कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 9 – मैया मैं नहिं माखन खायो (पद) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 9 ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ (रचनाकार – महाकवि सूरदास) का पूरा समाधान देता है – पद का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 9 रचनाकार: सूरदास विधा: पद (कविता) सत्र: 2026–27

कवि परिचय – सूरदास

यह पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित है। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। सूरदास ने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं और इतनी सुंदर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन मिलता है। ये कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के कारण वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी कल्पना-शक्ति एवं काव्य-रचना की कुशलता अद्भुत थी। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी।

पद (मूल पाठ)

इस पद में नटखट बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने यह सिद्ध करने का प्रयास करते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।

मैया मैं नहिं माखन खायो।

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥

मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥

तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥

ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

— सूरदास

भावार्थ

पहली पंक्ति (टेक): बालक श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा से कहते हैं – “माँ, मैंने माखन (मक्खन) नहीं खाया।” यही बात पूरे पद की टेक है, जिसे वे बार-बार दोहराकर अपनी बात सिद्ध करना चाहते हैं।

पहला पद: श्रीकृष्ण कहते हैं – सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था। चारों पहर मैं बंसीवट (वट वृक्ष) के पास भटकता रहा और साँझ ढलने पर ही घर लौटा हूँ। फिर मक्खन चुराने का समय मुझे मिला ही कब?

दूसरा पद: मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें (भुजाएँ) भी छोटी हैं; फिर इतनी ऊँचाई पर लटके छींके तक मैं किस प्रकार पहुँच सकता हूँ? असल में ये सब ग्वाल-बाल (साथी बच्चे) मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरदस्ती मेरे मुँह पर मक्खन लगा (पोत) दिया है।

तीसरा पद: माँ, तुम तो मन की बड़ी भोली हो, इसलिए इन साथियों की बातों पर विश्वास कर लिया। लगता है तुम्हारे मन में कोई भेद उत्पन्न हो गया है, जो तुम मुझे पराया (किसी और का जना हुआ) समझने लगी हो।

चौथा पद: रूठकर श्रीकृष्ण कहते हैं – लो, अपनी यह लाठी और कंबल वापस ले लो; तुमने मुझे बहुत नाच नचाया (बहुत परेशान किया)। सूरदास कहते हैं कि बालक की यह भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने श्रीकृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।

सार

‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ महाकवि सूरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध वात्सल्यपूर्ण पद है, जिसमें श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का सजीव चित्रण हुआ है। पद का आरंभ बालक कृष्ण की इसी टेक से होता है कि “माँ, मैंने मक्खन नहीं खाया।” माखन चुराकर खाने पर पकड़े जाने पर श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क प्रस्तुत करते हैं, ताकि स्वयं को निर्दोष सिद्ध कर सकें।

वे कहते हैं कि सवेरे ही माँ ने उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था; चारों पहर वे बंसीवट के पास भटकते रहे और साँझ होने पर ही घर लौटे – फिर मक्खन खाने का अवसर उन्हें मिला कहाँ? दूसरा तर्क वे यह देते हैं कि वे तो छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए इतने ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते। तीसरा तर्क यह कि उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं, इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।

अंत में कृष्ण भोलेपन से माँ से कहते हैं कि वे मन की बड़ी भोली हैं जो दूसरों की बातों पर विश्वास कर बैठीं; शायद उनके मन में कोई भेद आ गया है जो वे उन्हें पराया समझने लगी हैं। रूठकर वे अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने को कहते हैं और शिकायत करते हैं कि माँ ने उन्हें बहुत नाच नचाया। बालक के इन भोले एवं रूठे हुए तर्कों को सुनकर माता यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें प्यार से हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। इस पद में बाल-सुलभ चतुराई, माँ का अपार वात्सल्य तथा ब्रजभाषा की मधुरता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
मैयामाँ, माता
नहिंनहीं
माखनमक्खन
भोर भयोसवेरा हुआ
गैयनगायों (के)
पाछेपीछे
मधुबनमथुरा के पास यमुना किनारे का एक वन
मोहिमुझे
पठायोभेज दिया
चार पहरचारों पहर; पूरा दिन (तीन घंटे का एक पहर)
बंसीवटएक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण बंशी बजाकर गायों को बुलाते थे
भटक्योइधर-उधर भटका/घूमा
साँझ परेसंध्या होने पर
बहियनबाँहें, भुजाएँ
छोटोछोटा
छीको / छींकारस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई पर लटकाकर खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती हैं
केहि बिधिकिस प्रकार, किस तरह
ग्वाल-बालग्वालों के बच्चे, कृष्ण के संगी-साथी
बैरशत्रुता, दुश्मनी
बरबसजबरदस्ती, हठपूर्वक
लपटायोलगा/पोत दिया
भोरीभोली, सीधी
पतियायोविश्वास किया, सच मान लिया
जियमन, जी, हृदय
भेदअंतर, गाँठ, भिन्नता का भाव
उपजि हैउत्पन्न हुआ है
परायो जायोपराया (किसी और का) जना हुआ
लकुटि कमरियालाठी और छोटा कंबल (कमली)
बिहँसिहँसकर, मुसकाकर
जसोदायशोदा, श्रीकृष्ण की माता
उर कंठ लगायोहृदय एवं गले से लगा लिया

पाठ से — मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?

• मुझे तुम पराया समझती हो।

• मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।

• मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।

• मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

उत्तर★ मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?यह माखन न खाने का सबसे सीधा तर्क है – श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छोटे बालक हैं, उनकी बाँहें छोटी हैं, अतः ऊँचाई पर लटके छींके तक उनके हाथ पहुँच ही नहीं सकते, फिर वे मक्खन निकालकर खाते कैसे?

(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?

• गाय चरा रहे थे।

• माखन खा रहे थे।

• मधुबन में भटक रहे थे।

• मित्रों के संग खेल रहे थे।

उत्तर★ गाय चरा रहे थे। (साथ ही ★ मधुबन में भटक रहे थे।)पद के अनुसार सवेरे ही उन्हें गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था और वे चारों पहर बंसीवट के पास भटकते (गाय चराते) रहे, इसलिए दोनों उत्तर उपयुक्त हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने पद के शब्दों एवं भाव को आधार बनाया। पहला उत्तर इसलिए चुना क्योंकि ‘मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो’ पंक्ति स्पष्ट कहती है कि छोटे हाथ छींके तक नहीं पहुँच सकते।दूसरा उत्तर इसलिए चुना क्योंकि ‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो’ पंक्ति बताती है कि कृष्ण सवेरे से ही गाय चराने वन में थे। चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुने गए शब्दों का उनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलान कीजिए।

शब्दसही अर्थ या संदर्भ
1. जसोदायशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।
2. पहरसमय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)।
3. लकुटि कमरियालाठी और छोटा कंबल/कमली (कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे)।
4. बंसीवटएक वट वृक्ष (कृष्ण इसी पर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को बुलाते थे)।
5. मधुबनमथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6. छीकोगोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना जाल जो ऊँचाई से लटकाया जाता है ताकि खाने-पीने की चीज़ों को कुत्ते-बिल्ली न पा सकें।
7. माताजन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8. ग्वाल-बालगाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी-साथी।
सही मिलान1 → यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ2 → तीन घंटे का एक पहर (समय की इकाई)3 → लाठी और छोटा कंबल/कमली4 → एक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण वंशी बजाते थे5 → यमुना किनारे का एक वन6 → रस्सियों का बुना लटकता हुआ जाल (छींका)7 → जननी, माँ8 → ग्वालों के बच्चे, कृष्ण के साथी

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”

अर्थ/विचारइस पंक्ति में श्रीकृष्ण माँ से कहते हैं कि सवेरा होते ही तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन (वन) में भेज दिया था।यहाँ कृष्ण यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे सुबह से ही घर से बाहर वन में गाय चरा रहे थे, इसलिए घर में रखे मक्खन को चुराकर खाने का अवसर उन्हें मिला ही नहीं।

(ख) “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो”

अर्थ/विचारसूरदास कहते हैं कि बालक कृष्ण की भोली एवं रूठी हुई बातें सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया।यह पंक्ति माँ के वात्सल्य (ममता) को दर्शाती है – माँ बालक की चतुराई पर क्रोधित होने के बजाय उसके भोलेपन पर मुग्ध होकर उसे गले से लगा लेती है।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर लिखिए।

(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?

उत्तरपद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में कई बातें बताई हैं – (1) वे सवेरे ही गायों के पीछे मधुबन चले गए थे और साँझ ढले घर लौटे; (2) वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं, इसलिए ऊँचे लटके छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँच सकते; (3) उनके साथी ग्वाल-बाल उनसे बैर रखते हैं और इन्होंने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।इन सब तर्कों के द्वारा वे यह सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने मक्खन नहीं खाया और वे निर्दोष हैं।

(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?

उत्तरयशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए इसलिए गले से लगा लिया क्योंकि बालक कृष्ण के भोले-भाले तर्क एवं रूठने का अंदाज़ बहुत प्यारा एवं मनोहारी था।माँ समझ गईं कि कृष्ण ने ही माखन खाया है, फिर भी उसकी बाल-सुलभ चतुराई एवं मासूमियत पर उन्हें क्रोध के बजाय अपार स्नेह उमड़ आया। यही माँ का सच्चा वात्सल्य है, जो बच्चे की शरारतों में भी प्रेम ढूँढ़ लेता है।

कविता की रचना

“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों ‘पठायो’ और ‘आयो’ की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है।

(क) इस पाठ को फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पद की विशेषताओं की सूची बनाइए (जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है)।

उत्तर (पद की विशेषताएँ)1. पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का सुंदर तुक मिलता है (खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो)।2. पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम ‘सूरदास’ दिया है, जिसे कवि की ‘छाप’ कहते हैं।3. पूरा पद मधुर ब्रजभाषा में रचा गया है।4. इसमें श्रीकृष्ण की बाल-लीला एवं माँ के वात्सल्य का सजीव वर्णन है।5. टेक ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का केंद्रीय भाव बार-बार उभारती है।6. यह गेय (गाया जाने वाला) पद है, इसमें लय एवं संगीतात्मकता है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तरयह कक्षा में करने वाली गतिविधि है। प्रत्येक समूह अपनी बनाई सूची कक्षा में पढ़कर सुनाए; इस प्रकार सभी समूहों की खोजी हुई विशेषताएँ मिलकर पद की एक पूरी सूची तैयार हो जाएगी और सबकी समझ और गहरी होगी।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।

(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?

उत्तरश्रीकृष्ण अपनी माँ को तर्क इसलिए दे रहे होंगे क्योंकि उन्हें माखन चुराकर खाते हुए पकड़ लिया गया है और वे डाँट या दंड से बचना चाहते हैं।बालक होने के कारण वे स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने के लिए भोले-भाले बहाने एवं तर्क गढ़ रहे हैं, ताकि माँ उन पर विश्वास कर लें और उन्हें माफ़ कर दें।

(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?

उत्तर (कल्पना)जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया होगा, तब कृष्ण का रूठना तुरंत दूर हो गया होगा और वे भी मुसकरा दिए होंगे।माँ का प्यार पाकर वे खुश हो गए होंगे और शायद माँ की गोद में बैठकर फिर से अपनी मीठी बातें करने लगे होंगे। घर का वातावरण प्रेम एवं हँसी-खुशी से भर गया होगा।

शब्दों के रूप

(क) अपने रूप में लिखिए

पद में ‘पाछे’ (पीछे) जैसे कई शब्द अलग रूप में लिखे गए हैं। नीचे दिए शब्दों को आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, वैसे लिखिए।

पद का शब्दआपके बोलने/लिखने का रूप
परेपड़े
छोटोछोटा
बिधिविधि / तरह
भोरीभोली
कछुकुछ
लैलेकर / ले
नहिंनहीं

(ख) स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 में दिए अर्थों से मिलान कीजिए

स्तंभ 1 (शब्द)स्तंभ 2 (अर्थ)
1. उपजिउपजना, उत्पन्न होना
2. जानिजानकर, समझकर
3. जायोजन्मा
4. जियमन, जी
5. पठायोभेज दिया
6. पतियायोविश्वास किया, सच माना
7. बहियनबाँह, हाथ, भुजा
8. बिधिप्रकार, भाँति, रीति
9. बिहँसिमुसकाई, हँसी
10. भटक्योइधर-उधर घूमा या भटका
11. लपटायोमला, लगाया, पोता
सही मिलान1-उपजना/उत्पन्न होना; 2-जानकर, समझकर; 3-जन्मा; 4-मन, जी; 5-भेज दिया; 6-विश्वास किया, सच माना; 7-बाँह, हाथ, भुजा; 8-प्रकार, भाँति, रीति; 9-मुसकाई, हँसी; 10-इधर-उधर घूमा/भटका; 11-मला, लगाया, पोता।

वर्ण-परिवर्तन

“तू माता मन की अति भोरी” – ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। इस पद में जिन शब्दों में ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है, उन्हें चुनकर लिखिए।

उत्तरपद में वर्ण-परिवर्तन वाले कुछ शब्द इस प्रकार हैं—भोरी → भोली (‘र’ के स्थान पर ‘ल’)परे → पड़े (‘र’ के स्थान पर ‘ड़’)इस प्रकार ब्रजभाषा में ‘ल’, ‘ड़’ और ‘र’ वर्णों में परस्पर परिवर्तन होने से शब्दों के रूप बदल जाते हैं।

पंक्ति से पंक्ति

स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भावार्थ)
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
सही मिलान1 → सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।2 → चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।3 → मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?4 → ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।5 → माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।6 → तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

आपकी बात

“मैया मैं नहिं माखन खायो” – यहाँ श्रीकृष्ण सिद्ध करना चाहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ कि आपको सिद्ध करना पड़ा कि यह काम आपने नहीं किया? कब? किसके सामने? आपने कौन-से तर्क दिए?

उत्तर (नमूना)हाँ, एक बार घर में रखी मिठाई कम हो गई थी और माँ ने सोचा कि मैंने ही खाई होगी। मुझे माँ के सामने सिद्ध करना पड़ा कि मैंने मिठाई नहीं खाई।मैंने तर्क दिया कि मैं तो उस समय पड़ोस में अपने मित्र के साथ पढ़ रहा था और घर लौटा ही बाद में। बाद में पता चला कि मिठाई छोटे भाई ने खाई थी। इस अनुभव से सीखा कि किसी पर बिना सच जाने दोष नहीं लगाना चाहिए।

घर की वस्तुएँ — छींका

“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” – ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसका भारत में सैकड़ों वर्षों से उपयोग होता आ रहा है। ऐसी ही कुछ अन्य घरेलू वस्तुओं के नाम लिखिए।

उत्तरछींका रस्सियों से बुना हुआ एक जाल होता है, जिसे ऊँचाई पर लटकाकर उसमें दूध, दही, मक्खन आदि रखे जाते थे ताकि कुत्ते-बिल्ली उन तक न पहुँच सकें।पुराने समय से उपयोग में आने वाली कुछ अन्य घरेलू वस्तुएँ – मटका/घड़ा, चकला-बेलन, सिल-बट्टा, ओखली-मूसल, मथानी (मटकी और रई), चलनी, सूप, हाथ-पंखा, कलछुल आदि।

दूध से घी बनाने की प्रक्रिया

श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, दही से मक्खन और मक्खन से घी बनाया जाता है। दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।

उत्तर1. सबसे पहले दूध को गरम करके हल्का गुनगुना किया जाता है।2. उसमें थोड़ा-सा जामन (दही) मिलाकर रात भर ढककर रखा जाता है, जिससे दूध जमकर दही बन जाता है।3. दही को मथानी (रई) से मथा जाता है, जिससे ऊपर मक्खन तैर आता है, उसे निकाल लिया जाता है।4. मक्खन को धीमी आँच पर गरम किया जाता है; पकते-पकते उसमें से घी अलग हो जाता है और छानकर घी तैयार हो जाता है।

समय का माप

(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ की तरह समय बताने के और कौन-कौन से शब्द हैं? सूची बनाइए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)

उत्तरसमय बताने वाले कुछ शब्द – क्षण, पल, घड़ी, घंटा, सवेरा/भोर, दोपहर, साँझ/संध्या, रात, दिन, कल, परसों, सप्ताह, पखवाड़ा, महीना, ऋतु, वर्ष, दशक, सदी/शताब्दी, युग, वेला, अवधि आदि।

(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?

उत्तरपद के अनुसार वे ‘चार पहर’ गाय चराते थे। एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर = 4 × 3 = 12 घंटे। अर्थात् वे लगभग बारह घंटे (पूरा दिन) गाय चराते थे।

(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे घर से निकले होंगे?

उत्तरयदि वे 12 घंटे गाय चराते थे और शाम 6 बजे लौटे, तो 6 बजे से 12 घंटे पीछे जाने पर वे सुबह 6 बजे घर से निकले होंगे।(गणना: शाम 6 बजे − 12 घंटे = सुबह 6 बजे।)

(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय (लगभग 12 बजे)। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?

उत्तरदोपहर लगभग 12 बजे दूसरे पहर की समाप्ति एवं तीसरे पहर के प्रारंभ का समय है। एक पहर लगभग 3 घंटे का होता है, इसलिए दूसरा पहर लगभग 9 से 12 बजे तक तथा पहला पहर लगभग सुबह 6 बजे से 9 बजे तक होगा।अर्थात् दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग सुबह 6 बजे होगा।

हम सब विशेष हैं

महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी कल्पना-शक्ति एवं काव्य-रचना की कुशलता विशेष थी। हम सभी में कुछ न कुछ विशेष होता है। अपनी, परिजन की, शिक्षक की एवं मित्र की विशेष क्षमताएँ लिखिए।

उत्तर (नमूना)आपकी: मैं चित्र अच्छे बनाता हूँ तथा कविता सुंदर ढंग से सुना लेता हूँ।परिजन की: मेरी माँ स्वादिष्ट भोजन बनाने एवं सबकी देखभाल करने में निपुण हैं।शिक्षक की: हमारे शिक्षक कठिन बात को भी सरल एवं रोचक ढंग से समझा देते हैं।मित्र की: मेरा मित्र खेल में बहुत फुर्तीला है तथा सबकी सहायता करता है।

(ख) सबकी सहायता करने की क्षमता हम सबके पास होती है। बताइए, इस क्षमता से आप अपने सहपाठियों की सहायता कैसे करेंगे?

उत्तर (नमूना)जिस सहपाठी को पाठ समझ न आ रहा हो – उसे प्यार से बार-बार समझाऊँगा।जो देख नहीं सकता – उसे पाठ पढ़कर सुनाऊँगा एवं रास्ता दिखाऊँगा।जिसे भाषण देना हो – उसका अभ्यास कराऊँगा और हौसला बढ़ाऊँगा।जिसे चलने में कठिनाई हो – उसका सहारा बनूँगा एवं खेल में साथ रखूँगा।जिसे सुनने में कठिनाई हो – धीरे, स्पष्ट एवं संकेतों से बात करूँगा। इस प्रकार सबकी सहायता करके मैं एक अच्छा साथी बनूँगा।

खोजबीन के लिए

सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें और पढ़ें।

उत्तरसूरदास की प्रमुख रचनाएँ हैं – सूरसागर, सूरसारावली एवं साहित्य-लहरी। इनमें श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं एवं भक्ति का मनोहारी वर्णन है।श्रीकृष्ण की बाल-लीला से जुड़े उनके अन्य लोकप्रिय पद हैं – ‘मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो’, ‘चलत देखि जसुमति सुख पावै’ आदि, जिन्हें पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से खोजकर पढ़ा जा सकता है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं और वे किसके लिए प्रसिद्ध हैं?

उत्तरइस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं। वे ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं एवं भक्ति का मनोहारी वर्णन करने के लिए प्रसिद्ध हैं। दृष्टिबाधित होते हुए भी उनकी कल्पना-शक्ति अद्भुत थी।

2. श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के कौन-कौन से तर्क दिए?

उत्तरश्रीकृष्ण ने कहा कि वे सवेरे से ही गाय चराने मधुबन गए थे; वे छोटे बालक हैं इसलिए ऊँचे छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँच सकते; तथा ग्वाल-बालों ने ही बैर के कारण जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया है।

3. ‘छींका’ क्या होता है और इसका क्या उपयोग था?

उत्तरछींका रस्सियों से बुना हुआ एक जाल होता है, जिसे छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता था। इसमें दूध, दही, मक्खन आदि खाद्य-वस्तुएँ रखी जाती थीं, ताकि कुत्ते-बिल्ली उन तक न पहुँच सकें।

4. पद के अंत में माता यशोदा की क्या प्रतिक्रिया रही?

उत्तरपद के अंत में बालक कृष्ण के भोले एवं रूठे हुए तर्क सुनकर माता यशोदा हँस पड़ीं और उन्होंने कृष्ण को क्रोधित होने के बजाय प्रेमपूर्वक अपने हृदय एवं गले से लगा लिया। यह उनके वात्सल्य को दर्शाता है।

5. इस पद में किस भाव (रस) की प्रधानता है?

उत्तरइस पद में वात्सल्य भाव (वात्सल्य रस) की प्रधानता है। इसमें बालक श्रीकृष्ण की भोली बाल-लीला तथा माँ यशोदा के अपार स्नेह एवं ममता का सजीव चित्रण हुआ है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पद में महाकवि सूरदास ने बालक श्रीकृष्ण की मधुर बाल-लीला का चित्रण किया है। माखन चुराकर खाते हुए पकड़े जाने पर कृष्ण माँ यशोदा के सामने अनेक भोले-भाले तर्क देकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।वे कहते हैं कि वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, छोटे होने के कारण ऊँचे छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और साथी ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया। वे माँ को भोली बताकर उलाहना भी देते हैं। बालक की इन प्यारी बातों पर माँ हँसकर उसे गले से लगा लेती है। इस प्रकार पद का मूल भाव बाल-सुलभ चतुराई एवं माँ का अपार वात्सल्य है।

7. इस पद के आधार पर श्रीकृष्ण के बाल-स्वभाव की विशेषताएँ बताइए।

उत्तरइस पद में श्रीकृष्ण का बाल-स्वभाव अत्यंत मनोहारी रूप में प्रकट हुआ है। वे नटखट एवं शरारती हैं, जो छींके से माखन चुराकर खाते हैं। पकड़े जाने पर वे चतुर भी हैं – एक के बाद एक भोले-भाले तर्क गढ़कर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।वे भावुक भी हैं – माँ द्वारा अविश्वास किए जाने पर रूठ जाते हैं और अपनी लकुटि-कमरिया लौटाने की बात करते हैं। उनकी बातों में मासूमियत, हठ एवं प्रेम तीनों झलकते हैं। यही बाल-सुलभ भोलापन एवं चतुराई पाठक के हृदय को छू लेती है तथा माँ यशोदा को भी क्रोध के बजाय स्नेह से भर देती है।

8. इस पद में माँ के वात्सल्य का चित्रण किस प्रकार हुआ है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस पद में माँ यशोदा के वात्सल्य (ममता) का सुंदर चित्रण हुआ है। यद्यपि कृष्ण ने ही माखन चुराकर खाया है और झूठे तर्क दे रहे हैं, फिर भी माँ उन पर क्रोधित नहीं होतीं।पद के अंत में “सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो” पंक्ति में माँ का प्रेम चरम पर पहुँच जाता है – बालक के भोले एवं रूठे तर्कों को सुनकर वे हँस पड़ती हैं और उसे प्रेमपूर्वक हृदय एवं गले से लगा लेती हैं। यही सच्चा वात्सल्य है, जो बच्चे की शरारतों एवं भूलों में भी प्रेम ही खोज लेता है। माँ का यह निःस्वार्थ स्नेह पद को हृदयस्पर्शी बना देता है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?

(क) तुलसीदास

(ख) सूरदास

(ग) कबीरदास

(घ) रहीम

उत्तर(ख) सूरदास।

2. इस पद में बालक कौन है?

(क) श्रीराम

(ख) श्रीकृष्ण

(ग) बलराम

(घ) नंदलाल का मित्र

उत्तर(ख) श्रीकृष्ण।

3. ‘मधुबन’ क्या है?

(क) एक नदी

(ख) एक पर्वत

(ग) यमुना किनारे का एक वन

(घ) एक गाँव

उत्तर(ग) यमुना किनारे का एक वन।

4. ‘छीको’ (छींका) का प्रयोग किसलिए होता था?

(क) कपड़े सुखाने के लिए

(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए

(ग) गाय बाँधने के लिए

(घ) झूला झूलने के लिए

उत्तर(ख) दूध-दही-मक्खन को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए।

5. श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने पहर गाय चराते थे?

(क) एक पहर

(ख) दो पहर

(ग) चार पहर

(घ) आठ पहर

उत्तर(ग) चार पहर।

6. एक पहर लगभग कितने घंटे का होता है?

(क) एक घंटा

(ख) दो घंटे

(ग) तीन घंटे

(घ) छह घंटे

उत्तर(ग) तीन घंटे।

7. कृष्ण के अनुसार उनके मुँह पर मक्खन किसने लगाया?

(क) माँ यशोदा ने

(ख) स्वयं उन्होंने

(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती

(घ) नंद बाबा ने

उत्तर(ग) ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती।

8. ‘भोरी’ शब्द का अर्थ है—

(क) भोली, सीधी

(ख) चालाक

(ग) क्रोधी

(घ) दुखी

उत्तर(क) भोली, सीधी।

9. पद के अंत में माता यशोदा ने क्या किया?

(क) कृष्ण को डाँटा

(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया

(ग) कृष्ण को दंड दिया

(घ) घर से बाहर भेज दिया

उत्तर(ख) हँसकर कृष्ण को गले से लगा लिया।

10. पद की अंतिम पंक्ति में कवि का नाम (छाप) क्या आया है?

(क) कृष्णदास

(ख) सूरदास

(ग) नंददास

(घ) रसखान

उत्तर(ख) सूरदास।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ग), 7-(ग), 8-(क), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे छींके तक नहीं पहुँच सकते।

कारण (R): वे छोटे बालक हैं और उनकी बाँहें छोटी हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): माता यशोदा ने कृष्ण को कठोर दंड दिया।

कारण (R): बालक कृष्ण की भोली बातें सुनकर माँ हँस पड़ीं और उन्हें गले से लगा लिया।

उत्तर(घ) A गलत है (माँ ने दंड नहीं दिया, बल्कि प्रेम से गले लगाया), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): यह पद वात्सल्य भाव से परिपूर्ण है।

कारण (R): इसमें बालक कृष्ण की लीला एवं माँ के स्नेह का सजीव चित्रण है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम दिया है।

कारण (R): पद के अंत में ‘सूरदास’ शब्द कवि की छाप के रूप में आया है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): श्रीकृष्ण ने सच-सच मान लिया कि उन्होंने माखन खाया है।

कारण (R): ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कहकर वे बार-बार स्वयं को निर्दोष सिद्ध करना चाहते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (कृष्ण माखन खाना स्वीकार नहीं करते, बल्कि नकारते हैं), जबकि R सही है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(घ), 3-(क), 4-(क), 5-(घ)

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • पद के कठिन ब्रज शब्दों के अर्थ (जैसे – मोहि, पठायो, बहियन, बिधि, पतियायो) याद रखें; अर्थ पूछे जाने पर सीधे लिख सकें।
  • पद की अंतिम पंक्ति में आई कवि की ‘छाप’ (सूरदास) एवं इसमें व्याप्त ‘वात्सल्य भाव’ अवश्य लिखें।
  • ‘चार पहर’ जैसे समय-संबंधी प्रश्न में गणना (4 × 3 = 12 घंटे) दिखाकर उत्तर लिखें।
  • भावार्थ लिखते समय श्रीकृष्ण के तीनों तर्कों (गाय चराना, छोटे हाथ, ग्वाल-बालों का बैर) को क्रम से लिखें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • ‘मधुबन’ को नगर या नदी समझ लेना – यह यमुना किनारे का वन है।
  • पद के ब्रज शब्दों को बदलकर लिखना – मूल पाठ ज्यों-का-त्यों ही लिखें।
  • ‘नहिं’, ‘मोहि’, ‘केहि’ जैसे शब्दों में मात्रा की गलती करना।
  • माँ की प्रतिक्रिया को क्रोध बताना – माँ ने हँसकर प्रेम से गले लगाया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ पद के रचनाकार कौन हैं?

इस पद के रचनाकार महाकवि सूरदास हैं, जो ब्रजभाषा में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के मनोहारी वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं।

इस पद का मुख्य भाव क्या है?

इस पद का मुख्य भाव वात्सल्य है – माखन चुराने पर पकड़े जाने पर बालक श्रीकृष्ण भोले तर्कों से स्वयं को निर्दोष सिद्ध करते हैं और माँ यशोदा उन्हें प्रेम से गले लगा लेती हैं।

श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

उन्होंने कहा – वे सवेरे से गाय चराने वन में थे, वे छोटे हैं इसलिए छींके तक उनके हाथ नहीं पहुँचते, और ग्वाल-बालों ने ही जबरन उनके मुँह पर मक्खन लगा दिया।

‘चार पहर’ का अर्थ कितने घंटे है?

एक पहर लगभग तीन घंटे का होता है, इसलिए चार पहर का अर्थ लगभग 12 घंटे (पूरा दिन) है।

पद एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

Scroll to Top