कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 3 – पहली बूँद (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 3 ‘पहली बूँद’ (कवि – गोपालकृष्ण कौल) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, शब्द एक अर्थ अनेक, शब्द पहेली आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
- कवि परिचय – गोपालकृष्ण कौल
- कविता (मूल पाठ)
- कविता का सार
- भावार्थ
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- कविता की रचना
- शब्द एक अर्थ अनेक
- अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
- शब्द पहेली
- पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – गोपालकृष्ण कौल
गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हिंदी के प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति तथा जीव-जंतुओं से जुड़ी अनेक मनोरम एवं सरल कविताएँ लिखीं। उनकी रचनाओं में सहज भाषा, सुंदर चित्र-विधान एवं कोमल भावनाएँ मिलती हैं, जो बच्चों के मन को सहज ही छू लेती हैं। अपनी एक अन्य कविता ‘हम कुछ सीखें’ में वे कहते हैं— “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।” प्रस्तुत कविता ‘पहली बूँद’ में उन्होंने वर्षा की पहली बूँद के धरती पर गिरने और सूखी धरती के पुनः हरी-भरी होने के अद्भुत दृश्य को बड़ी ही सजीवता से चित्रित किया है।
कविता (मूल पाठ)
‘पहली बूँद’ एक प्रकृति-वर्णन की कविता है, जिसमें वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद के हर्ष एवं सौंदर्य को दर्शाया गया है। “पहली बूँद धरा पर आई।।” पंक्ति टेक के रूप में बार-बार दोहराई गई है।
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
— गोपालकृष्ण कौल
कविता का सार
‘पहली बूँद’ कविता में कवि गोपालकृष्ण कौल ने वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद का अत्यंत सजीव एवं मनोरम चित्र खींचा है। ग्रीष्म की भीषण गर्मी से धरती सूख जाती है, उसके होंठ (अधर) मानो प्यास से फट जाते हैं। ऐसे में जब वर्षा-ऋतु का पहला दिन आता है और आकाश से पहली बूँद धरती पर गिरती है, तो सारी प्रकृति में एक नया उल्लास भर जाता है।
पहली बूँद के स्पर्श से ही धरती में से नया अंकुर फूट पड़ता है, मानो नया जीवन अँगड़ाई लेकर जाग उठा हो। यह बूँद सूखी धरती के लिए अमृत के समान है। धरती पर उगी हरी-हरी दूब (घास) ऐसी दिखती है मानो वसुंधरा के शरीर पर रोमावलि (रोएँ) उग आई हो; वह पुलकित होकर मुस्कुरा उठती है।
कवि आकाश और बादलों का बड़ा सुंदर चित्र खींचते हैं—आकाश में मानो सागर बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा हो। बादल नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई (यौवन) को जगा रहे हैं। नीला आकाश आँखों जैसा और काले बादल उसकी काली पुतलियों जैसे प्रतीत होते हैं। बादल करुणा से भरकर वर्षा रूपी आँसू बहाते हैं और इस प्रकार धरती की बहुत समय से चली आ रही प्यास को बुझा देते हैं।
वर्षा पाकर वही बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से शस्य-श्यामला अर्थात् हरी-भरी फसलों से लहलहाने को ललचा उठती है। इस प्रकार कविता पहली बूँद के माध्यम से प्रकृति में आए नवजीवन, हर्ष एवं सौंदर्य का सुंदर वर्णन करती है और हमें यह संदेश देती है कि जल जीवन का आधार है तथा वर्षा प्रकृति एवं जीव-जगत के लिए कितनी अमूल्य है।
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि वह वर्षा-ऋतु (पावस) का पहला दिन था जब आकाश से पहली बूँद धरती पर आई। उस पहली बूँद के पड़ते ही धरती में से नया अंकुर फूट पड़ा, मानो नया जीवन अँगड़ाई लेकर जाग उठा हो। अर्थात् वर्षा की एक ही बूँद ने सूखी धरती में नवजीवन का संचार कर दिया।
दूसरा पद: गर्मी से सूखी धरती के होंठ मानो प्यास से फट गए थे। उन सूखे होंठों पर वर्षा की बूँद अमृत के समान आकर गिरी। उससे धरती पर उगी हरी-हरी दूब (घास) ऐसी लगने लगी मानो वसुंधरा (धरती) के शरीर पर रोएँ (रोमावलि) उग आए हों; पुलकित होकर वह दूब मानो मुस्कुरा उठी।
तीसरा पद: कवि कल्पना करते हैं कि आकाश में मानो सागर बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा है (अर्थात् समुद्र का जल वाष्प बनकर बादलों के रूप में आकाश में छा गया है)। बादल नगाड़े बजाकर (गरजकर) धरती की तरुणाई अर्थात् यौवन एवं उत्साह को जगा रहे हैं।
चौथा पद: नीला आकाश आँखों के समान और काले बादल उन आँखों की काली पुतलियों के समान प्रतीत होते हैं। ये बादल करुणा से द्रवित होकर वर्षा रूपी आँसू बहाते हैं और इस प्रकार धरती की बहुत समय से चली आ रही (चिर) प्यास बुझा देते हैं। वर्षा पाकर वही बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से शस्य-श्यामला (हरी-भरी फसलों वाली) बनने को ललचा उठती है। इस प्रकार पहली बूँद धरती में नवजीवन एवं हर्ष भर देती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पावस | वर्षा-ऋतु, बरसात का मौसम |
| प्रथम दिवस | पहला दिन |
| धरा / धरती / वसुंधरा | पृथ्वी, भूमि |
| अंकुर | बीज से निकलने वाला नया कोंपल/पौधा |
| नव-जीवन | नया जीवन |
| अँगड़ाई | आलस्य या नींद के बाद अंगों को तानना; यहाँ जाग उठने का भाव |
| अधर | होंठ |
| अमृत | जीवन देने वाला रस; अमर बनाने वाला पेय |
| रोमावलि | शरीर पर उगे रोओं की पंक्ति |
| दूब | एक प्रकार की हरी घास |
| पुलकी-मुसकाई | प्रसन्न होकर मुस्कुराई, रोमांचित हुई |
| अंबर | आकाश, आसमान |
| जलधर | जल धारण करने वाला; बादल अथवा समुद्र |
| नयन | आँख, नेत्र |
| स्वर्णिम | सुनहरा, सोने जैसा |
| पर | पंख |
| नगाड़े | एक प्रकार का बड़ा ढोल/वाद्ययंत्र |
| तरुणाई | यौवन, जवानी |
| करुणा-विगलित | दया से पिघला हुआ, दया से द्रवित |
| अश्रु | आँसू |
| चिर-प्यास | बहुत समय से लगी प्यास |
| शस्य-श्यामला | हरी-भरी फसलों से लहलहाती (धरती) |
| ललचाई | लालायित हुई, इच्छुक हुई |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
• बादल
• अंकुर
• बूँद
• पावस
2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है—
• बारिश की बूँदें
• नगाड़ा
• वृद्ध धरती
• बादल
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।
| कविता की पंक्तियाँ | भावार्थ |
|---|---|
| 1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर | मेघ-गर्जना |
| 2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई | बादल |
| 3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर | हरी दूब |
| 4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई | आकाश |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”
(ख) “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।”
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर लिखिए—
(क) बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
(ख) कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
कविता की रचना
‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव है, परंतु इसका भावार्थ समझने पर सुंदर अर्थ निकलता है। ऐसे प्रयोग कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं। इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानिए।
शब्द एक अर्थ अनेक
‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ पंक्ति में ‘फूटने’ का अर्थ पौधे का अंकुरण है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में होता है। अब ‘फूट’ शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ पंक्ति में ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’ = जल + धर, अर्थात् जल को धारण करने वाला। ‘धर’ से बने कुछ शब्द एवं उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।
| शब्द | अर्थ (किसको धारण करने वाला) |
|---|---|
| जलधर | जल को धारण करने वाला – बादल/समुद्र |
| गिरिधर | गिरि (पर्वत) को धारण करने वाला – श्रीकृष्ण |
| विषधर | विष को धारण करने वाला – साँप |
| हलधर | हल को धारण करने वाला – किसान/बलराम |
| धुरंधर | धुरी (भार/दायित्व) को धारण करने वाला – श्रेष्ठ, निपुण |
| वसुंधरा | धन/रत्नों को धारण करने वाली – पृथ्वी |
शब्द पहेली
दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजिए—
| न | य | न | ल |
| गा | दू | ब | अं |
| ड़ा | अ | श्रु | ब |
| ज | ल | ध | र |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात
(i) बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए। (ii) आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों?
समाचार माध्यमों से
अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है, उसका आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
इन्हें भी जानें (नगाड़ा)
कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है। नगाड़े के विषय में जानिए।
खोजबीन
आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र कीजिए।
सृजन / आइए इंद्रधनुष बनाएँ
चित्र को ध्यान से देखकर उसे एक नाम दीजिए तथा एक सुंदर इंद्रधनुष बनाकर उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए।
झरोखे से
‘झरोखे से’ में अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता ‘एक बूँद’ दी गई है। इसका भाव बताइए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘पहली बूँद’ कविता के कवि कौन हैं और कविता का मुख्य विषय क्या है?
2. पहली बूँद को कवि ने ‘अमृत-सी’ क्यों कहा है?
3. ‘धरती के सूखे अधरों’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
4. बादलों को ‘करुणा-विगलित अश्रु बहाने वाला’ क्यों कहा गया है?
5. ‘शस्य-श्यामला’ का क्या अर्थ है और कविता में यह किसके लिए आया है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘पहली बूँद’ कविता का सार/मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कविता में प्रयुक्त मानवीकरण (प्रकृति को मनुष्य की तरह दिखाना) के सौंदर्य को उदाहरण सहित समझाइए।
8. वर्षा (पानी) हमारे जीवन एवं प्रकृति के लिए क्यों आवश्यक है? कविता के आधार पर लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘पहली बूँद’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) गोपालकृष्ण कौल
(ग) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(घ) सूरदास
2. कविता के अनुसार पहली बूँद किस दिन धरती पर आई?
(क) ग्रीष्म के अंतिम दिन
(ख) पावस (वर्षा) के पहले दिन
(ग) शरद के पहले दिन
(घ) बसंत के पहले दिन
3. पहली बूँद पड़ते ही धरती से क्या फूट पड़ा?
(क) फूल
(ख) अंकुर
(ग) झरना
(घ) पत्थर
4. कवि ने वर्षा की बूँद की तुलना किससे की है?
(क) मोती से
(ख) अमृत से
(ग) हीरे से
(घ) ओस से
5. ‘अधर’ शब्द का अर्थ है—
(क) आँख
(ख) होंठ
(ग) हाथ
(घ) कान
6. ‘वसुंधरा की रोमावलि-सी’ किसे कहा गया है?
(क) बादल को
(ख) हरी दूब को
(ग) बिजली को
(घ) नगाड़े को
7. कविता में नीले आकाश (अंबर) की तुलना किससे की गई है?
(क) सागर से
(ख) नीली आँख (नयन) से
(ग) फूल से
(घ) दर्पण से
8. ‘जलधर’ का शाब्दिक अर्थ है—
(क) जल में रहने वाला
(ख) जल को धारण करने वाला
(ग) जल पीने वाला
(घ) जल बहाने वाला
9. बादल नगाड़े बजाकर धरती की किसे जगा रहे हैं?
(क) नींद को
(ख) तरुणाई (यौवन) को
(ग) प्यास को
(घ) उदासी को
10. वर्षा पाकर बूढ़ी धरती फिर से क्या बनने को ललचाई?
(क) मरुस्थल
(ख) शस्य-श्यामला (हरी-भरी)
(ग) पथरीली
(घ) सूखी
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पहली बूँद को कवि ने अमृत के समान कहा है।
कारण (R): वर्षा की बूँद सूखी एवं प्यासी धरती में नवजीवन भर देती है।
2. अभिकथन (A): कविता में आकाश को आँख और बादलों को उसकी काली पुतली बताया गया है।
कारण (R): कवि ने “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर” पंक्ति लिखी है।
3. अभिकथन (A): पहली बूँद पड़ते ही धरती से फूल खिल उठा।
कारण (R): कविता में “अंकुर फूट पड़ा धरती से” पंक्ति आई है।
4. अभिकथन (A): कविता में बादलों का मानवीकरण किया गया है।
कारण (R): बादल ‘करुणा-विगलित’ होकर अश्रु (आँसू) बहाते हैं।
5. अभिकथन (A): ‘पहली बूँद’ एक प्रकृति-वर्णन की कविता है।
कारण (R): यह कविता देश-प्रेम एवं वीरता का वर्णन करती है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव (Exam Tips)
- कविता का मूल पाठ एवं टेक “पहली बूँद धरा पर आई।।” अच्छी तरह याद रखें—इससे भाव-स्पष्टीकरण के प्रश्न सरल हो जाते हैं।
- मानवीकरण के उदाहरण (सूखे अधर, दूब का मुस्कुराना, बादलों का अश्रु बहाना) रटने के बजाय भाव सहित समझें।
- शब्दार्थ—पावस, अधर, वसुंधरा, जलधर, अंबर, शस्य-श्यामला—ये बार-बार पूछे जाते हैं, अतः सटीक अर्थ याद रखें।
- ‘जलधर’, ‘गिरिधर’ जैसे ‘धर’ वाले शब्द व्याकरण-खंड में भी काम आते हैं।
सामान्य भूलें (Common Mistakes)
- ‘पावस’ को ‘प्रातःकाल’ समझ लेना—इसका सही अर्थ वर्षा-ऋतु है।
- पहली बूँद से ‘फूल’ खिलने लिखना—कविता में ‘अंकुर’ फूटता है, फूल नहीं।
- ‘अधर’ का अर्थ ‘आधा/अधूरा’ लिखना—यहाँ इसका अर्थ ‘होंठ’ है।
- ‘काली पुतली’ को बारिश की बूँद समझना—यह वास्तव में बादल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पहली बूँद’ कविता के कवि कौन हैं?
‘पहली बूँद’ कविता के कवि गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हैं, जो बच्चों के लिए प्रकृति एवं देश-प्रेम से जुड़ी सरल कविताएँ लिखने वाले प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार थे।
‘पहली बूँद’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद से प्रकृति में आए नवजीवन, हर्ष एवं सौंदर्य का वर्णन है। यह जल के महत्त्व को भी दर्शाती है।
कवि ने पहली बूँद को ‘अमृत-सी’ क्यों कहा है?
क्योंकि सूखी एवं प्यासी धरती के लिए वर्षा की पहली बूँद जीवनदायिनी होती है; जैसे अमृत जीवन देता है, वैसे ही यह बूँद धरती में नवजीवन भर देती है।
कविता में ‘जलधर’ का क्या अर्थ है?
‘जलधर’ का अर्थ है जल को धारण करने वाला, अर्थात् बादल अथवा समुद्र। कविता में आकाश में छाए बादलों के लिए यह शब्द आया है।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
