देता है।

8. इस कहानी के शीर्षक ‘नेताजी का चश्मा’ की सार्थकता पर विचार कीजिए।

उत्तरकहानी का शीर्षक ‘नेताजी का चश्मा’ पूर्णतः सार्थक एवं उपयुक्त है, क्योंकि कहानी की सारी घटनाएँ इसी चश्मे के इर्द-गिर्द घूमती हैं।नेताजी की मूर्ति पर पत्थर का चश्मा न होना, कैप्टन द्वारा बार-बार उस पर असली चश्मा लगाना, चश्मे का बदलते रहना और अंत में सरकंडे का चश्मा रखा जाना – ये सभी प्रसंग चश्मे से ही जुड़े हैं।यहाँ ‘चश्मा’ केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि देशभक्ति, श्रद्धा एवं राष्ट्र-भावना का प्रतीक बन जाता है। चश्मे के माध्यम से ही कैप्टन और नई पीढ़ी की देशभक्ति प्रकट होती है। इस प्रकार शीर्षक संक्षिप्त, आकर्षक, जिज्ञासावर्धक एवं कथावस्तु के केंद्रीय भाव को व्यक्त करने वाला है। अतः यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) स्वयं प्रकाश

(ग) यशपाल

(घ) मन्नू भंडारी

2. कहानी में किस नेता की मूर्ति की चर्चा की गई है?

(क) महात्मा गांधी

(ख) जवाहरलाल नेहरू

(ग) नेताजी सुभाषचंद्र बोस

(घ) भगत सिंह

3. हालदार साहब कितने दिनों के अंतराल पर उस कस्बे से गुज़रते थे?

(क) हर सातवें दिन

(ख) हर दसवें दिन

(ग) हर पंद्रहवें दिन

(घ) हर महीने

4. नेताजी की मूर्ति किस पत्थर की बनी थी?

(क) ग्रेनाइट

(ख) संगमरमर

(ग) बलुआ पत्थर

(घ) चूना-पत्थर

5. मूर्ति बनाने का काम किसे सौंपा गया था?

(क) कैप्टन को

(ख) पानवाले को

(ग) मास्टर मोतीलाल को

(घ) नगरपालिका अध्यक्ष को

6. मूर्ति में कौन-सी कमी रह गई थी?

(क) सिर पर टोपी नहीं थी

(ख) आँखों पर पत्थर का चश्मा नहीं था

(ग) हाथ टूटा हुआ था

(घ) वर्दी नहीं बनी थी

7. मूर्ति पर चश्मा कौन बदलता रहता था?

(क) हालदार साहब

(ख) पानवाला

(ग) कैप्टन चश्मेवाला

(घ) मास्टर मोतीलाल

8. कैप्टन वास्तव में क्या काम करता था?

(क) फ़ौजी सिपाही था

(ख) चश्मे बेचने वाला फेरीवाला था

(ग) मूर्तिकार था

(घ) अध्यापक था

9. कहानी के अंत में मूर्ति पर किस चीज़ का चश्मा रखा हुआ था?

(क) काँच का

(ख) सरकंडे का

(ग) धूप का

(घ) तार के फ्रेम का

10. कहानी का मुख्य भाव क्या है?

(क) हास्य-व्यंग्य

(ख) प्रेम-कहानी

(ग) देशभक्ति की भावना

(घ) प्रकृति-चित्रण

उत्तर-कुंजी: 1→(ख), 2→(ग), 3→(ग), 4→(ख), 5→(ग), 6→(ख), 7→(ग), 8→(ख), 9→(ख), 10→(ग)

अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)

नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लोग चश्मेवाले को ‘कैप्टन’ कहकर पुकारते थे।

कारण (R): वह आज़ाद हिंद फ़ौज का कैप्टन रह चुका था।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – वह सेनानी नहीं था; उसकी देशभक्ति एवं श्रद्धा के कारण लोग उसे आदरपूर्वक ‘कैप्टन’ कहते थे।

2. अभिकथन (A): नेताजी की मूर्ति पर लगा चश्मा बार-बार बदल जाता था।

कारण (R): कैप्टन ग्राहक की माँग पर मूर्ति का फ्रेम बेच देता और दूसरा फ्रेम लगा देता था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): मूर्ति में पत्थर का चश्मा नहीं बन पाया था।

कारण (R): मूर्तिकार मास्टर मोतीलाल पत्थर का पारदर्शी चश्मा बनाने में असमर्थ रहे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): कहानी के अंत में हालदार साहब की आँखें भर आईं।

कारण (R): मूर्ति पर बच्चे द्वारा बनाया सरकंडे का चश्मा देखकर उन्हें देशभक्ति जीवित होने का अनुभव हुआ।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): पानवाला कैप्टन की मृत्यु का समाचार देते समय उदास हो गया।

कारण (R): पानवाला कैप्टन से ईर्ष्या करता था और उसकी मृत्यु से प्रसन्न था।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – पानवाला ईर्ष्यालु नहीं था; मृत्यु का समाचार देते समय वह सचमुच दुखी एवं भावुक हो गया था।
उत्तर-कुंजी: 1→(ग), 2→(क), 3→(क), 4→(क), 5→(ग)

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • लेखक का नाम स्वयं प्रकाश तथा विधा कहानी अवश्य याद रखें; जन्म 1947 (इंदौर), निधन 2019।
  • मुख्य पात्र क्रम से याद रखें – हालदार साहब, कैप्टन (चश्मेवाला), पानवाला एवं मास्टर मोतीलाल।
  • आशय/व्याख्या वाले प्रश्नों में पहले कथन का सरल अर्थ, फिर लेखक का संदेश लिखें।
  • ‘सरकंडे का चश्मा’ प्रसंग एवं उसका प्रतीकार्थ (नई पीढ़ी में जीवित देशभक्ति) बार-बार पूछा जाता है।
  • वाच्य-परिवर्तन (कर्मवाच्य/भाववाच्य) के नियम अभ्यास से पक्के करें – यह सुनिश्चित अंक दिलाता है।

सामान्य गलतियाँ

  • कैप्टन को सचमुच का फ़ौजी समझ लेना – वह केवल देशभक्त फेरीवाला था।
  • मूर्तिकार का नाम भूल जाना अथवा कैप्टन को ही मूर्तिकार मान लेना (मूर्तिकार – मास्टर मोतीलाल)।
  • भाववाच्य में कर्ता के साथ ‘से’ (माँ से बैठा नहीं जाता) लगाना भूल जाना।
  • स्थानीय बोली के वाक्यों को मानक हिंदी में बदलते समय शब्दशः अनुवाद कर देना।
  • निपात (ही, भी, तक, तो) और कारक/संबंधबोधक में अंतर न कर पाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश हैं। उनका जन्म 1947 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ और निधन 2019 में हुआ। वे समकालीन हिंदी कहानी के महत्त्वपूर्ण लेखक माने जाते हैं।

लोग चश्मेवाले को ‘कैप्टन’ क्यों कहते थे?

चश्मेवाला सैनिक नहीं था, फिर भी नेताजी के प्रति उसकी गहरी श्रद्धा एवं सच्ची देशभक्ति के कारण लोग आदरपूर्वक उसे ‘कैप्टन’ कहते थे।

कहानी के अंत में सरकंडे का चश्मा क्या दर्शाता है?

मूर्ति पर बच्चे द्वारा बनाया सरकंडे का छोटा-सा चश्मा यह दर्शाता है कि देशभक्ति की भावना अभी मरी नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी और बच्चों में भी जीवित है।

प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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