कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 9 — मैया मैं नहिं माखन खायो प्रश्न उत्तर और भावार्थ
मैया मैं नहिं माखन खायो प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 9 का पद, भावार्थ, ब्रजभाषा के शब्द, सभी मिलान और समय की गणनाएँ पढ़ें। छींका, घरेलू वस्तुओं, दूध से बने पदार्थों और सहपाठियों की सहायता की गतिविधियाँ भी समझें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 9 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 94–104, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवि परिचय – सूरदास
सूरदास ब्रजभाषा के भक्तिकवि हैं। पुस्तक का परिचय उनका जीवन 15वीं–16वीं शताब्दी के बीच मानता है और ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं पर लिखे पदों का उल्लेख करता है। इस पद में बालक के तर्क और यशोदा की ममता से वात्सल्य भाव उभरता है। निश्चित जन्म-मृत्यु तिथियाँ इस परिचय में नहीं दी गई हैं।
पद (मूल पाठ)
इस पद में नटखट बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
— सूरदास
भावार्थ
पहली पंक्ति (टेक): बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं – “माँ, मैंने माखन (मक्खन) नहीं खाया।” यही बात पूरे पद की टेक है, जिसे वे बार-बार दोहराकर अपनी बात सिद्ध करना चाहते हैं।
पहला पद: श्रीकृष्ण कहते हैं – सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था। चारों पहर मैं बंसीवट (वट वृक्ष) के पास भटकता रहा और साँझ ढलने पर ही घर लौटा हूँ। फिर मक्खन चुराने का समय मुझे मिला ही कब?
दूसरा पद: मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें (भुजाएँ) भी छोटी हैं; फिर इतनी ऊँचाई पर लटके छींके तक मैं किस प्रकार पहुँच सकता हूँ? असल में ये सब ग्वाल-बाल (साथी बच्चे) मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरदस्ती मेरे मुँह पर मक्खन लगा (पोत) दिया है।
तीसरा पद: माँ, तुम तो मन की बड़ी भोली हो, इसलिए इन साथियों की बातों पर विश्वास कर लिया। लगता है तुम्हारे मन में कोई भेद उत्पन्न हो गया है, जो तुम मुझे पराया (किसी और का जना हुआ) समझने लगी हो।
चौथा पद: रूठकर श्रीकृष्ण कहते हैं – लो, अपनी यह लाठी और कंबल वापस ले लो; तुमने मुझे बहुत नाच नचाया (बहुत परेशान किया)। सूरदास कहते हैं कि बालक की यह भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने श्रीकृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।
सार
‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ महाकवि सूरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध वात्सल्यपूर्ण पद है, जिसमें श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का सजीव चित्रण हुआ है। पद का आरंभ बालक कृष्ण की इसी टेक से होता है कि “माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया।” माखन खाने के आरोप पर श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क प्रस्तुत करते हैं, ताकि स्वयं को निर्दोष सिद्ध कर सकें।
वे कहते हैं कि सवेरे ही माँ ने उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था; चारों पहर वे बंसीवट के पास भटकते रहे और साँझ होने पर ही घर लौटे – फिर मक्खन खाने का अवसर उन्हें मिला कहाँ? दूसरा तर्क वे यह देते हैं कि वे तो छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए इतने ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते। तीसरा तर्क यह कि उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।
अंत में कृष्ण भोलेपन से माँ से कहते हैं कि वे मन की बड़ी भोली हैं जो दूसरों की बातों पर विश्वास कर बैठीं; शायद उनके मन में कोई भेद आ गया है जो वे उन्हें पराया समझने लगी हैं। रूठकर वे अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने को कहते हैं और शिकायत करते हैं कि माँ ने उन्हें बहुत नाच नचाया। बालक के इन भोले एवं रूठे हुए तर्कों को सुनकर माता यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें प्यार से हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। इस पद में बाल-सुलभ चतुराई, माँ का अपार वात्सल्य तथा ब्रजभाषा की मधुरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मैया | माँ, माता |
| नहिं | नहीं |
| माखन | मक्खन |
| भोर भयो | सवेरा हुआ |
| गैयन | गायों (के) |
| पाछे | पीछे |
| मधुबन | मथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन |
| मोहि | मुझे |
| पठायो | भेज दिया |
| चार पहर | चारों पहर; पूरा दिन (तीन घंटे का एक पहर) |
| बंसीवट | एक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण बंशी बजाकर गायों को बुलाते थे |
| भटक्यो | इधर-उधर भटका/घूमा |
| साँझ परे | संध्या होने पर |
| बहियन | बाँहें, भुजाएँ |
| छोटो | छोटा |
| छीको / छींका | रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई पर लटकाकर खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती हैं |
| केहि बिधि | किस प्रकार, किस तरह |
| ग्वाल-बाल | ग्वालों के बच्चे, कृष्ण के संगी-साथी |
| बैर | शत्रुता, दुश्मनी |
| बरबस | जबरदस्ती, हठपूर्वक |
| लपटायो | लगा/पोत दिया |
| भोरी | भोली, सीधी |
| पतियायो | विश्वास किया, सच मान लिया |
| जिय | मन, जी, हृदय |
| भेद | अंतर, गाँठ, भिन्नता का भाव |
| उपजि है | उत्पन्न हुआ है |
| परायो जायो | पराया (किसी और का) जना हुआ |
| लकुटि कमरिया | लाठी और छोटा कंबल (कमली) |
| बिहँसि | हँसकर, मुसकाकर |
| जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माता |
| उर कंठ लगायो | हृदय एवं गले से लगा लिया |
पाठ से — मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
• मुझे तुम पराया समझती हो।
• मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
• मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
• मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
• गाय चरा रहे थे।
• माखन खा रहे थे।
• मधुबन में भटक रहे थे।
• मित्रों के संग खेल रहे थे।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुने गए शब्दों का उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलान कीजिए।
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 2. पहर | समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)। |
| 3. लकुटि कमरिया | लाठी और छोटा कंबल/कमली (कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे)। |
| 4. बंसीवट | एक वट वृक्ष (कृष्ण इसी पर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को बुलाते थे)। |
| 5. मधुबन | मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 6. छीको | गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई से लटकाया जाता है ताकि खाने-पीने की चीज़ों को कुत्ते-बिल्ली न पा सकें। |
| 7. माता | जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 8. ग्वाल-बाल | गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी-साथी। |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”
(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर लिखिए।
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
कविता की रचना
“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों ‘पठायो’ और ‘आयो’ की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है।
(क) इस पाठ को फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पद की विशेषताओं की सूची बनाइए (जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है)।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
शब्दों के रूप
(क) अपने रूप में लिखिए
पद में ‘पाछे’ (पीछे) जैसे कई शब्द अलग रूप में लिखे गए हैं। नीचे दिए शब्दों को आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, वैसे लिखिए।
| पद का शब्द | आपके बोलने/लिखने का रूप |
|---|---|
| परे | पड़े; ‘साँझ परे’ में ‘साँझ होने पर’ |
| छोटो | छोटा |
| बिधि | विधि / तरह |
| भोरी | भोली |
| कछु | कुछ |
| लै | लेकर / ले |
| नहिं | नहीं |
(ख) स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 में दिए अर्थों से मिलान कीजिए
| स्तंभ 1 (शब्द) | स्तंभ 2 (अर्थ) |
|---|---|
| 1. उपजि | उपजना, उत्पन्न होना |
| 2. जानि | जानकर, समझकर |
| 3. जायो | जन्मा |
| 4. जिय | मन, जी |
| 5. पठायो | भेज दिया |
| 6. पतियायो | विश्वास किया, सच माना |
| 7. बहियन | बाँह, हाथ, भुजा |
| 8. बिधि | प्रकार, भाँति, रीति |
| 9. बिहँसि | मुसकाई, हँसी |
| 10. भटक्यो | इधर-उधर घूमा या भटका |
| 11. लपटायो | मला, लगाया, पोता |
वर्ण-परिवर्तन
भोरी → भोली और लकुटि → लकुटी/लकड़ी उदाहरण हैं। लकड़ी से तुलना में ‘र’/‘ड़’ का परिवर्तन तथा रूपांतरण दिखता है। ‘बैर परे’ → ‘बैर पड़े’ में भी ‘र’/‘ड़’ का अंतर है; ‘साँझ परे’ का अर्थ ‘साँझ होने पर’ है। सभी संदर्भों में ‘परे’ को एक ही अर्थ से न बदलें।
पंक्ति से पंक्ति
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
| 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात — व्यक्तिगत नमूना
मेरी किताब गायब होने पर मित्र ने सोचा कि मैंने उसकी किताब उठा ली। मैंने अपनी किताब पर लिखा नाम दिखाया और मिलकर उसकी किताब खोजने में मदद की। बाद में वह दूसरी मेज़ पर मिली। अपने साथ हुई वास्तविक घटना, सामने मौजूद व्यक्ति और अपने तर्क लिखें; नमूने को अपनी घटना न बताएं।
घर की वस्तुएँ — छींका और चित्रों के नाम
छींका रस्सी का बुना हुआ लटकता जाल है, जिसमें पात्र रखकर खाने-पीने की चीज़ें ऊँचाई पर रखी जाती थीं। यह भोजन को ठंडा रखने वाला रेफ्रिजरेटर नहीं है।

पुस्तक के चित्रों में बाएँ से दाएँ, ऊपर से नीचे:
- घड़ा/मटका (चित्र में धातु का पात्र)
- कोयले से गरम होने वाली इस्त्री
- चौकी/पाटा
- सिलाई मशीन
- खाट/चारपाई
- बरनी/भंडारण का जार
- सूप—अनाज साफ करने के लिए
- सिल-बट्टा—पीसने के लिए
- हाथ की चक्की
- हाथ-पंखा
- रई/मथानी
- छलनी
- ढक्कन वाली बाँस की पिटारी
- ओखली-मूसल
- दही मथने का मटका और मथानी की व्यवस्था
स्थानीय नाम अलग हो सकते हैं; परिजन से पूछकर अपनी भाषा का नाम भी लिखें।
दूध से घी बनाने की प्रक्रिया
- स्वच्छ पात्र में दूध उबालें और उसे गुनगुना होने दें।
- थोड़ा जामन मिलाकर दही जमने दें। जमने का समय मौसम और तापमान से बदलता है।
- दही को मथें; मक्खन अलग करके निकालें। बचा तरल छाछ होता है।
- मक्खन को धीमी आँच पर गरम करने से पानी वाष्पित होता है और दूध के ठोस अंश अलग होते हैं। तैयार घी छानकर साफ पात्र में रखें।
यह पाठ के पारंपरिक तरीके की व्याख्या है। गरम दूध और चूल्हे का काम वयस्क करें; बच्चे देखे गए चरणों का वर्णन लिखें।
समय का माप
(क) पल, क्षण, घंटा, सुबह, दोपहर, शाम, रात, कल, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, ऋतु, वर्ष, दशक, शताब्दी, वेला और अवधि। कुछ निश्चित इकाइयाँ हैं, कुछ समय-संबंधी संकेत।
(ख) कृष्ण के कथन के अनुसार चार पहर: 4 × 3 = 12 घंटे। यह पुस्तक की समय-गणना है। (ग) शाम 6 बजे से 12 घंटे पीछे: सुबह 6 बजे। (घ) दोपहर 12 बजे तक दो पहर अर्थात छह घंटे मानें तो पहले पहर का आरंभ सुबह 6 बजे; पहला 6–9 और दूसरा 9–12। स्थानीय सूर्योदय हर दिन ठीक 6 बजे होने का दावा नहीं है।
हम सब विशेष हैं — छह सहायता-स्थितियाँ
(क) अपनी, किसी परिजन, शिक्षक और मित्र की वास्तविक क्षमताएँ लिखें। नमूने: मुझे चित्र बनाना आता है; मेरे परिजन संगीत जानते हैं; शिक्षक कठिन विषय समझाते हैं; मित्र योजनाबद्ध ढंग से काम करता है। किसी एक प्रकार की क्षमता को सब पर लागू न करें।
- पढ़ सकता है पर पाठ नहीं समझता: सरल उदाहरण दें, उसके प्रश्न सुनें और शिक्षक की मदद लें।
- पढ़ना पसंद करता है पर देख नहीं सकता: उसकी पसंद पूछकर पाठ पढ़कर सुनाएं या सुलभ ऑडियो/ब्रेल सामग्री दिलाने में मदद करें।
- जल्दी बोलता है और भाषण देना है: विराम लेकर बोलने का अभ्यास साथ करें।
- अटककर बोलता है: धैर्य से सुनें, वाक्य पूरा करने का अवसर दें और मज़ाक न करें।
- चलने में कठिनाई है और खेलना चाहता है: साथ मिलकर खेल के नियम और स्थान अनुकूल बनाएं; आवश्यक सहारा उसकी सहमति से दें।
- सुनने में कठिनाई है: उसकी पसंद के अनुसार सामने देखकर बात करें, लिखित निर्देश या संकेतों का उपयोग करें और शिक्षक से सुलभ व्यवस्था की मदद लें।
आज की पहेली — दूध से बने पदार्थ
पुस्तक के परिशिष्ट (पृष्ठ 165) की सूची: खोया, पनीर, मिठाई, छाछ, लस्सी, मक्खन, शरबत और आइसक्रीम।
चित्र और दिए आरंभिक अक्षरों से पूरक नाम: दही, मलाई और घी भी पहेली में पहचाने जाते हैं। “द” से दही लिखें; दूध इस प्रश्न में मूल सामग्री है, उससे बनी वस्तु नहीं। “म” से मक्खन और मलाई दोनों मिलते हैं।
शब्द लिखने के उदाहरण: खो–या, द–ही, म–क्ख–न, म–ला–ई, प–नी–र, छा–छ, मि–ठा–ई, श–र–ब–त, आ–इ–स–क्री–म। संयुक्त अक्षर और मात्रा संबंधित अक्षर के साथ रखें।
परिशिष्ट की सूची में सभी ग्यारह चित्र अलग-अलग नहीं गिनाए गए हैं; ऊपर तीन पूरक नाम चित्र और प्रारंभिक अक्षरों के आधार पर दिए हैं। यहाँ शरबत, मिठाई और आइसक्रीम के दूध वाले प्रकार का संदर्भ है; उनके हर प्रकार में दूध होना आवश्यक नहीं।
खोजबीन के लिए
पुस्तकालय में सूरदास के अन्य पद खोजें, जैसे ‘मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो’। रचना और स्रोत का नाम लिखें, ब्रजभाषा के शब्दों का अर्थ समझें और शिक्षक के साथ सुनाएं।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं और वे किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
2. श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के कौन-कौन से तर्क दिए?
3. ‘छींका’ क्या होता है और इसका क्या उपयोग था?
4. पद के अंत में माता यशोदा की क्या प्रतिक्रिया रही?
5. इस पद में किस भाव (रस) की प्रधानता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस पद के आधार पर श्रीकृष्ण के बाल-स्वभाव की विशेषताएँ बताइए।
8. इस पद में माँ के वात्सल्य का चित्रण किस प्रकार हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?
(क) तुलसीदास
(ख) सूरदास
(ग) कबीरदास
(घ) रहीम
2. इस पद में बालक कौन है?
(क) श्रीराम
(ख) श्रीकृष्ण
(ग) बलराम
(घ) नंदलाल का मित्र
3. ‘मधुबन’ क्या है?
(क) एक नदी
(ख) एक पर्वत
(ग) यमुना किनारे का एक वन
(घ) एक गाँव
4. ‘छीको’ (छींका) का प्रयोग किसलिए होता था?
(क) कपड़े सुखाने के लिए
(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए
(ग) गाय बाँधने के लिए
(घ) झूला झूलने के लिए
5. श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने पहर गाय चराते थे?
(क) एक पहर
(ख) दो पहर
(ग) चार पहर
(घ) आठ पहर
6. एक पहर लगभग कितने घंटे का होता है?
(क) एक घंटा
(ख) दो घंटे
(ग) तीन घंटे
(घ) छह घंटे
7. कृष्ण के अनुसार उनके मुँह पर मक्खन किसने लगाया?
(क) माँ यशोदा ने
(ख) स्वयं उन्होंने
(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती
(घ) नंद बाबा ने
8. ‘भोरी’ शब्द का अर्थ है—
(क) भोली, सीधी
(ख) चालाक
(ग) क्रोधी
(घ) दुखी
9. पद के अंत में माता यशोदा ने क्या किया?
(क) कृष्ण को डाँटा
(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया
(ग) कृष्ण को दंड दिया
(घ) घर से बाहर भेज दिया
10. पद की अंतिम पंक्ति में कवि का नाम (छाप) क्या आया है?
(क) कृष्णदास
(ख) सूरदास
(ग) नंददास
(घ) रसखान
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छींके तक नहीं पहुँच सकते।
कारण (R): वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं।
2. अभिकथन (A): माता यशोदा ने कृष्ण को कठोर दंड दिया।
कारण (R): बालक कृष्ण की भोली बातें सुनकर माँ हँस पड़ीं और उन्हें गले से लगा लिया।
3. अभिकथन (A): यह पद वात्सल्य भाव से परिपूर्ण है।
कारण (R): इसमें बालक कृष्ण की लीला एवं माँ के स्नेह का सजीव चित्रण है।
4. अभिकथन (A): पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम दिया है।
कारण (R): पद के अंत में ‘सूरदास’ शब्द कवि की छाप के रूप में आया है।
5. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण ने सच-सच मान लिया कि उन्होंने माखन खाया है।
कारण (R): ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कहकर वे बार-बार स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- पद के कठिन ब्रज शब्दों के अर्थ (जैसे – मोहि, पठायो, बहियन, बिधि, पतियायो) याद रखें; अर्थ पूछे जाने पर सीधे लिख सकें।
- पद की अंतिम पंक्ति में आई कवि की ‘छाप’ (सूरदास) एवं इसमें व्याप्त ‘वात्सल्य भाव’ अवश्य लिखें।
- ‘चार पहर’ जैसे समय-संबंधी प्रश्न में गणना (4 × 3 = 12 घंटे) दिखाकर उत्तर लिखें।
- भावार्थ लिखते समय श्रीकृष्ण के तीनों तर्कों (गाय चराना, छोटे हाथ, ग्वाल-बालों का बैर) को क्रम से लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘मधुबन’ को नगर या नदी समझ लेना – यह यमुना किनारे का वन है।
- पद के ब्रज शब्दों को बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों ही लिखें।
- ‘नहिं’, ‘मोहि’, ‘केहि’ जैसे शब्दों में मात्रा की गलती करना।
- माँ की प्रतिक्रिया को क्रोध बताना – माँ ने हँसकर प्रेम से गले लगाया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?
इस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं, जो ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के मनोहारी वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं।
इस पद का मुख्य भाव क्या है?
इस पद का मुख्य भाव वात्सल्य है – माखन चुराने पर पकड़े जाने पर बालक श्रीकृष्ण भोले तर्कों से स्वयं को निर्दोष सिद्ध करते हैं और माँ यशोदा उन्हें प्रेम से गले लगा लेती हैं।
श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उन्होंने कहा – वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, वे छोटे हैं इसलिए छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया।
‘चार पहर’ का अर्थ कितने घंटे है?
एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर का अर्थ लगभग 12 घंटे (पूरा दिन) है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
