कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 1 – मातृभूमि (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 1 ‘मातृभूमि’ (कवि – सोहनलाल द्विवेदी) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, सार, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, अनुमान या कल्पना से आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 1 कवि: सोहनलाल द्विवेदी विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – सोहनलाल द्विवेदी

सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हिंदी के प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय कवियों में से एक थे। उनका जन्म लगभग सवा सौ वर्ष पूर्व उस समय हुआ था जब भारत पर अंग्रेज़ों का आधिपत्य था। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण लेखनी से अंग्रेज़ी शासन का विरोध किया और लोगों के मन में देश-प्रेम की भावना जगाई। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय ‘देशभक्ति’ था तथा भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था। उनकी कुछ चर्चित रचनाएँ हैं – ‘बढ़े चलो, बढ़े चलो’ तथा ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ आदि। बाल-कविताएँ लिखने में भी उन्हें विशेष महारत प्राप्त थी।

कविता (मूल पाठ)

‘मातृभूमि’ एक देश-प्रेम की कविता है जिसमें कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता, गौरवशाली इतिहास एवं महापुरुषों का स्मरण करते हुए अपनी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा एवं प्रेम प्रकट करते हैं।

ऊँचा खड़ा हिमालय,
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है।

गंगा यमुन त्रिवेणी,
नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली,
पग पग छहर रही हैं।

वह पुण्य-भूमि मेरी,
वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी॥

झरने अनेक झरते,
जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,
हो मस्त झाड़ियों में।

अमराइयाँ घनी हैं,
कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।

वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी॥

जन्मे जहाँ थे रघुपति,
जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।

गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।

वह युद्ध-भूमि मेरी,
वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी॥

— सोहनलाल द्विवेदी

कविता का सार

‘मातृभूमि’ कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी ने अपनी मातृभूमि भारत का गौरवपूर्ण एवं सुंदर वर्णन किया है। कविता के आरंभ में कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता का चित्र खींचते हैं – उत्तर में ऊँचा हिमालय पर्वत खड़ा है, जो मानो आकाश को चूम रहा है, और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) सदा लहरों के साथ झूमता रहता है। गंगा, यमुना एवं त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहराती हुई बहती हैं और देश की निराली छटा (शोभा) पग-पग पर बिखरी रहती है।

कवि इस भूमि को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि एवं मातृभूमि कहकर इसकी महिमा का बखान करते हैं। पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहचहाती हैं, घने आम के बाग़ (अमराइयाँ) हैं जिनमें कोयल कूकती है तथा दक्षिण से आने वाली शीतल एवं सुगंधित मलय पवन सबके तन-मन को सँवार देती है। यह भूमि धर्मभूमि एवं कर्मभूमि दोनों है।

आगे कवि भारत के गौरवशाली इतिहास एवं महापुरुषों का स्मरण करते हैं – यहीं श्रीराम (रघुपति) ने जन्म लिया, यहीं सीता जन्मीं, यहीं श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से पवित्र गीता का संदेश सुनाया और यहीं गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर इस भूमि का यश बढ़ाया तथा संसार को दया एवं अहिंसा का मार्ग दिखाया। इस प्रकार यह भूमि वीरों की युद्ध-भूमि भी है और बुद्ध की करुणामयी बुद्ध-भूमि भी। पूरी कविता में “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” पंक्ति बार-बार दोहराई गई है, जिससे कवि का अपनी मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा का भाव प्रकट होता है। कविता का मूल संदेश यही है कि हमें अपनी मातृभूमि की सुंदरता एवं गौरव पर गर्व होना चाहिए और उससे सच्चा प्रेम करना चाहिए।

भावार्थ

पहला अंश (हिमालय एवं नदियाँ): कवि कहते हैं कि उनकी मातृभूमि के उत्तर में ऊँचा हिमालय पर्वत इस प्रकार खड़ा है मानो वह आकाश को चूम रहा हो, और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) सदा लहरों के साथ झूमता रहता है। गंगा, यमुना एवं त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहराती हुई बहती हैं और देश की अनूठी, जगमगाती छटा हर कदम पर बिखरी हुई है। यही पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि एवं मातृभूमि कवि को अत्यंत प्रिय है।

दूसरा अंश (झरने, चिड़ियाँ एवं अमराइयाँ): इस भूमि की पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं, झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहचहाती हैं। घने आम के बाग़ हैं जिनमें कोयल कूकती है तथा दक्षिण के मलय पर्वत से आने वाली शीतल एवं सुगंधित पवन बहकर सबके तन-मन को प्रसन्न एवं सँवार देती है। यह धर्म एवं कर्म दोनों की भूमि है।

तीसरा अंश (महापुरुषों का स्मरण): कवि गर्व से कहते हैं कि इसी भूमि पर श्रीराम (रघुपति) ने जन्म लिया, यहीं सीता जन्मीं और यहीं श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी के स्वर में पवित्र गीता का उपदेश सुनाया। यहीं गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर इस भूमि का यश बढ़ाया, संसार को दया एवं करुणा सिखाई तथा अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का प्रकाश (दिया) दिखाया। इसलिए यह भूमि वीरों की युद्ध-भूमि भी है और महात्मा बुद्ध की बुद्ध-भूमि भी – यही कवि की प्यारी मातृभूमि एवं जन्मभूमि है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला
चूमनास्पर्श करना; यहाँ बहुत ऊँचा होना
चरण तलेपैरों के नीचे
सिंधुसमुद्र; एक नदी का नाम भी
नितहमेशा, प्रतिदिन
त्रिवेणीतीन नदियों का संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती)
छटाशोभा, सुंदरता
निरालीअनूठी, विशेष
पग-पगहर कदम पर
छहर रही हैंबिखर रही हैं, छिटक रही हैं
पुण्य-भूमिपवित्र भूमि
स्वर्ण-भूमिसोने जैसी समृद्ध भूमि
अमराइयाँआम के घने बाग़
मलय पवनदक्षिण के मलय पर्वत से आने वाली शीतल सुगंधित वायु
सँवारती हैसजाती है, प्रसन्न करती है
रघुपतिश्रीराम (रघुकुल के स्वामी)
वंशीबाँसुरी
पुनीतपवित्र
सुयशअच्छी कीर्ति, यश
दियादीपक; यहाँ ज्ञान का प्रकाश

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?

• चरण

• वंशी

• हिमालय

• सिंधु

उत्तर★ सिंधु।‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र होता है। कविता में “नित सिंधु झूमता है” पंक्ति में हिमालय के चरणों के नीचे लहराते हुए महासागर (हिंद महासागर) के लिए ‘सिंधु’ शब्द आया है।

(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से—

• भारत की प्रशंसा की गई है।

• भारत के महापुरुषों की जय की गई है।

• भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।

• भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।

उत्तर★ भारत की प्रशंसा की गई है तथा ★ भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।पूरी कविता में कवि अपनी मातृभूमि भारत की प्रशंसा करते हैं और साथ ही हिमालय, नदियों, झरनों, अमराइयों एवं मलय पवन के माध्यम से उसकी प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हैं। महापुरुषों का स्मरण भी इसी प्रशंसा का अंग है, इसलिए मुख्य भाव भारत की प्रशंसा एवं प्राकृतिक सुंदरता ही है।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। हमने उत्तर कविता के शब्दों एवं भावों के आधार पर चुने – जैसे ‘सिंधु’ शब्द का अर्थ समुद्र होने के कारण वह हिंद महासागर का सूचक है, तथा पूरी कविता भारत की प्रशंसा एवं उसकी प्राकृतिक सुंदरता के वर्णन से भरी हुई है।मित्रों से चर्चा करने पर सबके तर्क सामने आते हैं; इससे हम एक-दूसरे की दृष्टि समझ पाते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।

शब्दसही अर्थ या संदर्भ
1. हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
2. त्रिवेणीतीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
3. मलय पवनदक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
4. सिंधुसमुद्र, एक नदी का नाम।
5. गंगा-यमुनाभारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
6. रघुपतिश्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
7. श्रीकृष्णवसुदेव के पुत्र वासुदेव।
8. सीताजनक की पुत्री जानकी।
9. गीताप्रसिद्ध एवं प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, जिसमें महाभारत में श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के संवाद हैं।
10. गौतम बुद्धएक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।
सही मिलान1 → भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।2 → तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।3 → मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।4 → समुद्र, एक नदी का नाम।5 → भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।6 → श्री रामचंद्र, दशरथ के पुत्र।7 → वसुदेव के पुत्र वासुदेव (श्रीकृष्ण)।8 → जनक की पुत्री जानकी।9 → प्राचीन ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता।10 → बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महापुरुष।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में कवि अपनी मातृभूमि की दो विशेषताएँ एक साथ बताते हैं – यह भूमि ‘युद्ध-भूमि’ है, अर्थात् यहाँ अनेक वीरों ने देश की रक्षा के लिए संघर्ष किया; और यह ‘बुद्ध-भूमि’ भी है, अर्थात् इसी भूमि पर गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को दया, करुणा एवं अहिंसा का संदेश दिया।तात्पर्य यह है कि भारत में वीरता एवं करुणा दोनों का अनूठा संगम है। कवि गर्व से कहते हैं कि ऐसी महान भूमि ही उनकी मातृभूमि एवं जन्मभूमि है, इसलिए वे इसे बार-बार ‘मेरी’ कहकर अपना गहरा प्रेम एवं अपनापन प्रकट करते हैं।

सोच-विचार के लिए

(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर लिखिए।

1. कोयल कहाँ रहती है?

उत्तरकोयल घने आम के बाग़ों (अमराइयों) में रहती है। कविता में आया है – “अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।”

2. तन-मन कौन सँवारती है?

उत्तरदक्षिण के मलय पर्वत से बहकर आने वाली शीतल एवं सुगंधित मलय पवन सबके तन-मन को सँवारती (प्रसन्न करती) है।

3. झरने कहाँ से झरते हैं?

उत्तरझरने भारत की पहाड़ियों से झरते हैं। कविता में आया है – “झरने अनेक झरते, जिसकी पहाड़ियों में।”

4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?

उत्तरश्रीकृष्ण ने अपनी वंशी (बाँसुरी) के स्वर में पवित्र गीता का उपदेश (श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश) सुनाया था।

5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया?

उत्तरगौतम बुद्ध ने इस भूमि (अपनी मातृभूमि भारत) में जन्म लेकर उसका सुयश (कीर्ति) बढ़ाया और संसार को दया एवं ज्ञान का मार्ग दिखाया।

(ख) “नदियाँ लहर रही हैं / पग पग छहर रही हैं” — ‘लहर’ का अर्थ है पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश; ‘छहर’ का अर्थ है बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना। कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए—

• कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?

उत्तरकविता के अनुसार जगमगाती निराली छटा पग-पग पर, अर्थात् देश के कोने-कोने में बिखरी हुई है – नदियों के किनारों, पहाड़ियों, झरनों, अमराइयों एवं हरे-भरे प्रदेशों में सर्वत्र यह सुंदर छटा छहर रही है।

• किसका पानी लहर रहा है?

उत्तरगंगा, यमुना एवं त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियों का पानी लहरा रहा है; साथ ही हिमालय के चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) का जल भी लहरों के रूप में झूम रहा है।

कविता की रचना

“गंगा यमुन त्रिवेणी / नदियाँ लहर रही हैं” — यहाँ ‘यमुन’ शब्द ‘यमुना’ नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय एवं सौंदर्य बढ़ाने के लिए शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। कविता को ध्यान से पढ़कर आपको और भी विशेषताएँ दिखाई देंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें लिखिए।

उत्तर (कुछ विशेषताएँ)शीर्षक: सबसे ऊपर कविता का एक शीर्षक ‘मातृभूमि’ दिया गया है, जो पूरी कविता के मुख्य भाव को व्यक्त करता है।शब्दों में परिवर्तन: लय बनाए रखने के लिए कवि ने ‘यमुना’ को ‘यमुन’ कर दिया है।टेक/आवृत्ति: “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” पंक्ति बार-बार दोहराई गई है, जिससे कविता में लय एवं प्रभाव बढ़ता है।तुक: ‘झूमता है–चूमता है’, ‘निराली–पहाड़ियों’, ‘सीता–गीता’ जैसे तुकांत शब्दों से कविता गेय एवं मधुर बन गई है। साथ ही ‘पग-पग’, ‘तन-मन’ जैसे शब्द-युग्म कविता को सुंदर बनाते हैं।

मिलान (मिलते-जुलते भाव)

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को जोड़िए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (मिलता-जुलता भाव)
1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।
2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है।यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।
सही मिलान1 → मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है, वह भूमि मेरी माँ समान है।2 → वहाँ की जलवायु सुखदायी है, पक्षी प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।3 → यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) “अमराइयाँ घनी हैं / कोयल पुकारती है” — कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?

उत्तर (कल्पना)क्यों: वसंत ऋतु में आम के पेड़ों पर बौर (मंजरी) आते हैं और चारों ओर हरियाली एवं सुंदरता छा जाती है, इसी प्रसन्नता एवं उमंग में कोयल पुकारती (कूकती) होगी।किसे: वह अपने साथी कोयल को बुला रही होगी अथवा अपनी मीठी कूक से प्रकृति एवं ऋतु के सौंदर्य का स्वागत कर रही होगी।कैसे: वह ‘कुहू-कुहू’ की मधुर एवं मीठी आवाज़ में पुकार रही होगी, जिसे सुनकर सबका मन प्रसन्न हो जाता है।

(ख) “बहती मलय पवन है / तन मन सँवारती है” — पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?

उत्तरकिसका: मलय पवन वहाँ रहने वाले सभी प्राणियों – मनुष्यों, पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों के तन-मन को सँवारती (प्रसन्न करती) है।कैसे: यह पवन दक्षिण के मलय पर्वत से चलकर आती है, इसलिए शीतल एवं सुगंधित होती है। इसका शीतल स्पर्श एवं भीनी सुगंध शरीर को ताज़गी तथा मन को आनंद एवं शांति प्रदान करती है, जिससे सबका तन-मन सँवर जाता है।

शब्दों के रूप

(क) शब्द-युग्म के अर्थ

“जगमग छटा निराली / पग पग छहर रही हैं” – इन पंक्तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए—

शब्द-युग्मअर्थ
घर-घरहर घर में, प्रत्येक घर में
बाल-बालएक-एक बाल; यहाँ ‘पूरी तरह’/‘बहुत निकट से’ (जैसे ‘बाल-बाल बचना’)
साँस-साँसहर साँस में, प्रत्येक साँस के साथ
देश-देशहर देश में, प्रत्येक देश में
पर्वत-पर्वतहर पर्वत पर, प्रत्येक पर्वत पर

(ख) ‘भूमि’ से नए शब्द

“वह युद्ध-भूमि मेरी / वह बुद्ध-भूमि मेरी” – कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए। (संकेत— तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)

नया शब्दअर्थ
तपोभूमितपस्या करने का स्थान
देवभूमिदेवताओं की भूमि; जैसे हिमालय का प्रदेश
जन्मभूमिजहाँ किसी ने जन्म लिया हो
कर्मभूमिकर्म/परिश्रम करने का स्थान
कर्तव्यभूमिकर्तव्य निभाने का स्थान
मरुभूमिरेगिस्तान, बालू से भरी भूमि
रणभूमियुद्ध का मैदान
यज्ञभूमियज्ञ करने का पवित्र स्थान

थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

“जग को दया सिखाई / जग को दिया दिखाया” – ‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, पर इस अंतर से अर्थ पूरी तरह बदल गया है। ऐसे ही कुछ शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।

उत्तर (उदाहरण)दया–दिया, घड़ा–घड़ी, सुत–सुता, बाल–बाला, चोर–चोरी, फल–फूल, कल–काल, मल–माल, दिन–दीन, चना–चीना।इनमें केवल एक मात्रा (स्वर) के बदलने से शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल जाता है – जैसे ‘दिन’ (समय) और ‘दीन’ (गरीब/दुखी)।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए। (संकेत— प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)

उत्तर (नमूना)मैं भारत के एक हरे-भरे एवं शांत स्थान पर रहता हूँ। यह स्थान मुझे बहुत प्रिय है क्योंकि यहाँ की प्रकृति सुंदर है – आस-पास खेत, बाग़ एवं छोटी नदियाँ हैं।यहाँ की जलवायु सुहावनी है; गर्मियों में अधिक गर्मी नहीं पड़ती और वर्षा में चारों ओर हरियाली छा जाती है। यहाँ का खान-पान सरल एवं स्वादिष्ट है तथा त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। पास ही एक प्रसिद्ध मंदिर एवं बाज़ार है। यहाँ के लोग मिलनसार एवं सहायक हैं, इसलिए मुझे अपना यह स्थान बहुत अच्छा लगता है। (विद्यार्थी अपने वास्तविक स्थान के अनुसार लिखें।)

(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?

उत्तर (नमूना)मेरे परिवार में मेरी दादी माँ मुझे सबसे प्रिय हैं। वे बहुत स्नेहमयी एवं समझदार हैं। मुझे उनकी कई बातें अच्छी लगती हैं – वे रोज़ रात को मुझे कहानियाँ सुनाती हैं, सबसे प्यार से बात करती हैं तथा कभी किसी पर क्रोध नहीं करतीं।वे मुझे सच बोलने, बड़ों का आदर करने एवं ज़रूरतमंदों की मदद करने की सीख देती हैं। उनका धैर्य एवं दयालुता मुझे बहुत प्रेरित करती है। (विद्यार्थी अपने सदस्य/मित्र के अनुसार लिखें।)

वंशी-से (वाद्यों का शब्द-जाल)

“श्रीकृष्ण ने सुनाई / वंशी पुनीत गीता” – ‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँककर बजाया जाने वाला वाद्य है। नीचे फूँककर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के नाम शब्द-जाल से खोजिए।

उत्तरफूँककर बजाए जाने वाले वाद्य – शहनाई, बाँसुरी, शंख, अलगोजा, बीन (और स्वरमंडल की भाँति अनेक) इस शब्द-जाल में छिपे हैं।प्रमुख नाम: शहनाई, बाँसुरी, शंख, बीन, अलगोजा।

आज की पहेली (अक्षरों से शब्द बनाना)

नीचे कुछ अक्षर दिए गए हैं। इन्हें मिलाकर (क्रम बदलकर एवं उपयुक्त मात्रा लगाकर) कोई सार्थक शब्द बनाइए। पहला शब्द उदाहरण के रूप में दिया गया है।

क्रमअक्षरसार्थक शब्द
1स म ह ग रमहासागर
2ह म य लहिमालय
3ग गगंगा
4भ त रभारत
5ल क यकोयल
6व न पपवन

झरोखे से (वंदे मातरम्)

आप अपने विद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ गाते होंगे। यह बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया है और स्वतंत्रता की लड़ाई में प्रेरणा का स्रोत रहा है। इसका अर्थ समझिए।

उत्तर (भावार्थ)‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है – “हे माँ (मातृभूमि), मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।” इसमें भारत माता की वंदना की गई है – वह जल से भरी, फलों से परिपूर्ण, मलय पवन से शीतल, अन्न के खेतों से हरी-भरी, चाँदनी रात से सुशोभित एवं फूलों से लदे वृक्षों से सजी हुई है।वह सदा मुस्कुराने वाली, मीठी बोली बोलने वाली, सुख एवं वरदान देने वाली पूज्य माता है। ‘मातृभूमि’ कविता की भाँति ‘वंदे मातरम्’ में भी मातृभूमि के प्रति प्रेम एवं श्रद्धा का भाव है।

साझी समझ (मातृभूमि एवं वंदे मातरम् की तुलना)

‘मातृभूमि’ कविता एवं ‘वंदे मातरम्’ में कौन-सी बातें एक जैसी हैं और कौन-सी अलग?

उत्तरसमानता: दोनों रचनाओं में भारत माता (मातृभूमि) के प्रति गहरा प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा है। दोनों में देश की प्राकृतिक सुंदरता – नदियाँ, हरियाली, फल-फूल एवं शीतल मलय पवन – का सुंदर वर्णन है।अंतर: ‘मातृभूमि’ में भारत के महापुरुषों (राम, सीता, कृष्ण, बुद्ध) एवं हिमालय जैसे भौगोलिक स्थानों का विशेष उल्लेख है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ मुख्य रूप से माता की वंदना एवं उसकी समृद्धि का स्तुति-गीत है। भाषा की दृष्टि से ‘वंदे मातरम्’ में संस्कृतनिष्ठ शब्द अधिक हैं।

खोजबीन के लिए

पाठ से संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक के क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

उत्तर (गतिविधि)सुझाई गई देश-प्रेम की रचनाएँ हैं – ‘स्वाधीनता की सरगम’, ‘ना हाथ एक शस्त्र हो’, माखनलाल चतुर्वेदी की ‘पुष्प की अभिलाषा’ तथा ‘यह महिमामय अपना भारत’। इन्हें पढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में अपने विचार लिखिए।पुष्प की अभिलाषा में फूल की यही कामना है कि वह किसी के शृंगार या भोग में नहीं, बल्कि उस मार्ग पर बिछ जाए जिससे होकर वीर मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जाते हैं – यह भी सच्चे देश-प्रेम एवं त्याग का संदेश देती है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता कौन हैं और उनकी लेखनी का प्रिय विषय क्या था?

उत्तर‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हैं। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय ‘देशभक्ति’ था और भारत के गौरव का गान करना उन्हें बहुत प्रिय था।

2. कवि ने अपनी मातृभूमि के लिए कौन-कौन से नाम (भूमि) प्रयुक्त किए हैं?

उत्तरकवि ने अपनी मातृभूमि को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि, मातृभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि एवं बुद्ध-भूमि कहा है। इन नामों से उसकी पवित्रता, समृद्धि, वीरता एवं करुणा प्रकट होती है।

3. हिमालय का वर्णन कवि ने किस प्रकार किया है?

उत्तरकवि कहते हैं कि ऊँचा हिमालय इस प्रकार खड़ा है मानो वह आकाश को चूम रहा हो, और उसके चरणों के नीचे सिंधु (समुद्र) सदा लहरों के साथ झूमता रहता है। यह भारत की उत्तरी सीमा का प्रहरी है।

4. कविता में किन-किन महापुरुषों का उल्लेख हुआ है?

उत्तरकविता में श्रीराम (रघुपति), सीता, श्रीकृष्ण एवं गौतम बुद्ध का उल्लेख हुआ है। इसी भूमि पर इन महापुरुषों ने जन्म लेकर इसका यश बढ़ाया तथा संसार को धर्म, ज्ञान एवं दया का मार्ग दिखाया।

5. मलय पवन की क्या विशेषता है?

उत्तरमलय पवन दक्षिण के मलय पर्वत से चलकर आती है, इसलिए वह शीतल एवं सुगंधित होती है। इसका शीतल स्पर्श एवं भीनी सुगंध सबके तन-मन को ताज़गी एवं प्रसन्नता प्रदान करती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘मातृभूमि’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘मातृभूमि’ कविता का मूल भाव अपनी मातृभूमि भारत के प्रति प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा प्रकट करना है। कवि सोहनलाल द्विवेदी अपनी भूमि की प्राकृतिक सुंदरता का सजीव चित्र खींचते हैं – ऊँचा हिमालय, लहराती नदियाँ, झरते झरने, घनी अमराइयाँ, कूकती कोयल एवं शीतल मलय पवन।वे इस भूमि को पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, धर्मभूमि एवं कर्मभूमि कहकर इसकी महिमा बताते हैं। साथ ही वे इसके गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हैं – यहीं राम, सीता, कृष्ण एवं बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को धर्म, ज्ञान एवं दया का मार्ग दिखाया। बार-बार दोहराई गई पंक्ति “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” से कवि का अपनी मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम झलकता है। कविता हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व करने एवं उससे सच्चा प्रेम करने की प्रेरणा देती है।

7. कविता के आधार पर बताइए कि भारत में प्राकृतिक सुंदरता एवं सांस्कृतिक गौरव किस प्रकार एक साथ दिखाई देते हैं?

उत्तरकविता में कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता एवं सांस्कृतिक गौरव दोनों को एक साथ प्रस्तुत करते हैं। एक ओर वे प्रकृति का मनोहर वर्णन करते हैं – ऊँचा हिमालय, झूमता सिंधु, लहराती गंगा-यमुना, झरते झरने, चहकती चिड़ियाँ, घनी अमराइयाँ, कूकती कोयल एवं शीतल-सुगंधित मलय पवन।दूसरी ओर वे इस भूमि के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गौरव को सामने लाते हैं – यहीं राम एवं सीता ने जन्म लिया, श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया और गौतम बुद्ध ने दया एवं अहिंसा सिखाई। इस प्रकार भारत एक ओर प्रकृति की गोद में बसी सुंदर भूमि है, तो दूसरी ओर वीरता, धर्म एवं ज्ञान की पवित्र भूमि भी – दोनों मिलकर इसे एक अनूठी एवं गौरवशाली मातृभूमि बनाते हैं।

8. इस कविता में बार-बार दोहराई गई पंक्ति का क्या महत्त्व है? समझाइए।

उत्तरइस कविता में “वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी” पंक्ति बार-बार दोहराई गई है। इस आवृत्ति को कविता में ‘टेक’ कहते हैं, और इसका विशेष महत्त्व है।इस पंक्ति की पुनरावृत्ति से कविता में मधुर लय एवं गेयता आ जाती है, जिससे वह गुनगुनाने एवं याद रखने योग्य बन जाती है। साथ ही, इस पंक्ति के बार-बार आने से कवि का मुख्य भाव – मातृभूमि के प्रति प्रेम एवं अपनापन – पाठक के मन पर गहराई से अंकित हो जाता है। प्रत्येक अंश के अंत में जब कवि अपनी भूमि को ‘मेरी’ कहते हैं, तो उनका गर्व एवं श्रद्धा का भाव और भी प्रबल हो उठता है। इस प्रकार यह टेक कविता को प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी बनाती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) माखनलाल चतुर्वेदी

(ख) सोहनलाल द्विवेदी

(ग) सुभद्रा कुमारी चौहान

(घ) बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

उत्तर(ख) सोहनलाल द्विवेदी।

2. कविता के अनुसार हिमालय किसे चूमता है?

(क) समुद्र को

(ख) नदियों को

(ग) आकाश को

(घ) पहाड़ियों को

उत्तर(ग) आकाश को।

3. ‘सिंधु’ शब्द का अर्थ है—

(क) पर्वत

(ख) समुद्र

(ग) वन

(घ) आकाश

उत्तर(ख) समुद्र।

4. कविता में आम के घने बाग़ों के लिए कौन-सा शब्द आया है?

(क) झाड़ियाँ

(ख) पहाड़ियाँ

(ग) अमराइयाँ

(घ) त्रिवेणी

उत्तर(ग) अमराइयाँ।

5. तन-मन को कौन सँवारती है?

(क) कोयल

(ख) मलय पवन

(ग) गंगा-यमुना

(घ) झरने

उत्तर(ख) मलय पवन।

6. श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी से क्या सुनाया था?

(क) रामायण

(ख) वेद

(ग) पुनीत गीता

(घ) उपनिषद

उत्तर(ग) पुनीत गीता।

7. ‘रघुपति’ किसका नाम है?

(क) श्रीकृष्ण

(ख) श्रीराम

(ग) गौतम बुद्ध

(घ) लक्ष्मण

उत्तर(ख) श्रीराम।

8. गौतम बुद्ध ने संसार को क्या सिखाया?

(क) युद्ध करना

(ख) दया एवं करुणा

(ग) व्यापार करना

(घ) खेती करना

उत्तर(ख) दया एवं करुणा।

9. कविता में बार-बार दोहराई गई पंक्ति कौन-सी है?

(क) ऊँचा खड़ा हिमालय

(ख) झरने अनेक झरते

(ग) वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी

(घ) अमराइयाँ घनी हैं

उत्तर(ग) वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।

10. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?

(क) प्रकृति का भय

(ख) मातृभूमि के प्रति प्रेम एवं गर्व

(ग) हास्य

(घ) मित्रता

उत्तर(ख) मातृभूमि के प्रति प्रेम एवं गर्व।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ग), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): ‘मातृभूमि’ कविता देश-प्रेम की कविता है।

कारण (R): कवि अपनी मातृभूमि की सुंदरता एवं गौरव का वर्णन कर उसके प्रति प्रेम प्रकट करते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता में ‘सिंधु’ शब्द हिमालय पर्वत के लिए आया है।

कारण (R): ‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र होता है।

उत्तर(घ) A गलत है (सिंधु पर्वत नहीं, समुद्र के लिए आया है), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): इस भूमि को ‘बुद्ध-भूमि’ भी कहा गया है।

कारण (R): इसी भूमि पर गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर संसार को दया का मार्ग दिखाया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): मलय पवन सबके तन-मन को सँवारती है।

कारण (R): मलय पवन शीतल एवं सुगंधित होती है, जो ताज़गी एवं आनंद प्रदान करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): कविता में “वह मातृभूमि मेरी” पंक्ति केवल एक बार आई है।

कारण (R): इस पंक्ति की पुनरावृत्ति से कविता में लय एवं भाव-प्रभाव बढ़ता है।

उत्तर(घ) A गलत है (यह पंक्ति कई बार दोहराई गई है, केवल एक बार नहीं), जबकि R सही है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • कविता की मुख्य टेक “वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी” तथा कवि का नाम (सोहनलाल द्विवेदी) अवश्य याद रखें।
  • कठिन शब्दों के अर्थ – सिंधु (समुद्र), अमराइयाँ (आम के बाग़), मलय पवन, रघुपति, पुनीत – उदाहरण सहित लिखें।
  • भावार्थ लिखते समय प्रकृति-वर्णन तथा महापुरुषों के स्मरण – दोनों पक्षों को शामिल करें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • ‘सिंधु’ को नदी या पर्वत समझ लेना – यहाँ इसका अर्थ समुद्र (हिंद महासागर) है।
  • ‘रघुपति’ को श्रीकृष्ण समझ लेना – रघुपति श्रीराम का नाम है।
  • ‘दया’ एवं ‘दिया’ जैसे एक-मात्रा-भिन्न शब्दों को एक समझ लेना – इनके अर्थ भिन्न हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मातृभूमि’ कविता के कवि कौन हैं?

‘मातृभूमि’ कविता के कवि सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) हैं, जो देशभक्ति की कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

‘मातृभूमि’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव अपनी मातृभूमि भारत के प्रति प्रेम, गर्व एवं श्रद्धा है। कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता एवं गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हैं।

कविता में ‘सिंधु’ शब्द किसके लिए आया है?

‘सिंधु’ का अर्थ समुद्र है। कविता में यह हिमालय के चरणों के नीचे लहराते हुए महासागर (हिंद महासागर) के लिए आया है।

कविता में किन महापुरुषों का उल्लेख हुआ है?

कविता में श्रीराम (रघुपति), सीता, श्रीकृष्ण एवं गौतम बुद्ध का उल्लेख हुआ है, जिन्होंने इसी भूमि पर जन्म लेकर इसका यश बढ़ाया।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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