NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 13: पतझर में टूटी पत्तियाँ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 13 ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ (लेखक – रवींद्र केलेकर) का पूरा समाधान देता है। इसमें दो प्रसंग हैं – (I) गिन्नी का सोना और (II) झेन की देन। यहाँ पाठ का सार, शब्दार्थ, आशय-स्पष्टीकरण, सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।
लेखक परिचय – रवींद्र केलेकर
रवींद्र केलेकर का जन्म 7 मार्च 1925 को कोंकण क्षेत्र में हुआ था। विद्यार्थी जीवन से ही वे गोवा-मुक्ति आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ गए थे। गांधीवादी चिंतक के रूप में विख्यात केलेकर ने अपने लेखन में जन-जीवन के विविध पक्षों, मान्यताओं और व्यक्तिगत विचारों को देश और समाज के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। कोंकणी और मराठी के शीर्षस्थ लेखक एवं पत्रकार केलेकर की कोंकणी में पच्चीस, मराठी में तीन तथा हिंदी और गुजराती में भी कुछ पुस्तकें प्रकाशित हुईं। उन्होंने काका कालेलकर की अनेक पुस्तकों का संपादन एवं अनुवाद भी किया। गोवा कला अकादमी के साहित्य पुरस्कार सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित केलेकर की प्रमुख कृतियाँ हैं – उजवाडाचे सूर, समिधा, सांगली (कोंकणी) तथा हिंदी में पतझर में टूटी पत्तियाँ। उनका निधन सन् 2010 में हुआ।
पाठ का सार
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ में रवींद्र केलेकर ने थोड़े शब्दों में गहरी बात कहने वाले दो प्रसंग प्रस्तुत किए हैं, जो पाठक को जागरूक और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
(I) गिन्नी का सोना – लेखक बताते हैं कि शुद्ध सोना अलग होता है और गिन्नी का सोना अलग। गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिला होता है, इसलिए वह अधिक चमकता और मजबूत होता है; इसी से प्रायः गहने बनाए जाते हैं। इसी प्रकार शुद्ध आदर्श शुद्ध सोने जैसे होते हैं। कुछ लोग उनमें व्यावहारिकता का थोड़ा-सा ताँबा मिलाकर उन्हें ‘प्रैक्टिकल’ बना देते हैं और ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहलाते हैं। लेखक चेताते हैं कि जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है, तब जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और सोने के बजाय ताँबा ही आगे आ जाता है। गांधीजी ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ अवश्य थे, पर वे आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतारते थे, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे – वे सोने में ताँबा नहीं, बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसका मूल्य बढ़ाते थे। इसीलिए उनके जीवन में सोना (आदर्श) ही सदा आगे रहा। लेखक का निष्कर्ष है कि समाज को शाश्वत मूल्य आदर्शवादी लोगों ने ही दिए हैं; व्यवहारवादी तो समाज को गिराते ही रहे हैं।
(II) झेन की देन – जापान-यात्रा में लेखक के एक मित्र ने बताया कि वहाँ अस्सी प्रतिशत लोग मनोरोग से ग्रस्त हैं, क्योंकि जीवन की रफ्तार बहुत बढ़ गई है – लोग चलते नहीं, दौड़ते हैं; बोलते नहीं, बकते हैं। अमेरिका से प्रतिस्पर्धा में एक महीने का काम एक दिन में पूरा करने की होड़ ने दिमाग पर ‘स्पीड’ का इंजन लगा दिया, जिससे तनाव बढ़ता है और इंजन टूट जाता है। शाम को मित्र लेखक को ‘टी-सेरेमनी’ (चा-नो-यू) में ले गए। एक शांत पर्णकुटी में ‘चाजीन’ ने अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से चाय बनाकर पिलाई। वहाँ तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता और प्याले में दो घूँट से अधिक चाय नहीं होती। डेढ़ घंटे तक एक-एक बूँद चाय पीते हुए लेखक का मन इतना शांत हो गया कि उसके दिमाग की रफ्तार धीरे-धीरे धीमी पड़कर बिलकुल बंद हो गई। उसे लगा मानो वह अनंतकाल में जी रहा हो। तब उसे अनुभव हुआ कि हम या तो भूतकाल में जीते हैं या भविष्यकाल में, जबकि सत्य केवल वर्तमान क्षण है और उसी में जीना चाहिए। ‘जीना किसे कहते हैं’ – यह झेन परंपरा की बड़ी देन जापानियों को मिली है।
मूलभाव / प्रतिपाद्य
दोनों प्रसंग जीवन-मूल्यों से जुड़े हैं। पहला प्रसंग सिखाता है कि व्यावहारिकता को आदर्शों से ऊँचा न मानें; सच्चा नेतृत्व वही है जो व्यावहारिकता को आदर्श के स्तर तक उठाए, जैसा गांधीजी ने किया। दूसरा प्रसंग सिखाता है कि भूत और भविष्य की चिंता में डूबे रहने के बजाय वर्तमान क्षण में पूरी एकाग्रता से जीना ही सच्चा जीवन है – यही मानसिक शांति का रहस्य है।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| व्यावहारिकता | समय और अवसर देखकर कार्य करने की सूझ |
| प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट | व्यावहारिक आदर्शवादी |
| बखान | वर्णन करना, बयान करना |
| सूझ-बूझ | काम करने की समझ |
| स्तर | श्रेणी; (के स्तर) के बराबर |
| सजग | सचेत, सावधान |
| शाश्वत | जो सदैव एक-सा रहे, जो बदला न जा सके |
| शुद्ध सोना | 24 कैरट का (बिना मिलावट का) सोना |
| गिन्नी का सोना | 22 कैरट (सोने में ताँबा मिला हुआ) सोना, जिससे गहने बनाए जाते हैं |
| मानसिक | मस्तिष्क संबंधी, दिमागी |
| मनोरुग्ण | तनाव के कारण मन से अस्वस्थ |
| प्रतिस्पर्धा | होड़ |
| स्पीड | गति |
| टी-सेरेमनी | जापान में चाय पीने का विशेष आयोजन |
| चा-नो-यू | जापानी में टी-सेरेमनी का नाम |
| दफ़्ती | लकड़ी की खोखली सरकने वाली दीवार जिस पर चित्रकारी होती है |
| पर्णकुटी | पत्तों से बनी कुटिया |
| बेढब-सा | बेडौल-सा |
| चाजीन | जापानी विधि से चाय पिलाने वाला |
| गरिमापूर्ण | सलीके से |
| भंगिमा | मुद्रा |
| जयजयवंती | एक राग का नाम |
| खदबदाना | उबलना |
| उलझन | असमंजस की स्थिति |
| अनंतकाल | वह काल जिसका अंत न हो |
| सन्नाटा | खामोशी |
| मिथ्या | भ्रम, झूठ |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
मौखिक – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए
1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
2. प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
4. लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
6. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
लिखित (क) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25–30 शब्दों में) लिखिए
1. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
2. चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
3. ‘टी-सेरेमनी’ में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
4. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
लिखित (ख) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50–60 शब्दों में) लिखिए
1. गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।
2. आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
3. अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब– (1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो। (2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
4. ‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
5. ‘गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्त्व है?
6. लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
7. लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
लिखित (ग) – निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए
1. समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
2. जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों’ के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।
3. हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।
4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
भाषा-अध्ययन
1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए– व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत।
2. ‘लाभ-हानि’ का विग्रह इस प्रकार होगा– लाभ और हानि। यहाँ द्वंद्व समास है। नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए– (क) माता-पिता (ख) पाप-पुण्य (ग) सुख-दुख (घ) रात-दिन (ङ) अन्न-जल (च) घर-बाहर (छ) देश-विदेश।
3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए– (क) सफल (ख) विलक्षण (ग) व्यावहारिक (घ) सजग (ङ) आदर्शवादी (च) शुद्ध।
4. अनेकार्थी शब्द – नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए– उत्तर, कर, अंक, नग।
5. निम्नलिखित वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए– (क) अँगीठी सुलगाई। उस पर चायदानी रखी। (ख) चाय तैयार हुई। उसने वह प्यालों में भरी। (ग) बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया। तौलिए से बरतन साफ़ किए।
6. निम्नलिखित वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए– (क) चाय पीने की यह एक विधि है। जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं। (ख) बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था। उसमें पानी भरा हुआ था। (ग) चाय तैयार हुई। उसने वह प्यालों में भरी। फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।
योग्यता-विस्तार एवं परियोजना कार्य (गांधीजी पर आधारित पुस्तकें पढ़ना, ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द-चित्र बनाना, चाय की पैदावार वाले स्थानों का मानचित्र तैयार करना) विद्यार्थी की अपनी रचनात्मक एवं व्यावहारिक गतिविधियाँ हैं, जिन्हें वे स्वयं कक्षा/परियोजना-पुस्तिका में करें।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (30–40 शब्द)
1. गिन्नी के सोने से प्रायः क्या बनाया जाता है और क्यों?
2. गांधीजी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर क्यों नहीं उतरने देते थे?
3. लेखक टी-सेरेमनी के आरंभ में दस-पंद्रह मिनट तक क्यों उलझन में पड़ा रहा?
4. टी-सेरेमनी के स्थान का वातावरण कैसा था?
5. ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ शीर्षक की सार्थकता बताइए।
दीर्घ उत्तरीय (100–120 शब्द)
6. ‘गिन्नी का सोना’ प्रसंग के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।
7. ‘झेन की देन’ प्रसंग से हमें जीवन जीने की कौन-सी कला मिलती है? विस्तार से लिखिए।
8. चाजीन के व्यवहार और टी-सेरेमनी की विधि का वर्णन कीजिए।
अभ्यास MCQ
1. ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ के लेखक कौन हैं?
(क) काका कालेलकर
(ख) रवींद्र केलेकर
(ग) महात्मा गांधी
(घ) गिरिराज किशोर
2. गिन्नी के सोने में क्या मिला होता है?
(क) चाँदी
(ख) लोहा
(ग) ताँबा
(घ) पीतल
3. पाठ में आदर्श का प्रतीक किसे बताया गया है?
(क) ताँबे को
(ख) शुद्ध सोने को
(ग) गिन्नी के सोने को
(घ) चाँदी को
4. लेखक के अनुसार गांधीजी क्या करते थे?
(क) सोने में ताँबा मिलाते थे
(ख) ताँबे में सोना मिलाते थे
(ग) आदर्श छोड़ देते थे
(घ) केवल व्यावहारिकता को महत्त्व देते थे
5. जापान में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
(क) टी-पार्टी
(ख) चा-नो-यू
(ग) चाजीन
(घ) झेन
6. लेखक के मित्र के अनुसार जापान में लगभग कितने प्रतिशत लोग मनोरोगी हैं?
(क) साठ प्रतिशत
(ख) सत्तर प्रतिशत
(ग) अस्सी प्रतिशत
(घ) नब्बे प्रतिशत
7. चाय पिलाने वाले को जापानी में क्या कहते हैं?
(क) चाजीन
(ख) चा-नो-यू
(ग) तातामी
(घ) दफ़्ती
8. टी-सेरेमनी में अधिक से अधिक कितने लोगों को प्रवेश दिया जाता था?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) सात
9. लेखक के अनुसार सत्य कौन-सा काल है?
(क) भूतकाल
(ख) भविष्यकाल
(ग) वर्तमानकाल
(घ) तीनों काल
10. चाजीन की भंगिमाओं से किस राग के सुर गूँजते प्रतीत होते थे?
(क) भैरवी
(ख) मालकौंस
(ग) जयजयवंती
(घ) यमन
अभिकथन-कारण
नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): गिन्नी का सोना शुद्ध सोने से अधिक मजबूत होता है।
कारण (R): गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिला होता है।
2. अभिकथन (A): गांधीजी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतार देते थे।
कारण (R): वे व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक ऊपर चढ़ाते थे।
3. अभिकथन (A): जापान में लोग मानसिक रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं।
कारण (R): वहाँ जीवन की रफ्तार बहुत बढ़ गई है और प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव बढ़ गया है।
4. अभिकथन (A): टी-सेरेमनी में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता।
कारण (R): इस विधि में शांति सबसे मुख्य बात होती है।
5. अभिकथन (A): लेखक के अनुसार हमें भूत और भविष्य में ही जीना चाहिए।
कारण (R): वर्तमान क्षण ही एकमात्र सत्य है।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- सोना = आदर्श और ताँबा = व्यावहारिकता – यह रूपक याद रखें; आशय-प्रश्न इसी पर आधारित होते हैं।
- गांधीजी की पंक्ति “ताँबे में सोना मिलाते थे” को उद्धरण के रूप में अवश्य लिखें।
- ‘झेन की देन’ में ‘वर्तमान ही सत्य है’ तथा ‘चा-नो-यू / चाजीन’ जैसे शब्द उत्तर में लिखें।
- दोनों प्रसंगों के अलग-अलग संदेश स्पष्ट रूप से बिंदुवार लिखें।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को काका कालेलकर समझ लेना – लेखक रवींद्र केलेकर हैं।
- गांधीजी को साधारण व्यवहारवादी मान लेना – वे आदर्शों को सर्वोपरि रखते थे।
- ‘चा-नो-यू’ (विधि) और ‘चाजीन’ (चाय पिलाने वाला) में भ्रम करना।
- आशय-प्रश्न में केवल पंक्ति दोहरा देना – भाव अपने शब्दों में समझाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक रवींद्र केलेकर हैं, जो कोंकणी और मराठी के शीर्षस्थ लेखक एवं गांधीवादी चिंतक थे।
इस पाठ में कितने प्रसंग हैं और उनके नाम क्या हैं?
इस पाठ में दो प्रसंग हैं – (I) गिन्नी का सोना और (II) झेन की देन। दोनों जीवन-मूल्यों से जुड़े संक्षिप्त किंतु गहरे प्रसंग हैं।
‘झेन की देन’ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
इससे हमें वर्तमान में जीने की कला मिलती है। भूत-भविष्य की चिंता छोड़कर पूरी एकाग्रता से वर्तमान क्षण में जीना ही मानसिक शांति और सच्चे जीवन का मार्ग है।
प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
