NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit (Shemushi) पाठः 9: भूकम्पविभीषिका

This page gives the complete solution for Class 10 Sanskrit Shemushi (शेमुषी द्वितीयो भागः) Chapter 9 ‘भूकम्पविभीषिका’ – a Sanskrit prose (गद्य) lesson describing the terrifying devastation caused by earthquakes (such as the 2001 Gujarat/Kutch and 2005 Kashmir quakes), their scientific causes, and ways to stay safe – with original पाठ-परिचय, सार (Hindi summary & भावार्थ), शब्दार्थ, and exam-ready answers to every question of the अभ्यासः along with extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs (NCERT 2026–27).

कक्षा (Class): 10 विषय (Subject): Sanskrit पुस्तक (Book): Shemushi 2 (शेमुषी द्वितीयो भागः) पाठः (Chapter): 9 पाठ-नाम: भूकम्पविभीषिका सत्र (Session): 2026–27

पाठ-परिचय (Chapter Introduction)

शेमुषी (द्वितीयो भागः) कक्षा 10 का नवम पाठ ‘भूकम्पविभीषिका’ एक गद्यात्मक पाठ है, जो हमारे वातावरण में सम्भावित प्राकृतिक प्रकोपों में से एक भूकम्प की भयावह विभीषिका को प्रकट करता है। पाठ में सन् 2001 (एकोत्तरद्विसहस्रतम ईस्वी) के गणतन्त्र-दिवस पर्व पर आए गुजरात (कच्छ-भुज) के विनाशकारी भूकम्प तथा सन् 2005 के कश्मीर-पाकिस्तान भूकम्प का सजीव वर्णन है। साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से भूकम्प के कारण – पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित विशाल शिलाओं का संघर्षण तथा ज्वालामुखी-विस्फोट – बताए गए हैं। अन्त में पाठ यह सन्देश देता है कि किसी भी आपदा में बिना घबराए, साहस एवं सावधानी से अपनी रक्षा की जा सकती है तथा पृथ्वी के पञ्चतत्त्व (क्षिति, जल, पावक, समीर, गगन) सन्तुलित रहने पर ही योग-क्षेम सम्भव है।

सार एवं भावार्थ (Summary)

प्रस्तुत पाठ ‘भूकम्पविभीषिका’ में बताया गया है कि हमारे वातावरण में सम्भावित अनेक प्रकोपों – झंझावात, भूकम्प, जलोपप्लव, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, शिला-स्खलन, भू-विदारण, ज्वालामुखी-स्फोट आदि – में भूकम्प एक प्रमुख दारुण विभीषिका है। प्रकृति में उत्पन्न होने वाली ये आपदाएँ भयावह प्रलय उत्पन्न करके मानव-जीवन को त्रस्त कर देती हैं और सुखमय जीवन को दुःखमय बना देती हैं।

लेखक सन् 2001 ईस्वी के गणतन्त्र-दिवस पर्व का वर्णन करते हैं, जब समस्त भारत राष्ट्र नृत्य-गीत-वादित्रों के उल्लास में मग्न था, तभी अकस्मात् गुजरात राज्य पर्याकुल, विपर्यस्त एवं क्रन्दन से विकल हो उठा। भूकम्प की दारुण विभीषिका ने समस्त गुर्जर-क्षेत्र, विशेषकर कच्छ-जनपद को ध्वंसावशेष में बदल दिया। भूकम्प का केन्द्र भुज नगर मिट्टी के खिलौने के समान खण्ड-खण्ड हो गया। अनेक बहुमंजिले भवन क्षण भर में धराशायी हो गए, विद्युत्-दीप-स्तम्भ उखड़ गए, सीढ़ियाँ-मार्ग विशीर्ण हो गए, भूमि दो खण्डों में बँट गई और भू-गर्भ से निकलती दुर्वार जलधाराओं से महाप्लावन का दृश्य उपस्थित हो गया। सहस्रों प्राणी क्षण भर में मृत हो गए तथा ध्वस्त भवनों में दबे हुए सहस्रों लोग सहायता के लिए करुण क्रन्दन करते रहे।

इसी प्रकार सन् 2005 ईस्वी में कश्मीर-प्रान्त एवं पाकिस्तान में भी धरती का महान् कम्पन हुआ, जिससे लाखों लोग अकाल-मृत्यु के ग्रास बन गए। पाठ में वैज्ञानिक कारण बताते हुए कहा गया है कि पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित विशाल पाषाण-शिलाएँ जब संघर्षण के कारण टूटती हैं, तब भीषण स्खलन एवं कम्पन उत्पन्न होता है, जो धरातल तक आकर महाकम्पन एवं महाविनाश का दृश्य रचता है। ज्वालामुखी-पर्वतों के विस्फोट से भी भूकम्प होता है – पृथ्वी के गर्भ की अग्नि खनिज-मिट्टी-शिलाओं को पिघलाकर लावा-रूप में बाहर निकलती है। अन्त में लेखक सन्देश देते हैं कि विज्ञान से गर्वित मानव प्रकृति के समक्ष वामन-तुल्य है; अतः बहुमंजिले भवन-निर्माण से बचना चाहिए, नदी-जल को एक ही स्थान पर पुञ्जीकृत नहीं करना चाहिए। शान्त पञ्चतत्त्व ही भूतल के योग-क्षेम के कारक हैं और अशान्त होने पर वही महाविनाश उपस्थित कर देते हैं।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
पर्याकुलम्चारों ओर से व्याकुल, बेचैनRestless all over
विपर्यस्तम्अस्तव्यस्त, उलट-पुलटDisturbed
विपन्नम्विपत्ति से युक्त, मुसीबत मेंTroubled
दारुणविभीषिकाभयंकर त्रास, अत्यधिक भयHorrendous terror
ध्वंसावशेषेषुविनाश के बाद बची हुई वस्तु मेंIn the debris/ruins
मृत्तिकाक्रीडनकमिवमिट्टी के खिलौने के समानLike a toy made of mud
बहुभूमिकानि भवनानिबहुमंजिले भवनMulti-storey buildings
उत्खाताःउखाड़े गए, उत्पाटितDemolished / uprooted
विशीर्णाःबिखर गए, विकीर्णScattered
फालद्वयेदो खण्डों मेंIn two segments
निःसरन्तीभिःनिकलती हुईOutflowing
दुर्वारःजिसको हटाना/रोकना कठिन हैDifficult to get rid of
महाप्लावनम्विशाल बाढ़Heavy flood
क्षुत्क्षामकण्ठाःभूख से दुर्बल/सूखे कण्ठ वालेThroats dried due to hunger
कालकवलिताःमृत्यु को प्राप्त हुएDead (swallowed by death)
संस्खलनम्स्थान से हटना, विचलनDislocation
क्वथयतिउबालती है, तपाती हैBoils / decocts
विदार्यफाड़कर, चीरकरTearing apart
उपशमनस्यशान्त करने काOf pacifying
वामनकल्पःबौने के समानDwarf-like
योगक्षेमाभ्याम्अप्राप्त की प्राप्ति (योग) एवं प्राप्त की रक्षा (क्षेम) के लिएProcurement & welfare

अभ्यासः के उत्तर (Exercise Solutions)

1. एकपदेन उत्तरं लिखत —

(क) कस्य दारुण-विभीषिका गुर्जरक्षेत्रं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती?

उत्तरभूकम्पस्य (भूकम्पस्य दारुण-विभीषिका)।

(ख) कीदृशानि भवनानि धराशायीनि जातानि?

उत्तरबहुभूमिकानि (बहुभूमिकानि भवनानि)।

(ग) दुर्वार-जलधाराभिः किम् उपस्थितम्?

उत्तरमहाप्लावनदृश्यम् (महाप्लावनदृश्यम् उपस्थितम्)।

(घ) कस्य उपशमनस्य स्थिरोपायः नास्ति?

उत्तरभूकम्पस्य (भूकम्पस्य उपशमनस्य)।

(ङ) कीदृशाः प्राणिनः भूकम्पेन निहन्यन्ते?

उत्तरविवशाः (विवशाः प्राणिनः)।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत —

(क) समस्तराष्ट्रं कीदृशे उल्लासे मग्नम् आसीत्?

उत्तरसमस्तराष्ट्रं नृत्य-गीत-वादित्राणाम् उल्लासे मग्नम् आसीत्।

(ख) भूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कः जनपदः आसीत्?

उत्तरभूकम्पस्य केन्द्रबिन्दुः कच्छजनपदः (भुजनगरम्) आसीत्।

(ग) पृथिव्याः स्खलनात् किं जायते?

उत्तरपृथिव्याः स्खलनात् भयावहकम्पनं (भूकम्पः) जायते।

(घ) समग्रं विश्वं कैः आतङ्कितं दृश्यते?

उत्तरसमग्रं विश्वं प्राकृतिक-आपदाभिः (भूकम्पादिभिः) आतङ्कितं दृश्यते।

(ङ) केषां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते?

उत्तरज्वालामुखी-पर्वतानां विस्फोटैरपि भूकम्पो जायते।

3. स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —

(क) भूकम्पविभीषिका विशेषेण कच्छजनपदं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती।

उत्तरभूकम्पविभीषिका विशेषेण कं ध्वंसावशेषेषु परिवर्तितवती?

(ख) वैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्याः अन्तर्गर्भे, पाषाणशिलानां संघर्षणेन कम्पनं जायते।

उत्तरवैज्ञानिकाः कथयन्ति यत् पृथिव्याः अन्तर्गर्भे, केषां संघर्षणेन कम्पनं जायते?

(ग) विवशाः प्राणिनः आकाशे पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते।

उत्तरविवशाः प्राणिनः कुत्र पिपीलिकाः इव निहन्यन्ते?

(घ) एतादृशी भयावहघटना गढवालक्षेत्रे घटिता।

उत्तरएतादृशी भयावहघटना कुत्र घटिता?

(ङ) तदिदानीम् भूकम्पकारणं विचारणीयं तिष्ठति।

उत्तरतदिदानीम् किं विचारणीयं तिष्ठति?

4. ‘भूकम्पविषये’ पञ्चवाक्यमितम् अनुच्छेदं लिखत।

उत्तर (नमूना) (1) भूमेः कम्पनं भूकम्पः कथ्यते। (2) पृथिव्याः अन्तर्गर्भे स्थिताः बृहत्यः शिलाः यदा संघर्षणवशात् त्रुट्यन्ति तदा कम्पनं जायते। (3) इदं कम्पनं तरङ्गरूपेण विविधासु दिशासु प्रसरति। (4) भूकम्पेन बहूनि भवनानि धराशायीनि भवन्ति सहस्राणि च प्राणिनः कालकवलिताः जायन्ते। (5) बहुभूमिकभवननिर्माणं परिहृत्य, पञ्चतत्त्वानां सन्तुलनं रक्षित्वा च वयम् अस्याः विभीषिकायाः रक्षां कर्तुं शक्नुमः।

5. कोष्ठकेषु दत्तेषु धातुषु निर्देशानुसारं परिवर्तनं विधाय रिक्तस्थानानि पूरयत —

उत्तर (क) समग्रं भारतम् उल्लासे मग्नम् अस्ति। (अस् + लट् लकारे) (ख) भूकम्पविभीषिका कच्छजनपदं विनष्टं कृत्वा। (कृ + क्त्वा/ल्यप् → निर्देशानुसारं ‘कृत्वा’) (ग) क्षणेनैव प्राणिनः गृहविहीनाः अभवन्। (भू + लङ्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्) (घ) शान्तानि पञ्चतत्त्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां भवन्ति (कल्पन्ते)। (भू + लट्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्) (ङ) मानवाः पृच्छन्ति यत् बहुभूमिकभवननिर्माणं करणीयम् न वा? (प्रच्छ् + लट्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्) (च) नदीवेगेन ग्रामाः तदुदरे समाविशेयुः। (सम् + आ + विश् + विधिलिङ्, प्रथम-पुरुषः बहुवचनम्)

6. सन्धिं / सन्धिविच्छेदं च कुरुत —

(अ) परसवर्णसन्धिनियमानुसारम् —

उत्तर (क) किञ्च = किम् + च (ख) नगरन्तु = नगरम् + तु (ग) विपन्नञ्च = विपन्नम् + च (घ) किन्नु = किम् + नु (ङ) भुजनगरन्तु = भुजनगरम् + तु (च) सञ्चयः = सम् + चयः

(आ) विसर्गसन्धिनियमानुसारम् —

उत्तर (क) शिशवस्तु = शिशवः + तु (ख) विस्फोटैरपि = विस्फोटैः + अपि (ग) सहस्रशोऽन्ये = सहस्रशः + अन्ये (घ) विचित्रोऽयम् = विचित्रः + अयम् (ङ) भूकम्पो जायते = भूकम्पः + जायते (च) वामनकल्प एव = वामनकल्पः + एव

7. (अ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे विलोमपदानि, तयोः संयोगं कुरुत —

‘क’ स्तम्भः‘ख’ स्तम्भः (विलोमपदम्)
सम्पन्नम्विपन्नम्
ध्वस्तभवनेषुनवनिर्मितभवनेषु
निःसरन्तीभिःप्रविशन्तीभिः
निर्मायविनाश्य
क्षणेनैवसुचिरेणैव
सही मेलनम् (उत्तर) सम्पन्नम् → विपन्नम् ध्वस्तभवनेषु → नवनिर्मितभवनेषु निःसरन्तीभिः → प्रविशन्तीभिः निर्माय → विनाश्य क्षणेनैव → सुचिरेणैव

(आ) ‘क’ स्तम्भे पदानि दत्तानि ‘ख’ स्तम्भे समानार्थकपदानि तयोः संयोगं कुरुत —

‘क’ स्तम्भः‘ख’ स्तम्भः (समानार्थकपदम्)
पर्याकुलम्व्याकुलम्
विशीर्णाःनष्टाः
उद्गिरन्तःप्रकटयन्तः
विदार्यसंत्रोट्य
प्रकुपिताम्क्रोधयुक्ताम्
सही मेलनम् (उत्तर) पर्याकुलम् → व्याकुलम् विशीर्णाः → नष्टाः उद्गिरन्तः → प्रकटयन्तः विदार्य → संत्रोट्य प्रकुपिताम् → क्रोधयुक्ताम्

8. (अ) उदाहरणम् अनुसृत्य प्रकृति-प्रत्यययोः विभागं कुरुत —

यथा – परिवर्तितवती = परि + वृत् + क्तवतु + ङीप् (स्त्री)

उत्तर (क) धृतवान् = धृ + क्तवतु (ख) हसन् = हस् + शतृ (ग) विशीर्णा = वि + शृ + क्त + टाप् (स्त्री) (घ) प्रचलन्ती = प्र + चल् + शतृ + ङीप् (स्त्री) (ङ) हतः = हन् + क्त

(आ) पाठात् विचित्य समस्तपदानि लिखत —

उत्तर (क) महत् च तत् कम्पनम् = महाकम्पनम् (ख) दारुणा च सा विभीषिका = दारुणविभीषिका (ग) ध्वस्तेषु च तेषु भवनेषु = ध्वस्तभवनेषु (घ) प्राक्तने च तस्मिन् युगे = प्राक्तनयुगे (ङ) महत् च तत् राष्ट्रं तस्मिन् = महाराष्ट्रे

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. भूकम्प किसे कहते हैं तथा यह कैसे उत्पन्न होता है?

उत्तरभूमि के कम्पन को भूकम्प कहते हैं। पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित विशाल पाषाण-शिलाएँ जब आपस में संघर्षण के कारण टूटती हैं, तब भीषण स्खलन एवं कम्पन उत्पन्न होता है, जो धरातल तक आकर महाकम्पन का रूप ले लेता है।

2. सन् 2001 में गुजरात में भूकम्प कब और किस अवसर पर आया?

उत्तरसन् 2001 ईस्वी में गणतन्त्र-दिवस पर्व (26 जनवरी) पर गुजरात में भयंकर भूकम्प आया। उस समय समस्त राष्ट्र नृत्य-गीत-वादित्रों के उल्लास में मग्न था, तभी अकस्मात् गुजरात राज्य पर्याकुल एवं विपन्न हो उठा।

3. ज्वालामुखी-विस्फोट से भूकम्प कैसे उत्पन्न होता है?

उत्तरपृथ्वी के गर्भ में स्थित अग्नि जब खनिज-मिट्टी एवं शिलाओं के संचय को पिघलाती (क्वथित करती) है, तब वह लावा बनकर धरती या पर्वत को फाड़कर बाहर निकलती है। इस विस्फोट से भीषण भूकम्प उत्पन्न होता है।

4. भूकम्प से बचने के लिए पाठ में कौन-से उपाय बताए गए हैं?

उत्तरपाठ के अनुसार बहुमंजिले भवनों का निर्माण नहीं करना चाहिए तथा बड़ी मात्रा में नदी-जल को एक ही स्थान पर एकत्र नहीं करना चाहिए। शान्त पञ्चतत्त्व ही भूतल के योग-क्षेम के कारक हैं; अतः इनका सन्तुलन बनाए रखना चाहिए।

5. पाठ का मुख्य सन्देश क्या है?

उत्तरपाठ का मुख्य सन्देश यह है कि विज्ञान से गर्वित मानव प्रकृति के समक्ष वामन-तुल्य है। किसी भी आपदा में बिना घबराए, साहस एवं सावधानी से ही हम अपनी रक्षा कर सकते हैं तथा प्रकृति के पञ्चतत्त्वों के सन्तुलन से प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सकता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. सन् 2001 के गुजरात-भूकम्प की विभीषिका का वर्णन पाठ के आधार पर कीजिए।

उत्तरसन् 2001 ईस्वी के गणतन्त्र-दिवस पर्व पर जब समस्त भारत राष्ट्र नृत्य-गीत-वादित्रों के उल्लास में मग्न था, तभी अकस्मात् गुजरात राज्य पर्याकुल, विपर्यस्त एवं क्रन्दन से विकल हो उठा। भूकम्प की दारुण विभीषिका ने समस्त गुर्जर-क्षेत्र, विशेषकर कच्छ-जनपद को ध्वंसावशेष में बदल दिया।भूकम्प का केन्द्र भुज नगर मिट्टी के खिलौने के समान खण्ड-खण्ड हो गया। अनेक बहुमंजिले भवन क्षण भर में धराशायी हो गए, विद्युत्-दीप-स्तम्भ उखड़ गए और मार्ग-सीढ़ियाँ विशीर्ण हो गईं। भूमि दो खण्डों में बँट गई तथा भू-गर्भ से निकलती दुर्वार जलधाराओं से महाप्लावन का दृश्य उपस्थित हुआ। सहस्रों प्राणी क्षण भर में मृत हो गए और ध्वस्त भवनों में दबे हुए असंख्य लोग सहायता के लिए करुण क्रन्दन करते रहे। यह कच्छ-भूकम्प की भयावह विभीषिका थी।

7. भूकम्प के वैज्ञानिक कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तरपाठ में वैज्ञानिकों के मत से भूकम्प के दो प्रमुख कारण बताए गए हैं। प्रथम, पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित विशाल पाषाण-शिलाएँ जब संघर्षण के कारण टूटती हैं, तब भीषण स्खलन (संस्खलन) एवं उससे उत्पन्न कम्पन धरातल तक आकर महाकम्पन उत्पन्न करता है, जिससे महाविनाश का दृश्य रचता है।द्वितीय कारण ज्वालामुखी-पर्वतों का विस्फोट है। पृथ्वी के गर्भ में स्थित अग्नि जब खनिज-मिट्टी एवं शिलाओं को पिघलाती है, तब वह लावा बनकर दुर्वार गति से धरती या पर्वत को फाड़कर बाहर निकलती है; तब आकाश धुएँ एवं भस्म से आवृत हो जाता है। आठ सौ डिग्री सेल्सियस ताप वाला यह लावा नदी के वेग से बहता हुआ निकटवर्ती ग्रामों-नगरों को क्षण भर में अपने उदर में समा लेता है। इन्हीं विस्फोटों से भीषण भूकम्प उत्पन्न होते हैं।

8. ‘शान्तानि एव पञ्चतत्त्वानि भूतलस्य योगक्षेमाभ्यां कल्पन्ते’ – इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस कथन का अर्थ है कि क्षिति (पृथ्वी), जल, पावक (अग्नि), समीर (वायु) एवं गगन (आकाश) – ये पाँच तत्त्व जब शान्त एवं सन्तुलित रहते हैं, तभी भूतल का योग-क्षेम अर्थात् अप्राप्त की प्राप्ति एवं प्राप्त की रक्षा सम्भव होती है।मनुष्य विज्ञान से गर्वित होकर प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करता है – बहुमंजिले भवन बनाता है, नदी-जल को एक स्थान पर पुञ्जीकृत करता है, जिससे असन्तुलन उत्पन्न होकर भूकम्प जैसी आपदाएँ आती हैं। ये ही पाँच तत्त्व जब अशान्त एवं असन्तुलित हो जाते हैं, तब महाविनाश उपस्थित कर देते हैं। अतः पाठ का सन्देश है कि मनुष्य को प्रकृति के सन्तुलन का आदर करना चाहिए और सावधानीपूर्वक जीवन जीना चाहिए, क्योंकि प्रकृति के समक्ष विज्ञान-गर्वित मानव भी वामन-तुल्य ही है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ का शीर्षक क्या है?

(क) जलोपप्लवविभीषिका

(ख) भूकम्पविभीषिका

(ग) ज्वालामुखीविभीषिका

(घ) अतिवृष्टिविभीषिका

उत्तर(ख) भूकम्पविभीषिका।

2. गुजरात का विनाशकारी भूकम्प किस वर्ष आया था?

(क) 2000 ईस्वी

(ख) 2001 ईस्वी

(ग) 2004 ईस्वी

(घ) 2005 ईस्वी

उत्तर(ख) 2001 ईस्वी। (गणतन्त्र-दिवस पर्व पर)

3. भूकम्प का केन्द्र (केन्द्रभूत) कौन-सा नगर था?

(क) अहमदाबादम्

(ख) भुजनगरम्

(ग) सुरतनगरम्

(घ) राजकोटनगरम्

उत्तर(ख) भुजनगरम्।

4. ‘दुर्वारः’ शब्द का अर्थ है —

(क) सरलता से दूर होने वाला

(ख) जिसको रोकना कठिन है

(ग) मधुर

(घ) शान्त

उत्तर(ख) जिसको रोकना कठिन है।

5. भुजनगरम् किसके समान खण्ड-खण्ड हो गया?

(क) काष्ठक्रीडनकमिव

(ख) मृत्तिकाक्रीडनकमिव

(ग) लोहक्रीडनकमिव

(घ) प्रस्तरक्रीडनकमिव

उत्तर(ख) मृत्तिकाक्रीडनकमिव। (मिट्टी के खिलौने के समान)

6. कश्मीर-पाकिस्तान का महान् भूकम्प किस वर्ष आया?

(क) 2001 ईस्वी

(ख) 2003 ईस्वी

(ग) 2005 ईस्वी

(घ) 2007 ईस्वी

उत्तर(ग) 2005 ईस्वी।

7. भूकम्प का मुख्य वैज्ञानिक कारण क्या है?

(क) पाषाण-शिलाओं का संघर्षण

(ख) वर्षा का अभाव

(ग) वायु का वेग

(घ) सूर्य का ताप

उत्तर(क) पाषाण-शिलाओं का संघर्षण।

8. प्रकृति के समक्ष विज्ञान-गर्वित मानव किसके समान है?

(क) सिंहतुल्यः

(ख) वामनकल्पः

(ग) गजतुल्यः

(घ) मेरुतुल्यः

उत्तर(ख) वामनकल्पः। (बौने के समान)

9. कौन-से पाँच तत्त्व भूतल के योग-क्षेम के कारक हैं?

(क) क्षिति, जल, पावक, समीर, गगन

(ख) पृथ्वी, चन्द्र, सूर्य, नक्षत्र, ग्रह

(ग) धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, यश

(घ) सत्त्व, रज, तम, बुद्धि, अहंकार

उत्तर(क) क्षिति, जल, पावक, समीर, गगन।

10. पाठ के अनुसार किस प्रकार के भवन-निर्माण से बचना चाहिए?

(क) एकभूमिकभवन

(ख) बहुभूमिकभवन

(ग) मृत्तिकाभवन

(घ) काष्ठभवन

उत्तर(ख) बहुभूमिकभवन। (बहुमंजिले भवन)
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ग), 7-(क), 8-(ख), 9-(क), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): सन् 2001 ईस्वी में गुजरात राज्य भूकम्प से विपन्न हो गया।

कारण (R): भूकम्प की दारुण विभीषिका ने कच्छ-जनपद को ध्वंसावशेष में बदल दिया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पृथ्वी के अन्तर्गर्भ की शिलाओं के संघर्षण से भूकम्प उत्पन्न होता है।

कारण (R): भूकम्प केवल ज्वालामुखी-विस्फोट से ही उत्पन्न होता है, अन्य किसी कारण से नहीं।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – शिला-संघर्षण एवं ज्वालामुखी-विस्फोट दोनों भूकम्प के कारण हैं।

3. अभिकथन (A): बहुमंजिले भवनों का निर्माण नहीं करना चाहिए।

कारण (R): असन्तुलन के कारण ऐसे भवन भूकम्प में शीघ्र धराशायी हो जाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): विज्ञान से गर्वित मानव प्रकृति के समक्ष वामन-तुल्य है।

कारण (R): भूकम्प के उपशमन का कोई स्थिर उपाय दिखाई नहीं देता।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): शान्त पञ्चतत्त्व भूतल के योग-क्षेम के कारक हैं।

कारण (R): अशान्त होने पर वही पञ्चतत्त्व महाविनाश उपस्थित कर देते हैं।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, किन्तु R, A की सीधी व्याख्या नहीं है (यह विपरीत स्थिति का कथन है)।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ (Exam Tips)

  • दोनों भूकम्पों के वर्ष याद रखें – गुजरात/कच्छ (2001) एवं कश्मीर-पाकिस्तान (2005)।
  • भूकम्प के दो वैज्ञानिक कारण (शिला-संघर्षण एवं ज्वालामुखी-विस्फोट) क्रमबद्ध रूप से लिखें।
  • शब्दार्थ हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें – दुर्वारः, वामनकल्पः, क्षुत्क्षामकण्ठाः, योगक्षेमाभ्याम् आदि।
  • सन्धि-विच्छेद में परसवर्ण (किम् + च = किञ्च) एवं विसर्ग-सन्धि (भूकम्पः + जायते = भूकम्पो जायते) के नियम स्पष्ट रखें।
  • प्रश्न-निर्माण में स्थूल पद के अनुसार सही प्रश्नवाचक (कः/किम्/केषाम्/कुत्र) चुनें।

सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)

  • संयुक्ताक्षर लिखने में भूल – ‘भूकम्पः’, ‘ध्वंसावशेषेषु’, ‘सञ्चयः’ शुद्ध लिखें।
  • 2001 एवं 2005 के भूकम्पों के स्थान (गुजरात/कश्मीर) को आपस में बदल देना।
  • पञ्चतत्त्वों के नाम भूल जाना – क्षिति, जल, पावक, समीर, गगन।
  • योगक्षेम का अर्थ गलत लिखना – योग = अप्राप्त की प्राप्ति, क्षेम = प्राप्त की रक्षा।
  • एकपदेन उत्तर में पूरा वाक्य लिख देना तथा संस्कृत-वाक्य में विभक्ति की त्रुटि करना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शेमुषी कक्षा 10 का नवम पाठ ‘भूकम्पविभीषिका’ किस विषय पर आधारित है?

यह एक गद्य पाठ है, जो भूकम्प की भयावह विभीषिका पर आधारित है। इसमें सन् 2001 के गुजरात (कच्छ-भुज) एवं सन् 2005 के कश्मीर-पाकिस्तान भूकम्प, भूकम्प के वैज्ञानिक कारण तथा बचाव के उपायों का वर्णन है।

पाठ के अनुसार भूकम्प के मुख्य कारण क्या हैं?

भूकम्प के दो मुख्य कारण हैं – (1) पृथ्वी के अन्तर्गर्भ में स्थित विशाल पाषाण-शिलाओं का संघर्षण एवं उससे उत्पन्न स्खलन-कम्पन, तथा (2) ज्वालामुखी-पर्वतों का विस्फोट, जिसमें लावा धरती को फाड़कर बाहर निकलता है।

पाठ हमें क्या सन्देश देता है?

पाठ का सन्देश है कि प्रकृति के समक्ष विज्ञान-गर्वित मानव वामन-तुल्य है। बहुमंजिले भवन-निर्माण एवं असन्तुलन से बचकर तथा पञ्चतत्त्वों का सन्तुलन बनाए रखकर ही हम आपदाओं से सुरक्षित रह सकते हैं; किसी भी आपदा में बिना घबराए, साहस से अपनी रक्षा करनी चाहिए।

पाठ-शीर्षक एवं अभ्यासः-प्रश्न NCERT शेमुषी (द्वितीयो भागः) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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