कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 6 — मेरी माँ प्रश्न उत्तर और सार

मेरी माँ प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 6 रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का अंश है। यहाँ पाठ का सार, माँ के शिक्षा-प्रेम और प्रोत्साहन की व्याख्या, पुस्तक के क्रम में अभ्यास तथा बारह विशेषणों की पहेली का हल है। व्यक्तिगत गतिविधियों के उत्तर अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 6 रचनाकार: रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ विधा: गद्य (संस्मरण / आत्मकथा-अंश) स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 6 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 51–59, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

लेखक से परिचय – रामप्रसाद ‘बिस्मिल’

रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ (1897–1927) स्वतंत्रता-संग्राम के क्रांतिकारी, कवि और लेखक थे। ‘मेरी माँ’ उनकी आत्मकथा का अंश है। इसमें वे माँ की शिक्षा, स्नेह, प्रोत्साहन और करुणा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

लेखक-संबंधी स्पष्टता: दी गई NCERT प्रति के परिचय में “सरफ़रोशी की तमन्ना” रामप्रसाद बिस्मिल से जोड़ी गई है। रेख़्ता के कवि-अभिलेख में इसके रचनाकार बिस्मिल अज़ीमाबादी हैं। दोनों अलग व्यक्ति हैं। इस पाठ ‘मेरी माँ’ के लेखक रामप्रसाद बिस्मिल ही हैं।

पाठ का सार

‘मेरी माँ’ क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक हृदयस्पर्शी अंश है। जब बिस्मिल का जन्म हुआ, उस समय भारत पर अंग्रेज़ों का अधिपत्य था। वे भारत की स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारी आंदोलन में सक्रिय रहे। जेल में रहते हुए उन्होंने चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखी, जिसे साथियों ने बाहर भेजकर प्रकाशित करवाया; इसी आत्मकथा के माध्यम से आज भी वे जन-जन के हृदय में जीवित हैं।

इस अंश में बिस्मिल अपनी माँ के प्रति गहरी श्रद्धा एवं कृतज्ञता प्रकट करते हैं। लखनऊ कांग्रेस में जाने तथा सेवा-समिति में काम करने पर दादीजी और पिताजी विरोध करते थे, किंतु माताजी ने ही उन्हें खर्च देकर एवं प्रोत्साहन देकर आगे बढ़ाया। इसके लिए माँ को अक्सर पिताजी की डाँट-फटकार और दंड भी सहना पड़ता था। बिस्मिल कहते हैं कि उनमें जो जीवन एवं साहस आया, वह उनकी माताजी और गुरुदेव श्री सोमदेव की कृपा का परिणाम है। माँ ही चाहती थीं कि शिक्षा पूरी होने के बाद ही उनका विवाह हो।

माँ ग्यारह वर्ष की आयु में नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर आई थीं, किंतु अपनी इच्छाशक्ति एवं परिश्रम से उन्होंने पहले गृहकार्य सीखा और फिर स्वयं हिंदी पढ़ना आरंभ कर देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं। उन्होंने अपनी बेटियों को भी शिक्षा दी। माँ का सबसे बड़ा आदेश था – किसी की प्राणहानि न हो, शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। बिस्मिल लिखते हैं कि क्रांतिकारी जीवन में भी माँ ने उन्हें वैसा ही सहारा दिया जैसा मेजिनी को उनकी माँ ने दिया था। अंत में वे माँ को नमन करते हुए लिखते हैं कि वे ‘भारत माता’ की सेवा में अपना जीवन बलिदान कर रहे हैं और माँ की कोख को कलंकित नहीं होने देंगे; स्वाधीन भारत के इतिहास में माँ का नाम भी उज्ज्वल अक्षरों में लिखा जाएगा। यह पाठ मातृ-प्रेम, त्याग, शिक्षा के महत्त्व एवं देशभक्ति का अनुपम संदेश देता है।

आँगन में एक वयस्क महिला अपनी शिक्षित सहेली की सहायता से पढ़ना-लिखना सीखती हुई
माँ की इच्छाशक्ति और सहेलियों से अक्षर-ज्ञान पाने की बात समझाने वाला कल्पित दृश्य। ClearStudy का AI-निर्मित मौलिक चित्र; ये ऐतिहासिक व्यक्तियों के प्रमाणित चित्र नहीं हैं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
आधिपत्यशासन, अधिकार, कब्ज़ा
आत्मकथास्वयं द्वारा लिखी अपनी जीवन-कथा
स्वतंत्रता सेनानीदेश को आज़ाद कराने वाला वीर
उत्साहजोश, उमंग
डाँट-फटकारक्रोध भरी झिड़की
दंडसज़ा
देवीदेवतुल्य, पूज्य स्त्री
कृपादया, अनुग्रह
अनुरोधविनती, आग्रह
प्रोत्साहनउत्साह बढ़ाना, बढ़ावा
दृढ़तामज़बूती, अटलता
संकल्पदृढ़ निश्चय
नितांतबिलकुल, पूर्णतया
अशिक्षितजो पढ़ी-लिखी न हो
अक्षर-बोधअक्षरों का ज्ञान
देवनागरीहिंदी, संस्कृत आदि की लिपि
उदारविशाल हृदय वाला, खुले विचारों वाला
प्राणहानिजान का जाना, हत्या
प्रतिज्ञावचन, प्रण
ऋण / उऋणकर्ज़ / कर्ज़ से मुक्त
अवर्णनीयजिसका वर्णन न किया जा सके
सांत्वनाढाँढ़स, दिलासा
बलिदानकिसी उद्देश्य के लिए प्राण न्योछावर करना
कलंकितदाग़दार, लज्जित

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।’ बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी?

• भारत माता के साथ रहने की

• अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की

• अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की

• भोग-विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की

उत्तर★ अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की।बिस्मिल की एकमात्र इच्छा थी कि वे एक बार श्रद्धापूर्वक अपनी माँ के चरणों की सेवा कर सकें; किंतु देश-सेवा में बलिदान निश्चित होने के कारण उन्हें यह इच्छा पूरी होती नहीं दिखाई देती थी।

(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?

• देश की सेवा करें

• कभी किसी के प्राण न लेना

• कभी किसी से छल न करना

• सदा सच बोलना

उत्तर★ कभी किसी के प्राण न लेना।माँ का सबसे बड़ा आदेश यही था कि किसी की प्राणहानि न हो – शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। यही करुणा एवं अहिंसा का भाव बिस्मिल के जीवन का मार्गदर्शक बना।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह कक्षा में मित्रों के साथ करने वाली चर्चा-गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने पाठ के संदर्भ को आधार बनाया।पहले प्रश्न का उत्तर इसलिए चुना क्योंकि पाठ में स्पष्ट लिखा है कि बिस्मिल केवल माँ के चरणों की सेवा करना चाहते थे, पर बलिदान के कारण यह इच्छा अधूरी रह जाने वाली थी। दूसरे प्रश्न का उत्तर इसलिए चुना क्योंकि पाठ में माँ का ‘सबसे बड़ा आदेश’ ही यह बताया गया है कि किसी की प्राणहानि न हो।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।”

अर्थ/विचारइस पंक्ति में बिस्मिल अपनी माँ के प्रभाव को स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें ऐसी त्यागमयी, साहसी एवं संस्कारी माँ न मिलतीं, तो वे भी सामान्य लोगों की तरह केवल अपने भरण-पोषण एवं सांसारिक झंझटों में ही उलझे रहते।माँ के प्रोत्साहन एवं संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को दिशा दी और देश-सेवा के महान मार्ग पर अग्रसर किया। इससे पता चलता है कि लेखक अपने जीवन में माँ के योगदान को महत्व देते हैं।

(ख) “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”

अर्थ/विचारमाँ का आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो। बिस्मिल इस आदेश का इतना सम्मान करते थे कि उसे निभाने के लिए उन्हें अपनी प्रतिज्ञा दो-एक बार भंग करनी पड़ी। पाठ इस अंश में उन घटनाओं या प्रतिज्ञा का विस्तार नहीं बताता, इसलिए कोई खास योजना अनुमान से नहीं जोड़नी चाहिए।इससे माँ के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा एवं आज्ञाकारिता प्रकट होती है। एक क्रांतिकारी होते हुए भी उन्होंने माँ की दी हुई करुणा एवं अहिंसा की सीख को सर्वोपरि माना।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए।

शब्दअर्थ या संदर्भ
1. देवनागरी(क) सिखों के दसवें मानव गुरु थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।
2. आर्यसमाज(ख) इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति; इटली का मसीहा, जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा।
3. मेजिनी(ग) महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था।
4. गोबिंद सिंह(घ) भारत की एक लिपि, जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।
सही मिलान1. देवनागरी → (घ) भारत की एक लिपि जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि लिखी जाती हैं।2. आर्यसमाज → (ग) महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था।3. मेजिनी → (ख) इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति; इटली का मसीहा।4. गोबिंद सिंह → (क) सिखों के दसवें मानव गुरु, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

1. बिस्मिल की माताजी जब ब्याह कर आईं तो उनकी आयु काफ़ी कम थी। (क) फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने परिवार के अनुकूल कैसे ढाला? (ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?

उत्तर(क) माताजी मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर शाहजहाँपुर आई थीं। दादीजी की छोटी बहन ने उन्हें गृहकार्य की शिक्षा दी और थोड़े ही दिनों में उन्होंने घर के सभी काम-काज समझ लिए तथा भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं। इस प्रकार उन्होंने स्वयं को परिवार के अनुकूल ढाल लिया।(ख) बिस्मिल के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद उन्हें स्वयं पढ़ने का शौक जागा। मुहल्ले की शिक्षित सखी-सहेलियों से वे अक्षर-बोध करतीं और घर का काम पूरा करने के बाद बचे समय में पढ़ना-लिखना करतीं। अपने परिश्रम के बल पर थोड़े ही दिनों में वे देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं।

2. बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माताजी ने कैसे सहयोग दिया?

उत्तरमाताजी ने सदैव बिस्मिल का उत्साह बढ़ाया। लखनऊ कांग्रेस जाने एवं सेवा-समिति में काम करने पर दादीजी-पिताजी के विरोध के बावजूद उन्होंने खर्च देकर एवं प्रोत्साहित करके बिस्मिल को आगे बढ़ाया, भले ही इसके लिए उन्हें स्वयं डाँट एवं दंड सहना पड़ा।माँ के प्रोत्साहन एवं सद्व्यवहार ने ही बिस्मिल के जीवन में वह दृढ़ता उत्पन्न की कि किसी भी आपत्ति या संकट में भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं त्यागा। बिस्मिल स्वयं कहते हैं कि उनमें जो जीवन एवं साहस आया, वह माँ की ही कृपा का परिणाम है।

3. आज से कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्त्व को समझती थीं, बताइए कैसे?

उत्तरबिस्मिल की माँ स्वयं अशिक्षित होते हुए भी शिक्षा का महत्त्व भली-भाँति समझती थीं। इसी कारण उन्होंने अपने मन में पढ़ने का शौक जगाकर स्वयं हिंदी सीखी और देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं।उन्होंने अपनी बेटियों को भी छोटी आयु में स्वयं शिक्षा दी और बिस्मिल के विवाह के विषय में यही आग्रह किया कि शिक्षा पूरी करने के बाद ही विवाह हो। इन्हीं बातों से सिद्ध होता है कि वे शिक्षा को जीवन की आधारशिला मानती थीं।

4. हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?

उत्तरबिस्मिल की माँ ने परिवार के विरोध के बावजूद बेटे को देश-सेवा एवं सामाजिक कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया तथा शिक्षा को विवाह से अधिक महत्त्व दिया – यह उनकी स्वतंत्र सोच का प्रमाण है।वे चाहती थीं कि शत्रु को भी कभी प्राणदंड न दिया जाए, जो उनकी विशाल एवं उदार करुणा दर्शाता है। बिस्मिल लिखते हैं कि आर्यसमाज में प्रवेश के बाद माँ से वार्तालाप होने पर उनके विचार और भी उदार हो गए थे। इस प्रकार वे स्वतंत्र एवं उदार विचारों वाली महिला थीं।

आत्मकथा की रचना

आत्मकथा लेखक की अपनी जीवन-कथा होती है।

(क) ऐसी पंक्तियाँ पहचानिए जिनसे लेखक के अपने बारे में बोलने का पता चलता है।

नमूना सूची
  • “लखनऊ कांग्रेस में जाने के लिए मेरी बड़ी इच्छा थी।”
  • “मैं बड़े उत्साह के साथ सेवा-समिति में सहयोग देता था।”
  • “मैंने तुरंत उत्तर दिया कि यह तो धर्म विरुद्ध होगा”
  • “अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था”
  • “जब से मैंने आर्यसमाज में प्रवेश किया, माताजी से खूब वार्तालाप होता।”

‘मैं’, ‘मेरी’ और ‘अपने जीवन’ जैसे प्रयोग बताते हैं कि लेखक अपने अनुभव लिख रहा है।

(ख) समूह की सूची साझा कीजिए।

हर पंक्ति के साथ बताइए कि उसमें लेखक का कौन-सा अनुभव या गुण सामने आया। उद्धरण देते समय पुस्तक के शब्द जाँचें।

शब्द-प्रयोग तरह-तरह के

पाठ में शब्दों को मिलाकर बनाए छोटे रूप खोजिए और खोलकर अर्थ लिखिए।

पाठ का रूपसरल विस्तार
अक्षर-बोधअक्षरों का बोध/ज्ञान
पढ़ना-लिखनापढ़ना और लिखना
डाँट-फटकारडाँट और फटकार
काम-काजकाम और काज
सखी-सहेलीसखी और सहेली
देश-सेवादेश की सेवा
पालन-पोषणपालन और पोषण
भोग-विलासभोग और विलास
जन्म-जन्मांतरजन्म और आगे के जन्म
चरण-कमलकमल के समान चरण

ये सब एक ही तरह से नहीं खुलते: कुछ में ‘और’, कुछ में ‘की’ तथा कुछ में तुलना का संबंध है।

आपकी बात

(क) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के मित्रों के नाम खोजिए और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

खोजबीन के लिए नमूना

अशफ़ाक़उल्ला खाँ, चंद्रशेखर आज़ाद, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह बिस्मिल से जुड़े क्रांतिकारी साथी थे। उनके योगदान पर अलग-अलग जानकारी खोजें। साथी होना और किसी विशेष घटना में उपस्थित होना एक ही बात नहीं है। ठाकुर रोशन सिंह काकोरी की रेल-घटना में उपस्थित नहीं थे, फिर भी ब्रिटिश सरकार ने उन्हें मुकदमे में फाँसी की सजा दी। स्रोत: न्यू इंडिया समाचार, जनवरी 2023।

(ख) नीचे लिखे बिंदुओं को आधार बनाते हुए अपनी माँ या अपने अभिभावक से बातचीत कीजिए और उनके बारे में गहराई से जानिए कि उनका प्रिय रंग, भोज्य पदार्थ, गीत, बचपन की यादें, प्रिय स्थान आदि कौन-कौन से थे?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह घर पर करने वाली साक्षात्कार-गतिविधि है। आप अपनी माँ/अभिभावक से प्रेमपूर्वक प्रश्न पूछिए, जैसे – “आपका जन्म कहाँ हुआ था?”, “आपकी प्रिय पुस्तक का नाम क्या है?”, “आपका प्रिय रंग, गीत एवं भोजन कौन-सा है?”, “बचपन की सबसे सुंदर याद कौन-सी है?”उनके उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में नोट कीजिए। इस गतिविधि से आपको अपने अभिभावक को और निकट से जानने एवं उनके प्रति आदर बढ़ाने का अवसर मिलेगा। (उत्तर प्रत्येक विद्यार्थी के अनुसार अलग-अलग होंगे।)

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

पुस्तकालय या इंटरनेट से

आप पुस्तकालय से रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा खोजकर पढ़िए। देशभक्तों से संबंधित अन्य पुस्तकें (पत्र, आत्मकथा, जीवनी आदि) पढ़िए और अपने मित्रों से साझा कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह पठन-गतिविधि है। पुस्तकालय अथवा विश्वसनीय इंटरनेट स्रोत से रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा पढ़िए। साथ ही महात्मा गांधी की ‘सत्य के प्रयोग’, भगत सिंह के पत्र तथा अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनियाँ पढ़कर उनके विचार एवं बलिदान कक्षा में अपने मित्रों के साथ साझा कीजिए।

शब्दों की बात

आप अपनी माँ को क्या कहकर संबोधित करते हैं? अन्य भाषाओं में माँ के लिए प्रयुक्त संबोधन और शब्द ढूँढ़िए। क्या उनमें कुछ समानता दिखती है? हाँ, तो क्या?

उत्तरहम अपनी माँ को प्रायः माँ, मम्मी, अम्मा, मा या माई कहकर पुकारते हैं। अन्य भाषाओं में – अंग्रेज़ी में Mother/Mom, संस्कृत में माता/जननी, मराठी में आई, बांग्ला में मा, तमिल में अम्मा, पंजाबी में माँ/बेबे, उर्दू में अम्मी।समानता: इनमें कई शब्दों में ‘म’ (m) ध्वनि है; मराठी ‘आई’ जैसे शब्द अलग हैं, जैसे – माँ, मा, मम्मी, Mother, माता। यह उदाहरणों की समानता है, सभी भाषाओं के बारे में कोई अनिवार्य नियम नहीं। अलग भाषाओं के शब्दों का सही उच्चारण उन भाषाओं के जानकारों से पूछें।

आज की पहेली

यहाँ दी गई वर्ग-पहेली में पाठ से बारह विशेषण दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर पाठ में रेखांकित कीजिए।

बारह शब्द और उनके स्थान

ऊपर से पंक्तियाँ और बाएँ से स्तंभ गिनें।

विशेषणवर्ग-पहेली में स्थान
मंगलमयीपंक्ति 1, स्तंभ 1–5 →
प्रत्येकपंक्ति 2, स्तंभ 1–3 →
मनोहरस्तंभ 4, पंक्ति 1–4 ↓
छोटीपंक्ति 2, स्तंभ 5–6 →
ग्यारहपंक्ति 3, स्तंभ 2–4 →
खूबपंक्ति 3, स्तंभ 5–6 →
धार्मिकस्तंभ 1, पंक्ति 3–5 ↓
साधारणपंक्ति 4, स्तंभ 2–5 →
बड़ास्तंभ 6, पंक्ति 3–4 ↓
दुखभरीपंक्ति 5, स्तंभ 2–5 →
महानपंक्ति 6, स्तंभ 1–3 →
स्वाधीनपंक्ति 6, स्तंभ 4–6 →

‘नो’ अलग उत्तर नहीं है: म + नो + ह + र से ‘मनोहर’ बनता है। पुस्तक में शब्द का वही रूप रेखांकित करें—जैसे ‘छोटी आयु’, ‘ग्यारह वर्ष’, ‘मनोहर रूप’, ‘धार्मिक जीवन’, ‘खूब वार्तालाप’ और ‘महान संकट’। ‘खूब’ यहाँ बहुत/अधिक वार्तालाप की मात्रा बताता है; दूसरे वाक्यों में इसका प्रयोग अलग हो सकता है।

झरोखे से

इस भाग में रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की रचना ‘ऐ मातृभूमि!’ की पंक्तियाँ दी गई हैं – “ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो, सदा विजय हो…”। इसे ध्यान से पढ़िए और भाव समझिए।

उत्तर (भाव)इस प्रार्थना-गीत में कवि मातृभूमि की जय एवं विजय की कामना करते हैं तथा ईश्वर से ऐसी भक्ति माँगते हैं कि वे सुख में मातृभूमि को न भूलें और दुख में कायर न बनें। यह गीत देशभक्ति एवं साहस का अनुपम संदेश देता है। (इसे लय के साथ कक्षा में सस्वर पढ़िए।)

खोजबीन के लिए

माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ पुस्तकालय से खोजें और अपनी पत्रिका बनाएँ।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह संकलन-गतिविधि है। माँ पर लिखी कविताएँ, कहानियाँ एवं गीत – जैसे ‘लोरी’, सुभद्रा कुमारी चौहान की रचनाएँ या ‘माँ’ विषयक कविताएँ – पुस्तकालय से खोजिए। इन्हें सुंदर अक्षरों में लिखकर, चित्रों से सजाकर अपनी हस्तलिखित पत्रिका तैयार कीजिए और कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘मेरी माँ’ पाठ किसकी रचना है और यह किस विधा का अंश है?

उत्तर‘मेरी माँ’ पाठ अमर क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की रचना है। यह उनकी आत्मकथा का अंश का एक अंश है, जिसमें उन्होंने अपनी माँ के त्याग, स्नेह एवं संस्कारों को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया है।

2. बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा कहाँ और किस प्रकार लिखी?

उत्तरबिस्मिल ने अपनी आत्मकथा जेल में रहते हुए चोरी-छिपे लिखी और अंग्रेज़ों से बचते-बचाते उसे जेल से बाहर भेजते रहे। बाद में उनके साथियों ने उसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से प्रकाशित करवा दिया।

3. वकील साहब के कहने पर भी बिस्मिल ने पिताजी के हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?

उत्तरवकील ने बिस्मिल से वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने को कहा, पर बिस्मिल ने इसे धर्म-विरुद्ध एवं पाप माना। मुकदमा खारिज होने की बात सुनकर भी वे विचलित नहीं हुए; वे जीवन में सदा सत्य का आचरण करते थे।

4. बिस्मिल की माँ का ‘मेजिनी की माता’ से क्या संबंध बताया गया है?

उत्तरबिस्मिल लिखते हैं कि शिक्षा के अतिरिक्त क्रांतिकारी जीवन में भी उनकी माँ ने उन्हें वैसी ही सहायता दी, जैसी इटली के क्रांतिकारी मेजिनी को उनकी माता ने दी थी। अर्थात् दोनों माताओं ने अपने पुत्रों को देश-सेवा के लिए प्रेरित किया।

5. बिस्मिल अपनी माँ से क्या अंतिम वर माँगते हैं?

उत्तरबिस्मिल माँ से यह वर माँगते हैं कि अंतिम समय में भी उनका हृदय किसी प्रकार विचलित न हो और वे माँ के चरण-कमलों को प्रणाम करके, परमात्मा का स्मरण करते हुए धैर्यपूर्वक अपना शरीर त्याग सकें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. बिस्मिल की माँ के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तरबिस्मिल की माँ एक आदर्श, त्यागमयी एवं साहसी महिला थीं। मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर आईं, किंतु अपनी इच्छाशक्ति से उन्होंने पहले गृहकार्य सीखा और फिर स्वयं हिंदी पढ़कर देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं।वे शिक्षा का महत्त्व समझती थीं और अपनी बेटियों को भी शिक्षा देती थीं। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने बेटे को देश-सेवा के लिए प्रोत्साहित किया और इसके लिए स्वयं डाँट एवं दंड सहा। उनका हृदय करुणा से भरा था – वे चाहती थीं कि शत्रु को भी प्राणदंड न मिले। इस प्रकार वे साहसी, उदार, करुणामयी एवं संस्कारी माँ थीं, जिन्होंने बिस्मिल को साधारण से असाधारण बना दिया।

7. ‘मेरी माँ’ पाठ से हमें क्या-क्या प्रेरणाएँ मिलती हैं?

उत्तर‘मेरी माँ’ पाठ हमें अनेक प्रेरणाएँ देता है। पहली, हमें अपने माता-पिता का आदर एवं उनके त्याग के प्रति कृतज्ञता रखनी चाहिए, क्योंकि वे ही हमारे जीवन को सँवारते हैं। दूसरी, शिक्षा का महत्त्व सर्वोपरि है – बिस्मिल की माँ ने अशिक्षित होते हुए भी अपने परिश्रम से स्वयं को शिक्षित किया।तीसरी, हमें सत्य का आचरण करना चाहिए, जैसे बिस्मिल ने झूठे हस्ताक्षर करने से इनकार किया। चौथी, करुणा एवं अहिंसा का भाव बनाए रखना चाहिए। और सबसे बढ़कर, यह पाठ देशभक्ति, त्याग एवं बलिदान की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि परिवार का सहयोग, शिक्षा और अपने प्रयास व्यक्ति के विकास में सहायक हैं।

8. बिस्मिल के देश-प्रेम एवं सत्यनिष्ठा का परिचय पाठ के आधार पर दीजिए।

उत्तररामप्रसाद ‘बिस्मिल’ अपूर्व देशभक्त एवं सत्यनिष्ठ व्यक्ति थे। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे, जेल गए और अत्याचार सहे और अंततः अपना जीवन भारत माता की सेवा में बलिदान कर दिया। वे माँ से कहते हैं कि उन्होंने माँ की कोख कलंकित नहीं की और अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहे।सत्यनिष्ठा का परिचय इस घटना से मिलता है जब वकील के बार-बार कहने पर भी, और मुकदमा खारिज होने का भय होने पर भी, उन्होंने पिताजी के झूठे हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे इसे धर्म-विरुद्ध मानते थे। वे जीवन में सदा सत्य का आचरण करते थे। इस प्रकार वे देश-प्रेम एवं सत्यनिष्ठा की जीती-जागती मिसाल थे।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?

(क) भगत सिंह

(ख) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’

(ग) चंद्रशेखर आज़ाद

(घ) अशफ़ाक़उल्ला खाँ

उत्तर(ख) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’।

2. यह पाठ किस विधा का अंश है?

(क) कविता

(ख) नाटक

(ग) आत्मकथा का अंश

(घ) यात्रा-वृत्तांत

उत्तर(ग) आत्मकथा का अंश।

3. बिस्मिल की प्रकाशित आत्मकथा का नाम क्या रखा गया?

(क) सरफ़रोशी की तमन्ना

(ख) मेरी कहानी

(ग) निज जीवन की एक छटा

(घ) ऐ मातृभूमि

उत्तर(ग) निज जीवन की एक छटा।

4. बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?

(क) सदा सच बोलना

(ख) किसी की प्राणहानि न हो

(ग) खूब धन कमाना

(घ) कभी जेल न जाना

उत्तर(ख) किसी की प्राणहानि न हो।

5. माताजी कितने वर्ष की आयु में ब्याहकर शाहजहाँपुर आई थीं?

(क) नौ वर्ष

(ख) ग्यारह वर्ष

(ग) पंद्रह वर्ष

(घ) तेरह वर्ष

उत्तर(ख) ग्यारह वर्ष।

6. माँ ने स्वयं कौन-सी लिपि की पुस्तकें पढ़ना सीखा?

(क) रोमन

(ख) गुरुमुखी

(ग) देवनागरी

(घ) फ़ारसी

उत्तर(ग) देवनागरी।

7. बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा कहाँ लिखी?

(क) विद्यालय में

(ख) घर पर

(ग) जेल में

(घ) यात्रा के दौरान

उत्तर(ग) जेल में।

8. बिस्मिल ने वकील साहब के कहने पर हस्ताक्षर करने से क्यों मना किया?

(क) उन्हें लिखना नहीं आता था

(ख) वे डर गए थे

(ग) वे इसे धर्म-विरुद्ध एवं पाप मानते थे

(घ) पिताजी ने मना किया था

उत्तर(ग) वे इसे धर्म-विरुद्ध एवं पाप मानते थे।

9. बिस्मिल की माँ की तुलना किस विदेशी क्रांतिकारी की माता से की गई है?

(क) नेपोलियन

(ख) मेजिनी

(ग) लेनिन

(घ) गैरीबाल्डी

उत्तर(ख) मेजिनी।

10. इस पाठ का केंद्रीय भाव क्या है?

(क) प्रकृति-सौंदर्य

(ख) मातृ-प्रेम, त्याग एवं देशभक्ति

(ग) हास्य-व्यंग्य

(घ) मित्रता

उत्तर(ख) मातृ-प्रेम, त्याग एवं देशभक्ति।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): बिस्मिल अपनी माँ को देवी मानते थे।

कारण (R): माँ ने उनका उत्साह बनाए रखा और उन्हें जीवन एवं साहस प्रदान किया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): बिस्मिल की माँ जन्म से ही उच्च शिक्षित थीं।

कारण (R): वे मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में नितांत अशिक्षित ग्रामीण कन्या के रूप में ब्याहकर आई थीं।

उत्तर(घ) A गलत है (माँ जन्म से शिक्षित नहीं थीं, उन्होंने बाद में स्वयं शिक्षा पाई), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): बिस्मिल ने वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर कर दिए।

कारण (R): बिस्मिल जीवन में सदा सत्य का आचरण करते थे।

उत्तर(घ) A गलत है (बिस्मिल ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): माँ का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो।

कारण (R): माँ का हृदय करुणा से भरा था और वे शत्रु को भी प्राणदंड देने के विरुद्ध थीं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): बिस्मिल देश-सेवा में अपना जीवन बलिदान करने को तैयार थे।

कारण (R): वे चाहते थे कि उनकी माँ की कोख कलंकित न हो और वे अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहें।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-टिप्स

  • रचनाकार का नाम रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ तथा विधा आत्मकथा का अंश सदा याद रखें।
  • आत्मकथा का नाम ‘निज जीवन की एक छटा’ एवं माँ का आदेश ‘किसी की प्राणहानि न हो’ – इन्हें पाठ की घटनाओं से जोड़कर समझें।
  • उत्तर लिखते समय माँ के त्याग, शिक्षा-प्रेम एवं करुणा को उदाहरण सहित लिखें।
  • दीर्घ उत्तरों को बिंदुओं में सजाकर एवं पाठ की घटनाओं का संदर्भ देकर लिखें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • रचनाकार का नाम केवल ‘बिस्मिल’ न लिखकर पूरा रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ लिखें; इसे भगत सिंह या आज़ाद से न मिलाएँ।
  • इसे कविता न समझें – यह गद्य (आत्मकथा का अंश) है।
  • ‘मेजिनी’ इटली का क्रांतिकारी था, इसे भारतीय न समझें।
  • माँ को जन्म से शिक्षित न लिखें; उन्होंने स्वयं परिश्रम से शिक्षा पाई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?

‘मेरी माँ’ पाठ के रचनाकार अमर क्रांतिकारी रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ (1897–1927) हैं। यह उनकी आत्मकथा का एक अंश है।

‘मेरी माँ’ पाठ किस विधा की रचना है?

यह गद्य रचना है – रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का अंश का एक अंश, जिसमें उन्होंने अपनी माँ का सादर स्मरण किया है।

बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?

माँ का सबसे बड़ा आदेश यह था कि किसी की प्राणहानि न हो – शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना। यह उनकी करुणा एवं अहिंसा का परिचायक है।

इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

यह पाठ हमें माता-पिता के आदर, शिक्षा के महत्त्व, सत्य के आचरण, करुणा एवं देशभक्ति की प्रेरणा देता है।

पाठ-अंश एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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