कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 1 – मातृभूमि (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 1 ‘मातृभूमि’ (कवि – सोहनलाल द्विवेदी) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, सार, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, अनुमान या कल्पना से आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवि परिचय – सोहनलाल द्विवेदी
- कविता (मूल पाठ)
- कविता का सार
- भावार्थ
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- कविता की रचना
- मिलान (मिलते-जुलते भाव)
- अनुमान या कल्पना से
- शब्दों के रूप
- थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान
- पाठ से आगे (आपकी बात, वंशी-से, आज की पहेली आदि)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – सोहनलाल द्विवेदी
सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हिंदी के प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय कवियों में से एक थे। उनका जन्म लगभग सवा सौ वर्ष पूर्व उस समय हुआ था जब भारत पर अंग्रेज़ों का आधिपत्य था। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण लेखनी से अंग्रेज़ी शासन का विरोध किया और लोगों के मन में देश-प्रेम की भावना जगाई। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय ‘देशभक्ति’ था तथा भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी कुछ चर्चित रचनाएँ हैं – ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ तथा ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ आदि। बाल-कविताएँ लिखने में भी उन्हें विशेष महारत प्राप्त थी।
कविता (मूल पाठ)
‘मातृभूमि’ एक देश-प्रेम की कविता है जिसमें कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता, गौरवशाली इतिहास एवं महापुरुषों का स्मरण करते हुए अपनी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा एवं प्रेम प्रकट करते हैं।
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुन त्रिवेणी,
नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली,
पग पग छहर रही हैं।
वह पुण्य-भूमि मेरी,
वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी॥
झरने अनेक झरते,
जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,
हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं,
कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी॥
जन्मे जहाँ थे रघुपति,
जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी,
वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी॥
— सोहनलाल द्विवेदी
कविता का सार
‘मातृभूमि’ कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी ने अपनी मातृभूमि भारत का गौरवपूर्ण एवं सुंदर वर्णन किया है। कविता के आरंभ में कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता का चित्र खींचते हैं – उत्तर में ऊँचा हिमालय पर्वत खड़ा है, जो मानो आकाश को चूम रहा है, और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) सदा लहरों के साथ झूमता रहता है। गंगा, यमुना एवं त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहराती हुई बहती हैं और देश की निराली छटा (शोभा) पग-पग पर बिखरी रहती है।
कवि इस भूमि को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि एवं मातृभूमि कहकर इसकी महिमा का बखान करते हैं। पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहचहाती हैं, घने आम के बाग़ (अमराइयाँ) हैं जिनमें कोयल कूकती है तथा दक्षिण से आने वाली शीतल एवं सुगंधित मलय पवन सबके तन-मन को सँवार देती है। यह भूमि धर्मभूमि एवं कर्मभूमि दोनों है।
आगे कवि भारत के गौरवशाली इतिहास एवं महापुरुषों का स्मरण करते हैं – यहीं श्रीराम (रघुपति) ने जन्म लिया, यहीं सीता जन्मीं, यहीं श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से पवित्र गीता का संदेश सुनाया और यहीं गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर इस भूमि का यश बढ़ाया तथा संसार को दया एवं अहिंसा का मार्ग दिखाया। इस प्रकार यह भूमि वीरों की युद्ध-भूमि भी है और बुद्ध की करुणामयी बुद्ध-भूमि भी। पूरी कविता में “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” पंक्ति बार-बार दोहराई गई है, जिससे कवि का अपनी मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा का भाव प्रकट होता है। कविता का मूल संदेश यही है कि हमें अपनी मातृभूमि की सुंदरता एवं गौरव पर गर्व होना चाहिए और उससे सच्चा प्रेम करना चाहिए।
भावार्थ
पहला अंश (हिमालय एवं नदियाँ): कवि कहते हैं कि उनकी मातृभूमि के उत्तर में ऊँचा हिमालय पर्वत इस प्रकार खड़ा है मानो वह आकाश को चूम रहा हो, और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) सदा लहरों के साथ झूमता रहता है। गंगा, यमुना एवं त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहराती हुई बहती हैं और देश की अनूठी, जगमगाती छटा हर कदम पर बिखरी हुई है। यही पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि एवं मातृभूमि कवि को अत्यंत प्रिय है।
दूसरा अंश (झरने, चिड़ियाँ एवं अमराइयाँ): इस भूमि की पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहचहाती हैं। घने आम के बाग़ हैं जिनमें कोयल कूकती है तथा दक्षिण के मलय पर्वत से आने वाली शीतल एवं सुगंधित पवन बहकर सबके तन-मन को प्रसन्न एवं सँवार देती है। यह धर्म एवं कर्म दोनों की भूमि है।
तीसरा अंश (महापुरुषों का स्मरण): कवि गर्व से कहते हैं कि इसी भूमि पर श्रीराम (रघुपति) ने जन्म लिया, यहीं सीता जन्मीं और यहीं श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी के स्वर में पवित्र गीता का उपदेश सुनाया। यहीं गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर इस भूमि का यश बढ़ाया, संसार को दया एवं करुणा सिखाई तथा अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का प्रकाश (दिया) दिखाया। इसलिए यह भूमि वीरों की युद्ध-भूमि भी है और महात्मा बुद्ध की बुद्ध-भूमि भी – यही कवि की प्यारी मातृभूमि एवं जन्मभूमि है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हिमालय | भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला |
| चूमना | स्पर्श करना; यहाँ बहुत ऊँचा होना |
| चरण तले | पैरों के नीचे |
| सिंधु | समुद्र; एक नदी का नाम भी |
| नित | हमेशा, प्रतिदिन |
| त्रिवेणी | तीन नदियों का संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) |
| छटा | शोभा, सुंदरता |
| निराली | अनूठी, विशेष |
| पग-पग | हर कदम पर |
| छहर रही हैं | बिखर रही हैं, छिटक रही हैं |
| पुण्य-भूमि | पवित्र भूमि |
| स्वर्ण-भूमि | सोने जैसी समृद्ध भूमि |
| अमराइयाँ | आम के घने बाग़ |
| मलय पवन | दक्षिण के मलय पर्वत से आने वाली शीतल सुगंधित वायु |
| सँवारती है | सजाती है, प्रसन्न करती है |
| रघुपति | श्रीराम (रघुकुल के स्वामी) |
| वंशी | बाँसुरी |
| पुनीत | पवित्र |
| सुयश | अच्छी कीर्ति, यश |
| दिया | दीपक; यहाँ ज्ञान का प्रकाश |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
• चरण
• वंशी
• हिमालय
• सिंधु
(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से—
• भारत की प्रशंसा की गई है।
• भारत के महापुरुषों की जय की गई है।
• भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
• भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. हिमालय | भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला। |
| 2. त्रिवेणी | तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम। |
| 3. मलय पवन | दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु। |
| 4. सिंधु | समुद्र, एक नदी का नाम। |
| 5. गंगा-यमुना | भारत की प्रसिद्ध नदियाँ। |
| 6. रघुपति | श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र। |
| 7. श्रीकृष्ण | वसुदेव के पुत्र वासुदेव। |
| 8. सीता | जनक की पुत्री जानकी। |
| 9. गीता | प्रसिद्ध एवं प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, जिसमें महाभारत में श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के संवाद हैं। |
| 10. गौतम बुद्ध | एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।”
सोच-विचार के लिए
(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर लिखिए।
1. कोयल कहाँ रहती है?
2. तन-मन कौन सँवारती है?
3. झरने कहाँ से झरते हैं?
4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
(ख) “नदियाँ लहर रही हैं / पग पग छहर रही हैं” — ‘लहर’ का अर्थ है पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश; ‘छहर’ का अर्थ है बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना। कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए—
• कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?
• किसका पानी लहर रहा है?
कविता की रचना
“गंगा यमुन त्रिवेणी / नदियाँ लहर रही हैं” — यहाँ ‘यमुन’ शब्द ‘यमुना’ नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय एवं सौंदर्य बढ़ाने के लिए शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। कविता को ध्यान से पढ़कर आपको और भी विशेषताएँ दिखाई देंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें लिखिए।
मिलान (मिलते-जुलते भाव)
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को जोड़िए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (मिलता-जुलता भाव) |
|---|---|
| 1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी। | मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है। |
| 2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में। | वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं। |
| 3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है। | यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं। |
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) “अमराइयाँ घनी हैं / कोयल पुकारती है” — कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
(ख) “बहती मलय पवन है / तन मन सँवारती है” — पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
शब्दों के रूप
(क) शब्द-युग्म के अर्थ
“जगमग छटा निराली / पग पग छहर रही हैं” – इन पंक्तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए—
| शब्द-युग्म | अर्थ |
|---|---|
| घर-घर | हर घर में, प्रत्येक घर में |
| बाल-बाल | एक-एक बाल; यहाँ ‘पूरी तरह’/‘बहुत निकट से’ (जैसे ‘बाल-बाल बचना’) |
| साँस-साँस | हर साँस में, प्रत्येक साँस के साथ |
| देश-देश | हर देश में, प्रत्येक देश में |
| पर्वत-पर्वत | हर पर्वत पर, प्रत्येक पर्वत पर |
(ख) ‘भूमि’ से नए शब्द
“वह युद्ध-भूमि मेरी / वह बुद्ध-भूमि मेरी” – कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए। (संकेत— तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)
| नया शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तपोभूमि | तपस्या करने का स्थान |
| देवभूमि | देवताओं की भूमि; जैसे हिमालय का प्रदेश |
| जन्मभूमि | जहाँ किसी ने जन्म लिया हो |
| कर्मभूमि | कर्म/परिश्रम करने का स्थान |
| कर्तव्यभूमि | कर्तव्य निभाने का स्थान |
| मरुभूमि | रेगिस्तान, बालू से भरी भूमि |
| रणभूमि | युद्ध का मैदान |
| यज्ञभूमि | यज्ञ करने का पवित्र स्थान |
थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान
“जग को दया सिखाई / जग को दिया दिखाया” – ‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, पर इस अंतर से अर्थ पूरी तरह बदल गया है। ऐसे ही कुछ शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए। (संकेत— प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)
(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?
वंशी-से (वाद्यों का शब्द-जाल)
“श्रीकृष्ण ने सुनाई / वंशी पुनीत गीता” – ‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला वाद्य है। नीचे फूँककर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के नाम शब्द-जाल से खोजिए।
आज की पहेली (अक्षरों से शब्द बनाना)
नीचे कुछ अक्षर दिए गए हैं। इन्हें मिलाकर (क्रम बदलकर एवं उपयुक्त मात्रा लगाकर) कोई सार्थक शब्द बनाइए। पहला शब्द उदाहरण के रूप में दिया गया है।
| क्रम | अक्षर | सार्थक शब्द |
|---|---|---|
| 1 | स म ह ग र | महासागर |
| 2 | ह म य ल | हिमालय |
| 3 | ग ग | गंगा |
| 4 | भ त र | भारत |
| 5 | ल क य | कोयल |
| 6 | व न प | पवन |
झरोखे से (वंदे मातरम्)
आप अपने विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ गाते होंगे। यह बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया है और स्वतंत्रता की लड़ाई में प्रेरणा का स्रोत रहा है। इसका अर्थ समझिए।
साझी समझ (मातृभूमि एवं वंदे मातरम् की तुलना)
‘मातृभूमि’ कविता एवं ‘वंदे मातरम्’ में कौन-सी बातें एक जैसी हैं और कौन-सी अलग?
खोजबीन के लिए
पाठ से संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक के क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता कौन हैं और उनकी लेखनी का प्रिय विषय क्या था?
2. कवि ने अपनी मातृभूमि के लिए कौन-कौन से नाम (भूमि) प्रयुक्त किए हैं?
3. हिमालय का वर्णन कवि ने किस प्रकार किया है?
4. कविता में किन-किन महापुरुषों का उल्लेख हुआ है?
5. मलय पवन की क्या विशेषता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘मातृभूमि’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. कविता के आधार पर बताइए कि भारत में प्राकृतिक सुंदरता एवं सांस्कृतिक गौरव किस प्रकार एक साथ दिखाई देते हैं?
8. इस कविता में बार-बार दोहराई गई पंक्ति का क्या महत्त्व है? समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) माखनलाल चतुर्वेदी
(ख) सोहनलाल द्विवेदी
(ग) सुभद्रा कुमारी चौहान
(घ) बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय
2. कविता के अनुसार हिमालय किसे चूमता है?
(क) समुद्र को
(ख) नदियों को
(ग) आकाश को
(घ) पहाड़ियों को
3. ‘सिंधु’ शब्द का अर्थ है—
(क) पर्वत
(ख) समुद्र
(ग) वन
(घ) आकाश
4. कविता में आम के घने बाग़ों के लिए कौन-सा शब्द आया है?
(क) झाड़ियाँ
(ख) पहाड़ियाँ
(ग) अमराइयाँ
(घ) त्रिवेणी
5. तन-मन को कौन सँवारती है?
(क) कोयल
(ख) मलय पवन
(ग) गंगा-यमुना
(घ) झरने
6. श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से क्या सुनाया था?
(क) रामायण
(ख) वेद
(ग) पुनीत गीता
(घ) उपनिषद
7. ‘रघुपति’ किसका नाम है?
(क) श्रीकृष्ण
(ख) श्रीराम
(ग) गौतम बुद्ध
(घ) लक्ष्मण
8. गौतम बुद्ध ने संसार को क्या सिखाया?
(क) युद्ध करना
(ख) दया एवं करुणा
(ग) व्यापार करना
(घ) खेती करना
9. कविता में बार-बार दोहराई गई पंक्ति कौन-सी है?
(क) ऊँचा खड़ा हिमालय
(ख) झरने अनेक झरते
(ग) वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी
(घ) अमराइयाँ घनी हैं
10. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति का भय
(ख) मातृभूमि के प्रति प्रेम एवं गर्व
(ग) हास्य
(घ) मित्रता
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ‘मातृभूमि’ कविता देश-प्रेम की कविता है।
कारण (R): कवि अपनी मातृभूमि की सुंदरता एवं गौरव का वर्णन कर उसके प्रति प्रेम प्रकट करते हैं।
2. अभिकथन (A): कविता में ‘सिंधु’ शब्द हिमालय पर्वत के लिए आया है।
कारण (R): ‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र होता है।
3. अभिकथन (A): इस भूमि को ‘बुद्ध-भूमि’ भी कहा गया है।
कारण (R): इसी भूमि पर गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को दया का मार्ग दिखाया।
4. अभिकथन (A): मलय पवन सबके तन-मन को सँवारती है।
कारण (R): मलय पवन शीतल एवं सुगंधित होती है, जो ताज़गी एवं आनंद प्रदान करती है।
5. अभिकथन (A): कविता में “वह मातृभूमि मेरी” पंक्ति केवल एक बार आई है।
कारण (R): इस पंक्ति की पुनरावृत्ति से कविता में लय एवं भाव-प्रभाव बढ़ता है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- कविता की मुख्य टेक “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” तथा कवि का नाम (सोहनलाल द्विवेदी) अवश्य याद रखें।
- कठिन शब्दों के अर्थ – सिंधु (समुद्र), अमराइयाँ (आम के बाग़), मलय पवन, रघुपति, पुनीत – उदाहरण सहित लिखें।
- भावार्थ लिखते समय प्रकृति-वर्णन तथा महापुरुषों के स्मरण – दोनों पक्षों को शामिल करें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘सिंधु’ को नदी या पर्वत समझ लेना – यहाँ इसका अर्थ समुद्र (हिंद महासागर) है।
- ‘रघुपति’ को श्रीकृष्ण समझ लेना – रघुपति श्रीराम का नाम है।
- ‘दया’ एवं ‘दिया’ जैसे एक-मात्रा-भिन्न शब्दों को एक समझ लेना – इनके अर्थ भिन्न हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मातृभूमि’ कविता के कवि कौन हैं?
‘मातृभूमि’ कविता के कवि सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हैं, जो देशभक्ति की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘मातृभूमि’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव अपनी मातृभूमि भारत के प्रति प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा है। कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता एवं गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हैं।
कविता में ‘सिंधु’ शब्द किसके लिए आया है?
‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र है। कविता में यह हिमालय के चरणों के नीचे लहराते हुए महासागर (हिंद महासागर) के लिए आया है।
कविता में किन महापुरुषों का उल्लेख हुआ है?
कविता में श्रीराम (रघुपति), सीता, श्रीकृष्ण एवं गौतम बुद्ध का उल्लेख हुआ है, जिन्होंने इसी भूमि पर जन्म लेकर इसका यश बढ़ाया।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
