कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 4 – हार की जीत (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 4 ‘हार की जीत’ (लेखक – सुदर्शन) का पूरा समाधान देता है – कहानी का सार, शब्दार्थ, मुहावरे तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, शीर्षक, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, दिनचर्या, कहानी की रचना, मुहावरे कहानी से, कैसे-कैसे पात्र, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 4 लेखक: सुदर्शन विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक से परिचय – सुदर्शन

‘हार की जीत’ हिंदी की सर्वाधिक प्रसिद्ध कहानियों में से एक है, जिसे हिंदी के सुप्रसिद्ध लेखक सुदर्शन (1896–1983) ने लिखा है। उनका वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था। रोचक बात यह है कि उन्होंने अपनी पहली कहानी उसी समय लिख ली थी, जब वे आपकी ही तरह छठी कक्षा में पढ़ते थे। कहानियों के अतिरिक्त सुदर्शन ने कविताएँ, लेख, नाटक एवं उपन्यास भी लिखे। इसके साथ ही उन्होंने अनेक फ़िल्मों की पटकथा एवं गीत भी रचे। उनकी कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता है – सरल, सजीव भाषा तथा मानवीय मूल्यों, करुणा एवं सच्चाई का सुंदर चित्रण, जो ‘हार की जीत’ में स्पष्ट दिखाई देता है।

कहानी का सार

बाबा भारती एक सच्चे संत थे। उन्होंने रुपया, माल-असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था और गाँव से बाहर एक छोटे-से मंदिर में रहकर भगवान का भजन करते थे। उन्हें अपने घोड़े सुलतान से असीम प्रेम था। सुलतान बड़ा सुंदर एवं बलवान था; उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में नहीं था। बाबा भारती अपने हाथ से उसकी देखभाल करते, दाना खिलाते और प्रतिदिन संध्या को उस पर सवार होकर आठ-दस मील का चक्कर लगाते थे। सुलतान के बिना उन्हें चैन ही नहीं आता था।

उसी इलाके में खड्गसिंह नामक एक प्रसिद्ध डाकू रहता था। सुलतान की कीर्ति सुनकर वह एक दिन बाबा भारती के पास आया और घोड़ा देखकर मुग्ध हो गया। उसके मन में लालच जाग उठा और जाते समय उसने चेतावनी दी कि वह यह घोड़ा बाबा भारती के पास नहीं रहने देगा। इस भय से बाबा भारती रात-रात भर अस्तबल की रखवाली करने लगे। पर कई महीने बीत गए और खड्गसिंह नहीं आया, तो बाबा कुछ असावधान हो गए।

एक संध्या जब बाबा भारती सुलतान पर सवार होकर घूम रहे थे, तब खड्गसिंह ने एक अपाहिज (लँगड़े) का वेश धरकर सहायता माँगी। दयालु बाबा भारती ने उसे घोड़े पर बैठा दिया और स्वयं लगाम पकड़कर चलने लगे। अवसर पाते ही अपाहिज बने खड्गसिंह ने घोड़ा दौड़ा दिया। बाबा भारती ने उसे रुकने को कहा – पर घोड़ा वापस माँगने के लिए नहीं! उन्होंने केवल इतनी प्रार्थना की कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे, नहीं तो लोग किसी गरीब-असहाय पर विश्वास करना ही छोड़ देंगे और संसार से विश्वास उठ जाएगा।

बाबा भारती के ये ऊँचे विचार खड्गसिंह के हृदय को भीतर तक छू गए। पश्चात्ताप से भरकर उसी रात वह चुपके से मंदिर पहुँचा और सुलतान को उसके स्थान पर बाँध गया। आँखों में पश्चात्ताप के आँसू लिए वह लौट गया। दूसरे दिन तड़के बाबा भारती अस्तबल पहुँचे, तो घोड़े ने अपने स्वामी के पाँवों की चाप पहचानकर हिनहिनाया। बाबा भारती दौड़कर घोड़े के गले से लिपटकर रो पड़े और बोले — “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।” दोनों के आँसू उसी भूमि पर एक-दूसरे में मिल गए। इस प्रकार खड्गसिंह की बुराई हार गई और बाबा भारती की भलाई एवं विश्वास की जीत हुई – यही इस कहानी की ‘हार की जीत’ है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
अर्पणसमर्पित करना, भेंट करना
खरहरा करनाघोड़े के शरीर को साफ़ करना/सहलाना
असबाबसामान, साज-सामग्री
घृणानफ़रत, अरुचि
भ्रांतिभ्रम, गलतफ़हमी
कीर्तियश, प्रसिद्धि
अधीरबेचैन, व्याकुल
अभिलाषाइच्छा, चाह
अस्तबलघोड़े बाँधने का स्थान
बाँकासुंदर एवं शानदार
विस्मयआश्चर्य, हैरानी
बाहुबलभुजाओं का बल, शक्ति
बेरहमीनिर्दयता, क्रूरता
मिथ्याझूठा, असत्य
अपाहिजविकलांग, असहाय
करुणादया, तरस
प्रयोजनउद्देश्य, मतलब
पश्चात्तापकिए पर पछतावा
सन्नाटानीरवता, गहरी चुप्पी
हिनहिनानाघोड़े का स्वर निकालना

कहानी के प्रमुख मुहावरे

मुहावराअर्थ
लट्टू होनाकिसी पर मोहित/आसक्त हो जाना
हृदय पर साँप लोटनातीव्र ईर्ष्या या लालच से जल उठना
फूले न समानाअत्यधिक प्रसन्न होना
मुँह मोड़ लेनाउपेक्षा करना, सहायता न करना
मुख खिल जानाप्रसन्नता से चेहरा चमक उठना
न्योछावर कर देनाकिसी के लिए सब कुछ समर्पित कर देना
सिर मारनाबहुत प्रयास/विचार करना
हवा से बातें करनाबहुत तेज़ दौड़ना

मेरी समझ से

आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं। (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?

• बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।

• बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।

• बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।

• बाबा भारती असावधान हो गए।

उत्तर★ बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।सुलतान के चले जाने के बाद बाबा भारती को अब किसी चोरी या डाके का भय नहीं रहा; वे रात को निश्चिंत होकर अस्तबल का फाटक खुला छोड़ देते थे। उन्हें केवल यही चिंता थी कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें।

(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?

• बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।

• बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।

• बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।

• बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।

उत्तर★ बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।लेखक ने यह दिखाने के लिए कि बाबा भारती भी साधारण मनुष्य ही थे, यह तर्क दिया कि अपनी प्रिय वस्तु (सुलतान) की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो उठा था – यही मानवीय स्वभाव खड्गसिंह को घोड़े की चाल दिखाने का कारण बना।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने कहानी की उन घटनाओं को आधार बनाया, जहाँ बाबा भारती फाटक खुला छोड़ने लगे (पहला उत्तर) तथा जहाँ उनका हृदय प्रशंसा सुनने को अधीर हुआ (दूसरा उत्तर)। चर्चा करने से हमें पता चला कि कहानी की पंक्तियों को ध्यान से पढ़कर ही सही उत्तर पहुँचा जा सकता है।

शीर्षक

(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।

उत्तरकहानी में बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा सुलतान खो देते हैं – ऊपर से यह उनकी ‘हार’ है। परंतु उनके ऊँचे विचारों एवं भलाई से खड्गसिंह जैसे क्रूर डाकू का हृदय बदल जाता है और वह स्वयं घोड़ा लौटा जाता है।इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की, तथा लालच पर मानवता एवं विश्वास की जीत होती है। बाबा भारती की प्रत्यक्ष हार वास्तव में उनके सद्गुणों की सच्ची जीत बन जाती है – इसीलिए लेखक ने इसका नाम ‘हार की जीत’ रखा, जो कहानी के भाव को बिल्कुल सटीक रूप से व्यक्त करता है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

उत्तर (नमूना)मैं इस कहानी को ‘विश्वास की जीत’ अथवा ‘बाबा भारती और सुलतान’ नाम देना चाहूँगा।‘विश्वास की जीत’ इसलिए, क्योंकि कहानी का केंद्रीय संदेश यही है कि सच्चाई एवं विश्वास अंततः बुराई पर विजय पाते हैं; और ‘बाबा भारती और सुलतान’ इसलिए, क्योंकि सारी घटनाएँ इन्हीं दोनों पात्रों के आस-पास घूमती हैं।

(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?

उत्तरबाबा भारती ने खड्गसिंह से यह वचन लिया कि वह इस घटना (घोड़ा छीने जाने की बात) को किसी के सामने प्रकट न करे।उनका कारण यह था कि यदि लोगों को पता चला कि एक असहाय/गरीब के वेश में आकर घोड़ा छीन लिया गया, तो वे आगे किसी गरीब एवं ज़रूरतमंद पर विश्वास नहीं करेंगे और संसार से दया एवं विश्वास का भाव ही समाप्त हो जाएगा।

पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए—

“भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”

अर्थ/विचारइस पंक्ति से पता चलता है कि बाबा भारती का जीवन दो ही बातों में बँटा था – ईश्वर-भक्ति एवं सुलतान की सेवा। भजन के बाद जो भी समय शेष बचता, वह पूरा-का-पूरा घोड़े की देखभाल में लग जाता।यह उनके घोड़े के प्रति गहरे प्रेम एवं लगाव को दर्शाता है।

“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”

अर्थ/विचारबाबा भारती अपने सुंदर एवं अनोखे घोड़े पर गर्व करते थे, इसलिए उन्होंने उसे गर्व (घमंड) के साथ दिखाया। दूसरी ओर खड्गसिंह ने सैकड़ों घोड़े देखे थे, पर ऐसा बाँका घोड़ा कभी न देखा था, इसलिए वह आश्चर्य से देखता रह गया।यह वाक्य दोनों पात्रों के भिन्न मनोभावों – गर्व एवं विस्मय – को बड़ी सुंदरता से प्रकट करता है।

“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”

अर्थ/विचारयह पंक्ति खड्गसिंह के स्वभाव को उजागर करती है। डाकू होने के कारण वह जो वस्तु पसंद करता, उसे पाने को अपना अधिकार मान लेता था; उसके पास बल भी था और बेरहमी भी।इसी लालच एवं अहंकार के कारण उसने सुलतान को छीनने का निश्चय किया।

“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, ‘यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।’”

अर्थ/विचारयहाँ बाबा भारती की दशा का मार्मिक चित्रण है। जैसे कसाई के सामने असहाय बकरा करुण दृष्टि से देखता है, वैसे ही बाबा भारती बेबसी एवं विवशता से खड्गसिंह की ओर देख रहे थे।फिर भी वे घोड़ा वापस नहीं माँगते; उनकी विवशता के बावजूद उनका त्याग एवं उदारता प्रकट होती है।

“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”

अर्थ/विचारसुलतान के बिना भी बाबा भारती की पुरानी आदत बनी हुई थी – तड़के स्नान के बाद उनके पाँव स्वयं ही अस्तबल की ओर मुड़ गए। पर फाटक तक पहुँचकर उन्हें याद आया कि अब वहाँ घोड़ा नहीं है।यह पंक्ति उनके घोड़े के प्रति अटूट प्रेम एवं उस बिछोह की पीड़ा को दर्शाती है।

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर लिखिए — “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”

(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?

उत्तरबाबा भारती एवं डाकू खड्गसिंह – इन दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया था। खड्गसिंह घोड़ा लौटाते समय जहाँ खड़ा होकर रोया था, ठीक उसी जगह पर बाद में बाबा भारती के आँसू भी गिरे।

(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?

उत्तरदोनों के आँसू अलग-अलग भावों से उपजे थे। खड्गसिंह के आँसू पश्चात्ताप के थे – अपनी बुराई पर पछतावे एवं हृदय-परिवर्तन के कारण।जबकि बाबा भारती के आँसू प्रसन्नता एवं संतोष के थे – खोया हुआ घोड़ा वापस पाने तथा इस बात की खुशी के कि अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा। एक में पछतावा था, दूसरे में आनंद।

दिनचर्या

(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे? (इसमें आप थोड़ी-बहुत कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।)

उत्तर (नमूना)बाबा भारती ब्रह्म-मुहूर्त (चौथे पहर) में जाग जाते। ठंडे जल से स्नान करने के बाद वे मंदिर में भगवान का भजन-पूजन एवं ध्यान करते।इसके पश्चात वे अस्तबल जाकर सुलतान को अपने हाथ से दाना-पानी देते, उसे खरहरा करते (साफ़ करते) तथा देख-देखकर प्रसन्न होते। दिन में वे सादा भोजन करते एवं फिर भजन-भक्ति में लीन रहते।संध्या होते ही वे सुलतान पर सवार होकर आठ-दस मील का चक्कर लगाते। रात को कुछ समय अस्तबल की रखवाली करने के बाद वे विश्राम करते। इस प्रकार उनका सारा जीवन भक्ति, सादगी एवं घोड़े के प्रेम में बीतता था।

(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।

उत्तर (नमूना)मैं प्रातः जल्दी उठकर शौच-स्नान करता/करती हूँ और थोड़ी देर व्यायाम या योग करता/करती हूँ। फिर नाश्ता करके समय पर विद्यालय जाता/जाती हूँ।विद्यालय से लौटकर भोजन एवं विश्राम के बाद मैं गृहकार्य करता/करती हूँ, कुछ देर खेलता/खेलती हूँ एवं पढ़ाई करता/करती हूँ। रात को परिवार के साथ भोजन करके, अगले दिन की तैयारी करके समय पर सो जाता/जाती हूँ।

कहानी की रचना

(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आईं? आपस में चर्चा कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)इस कहानी की अनेक बातें मन को भाती हैं – बाबा भारती का अपने घोड़े से प्रेम, उनका त्याग एवं उदारता, खड्गसिंह का हृदय-परिवर्तन तथा अंत में बुराई पर अच्छाई की जीत।सबसे प्रभावशाली बात है बाबा भारती की वह सोच कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें – यही विचार पूरी कहानी को महान बना देता है। (आप अपनी पसंद की बातें चर्चा करके लिख सकते हैं।)

(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए शब्द, वाक्य, संवाद आदि का ध्यान रखते हैं। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।

उत्तरइस कहानी के संवाद बहुत सजीव, छोटे एवं स्वाभाविक हैं। बाबा भारती एवं खड्गसिंह की बातचीत – जैसे “सुलतान की चाह खींच लाई”, “यह घोड़ा अब न दूँगा” आदि – पात्रों के मनोभावों को सीधे प्रकट कर देते हैं।इन संवादों से कहानी में नाटकीयता एवं रोचकता आ जाती है तथा पाठक घटनाओं से सीधे जुड़ जाता है। संवादों के माध्यम से ही बाबा भारती की उदारता एवं खड्गसिंह का लालच एवं बाद का पश्चात्ताप स्पष्ट होता है।

मुहावरे कहानी से

(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे दिए गए हैं – लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।

उत्तरलट्टू होना (मोहित होना) – “वे उसकी चाल पर लट्टू थे” अर्थात बाबा भारती घोड़े की चाल पर मुग्ध थे।हृदय पर साँप लोटना (ईर्ष्या/लालच से जलना) – घोड़े की चाल देखकर “खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया”।फूले न समाना (अत्यधिक प्रसन्न होना) – घोड़े को देखकर बाबा भारती “मन में फूले न समाते थे”।मुँह मोड़ लेना (उपेक्षा करना) – बाबा भारती ने सुलतान की ओर से इस तरह “मुँह मोड़ लिया” जैसे उससे कोई संबंध ही न हो।मुख खिल जाना (चेहरा प्रसन्नता से चमक उठना) – घोड़े को देखकर उनका “मुख फूल की नाईं खिल जाता था”।न्योछावर कर देना (सब कुछ समर्पित कर देना) – बाबा भारती ने मानो अपना सब-कुछ ईश्वर एवं घोड़े पर न्योछावर कर रखा था।

(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।

उत्तर (नमूना)लट्टू होना – नया खिलौना देखकर छोटा भाई उस पर लट्टू हो गया।हृदय पर साँप लोटना – दोस्त की सफलता देखकर ईर्ष्यालु लड़के के हृदय पर साँप लोट गया।फूले न समाना – परीक्षा में प्रथम आने पर मीरा फूली न समाई।मुँह मोड़ लेना – सच्चा मित्र कभी संकट में मुँह नहीं मोड़ता।मुख खिल जाना – माँ को देखते ही बच्चे का मुख खिल गया।न्योछावर कर देना – सैनिक देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देते हैं।

कैसे-कैसे पात्र

इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं – बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए।

उत्तरबाबा भारती: दयालु, उदार, त्यागी, भक्त, संवेदनशील, क्षमाशील।डाकू खड्गसिंह: बाहुबली, साहसी, लालची (पहले), बेरहम (पहले), पश्चात्तापी (बाद में), विवेकशील (बाद में)।सुलतान घोड़ा: सुंदर, बलवान, बाँका (शानदार चाल वाला), स्वामिभक्त, अनोखा।जो शब्द किसी की विशेषता, गुण एवं प्रकृति बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

सुलतान की कहानी

मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए। (संकेत – मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ…)

उत्तर (नमूना)“मेरा नाम सुलतान है। मैं एक सुंदर एवं बलवान घोड़ा हूँ। मेरे मालिक बाबा भारती मुझे बहुत प्यार करते थे – अपने हाथ से दाना खिलाते, खरहरा करते और संध्या को मुझ पर सवार होकर घूमने जाते।”“एक दिन खड्गसिंह नामक डाकू मुझे देखकर ललचा गया। बाद में वह अपाहिज का वेश बनाकर आया और मुझे छीनकर ले गया। मैं अपने मालिक से बिछड़कर बहुत उदास था। पर बाबा भारती के ऊँचे विचार सुनकर खड्गसिंह का हृदय बदल गया और वह रात में मुझे वापस छोड़ गया।”“सुबह जब मेरे मालिक आए, तो मैंने उनके पाँवों की आहट पहचानकर ज़ोर से हिनहिनाया। वे दौड़कर मेरे गले लग गए। उस दिन मैं समझ गया कि सच्चा प्रेम एवं अच्छाई कभी नहीं हारती।”

मन के भाव

(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द दिए गए हैं – चकित, अधीर, डर, प्रसन्नता, करुणा, निराशा। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था—

उत्तरचकित (आश्चर्य): खड्गसिंह सुलतान जैसा बाँका घोड़ा देखकर चकित रह गया।अधीर: घोड़े की प्रशंसा सुनने को बाबा भारती का हृदय अधीर हो उठा; तथा घोड़ा देखने को खड्गसिंह अधीर था।डर: खड्गसिंह की धमकी सुनकर बाबा भारती डर गए और रात-रात भर रखवाली करने लगे।प्रसन्नता: खोया घोड़ा वापस पाकर बाबा भारती अत्यंत प्रसन्न हुए।करुणा: अपाहिज (बने खड्गसिंह) की कराह सुनकर बाबा भारती के मन में करुणा जागी।निराशा: घोड़ा छिन जाने पर बाबा भारती के मुख से भय, विस्मय एवं निराशा से भरी चीख निकल गई।

(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए। (संकेत – जैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)

उत्तर (नमूना)चकित: जादूगर का खेल देखकर मैं चकित रह जाता/जाती हूँ।अधीर: परीक्षा-परिणाम जानने के लिए मैं अधीर रहता/रहती हूँ।डर: अँधेरे में अकेले होने पर मुझे डर लगता है।प्रसन्नता: अपने जन्मदिन पर एवं अच्छे अंक पाने पर मुझे प्रसन्नता होती है।करुणा: किसी घायल पशु या ज़रूरतमंद व्यक्ति को देखकर मेरे मन में करुणा जागती है।निराशा: कड़ी मेहनत के बाद भी मनचाहा परिणाम न मिलने पर मुझे निराशा होती है।

झरोखे से / साझी समझ

लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। उनकी एक कविता ‘वह चली हवा’ पढ़िए। आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा? आपस में चर्चा कीजिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)‘वह चली हवा’ कविता में सुदर्शन ने एक बहुत सुंदर बात कही है – हवा को न तू देख सकता है, न मैं; पर पत्तों ने उसे देख लिया, तभी तो वे हिल-हिलकर खुशी मना रहे हैं।मुझे इसमें यह कल्पना बहुत अच्छी लगी कि न दिखने वाली हवा की उपस्थिति को पत्तों की खुशी से पहचाना जा सकता है। यह सिखाती है कि अच्छाई एवं प्रेम भी प्रायः दिखाई नहीं देते, पर उनका प्रभाव अवश्य दिखता है। (आप अपने विचार चर्चा करके लिख सकते हैं।)

खोजबीन के लिए

सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

उत्तर (गतिविधि)यह स्वयं खोजने वाली गतिविधि है। पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से आप सुदर्शन की अन्य प्रसिद्ध कहानियाँ – जैसे ‘हार की जीत’, ‘अठन्नी का चोर’ (हेड क्लर्क) तथा अन्य कहानी-संग्रह पढ़ सकते हैं, और उनमें प्रकट मानवीय मूल्यों पर कक्षा में चर्चा कर सकते हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘हार की जीत’ कहानी के लेखक कौन हैं? उनके बारे में दो बातें लिखिए।

उत्तर‘हार की जीत’ के लेखक सुदर्शन (1896–1983) हैं, जिनका वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था। उन्होंने छठी कक्षा में ही अपनी पहली कहानी लिख ली थी। कहानियों के साथ उन्होंने कविताएँ, नाटक, उपन्यास तथा फ़िल्मों के गीत भी लिखे।

2. बाबा भारती को सुलतान से कितना प्रेम था? संक्षेप में लिखिए।

उत्तरबाबा भारती को सुलतान से असीम प्रेम था। वे अपने हाथ से उसे दाना खिलाते, खरहरा करते एवं देख-देखकर प्रसन्न होते थे। प्रतिदिन संध्या को उस पर सवार हुए बिना उन्हें चैन न आता था; वे मानते थे कि सुलतान के बिना वे रह ही नहीं सकेंगे।

3. खड्गसिंह ने बाबा भारती से घोड़ा कैसे छीना?

उत्तरखड्गसिंह ने एक अपाहिज (लँगड़े) का वेश धारण किया और बाबा भारती से रामावाला तक छोड़ देने की प्रार्थना की। दयावश बाबा भारती ने उसे घोड़े पर बैठा दिया। अवसर पाते ही खड्गसिंह तनकर बैठ गया और घोड़ा दौड़ाकर ले भागा।

4. बाबा भारती ने घोड़ा वापस माँगने के बजाय खड्गसिंह से क्या प्रार्थना की और क्यों?

उत्तरबाबा भारती ने केवल यह प्रार्थना की कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे। इसका कारण यह था कि यदि लोगों को यह पता चलेगा तो वे किसी गरीब-असहाय पर विश्वास करना छोड़ देंगे और संसार से दया एवं विश्वास ही उठ जाएगा।

5. खड्गसिंह का हृदय-परिवर्तन कैसे हुआ और उसने क्या किया?

उत्तरबाबा भारती के ऊँचे विचारों – कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें – ने खड्गसिंह का हृदय बदल दिया। पश्चात्ताप से भरकर उसी रात वह चुपके से मंदिर पहुँचा और सुलतान को उसके स्थान पर बाँध गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘हार की जीत’ कहानी का केंद्रीय संदेश (मूल भाव) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘हार की जीत’ कहानी का मूल भाव यह है कि सच्चाई, उदारता एवं विश्वास के सामने बुराई एवं लालच अंततः हार जाते हैं। बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा सुलतान खो देते हैं, फिर भी वे उसे वापस नहीं माँगते; उनकी एकमात्र चिंता यह है कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें।उनके इन ऊँचे विचारों से खड्गसिंह जैसे क्रूर डाकू का हृदय बदल जाता है और वह स्वयं घोड़ा लौटा देता है। इस प्रकार बाबा भारती की प्रत्यक्ष ‘हार’ उनके सद्गुणों की सच्ची ‘जीत’ बन जाती है। कहानी हमें सिखाती है कि मानवता, दया एवं विश्वास का बल किसी भी बुराई से बड़ा होता है।

7. बाबा भारती के चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तरबाबा भारती एक आदर्श एवं महान चरित्र हैं। वे त्यागी एवं भक्त हैं – उन्होंने धन, ज़मीन एवं नगर का जीवन त्यागकर मंदिर में रहकर भजन किया। वे प्रेमी एवं संवेदनशील हैं – सुलतान से उनका प्रेम पिता-पुत्र जैसा था।वे दयालु हैं – अपाहिज की कराह सुनकर तुरंत सहायता को तैयार हो गए। सबसे बड़ी बात, वे उदार एवं विशाल हृदय वाले हैं – घोड़ा खोकर भी उन्होंने उसे वापस नहीं माँगा, केवल यह चाहा कि गरीबों पर लोगों का विश्वास बना रहे। उनका यही महान विचार खड्गसिंह को बदल देता है। इस प्रकार बाबा भारती मानवता एवं सद्गुणों के सच्चे प्रतीक हैं।

8. इस कहानी का शीर्षक ‘हार की जीत’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरकहानी का शीर्षक ‘हार की जीत’ पूर्णतः सार्थक है। ऊपरी तौर पर बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा खो देते हैं, जो उनकी ‘हार’ प्रतीत होती है। परंतु यही हार उनकी सच्ची जीत बन जाती है।उनके त्याग एवं उदार विचारों से खड्गसिंह का कठोर हृदय पिघल जाता है और वह घोड़ा लौटाकर स्वयं भलाई के मार्ग पर आ जाता है। इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की, लालच पर त्याग की तथा अविश्वास पर विश्वास की जीत होती है। बाबा भारती ने वस्तु (घोड़ा) तो खोई, पर एक मनुष्य का हृदय जीत लिया – इसीलिए शीर्षक ‘हार की जीत’ पूरी तरह उपयुक्त एवं अर्थपूर्ण है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘हार की जीत’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) सुदर्शन

(ग) जयशंकर प्रसाद

(घ) महादेवी वर्मा

उत्तर(ख) सुदर्शन।

2. सुदर्शन का वास्तविक नाम क्या था?

(क) धनपत राय

(ख) बदरीनाथ भट्ट

(ग) माखनलाल

(घ) सूर्यकांत त्रिपाठी

उत्तर(ख) बदरीनाथ भट्ट।

3. बाबा भारती के घोड़े का क्या नाम था?

(क) चेतक

(ख) बादल

(ग) सुलतान

(घ) तूफ़ान

उत्तर(ग) सुलतान।

4. खड्गसिंह कौन था?

(क) एक साधु

(ख) एक प्रसिद्ध डाकू

(ग) एक वैद्य

(घ) एक राजा

उत्तर(ख) एक प्रसिद्ध डाकू।

5. खड्गसिंह ने घोड़ा छीनने के लिए कौन-सा वेश धारण किया?

(क) साधु का

(ख) व्यापारी का

(ग) अपाहिज (लँगड़े) का

(घ) किसान का

उत्तर(ग) अपाहिज (लँगड़े) का।

6. बाबा भारती ने खड्गसिंह से क्या वचन लिया?

(क) घोड़ा लौटा देने का

(ख) घटना को किसी के सामने प्रकट न करने का

(ग) दोबारा डाका न डालने का

(घ) मंदिर में रहने का

उत्तर(ख) घटना को किसी के सामने प्रकट न करने का।

7. बाबा भारती को इस घटना के प्रकट होने का क्या डर था?

(क) उनकी बदनामी होगी

(ख) लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे

(ग) खड्गसिंह पकड़ा जाएगा

(घ) घोड़ा बीमार पड़ जाएगा

उत्तर(ख) लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे।

8. अंत में खड्गसिंह ने क्या किया?

(क) घोड़ा बेच दिया

(ख) घोड़ा अपने पास रख लिया

(ग) रात में चुपके से घोड़ा लौटा दिया

(घ) घोड़ा किसी और को दे दिया

उत्तर(ग) रात में चुपके से घोड़ा लौटा दिया।

9. “हृदय पर साँप लोटना” मुहावरे का अर्थ है—

(क) बहुत प्रसन्न होना

(ख) ईर्ष्या/लालच से जल उठना

(ग) डर जाना

(घ) सो जाना

उत्तर(ख) ईर्ष्या/लालच से जल उठना।

10. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

(क) धन ही सबसे बड़ा है

(ख) सच्चाई एवं विश्वास की बुराई पर जीत होती है

(ग) बल से सब कुछ पाया जा सकता है

(घ) घोड़े बहुत उपयोगी होते हैं

उत्तर(ख) सच्चाई एवं विश्वास की बुराई पर जीत होती है।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बाबा भारती ने घोड़ा छिन जाने पर भी उसे वापस नहीं माँगा।

कारण (R): वे नहीं चाहते थे कि लोग किसी गरीब-असहाय पर विश्वास करना छोड़ दें।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): खड्गसिंह ने अंत में घोड़ा लौटा दिया।

कारण (R): बाबा भारती के ऊँचे विचारों से उसका हृदय पश्चात्ताप से भर गया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): बाबा भारती को सुलतान से कोई लगाव नहीं था।

कारण (R): वे प्रतिदिन संध्या को सुलतान पर सवार होकर घूमने जाते थे।

उत्तर(घ) A गलत है (बाबा भारती को सुलतान से असीम प्रेम था), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था।

कारण (R): जो वस्तु उसे पसंद आ जाती, उस पर वह अपना अधिकार समझता था।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं करता (R उसके स्वभाव की एक अलग विशेषता बताता है)।

5. अभिकथन (A): कहानी का शीर्षक ‘हार की जीत’ सार्थक है।

कारण (R): बाबा भारती की प्रत्यक्ष हार उनके सद्गुणों एवं विश्वास की सच्ची जीत बन जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव & सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-सुझाव

  • लेखक का नाम सुदर्शन एवं वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट अवश्य याद रखें।
  • पात्रों के नाम सही लिखें – घोड़ा सुलतान, संत बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह
  • कहानी का केंद्रीय संदेश – ‘विश्वास एवं अच्छाई की बुराई पर जीत’ – हर उत्तर में जोड़ें।
  • मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग कहानी के संदर्भ से जोड़कर लिखें।

सामान्य गलतियाँ

  • घोड़े का नाम ‘चेतक’ लिख देना – इस कहानी में घोड़े का नाम सुलतान है।
  • यह समझ लेना कि बाबा भारती ने घोड़ा वापस माँगा – उन्होंने केवल घटना गुप्त रखने का वचन लिया।
  • खड्गसिंह के दोनों आँसुओं एवं बाबा भारती के आँसुओं के भाव में अंतर भूल जाना।
  • शब्दार्थ या मुहावरों में अशुद्ध मात्राएँ लगाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘हार की जीत’ कहानी के लेखक कौन हैं?

‘हार की जीत’ कहानी के लेखक सुदर्शन (1896–1983) हैं, जिनका वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था।

‘हार की जीत’ कहानी का मुख्य भाव क्या है?

कहानी का मुख्य भाव यह है कि सच्चाई, उदारता एवं विश्वास के सामने बुराई एवं लालच अंततः हार जाते हैं; बाबा भारती की भलाई से खड्गसिंह का हृदय बदल जाता है।

बाबा भारती ने घोड़ा वापस क्यों नहीं माँगा?

क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि यह घटना प्रकट होने पर लोग किसी गरीब-असहाय पर विश्वास करना छोड़ दें। उन्होंने केवल घटना गुप्त रखने का वचन माँगा।

कहानी का शीर्षक ‘हार की जीत’ क्यों रखा गया?

क्योंकि बाबा भारती घोड़ा खोकर (हार) भी अपने सद्गुणों एवं विश्वास से खड्गसिंह का हृदय जीत लेते हैं – यही उनकी सच्ची जीत है।

कहानी एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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