NCERT Solutions for Class 10 Hindi (स्पर्श 2) अध्याय 14: कारतूस – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 14 ‘कारतूस’ (एकांकी) का पूरा एवं विश्वसनीय समाधान देता है। यह एकांकी हबीब तनवीर द्वारा रचित है और इसमें स्वतंत्रता-सेनानी वज़ीर अली की निडरता एवं साहस का रोमांचक चित्रण है। यहाँ पाठ का सार, कठिन शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण दिए गए हैं।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 14 पाठ: कारतूस लेखक: हबीब तनवीर विधा: एकांकी (नाटक) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – हबीब तनवीर

हबीब तनवीर का जन्म सन् 1923 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। उन्होंने सन् 1944 में नागपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद ब्रिटेन की नाटक अकादमी से नाट्य-लेखन का अध्ययन करने गए। दिल्ली लौटकर उन्होंने पेशेवर नाट्य-मंच की स्थापना की। नाटककार, कवि, पत्रकार, नाट्य-निर्देशक और अभिनेता – इन अनेक रूपों में ख्याति प्राप्त हबीब तनवीर ने लोकनाट्य के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्हें अनेक पुरस्कारों, फ़ेलोशिप तथा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनके प्रमुख नाटक हैं – आगरा बाज़ार, चरनदास चोर, देख रहे हैं नैन और हिरमा की अमर कहानी। उन्होंने बसंत ऋतु का सपना, शाजापुर की शांति बाई, मिट्टी की गाड़ी और मुद्राराक्षस नाटकों का आधुनिक रूपांतर भी किया। सन् 2009 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘कारतूस’ एक एकांकी है, जिसमें अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संघर्षरत जाँबाज़ स्वतंत्रता-सेनानी वज़ीर अली के साहस और सूझबूझ का रोमांचक वर्णन है। पाठ-प्रवेश के अनुसार अंग्रेज़ इस देश में व्यापारी के भेष में आए थे, परंतु धीरे-धीरे उनकी ईस्ट इंडिया कंपनी ने रियासतों पर कब्ज़ा जमाना शुरू कर दिया। उनकी नीयत उजागर होते ही उन्हें हिंदुस्तान से खदेड़ने के प्रयास भी शुरू हो गए। वज़ीर अली ऐसा ही एक निडर सेनानी था, जिसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को देश से बाहर करना था।

एकांकी का दृश्य सन् 1799 में गोरखपुर के जंगल में कर्नल कॉलिंज के खेमे के भीतर का है। रात का समय है, चाँदनी छिटकी हुई है और अंदर लैंप जल रहा है। कर्नल कॉलिंज और लेफ़्टीनेंट आपस में बातें कर रहे हैं। कई हफ़्तों से खेमा डालकर वे वज़ीर अली को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं, पर वह हाथ नहीं आ रहा। लेफ़्टीनेंट सिपाहियों के तंग आने की बात करता है और कहता है कि वज़ीर अली आदमी है या भूत, समझ नहीं आता।

कर्नल बताता है कि वज़ीर अली के कारनामे सुनकर रॉबिनहुड याद आ जाता है। उसने कुछ ही महीनों के शासन में अवध के दरबार को अंग्रेज़ी असर से लगभग मुक्त कर दिया था। बातचीत में सआदत अली (आसिफ़उद्दौला का भाई और वज़ीर अली का दुश्मन), टीपू सुल्तान, अफ़ग़ानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा तथा शमसुद्दौला का ज़िक्र आता है। कर्नल बताता है कि कंपनी ने वज़ीर अली को पद से हटाकर बनारस भेज दिया और सालाना वज़ीफ़ा तय कर दिया था। बाद में गवर्नर-जनरल ने उसे कलकत्ता तलब किया, तो वज़ीर अली ने कंपनी के वकील से शिकायत की, पर वकील ने उल्टा बुरा-भला कहा, जिससे क्रुद्ध होकर वज़ीर अली ने उसे खंजर से मार डाला और आज़मगढ़ की ओर भाग गया।

तभी एक सवार तेज़ी से घोड़ा दौड़ाते हुए खेमे की ओर आता है। वह कर्नल से अकेले में मिलना चाहता है। सबको बाहर भेजकर सवार कर्नल से कहता है कि वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए उसे कुछ कारतूस चाहिए। कर्नल उसे दस कारतूस दे देता है। कारतूस लेकर सवार मुस्कुराते हुए धन्यवाद देता है और अपना नाम बताता है – ‘वज़ीर अली’। वह कहता है कि कारतूस देने के कारण वह कर्नल की जान बख़्श रहा है, और निडरता से बाहर चला जाता है। कर्नल हक्का-बक्का रह जाता है। लेफ़्टीनेंट के पूछने पर कि कौन था, कर्नल दबी ज़बान से स्वयं से कहता है – ‘एक जाँबाज़ सिपाही।’ इस प्रकार वज़ीर अली शेर की माँद में पहुँचकर भी अपने अदम्य साहस का परिचय देता है।

मूलभाव / उद्देश्य

इस एकांकी का मूल उद्देश्य भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के प्रारंभिक दौर के एक निर्भीक सेनानी वज़ीर अली के अदम्य साहस, देशभक्ति और बुद्धि-कौशल को उभारना है। यह दर्शाता है कि अंग्रेज़ों के विशाल लाव-लश्कर के सामने भी मुट्ठी भर साहसी लोग किस प्रकार दमख़म से डटे रहे। वज़ीर अली का शत्रु के खेमे में अकेले पहुँचकर उन्हीं से कारतूस माँग लेना और जान बख़्शकर लौट जाना उसके अदम्य आत्मविश्वास, निडरता और सूझबूझ का परिचायक है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
खेमाडेरा, अस्थायी पड़ाव, तंबू
अफ़साने (अफ़साना)कहानियाँ, किस्से
कारनामे (कारनामा)ऐसे काम जो याद रहें, उल्लेखनीय कार्य
हुकूमतशासन, राज्य
पैदाइशजन्म
तख़्तसिंहासन, राजगद्दी
मसलहतउचित कारण, हित-स्वार्थ, युक्ति
ऐश-पसंदभोग-विलास पसंद करने वाला
जाँबाज़जान की बाज़ी लगाने वाला, निडर वीर
दमख़मशक्ति और दृढ़ता
ज़ाती तौर सेव्यक्तिगत रूप से
वज़ीफ़ापरवरिश के लिए दी जाने वाली राशि, छात्रवृत्ति
मुकर्ररतय करना, निश्चित करना
तलब कियाबुलाया, याद किया
हुक्मरां / हुक्मराँशासक, हाकिम
हिफ़ाज़तसुरक्षा, रक्षा
गर्दधूल
क़ाफ़िलाएक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र जाने वाले यात्रियों का समूह
शुब्हासंदेह, शक
गुंजाइशसंभावना, अवसर
तन्हाईएकांत, अकेलापन
दीवार हमगोश दारददीवारों के भी कान होते हैं
मुकामपड़ाव, ठहरने का स्थान
लावलश्करसेना का बड़ा समूह और युद्ध-सामग्री
कारतूसपीतल और दफ़्ती आदि की एक नली जिसमें गोली तथा बारूद भरी रहती है

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए—

1. कर्नल कॉलिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?

उत्तरकर्नल कॉलिंज का खेमा जंगल में इसलिए लगा हुआ था क्योंकि वह कंपनी के आदेश पर वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए उसी जंगल में उसकी तलाश कर रहा था।

2. वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?

उत्तरकई हफ़्तों से जंगल में खेमा डाले रहने पर भी वज़ीर अली हाथ नहीं आ रहा था; वह बार-बार आँखों में धूल झोंककर निकल जाता था, इसलिए उसे पकड़ने के थका देने वाले प्रयासों से सिपाही तंग आ चुके थे।

3. कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?

उत्तरतेज़ी से अकेले आते सवार को देखकर कर्नल को संदेह हुआ कि वह वज़ीर अली का कोई आदमी हो सकता है, इसलिए उसने सिपाहियों से कहा कि वे इस सवार पर नज़र रखें कि यह किस ओर जा रहा है।

4. सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है?

उत्तरसवार (स्वयं वज़ीर अली) ने कहा कि वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही है, इसलिए उसकी गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है – ताकि कर्नल को उसकी असली पहचान का संदेह न हो।

लिखित (क) – (25–30 शब्दों में)

1. वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?

उत्तररॉबिनहुड एक निडर, साहसी और स्वाभिमानी योद्धा था जो अमीरों से लड़कर गरीबों की मदद करता था। वज़ीर अली भी उसी तरह निडर, साहसी और अंग्रेज़ों के विरुद्ध डटकर संघर्ष करने वाला सेनानी था। उसकी निर्भीकता और कारनामों के अफ़साने सुनकर कर्नल को स्वाभाविक रूप से रॉबिनहुड की याद आ जाती थी।

2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?

उत्तरसआदत अली अवध के नवाब आसिफ़उद्दौला का भाई और वज़ीर अली का दुश्मन था। आसिफ़उद्दौला के यहाँ पुत्र की कोई उम्मीद न थी, इसलिए सआदत अली स्वयं को गद्दी का उत्तराधिकारी मानता था। वज़ीर अली का जन्म होते ही उसकी यह उम्मीद समाप्त हो गई, इसलिए उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत (अपने अधिकारों का अंत) समझा।

3. सआदत अली को अवध के तख़्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?

उत्तरसआदत अली अंग्रेज़ों का दोस्त और ऐश-पसंद आदमी था। उसे तख़्त पर बिठाने पर उसने कंपनी को अपनी आधी मुमलिकत (जायदाद-दौलत) और दस लाख रुपये नकद दे दिए। कर्नल का मकसद ऐसे वफ़ादार शासक को बिठाकर अवध पर अंग्रेज़ी पकड़ मज़बूत करना और मनमाना लाभ उठाना था।

4. कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?

उत्तरकंपनी के वकील की हत्या करने के बाद वज़ीर अली अपने कुछ साथियों (जाँनिसारों) सहित आज़मगढ़ की ओर भाग गया। वहाँ के हुक्मराँ ने उन्हें अपनी हिफ़ाज़त में घाघरा तक पहुँचा दिया। इसके बाद वज़ीर अली का काफ़िला कई वर्षों से इन जंगलों में भटकते हुए अपनी रक्षा करता रहा।

5. सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?

उत्तरसवार ने जाते समय अपना नाम वज़ीर अली बताया, जिसे पकड़ने के लिए कर्नल हफ़्तों से जंगल में पड़ा था। जिस वज़ीर अली को वह ढूँढ़ रहा था, वही स्वयं उसके खेमे में आकर उसी से कारतूस ले गया और जान बख़्शकर चला गया – इस अदम्य साहस को देखकर कर्नल हक्का-बक्का रह गया।

लिखित (ख) – (50–60 शब्दों में)

1. लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?

उत्तरलेफ़्टीनेंट ने देखा कि अंग्रेज़ी कंपनी के विरुद्ध कई शक्तियाँ एक साथ सक्रिय हो उठी हैं। टीपू सुल्तान, वज़ीर अली और शमसुद्दौला ने अफ़ग़ानिस्तान के बादशाह शाहे-ज़मा को हिंदुस्तान पर हमले का निमंत्रण दिया था। नवाब बंगाल के रिश्तेदार शमसुद्दौला तथा वज़ीर अली जैसे लोग कंपनी के खिलाफ़ खड़े थे। इस व्यापक विरोध को देखकर लेफ़्टीनेंट को लगा कि कंपनी के विरुद्ध सारे हिंदुस्तान में विरोध की एक लहर दौड़ गई है।

2. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?

उत्तरवज़ीर अली के दिल में अंग्रेज़ों के प्रति कूट-कूटकर नफ़रत भरी थी। उसे पद से हटाकर बनारस भेज दिया गया था और बाद में गवर्नर-जनरल ने उसे कलकत्ता तलब किया। इस पर वज़ीर अली ने कंपनी के वकील के पास जाकर शिकायत की, परंतु वकील ने उसकी शिकायत की परवाह न करके उल्टा उसे बुरा-भला सुना दिया। इसी अपमान और क्रोध में आकर वज़ीर अली ने खंजर से वकील का काम तमाम कर दिया।

3. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?

उत्तरसवार (वज़ीर अली) कर्नल के खेमे में अकेले में मिला और बोला कि वज़ीर अली बहुत खतरनाक तथा जाँबाज़ सिपाही है, उसे गिरफ़्तार करना मुश्किल है। उसने कहा कि वज़ीर अली को पकड़ने के लिए उसे कुछ कारतूस चाहिए। कर्नल ने अपने शत्रु को पकड़वाने के लोभ में, बिना उसकी असली पहचान जाने, उसे दस कारतूस दे दिए। इस प्रकार वज़ीर अली ने चतुराई और साहस से शत्रु से ही कारतूस हासिल कर लिए।

4. वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरवज़ीर अली अद्भुत निडर और साहसी सेनानी था। अंग्रेज़ों के विशाल लाव-लश्कर से वर्षों तक टक्कर लेकर भी वह हाथ नहीं आया। उसने कुछ ही महीनों में अवध को अंग्रेज़ी असर से लगभग मुक्त कर दिया, वकील का कत्ल किया और जंगल में रहकर संघर्ष करता रहा। सबसे बड़ी निडरता तो यह थी कि वह शत्रु कर्नल के खेमे में अकेला पहुँचा, उसी से कारतूस ले लिए और अपना नाम बताकर जान बख़्शते हुए निकल गया – यही उसके जाँबाज़ होने का प्रमाण है।

लिखित (ग) – निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

1. मुट्ठीभर आदमी और ये दमख़म।

उत्तरयह कथन कर्नल द्वारा वज़ीर अली के साहस की प्रशंसा में कहा गया है। आशय यह है कि वज़ीर अली के साथ केवल मुट्ठीभर (गिने-चुने) साथी ही थे, फिर भी उसमें इतनी अधिक शक्ति, हिम्मत और दृढ़ता थी कि वह अंग्रेज़ों की विशाल और साधन-संपन्न सेना का सामना वर्षों तक करता रहा। थोड़े-से लोग होकर भी उसका इतना दमख़म होना उसके अदम्य साहस और देशभक्ति को दर्शाता है।

2. गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।

उत्तरयह कथन लेफ़्टीनेंट का है, जो खिड़की से बाहर देखते हुए कहता है। आशय यह है कि घोड़े के तेज़ दौड़ने से इतनी अधिक धूल उड़ रही है मानो कोई पूरा काफ़िला (यात्रियों का समूह) चला आ रहा हो, परंतु धूल हटने पर उसे केवल एक ही घुड़सवार दिखाई देता है। यह वज़ीर अली के तेज़ और प्रभावशाली आगमन तथा उसके अकेले होने पर भी असाधारण साहस की ओर संकेत करता है।

भाषा अध्ययन

1. निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए—खिलाफ़, पाक, उम्मीद, हासिल, कामयाब, वज़ीफ़ा, नफ़रत, हमला, इंतज़ार, मुमकिन

उत्तरखिलाफ़ – विरुद्ध, विरोध मेंपाक – पवित्र, साफ़उम्मीद – आशाहासिल – प्राप्तकामयाब – सफलवज़ीफ़ा – छात्रवृत्ति / गुज़ारा-भत्तानफ़रत – घृणाहमला – आक्रमणइंतज़ार – प्रतीक्षामुमकिन – संभव

2. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूट कर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख़्श देना, हक्का-बक्का रह जाना।

उत्तरआँखों में धूल झोंकना (धोखा देना) – चालाक ठग दुकानदार की आँखों में धूल झोंककर नकली सामान बेच गया।कूट-कूट कर भरना (अत्यधिक मात्रा में होना) – भगत सिंह के हृदय में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी।काम तमाम कर देना (मार डालना) – शिकारी ने एक ही गोली से शेर का काम तमाम कर दिया।जान बख़्श देना (प्राण-दान देना) – राजा ने अपराधी की विनती सुनकर उसकी जान बख़्श दी।हक्का-बक्का रह जाना (आश्चर्यचकित रह जाना) – अचानक परिणाम सुनकर सभी हक्का-बक्का रह गए।

3. कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए—(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है। (ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई। (ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया। (घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी। (ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर(क) जंगल की ज़िंदगी – संबंध कारक(ख) कंपनी के खिलाफ़ – संबंध/अपादान भाव (के खिलाफ़ – संबंध कारक); हिंदुस्तान मेंअधिकरण कारक(ग) वज़ीर कोकर्म कारक; उसके पद सेअपादान कारक(घ) फ़ौज के लिएसंप्रदान कारक(ङ) घोड़े परअधिकरण कारक

4. क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है… कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए—(क) घोड़ा पानी पी रहा था। (ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए। (ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था। (घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर(क) घोड़े ने पानी पिया।(ख) बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।(ग) रॉबिनहुड ने गरीबों की मदद की।(घ) देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

5. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए—(क) कर्नल ने कहा सिपाहियो इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है (ख) सवार ने पूछा आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है (ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति कह रहा था दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है

उत्तर(क) कर्नल ने कहा, “सिपाहियो! इस पर नज़र रखो, ये किस तरफ़ जा रहा है?”(ख) सवार ने पूछा, “आपने इस मुकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है?”(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे, चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”

योग्यता विस्तार & परियोजना

योग्यता विस्तार: (1) पुस्तकालय से रॉबिनहुड के साहसिक कारनामों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए। (2) वृंदावनलाल वर्मा की कहानी ‘इब्राहीम गार्दी’ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। – ये विद्यार्थी द्वारा स्वयं करने योग्य पठन-कार्य हैं।

परियोजना: (1) ‘कारतूस’ एकांकी का मंचन अपने विद्यालय में कीजिए। (2) ‘एकांकी’ और ‘नाटक’ में अंतर बताइए तथा कुछ नाटकों और एकांकियों की सूची तैयार कीजिए।

संकेत – एकांकी और नाटक में अंतर: एकांकी एक ही अंक में, सीमित पात्रों, एक घटना और छोटी अवधि में पूरी हो जाती है; जबकि नाटक अनेक अंकों में, अधिक पात्रों एवं अनेक घटनाओं को लेकर विस्तृत होता है। नाटक उदाहरण: अंधेर नगरी, आषाढ़ का एक दिन, आधे-अधूरे। एकांकी उदाहरण: कारतूस, रीढ़ की हड्डी, बहू की विदा।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘कारतूस’ एकांकी का समय, स्थान और काल बताइए।

उत्तरइस एकांकी का ज़माना सन् 1799 है। स्थान गोरखपुर के जंगल में कर्नल कॉलिंज के खेमे का अंदरूनी हिस्सा है। समय रात का है, जब चाँदनी छिटकी हुई है और खेमे के अंदर लैंप जल रहा है। पूरी घटना लगभग पाँच मिनट की अवधि में घटित होती है।

2. वज़ीर अली की क्या योजना (स्कीम) थी?

उत्तरवज़ीर अली की योजना थी कि किसी तरह नेपाल पहुँच जाए, अफ़ग़ानी हमले का इंतज़ार करे, अपनी ताकत बढ़ाए, सआदत अली को उसके पद से हटाकर स्वयं अवध पर कब्ज़ा करे और अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर निकाल दे।

3. खेमे में आए सवार ने कर्नल से क्या माँगा और बदले में क्या कहा?

उत्तरसवार ने कर्नल से वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के बहाने कुछ कारतूस माँगे। कर्नल ने उसे दस कारतूस दे दिए। तब सवार ने अपना नाम वज़ीर अली बताते हुए कहा कि कारतूस देने के कारण वह कर्नल की जान बख़्श रहा है।

4. एकांकी के अंत में कर्नल ने वज़ीर अली के लिए क्या कहा और क्यों?

उत्तरएकांकी के अंत में कर्नल ने दबी ज़बान से स्वयं से कहा – “एक जाँबाज़ सिपाही।” उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि शत्रु के खेमे में अकेले पहुँचकर उसी से कारतूस ले लेना और जान बख़्शकर निडरता से लौट जाना अदम्य साहस का काम था, जिससे कर्नल भी वज़ीर अली की वीरता का कायल हो गया।

5. ‘कारतूस’ एकांकी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तरयह एकांकी हमें देशभक्ति, अदम्य साहस, आत्मविश्वास और सूझबूझ की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि शत्रु कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, दृढ़ संकल्प और निडरता से उसका सामना किया जा सकता है तथा स्वतंत्रता के लिए हर जोखिम उठाना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

1. वज़ीर अली के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तरवज़ीर अली एकांकी का नायक एवं एक आदर्श स्वतंत्रता-सेनानी है। उसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं – (1) अदम्य साहस एवं निडरता: वह शत्रु कर्नल के खेमे में अकेला पहुँचकर उसी से कारतूस ले आता है। (2) प्रबल देशभक्ति: उसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को देश से बाहर करना है और उसके दिल में अंग्रेज़ों के प्रति कूट-कूटकर नफ़रत भरी है। (3) बुद्धि-कौशल एवं चतुराई: वह चालाकी से अपनी पहचान छिपाकर कर्नल को धोखा देता है। (4) स्वाभिमानी एवं क्रोधी: अपमान सहन न कर वह वकील का कत्ल कर देता है। (5) उदारता: कारतूस मिलने पर वह कर्नल की जान बख़्श देता है। इस प्रकार वह साहस, बुद्धि और स्वाभिमान का प्रतीक है।

2. एकांकी के शीर्षक ‘कारतूस’ की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

उत्तरएकांकी का शीर्षक ‘कारतूस’ पूर्णतः सार्थक एवं उपयुक्त है। संपूर्ण कथा का केंद्र-बिंदु वही कारतूस हैं जिन्हें वज़ीर अली शत्रु कर्नल से ही माँगकर ले जाता है। कारतूस गोली और बारूद से भरी वह नली है जो युद्ध में आवश्यक होती है; अंग्रेज़ों से संघर्ष जारी रखने के लिए वज़ीर अली को इन्हीं कारतूसों की ज़रूरत थी। इसी प्रसंग पर पूरी एकांकी का चरम (क्लाइमेक्स) टिका है – जब वज़ीर अली कर्नल से कारतूस माँगता है और कर्नल बिना पहचाने उसे दे देता है। यही घटना वज़ीर अली के अदम्य साहस, बुद्धि-कौशल और निडरता को उजागर करती है। अतः कथा-वस्तु, उद्देश्य और चरम-बिंदु तीनों दृष्टि से शीर्षक ‘कारतूस’ पूर्णतः सार्थक है।

3. कर्नल कॉलिंज और वज़ीर अली के चरित्र की तुलना कीजिए।

उत्तरकर्नल कॉलिंज ईस्ट इंडिया कंपनी का अनुभवी, सतर्क एवं कूटनीतिज्ञ अधिकारी है। वह शत्रु की वीरता का भी सम्मान करता है और अंत में वज़ीर अली को ‘जाँबाज़ सिपाही’ कहकर उसकी प्रशंसा करता है। वह विशाल लाव-लश्कर का स्वामी होकर भी सतर्कता बरतता है। दूसरी ओर वज़ीर अली मुट्ठीभर साथियों के साथ संघर्ष करने वाला निडर, साहसी एवं देशभक्त सेनानी है। कर्नल जहाँ साधन-संपन्न होकर भी वज़ीर अली को पकड़ नहीं पाता, वहीं वज़ीर अली साधनहीन होकर भी अपने साहस और चतुराई से शत्रु को मात देता है। इस प्रकार कर्नल कुशल अधिकारी है, परंतु वीरता, साहस और सूझबूझ में वज़ीर अली उससे कहीं आगे सिद्ध होता है।

अभ्यास MCQ

नीचे दिए बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए। उत्तर-कुंजी नीचे दी गई है।

1. ‘कारतूस’ एकांकी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) हबीब तनवीर

(ग) रामवृक्ष बेनीपुरी

(घ) यशपाल

2. एकांकी की घटना किस वर्ष की है?

(क) सन् 1857

(ख) सन् 1799

(ग) सन् 1923

(घ) सन् 1880

3. कर्नल कॉलिंज का खेमा कहाँ लगा हुआ था?

(क) बनारस के जंगल में

(ख) आज़मगढ़ के किले में

(ग) गोरखपुर के जंगल में

(घ) नेपाल की सीमा पर

4. वज़ीर अली का दुश्मन कौन था?

(क) शमसुद्दौला

(ख) टीपू सुल्तान

(ग) शाहे-ज़मा

(घ) सआदत अली

5. वज़ीर अली के कारनामे सुनकर कर्नल को किसकी याद आ जाती थी?

(क) नेपोलियन की

(ख) रॉबिनहुड की

(ग) सिकंदर की

(घ) टीपू सुल्तान की

6. वज़ीर अली ने किसका कत्ल किया था?

(क) कर्नल कॉलिंज का

(ख) सआदत अली का

(ग) कंपनी के वकील का

(घ) लेफ़्टीनेंट का

7. कत्ल करने के बाद वज़ीर अली किस ओर भाग गया?

(क) कलकत्ता

(ख) आज़मगढ़

(ग) दिल्ली

(घ) बनारस

8. सवार ने कर्नल से कितने कारतूस माँगे और कितने मिले?

(क) पाँच कारतूस

(ख) कुछ कारतूस माँगे, दस मिले

(ग) बीस कारतूस

(घ) कोई कारतूस नहीं मिला

9. खेमे में आया सवार वास्तव में कौन था?

(क) कंपनी का जासूस

(ख) सआदत अली का आदमी

(ग) स्वयं वज़ीर अली

(घ) नेपाल का दूत

10. एकांकी के अंत में कर्नल ने वज़ीर अली को क्या कहा?

(क) एक खतरनाक डाकू

(ख) एक जाँबाज़ सिपाही

(ग) एक चालाक जासूस

(घ) एक साधारण सवार

उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(ख), 3–(ग), 4–(घ), 5–(ख), 6–(ग), 7–(ख), 8–(ख), 9–(ग), 10–(ख)।

अभिकथन-कारण (Assertion-Reason)

नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए— (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं है। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): वज़ीर अली कर्नल के खेमे में अकेला पहुँच गया।

कारण (R): वह अत्यंत निडर एवं जाँबाज़ सिपाही था।

2. अभिकथन (A): वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल कर दिया।

कारण (R): वकील ने उसकी शिकायत की परवाह न कर उल्टा उसे बुरा-भला सुना दिया।

3. अभिकथन (A): सआदत अली अंग्रेज़ों का मित्र था।

कारण (R): उसने कंपनी को अपनी आधी जायदाद और दस लाख रुपये नकद दे दिए थे।

4. अभिकथन (A): कर्नल ने सवार को सहर्ष कारतूस दे दिए।

कारण (R): कर्नल वज़ीर अली का घनिष्ठ मित्र था।

5. अभिकथन (A): सवार के जाने के बाद कर्नल हक्का-बक्का रह गया।

कारण (R): जिस वज़ीर अली को वह ढूँढ़ रहा था, वही स्वयं आकर उसी से कारतूस ले गया था।

उत्तर-कुंजी: 1–(क), 2–(क), 3–(क), 4–(ग) [A सही, R गलत – कर्नल वज़ीर अली का मित्र नहीं, शत्रु था; उसने सवार को न पहचान पाने के कारण कारतूस दिए], 5–(क)।

परीक्षा-युक्तियाँ

परीक्षा में अच्छे अंक कैसे पाएँ

  • लेखक हबीब तनवीर (1923–2009) तथा विधा ‘एकांकी’ अवश्य याद रखें – यह छोटे प्रश्न में पूछा जाता है।
  • घटना का समय (सन् 1799), स्थान (गोरखपुर का जंगल) और मुख्य पात्र (कर्नल कॉलिंज, लेफ़्टीनेंट, सवार/वज़ीर अली) रटकर रखें।
  • कारतूस माँगने वाले प्रसंग (क्लाइमेक्स) को उदाहरण सहित लिखें – यही एकांकी का सार है।
  • आशय स्पष्टीकरण में पहले कथन का संदर्भ (किसने, किससे कहा) और फिर भाव लिखें।
  • उर्दू-शब्दों (जाँबाज़, हुक्मराँ, हिफ़ाज़त, वज़ीफ़ा) की सही वर्तनी एवं नुक़्ता लगाने का ध्यान रखें।

सामान्य गलतियाँ

इन गलतियों से बचें

  • लेखक का नाम ‘हबीब तनवीर’ है – इसे अन्य लेखकों से न मिलाएँ।
  • वज़ीर अली का दुश्मन सआदत अली था, टीपू सुल्तान नहीं – पात्रों में भ्रम न करें।
  • वज़ीर अली ने कर्नल का नहीं, बल्कि कंपनी के वकील का कत्ल किया था।
  • खेमे में आए सवार को अलग पात्र न समझें – वह स्वयं वज़ीर अली था।
  • कारतूस की संख्या – कर्नल ने सवार को दस कारतूस दिए थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘कारतूस’ पाठ के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?

‘कारतूस’ पाठ के लेखक हबीब तनवीर (1923–2009) हैं। यह एक एकांकी (एक अंक वाला नाटक) है, जो कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 14 में संकलित है।

एकांकी का मुख्य पात्र वज़ीर अली कौन था?

वज़ीर अली अवध का एक निडर एवं देशभक्त स्वतंत्रता-सेनानी था, जिसका एकमात्र लक्ष्य अंग्रेज़ों को हिंदुस्तान से बाहर करना था। वह अपने अदम्य साहस और बुद्धि-कौशल के लिए प्रसिद्ध था।

वज़ीर अली ने कर्नल से कारतूस कैसे प्राप्त किए?

वज़ीर अली एक सवार के रूप में कर्नल कॉलिंज के खेमे में पहुँचा और वज़ीर अली को पकड़ने के बहाने उससे कारतूस माँगे। कर्नल ने उसे न पहचानकर दस कारतूस दे दिए। तब उसने अपना नाम वज़ीर अली बताकर कर्नल की जान बख़्शी और निडरता से चला गया।

सभी प्रश्न NCERT स्पर्श (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर मौलिक, परीक्षा-उपयोगी एवं विशेषज्ञ-जाँचे हुए हैं। सत्र 2026–27।

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