कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 2 – गोल (संस्मरण) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 2 ‘गोल’ का पूरा समाधान देता है। यह पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की आत्मकथा/संस्मरण का एक अंश है। यहाँ आपको पाठ का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर मिलेंगे।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 2 – गोल लेखक: मेजर ध्यानचंद विधा: संस्मरण (गद्य) सत्र: 2026–27

लेखक से परिचय – मेजर ध्यानचंद

यह पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले अमर खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद (1905–1979) के संस्मरण का एक अंश है। उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ था; बाद में उनका परिवार झाँसी आकर बस गया। केवल 16 वर्ष की आयु में वे सेना में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गए और वहीं उन्होंने हॉकी खेलना सीखा। सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्होंने भारतीय टीम के कप्तान के रूप में स्वर्ण पदक दिलाया। उनके अद्भुत खेल-कौशल के कारण लोग उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे। भारत उनके जन्मदिन (29 अगस्त) को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाता है और देश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ उन्हीं के नाम पर दिया जाता है।

पाठ का सार

‘गोल’ पाठ महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक अंश है, जिसमें वे अपने जीवन एवं खेल-भावना से जुड़ी यादें पाठकों के साथ साझा करते हैं। पाठ का आरंभ एक रोचक प्रसंग से होता है। ध्यानचंद बताते हैं कि सन् 1933 में वे ‘पंजाब रेजिमेंट’ की ओर से खेलते थे। एक दिन ‘पंजाब रेजिमेंट’ और ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के बीच मुकाबला हो रहा था। माइनर्स टीम के खिलाड़ी उनसे गेंद छीन नहीं पा रहे थे, तो उनमें से एक खिलाड़ी ने गुस्से में आकर हॉकी स्टिक उनके सिर पर दे मारी और उन्हें घायल होकर मैदान से बाहर जाना पड़ा।

थोड़ी देर बाद ध्यानचंद सिर पर पट्टी बँधवाकर फिर मैदान में लौट आए। उन्होंने उस खिलाड़ी से कहा कि वे इसका बदला अवश्य लेंगे। इससे वह खिलाड़ी घबरा गया। परंतु ध्यानचंद ने बदले के रूप में मारपीट नहीं की, बल्कि एक के बाद एक छह गोल कर दिए। खेल के बाद उन्होंने उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाकर समझाया कि खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं; उन्होंने अपना बदला गोल करके ले लिया है। इस प्रसंग से ध्यानचंद यह संदेश देते हैं कि बुरा काम करने वाला व्यक्ति हमेशा इस डर में रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।

आगे ध्यानचंद अपनी सफलता का रहस्य बताते हैं – लगन, साधना और खेल-भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं। वे बताते हैं कि आरंभ में उन्हें खेल में रुचि नहीं थी; सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके खेल में निखार आया और उन्हें तरक्की मिलती गई। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया और भारत को स्वर्ण पदक मिला। ध्यानचंद की सबसे बड़ी विशेषता उनकी टीम-भावना थी – वे गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने साथी को दे देते, ताकि गोल करने का श्रेय उसे मिले। वे हमेशा मानते थे कि हार या जीत उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। पाठ के अंत में जुड़ा अंश ‘डाँडी या गोथा’ भील-भिलाला बच्चों के हॉकी जैसे एक स्वदेशी खेल का परिचय देता है, जिससे यह संदेश मिलता है कि खेल हर समाज एवं संस्कृति की पहचान होते हैं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
संस्मरणबीते समय की यादें, स्मृति-लेख
आत्मकथास्वयं द्वारा लिखी अपनी जीवन-कथा
धक्का-मुक्कीएक-दूसरे को धकेलना
नोंक-झोंकहल्की-फुल्की कहा-सुनी, तकरार
मुकाबलाप्रतियोगिता, स्पर्धा
बेकार जानाव्यर्थ होना, असफल होना
शर्मिंदालज्जित, शर्मसार
गुरु-मंत्रसफलता का कोई गुप्त उपाय/रहस्य
लगनकिसी काम के प्रति गहरी रुचि एवं तत्परता
साधनानिरंतर अभ्यास एवं परिश्रम
नौसिखियाजिसने अभी-अभी सीखना आरंभ किया हो
निखारसुधार, खूबसूरती बढ़ना
तरक्कीउन्नति, आगे बढ़ना
छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र
रेजिमेंटसेना की एक टुकड़ी/दल
लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक)
सूबेदारस्वतंत्रता से पहले भारतीय सैन्य अधिकारियों का एक बड़ा पद
स्वर्ण पदकसोने का तमगा, प्रथम स्थान का पुरस्कार
श्रेयकिसी अच्छे काम का यश/सम्मान
खेल-भावनाहार-जीत को समान भाव से लेने का स्वभाव
भू का भारधरती पर बोझ (व्यर्थ व्यक्ति)

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?

• वे अत्यंत क्रोधी थे।

• वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।

• उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।

• वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

उत्तर★ वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे तथा ★ वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।ध्यानचंद ने मारपीट से बदला न लेकर छह गोल करके अपना बदला लिया और उस खिलाड़ी को खेल-भावना का पाठ भी पढ़ाया। इससे पता चलता है कि वे क्रोधी नहीं, बल्कि सच्ची खेल-भावना रखने वाले समझदार खिलाड़ी थे।

(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?

• उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण

• उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण

• हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण

• उनकी खेल भावना के कारण

उत्तर★ उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण।बर्लिन ओलंपिक में लोग उनके खेलने के ढंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे – अर्थात् उनके असाधारण खेल-कौशल के कारण उन्हें यह नाम मिला।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय पाठ के संदर्भ को आधार बनाइए – जैसे ध्यानचंद ने मारकर नहीं, बल्कि गोल करके बदला लिया, इसलिए ‘अच्छे ढंग से बदला लेते थे’ उत्तर सही है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए कि उन्होंने कौन-से उत्तर चुने और क्यों; इससे एक-दूसरे के तर्क समझने में सहायता मिलेगी।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुने गए कुछ शब्दों को उनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।

शब्दसही अर्थ या संदर्भ
1. लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।
2. बर्लिन ओलंपिकवर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।
3. पंजाब रेजिमेंटस्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल।
4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीमअंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल।
5. सूबेदारस्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।
6. छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र।
सही मिलान1 → भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।2 → वर्ष 1936 में बर्लिन (जर्मनी) में आयोजित ओलंपिक प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया।3 → स्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल।4 → अंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल।5 → स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।6 → सैनिकों के रहने का क्षेत्र।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।”

अर्थ/विचारइस पंक्ति का आशय है कि जो व्यक्ति किसी के साथ बुरा व्यवहार या गलत काम करता है, उसके मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं उसके साथ भी वैसा ही बुरा न हो जाए।पाठ में वह खिलाड़ी, जिसने ध्यानचंद को हॉकी मारी थी, बदले के डर से बार-बार उन्हीं को देखता रहता है। यह पंक्ति सिखाती है कि बुरे कर्म मन की शांति छीन लेते हैं, इसलिए हमें सदा अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

(ख) “मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों से ध्यानचंद की महान टीम-भावना का पता चलता है। वे अकेले श्रेय नहीं लेना चाहते थे, बल्कि गेंद साथी को देकर उसे गोल करने का यश दिलाते थे।उनकी इसी निःस्वार्थ खेल-भावना के कारण दुनिया भर के खेल-प्रेमी उनके प्रशंसक बन गए। यह पंक्ति सिखाती है कि सच्ची सफलता मिल-जुलकर एवं दूसरों को आगे बढ़ाकर ही पाई जाती है।

सोच-विचार के लिए

संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?

उत्तरध्यानचंद के अनुसार उनकी सफलता का कोई गुप्त गुरु-मंत्र नहीं था। उनकी सफलता का सच्चा रहस्य था – लगन, साधना (निरंतर अभ्यास) और खेल-भावना।इन्हीं तीन गुणों के बल पर एक साधारण सिपाही एवं नौसिखिया खिलाड़ी आगे बढ़ते-बढ़ते ‘हॉकी का जादूगर’ बन गया।

(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?

उत्तरध्यानचंद हमेशा कोशिश करते कि गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने साथी खिलाड़ी को दे दें, ताकि गोल करने का श्रेय उस साथी को मिले – इससे पता चलता है कि वे अपने यश से पहले साथियों का सम्मान रखते थे।इसके अतिरिक्त वे मानते थे कि हार या जीत उनकी अपनी नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। ये दोनों बातें सिद्ध करती हैं कि वे स्वयं से पहले अपने साथियों एवं देश को रखते थे।

संस्मरण की रचना

“उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।” इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक पाठक से अपनी यादें साझा कर रहा हो। इस संस्मरण में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देती हैं।

(क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर (नमूना सूची)1. प्रथम पुरुष शैली: पूरा पाठ ‘मैं’ शैली में लिखा गया है, जिससे लेखक स्वयं अपनी कहानी कहता प्रतीत होता है।2. वास्तविक घटनाएँ एवं तिथियाँ: सन् 1933, 1936, बर्लिन ओलंपिक आदि सच्ची घटनाओं एवं समय का उल्लेख है।3. आत्मीयता: लेखक सीधे पाठक से बातें करता है, जिससे अपनापन झलकता है।4. सरल एवं स्वाभाविक भाषा: रोचक प्रसंगों के साथ सीधी-सादी भाषा का प्रयोग।5. प्रेरक संदेश: हर प्रसंग से लगन, खेल-भावना एवं देश-प्रेम की सीख मिलती है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर (गतिविधि)यह कक्षा में करने वाली गतिविधि है। अपने समूह द्वारा बनाई गई विशेषताओं की सूची बारी-बारी से कक्षा के सामने पढ़कर सुनाइए और अन्य समूहों की सूची से मिलाकर देखिए कि कौन-सी नई विशेषताएँ सामने आईं।

शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के

(क) “जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।” इसमें ‘जैसे-जैसे’ एवं ‘वैसे-वैसे’ शब्द-युग्म हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार आया है। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।

उत्तर1. धीरे-धीरे   2. कभी-कभी   3. साफ़-साफ़   4. पास-पास   5. रोज़-रोज़ (अन्य: बार-बार, चलते-चलते, हँसते-हँसते)।

(ख) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।” इसमें के शब्द-युग्मों के दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हों।

उत्तर1. हार-जीत   2. भला-बुरा   3. आना-जाना   4. लेन-देन   5. ऊँच-नीच (अन्य: मेल-जोल, हँसी-खुशी, रात-दिन)।

(ग) नीचे दिए गए शब्दों को योजक चिह्न (-) की सहायता से लिखिए – जैसे ‘हार या जीत’ → हार-जीत।

दिए गए शब्दयोजक चिह्न से
अच्छा या बुराअच्छा-बुरा
उत्तर और दक्षिणउत्तर-दक्षिण
छोटा या बड़ाछोटा-बड़ा
गुरु और शिष्यगुरु-शिष्य
अमीर और गरीबअमीर-गरीब
अमृत या विषअमृत-विष

(योजक चिह्न दो शब्दों को जोड़कर लिखने तथा उनके परस्पर संबंध को स्पष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाता है।)

बात पर बल देना

“मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।” और “मैंने तो अपना बदला ले लिया है।” इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? हम बात पर बल देने के लिए ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्य चुनकर लिखिए और बताइए कि यदि ये शब्द न होते तो अर्थ पर क्या प्रभाव पड़ता।

उत्तरअंतर: पहले वाक्य में ‘ही’ शब्द होने से बात पर अधिक बल पड़ता है – अर्थात् ‘बदला तो पक्का ले ही लिया है’। दूसरे वाक्य में ‘ही’ न होने से कथन साधारण हो जाता है और जोर कम पड़ता है।पाठ से कुछ वाक्य:• “खेल में तो यह सब चलता ही है।”• “इसका बदला मैं जरूर लूँगा।” / “मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।”• “आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।”प्रभाव: यदि ‘ही/भी/तो’ जैसे बलसूचक शब्द न होते, तो वाक्य का जोर एवं विशेष भाव कम हो जाता और बात इतनी प्रभावशाली नहीं लगती।

आपकी बात

आपकी बात

(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?

उत्तर (नमूना)ध्यानचंद के स्थान पर मैं भी बदला लेता, परंतु मारपीट या गुस्से से नहीं, बल्कि उन्हीं की तरह अच्छे ढंग से – अपने अच्छे खेल एवं व्यवहार से।मैं और अधिक मन लगाकर खेलता, अधिक गोल करता और जीत के बाद उस खिलाड़ी को समझाता कि खेल में गुस्सा एवं हिंसा अच्छी नहीं होती। इससे बदला भी ले लिया जाता और सच्ची खेल-भावना भी बनी रहती।

(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?

उत्तर (नमूना)यह आपके अपने अनुभव पर आधारित प्रश्न है। उदाहरण के लिए – मुझे क्रिकेट और हॉकी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं, क्योंकि ये टीम-भावना, फुर्ती एवं अनुशासन सिखाते हैं।मुझे मेजर ध्यानचंद सबसे अधिक अच्छे लगते हैं क्योंकि वे न केवल महान खिलाड़ी थे, बल्कि उनकी खेल-भावना एवं देश-प्रेम भी अनुकरणीय है। (आप अपनी पसंद के खेल एवं खिलाड़ी का नाम कारण सहित लिख सकते हैं।)

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

समाचार-पत्र से

(क) समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ छपता है। पिछले सप्ताह के समाचार-पत्रों से अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। (ख) मान लीजिए आप एक खेल-संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं – अपने समूह के साथ उसकी कमेंटरी प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)(क) यह स्वयं करने वाली गतिविधि है। अपने घर या पुस्तकालय के समाचार-पत्र से खेल-पृष्ठ देखकर किसी एक रोचक खेल-समाचार (जैसे क्रिकेट मैच, हॉकी या कुश्ती का परिणाम) को संक्षेप में अपनी पुस्तिका में लिखिए।(ख) यह समूह-गतिविधि है। आकाशवाणी या दूरदर्शन की कमेंटरी-शैली अपनाकर किसी खेल का पाँच मिनट का सजीव प्रसारण कक्षा में बारी-बारी से प्रस्तुत कीजिए, जैसे – “गेंद अब आगे बढ़ रही है… खिलाड़ी ने ज़ोरदार हिट लगाई… और गोल!”

डायरी का प्रारंभ

क्या आप भी अपने मन की बातों एवं विचारों को प्रतिदिन लिखना चाहते हैं? आज से ही डायरी लिखना प्रारंभ कीजिए।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)यह एक रचनात्मक गतिविधि है। डायरी लिखने के लिए कोई लेखन-पुस्तिका या ऑनलाइन माध्यम चुनिए। प्रतिदिन या जब मन करे, दिन भर की घटनाओं, अपने विचारों एवं भावनाओं को ईमानदारी से, उचित एवं शालीन शब्दों में लिखिए – चाहे दो वाक्य हों या दो पृष्ठ। इससे आपकी लेखन-शैली एवं सोचने की क्षमता दोनों बढ़ेंगी।

आज की पहेली / झरोखे से

उत्तर (गतिविधि)आज की पहेली: पुस्तक में दिए तीन खिलाड़ियों के चित्र को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि गेंद की दिशा एवं स्थिति के अनुसार कौन-सा खिलाड़ी गोल कर पाएगा। यह तर्क एवं अवलोकन की रोचक गतिविधि है।झरोखे से: इसमें हॉकी जैसे एक अनोखे स्वदेशी खेल ‘डाँडी या गोथा’ का परिचय दिया गया है – यह भील-भिलाला बच्चों का खेल है जिसमें बाँस की डंडी (गोथा) एवं बाँस की गेंद (दुइत) से खेला जाता है। इसे पढ़कर हमें अपने क्षेत्र के पारंपरिक खेलों के बारे में जानने की प्रेरणा मिलती है।

साझी समझ

(क) ‘डाँडी’ या ‘गोथा’ खेल अपने मित्रों के साथ खेलिए। (ख) अपने क्षेत्र के किसी एक स्वदेशी खेल के नियम इस प्रकार लिखिए कि कोई भी बच्चा उसे पढ़कर खेल सके।

उत्तर (नमूना – खो-खो के नियम)1. खेल में दो दल होते हैं; प्रत्येक दल में नौ-नौ खिलाड़ी होते हैं।2. एक दल बैठकर पकड़ने (चेज़र) का काम करता है और दूसरे दल के खिलाड़ी दौड़कर बचने (रनर) का प्रयास करते हैं।3. चेज़र बारी-बारी से उठकर रनर को छूने (आउट करने) का प्रयास करता है।4. निश्चित समय में जो दल अधिक खिलाड़ियों को आउट करता है, वही विजयी होता है। (आप कबड्डी, गिल्ली-डंडा या पिट्ठू जैसे किसी अन्य खेल के नियम भी इसी प्रकार लिख सकते हैं।)

खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से मेजर ध्यानचंद से जुड़ी सामग्री – जैसे ‘हॉकी के जादूगर – मेजर ध्यानचंद – प्रेरक गाथाएँ’, उनसे लिया गया साक्षात्कार तथा ओलंपिक से संबंधित वीडियो – देखिए, पढ़िए एवं समझिए। इससे आप इस महान खिलाड़ी के जीवन एवं उपलब्धियों के बारे में और अधिक जान पाएँगे।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा जाता है?

उत्तरमेजर ध्यानचंद का हॉकी खेलने का ढंग इतना अद्भुत एवं कुशल था कि बर्लिन ओलंपिक में लोग उनके खेल से मंत्रमुग्ध हो गए। उनके असाधारण खेल-कौशल के कारण ही लोग उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे।

2. ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया जिसने उन्हें हॉकी स्टिक मारी थी?

उत्तरध्यानचंद ने मारपीट के बजाय अपने खेल से बदला लिया। उन्होंने एक के बाद एक छह गोल कर दिए और बाद में उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाकर समझाया कि खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं होता।

3. ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र कौन-से हैं?

उत्तरध्यानचंद के अनुसार सफलता का कोई गुप्त गुरु-मंत्र नहीं होता। उनके अनुसार लगन, साधना (निरंतर अभ्यास) और सच्ची खेल-भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।

4. ‘डाँडी या गोथा’ खेल किसका खेल है और यह हॉकी से किस प्रकार मिलता-जुलता है?

उत्तर‘डाँडी या गोथा’ भील-भिलाला बच्चों का खेल है। यह काफी-कुछ हॉकी जैसा है; इसमें बाँस की डंडी (गोथा) से बाँस की बनी गेंद (दुइत) को मारकर विरोधी दल के क्षेत्र में ले जाया जाता है। मुख्य अंतर यह है कि इसमें हॉकी की तरह गोलपोस्ट नहीं होते।

5. ध्यानचंद की खेल-भावना किन बातों से प्रकट होती है?

उत्तरध्यानचंद गेंद को साथी खिलाड़ी को देकर उसे गोल का श्रेय दिलाते थे और मानते थे कि हार-जीत उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। उन्होंने मारकर नहीं, बल्कि गोल करके बदला लिया – ये सब उनकी सच्ची खेल-भावना को दर्शाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘गोल’ पाठ से हमें कौन-कौन-सी प्रेरणाएँ मिलती हैं? विस्तार से लिखिए।

उत्तर‘गोल’ पाठ मेजर ध्यानचंद के जीवन एवं विचारों के माध्यम से अनेक प्रेरणाएँ देता है। पहली प्रेरणा यह है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता – लगन, निरंतर साधना एवं परिश्रम से ही व्यक्ति एक नौसिखिया से ‘जादूगर’ बन सकता है।दूसरी प्रेरणा खेल-भावना की है – हमें गुस्से एवं हिंसा से नहीं, बल्कि अपने अच्छे प्रदर्शन से जवाब देना चाहिए। तीसरी प्रेरणा टीम-भावना एवं निःस्वार्थता की है, क्योंकि ध्यानचंद साथी को श्रेय दिलाने में विश्वास रखते थे। साथ ही पाठ यह भी सिखाता है कि हार-जीत व्यक्तिगत नहीं, देश की होती है और बुरा काम करने वाला सदा भयभीत रहता है। इस प्रकार यह पाठ परिश्रम, अनुशासन, सद्व्यवहार एवं देश-प्रेम की सीख देता है।

7. मेजर ध्यानचंद के जीवन एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तरमेजर ध्यानचंद का जन्म सन् 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ; बाद में उनका परिवार झाँसी आ बसा। 16 वर्ष की आयु में वे सेना में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गए। आरंभ में उन्हें खेल में रुचि नहीं थी, पर सूबेदार मेजर तिवारी के प्रोत्साहन से उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया।अपनी लगन एवं अभ्यास से उनका खेल निखरता गया और उन्हें तरक्की मिलती गई। सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में वे भारतीय टीम के कप्तान बने और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनके अद्भुत खेल-कौशल के कारण उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा गया। आज भारत उनके जन्मदिन को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाता है और सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ उन्हीं के नाम पर दिया जाता है।

8. “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।” इस कथन को पाठ के आधार पर समझाइए।

उत्तरयह कथन मानव-स्वभाव की एक गहरी सच्चाई को प्रकट करता है। जब कोई व्यक्ति किसी के साथ बुरा व्यवहार या गलत काम करता है, तो उसके मन में अपराध-बोध एवं भय बैठ जाता है कि कहीं उसके साथ भी वैसा ही बुरा न हो जाए।पाठ में जिस खिलाड़ी ने ध्यानचंद के सिर पर हॉकी स्टिक मारी थी, वह बदले की चेतावनी सुनकर इतना घबरा गया कि बार-बार ध्यानचंद को ही देखता रहता था। इससे स्पष्ट है कि बुरे कर्म मन की शांति छीन लेते हैं। यह कथन हमें सिखाता है कि हमें सदा दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि अच्छाई ही निडर एवं सुखी जीवन का आधार है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘गोल’ पाठ किसके संस्मरण/आत्मकथा का अंश है?

(क) सचिन तेंदुलकर

(ख) मेजर ध्यानचंद

(ग) मिल्खा सिंह

(घ) कपिल देव

उत्तर(ख) मेजर ध्यानचंद।

2. मेजर ध्यानचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

(क) सन् 1905, प्रयाग में

(ख) सन् 1933, झाँसी में

(ग) सन् 1936, बर्लिन में

(घ) सन् 1979, दिल्ली में

उत्तर(क) सन् 1905, प्रयाग में।

3. ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया?

(क) उसके सिर पर हॉकी मारकर

(ख) उससे झगड़ा करके

(ग) एक के बाद एक छह गोल करके

(घ) खेल छोड़कर चले जाने से

उत्तर(ग) एक के बाद एक छह गोल करके।

4. ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र क्या हैं?

(क) धन एवं प्रसिद्धि

(ख) लगन, साधना एवं खेल-भावना

(ग) भाग्य एवं अवसर

(घ) बल एवं क्रोध

उत्तर(ख) लगन, साधना एवं खेल-भावना।

5. किस ओलंपिक में ध्यानचंद को भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया?

(क) 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक

(ख) 1932 का लॉस एंजेल्स ओलंपिक

(ग) 1936 का बर्लिन ओलंपिक

(घ) 1948 का लंदन ओलंपिक

उत्तर(ग) 1936 का बर्लिन ओलंपिक।

6. ध्यानचंद गेंद को गोल के पास ले जाकर साथी को क्यों दे देते थे?

(क) उन्हें गोल करना नहीं आता था

(ख) ताकि साथी को गोल करने का श्रेय मिले

(ग) वे थक जाते थे

(घ) कप्तान का आदेश था

उत्तर(ख) ताकि साथी को गोल करने का श्रेय मिले।

7. ध्यानचंद हार या जीत को किसकी मानते थे?

(क) केवल अपनी

(ख) केवल टीम के कप्तान की

(ग) पूरे देश की

(घ) दर्शकों की

उत्तर(ग) पूरे देश की।

8. ‘डाँडी या गोथा’ किनका खेल है?

(क) नगर के बच्चों का

(ख) भील-भिलाला बच्चों का

(ग) केवल सैनिकों का

(घ) विदेशी खिलाड़ियों का

उत्तर(ख) भील-भिलाला बच्चों का।

9. भारत में मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन को किस रूप में मनाया जाता है?

(क) गणतंत्र दिवस

(ख) राष्ट्रीय खेल दिवस

(ग) शिक्षक दिवस

(घ) बाल दिवस

उत्तर(ख) राष्ट्रीय खेल दिवस।

10. पाठ के अनुसार बुरा काम करने वाला व्यक्ति किस बात से डरता रहता है?

(क) कि वह हार जाएगा

(ख) कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी

(ग) कि उसे पुरस्कार नहीं मिलेगा

(घ) कि वह बीमार पड़ जाएगा

उत्तर(ख) कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(क), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।

कारण (R): उनका हॉकी खेलने का कौशल अद्भुत एवं असाधारण था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से मारपीट करके बदला लिया।

कारण (R): ध्यानचंद सच्ची खेल-भावना में विश्वास रखते थे।

उत्तर(घ) A गलत है (उन्होंने मारपीट नहीं, बल्कि छह गोल करके बदला लिया), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): ध्यानचंद स्वयं से पहले अपने साथियों एवं देश को रखते थे।

कारण (R): वे गेंद साथी को देकर उसे गोल का श्रेय दिलाते थे और हार-जीत को देश की मानते थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ध्यानचंद को आरंभ से ही हॉकी खेलने में बहुत रुचि थी।

कारण (R): सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था।

उत्तर(घ) A गलत है (आरंभ में उन्हें खेल में रुचि नहीं थी), जबकि R सही है।

5. अभिकथन (A): ‘डाँडी या गोथा’ खेल काफी-कुछ हॉकी जैसा है।

कारण (R): इस खेल में लकड़ी से गेंद को मारकर विरोधी दल के क्षेत्र में ले जाया जाता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • पाठ की महत्त्वपूर्ण तिथियाँ याद रखें – जन्म 1905 (प्रयाग), 1933 का प्रसंग, 1936 बर्लिन ओलंपिक।
  • ‘सफलता के मंत्र’ – लगन, साधना एवं खेल-भावना – प्रायः पूछे जाते हैं, इन्हें क्रम सहित लिखें।
  • उत्तर में ध्यानचंद की खेल-भावना एवं टीम-भावना को उदाहरण (गेंद साथी को देना, हार-जीत देश की) के साथ बताएँ।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

  • ‘गोल’ पाठ की विधा को कहानी लिख देना – यह एक संस्मरण (आत्मकथा का अंश) है।
  • लेखक का नाम भूल जाना या गलत लिखना – इस पाठ के लेखक मेजर ध्यानचंद स्वयं हैं।
  • यह लिख देना कि ध्यानचंद ने मारकर बदला लिया – उन्होंने छह गोल करके बदला लिया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘गोल’ पाठ के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?

‘गोल’ पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचंद (1905–1979) के संस्मरण/आत्मकथा का एक अंश है। इसकी विधा संस्मरण (गद्य) है।

मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा जाता है?

उनके हॉकी खेलने का ढंग इतना अद्भुत एवं कुशल था कि बर्लिन ओलंपिक में लोग प्रभावित होकर उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे।

ध्यानचंद ने हॉकी मारने वाले खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया?

उन्होंने मारपीट नहीं की, बल्कि एक के बाद एक छह गोल करके अपना बदला लिया और बाद में उस खिलाड़ी को खेल-भावना का महत्त्व भी समझाया।

ध्यानचंद के अनुसार सफलता के मंत्र क्या हैं?

उनके अनुसार लगन, साधना (निरंतर अभ्यास) और सच्ची खेल-भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।

पाठ एवं गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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