NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 11: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के गद्य अध्याय 11 ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ (लेखक – प्रहलाद अग्रवाल) का पूरा एवं परीक्षा-केंद्रित समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – प्रहलाद अग्रवाल
प्रहलाद अग्रवाल का जन्म सन् 1947 में मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ। उन्होंने हिंदी में एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त की। किशोरावस्था से ही उन्हें हिंदी फ़िल्मों के इतिहास, फ़िल्मकारों के जीवन तथा उनके अभिनय के विषय में विस्तार से जानने और उस पर चर्चा करने का शौक रहा। वे सतना के शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में अध्यापन करते रहे और फ़िल्म-जगत से जुड़े लोगों तथा फ़िल्मों पर निरंतर लेखन करते रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में – सातवाँ दशक, तानाशाह, मैं ख़ुशबू, सुपर स्टार, राजकपूर: आधी हकीकत आधा फ़साना, कवि शैलेंद्र: ज़िंदगी की जीत में यकीन, प्यासा: चिर अतृप्त गुरुदत्त, उत्ताल उमंग: सुभाष घई की फ़िल्मकला, अरे ओ माँझी: बिमल राय का सिनेमा तथा महाबाज़ार के महानायक: इक्कीसवीं सदी का सिनेमा आदि उल्लेखनीय हैं। फ़िल्म-समीक्षा उनकी लेखनी का प्रमुख विषय रहा।
पाठ का सार
‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ प्रसिद्ध गीतकार और कवि शैलेंद्र के फ़िल्म-निर्माण और उनकी संवेदनशील रचना-दृष्टि पर केंद्रित एक भावपूर्ण व्यक्ति-चित्र है। शैलेंद्र कई दशकों तक फ़िल्म-क्षेत्र से एक गीतकार के रूप में जुड़े रहे, परंतु जब उन्होंने फणीश्वरनाथ रेणु की अमर कृति ‘तीसरी कसम उर्फ़ मारे गए गुलफ़ाम’ को परदे पर उतारा, तो वह फ़िल्म हिंदी सिनेमा का मील का पत्थर सिद्ध हुई। लेखक इसे ‘सेल्युलाइड पर लिखी कविता’ कहते हैं, क्योंकि इसमें साहित्यिक कृति के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया गया है।
यह शैलेंद्र के जीवन की पहली और अंतिम फ़िल्म थी। ‘तीसरी कसम’ को राष्ट्रपति स्वर्ण-पदक, बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार तथा मास्को फ़िल्म फ़ेस्टिवल में भी पुरस्कार मिला। इस फ़िल्म में राजकपूर ने अपने जीवन की सर्वोत्कृष्ट भूमिका निभाई। शैलेंद्र राजकपूर के अनन्य मित्र थे; राजकपूर ने इस फ़िल्म में केवल एक रुपया पारिश्रमिक लेकर पूरी तन्मयता से अभिनय किया। शैलेंद्र एक आदर्शवादी, भावुक कवि थे, जिन्हें अपार संपत्ति और यश की उतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि की।
फ़िल्म कलात्मक दृष्टि से बहुत ऊँची थी, परंतु इसे खरीदने वाला कोई वितरक आसानी से नहीं मिला, क्योंकि इसकी संवेदना ‘दो से चार बनाने’ का गणित जानने वालों की समझ से परे थी। शैलेंद्र ने दर्शकों की रुचि की आड़ में उथलेपन को कभी स्वीकार नहीं किया; वे मानते थे कि कलाकार का कर्तव्य उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करना है। उनके गीत भाव-प्रवण थे, दुरूह नहीं। ‘तीसरी कसम’ में राजकपूर ‘हीरामन’ और वहीदा रहमान ‘हीराबाई’ के पात्रों में पूरी तरह ढल गए। राजकपूर ने अभिनय नहीं किया, बल्कि वह भोला-भाला देहाती गाड़ीवान हीरामन ही बन गया। इस प्रकार लेखक सिद्ध करते हैं कि एक सार्थक और उद्देश्यपूर्ण फ़िल्म बनाना कितना कठिन और जोखिम भरा काम है, और शैलेंद्र जैसा सच्चा कवि-हृदय ही ऐसी फ़िल्म रच सकता था।
मूलभाव
इस पाठ का मूलभाव यह है कि व्यावसायिक लाभ और दर्शकों की सस्ती रुचि के दबाव से परे जाकर भी कला की सार्थकता और संवेदना को सर्वोपरि रखा जा सकता है। शैलेंद्र ने यश और धन की लिप्सा से दूर रहकर आत्म-संतुष्टि के लिए एक ऐसी फ़िल्म बनाई जो लोक-तत्त्व और मानवीय करुणा से भरपूर थी। पाठ हमें सिखाता है कि सच्चा कलाकार बाज़ार के सामने नहीं झुकता, बल्कि उपभोक्ता की रुचि का परिष्कार करता है और व्यथा को पराजय नहीं, आगे बढ़ने का संदेश बनाकर प्रस्तुत करता है।
शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अंतराल | के बाद, बीच का समय |
| अभिनीत | अभिनय किया गया |
| सर्वोत्कृष्ट | सबसे अच्छा |
| सेल्युलाइड | कैमरे की रील में उतार चित्र पर प्रस्तुत करना |
| सार्थकता | सफलता के साथ, अर्थपूर्ण होना |
| कलात्मकता | कला से परिपूर्ण |
| संवेदनशीलता | भावुकता |
| शिद्दत | तीव्रता |
| अनन्य | परम, अत्यधिक |
| तन्मयता | तल्लीनता, लीन हो जाना |
| पारिश्रमिक | मेहनताना |
| यराना मस्ती | दोस्ताना अंदाज़ |
| आगाह | सचेत, सावधान |
| आत्म-संतुष्टि | अपनी तुष्टि, अपने मन का संतोष |
| बमुश्किल | बहुत कठिनाई से |
| वितरक | फ़िल्म को सिनेमाघरों तक पहुँचाने/प्रसारित करने वाले लोग |
| नामज़द | विख्यात, प्रसिद्ध |
| नावाकिफ़ | अनजान |
| मंतव्य | विचार, इच्छा, राय |
| उथलापन | सतही, ओछापन |
| अभिजात्य | परिष्कृत, कुलीन |
| भाव-प्रवण | भावनाओं से भरा हुआ |
| दुरूह | कठिन |
| उकड़ूँ | घुटने मोड़कर पैर के तलवों के सहारे बैठना |
| सूक्ष्मता | बारीकी |
| स्पंदित | संचालित, गतिमान |
| टप्पर-गाड़ी | अर्धगोलाकार छप्परयुक्त बैलगाड़ी |
| हुज़ूम | भीड़ |
| त्रासद | दुखद |
| ग्लोरिफ़ाई | गुणगान/महिमामंडित करना |
| वीभत्स | भयावह |
| धन-लिप्सा | धन की अत्यधिक चाह |
| समीक्षक | समीक्षा करने वाला |
| कला-मर्मज्ञ | कला की परख करने वाला |
| चरमोत्कर्ष | ऊँचाई के शिखर पर |
| ख़ालिस | शुद्ध |
| भुच्च | निरा, बिलकुल (अनगढ़) |
| किंवदंती | कहावत, जनश्रुति |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
मौखिक – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए—
1. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?
2. शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?
3. राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।
4. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म के नायक व नायिकाओं के नाम बताइए और फ़िल्म में इन्होंने किन पात्रों का अभिनय किया है?
5. फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ का निर्माण किसने किया था?
6. राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी?
7. राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?
8. फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?
लिखित (क) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25–30 शब्दों में) लिखिए—
1. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को ‘सेल्युलाइड पर लिखी कविता’ क्यों कहा गया है?
2. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?
3. शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?
4. फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है?
5. ‘शैलेंद्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं’—इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
6. लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
7. फ़िल्म ‘श्री 420’ के गीत ‘रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ’ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
लिखित (ख) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50–60 शब्दों में) लिखिए—
1. राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेंद्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?
2. ‘तीसरी कसम’ में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया है? स्पष्ट कीजिए।
3. लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि ‘तीसरी कसम’ ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?
4. शैलेंद्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं? अपने शब्दों में लिखिए।
5. फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
6. शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है—कैसे? स्पष्ट कीजिए।
7. लेखक के इस कथन से कि ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
लिखित (ग) – निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए—
1. …वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
2. उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।
3. व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।
4. दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।
5. उनके गीत भाव-प्रवण थे—दुरूह नहीं।
भाषा अध्ययन
1. पाठ में आए ‘से’ के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए— (क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। (ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ। (ग) फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ़ थे। (घ) दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने के गणित जानने वालों की समझ से परे थी। (ङ) शैलेंद्र राजकपूर की इस यराना दोस्ती से परिचित तो थे।
2. इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए— (क) ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म नहीं, सेल्युलाइड पर लिखी कविता थी। (ख) उन्होंने ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था। (ग) फ़िल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा। (घ) ख़ालिस देहाती भुच्च गाड़ीवान जो सिर्फ़ दिल की ज़ुबान समझता है, दिमाग की नहीं।
3. पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों से वाक्य बनाइए— चेहरा मुरझाना, चक्कर खा जाना, दो से चार बनाना, आँखों से बोलना।
4. निम्नलिखित शब्दों के हिंदी पर्याय दीजिए— (क) शिद्दत (ख) यराना (ग) बमुश्किल (घ) ख़ालिस (ङ) नावाकिफ़ (च) यकीन (छ) हावी (ज) रेशा।
5. निम्नलिखित का संधि-विच्छेद कीजिए— (क) चित्रांकन (ख) सर्वोत्कृष्ट (ग) चरमोत्कर्ष (घ) रूपांतरण (ङ) घनानंद।
6. निम्नलिखित का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम भी लिखिए— (क) कला-मर्मज्ञ (ख) लोकप्रिय (ग) राष्ट्रपति।
योग्यता विस्तार
1. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफ़ाम (तीसरी कसम)’ पर आधारित है। विद्यार्थी इस मूल कहानी को खोजकर पढ़ें और जानकारी एकत्र करें।
2. समाचार-पत्रों में दी जाने वाली तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए तथा ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म देखकर उसकी समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए। (यह विद्यार्थी का स्वयं करने का कार्य है।)
परियोजना कार्य
1. ‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’ – वर्तमान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में समानता और अंतर पर कक्षा में चर्चा कीजिए। (समूह-गतिविधि)
2. ‘तीसरी कसम’ जैसी अन्य फ़िल्में भी हैं जो किसी साहित्यिक रचना पर बनी हैं। नीचे दिए नमूने के अनुसार ऐसी फ़िल्मों की सूची तैयार कीजिए—
| क्र.सं. | फ़िल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
|---|---|---|---|---|
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरतचंद्र |
| 2. | गोदान | गोदान | हिंदी | प्रेमचंद |
| 3. | गाइड | The Guide | अंग्रेज़ी | आर.के. नारायण |
| 4. | उमराव जान | उमराव जान अदा | उर्दू | मिर्ज़ा हादी रुस्वा |
(विद्यार्थी इस सूची को और भी फ़िल्मों से बढ़ा सकते हैं।)
3. लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। अपने क्षेत्र के दो-तीन प्रचलित लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए। (यह विद्यार्थी का स्वयं करने का कार्य है।)
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘तीसरी कसम’ किस कहानी पर आधारित है और इसके कहानीकार कौन हैं?
2. शैलेंद्र को राजकपूर ने केवल एक रुपया पारिश्रमिक क्यों लिया?
3. ‘तीसरी कसम’ शैलेंद्र के जीवन में किस दृष्टि से विशेष महत्त्व रखती है?
4. राजकपूर ने एक साथ कौन-सी चार फ़िल्मों के निर्माण की घोषणा की थी?
5. हीरामन और हीराबाई के बीच के संवाद को लेखक ने किस प्रकार सराहा है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘तीसरी कसम’ की सफलता के बावजूद इसे आज भी क्यों याद किया जाता है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
7. इस पाठ के आधार पर शैलेंद्र के व्यक्तित्व एवं कला-दृष्टि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) फणीश्वरनाथ रेणु
(ख) प्रहलाद अग्रवाल
(ग) शैलेंद्र
(घ) राजकपूर
2. शैलेंद्र ने अपने जीवन में कुल कितनी फ़िल्में बनाईं?
(क) दो
(ख) चार
(ग) एक
(घ) तीन
3. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म में राजकपूर ने किस पात्र का अभिनय किया?
(क) हीराबाई
(ख) गुलफ़ाम
(ग) हीरामन
(घ) गाड़ीवान महुआ
4. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म किस कहानी पर आधारित है?
(क) मारे गए गुलफ़ाम
(ख) पंच परमेश्वर
(ग) ईदगाह
(घ) मैला आँचल
5. फ़िल्म की नायिका (हीराबाई) की भूमिका किसने निभाई?
(क) नरगिस
(ख) वहीदा रहमान
(ग) मीना कुमारी
(घ) मधुबाला
6. राजकपूर ने ‘तीसरी कसम’ के लिए कितना पारिश्रमिक लिया?
(क) कुछ नहीं
(ख) पूरा पारिश्रमिक
(ग) मात्र एक रुपया (एडवांस)
(घ) आधा पारिश्रमिक
7. लेखक ने ‘तीसरी कसम’ को क्या कहा है?
(क) सेल्युलाइड पर लिखी कविता
(ख) व्यावसायिक फ़िल्म
(ग) साधारण मनोरंजन
(घ) असफल प्रयोग
8. शैलेंद्र को मुख्यतः धन और यश की अपेक्षा किसकी अभिलाषा थी?
(क) प्रसिद्धि की
(ख) सत्ता की
(ग) आत्म-संतुष्टि की
(घ) पुरस्कारों की
9. ‘श्री 420’ के गीत की पंक्ति ‘रातें दसों दिशाओं से…’ पर किसने आपत्ति की थी?
(क) राजकपूर
(ख) संगीतकार जयकिशन
(ग) मुकेश
(घ) शंकर
10. लेखक के अनुसार शैलेंद्र को मात्र गीतकार नहीं, बल्कि क्या कहा जाना चाहिए?
(क) निर्देशक
(ख) अभिनेता
(ग) कवि
(घ) समीक्षक
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
निर्देश: नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘तीसरी कसम’ शैलेंद्र के जीवन की पहली और अंतिम फ़िल्म थी।
कारण (R): शैलेंद्र मूलतः एक गीतकार और कवि थे और उन्होंने केवल यही एक फ़िल्म बनाई।
2. अभिकथन (A): ‘तीसरी कसम’ को खरीदने वाला वितरक आसानी से नहीं मिला।
कारण (R): फ़िल्म में राजकपूर और वहीदा रहमान जैसे सितारे और शंकर-जयकिशन का लोकप्रिय संगीत नहीं था।
3. अभिकथन (A): राजकपूर ने ‘तीसरी कसम’ में अभिनय नहीं किया, बल्कि वह स्वयं हीरामन में ढल गया।
कारण (R): राजकपूर एक संवेदनशील और सशक्त कलाकार थे जिन्हें समीक्षक ‘आँखों से बात करने वाला’ मानते थे।
4. अभिकथन (A): शैलेंद्र ने दर्शकों की रुचि की आड़ में उथलापन परोसना उचित नहीं माना।
कारण (R): वे मानते थे कि कलाकार का कर्तव्य उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करना है।
5. अभिकथन (A): शैलेंद्र को अपार संपत्ति और यश की प्रबल कामना थी।
कारण (R): वे एक आदर्शवादी और भावुक कवि थे जिन्हें आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- लेखक (प्रहलाद अग्रवाल), विधा (व्यक्ति-चित्र), फ़िल्म (तीसरी कसम), मूल कहानी (मारे गए गुलफ़ाम – रेणु) और पात्र (हीरामन = राजकपूर, हीराबाई = वहीदा रहमान) तथ्य कंठस्थ रखें।
- ‘सेल्युलाइड पर लिखी कविता’, ‘आत्म-संतुष्टि’, ‘रुचि का परिष्कार’ और ‘शत-प्रतिशत न्याय’ जैसे मूल वाक्यांश उत्तर में अवश्य प्रयोग करें – ये मूल्यवर्धन करते हैं।
- आशय-स्पष्टीकरण में पहले सरल भाषा में अर्थ, फिर एक पंक्ति में संदर्भगत विस्तार लिखें।
- 25–30 तथा 50–60 शब्दों की शब्द-सीमा का ध्यान रखें; अनावश्यक विस्तार से बचें।
सामान्य गलतियाँ
- शैलेंद्र को निर्देशक/अभिनेता लिख देना – वे गीतकार-कवि एवं इस फ़िल्म के निर्माता थे।
- यह लिख देना कि शैलेंद्र ने अनेक फ़िल्में बनाईं – उन्होंने केवल एक फ़िल्म बनाई।
- हीरामन और हीराबाई के पात्र-अभिनेता आपस में गड्ड-मड्ड कर देना।
- आशय लिखते समय केवल वाक्य दोहरा देना, अर्थ स्पष्ट न करना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक प्रहलाद अग्रवाल हैं, जो फ़िल्म-समीक्षा एवं फ़िल्म-संबंधी लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘तीसरी कसम’ फ़िल्म किस कहानी पर आधारित है?
यह फ़िल्म फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफ़ाम उर्फ़ तीसरी कसम’ पर आधारित है, जिसकी पटकथा भी रेणु ने स्वयं तैयार की थी।
‘तीसरी कसम’ को ‘सेल्युलाइड पर लिखी कविता’ क्यों कहा गया है?
क्योंकि इस फ़िल्म ने रेणु की मार्मिक कहानी को काव्यात्मक संवेदनशीलता और सूक्ष्मता के साथ परदे पर उतारा, जिससे वह एक कविता-सी अनुभूति देती है।
प्रश्न NCERT स्पर्श (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
