Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 12 Solutions (NCERT 2026–27) – वीराङ्गना पन्नाधाया
यह पृष्ठ कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) के द्वादश पाठ ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ का सम्पूर्ण समाधान देता है – मूल गद्यांश के साथ अन्वय/भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ के अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः) के प्रत्येक प्रश्न एवं उप-भाग का मौलिक, परीक्षा-उपयोगी उत्तर। साथ ही लङ्-लकार (भूतकाल) की धातुरूप-तालिका, अतिरिक्त प्रश्न, 10 MCQ, 5 अभिकथन-कारण एवं FAQ भी दिए गए हैं।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ एवं अन्वय/भावार्थ
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
- योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 7 का द्वादश (बारहवाँ) पाठ ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ राजस्थान की एक महान् वीरांगना पन्नाधाया (पन्ना धाय) के अद्वितीय त्याग एवं बलिदान की ऐतिहासिक कथा है। यह भारतभूमि वीरों एवं त्यागियों की भूमि है; मातृभूमि की रक्षा हेतु भारतीयों ने अपना सर्वस्व अर्पित किया है, और इस गणना में महिलाओं का भी प्रभूत योगदान रहा है। पन्नाधाया मेवाड़ के राजकुमार उदयसिंह की धाय (धात्री) थी। दुष्टबुद्धि बनवीर जब उदयसिंह को मारने का षड्यन्त्र रचता है, तब पन्नाधाया राजकुमार के शयनस्थान पर अपने ही पुत्र चन्दन को सुला देती है। बनवीर चन्दन को ही उदयसिंह समझकर मार देता है। इस प्रकार पन्नाधाया अपने पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़ के भावी राजा की रक्षा करती है। पाठ का केन्द्रीय भाव है – राष्ट्रहित, कर्तव्यनिष्ठा, शौर्य एवं त्याग व्यक्तिगत स्वार्थ से सर्वोपरि हैं।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ सोलहवीं शताब्दी (षोडश शतक) के मेवाड़ की ऐतिहासिक घटना पर आधारित गद्य-कथा है। मेवाड़ में महाराणा संग्रामसिंह (राणा साँगा) नामक सुविख्यात महाराज थे, जिनके दो पुत्र विक्रमादित्य एवं उदयसिंह थे। उनके भाई पृथ्वीराज के अठारह पुत्रों में से एक बनवीर था। बनवीर ने विक्रमादित्य को छल से मारकर मेवाड़ का शासन हड़प लिया और उदयसिंह को भी मारना चाहा। राजकुमार उदयसिंह की धाय पन्नाधाया ने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान देकर उदयसिंह की प्राणरक्षा की। आगे चलकर वही उदयसिंह मेवाड़ का राजा बना और उसका पुत्र महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास का अमर शौर्य-प्रतीक बना। पाठ अथर्ववेद के ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ उद्धरण से आरम्भ होता है।
मूल पाठ एवं अन्वय/भावार्थ
(मूल गद्यांश NCERT दीपकम् से ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक अनुच्छेद का सरल भावार्थ।)
“यदि पन्नाधाया नाभविष्यत् तर्हि कुतो राणाप्रतापः” — अनुच्छेद 5
सार (Hindi Summary)
‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ पाठ राजस्थान की एक महान् वीरांगना पन्ना धाय के अद्वितीय बलिदान की ऐतिहासिक कथा है। यह भारतभूमि वीरों एवं त्यागियों की भूमि है, जहाँ मातृभूमि की रक्षा हेतु अनेक भारतीयों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। इस गौरवशाली परम्परा में महिलाओं का योगदान भी अमूल्य है, और पन्नाधाया उसी त्याग, साहस एवं निष्ठा की अद्वितीय मूर्ति थी।
सोलहवीं शताब्दी में मेवाड़ के महाराणा संग्रामसिंह के दो पुत्र थे – विक्रमादित्य एवं उदयसिंह। उनके भाई पृथ्वीराज के पुत्रों में से एक दुष्टबुद्धि बनवीर ने विक्रमादित्य को छल से मारकर मेवाड़ का शासन हड़प लिया। पूर्ण उत्तराधिकार पाने के लोभ में उसने रात्रि में राजकुमार उदयसिंह को भी मारने का षड्यन्त्र रचा। उदयसिंह की धाय पन्नाधाया को जब इस कुचक्र का पता चला, तो उसने राजकुमार के शयनस्थान पर अपने ही पुत्र चन्दन को सुला दिया। बनवीर ने सोये हुए चन्दन को ही उदयसिंह समझकर मार दिया।
पन्नाधाया का यह निर्णय अकल्पनीय था – उसने ‘व्यक्तिगत हित नहीं, राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है’ इस भावना से अपने पुत्र का बलिदान देकर मेवाड़राज्य की रक्षा की। आगे चलकर वही उदयसिंह बनवीर को परास्त कर मेवाड़ का राजा बना और उसका पुत्र महाराणा प्रताप अपने शौर्य से भारतीयों के हृदय में अमर हो गया। पन्नाधाया का त्याग एवं शौर्य जब तक सूर्य-चन्द्र हैं तब तक स्थिर रहेगा। उसका बलिदान हमें शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग एवं विवेक की प्रेरणा देता है – “यदि पन्नाधाया न होती तो राणा प्रताप कहाँ से होते?”
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्यागधनानाम् | बलिदानियों का (त्यागमूर्तियों का) | Of people who sacrifice everything |
| सर्वस्वम् | अपना सब कुछ | One’s everything |
| प्रभूतम् | अधिक, प्रचुर | Abundant |
| शत्रुनिबर्हणाः | शत्रुओं का विनाश करने वाली | Destroyers of enemies |
| वीराङ्गनासु | वीर नारियों में | Among brave women |
| साहसस्य | साहस का | Of courage |
| स्वर्णिमाक्षरैः | सोने के अक्षरों से | With golden letters |
| षोडशे शतके | सोलहवीं शताब्दी में | In the sixteenth century |
| छलेन | कपट से, वञ्चना से | By deception |
| कुतन्त्रम् | षड्यन्त्र, कुचक्र | Evil plot |
| अद्वितीयम् | सर्वोत्कृष्ट, अनुपम | Matchless |
| धाया (धात्री) | धाय / दाई | Wet nurse |
| आस्ताम् | दो थे | Two were present |
| अन्यतमः | बहुतों में एक | One of many |
| दुष्टबुद्धिः | दुष्ट बुद्धि वाला | Evil minded |
| प्रतिस्पर्धी | प्रतिद्वन्द्वी | Competitor |
| मारयितुम् | मारने के लिए | To kill |
| कदाचित् | कभी, किसी समय | Sometime |
| शायितवती | सुलाया (उसने) | (She) put to sleep |
| दुष्परिणामम् | अनिष्ट को, बुरे परिणाम को | Bad outcome |
| शयनागारम् | सोने के कक्ष को | Bedroom |
| अकल्पनीयः (कल्पनातीतः) | चिन्तन से परे | Beyond imagination |
| व्यक्तिहितम् | स्वार्थ, निजहित | Self interest |
| राष्ट्रहितम् | राष्ट्र का हित, देशकल्याण | National interest |
| श्रेष्ठम् | सर्वोपरि, शीर्षस्थानीय | Highest |
| कालान्तरे | कुछ समय के बाद | Later on |
| हत्वा | मारकर | Having killed |
| पराक्रमी | वीर, विक्रमी | Valorous |
| योद्धा | सैनिक, युद्ध में समर्थ | Warrior |
| शौर्येण | शूरता से | With bravery |
| चिरम् | बहुत काल तक | For long time |
| जगति | संसार में, विश्व में | In the world |
| आचन्द्रार्कम् | जब तक सूर्य और चन्द्र हैं | As long as the sun and moon are there |
| महत्तमम् | बहुतों में श्रेष्ठ | Best among the greats |
अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)
(पाठ का सम्पूर्ण अभ्यास NCERT दीपकम् से ज्यों-के-त्यों; प्रत्येक प्रश्न एवं उप-भाग का हल नीचे।)
1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु —
(क) राजस्थानस्य वीराङ्गनासु का सुविख्याता ?
(ख) उदयसिंहः कस्य पुत्रः ?
(ग) बनवीरः कं मारयितुम् कुतन्त्रम् अरचयत् ?
(घ) कालान्तरे कः मेवाडस्य राजा अभवत् ?
(ङ) पन्नाधायायाः निर्णयः कीदृशः आसीत् ?
(च) महाराणाप्रतापः केषां हृदये चिरं स्थानं प्राप्नोत् ?
2. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु —
(क) पन्नाधाया कस्य अद्वितीयम् उदाहरणम् अस्ति ?
(ख) महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य पुत्रौ कौ आस्ताम् ?
(ग) दुष्टबुद्धिः बनवीरः किम् अचिन्तयत् ?
(घ) बनवीरस्य कुतन्त्रं ज्ञात्वा पन्नाधाया किम् अकरोत् ?
(ङ) आचन्द्रार्कं किं तिष्ठति ?
(च) पन्नाधायायाः बलिदानं किं शिक्षयति ?
3. उदाहरणानुसारम् उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
(लङ्-लकार के तीनों वचनों के प्रथमपुरुष रूपों से रिक्तस्थान पूर्ति।)
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|---|
| (क) | अमिलत् | अमिलताम् | अमिलन् |
| (ख) | अवदत् | अवदतम् | अवदन् |
| (ग) | अखादः | अखादतम् | अखादत |
| (घ) | अलिखत् | अलिखताम् | अलिखन् |
| (ङ) | अरक्षम् | अरक्षाव | अरक्षाम |
| (च) | अपिबः | अपिबतम् | अपिबत |
| (छ) | अपृच्छम् | अपृच्छाव | अपृच्छाम |
| (ज) | अमारयत् | अमारयताम् | अमारयन् |
| (झ) | अभवम् | अभवाव | अभवाम |
संकेत: (ख)–(ग)–(ङ)–(च)–(छ)–(झ) में जिस पुरुष का एक रूप दिया गया है, उसी पुरुष-वचन के क्रम से शेष रिक्तस्थान भरे गए हैं (मध्यमपुरुष/उत्तमपुरुष के अनुसार)।
4. वाक्यानि पठित्वा उदाहरणानुसारं वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु —
यथा – सः शालाम् अगच्छत् → (द्विवचन) तौ शालाम् अगच्छताम् ।
| एकवचनम् (मूल वाक्य) | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|
| (क) सः शालाम् अगच्छत् । | तौ शालाम् अगच्छताम् । | ते शालाम् अगच्छन् । |
| (ख) बालिका पद्यम् अलिखत् । | बालिके पद्यम् अलिखताम् । | बालिकाः पद्यम् अलिखन् । |
| (ग) शिक्षकः अवदत् । | शिक्षकौ अवदताम् । | शिक्षकाः अवदन् । |
| (घ) सा चित्रम् अपश्यत् । | ते चित्रम् अपश्यताम् । | ताः चित्रम् अपश्यन् । |
| (ङ) त्वम् अक्रीडः । | युवाम् अक्रीडतम् । | यूयम् अक्रीडत । |
| (च) त्वं जलम् अनयः । | युवां जलम् अनयतम् । | यूयं जलम् अनयत । |
| (छ) अहं मन्दिरम् अगच्छम् । | आवां मन्दिरम् अगच्छाव । | वयं मन्दिरम् अगच्छाम । |
| (ज) अहं मधुरम् अखादम् । | आवां मधुरम् अखादाव । | वयं मधुरम् अखादाम । |
5. उदाहरणानुसारं रेखाङ्कितानि पदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु —
यथा – महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य भ्राता पृथ्वीराजः । → कस्य भ्राता पृथ्वीराजः ?
| वाक्यम् (रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में) | प्रश्ननिर्माणम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) सः अचिन्तयत् । | कः अचिन्तयत् ? |
| (ख) शयनस्थाने चन्दनं शायितवती । | कुत्र चन्दनं शायितवती ? |
| (ग) राष्ट्रहितं श्रेष्ठम् । | किं श्रेष्ठम् ? |
| (घ) बनवीरः चन्दनम् अमारयत् । | बनवीरः कम् अमारयत् ? |
| (ङ) तस्याः निर्णयः अकल्पनीयः आसीत् । | कस्याः निर्णयः अकल्पनीयः आसीत् ? |
| (च) उदयसिंहः मेवाडस्य राजा अभवत् । | उदयसिंहः कस्य राजा अभवत् ? |
| (छ) मम प्रतिस्पर्धी न स्यात् । | कस्य प्रतिस्पर्धी न स्यात् ? |
6. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां पदानां सन्धिं कुर्वन्तु —
यथा – विद्या + अभ्यासः = विद्याभ्यासः ।
7. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानि वाक्यानि वर्तमानकाले (लट्लकारे) परिवर्तयन्तु —
यथा – पन्नाधाया राज्यम् अरक्षत् । → पन्नाधाया राज्यं रक्षति ।
योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)
पाठ में ‘योग्यताविस्तरः’ के अन्तर्गत मुख्यतः लङ्-लकार (भूतकाल) का अभ्यास कराया गया है, जिसका प्रयोग बीते हुए समय की क्रिया के लिए होता है।
1. लङ्-लकारः – पठ् धातुः (परस्मैपदम्)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यमपुरुषः | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तमपुरुषः | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
वाक्यों में प्रयोग – (प्रथम) बालकः पाठम् अपठत्, बालकौ पाठम् अपठताम्, बालकाः पाठम् अपठन् । (मध्यम) त्वं पाठम् अपठः, युवां पाठम् अपठतम्, यूयं पाठम् अपठत । (उत्तम) अहं पाठम् अपठम्, आवां पाठम् अपठाव, वयं पाठम् अपठाम ।
2. लङ्-लकार के स्थान पर क्तवतु-प्रत्ययान्त पद
सामान्यतः भूतकाल में लङ्-लकार के स्थान पर क्तवतु-प्रत्ययान्त पद का प्रयोग भी किया जाता है (पुंलिङ्ग/स्त्रीलिङ्ग)।
| धातुः | लट्-लकारः (वर्तमान) | लङ्-लकारः (भूत) | क्तवतु-प्रत्ययान्त पद |
|---|---|---|---|
| पठ् | पठति | अपठत् | पठितवान् / पठितवती |
| लिख् | लिखति | अलिखत् | लिखितवान् / लिखितवती |
| खाद् | खादति | अखादत् | खादितवान् / खादितवती |
| पिब् (पा) | पिबति | अपिबत् | पीतवान् / पीतवती |
| रक्ष् | रक्षति | अरक्षत् | रक्षितवान् / रक्षितवती |
| कृ | करोति | अकरोत् | कृतवान् / कृतवती |
| भू | भवति | अभवत् | भूतवान् / भूतवती |
| मिल् | मिलति | अमिलत् | मिलितवान् / मिलितवती |
| चल् | चलति | अचलत् | चलितवान् / चलितवती |
| गच्छ् (गम्) | गच्छति | अगच्छत् | गतवान् / गतवती |
| नय् (नी) | नयति | अनयत् | नीतवान् / नीतवती |
| स्मर् (स्मृ) | स्मरति | अस्मरत् | स्मृतवान् / स्मृतवती |
| त्यज् | त्यजति | अत्यजत् | त्यक्तवान् / त्यक्तवती |
| पृच्छ् (प्रच्छ्) | पृच्छति | अपृच्छत् | पृष्टवान् / पृष्टवती |
| तिष्ठ् (स्था) | तिष्ठति | अतिष्ठत् | स्थितवान् / स्थितवती |
| पश्य् (दृश्) | पश्यति | अपश्यत् | दृष्टवान् / दृष्टवती |
| क्रीड् | क्रीडति | अक्रीडत् | क्रीडितवान् / क्रीडितवती |
3. राज्यस्य सप्त अङ्गानि (राज्य के सात अंग)
1. स्वामी 2. अमात्यः 3. सुहृत् 4. कोषः 5. राष्ट्रम् 6. दुर्गम् 7. बलम् — ये सुदृढ़ हों तो राष्ट्र सुदृढ़ होता है।
4. प्राचीन युद्धों के विविध व्यूह
चक्रव्यूहः, गरुडव्यूहः, सर्पव्यूहः, मकरव्यूहः, अर्धचन्द्रव्यूहः, मण्डलव्यूहः, ओरमीव्यूहः, क्रौञ्चव्यूहः, वज्रव्यूहः इत्यादयः व्यूहाः ।
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
भारतीयानां वीराङ्गनानां चित्राणि संगृह्य तासां पराक्रमं सारांशरूपेण स्वभाषया लिखन्तु ।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. पन्नाधाया कौन थी?
2. बनवीर ने मेवाड़ का शासन किस प्रकार प्राप्त किया?
3. पन्नाधाया ने उदयसिंह की रक्षा कैसे की?
4. पाठ का आरम्भ किस वेद-वचन से होता है और उसका क्या अर्थ है?
5. पन्नाधाया का बलिदान हमें क्या शिक्षा देता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ पाठ की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
7. पन्नाधाया के त्याग एवं उसके राष्ट्रहित-भाव को स्पष्ट कीजिए।
8. लङ्-लकार किसे कहते हैं? पठ् धातु के परस्मैपद रूप लिखिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. पन्नाधाया किस प्रदेश की वीरांगना थी?
(क) गुजरातस्य
(ख) राजस्थानस्य
(ग) पञ्जाबस्य
(घ) बङ्गस्य
2. महाराणा संग्रामसिंह के कितने पुत्र थे?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
3. पन्नाधाया उदयसिंह की क्या थी?
(क) माता
(ख) भगिनी
(ग) धाया (धात्री)
(घ) मित्रम्
4. पन्नाधाया ने अपने किस पुत्र को शयनस्थान पर सुलाया?
(क) उदयसिंहम्
(ख) विक्रमादित्यम्
(ग) चन्दनम्
(घ) प्रतापम्
5. विक्रमादित्य को छल से किसने मारा?
(क) उदयसिंहः
(ख) बनवीरः
(ग) पृथ्वीराजः
(घ) प्रतापः
6. कालान्तर में मेवाड़ का राजा कौन बना?
(क) बनवीरः
(ख) चन्दनः
(ग) उदयसिंहः
(घ) विक्रमादित्यः
7. उदयसिंह का पराक्रमी पुत्र कौन था?
(क) बनवीरः
(ख) महाराणाप्रतापः
(ग) पृथ्वीराजः
(घ) चन्दनः
8. पाठ का आरम्भ किस वेद के वचन से होता है?
(क) ऋग्वेदस्य
(ख) सामवेदस्य
(ग) अथर्ववेदस्य
(घ) यजुर्वेदस्य
9. पन्नाधाया के अनुसार किसका हित सर्वश्रेष्ठ है?
(क) व्यक्तिहितम्
(ख) राष्ट्रहितम्
(ग) धनहितम्
(घ) कुलहितम्
10. ‘अमारयत्’ पद किस लकार का रूप है?
(क) लट्-लकारः
(ख) लोट्-लकारः
(ग) लङ्-लकारः (भूतकाल)
(घ) लृट्-लकारः
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पन्नाधाया ने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान दिया।
कारण (R): वह राजकुमार उदयसिंह की प्राणरक्षा करके मेवाड़राज्य को बनवीर के षड्यन्त्र से बचाना चाहती थी।
2. अभिकथन (A): बनवीर ने चन्दन को उदयसिंह समझकर मार दिया।
कारण (R): पन्नाधाया ने उदयसिंह के शयनस्थान पर चन्दन को सुला दिया था।
3. अभिकथन (A): बनवीर एक दुष्टबुद्धि व्यक्ति था।
कारण (R): उसने छल से विक्रमादित्य को मारकर मेवाड़ का शासन हड़प लिया और उदयसिंह को भी मारना चाहा।
4. अभिकथन (A): महाराणा प्रताप भारतीयों के हृदय में चिरकाल तक स्थान पा गया।
कारण (R): महाराणा प्रताप बनवीर का पुत्र था और उसने पन्नाधाया को मारा था।
5. अभिकथन (A): पन्नाधाया का त्याग आचन्द्रार्क संसार में स्थिर रहता है।
कारण (R): उसका बलिदान सभी को शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं विवेक की शिक्षा देता है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- कथा के पात्रों एवं उनके सम्बन्ध याद रखें – संग्रामसिंह (पिता), विक्रमादित्य व उदयसिंह (पुत्र), पृथ्वीराज (भाई), बनवीर (भतीजा), चन्दन (पन्नाधाया का पुत्र), महाराणा प्रताप (उदयसिंह का पुत्र)।
- एकपदेन एवं पूर्णवाक्येन उत्तर के अन्तर को समझें – एकपदेन में केवल एक पद, पूर्णवाक्येन में पूरा वाक्य लिखें।
- लङ्-लकार (अपठत्, अमारयत्, अभवत्) के तीनों पुरुष-वचन रूप तालिका सहित कण्ठस्थ करें।
- वचनपरिवर्तन में कर्ता एवं क्रिया दोनों का वचन बदलें (सः → तौ → ते; अगच्छत् → अगच्छताम् → अगच्छन्)।
- सन्धि में दीर्घ-सन्धि (अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ) के नियम याद रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- पन्नाधाया को उदयसिंह की ‘माता’ समझ लेना – वह उसकी ‘धाय (धात्री)’ थी।
- महाराणा प्रताप को उदयसिंह का भाई/पिता बता देना – वह उदयसिंह का पुत्र था।
- लङ्-लकार में अट्-आगम (आरम्भ का ‘अ’) छोड़ देना – पठत् नहीं, अपठत्।
- प्रश्ननिर्माण में रेखांकित पद के अनुसार गलत प्रश्नवाचक पद लगाना (कः, किम्, कुत्र, कस्य, कस्याः)।
- संयुक्ताक्षर/मात्रा की अशुद्धि – शयनागारम्, कुतन्त्रम्, स्वर्णिमाक्षरैः शुद्ध लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 7 का पाठ 12 ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ किस पर आधारित है?
यह पाठ राजस्थान (मेवाड़) की वीरांगना पन्नाधाया (पन्ना धाय) के अद्वितीय त्याग एवं बलिदान की ऐतिहासिक कथा पर आधारित है, जिसने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान देकर राजकुमार उदयसिंह की रक्षा की।
पन्नाधाया ने राजकुमार उदयसिंह की रक्षा कैसे की?
बनवीर के षड्यन्त्र को जानकर पन्नाधाया ने उदयसिंह के शयनस्थान पर अपने पुत्र चन्दन को सुला दिया। बनवीर ने सोये हुए चन्दन को ही उदयसिंह समझकर मार दिया, और इस प्रकार उदयसिंह बच गया।
पन्नाधाया का बलिदान हमें क्या शिक्षा देता है?
पन्नाधाया का बलिदान हमें शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग एवं विवेक की शिक्षा देता है – कि व्यक्तिगत हित से राष्ट्रहित सदा श्रेष्ठ है।
मूल गद्यांश, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
