Class 7 Sanskrit Deepakam Chapter 9 Solutions (NCERT 2026–27) – अन्नाद् भवन्ति भूतानि

इस पृष्ठ पर कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) पाठ 9 ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ का सम्पूर्ण हल दिया गया है – माता एवं पुत्री के रोचक संवाद के रूप में लिखित यह पाठ सृष्टि के क्रम (आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथिवी → ओषधि → अन्न → प्राणी) को सरल भाषा में समझाता है। यहाँ मूल पाठ, अन्वय/भावार्थ, सार, शब्दार्थ, तथा पाठ के अभ्यासः के हर प्रश्न एवं उप-भाग के मौलिक, परीक्षा-उपयोगी उत्तर, व्याकरण-तालिकाएँ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ, अभिकथन-कारण एवं FAQ दिए गए हैं।

Class: 7 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 9 पाठ: अन्नाद् भवन्ति भूतानि Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 7 का नवम पाठ ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ एक माता एवं उसकी पुत्री के संवाद के रूप में लिखा गया है। पाठ का आरम्भ इस विचार से होता है कि भारत की दो प्रतिष्ठाएँ हैं – संस्कृत एवं संस्कृति; हमारा प्राचीन ज्ञान संस्कृत पर आश्रित है। पुत्री अपनी माता से पूछती है कि मनुष्य, प्राणी एवं कीट इस भूलोक में कैसे आए। माता उसे सृष्टि की उत्पत्ति का क्रम समझाती है – ब्रह्म (चेतना-शक्ति/ऊर्जा) से आकाश, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल, जल से पृथिवी, पृथिवी से ओषधि-सस्य-वृक्ष, सस्यों से अन्न (आहार) तथा अन्न से कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए। इस प्रकार पाठ का केन्द्रीय भाव तैत्तिरीयोपनिषद् का यह सूत्र है कि “अन्न से ही समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं”। पाठ यह भी सिखाता है कि भारत का मौलिक ज्ञान उपनिषद् आदि ग्रन्थों में निहित है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ संवाद-शैली (माता-पुत्री-संवादः) में रचित है। इसका वैचारिक आधार तैत्तिरीयोपनिषद् (२-१-२) का प्रसिद्ध वचन है – “तस्माद्वा एतस्मात् आत्मनः आकाशः सम्भूतः…ओषधिभ्योऽन्नम्, अन्नात् पुरुषः”। पाठ में आधुनिक रसायनशास्त्र (Chemistry) के ‘द्रव्य की अवस्थाओं (States of Matter)’ से भी इसका सम्बन्ध जोड़ा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान में सृष्टिक्रम के विषय में समानता है। माता बताती है कि उसने आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े हैं, इसी से उसे यह ज्ञान प्राप्त हुआ। पाठ का संदेश है कि उपनिषद्-ग्रन्थ अवश्य पढ़ने योग्य हैं, क्योंकि उनमें भारत का मौलिक ज्ञान निहित है और उससे जीवन का उत्कर्ष होता है।

मूल पाठ एवं अन्वय/भावार्थ

(पाठ का मूल अंश ज्यों-के-त्यों; नीचे प्रत्येक अंश का भावार्थ दिया गया है।)

भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे – संस्कृतं संस्कृतिः च । भारतस्य विशिष्टं प्राचीनं ज्ञानं संस्कृताश्रितं वर्तते । संस्कृतिः अपि संस्कृताश्रिता भवति । अस्माकं प्राचीनाः ऋषिमुनयः, विद्वांसः, गणितज्ञाः, खगोलविज्ञानिनः … आचार्याः भारतवर्षस्य यशः चतसृषु दिक्षु विस्तारितवन्तः । अधुना अपि संस्कृतग्रन्थान् आश्रित्य अनेके जनाः वैज्ञानिकाः शोधं कुर्वन्तः सन्ति । भारतीय-दर्शन-शास्त्रेषु सृष्टेः उत्पत्तिविषये नैके विचाराः प्रतिपादिताः सन्ति । तेषु सृष्टिक्रमस्य विषये वयं पठामः । — (पाठ-प्रस्तावना)
भावार्थभारत की दो प्रतिष्ठाएँ हैं – संस्कृत भाषा एवं संस्कृति। भारत का विशिष्ट प्राचीन ज्ञान संस्कृत पर आश्रित है तथा संस्कृति भी संस्कृत पर ही आधारित है। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, विद्वानों, गणितज्ञों, खगोलविज्ञानियों आदि आचार्यों ने भारत के यश को चारों दिशाओं में फैलाया। आज भी अनेक वैज्ञानिक संस्कृत-ग्रन्थों के आधार पर शोध कर रहे हैं। भारतीय दर्शनशास्त्रों में सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में अनेक विचार दिए गए हैं; उनमें से सृष्टिक्रम के विषय में हम यहाँ पढ़ते हैं।
पुत्री – अम्ब ! मम काचिद् जिज्ञासा अस्ति । वयं मनुष्याः प्राणिनः कीटाः च कथं भूलोके आगताः ?
माता – वत्से ! तदर्थं भवती प्रथमं पृथिव्याः उत्पत्तिक्रमं जानीयात् ।
पुत्री – अहो ! रोचकं स्यात्, कृपया श्रावयतु ।
माता – अस्तु ! प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत् ।
पुत्री – ब्रह्म इत्युक्ते किम् अम्ब ?
माता – ब्रह्म इत्युक्ते चेतना-शक्तिः, ऊर्जा वा, या सर्वत्र व्याप्ता अस्ति । यथा – आकाशः अणुः च सर्वत्र व्याप्तः अस्ति ।
भावार्थपुत्री माता से पूछती है – हे माँ! मेरी एक जिज्ञासा है कि हम मनुष्य, प्राणी एवं कीट इस भूलोक में कैसे आए? माता उत्तर देती है कि इसके लिए पहले पृथिवी की उत्पत्ति का क्रम जानना चाहिए। पुत्री इसे रोचक मानकर सुनाने की प्रार्थना करती है। माता बताती है कि सबसे पहले ब्रह्म से आकाश की उत्पत्ति हुई। पुत्री पूछती है कि ‘ब्रह्म’ क्या है? माता समझाती है कि ब्रह्म अर्थात् चेतना-शक्ति या ऊर्जा, जो सर्वत्र व्याप्त है – जैसे आकाश एवं अणु सर्वत्र फैले हुए हैं।
पुत्री – अनन्तरम् ?
माता – आकाशात् वायुः उत्पन्नः ।
पुत्री – अम्ब ! पृथिवी कदा उत्पन्ना ?
माता – शृणोतु, वदामि । वायोः अग्निः उत्पन्नः ।
पुत्री – एतत् सर्वं किमर्थम् अम्ब ? साक्षात् मनुष्याणाम् उत्पत्तिं वदतु ।
माता – अयि वत्से ! एतत् सर्वं नास्ति चेत् कथं मनुष्याः प्राणिनः वा जीवन्ति ?
पुत्री – जलम् आहारः वायुः च अस्ति चेत् पर्याप्तं खलु !
माता – आम्, अतः तेषामपि उत्पत्तिं जानातु ।
भावार्थपुत्री आगे का क्रम पूछती है। माता बताती है कि आकाश से वायु उत्पन्न हुई। जब पुत्री पृथिवी की उत्पत्ति पूछती है, तो माता कहती है – सुनो, बताती हूँ; वायु से अग्नि उत्पन्न हुई। पुत्री अधीर होकर सीधे मनुष्यों की उत्पत्ति बताने को कहती है, तब माता समझाती है कि यदि ये (जल, वायु, अग्नि आदि) न हों तो मनुष्य एवं प्राणी जीवित कैसे रहेंगे? पुत्री स्वीकार करती है कि जल, आहार एवं वायु हों तो यह पर्याप्त है। माता कहती है कि इसीलिए उनकी उत्पत्ति भी जानना आवश्यक है।
पुत्री – तर्हि अग्नेः कस्य उत्पत्तिः अभवत् ?
माता – अग्नेः जलस्य उत्पत्तिः अभवत् ।
पुत्री – जलात् मनुष्यस्य उत्पत्तिः खलु ?
माता – नैव वत्से ! जलात् पृथिव्याः उत्पत्तिः अभवत् ।
पुत्री – अहो ! सत्यम्, अहं विस्मृतवती एव । पृथिव्याः तु प्राणिनः मनुष्याः च उत्पन्नाः ।
माता – नहि नहि, पृथिव्याः ओषधीनां सस्यानां वृक्षादीनां च उत्पत्तिः अभवत् ।
पुत्री – अहो अद्भुतम् !
माता – सस्येभ्यः आहारस्य उत्पत्तिः अभवत् ।
पुत्री – आम्, आहारस्य उत्पत्तेः परं भूमौ सर्वमपि आगतम् एव । आहारात् कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः उत्पन्नाः खलु अम्ब ?
भावार्थपुत्री पूछती है कि अग्नि से किसकी उत्पत्ति हुई। माता बताती है – अग्नि से जल उत्पन्न हुआ। पुत्री समझती है कि जल से मनुष्य उत्पन्न हुआ होगा, पर माता उसे सुधारती है कि जल से पृथिवी उत्पन्न हुई। फिर पुत्री कहती है कि पृथिवी से प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए; किन्तु माता बताती है कि पृथिवी से तो ओषधियाँ, सस्य (फसलें) एवं वृक्ष आदि उत्पन्न हुए। सस्यों से आहार (अन्न) की उत्पत्ति हुई। अन्त में पुत्री स्वयं समझ जाती है कि आहार की उत्पत्ति के बाद भूमि पर सब कुछ आ गया – अर्थात् अन्न से ही कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए।
माता – अहो ! मम पुत्री बहु चतुरा अस्ति । सत्यम् उक्तवती भवती ।
पुत्री – अम्ब ! भवती एतत् सर्वं कथं जानाति ?
माता – अहम् आधुनिकं रसायनशास्त्रम् उपनिषद्-ग्रन्थान् च पठितवती ।
पुत्री – अहो ! अहमपि उपनिषदं पठामि अम्ब !
माता – सत्यं वत्से ! अवश्यम् उपनिषद्-ग्रन्थाः पठनीयाः । यतः अस्माकं भारतस्य मौलिकं ज्ञानं तेषु निहितम् अस्ति । तेन अस्माकं जीवनस्य अपि उत्कर्षः भवति ।
भावार्थमाता प्रसन्न होकर कहती है कि उसकी पुत्री बहुत चतुर है, उसने सत्य ही कहा। पुत्री पूछती है कि माता यह सब कैसे जानती है। माता बताती है कि उसने आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े हैं। पुत्री भी उपनिषद् पढ़ने का संकल्प करती है। अन्त में माता कहती है कि उपनिषद्-ग्रन्थ अवश्य पढ़ने योग्य हैं, क्योंकि उनमें हमारे भारत का मौलिक ज्ञान निहित है, और उससे हमारे जीवन का भी उत्कर्ष (उन्नति) होता है।

सार (Hindi Summary)

‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ पाठ माता एवं पुत्री के संवाद के रूप में सृष्टि की उत्पत्ति के क्रम को समझाता है। पाठ के आरम्भ में बताया गया है कि भारत की दो प्रतिष्ठाएँ हैं – संस्कृत एवं संस्कृति, और हमारा सम्पूर्ण प्राचीन ज्ञान संस्कृत पर आधारित है। पुत्री अपनी माता से जिज्ञासावश पूछती है कि मनुष्य, प्राणी एवं कीट इस भूलोक में कैसे आए।

माता उसे सृष्टिक्रम बताती है। सबसे पहले ब्रह्म (अर्थात् सर्वत्र व्याप्त चेतना-शक्ति या ऊर्जा) से आकाश की उत्पत्ति हुई। आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल, और जल से पृथिवी उत्पन्न हुई। पृथिवी से ओषधियाँ, सस्य (फसलें) एवं वृक्ष उत्पन्न हुए, सस्यों से अन्न (आहार) की उत्पत्ति हुई, और अन्ततः अन्न से ही कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए। यही तैत्तिरीयोपनिषद् का प्रसिद्ध भाव है – “ओषधिभ्योऽन्नम्, अन्नात् पुरुषः” अर्थात् अन्न से ही समस्त प्राणी (भूत) उत्पन्न होते हैं।

पाठ के अन्त में पुत्री पूछती है कि माता यह सब कैसे जानती है। माता बताती है कि उसने आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े हैं। पुत्री भी उपनिषद् पढ़ने का निश्चय करती है। माता उसे प्रेरित करती है कि उपनिषद्-ग्रन्थ अवश्य पढ़ने योग्य हैं, क्योंकि उनमें भारत का मौलिक ज्ञान निहित है, जिससे जीवन का उत्कर्ष होता है। इस प्रकार पाठ हमें यह संदेश देता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान दोनों सृष्टिक्रम के विषय में एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं, तथा हमें अपनी ज्ञान-परम्परा का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
भूतानिसमस्त प्राणीगणAll living beings
अम्ब !हे माँ! (भोः मातः)O Mother!
ब्रह्मसर्वव्याप्त चेतन-शक्ति एवं ऊर्जा / सृष्टिकर्ताOmnipresent conscious power & energy
ब्रह्मणःसर्वव्याप्त परमेश्वर से (सृष्टिकर्ता से)From the universal power / creator
काचित्कोई (का अपि)Some / a certain
जिज्ञासाजानने की इच्छा (ज्ञातुम् इच्छा)Curiosity
तदर्थम्इसलिए (अतः)For that matter
उत्पत्तिक्रमम्उत्पत्ति का क्रमOrder of origin
जानीयात्जानना चाहिए (अवगच्छेत्)Should know
वत्से !बेटी! (हे पुत्रि!)Dear daughter!
अग्नेःआग से (वह्नेः)From fire
विस्मृतवतीभूल गयी (न स्मृतवती)Forgot
ओषधीनाम्जड़ी-बूटियों का (औषधोपयोगि-पादपानाम्)Of herbs
सस्यानाम्फसलों काOf crops
उक्तवतीबोली (अवदत्)She said
पठनीयम्पढ़ना चाहिए (पठेत्)Should be read
रसायनशास्त्रम्रसायनशास्त्र (रसशास्त्रम्)Chemistry
निहितम्स्थित / समाहितContained / lying within
उत्कर्षःउन्नति, श्रेष्ठताElevation / progress
चतुराचतुर, बुद्धिमतीClever, intelligent

वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)

1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु —

(क) पुत्र्याः जिज्ञासा का ?

उत्तरपुत्र्याः जिज्ञासा अस्ति – वयं मनुष्याः प्राणिनः कीटाः च कथं भूलोके आगताः ? (अर्थात् मनुष्य, प्राणी एवं कीट इस भूलोक में कैसे आए?)

(ख) कस्मात् आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत् ?

उत्तरब्रह्मणः आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत् । (ब्रह्म अर्थात् सर्वव्याप्त चेतना-शक्ति/ऊर्जा से आकाश उत्पन्न हुआ।)

(ग) अग्नेः कस्य उत्पत्तिः अभवत् ?

उत्तरअग्नेः जलस्य उत्पत्तिः अभवत् । (अग्नि से जल उत्पन्न हुआ।)

(घ) पृथिव्याः केषाम् उत्पत्तिः अभवत् ?

उत्तरपृथिव्याः ओषधीनां सस्यानां वृक्षादीनां च उत्पत्तिः अभवत् । (पृथिवी से ओषधियाँ, फसलें एवं वृक्ष आदि उत्पन्न हुए।)

(ङ) आहारात् के उत्पन्नाः ?

उत्तरआहारात् कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः च उत्पन्नाः । (आहार/अन्न से कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए।)

(च) माता किं किं पठितवती ?

उत्तरमाता आधुनिकं रसायनशास्त्रम् उपनिषद्-ग्रन्थान् च पठितवती । (माता ने आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ पढ़े थे।)

2. पाठं पठित्वा रिक्तस्थानेषु समुचितं पदं लिखन्तु —

उत्तर (क) अम्ब ! मम काचिद् जिज्ञासा अस्ति । (ख) प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत् । (ग) साक्षात् मनुष्याणाम् उत्पत्तिं वदतु । (घ) आहारात् कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः उत्पन्नाः खलु अम्ब ? (ङ) अहम् आधुनिकं रसायनशास्त्रम् उपनिषद्-ग्रन्थान् च पठितवती । (च) अस्माकं मौलिकं ज्ञानं तेषु एव निहितम् अस्ति ।

3. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां शब्दानां वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु —

(पञ्चमी विभक्तेः रूपाणि – उदाहरणम्: आहार → आहारात् / आहाराभ्याम् / आहारेभ्यः)

शब्दःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
आहारआहारात्आहाराभ्याम्आहारेभ्यः
मनुष्यमनुष्यात्मनुष्याभ्याम्मनुष्येभ्यः
वृक्षवृक्षात्वृक्षाभ्याम्वृक्षेभ्यः
अग्निअग्नेःअग्निभ्याम्अग्निभ्यः
मुनिमुनेःमुनिभ्याम्मुनिभ्यः
पेटिकापेटिकायाःपेटिकाभ्याम्पेटिकाभ्यः
वाटिकावाटिकायाःवाटिकाभ्याम्वाटिकाभ्यः
मालामालायाःमालाभ्याम्मालाभ्यः
कूपीकूप्याःकूपीभ्याम्कूपीभ्यः
नदीनद्याःनदीभ्याम्नदीभ्यः
नगरीनगर्याःनगरीभ्याम्नगरीभ्यः

4. उदाहरणानुसारम् अधः रेखाङ्कितानि पदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु —

यथा – माता आपणात् गृहम् आगच्छति । → माता कुतः गृहम् आगच्छति ? / माता कस्मात् गृहम् आगच्छति ?

वाक्यम् (रेखाङ्कित पद मोटे अक्षरों में)प्रश्ननिर्माणम् – उत्तर
(क) राजेशः विद्यालयात् पुस्तकम् आनयति ।राजेशः कुतः पुस्तकम् आनयति ? / राजेशः कस्मात् पुस्तकम् आनयति ?
(ख) विकासः महेशात् लेखनीं स्वीकृतवान् ।विकासः कस्मात् लेखनीं स्वीकृतवान् ? / विकासः कुतः लेखनीं स्वीकृतवान् ?
(ग) माता गृहात् पुत्रं पश्यति ।माता कुतः पुत्रं पश्यति ? / माता कस्मात् पुत्रं पश्यति ?
(घ) हिमालयात् गङ्गा प्रवहति ।कुतः गङ्गा प्रवहति ? / कस्मात् गङ्गा प्रवहति ?

5. अधः प्रदत्तानि पदानि पठन्तु, तेषां पदानां पर्यायपदानि पाठेषु सन्ति, तानि चित्वा निर्देशानुसारं पदरञ्जन्यां लिखन्तु —

(पदरञ्जनी/शब्द-पहेली के दिए गए संकेत-शब्दों के पर्यायपद पाठ में से चुनकर लिखिए।)

संकेतः (वामतः दक्षिणम् / उपरिष्टात् अधः)पर्यायपदम् (पाठात्) – उत्तर
(1) जन्म (त्रीणि अक्षराणि)उत्पत्तिः
(2) मातः (अक्षरद्वयम्)अम्ब
(3) सत्यम् (अक्षरद्वयम्)आम्
(4) अपि (एकम् अक्षरम्)
(5) ओषधीनाम् (त्रीणि अक्षराणि)सस्यानाम्
(6) तदर्थम् (अक्षरद्वयम्)अतः
(7) कस्मिन् समये (अक्षरद्वयम्)कदा
(उपरिष्टात्-1) उन्नतिः (त्रीणि अक्षराणि)उत्कर्षः
(उपरिष्टात्-2) समाप्तम् (चत्वारि अक्षराणि)विस्मृतवती (समाप्त/भूल जाना)
(उपरिष्टात्-3) गगनस्य (चत्वारि अक्षराणि)आकाशस्य
(उपरिष्टात्-4) बुद्धिमती (त्रीणि अक्षराणि)चतुरा
(उपरिष्टात्-5) सकलम् (अक्षरद्वयम्)सर्वम्
(उपरिष्टात्-6) ततः परम् (चत्वारि अक्षराणि)अनन्तरम्
(उपरिष्टात्-8) किल (अक्षरद्वयम्)खलु

6. उदाहरणानुसारं कः कस्मात् विद्यां प्राप्तवान् इति पूर्णवाक्येन लिखन्तु —

यथा – शुक्राचार्यः – महादेवः → शुक्राचार्यः महादेवात् विद्यां प्राप्तवान् ।

उत्तर (क) पद्मपादः – शङ्कराचार्यः → पद्मपादः शङ्कराचार्यात् विद्यां प्राप्तवान् । (ख) विवेकानन्दः – रामकृष्णः → विवेकानन्दः रामकृष्णात् विद्यां प्राप्तवान् । (ग) रामः – वसिष्ठः → रामः वसिष्ठात् विद्यां प्राप्तवान् । (घ) भीष्मः – परशुरामः → भीष्मः परशुरामात् विद्यां प्राप्तवान् । (ङ) चन्द्रगुप्तः – चाणक्यः → चन्द्रगुप्तः चाणक्यात् विद्यां प्राप्तवान् । (च) अर्जुनः – द्रोणाचार्यः → अर्जुनः द्रोणाचार्यात् विद्यां प्राप्तवान् ।

7. अधः प्रदत्तानि वाक्यानि पठित्वा मातृभाषया, प्रान्तीयभाषया आङ्ग्लभाषया वा अनुवादं कुर्वन्तु —

उत्तर (हिन्दी अनुवाद) (क) राधा नगरात् आगच्छति । – राधा नगर से आती है। (ख) विनयः वृक्षात् पुष्पाणि चिनोति । – विनय वृक्ष से फूल चुनता है। (ग) सन्दीपः कार्यालयात् गृहं गतवान् । – सन्दीप कार्यालय से घर गया। (घ) भगिनी दूरात् वाहनं पश्यति । – बहन दूर से वाहन को देखती है। (ङ) महेशः शालायाः गृहम् आगतवान् । – महेश पाठशाला से घर आया। (च) बालः कपाटिकायाः धनं स्वीकरोति । – बालक अलमारी से धन लेता है।

योग्यताविस्तरः (व्याकरण-तालिकाः)

पाठ के अन्तर्गत ‘योग्यताविस्तरः’ में तैत्तिरीयोपनिषद् का मूल वचन तथा सृष्टिक्रम का सार दिया गया है। साथ ही इसका सम्बन्ध आधुनिक रसायनशास्त्र के ‘द्रव्य की अवस्थाओं’ से जोड़ा गया है।

1. अत्र इदम् अवधेयम् (मूल उपनिषद्-वचन)

तस्माद्वा एतस्मात् आत्मनः आकाशः सम्भूतः । आकाशाद्वायुः । वायोरग्निः । अग्नेरापः । अद्भ्यः पृथिवी । पृथिव्या ओषधयः । ओषधिभ्योऽन्नम् । अन्नात् पुरुषः ॥ — तैत्तिरीयोपनिषत् २-१-२
भावार्थउस आत्मा (ब्रह्म) से आकाश उत्पन्न हुआ, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल (आपः), जल से पृथिवी, पृथिवी से ओषधियाँ, ओषधियों से अन्न, और अन्न से पुरुष (प्राणी) उत्पन्न हुआ। यही पाठ का केन्द्रीय भाव – “अन्नाद् भवन्ति भूतानि” है।

2. सृष्टिक्रमः (तालिका रूप में)

कस्मात् (किससे)उत्पत्तिः (किसकी)
ब्रह्मणः (आत्मनः)आकाशः
आकाशात्वायुः
वायोःअग्निः
अग्नेःजलम् (आपः)
जलात् (अद्भ्यः)पृथिवी
पृथिव्याःओषधयः, सस्यानि, वृक्षाः
ओषधिभ्यः (सस्येभ्यः)अन्नम् (आहारः)
अन्नात् (आहारात्)कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः (भूतानि)

3. पञ्चमी विभक्तिः (अपादान-कारकम्)

इस पाठ में ‘अमुक से उत्पन्न’ अर्थ में पञ्चमी विभक्ति का बहुधा प्रयोग हुआ है – ब्रह्मणः, आकाशात्, वायोः, अग्नेः, जलात्, सस्येभ्यः, आहारात्। जहाँ से कुछ अलग होता/उत्पन्न होता है, वहाँ (अपादान कारक में) पञ्चमी विभक्ति लगती है। उदाहरण – वृक्षात् पत्रं पतति, हिमालयात् गङ्गा प्रवहति।

परियोजनाकार्यम् (Project Work)

1. भारतस्य गणितज्ञानां प्राचीनविज्ञानिनां खगोलविज्ञानिनां चित्राणि सङ्गृह्य तेषां नामानि लिखित्वा एकं भित्तिपत्रं कुर्वन्तु ।

मार्गदर्शनम्यह क्रियाकलाप है। प्राचीन भारतीय गणितज्ञों एवं वैज्ञानिकों (आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, वराहमिहिर, सुश्रुत, चरक आदि) के चित्र एकत्र कर, नीचे उनके नाम लिखकर एक भित्तिपत्र (wall-chart) बनाइए।

2. प्राचीनभारतस्य राज्यानां नामानि, तेषाम् आधुनिकनामानि च लिखन्तु ।

उत्तर (नमूना)यथा – इन्द्रप्रस्थः → देहली (दिल्ली), कर्णपुरम् → कानपुर, पाटलिपुत्रम् → पटना, कुसुमपुरम् → पटना, कान्यकुब्जम् → कन्नौज, उज्जयिनी → उज्जैन।

3. मातृभाषायां प्रान्तीयभाषायां वा पदरञ्जन्याः (SUDOKU) निर्माणं कुर्वन्तु ।

मार्गदर्शनम्अपनी मातृभाषा या प्रान्तीय भाषा में एक शब्द-पहेली (पदरञ्जनी) अथवा सुडोकू स्वयं बनाइए एवं मित्रों से हल करवाइए।

4. कक्षायां संस्कृतस्य वस्तुप्रदर्शिन्याः आयोजनं कुर्वन्तु ।

मार्गदर्शनम्कक्षा में संस्कृत-सम्बन्धी वस्तुओं (श्लोक, सुभाषित, चित्र, मॉडल आदि) की एक प्रदर्शनी का आयोजन कीजिए।

5. भवतः अथवा परिवारजनानां जन्मदिनोत्सवे न्यूनातिन्यूनम् एकस्य वृक्षस्य आरोपणं कुर्वन्तु । प्रतिदिनं जलेन सिञ्चन्तु ।

मार्गदर्शनम्अपने या परिवार के सदस्यों के जन्मदिन पर कम-से-कम एक वृक्ष का रोपण कीजिए तथा प्रतिदिन उसे जल से सींचिए।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. भारत की दो प्रतिष्ठाएँ कौन-सी बताई गई हैं?

उत्तरभारत की दो प्रतिष्ठाएँ हैं – संस्कृत (भाषा) एवं संस्कृति। भारत का विशिष्ट प्राचीन ज्ञान एवं संस्कृति दोनों संस्कृत भाषा पर आश्रित हैं, इसी कारण संस्कृत को भारत की प्रतिष्ठा कहा गया है।

2. ‘ब्रह्म’ से माता का क्या तात्पर्य है?

उत्तरमाता के अनुसार ‘ब्रह्म’ अर्थात् वह चेतना-शक्ति या ऊर्जा है जो सर्वत्र व्याप्त है। जैसे आकाश एवं अणु सर्वत्र फैले हुए हैं, वैसे ही ब्रह्म सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है। इसी ब्रह्म से सृष्टि का आरम्भ हुआ।

3. सृष्टिक्रम में आकाश के पश्चात किसकी उत्पत्ति का क्रम है?

उत्तरआकाश के पश्चात क्रमशः वायु, फिर अग्नि, फिर जल, फिर पृथिवी की उत्पत्ति हुई। तदनन्तर पृथिवी से ओषधि-सस्य-वृक्ष, सस्यों से अन्न, और अन्त में अन्न से प्राणी उत्पन्न हुए।

4. माता को सृष्टिक्रम का ज्ञान कैसे हुआ?

उत्तरमाता ने आधुनिक रसायनशास्त्र (Chemistry) एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े थे, इसी कारण उसे सृष्टिक्रम का यह ज्ञान प्राप्त हुआ। इससे यह सिद्ध होता है कि प्राचीन ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं।

5. माता पुत्री को उपनिषद् पढ़ने की प्रेरणा क्यों देती है?

उत्तरमाता बताती है कि उपनिषद्-ग्रन्थों में भारत का मौलिक ज्ञान निहित है। इन ग्रन्थों के अध्ययन से जीवन का उत्कर्ष (उन्नति) होता है, इसी कारण वह पुत्री को उपनिषद् अवश्य पढ़ने की प्रेरणा देती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ पाठ में वर्णित सृष्टिक्रम को विस्तार से लिखिए।

उत्तरइस पाठ में माता अपनी पुत्री को सृष्टि की उत्पत्ति का क्रम समझाती है। सबसे पहले ब्रह्म (सर्वव्याप्त चेतना-शक्ति/ऊर्जा) से आकाश उत्पन्न हुआ। आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल, और जल से पृथिवी की उत्पत्ति हुई।पृथिवी से ओषधियाँ, सस्य (फसलें) एवं वृक्ष उत्पन्न हुए। सस्यों से अन्न (आहार) उत्पन्न हुआ, और अन्ततः अन्न से ही कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए। यही तैत्तिरीयोपनिषद् का प्रसिद्ध वचन है – “ओषधिभ्योऽन्नम्, अन्नात् पुरुषः”, अर्थात् अन्न से ही समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार पाठ यह सिद्ध करता है कि अन्न जीवन का मूल आधार है तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान सृष्टिक्रम को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।

7. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है? संस्कृत एवं उपनिषद् के महत्त्व सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारत का प्राचीन ज्ञान एवं संस्कृति संस्कृत भाषा पर आधारित हैं, और इस ज्ञान का मूल स्रोत वेद-उपनिषद् आदि ग्रन्थ हैं। सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में जो क्रम तैत्तिरीयोपनिषद् में हजारों वर्ष पूर्व बताया गया, वह आधुनिक विज्ञान (रसायनशास्त्र, द्रव्य की अवस्थाएँ) से भी मेल खाता है।पाठ यह भी सिखाता है कि अन्न ही समस्त प्राणियों के जीवन का आधार है, अतः अन्न का सम्मान करना चाहिए। साथ ही उपनिषद्-ग्रन्थों का अध्ययन हमें मौलिक ज्ञान देता है तथा जीवन का उत्कर्ष करता है। इसलिए हमें अपनी ज्ञान-परम्परा का अध्ययन एवं संरक्षण अवश्य करना चाहिए और आधुनिक विज्ञान के साथ उसका समन्वय समझना चाहिए।

8. पाठ की संवाद-शैली की विशेषताएँ बताइए।

उत्तरयह पाठ माता एवं पुत्री के सजीव संवाद के रूप में लिखा गया है, जो इसे रोचक एवं सरल बनाता है। पुत्री की जिज्ञासा एवं माता के क्रमबद्ध उत्तरों से कठिन विषय (सृष्टिक्रम) भी सहज हो जाता है। प्रश्नोत्तर-शैली से विद्यार्थी स्वयं को संवाद का अंग अनुभव करता है।संवाद में ‘अम्ब’, ‘वत्से’, ‘अहो’, ‘खलु’ जैसे सम्बोधन एवं अव्यय भावों को सजीव बनाते हैं। अन्त में पुत्री स्वयं निष्कर्ष तक पहुँचती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संवाद-शैली विचार-विमर्श एवं स्वयं-शिक्षण की उत्तम विधि है। इसी कारण उपनिषदों में भी अनेक ज्ञान-विषय गुरु-शिष्य संवाद के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ का शीर्षक है—

(क) सेवा हि परमो धर्मः

(ख) अन्नाद् भवन्ति भूतानि

(ग) दशमः कः?

(घ) वन्दे भारतमातरम्

उत्तर(ख) अन्नाद् भवन्ति भूतानि।

2. ब्रह्म से सबसे पहले किसकी उत्पत्ति हुई?

(क) वायोः

(ख) अग्नेः

(ग) आकाशस्य

(घ) जलस्य

उत्तर(ग) आकाशस्य। (ब्रह्मणः आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत्।)

3. अग्नि से किसकी उत्पत्ति हुई?

(क) वायोः

(ख) जलस्य

(ग) पृथिव्याः

(घ) ओषधीनाम्

उत्तर(ख) जलस्य।

4. पृथिवी से किनकी उत्पत्ति हुई?

(क) मनुष्याणाम्

(ख) ओषधीनां सस्यानां वृक्षादीनां च

(ग) कीटानाम्

(घ) अग्नेः

उत्तर(ख) ओषधीनां सस्यानां वृक्षादीनां च।

5. आहार (अन्न) से किनकी उत्पत्ति हुई?

(क) पृथिव्याः

(ख) ओषधीनाम्

(ग) कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः

(घ) वायोः

उत्तर(ग) कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः।

6. यह सृष्टिक्रम किस उपनिषद् पर आधारित है?

(क) ईशावास्योपनिषत्

(ख) कठोपनिषत्

(ग) तैत्तिरीयोपनिषत्

(घ) मुण्डकोपनिषत्

उत्तर(ग) तैत्तिरीयोपनिषत् (२-१-२)।

7. ‘अम्ब’ शब्द का अर्थ है—

(क) बेटी

(ख) माँ

(ग) गुरु

(घ) मित्र

उत्तर(ख) माँ। (भोः मातः!)

8. माता ने कौन-कौन से ग्रन्थ/विषय पढ़े थे?

(क) केवल रसायनशास्त्र

(ख) केवल उपनिषद्

(ग) आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ

(घ) ज्योतिषशास्त्र

उत्तर(ग) आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ।

9. भारत की दो प्रतिष्ठाएँ कौन-सी हैं?

(क) धनं बलं च

(ख) संस्कृतं संस्कृतिः च

(ग) कृषिः उद्योगः च

(घ) विज्ञानं कला च

उत्तर(ख) संस्कृतं संस्कृतिः च।

10. उपनिषद्-ग्रन्थों के अध्ययन से क्या होता है?

(क) केवल धन-प्राप्ति

(ख) जीवन का उत्कर्ष

(ग) कोई लाभ नहीं

(घ) केवल मनोरंजन

उत्तर(ख) जीवन का उत्कर्ष।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ पाठ सृष्टि की उत्पत्ति का क्रम बताता है।

कारण (R): पाठ तैत्तिरीयोपनिषद् के ‘आकाशात् वायुः…ओषधिभ्योऽन्नम्, अन्नात् पुरुषः’ वचन पर आधारित है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): माता को सृष्टिक्रम का ज्ञान केवल आधुनिक विज्ञान से प्राप्त हुआ।

कारण (R): माता ने केवल रसायनशास्त्र पढ़ा था, उपनिषद् नहीं।

उत्तर(घ) A गलत है (R भी गलत है) – माता ने आधुनिक रसायनशास्त्र एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े थे।

3. अभिकथन (A): अन्न समस्त प्राणियों के जीवन का आधार है।

कारण (R): पाठ के अनुसार आहार (अन्न) से ही कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘सम्’ से ‘ब्रह्म’ का अर्थ केवल मन्दिर की मूर्ति है।

कारण (R): पाठ में ब्रह्म को सर्वत्र व्याप्त चेतना-शक्ति एवं ऊर्जा कहा गया है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – ब्रह्म कोई मूर्ति नहीं, अपितु सर्वव्याप्त चेतना-शक्ति/ऊर्जा है।

5. अभिकथन (A): हमें उपनिषद्-ग्रन्थ अवश्य पढ़ने चाहिए।

कारण (R): उनमें भारत का मौलिक ज्ञान निहित है, जिससे जीवन का उत्कर्ष होता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • सृष्टिक्रम (ब्रह्म → आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथिवी → ओषधि → अन्न → प्राणी) क्रमशः याद रखें – यह बहुधा पूछा जाता है।
  • तैत्तिरीयोपनिषद् का मूल वचन ‘ओषधिभ्योऽन्नम्, अन्नात् पुरुषः’ कण्ठस्थ करें।
  • पञ्चमी विभक्ति के रूप (आहारात्/आहाराभ्याम्/आहारेभ्यः, अग्नेः/अग्निभ्याम्/अग्निभ्यः) तालिका सहित अभ्यास करें।
  • ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें, केवल एक शब्द नहीं।
  • प्रश्ननिर्माण में अपादान (से) के लिए ‘कुतः / कस्मात्’ प्रश्नवाचक पद का प्रयोग करें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • सृष्टिक्रम में जल एवं पृथिवी का क्रम उलट देना – अग्नि से जल, जल से पृथिवी (न कि पृथिवी से जल)।
  • यह समझ लेना कि पृथिवी से सीधे मनुष्य उत्पन्न हुए – वस्तुतः पृथिवी से ओषधि/सस्य, फिर अन्न, फिर प्राणी।
  • पञ्चमी रूपों में विभक्ति की भूल – वृक्षात् (एकवचन), वृक्षेभ्यः (बहुवचन) सही लिखें।
  • ‘ब्रह्म’ को मूर्ति समझना – यहाँ ब्रह्म = सर्वव्याप्त चेतना-शक्ति/ऊर्जा।
  • पाठ को गलती से किसी अन्य उपनिषद् से बताना – यह तैत्तिरीयोपनिषद् पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 7 पाठ 9 ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ किस विषय पर है?

यह पाठ माता एवं पुत्री के संवाद के रूप में सृष्टि की उत्पत्ति के क्रम (आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथिवी → ओषधि → अन्न → प्राणी) को समझाता है। यह तैत्तिरीयोपनिषद् (२-१-२) पर आधारित है।

‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है – ‘अन्न से ही समस्त प्राणी (भूत) उत्पन्न होते हैं’। पाठ के अनुसार सस्यों से अन्न तथा अन्न से ही कीट, प्राणी एवं मनुष्य उत्पन्न हुए, अतः अन्न जीवन का मूल आधार है।

माता को सृष्टिक्रम का ज्ञान कैसे हुआ?

माता ने आधुनिक रसायनशास्त्र (Chemistry) एवं उपनिषद्-ग्रन्थ दोनों पढ़े थे। इससे यह सिद्ध होता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान सृष्टिक्रम के विषय में एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं।

मूल पाठ, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; अन्वय/भावार्थ, सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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