कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 6 – मेरी माँ (संस्मरण) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 6 ‘मेरी माँ’ (रचनाकार – रामप्रसाद ‘बिस्मिल’) का पूरा समाधान देता है। यह पाठ अमर क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक अंश (संस्मरण) है, जिसमें उन्होंने अपनी माँ के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता प्रकट की है। यहाँ पाठ का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर दिए गए हैं।
लेखक से परिचय – रामप्रसाद ‘बिस्मिल’
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक क्रांतिकारी वीरों ने अपना बलिदान दिया। ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा प्रसिद्ध तराना लिखने वाले रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ (1897–1927) भी उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र तीस वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें फाँसी पर लटका दिया। असाधारण प्रतिभा के धनी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ एक अच्छे कवि और लेखक भी थे। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा बहुत चर्चित रही। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह ने उन्हें बड़ा होनहार नौजवान और ग़ज़ब का शायर कहा था। प्रस्तुत पाठ ‘मेरी माँ’ उनकी आत्मकथा का ही एक अंश है, जिसमें उन्होंने अपनी माँ के अद्भुत त्याग, स्नेह एवं संस्कारों को सादर स्मरण किया है।
पाठ का सार
‘मेरी माँ’ क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक हृदयस्पर्शी अंश है। जब बिस्मिल का जन्म हुआ, उस समय भारत पर अंग्रेज़ों का अधिपत्य था। बचपन से ही वे देश की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेज़ों से जूझते रहे। जेल में रहते हुए उन्होंने चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखी, जिसे साथियों ने बाहर भेजकर प्रकाशित करवाया; इसी आत्मकथा के माध्यम से आज भी वे जन-जन के हृदय में जीवित हैं।
इस अंश में बिस्मिल अपनी माँ के प्रति गहरी श्रद्धा एवं कृतज्ञता प्रकट करते हैं। लखनऊ कांग्रेस में जाने तथा सेवा-समिति में काम करने पर दादीजी और पिताजी विरोध करते थे, किंतु माताजी ने ही उन्हें खर्च देकर एवं प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ाया। इसके लिए माँ को अक्सर पिताजी की डाँट-फटकार और दंड भी सहना पड़ता था। बिस्मिल कहते हैं कि उनमें जो जीवन एवं साहस आया, वह उनकी माताजी और गुरुदेव श्री सोमदेव की कृपा का परिणाम है। माँ ही चाहती थीं कि शिक्षा पूरी होने के बाद ही उनका विवाह हो।
माँ ग्यारह वर्ष की आयु में नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर आई थीं, किंतु अपनी इच्छाशक्ति एवं परिश्रम से उन्होंने पहले गृहकार्य सीखा और फिर स्वयं हिंदी पढ़ना आरंभ कर देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं। उन्होंने अपनी बेटियों को भी शिक्षा दी। माँ का सबसे बड़ा आदेश था – किसी की प्राणहानि न हो, शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। बिस्मिल लिखते हैं कि क्रांतिकारी जीवन में भी माँ ने उन्हें वैसा ही सहारा दिया जैसा मेजिनी को उनकी माँ ने दिया था। अंत में वे माँ को नमन करते हुए लिखते हैं कि वे ‘भारत माता’ की सेवा में अपना जीवन बलिदान कर रहे हैं और माँ की कोख को कलंकित नहीं होने देंगे; स्वाधीन भारत के इतिहास में माँ का नाम भी उज्ज्वल अक्षरों में लिखा जाएगा। यह पाठ मातृ-प्रेम, त्याग, शिक्षा के महत्त्व एवं देशभक्ति का अनुपम संदेश देता है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आधिपत्य | शासन, अधिकार, कब्ज़ा |
| आत्मकथा | स्वयं द्वारा लिखी अपनी जीवन-कथा |
| स्वतंत्रता सेनानी | देश को आज़ाद कराने वाला वीर |
| उत्साह | जोश, उमंग |
| डाँट-फटकार | क्रोध भरी झिड़की |
| दंड | सज़ा |
| देवी | देवतुल्य, पूज्य स्त्री |
| कृपा | दया, अनुग्रह |
| अनुरोध | विनती, आग्रह |
| प्रोत्साहन | उत्साह बढ़ाना, बढ़ावा |
| दृढ़ता | मज़बूती, अटलता |
| संकल्प | दृढ़ निश्चय |
| नितांत | बिलकुल, पूर्णतया |
| अशिक्षित | जो पढ़ी-लिखी न हो |
| अक्षर-बोध | अक्षरों का ज्ञान |
| देवनागरी | हिंदी, संस्कृत आदि की लिपि |
| उदार | विशाल हृदय वाला, खुले विचारों वाला |
| प्राणहानि | जान का जाना, हत्या |
| प्रतिज्ञा | वचन, प्रण |
| ॠण / उॠण | कर्ज़ / कर्ज़ से मुक्त |
| अवर्णनीय | जिसका वर्णन न किया जा सके |
| सांत्वना | ढाढ़स, दिलासा |
| बलिदान | किसी उद्देश्य के लिए प्राण न्योछावर करना |
| कलंकित | दाग़दार, लज्जित |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।’ बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी?
• भारत माता के साथ रहने की
• अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की
• अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की
• भोग-विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की
(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
• देश की सेवा करें
• कभी किसी के प्राण न लेना
• कभी किसी से छल न करना
• सदा सच बोलना
(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।”
(ख) “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए।
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. देवनागरी | (क) सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की। |
| 2. आर्यसमाज | (ख) इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति; इटली का मसीहा, जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा। |
| 3. मेजिनी | (ग) महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था। |
| 4. गोबिंद सिंह | (घ) भारत की एक भाषा-लिपि, जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं। |
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
1. बिस्मिल की माताजी जब ब्याह कर आईं तो उनकी आयु काफ़ी कम थी। (क) फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने परिवार के अनुकूल कैसे ढाला? (ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?
2. बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माताजी ने कैसे सहयोग दिया?
3. आज से कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्त्व को समझती थीं, बताइए कैसे?
4. हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?
आत्मकथा की रचना
यह पाठ रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक अंश है। आत्मकथा यानी अपनी कथा। दुनिया में अनेक लोग अपनी आत्मकथा लिखते हैं – कभी अपने लिए, तो कभी दूसरों के पढ़ने के लिए।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की ऐसी पंक्तियों की सूची बनाइए जिनसे पता लगे कि लेखक अपने बारे में कह रहा है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
शब्द-प्रयोग तरह-तरह के
(क) “माताजी उनसे अक्षर-बोध करतीं।” इस वाक्य में अक्षर-बोध का अर्थ है – अक्षर का बोध या ज्ञान। एक अन्य वाक्य देखिए – “जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं।” यहाँ पढ़ना-लिखना अर्थात् पढ़ना और लिखना। हम लेखन में शब्दों को मिलाकर छोटा बना लेते हैं, जिससे समय, स्याही, कागज़ आदि की बचत होती है। इस पाठ से ऐसे शब्द खोजकर सूची बनाइए।
आपकी बात
(क) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के मित्रों के नाम खोजिए और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
(ख) नीचे लिखे बिंदुओं को आधार बनाते हुए अपनी माँ या अपने अभिभावक से बातचीत कीजिए और उनके बारे में गहराई से जानिए कि उनका प्रिय रंग, भोज्य पदार्थ, गीत, बचपन की यादें, प्रिय स्थान आदि कौन-कौन से थे?
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
पुस्तकालय या इंटरनेट से
आप पुस्तकालय से रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा खोजकर पढ़िए। देशभक्तों से संबंधित अन्य पुस्तकें (पत्र, आत्मकथा, जीवनी आदि) पढ़िए और अपने मित्रों से साझा कीजिए।
शब्दों की बात
आप अपनी माँ को क्या कहकर संबोधित करते हैं? अन्य भाषाओं में माँ के लिए प्रयुक्त संबोधन और शब्द ढूँढ़िए। क्या उनमें कुछ समानता दिखती है? हाँ, तो क्या?
आज की पहेली
यहाँ दी गई वर्ग-पहेली में पाठ से बारह विशेषण दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर पाठ में रेखांकित कीजिए।
झरोखे से
इस भाग में रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की रचना ‘ऐ मातृभूमि!’ की पंक्तियाँ दी गई हैं – “ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो, सदा विजय हो…”। इसे ध्यान से पढ़िए और भाव समझिए।
खोजबीन के लिए
माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ पुस्तकालय से खोजें और अपनी पत्रिका बनाएँ।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘मेरी माँ’ पाठ किसकी रचना है और यह किस विधा का अंश है?
2. बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा कहाँ और किस प्रकार लिखी?
3. वकील साहब के कहने पर भी बिस्मिल ने पिताजी के हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
4. बिस्मिल की माँ का ‘मेजिनी की माता’ से क्या संबंध बताया गया है?
5. बिस्मिल अपनी माँ से क्या अंतिम वर माँगते हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. बिस्मिल की माँ के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
7. ‘मेरी माँ’ पाठ से हमें क्या-क्या प्रेरणाएँ मिलती हैं?
8. बिस्मिल के देश-प्रेम एवं सत्यनिष्ठा का परिचय पाठ के आधार पर दीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
(क) भगत सिंह
(ख) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’
(ग) चंद्रशेखर आज़ाद
(घ) अशफ़ाक़उल्ला खाँ
2. यह पाठ किस विधा का अंश है?
(क) कविता
(ख) नाटक
(ग) आत्मकथा (संस्मरण)
(घ) यात्रा-वृत्तांत
3. बिस्मिल की प्रकाशित आत्मकथा का नाम क्या रखा गया?
(क) सरफ़रोशी की तमन्ना
(ख) मेरी कहानी
(ग) निज जीवन की एक छटा
(घ) ऐ मातृभूमि
4. बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
(क) सदा सच बोलना
(ख) किसी की प्राणहानि न हो
(ग) खूब धन कमाना
(घ) कभी जेल न जाना
5. माताजी कितने वर्ष की आयु में ब्याहकर शाहजहाँपुर आई थीं?
(क) नौ वर्ष
(ख) ग्यारह वर्ष
(ग) पंद्रह वर्ष
(घ) तेरह वर्ष
6. माँ ने स्वयं कौन-सी लिपि की पुस्तकें पढ़ना सीखा?
(क) रोमन
(ख) गुरुमुखी
(ग) देवनागरी
(घ) फ़ारसी
7. बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा कहाँ लिखी?
(क) विद्यालय में
(ख) घर पर
(ग) जेल में
(घ) यात्रा के दौरान
8. बिस्मिल ने वकील साहब के कहने पर हस्ताक्षर करने से क्यों मना किया?
(क) उन्हें लिखना नहीं आता था
(ख) वे डर गए थे
(ग) वे इसे धर्म-विरुद्ध एवं पाप मानते थे
(घ) पिताजी ने मना किया था
9. बिस्मिल की माँ की तुलना किस विदेशी क्रांतिकारी की माता से की गई है?
(क) नेपोलियन
(ख) मेजिनी
(ग) लेनिन
(घ) गैरीबाल्डी
10. इस पाठ का केंद्रीय भाव क्या है?
(क) प्रकृति-सौंदर्य
(ख) मातृ-प्रेम, त्याग एवं देशभक्ति
(ग) हास्य-व्यंग्य
(घ) मित्रता
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बिस्मिल अपनी माँ को देवी मानते थे।
कारण (R): माँ ने उनका उत्साह बनाए रखा और उन्हें जीवन एवं साहस प्रदान किया।
2. अभिकथन (A): बिस्मिल की माँ जन्म से ही उच्च शिक्षित थीं।
कारण (R): वे मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर आई थीं।
3. अभिकथन (A): बिस्मिल ने वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर कर दिए।
कारण (R): बिस्मिल जीवन में सदा सत्य का आचरण करते थे।
4. अभिकथन (A): माँ का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो।
कारण (R): माँ का हृदय करुणा से भरा था और वे शत्रु को भी प्राणदंड देने के विरुद्ध थीं।
5. अभिकथन (A): बिस्मिल देश-सेवा में अपना जीवन बलिदान करने को तैयार थे।
कारण (R): वे चाहते थे कि उनकी माँ की कोख कलंकित न हो और वे अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहें।
परीक्षा-टिप्स
- रचनाकार का नाम रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ तथा विधा आत्मकथा/संस्मरण सदा याद रखें।
- आत्मकथा का नाम ‘निज जीवन की एक छटा’ एवं माँ का आदेश ‘किसी की प्राणहानि न हो’ – ये तथ्य प्रायः पूछे जाते हैं।
- उत्तर लिखते समय माँ के त्याग, शिक्षा-प्रेम एवं करुणा को उदाहरण सहित लिखें।
- दीर्घ उत्तरों को बिंदुओं में सजाकर एवं पाठ की घटनाओं का संदर्भ देकर लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- रचनाकार का नाम केवल ‘बिस्मिल’ न लिखकर पूरा रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ लिखें; इसे भगत सिंह या आज़ाद से न मिलाएँ।
- इसे कविता न समझें – यह गद्य (आत्मकथा का अंश) है।
- ‘मेजिनी’ इटली का क्रांतिकारी था, इसे भारतीय न समझें।
- माँ को जन्म से शिक्षित न लिखें; उन्होंने स्वयं परिश्रम से शिक्षा पाई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार अमर क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ (1897–1927) हैं। यह उनकी आत्मकथा का एक अंश है।
‘मेरी माँ’ पाठ किस विधा की रचना है?
यह गद्य रचना है – रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा (संस्मरण) का एक अंश, जिसमें उन्होंने अपनी माँ का सादर स्मरण किया है।
बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?
माँ का सबसे बड़ा आदेश यह था कि किसी की प्राणहानि न हो – शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। यह उनकी करुणा एवं अहिंसा का परिचायक है।
इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
यह पाठ हमें माता-पिता के आदर, शिक्षा के महत्त्व, सत्य के आचरण, करुणा एवं देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
पाठ-अंश एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
