NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 8: बड़े भाई साहब

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 8 ‘बड़े भाई साहब’ (लेखक – प्रेमचंद) का पूरा समाधान देता है – पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण के साथ।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 8 – बड़े भाई साहब लेखक: प्रेमचंद विधा: कहानी (व्यंग्यप्रधान) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – प्रेमचंद

प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था; उन्होंने उर्दू में ‘नवाब राय’ और हिंदी में ‘प्रेमचंद’ नाम से लेखन किया। आजीविका के लिए वे स्कूल-मास्टरी, इंस्पेक्टरी और मैनेजरी करने के साथ-साथ ‘हंस’ और ‘माधुरी’ जैसी प्रमुख पत्रिकाओं का संपादन भी करते रहे। आम आदमी के दुख-दर्द के बेजोड़ चितेरे प्रेमचंद को उनके जीवनकाल में ही ‘कथा सम्राट’ तथा ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाने लगा था। उन्होंने अपनी रचनाओं में उन वंचित और शोषित लोगों को मुख्य पात्र बनाया जिन्हें समाज में केवल प्रताड़ना और लांछन ही मिले थे। उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ खंडों में संकलित हैं और गोदान, गबन, प्रेमाश्रम, सेवासदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि आदि उनके प्रमुख उपन्यास हैं। 8 अक्तूबर 1936 को उनका देहावसान हुआ।

पाठ का सार

‘बड़े भाई साहब’ प्रेमचंद की एक प्रसिद्ध व्यंग्यप्रधान कहानी है, जिसमें दो भाइयों के माध्यम से तत्कालीन शिक्षा-प्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कथावाचक (छोटा भाई) अपने बड़े भाई साहब से उम्र में पाँच साल छोटा था, पर पढ़ाई में केवल तीन दर्जे पीछे। बड़े भाई स्वभाव से बहुत अध्ययनशील, गंभीर और अनुशासनप्रिय थे। वे चाहते थे कि शिक्षा की बुनियाद मजबूत हो, इसलिए एक-एक दर्जे में दो-दो, तीन-तीन साल लगाते थे और छोटे भाई पर पूरी निगरानी रखते थे।

छोटे भाई का मन पढ़ने में बिलकुल न लगता; मौका पाते ही वह खेल-कूद में निकल जाता। बड़े भाई साहब उसे डाँटते, लंबे-लंबे उपदेश देते और शिक्षा का भयंकर चित्र खींचकर उसे डराते। छोटा भाई हर बार टाइम-टेबल बनाता, पर उस पर अमल न कर पाता। संयोग ऐसा हुआ कि बड़े भाई साहब फेल हो गए और छोटा भाई बिना अधिक मेहनत किए दर्जे में अव्वल आ गया। इससे छोटे भाई में कुछ अभिमान आ गया और बड़े भाई का रोब उस पर कम हो गया।

बड़े भाई साहब ने उसे रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण देकर समझाया कि घमंड का अंत बुरा होता है तथा केवल इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असली चीज़ बुद्धि का विकास है। उन्होंने रटंत-विद्या, समय की पाबंदी पर लंबे निबंध और अल्जब्रा-ज्यामिति जैसी ‘बेकार’ पढ़ाई पर खुलकर व्यंग्य किया। एक दिन छोटे भाई को कनकौआ (पतंग) लूटते देख बड़े भाई ने उसे फिर समझाया, पर इस बार उनकी बातों में कठोरता नहीं, स्नेह और जीवन-अनुभव की गहराई थी। उन्होंने कहा कि वे उम्र में बड़े हैं और दुनिया का तजुर्बा किताबी ज्ञान से कहीं बढ़कर है। छोटे भाई का मन श्रद्धा से भर गया और उसने नतमस्तक होकर भाई साहब की बात मान ली। तभी एक कटा हुआ कनकौआ ऊपर से गुज़रा और बड़े भाई साहब स्वयं उछलकर उसकी डोर पकड़कर बेतहाशा दौड़ पड़े – इस प्रकार उनके भीतर छिपा बच्चा भी प्रकट हो गया।

मूलभाव / संदेश

यह कहानी एक ओर बड़े-छोटे भाई के स्नेह, उत्तरदायित्व और स्वाभाविक बालमन को दर्शाती है, तो दूसरी ओर रटने पर आधारित, पुस्तक-केंद्रित शिक्षा-प्रणाली पर करारा व्यंग्य करती है। लेखक का संदेश है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या तथ्य रटना नहीं, बल्कि बुद्धि का विकास और जीवन को समझना है। किताबी ज्ञान से बढ़कर दुनिया का व्यावहारिक अनुभव है, और बड़ों का अनुभव सदा आदरणीय रहता है।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
तालीमशिक्षा
पुख्तामज़बूत
तंबीहडाँट-डपट, चेतावनी
जन्मसिद्धजन्म से प्राप्त
सामंजस्यतालमेल
मसलनउदाहरण के तौर पर
इबारतलेख, लिखावट
चेष्टाकोशिश, प्रयत्न
जमातकक्षा, दर्जा
हर्फ़अक्षर
लताड़डाँट-फटकार
सूक्ति-बाणव्यंग्यात्मक/तीखे कथन
अवहेलनातिरस्कार, उपेक्षा
नसीहतसलाह, उपदेश
फ़जीहतअपमान, बेइज़्ज़ती
अव्वलप्रथम, सबसे आगे
आधिपत्यप्रभुत्व, साम्राज्य
स्वाधीनस्वतंत्र
महीपराजा
अभिमानघमंड
मुमतहिनपरीक्षक
हिमाकतमूर्खता, बेवकूफ़ी
प्राणांतकप्राण ले लेने वाला
कांतिहीनचेहरे पर चमक न होना, फीका
स्वच्छंदताआज़ादी, मनमानी
सहिष्णुतासहनशीलता
कनकौआपतंग
अदबआदर, इज़्ज़त
ज़हीनप्रतिभावान, बुद्धिमान
तजुर्बाअनुभव
बदहवासबेहाल, घबराया हुआ
मुहताजदूसरे पर आश्रित

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

मौखिक – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए

1. कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?

उत्तरकथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद में थी – कंकड़ियाँ उछालना, कागज़ की तितलियाँ उड़ाना, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल खेलना तथा कनकौए (पतंग) उड़ाना उसे बहुत भाता था।

2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?

उत्तरबड़े भाई साहब का पहला सवाल हमेशा यही होता था – ‘कहाँ थे?’

3. दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तरदूसरी बार पास होने पर छोटे भाई को कुछ अभिमान हो गया, वह आज़ादी से खेलकूद में शामिल होने लगा और अधिक स्वच्छंद हो गया; बड़े भाई का रोब अब उस पर पहले जैसा नहीं रहा।

4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?

उत्तरबड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे और (कहानी के आरंभ में) नौवीं जमात में पढ़ते थे, जबकि छोटा भाई पाँचवीं में था।

5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?

उत्तरदिमाग को आराम देने के लिए वे कॉपी या किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तसवीरें बनाते, एक ही नाम या शब्द कई-कई बार लिखते अथवा किसी शेर को सुंदर अक्षरों में बार-बार नकल करते थे।

लिखित (क) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25–30 शब्दों में) लिखिए

1. छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?

उत्तरउसने सोचा कि सुबह छह बजे उठकर हर विषय के लिए समय बाँटकर खूब मन लगाकर पढ़ेगा और खेल-कूद का मद बिलकुल उड़ा दिया। पर मैदान की हरियाली, खेलों का आकर्षण उसे खींच ले जाता, इसलिए वह पहले ही दिन टाइम-टेबल भूल जाता और उस पर अमल न कर पाता।

2. एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तरबड़े भाई साहब ने तलवार-सी खींच ली और उस पर टूट पड़े। उन्होंने रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण देकर समझाया कि घमंड का अंत बुरा होता है; एक दर्जा पास कर लेने भर से अव्वल आने पर इतराना ठीक नहीं और असली चीज़ बुद्धि का विकास है।

3. बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?

उत्तरवे बड़े थे, इसलिए छोटे भाई के सामने एक मिसाल कायम रखना चाहते थे। उन्हें लगता था कि यदि वे स्वयं खेल-कूद में लगेंगे तो छोटे भाई पर बुरा असर पड़ेगा और वे उसे रोकने का अधिकार खो देंगे; अतः अपने बचपन और इच्छाओं को दबाकर वे गंभीर बने रहते थे।

4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?

उत्तरवे उसे खेल-कूद में समय न गँवाकर मन लगाकर पढ़ने, घमंड न करने और जो पढ़े उसका अभिप्राय समझने की सलाह देते थे। ऐसा वे इसलिए करते थे क्योंकि वे छोटे भाई का हित चाहते थे और उसकी शिक्षा की बुनियाद मज़बूत करके उसे जीवन में सफल देखना चाहते थे।

5. छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फायदा उठाया?

उत्तरबड़े भाई के नरम पड़ते ही छोटे भाई की स्वच्छंदता बढ़ गई। उसने उनकी सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाया, पढ़ाई लगभग छोड़ दी और सारा समय कनकौए (पतंग) उड़ाने में लगाने लगा, यद्यपि भाई साहब की नज़र बचाकर ही ऐसा करता था।

लिखित (ख) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50–60 शब्दों में) लिखिए

1. बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तरमेरे विचार से बड़े भाई की डाँट-फटकार के बिना छोटे भाई का अव्वल आना कठिन था। यद्यपि वह पढ़ने में अधिक समय नहीं देता था, फिर भी भाई साहब के निरंतर भय, निगरानी और उपदेशों के कारण वह थोड़ा-बहुत पढ़ लेता था और परीक्षा में सतर्क रहता था। जब भाई साहब का रोब कम हुआ तो उसकी पढ़ाई और भी ढीली पड़ गई। अतः अनुशासन और निगरानी ने ही उसे पूरी तरह बिगड़ने से रोका और सफल बनाए रखा।

2. इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?

उत्तरलेखक ने रटने पर आधारित, पुस्तक-केंद्रित शिक्षा पर व्यंग्य किया है – इतिहास में राजाओं के नाम और घटनाएँ रटवाना, ज्यामिति और अल्जब्रा की निरर्थक-सी समस्याएँ हल करवाना, ‘समय की पाबंदी’ जैसी छोटी बात पर चार पन्नों का निबंध लिखवाना आदि। उनका मानना है कि इससे बुद्धि का विकास नहीं होता। मैं उनके इस विचार से काफ़ी हद तक सहमत हूँ, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य रटना नहीं, बल्कि समझ, चिंतन और व्यावहारिक ज्ञान का विकास होना चाहिए।

3. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

उत्तरबड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबें पढ़ने से नहीं, बल्कि दुनिया देखने और अनुभव प्राप्त करने से आती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अम्माँ और दादा ने कोई बड़ा दर्जा पास नहीं किया, फिर भी जीवन और दुनिया का उन्हें कहीं अधिक अनुभव है। उनका मत था कि चाहे कोई एम.ए., पीएच.डी. कर ले, अनुभव और उम्र से प्राप्त समझ की बराबरी किताबी ज्ञान नहीं कर सकता।

4. छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?

उत्तरकनकौआ लूटते समय जब बड़े भाई साहब ने स्नेहपूर्वक समझाया कि वे केवल अपने बड़े होने और जीवन-अनुभव के नाते ही टोकते हैं, बेरास्ता न चलने देना उनका कर्तव्य है, तो छोटे भाई को अपनी लघुता का अनुभव हुआ। उसे लगा कि भाई साहब अपने सुख-स्वार्थ का त्याग करके केवल उसका भला चाहते हैं। इस आत्मीयता और त्याग को देखकर उसका मन सजल हो उठा और उनके प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न हो गई।

5. बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तरबड़े भाई साहब स्वभाव से अत्यंत अध्ययनशील, गंभीर, अनुशासनप्रिय और उत्तरदायित्व-भावना से भरे थे। वे शिक्षा की बुनियाद को मज़बूत मानते थे, इसलिए जल्दबाज़ी पसंद नहीं करते थे। उपदेश देने की कला में निपुण थे और छोटे भाई का हित चाहते थे। ऊपर से कठोर दिखने वाले इस व्यक्ति के भीतर एक भोला बच्चा भी छिपा था, जो कनकौआ देखकर उछल पड़ता था। इस प्रकार उनमें कठोरता और स्नेह दोनों का सुंदर मेल था।

6. बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्त्वपूर्ण कहा है?

उत्तरबड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्त्वपूर्ण कहा है। उनका मानना था कि समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने से आती है। उन्होंने अपने अम्माँ-दादा और हेडमास्टर की बूढ़ी माँ का उदाहरण देकर समझाया कि कम पढ़े-लिखे होने पर भी इन्हें जीवन का व्यावहारिक अनुभव अधिक है और वे घर-गृहस्थी कुशलता से सँभालते हैं। इसलिए उन्होंने अनुभवजन्य ज्ञान को श्रेष्ठ माना।

7. बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि –

(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।

उत्तरछोटा भाई बड़े भाई साहब के हुक्म को कानून समझता था और उनकी डाँट चुपचाप सहता था। नरम व्यवहार के बावजूद वह उनकी नज़र बचाकर ही कनकौए उड़ाता था ताकि उनका सम्मान कम न हो। अंत में सजल आँखों से कहना – ‘हरगिज़ नहीं’ तथा नतमस्तक हो जाना उसके गहरे आदर को दर्शाता है।

(ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है।

उत्तरभाई साहब का यह कहना कि ‘समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने से आती है’ तथा अम्माँ-दादा और हेडमास्टर साहब की बूढ़ी माँ का उदाहरण देकर घर-गृहस्थी चलाने की व्यावहारिक समझ की बात करना यह सिद्ध करता है कि उन्हें ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है।

(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।

उत्तरकहानी के अंत में जब एक कटा हुआ कनकौआ ऊपर से गुज़रता है, तो बड़े भाई साहब स्वयं उछलकर उसकी डोर पकड़ लेते हैं और बेतहाशा हॉस्टल की ओर दौड़ पड़ते हैं। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि गंभीरता के आवरण के भीतर उनके मन में भी एक भोला, खेल-प्रिय बच्चा छिपा हुआ है।

(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।

उत्तरबड़े भाई साहब का बार-बार डाँटना, उपदेश देना और अंत में स्नेहपूर्वक यह कहना कि ‘खुद बेराह चलूँ तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ’ तथा ‘मेरे देखते तुम बेराह न चलने पाओगे’ – सिद्ध करता है कि उनकी सारी कठोरता के पीछे छोटे भाई का भला चाहने की भावना ही थी।

लिखित (ग) – निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए

1. इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।

आशयइस कथन का आशय है कि केवल परीक्षा उत्तीर्ण कर लेना शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य नहीं है। रटकर अंक पा लेना सच्ची विद्वत्ता नहीं। शिक्षा का असली उद्देश्य तो विवेक, चिंतन-शक्ति और समझ का विकास है, ताकि व्यक्ति जो पढ़े उसका अभिप्राय समझ सके और उसे जीवन में उतार सके।

2. फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।

आशयजैसे संकट और मृत्यु के भय के बीच भी मनुष्य सांसारिक मोह-माया को नहीं छोड़ पाता, उसी प्रकार बड़े भाई साहब की कठोर फटकार और धमकियों के बावजूद छोटा भाई खेल-कूद का आकर्षण नहीं छोड़ पाता था। खेलों के प्रति उसका मोह इतना प्रबल था कि भय भी उसे रोक नहीं पाता था।

3. बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?

आशयजिस प्रकार कमज़ोर नींव पर खड़ा मकान टिकाऊ नहीं होता, उसी प्रकार यदि शिक्षा की बुनियाद ही कच्ची रह जाए तो आगे का अध्ययन ठोस और स्थायी नहीं हो सकता। इसीलिए बड़े भाई साहब हर दर्जे को मन लगाकर, मज़बूती से पढ़ते थे, भले ही एक साल का काम करने में दो-तीन साल लग जाएँ।

4. आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।

आशययहाँ कटे हुए कनकौए (पतंग) के धीरे-धीरे झूमते हुए नीचे गिरने का काव्यात्मक वर्णन है। लेखक उसकी तुलना उस आत्मा से करता है जो स्वर्ग से विरक्त (मोहमुक्त) होकर नए जन्म और नए संस्कार ग्रहण करने के लिए धरती की ओर उतर रही हो। इस सुंदर बिंब से कनकौआ लूटने के प्रति बालक की तीव्र ललक और रोमांच व्यक्त होता है।

भाषा अध्ययन

1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए – नसीहत, रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब

उत्तर
शब्दपर्यायवाची शब्द
नसीहतसलाह, उपदेश
रोषक्रोध, गुस्सा
आज़ादीस्वतंत्रता, स्वाधीनता
राजानृप, भूपति (महीप)
ताज्जुबआश्चर्य, विस्मय

2. प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। नीचे दिए मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए – सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा।

उत्तर
मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
सिर पर नंगी तलवार लटकनानिरंतर भय या संकट बना रहनापरीक्षा निकट आते ही मेरे सिर पर नंगी तलवार लटकने लगी।
आड़े हाथों लेनाकड़ी आलोचना करना, खरी-खोटी सुनानादेर से आने पर शिक्षक ने रोहन को आड़े हाथों लिया।
अंधे के हाथ बटेर लगनाबिना परिश्रम संयोगवश सफलता मिल जानाबिना पढ़े ही पास हो जाना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है।
लोहे के चने चबानाअत्यंत कठिन कार्य करनाइस कठिन प्रतियोगिता को जीतना लोहे के चने चबाने के समान है।
दाँतों पसीना आनाबहुत परिश्रम/कठिनाई का सामना करनागणित का यह प्रश्न हल करने में मेरे दाँतों पसीना आ गया।
ऐरा-गैरा नत्थू-खैराकोई भी साधारण/महत्त्वहीन व्यक्तियह कठिन काम कोई ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा नहीं कर सकता।

3. निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए – (तत्सम: जन्मसिद्ध; तद्भव: आँख; देशज: दाल-भात; आगत: पोज़ीशन, फ़जीहत)। शेष शब्द – तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबल।

उत्तर
तत्समतद्भवदेशजआगत (अंग्रेज़ी एवं उर्दू/अरबी-फ़ारसी)
जन्मसिद्ध, चेष्टा, आधिपत्य, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, अवहेलनाआँख, आँखफोड़, घुड़कियाँ, पन्नादाल-भात, जानलेवा, मेला-तमाशा, सूक्तिबाणपोज़ीशन, फ़जीहत, तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, जमात, हर्फ़, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, भाई साहब, टाइम-टेबल
नोट: देशज/तद्भव वर्गीकरण में कुछ शब्दों के विषय में विद्वानों में मतभेद संभव है; ऊपर सर्वमान्य आधार पर वर्गीकरण किया गया है।

4. क्रियाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं – सकर्मक और अकर्मक। नीचे दिए वाक्यों में बताइए कि कौन-सी क्रिया है – सकर्मक या अकर्मक।

उत्तर
वाक्यक्रिया का प्रकार
(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया।सकर्मक
(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।अकर्मक
(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा।सकर्मक
(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।सकर्मक
(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।सकर्मक
(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।अकर्मक

5. ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए – विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार

उत्तर
मूल शब्द‘इक’ प्रत्यय युक्त शब्द
विचारवैचारिक
इतिहासऐतिहासिक
संसारसांसारिक
दिनदैनिक
नीतिनैतिक
प्रयोगप्रायोगिक
अधिकारआधिकारिक

योग्यता विस्तार एवं परियोजना कार्य

योग्यता विस्तार: (1) प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं – इनमें से कुछ कहानियाँ पढ़कर कक्षा में सुनाइए तथा कुछ का मंचन भी कीजिए। (2) ‘शिक्षा रटंत विद्या नहीं है’ विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए। (3) ‘क्या पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ चल सकते हैं’ विषय पर वाद-विवाद आयोजित कीजिए। (4) ‘क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है’ विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

परियोजना कार्य: (1) अपने माता-पिता या बड़े सदस्यों से बातचीत करके पता लगाइए कि बेहतर ढंग से ज़िंदगी जीने के लिए उन्हें किस बात ने सहायता दी – समझदारी/पुराने अनुभव या किताबी पढ़ाई? (2) छात्रावास में रहने वाली अपनी छोटी बहन/छोटे भाई को उसकी पढ़ाई-लिखाई के संबंध में एक पत्र लिखिए। (ये गतिविधियाँ विद्यार्थी स्वयं अपने अनुभव और परिवेश के आधार पर करें।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. बड़े भाई साहब किस भवन की बुनियाद मज़बूत डालना चाहते थे और क्यों?

उत्तरवे शिक्षा रूपी भवन की बुनियाद मज़बूत डालना चाहते थे, ताकि उस पर ज्ञान का आलीशान महल टिकाऊ रूप से खड़ा हो सके। उनका मानना था कि कमज़ोर नींव पर कोई भी ज्ञानरूपी इमारत पायेदार नहीं बन सकती।

2. छोटे भाई का मन पढ़ाई में क्यों नहीं लगता था?

उत्तरछोटे भाई का स्वभाव चंचल और खेलप्रिय था। मैदान की हरियाली, फुटबॉल, कबड्डी, कनकौए जैसी गतिविधियाँ उसे अनायास खींच ले जाती थीं, इसलिए एक घंटा भी किताब लेकर बैठना उसे पहाड़ जैसा लगता था।

3. बड़े भाई साहब ने रावण, शैतान और शाहेरूम के उदाहरण क्यों दिए?

उत्तरउन्होंने ये उदाहरण छोटे भाई को घमंड न करने की शिक्षा देने के लिए दिए। तीनों ही शक्तिशाली थे, पर अभिमान के कारण उनका सर्वनाश हुआ। इससे वे समझाना चाहते थे कि घमंड व्यक्ति को दीन-दुनिया दोनों से गिरा देता है।

4. छोटे भाई ने टाइम-टेबल में किसे ‘बिलकुल उड़ा’ दिया था?

उत्तरटाइम-टेबल बनाते समय छोटे भाई ने उसमें से खेल-कूद का मद बिलकुल उड़ा दिया था, अर्थात् खेल के लिए कोई समय नहीं रखा था; यद्यपि वह उस टाइम-टेबल पर अमल नहीं कर पाता था।

5. कहानी का अंत किस घटना से होता है और वह क्या प्रकट करती है?

उत्तरकहानी का अंत इस घटना से होता है कि एक कटा हुआ कनकौआ ऊपर से गुज़रता है और बड़े भाई साहब स्वयं उछलकर उसकी डोर पकड़कर बेतहाशा दौड़ पड़ते हैं। यह उनके गंभीर व्यक्तित्व के भीतर छिपे भोले, बालसुलभ मन को प्रकट करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. ‘बड़े भाई साहब’ कहानी के माध्यम से प्रेमचंद ने तत्कालीन शिक्षा-प्रणाली पर जो व्यंग्य किया है, उसे सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तरप्रेमचंद ने रटने पर टिकी, अव्यावहारिक शिक्षा-प्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया है। बड़े भाई साहब के कथनों के माध्यम से लेखक दिखाते हैं कि इतिहास में हेनरी, जेम्स, विलियम जैसे दर्जनों राजाओं के नाम और घटनाएँ रटवाई जाती हैं, जिनसे बुद्धि का कोई विकास नहीं होता।ज्यामिति में ‘अ ब स’ और ‘अ स ब’ के निरर्थक भेद पर अंक काट लिए जाते हैं और अल्जब्रा के ‘लोहे के चने’ चबवाए जाते हैं। ‘समय की पाबंदी’ जैसी एक वाक्य में कही जाने वाली बात पर चार-चार पन्नों का निबंध लिखवाना लेखक को छात्रों पर अत्याचार लगता है।इन उदाहरणों से लेखक यह संदेश देते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य रटना नहीं, बल्कि समझ और विवेक का विकास होना चाहिए। यह व्यंग्य आज भी प्रासंगिक है।

2. बड़े भाई साहब और छोटे भाई के चरित्र की तुलना कीजिए।

उत्तरबड़े भाई साहब गंभीर, अध्ययनशील, अनुशासनप्रिय और उत्तरदायित्व-भावना से भरे हैं। वे शिक्षा की बुनियाद मज़बूत करना चाहते हैं और छोटे भाई का मार्गदर्शन अपना कर्तव्य मानते हैं। ऊपर से कठोर होते हुए भी भीतर से स्नेही और भोले हैं।छोटा भाई चंचल, खेलप्रिय, स्वच्छंद और कुछ लापरवाह है। उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता, फिर भी वह स्वभाव से बुद्धिमान (ज़हीन) है और बिना अधिक मेहनत के अव्वल आ जाता है। साथ ही वह बड़े भाई का आदर भी करता है।इस प्रकार एक संयम और अनुशासन का प्रतीक है तो दूसरा सहज बालमन और स्वाभाविक प्रतिभा का – दोनों के विपरीत स्वभाव से ही कहानी रोचक बनती है।

3. इस कहानी से हमें क्या प्रेरणा/शिक्षा मिलती है?

उत्तरयह कहानी हमें सिखाती है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या तथ्य रटना नहीं, बल्कि बुद्धि एवं विवेक का विकास है।साथ ही यह बताती है कि किताबी ज्ञान से बढ़कर जीवन का व्यावहारिक अनुभव होता है, और बड़ों का अनुभव सदा आदरणीय है।बड़े-छोटे के बीच का स्नेह, बड़ों का त्याग और उत्तरदायित्व-बोध तथा घमंड से बचने का संदेश भी यह कहानी देती है। अंत में यह भी कि कठोर अनुशासन के भीतर प्रायः गहरा प्रेम छिपा रहता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. ‘बड़े भाई साहब’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) जयशंकर प्रसाद

(ख) प्रेमचंद

(ग) महादेवी वर्मा

(घ) यशपाल

2. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने साल बड़े थे?

(क) तीन साल

(ख) चार साल

(ग) पाँच साल

(घ) छह साल

3. कहानी के आरंभ में बड़े भाई साहब कौन-सी जमात (कक्षा) में पढ़ते थे?

(क) पाँचवीं

(ख) सातवीं

(ग) आठवीं

(घ) नौवीं

4. बड़े भाई साहब का सबसे पहला सवाल क्या होता था?

(क) क्या पढ़ा?

(ख) कहाँ थे?

(ग) खाना खाया?

(घ) टाइम-टेबल बनाया?

5. छोटे भाई की रुचि किसमें थी?

(क) पढ़ाई-लिखाई में

(ख) चित्रकला में

(ग) खेल-कूद में

(घ) संगीत में

6. बड़े भाई साहब के अनुसार ‘असली चीज़’ क्या है?

(क) इम्तिहान पास करना

(ख) अच्छे नंबर लाना

(ग) बुद्धि का विकास

(घ) नाम कमाना

7. बड़े भाई साहब ने घमंड के दुष्परिणाम बताने के लिए किसका उदाहरण नहीं दिया?

(क) रावण

(ख) शैतान

(ग) शाहेरूम

(घ) सिकंदर

8. ‘कनकौआ’ का अर्थ है –

(क) पक्षी

(ख) पतंग

(ग) गेंद

(घ) गुड़िया

9. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?

(क) किताबें पढ़ने से

(ख) परीक्षा पास करने से

(ग) दुनिया देखने/अनुभव से

(घ) डिग्री प्राप्त करने से

10. कहानी के अंत में बड़े भाई साहब क्या करते हैं?

(क) छोटे भाई को डाँटते हैं

(ख) पढ़ने बैठ जाते हैं

(ग) कटे कनकौए की डोर पकड़कर दौड़ पड़ते हैं

(घ) टाइम-टेबल बनाते हैं

उत्तर-कुंजी: 1→(ख), 2→(ग), 3→(घ), 4→(ख), 5→(ग), 6→(ग), 7→(घ), 8→(ख), 9→(ग), 10→(ग)

अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)

नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए –
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बड़े भाई साहब एक-एक दर्जे में दो-दो, तीन-तीन साल लगा देते थे।

कारण (R): वे शिक्षा की बुनियाद मज़बूत डालना चाहते थे।

2. अभिकथन (A): छोटा भाई टाइम-टेबल बनाकर भी उस पर अमल नहीं कर पाता था।

कारण (R): खेल-कूद का आकर्षण उसे अनायास अपनी ओर खींच ले जाता था।

3. अभिकथन (A): बड़े भाई साहब छोटे भाई के सामने खेल-कूद से स्वयं को रोकते थे।

कारण (R): उन्हें खेल-कूद बिलकुल पसंद नहीं था।

4. अभिकथन (A): छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।

कारण (R): भाई साहब ने स्नेहपूर्वक समझाया कि वे केवल उसका हित और रक्षा चाहते हैं।

5. अभिकथन (A): बड़े भाई साहब ने किताबी ज्ञान को जीवन के अनुभव से अधिक महत्त्वपूर्ण बताया।

कारण (R): उनके अनुसार समझ किताबें पढ़ने से नहीं, दुनिया देखने से आती है।

उत्तर-कुंजी: 1→(क), 2→(क), 3→(ग) [A सही, पर R गलत – उन्हें खेल पसंद था, इसीलिए अंत में स्वयं कनकौआ लूटने दौड़े], 4→(क), 5→(घ) [A गलत – उन्होंने अनुभव को अधिक महत्त्वपूर्ण कहा; R सही है]

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • आशय स्पष्ट करने वाले प्रश्नों में पहले कथन का सरल अर्थ, फिर उसका भाव और अंत में संदर्भ जोड़ें।
  • कहानी के सटीक उदाहरण (रावण-शैतान-शाहेरूम, टाइम-टेबल, कनकौआ-प्रसंग) याद रखें – ये उत्तर को सशक्त बनाते हैं।
  • 50–60 शब्दों वाले प्रश्नों में शब्द-सीमा का ध्यान रखें; अनावश्यक विस्तार से बचें।
  • व्यंग्य से जुड़े प्रश्न में ‘शिक्षा का उद्देश्य रटना नहीं, बुद्धि का विकास’ मूल बिंदु अवश्य लिखें।
  • शब्दार्थ और मुहावरों को वाक्य-प्रयोग सहित याद करें – भाषा-अध्ययन में अंक सुनिश्चित होते हैं।

सामान्य गलतियाँ

  • बड़े भाई साहब को केवल कठोर मान लेना – उनके स्नेह और त्याग की भावना का उल्लेख न करना।
  • लेखक का नाम गलत लिखना – इस कहानी के लेखक ‘प्रेमचंद’ हैं।
  • उम्र और कक्षा के अंतर में भ्रम – उम्र में पाँच साल बड़े, पर केवल तीन दर्जे आगे।
  • आशय-स्पष्टीकरण में केवल वाक्य दोहरा देना, उसका भाव न समझाना।
  • सकर्मक-अकर्मक क्रिया में कर्म की उपस्थिति/अनुपस्थिति जाँचे बिना उत्तर लिखना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘बड़े भाई साहब’ कहानी के लेखक कौन हैं?

इस कहानी के लेखक प्रेमचंद हैं, जिन्हें ‘कथा सम्राट’ भी कहा जाता है।

बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र और कक्षा में कितने बड़े थे?

वे उम्र में पाँच साल बड़े थे, परंतु पढ़ाई में केवल तीन दर्जे आगे थे – अर्थात् बड़े भाई नौवीं में और छोटा भाई पाँचवीं में पढ़ता था।

इस कहानी से क्या शिक्षा/संदेश मिलता है?

शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या रटना नहीं, बल्कि बुद्धि का विकास है; किताबी ज्ञान से बढ़कर जीवन का अनुभव है और बड़ों का अनुभव सदा आदरणीय है।

प्रश्न NCERT स्पर्श (भाग 2) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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