कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 5 — रहीम के दोहे प्रश्न उत्तर और भावार्थ
रहीम के दोहे प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 5 के सात दोहों का सरल भावार्थ, शब्दार्थ और पुस्तक के क्रम में अभ्यास-सहायता पढ़ें। रहीम छोटी वस्तुओं की उपयोगिता, परोपकार, प्रेम, विवेकपूर्ण वाणी और सच्ची मित्रता का महत्व समझाते हैं। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 5 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 45–50, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवि परिचय – रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना)
अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ भक्तिकाल के कवि हैं। पुस्तक के परिचय के अनुसार उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम संबंधी रचनाएँ अवधी तथा ब्रजभाषा में लिखीं और रामायण-महाभारत जैसे ग्रंथों का अध्ययन किया। पाठ में उनके सात नीति-दोहे दिए हैं।
दोहे (मूल पाठ)
पाठ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं। प्रत्येक दोहा जीवन की कोई-न-कोई सीख देता है। नीचे पाठ में दिए दोहे पढ़ें; लोक में प्रचलित पाठांतर की चर्चा आगे अलग है।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥1॥
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहिं सुजान॥2॥
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥3॥
रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥4॥
रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥5॥
रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥6॥
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥7॥
— अब्दुर्रहीम खानखाना
सार एवं भावार्थ
- सुई और तलवार: आकार या पद देखकर छोटी वस्तु अथवा व्यक्ति की उपेक्षा न करें। सिलाई का काम सुई करती है; तलवार उसकी जगह नहीं ले सकती।
- पेड़ और सरोवर: वृक्ष अपने फल और सरोवर अपना जल दूसरों को देते हैं। कवि इसी उदाहरण से समझदार लोगों को अपने साधनों का उपयोग परोपकार में करने की प्रेरणा देते हैं।
- प्रेम का धागा: कठोर व्यवहार से रिश्ते टूट सकते हैं। धागे की गाँठ पुराने मनमुटाव के निशान का रूपक है। सीख है कि संबंधों को सावधानी से निभाएँ; क्षमा, संवाद और प्रयास से विश्वास दोबारा भी बनाया जा सकता है।
- पानी के तीन अर्थ: मोती के लिए पानी उसकी चमक, मनुष्य के लिए मान-सम्मान और चून के लिए जल है। ‘चून’ को यहाँ आटा मानकर समझें—जल मिलाने से उसे गूँथ सकते हैं। शब्दकोश में चूना का अर्थ भी मिलता है। कवि सदाचार और गरिमा सँभालने की सीख देते हैं; किसी अपमानित व्यक्ति का मानवीय मूल्य समाप्त नहीं होता।
- थोड़े समय का संकट: कठिन समय में पता चलता है कि कौन साथ देता है और कौन अहित चाहता है। कवि इस पहचान के लाभ की बात करते हैं, संकट को बुलाने की नहीं।
- जीभ और कपाल: बिना सोचे बोलने के परिणाम पूरे व्यक्ति को झेलने पड़ते हैं। ‘जूती खात कपाल’ तीखी काव्यात्मक अभिव्यक्ति है; इससे हिंसा उचित नहीं हो जाती।
- सच्ची मित्रता: संपन्नता में अनेक लोग पास आते हैं; जो विपत्ति में भी साथ निभाएँ, वे सच्चे मित्र हैं।
शब्द-संदर्भ: हिन्दवी शब्दकोश — चून। पुस्तक के अभ्यास में ‘पानी’ के अर्थ सम्मान, जल और चमक दिए हैं।

शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बड़ेन | बड़ों को, बड़ी वस्तु को |
| लघु | छोटा, छोटी वस्तु |
| डारि | त्याग देना, फेंक देना |
| तलवारि | तलवार |
| तरुवर | वृक्ष, पेड़ |
| सरवर | सरोवर, तालाब |
| पियहिं | पीते हैं |
| पर काज हित | दूसरों के काम/भले के लिए |
| सँचहि | संचित करते हैं, जोड़ते हैं |
| सुजान | सज्जन, समझदार व्यक्ति |
| छिटकाय | झटककर, झटके से |
| परि जाय | पड़ जाती है |
| पानी | (यहाँ) मान-सम्मान, जल, चमक |
| सून | सूना, व्यर्थ |
| न ऊबरै | नहीं उबरता; यहाँ अपेक्षित गुण या उपयोगिता खोने का भाव |
| मानुष | मनुष्य, मानव |
| चून | आटा, पिसान; चूना अर्थ भी मिलता है |
| बिपदा / बिपति | विपत्ति, संकट |
| थोरे | थोड़े |
| हित-अनहित | भला करने वाले एवं बुरा चाहने वाले |
| जिह्वा | जीभ |
| बावरी | बावली, पागल |
| सरग-पताल | स्वर्ग और पाताल; यहाँ असंयमित, अतिशयोक्तिपूर्ण बोलना |
| कपाल | सिर, माथा |
| कसौटी | परख, जाँच का पैमाना |
| साँचे मीत | सच्चे मित्र |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है—
• सोच-समझकर बोलना चाहिए।
• मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
• धीरे-धीरे बोलना चाहिए।
• सदा सच बोलना चाहिए।
(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?
• तलवार सुई से बड़ी होती है।
• सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
• तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
• हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (दोहा) | स्तंभ 2 (भाव) |
|---|---|
| 1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ | 1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। |
| 2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥ | 2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं। |
| 3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहिं सुजान॥ | 3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए। |
पंक्तियों पर चर्चा
नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥”
(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”
सोच-विचार के लिए
दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”
(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे— “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।” इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित है। ऐसा क्यों होता है?
(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।
2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहिं सुजान॥” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
शब्दों की बात
शब्द-संपदा
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। (यहाँ इनके सरल हिंदी अर्थ दिए गए हैं; आप अपनी मातृभाषा में इनके समानार्थक शब्द भी लिख सकते हैं।)
| कविता में आए शब्द | सरल अर्थ / समानार्थक शब्द |
|---|---|
| तरुवर | वृक्ष, पेड़ |
| बिपति | विपत्ति, मुसीबत, संकट |
| छिटकाय | झटककर, झटके के साथ |
| सुजान | सज्जन, समझदार |
| सरवर | सरोवर, तालाब |
| साँचे | सच्चे |
| कपाल | सिर, माथा |
शब्द एक अर्थ अनेक
नीचे सरल हिंदी में नमूने हैं। बहुअर्थी शब्द का अर्थ उसके वाक्य से पहचानें।
“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥” इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं— सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए।
| शब्द | तीन अर्थ |
|---|---|
| कल | (1) बीता हुआ दिन / आने वाला दिन, (2) मशीन/यंत्र, (3) चैन या आराम (कल पड़ना) |
| पत्र | (1) चिट्ठी, (2) पत्ता (वृक्ष का), (3) समाचार-पत्र / पन्ना |
| कर | (1) हाथ, (2) किरण, (3) टैक्स/लगान |
| फल | (1) वृक्ष का फल, (2) परिणाम/नतीजा, (3) लाभ या प्राप्ति |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात
“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥” इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता एवं महत्ता है। अपने मनपसंद दोहे को इसी शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।
सरगम
रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने टी.वी.-रेडियो आदि माध्यमों से सुने होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की। दोहों को समूह में या अकेले गाकर मोबाइल से रिकॉर्ड कीजिए, स्वयं सुनिए और दूसरों को भी सुनाइए।
दोहा-संग्रह और अंत्याक्षरी
समूह में रहीम, वृंद, कबीर, तुलसी या बिहारी के दोहे एकत्र करके अंत्याक्षरी खेलें।
पुस्तकालय की विश्वसनीय पुस्तक से दोहा चुनें। उसका पाठ, कवि का नाम और एक वाक्य में अर्थ लिखकर संग्रह बनाएँ। खेल शुरू करने से पहले तय करें कि अगला दोहा अंतिम अक्षर से शुरू होगा या अध्यापक के बताए नियम से। उद्धरण और कवि का नाम जाँचें; मनगढ़ंत पंक्तियाँ प्रसिद्ध कवि के नाम पर न लिखें।
आज की पहेली
1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।
2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।
खोजबीन के लिए
रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं और वे किस काल के कवि माने जाते हैं?
2. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब और कैसे होती है?
3. चौथे दोहे में पानी के तीन संदर्भ कौन-से हैं?
मोती—चमक; मनुष्य—मान-सम्मान; चून—जल। चून को आटा मानें तो गूँथने में पानी का महत्व स्पष्ट होता है।
4. पहले दोहे में सुई और तलवार के उदाहरण से रहीम क्या समझाना चाहते हैं?
5. ‘बिपदाहू भली’ कहकर रहीम क्या सीख देते हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. रहीम के दोहों से हमें कौन-कौन सी जीवन-शिक्षाएँ मिलती हैं? अपने शब्दों में लिखिए।
7. “रहिमन पानी राखिये” दोहे का भावार्थ लिखिए।
रहीम पानी शब्द से अलग-अलग आवश्यक गुणों का महत्व बताते हैं। मोती की चमक उसकी पहचान है, मनुष्य के लिए गरिमा और सदाचार महत्वपूर्ण हैं, और आटा गूँथने के लिए जल चाहिए। सीख है कि जरूरी गुणों को सँभालें। कविता की अतिशयोक्ति का अर्थ यह नहीं कि सम्मान खोने पर व्यक्ति का जीवन या मूल्य समाप्त हो जाता है।
8. दूसरे दोहे के आधार पर बताइए कि प्रकृति हमें परोपकार की शिक्षा किस प्रकार देती है?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
(क) कबीरदास
(ख) तुलसीदास
(ग) अब्दुर्रहीम खानखाना
(घ) सूरदास
2. रहीम किस काल के कवि माने जाते हैं?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
3. “जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि” पंक्ति का भाव है—
(क) तलवार सबसे बड़ी होती है
(ख) सुई बेकार वस्तु है
(ग) हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है
(घ) सुई और तलवार एक समान हैं
4. ‘तरुवर’ शब्द का अर्थ है—
(क) तालाब
(ख) वृक्ष
(ग) नदी
(घ) पर्वत
5. प्रेम के धागे को रहीम किस प्रकार रखने की सलाह देते हैं?
(क) झटककर तोड़ देना चाहिए
(ख) सहेजकर रखना चाहिए, तोड़ना नहीं चाहिए
(ग) बार-बार जोड़ना चाहिए
(घ) गाँठ बाँध देनी चाहिए
6. चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कितने अर्थ बताए गए हैं?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
7. “रहिमन बिपदाहू भली” – विपत्ति को अच्छा क्यों कहा गया है?
(क) क्योंकि वह धन देती है
(ख) क्योंकि वह अपने-पराये की पहचान करा देती है
(ग) क्योंकि वह सदा बनी रहती है
(घ) क्योंकि वह सुख देती है
8. ‘जिह्वा’ वाले दोहे की मुख्य सीख क्या है?
(क) ऊँचा बोलना चाहिए
(ख) सोच-समझकर बोलना चाहिए
(ग) कम खाना चाहिए
(घ) चुप रहना चाहिए
9. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?
(क) संपत्ति (अच्छे दिनों) में
(ख) विपत्ति (संकट) के समय
(ग) उत्सव में
(घ) यात्रा के समय
10. ‘सुजान’ शब्द का अर्थ है—
(क) मूर्ख व्यक्ति
(ख) सज्जन/समझदार व्यक्ति
(ग) धनी व्यक्ति
(घ) बलवान व्यक्ति
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): रहीम के अनुसार छोटी वस्तु को त्याग नहीं देना चाहिए।
कारण (R): जहाँ सुई से काम बनता है, वहाँ तलवार किसी काम की नहीं होती।
2. अभिकथन (A): सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति केवल अपने सुख के लिए संचित करते हैं।
कारण (R): पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते।
3. अभिकथन (A): प्रेम के टूटे धागे को जोड़ने पर भी गाँठ पड़ जाती है।
कारण (R): रिश्तों में दरार आ जाने पर पहले जैसा निर्मल प्रेम नहीं रहता।
4. अभिकथन (A): थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी होती है।
कारण (R): विपत्ति के समय अपने-पराये (हित-अनहित चाहने वालों) की पहचान हो जाती है।
5. अभिकथन (A): बिना सोचे-समझे बोली गई बात का दंड जीभ को भुगतना पड़ता है।
कारण (R): जीभ कुछ भी कहकर मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, पर दंड (जूती की मार) सिर को भुगतना पड़ता है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- दोहों को लय एवं सही उच्चारण के साथ कंठस्थ कीजिए – परीक्षा में पंक्ति पूछे जाने पर सही शब्द लिख सकें।
- प्रत्येक दोहे की एक-पंक्तीय ‘सीख’ याद रखिए (जैसे – 1. हर वस्तु का महत्व, 2. परोपकार, 3. प्रेम सहेजना, 4. मान-सम्मान, 5. विपत्ति में पहचान, 6. सोच-समझकर बोलना, 7. सच्ची मित्रता)।
- ‘पानी’ के तीन अर्थ (सम्मान, जल, चमक) तथा शब्दार्थ अवश्य याद रखिए – इनसे अर्थ के संदर्भ पहचानने का अभ्यास होगा।
- भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए और संभव हो तो उदाहरण देकर समझाइए।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- रचनाकार का नाम गलत लिखना – ये दोहे रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना) के हैं, कबीर या तुलसी के नहीं।
- ‘कपाल’ का अर्थ ‘जीभ’ समझ लेना – कपाल का अर्थ है ‘सिर/माथा’।
- दोहे की पंक्तियों के शब्द बदल देना या मात्राएँ गलत लिखना।
- ‘पानी’ के केवल एक अर्थ (जल) तक सीमित रह जाना – इसके तीन अर्थ हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
इन दोहों के रचनाकार अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ हैं, जो भक्तिकाल के प्रसिद्ध नीति-कवि माने जाते हैं।
पाठ में रहीम के कितने दोहे संकलित हैं?
पाठ ‘रहीम के दोहे’ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं, जो विनम्रता, परोपकार, प्रेम, मान-सम्मान, वाणी-संयम एवं सच्ची मित्रता की सीख देते हैं।
चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कौन-कौन से तीन अर्थ हैं?
“रहिमन पानी राखिये…” दोहे में ‘पानी’ के तीन अर्थ हैं – मान-सम्मान (मनुष्य के लिए), जल (चून/आटे के लिए) तथा चमक (मोती के लिए)।
रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?
रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान विपत्ति (संकट) के समय होती है; जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे, वही सच्चा मित्र है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
