Class 8 Sanskrit Deepakam Appendix 2 — शब्दरूपाणि
Class 8 Sanskrit Deepakam Appendix 2 शब्दरूपाणि: दधि, राजन्, गच्छत्, भवत्, यद्, इदम् और संख्या 1–4 की 24 सारणियाँ, हिन्दी उदाहरण व अभ्यास।
दीपकम् में 13 मुख्य पाठ हैं। यह परिशिष्ट सहायक संदर्भ सामग्री है; नीचे दिए गए अभ्यास ClearStudy के मौलिक अभ्यास हैं, NCERT के मुद्रित प्रश्न नहीं।
शब्दरूप पढ़ने का तरीका
शब्दरूप चुनते समय शब्द का लिङ्ग, वाक्य में उसका सम्बन्ध और वचन देखें। इस परिशिष्ट में विशेष संज्ञाएँ, शतृ-प्रत्ययान्त शब्द, सर्वनाम, विशेषण और एक से चार तक की संख्याओं के रूप हैं। नीचे सभी 24 सारणियाँ पुस्तक के क्रम में दी गई हैं।
द्विवचन ठीक दो के लिए और बहुवचन सामान्यतः दो से अधिक के लिए है। संख्या-सारणियों में स्तम्भ वचन के बजाय लिङ्ग दिखाते हैं। स्लैश / से अलग किए रूप स्वीकार्य विकल्प हैं।
नपुंसकलिङ्ग शब्द: दधि, वारि, मधु
दधि = दही, वारि = पानी, मधु = इस शब्दार्थ-उदाहरण में शहद। तीनों नपुंसकलिङ्ग हैं। वस्तु का प्राकृतिक लिङ्ग और व्याकरण का लिङ्ग एक ही बात नहीं।

नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया के रूप समान हैं। दधि के कुछ रूपों में दध्न्- दिखता है; उन्हें वारि के ढाँचे पर यन्त्रवत् न बनाएं।
दधि — इकारान्त, नपुंसकलिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | दधि | दधिनी | दधीनि |
| द्वितीया | दधि | दधिनी | दधीनि |
| तृतीया | दध्ना | दधिभ्याम् | दधिभिः |
| चतुर्थी | दध्ने | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| पञ्चमी | दध्नः | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| षष्ठी | दध्नः | दध्नोः | दध्नाम् |
| सप्तमी | दध्नि / दधनि | दध्नोः | दधिषु |
| सम्बोधन | हे दधि / हे दधे | हे दधिनी | हे दधीनि |
वारि — इकारान्त, नपुंसकलिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वारि | वारिणी | वारीणि |
| द्वितीया | वारि | वारिणी | वारीणि |
| तृतीया | वारिणा | वारिभ्याम् | वारिभिः |
| चतुर्थी | वारिणे | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| पञ्चमी | वारिणः | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| षष्ठी | वारिणः | वारिणोः | वारीणाम् |
| सप्तमी | वारिणि | वारिणोः | वारिषु |
| सम्बोधन | हे वारि / हे वारे | हे वारिणी | हे वारीणि |
मधु — उकारान्त, नपुंसकलिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मधु | मधुनी | मधूनि |
| द्वितीया | मधु | मधुनी | मधूनि |
| तृतीया | मधुना | मधुभ्याम् | मधुभिः |
| चतुर्थी | मधुने | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| पञ्चमी | मधुनः | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| षष्ठी | मधुनः | मधुनोः | मधूनाम् |
| सप्तमी | मधुनि | मधुनोः | मधुषु |
| सम्बोधन | हे मधु / हे मधो | हे मधुनी | हे मधूनि |
विशेष पुल्लिङ्ग शब्द: मरुत्, राजन्, आत्मन्, विद्वस्
राजन् का प्रथमा एकवचन राजा है, लेकिन उसके सभी रूप राजा- से नहीं बनते। राज्ञा, राज्ञे और राज्ञः जैसे रूप याद करें। आत्मन् में तृतीया आत्मना है। विद्वस् का प्रथमा विद्वान् और तृतीया विदुषा है।
मरुत् — तकारान्त, पुल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मरुत् | मरुतौ | मरुतः |
| द्वितीया | मरुतम् | मरुतौ | मरुतः |
| तृतीया | मरुता | मरुद्भ्याम् | मरुद्भिः |
| चतुर्थी | मरुते | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| पञ्चमी | मरुतः | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| षष्ठी | मरुतः | मरुतोः | मरुताम् |
| सप्तमी | मरुति | मरुतोः | मरुत्सु |
| सम्बोधन | हे मरुत् | हे मरुतौ | हे मरुतः |
राजन् — नकारान्त, पुल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | राजा | राजानौ | राजानः |
| द्वितीया | राजानम् | राजानौ | राज्ञः |
| तृतीया | राज्ञा | राजभ्याम् | राजभिः |
| चतुर्थी | राज्ञे | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| पञ्चमी | राज्ञः | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| षष्ठी | राज्ञः | राज्ञोः | राज्ञाम् |
| सप्तमी | राज्ञि / राजनि | राज्ञोः | राजसु |
| सम्बोधन | हे राजन् | हे राजानौ | हे राजानः |
आत्मन् — नकारान्त, पुल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | आत्मा | आत्मानौ | आत्मानः |
| द्वितीया | आत्मानम् | आत्मानौ | आत्मनः |
| तृतीया | आत्मना | आत्मभ्याम् | आत्मभिः |
| चतुर्थी | आत्मने | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| पञ्चमी | आत्मनः | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| षष्ठी | आत्मनः | आत्मनोः | आत्मनाम् |
| सप्तमी | आत्मनि | आत्मनोः | आत्मसु |
| सम्बोधन | हे आत्मन् | हे आत्मानौ | हे आत्मानः |
विद्वस् — सकारान्त, पुल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | विद्वान् | विद्वांसौ | विद्वांसः |
| द्वितीया | विद्वांसम् | विद्वांसौ | विदुषः |
| तृतीया | विदुषा | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भिः |
| चतुर्थी | विदुषे | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| पञ्चमी | विदुषः | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| षष्ठी | विदुषः | विदुषोः | विदुषाम् |
| सप्तमी | विदुषि | विदुषोः | विद्वत्सु |
| सम्बोधन | हे विद्वन् | हे विद्वांसौ | हे विद्वांसः |
शतृ-प्रत्ययान्त शब्द: गच्छत् और गच्छन्ती
गच्छत् का अर्थ प्रसंग में ‘जाता हुआ’ है। यह कृदन्त विशेषण है; संज्ञा के लिङ्ग, वचन और विभक्ति से मेल खाता है। गच्छन् बालकः (जाता हुआ बालक) और गच्छन्ती बालिका (जाती हुई बालिका) में रूप अलग हैं।
गच्छत् — शतृ-प्रत्ययान्त, पुल्लिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गच्छन् | गच्छन्तौ | गच्छन्तः |
| द्वितीया | गच्छन्तम् | गच्छन्तौ | गच्छतः |
| तृतीया | गच्छता | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भिः |
| चतुर्थी | गच्छते | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भ्यः |
| पञ्चमी | गच्छतः | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भ्यः |
| षष्ठी | गच्छतः | गच्छतोः | गच्छताम् |
| सप्तमी | गच्छति | गच्छतोः | गच्छत्सु |
| सम्बोधन | हे गच्छन् | हे गच्छन्तौ | हे गच्छन्तः |
गच्छन्ती — शतृ-प्रत्ययान्त, स्त्रीलिङ्ग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गच्छन्ती | गच्छन्त्यौ | गच्छन्त्यः |
| द्वितीया | गच्छन्तीम् | गच्छन्त्यौ | गच्छन्तीः |
| तृतीया | गच्छन्त्या | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभिः |
| चतुर्थी | गच्छन्त्यै | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभ्यः |
| पञ्चमी | गच्छन्त्याः | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभ्यः |
| षष्ठी | गच्छन्त्याः | गच्छन्त्योः | गच्छन्तीनाम् |
| सप्तमी | गच्छन्त्याम् | गच्छन्त्योः | गच्छन्तीषु |
| सम्बोधन | हे गच्छन्ति | हे गच्छन्त्यौ | हे गच्छन्त्यः |
आदर के सर्वनाम: भवत् और भवती
भवान् पठति = आप पढ़ते हैं; भवती पठति = आप पढ़ती हैं। भवान्/भवती का अर्थ सम्बोधित व्यक्ति ‘आप’ है, लेकिन क्रिया सामान्यतः प्रथमपुरुष में आती है: पठति, न कि पठसि। भवती सर्वनाम और भवति ‘होता है’ वाली क्रिया की मात्रा अलग है।
भवत् — पुल्लिङ्ग, आदरसूचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भवान् | भवन्तौ | भवन्तः |
| द्वितीया | भवन्तम् | भवन्तौ | भवतः |
| तृतीया | भवता | भवद्भ्याम् | भवद्भिः |
| चतुर्थी | भवते | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| पञ्चमी | भवतः | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| षष्ठी | भवतः | भवतोः | भवताम् |
| सप्तमी | भवति | भवतोः | भवत्सु |
| सम्बोधन | हे भवन् | हे भवन्तौ | हे भवन्तः |
भवती — ईकारान्त, स्त्रीलिङ्ग, आदरसूचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भवती | भवत्यौ | भवत्यः |
| द्वितीया | भवतीम् | भवत्यौ | भवतीः |
| तृतीया | भवत्या | भवतीभ्याम् | भवतीभिः |
| चतुर्थी | भवत्यै | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| पञ्चमी | भवत्याः | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| षष्ठी | भवत्याः | भवत्योः | भवतीनाम् |
| सप्तमी | भवत्याम् | भवत्योः | भवतीषु |
| सम्बोधन | हे भवति | हे भवत्यौ | हे भवत्यः |
यद् — ‘जो’ के तीन लिङ्ग
यद् सम्बन्धवाचक सर्वनाम है। ‘जो’ का रूप सम्बद्ध संज्ञा के लिङ्ग और वचन तथा अपने वाक्य में विभक्ति के अनुसार चुनें। यः बालकः पठति, सः जानाति — जो बालक पढ़ता है, वह जानता है। सर्वनाम यद् का सम्बोधन इस पुस्तक की सारणियों में नहीं दिया गया है।
यद् (पुल्लिङ्ग) — सम्बन्धवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यः | यौ | ये |
| द्वितीया | यम् | यौ | यान् |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
यद् (स्त्रीलिङ्ग) — सम्बन्धवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | या | ये | याः |
| द्वितीया | याम् | ये | याः |
| तृतीया | यया | याभ्याम् | याभिः |
| चतुर्थी | यस्यै | याभ्याम् | याभ्यः |
| पञ्चमी | यस्याः | याभ्याम् | याभ्यः |
| षष्ठी | यस्याः | ययोः | यासाम् |
| सप्तमी | यस्याम् | ययोः | यासु |
यद् (नपुंसकलिङ्ग) — सम्बन्धवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | यत् | ये | यानि |
| द्वितीया | यत् | ये | यानि |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
इदम् — ‘यह’ के तीन लिङ्ग
इदम् निकट की वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करता है। प्रथमा एकवचन में अयं बालकः, इयं बालिका, इदं पुस्तकम् कहें। अयम्/इयम् के आगे शब्द जोड़ने पर सन्धि हो सकती है, जैसे अयम् + बालकः → अयं बालकः।
इदम् (पुल्लिङ्ग) — संकेतवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अयम् | इमौ | इमे |
| द्वितीया | इमम् | इमौ | इमान् |
| तृतीया | अनेन | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः | एषु |
इदम् (स्त्रीलिङ्ग) — संकेतवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | इयम् | इमे | इमाः |
| द्वितीया | इमाम् | इमे | इमाः |
| तृतीया | अनया | आभ्याम् | आभिः |
| चतुर्थी | अस्यै | आभ्याम् | आभ्यः |
| पञ्चमी | अस्याः | आभ्याम् | आभ्यः |
| षष्ठी | अस्याः | अनयोः | आसाम् |
| सप्तमी | अस्याम् | अनयोः | आसु |
इदम् (नपुंसकलिङ्ग) — संकेतवाचक सर्वनाम
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | इदम् | इमे | इमानि |
| द्वितीया | इदम् | इमे | इमानि |
| तृतीया | अनेन | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः | एषु |
कीदृश / कीदृशी — ‘कैसा / कैसी’
यह शब्द वस्तु या व्यक्ति की विशेषता पूछता है। विशेषण होने के कारण संज्ञा से मेल आवश्यक है: कीदृशः बालकः? कीदृशी बालिका? कीदृशं पुस्तकम्? नीचे सम्बोधन की पंक्ति पुस्तक की तरह बिना ‘हे’ लिखी गई है; प्रयोग में ‘हे’ जोड़ा जा सकता है।
कीदृश (पुल्लिङ्ग) — अकारान्त विशेषण
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कीदृशः | कीदृशौ | कीदृशाः |
| द्वितीया | कीदृशम् | कीदृशौ | कीदृशान् |
| तृतीया | कीदृशेन | कीदृशाभ्याम् | कीदृशैः |
| चतुर्थी | कीदृशाय | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृशात् | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| षष्ठी | कीदृशस्य | कीदृशयोः | कीदृशानाम् |
| सप्तमी | कीदृशे | कीदृशयोः | कीदृशेषु |
| सम्बोधन | कीदृश | कीदृशौ | कीदृशाः |
कीदृशी (स्त्रीलिङ्ग) — ईकारान्त विशेषण
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कीदृशी | कीदृश्यौ | कीदृश्यः |
| द्वितीया | कीदृशीम् | कीदृश्यौ | कीदृशीः |
| तृतीया | कीदृश्या | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभिः |
| चतुर्थी | कीदृश्यै | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृश्याः | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभ्यः |
| षष्ठी | कीदृश्याः | कीदृश्योः | कीदृशीनाम् |
| सप्तमी | कीदृश्याम् | कीदृश्योः | कीदृशीषु |
| सम्बोधन | कीदृशि | कीदृश्यौ | कीदृश्यः |
कीदृश (नपुंसकलिङ्ग) — अकारान्त विशेषण
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कीदृशम् | कीदृशे | कीदृशानि |
| द्वितीया | कीदृशम् | कीदृशे | कीदृशानि |
| तृतीया | कीदृशेन | कीदृशाभ्याम् | कीदृशैः |
| चतुर्थी | कीदृशाय | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृशात् | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| षष्ठी | कीदृशस्य | कीदृशयोः | कीदृशानाम् |
| सप्तमी | कीदृशे | कीदृशयोः | कीदृशेषु |
| सम्बोधन | कीदृश | कीदृशे | कीदृशानि |
संख्यावाचक रूप — एक, द्वि, त्रि, चतुर्
पुस्तक के अनुसार एक के ये रूप एकवचन में, द्वि के द्विवचन में, त्रि और चतुर् के बहुवचन में हैं। प्रत्येक सारणी के तीन स्तम्भ लिङ्ग हैं। इन्हें सामान्य शब्द-सारणियों के एकवचन-द्विवचन-बहुवचन स्तम्भ न समझें।
एक — एकवचन, तीन लिङ्ग
| विभक्ति | पुल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | एकः | एका | एकम् |
| द्वितीया | एकम् | एकाम् | एकम् |
| तृतीया | एकेन | एकया | एकेन |
| चतुर्थी | एकस्मै | एकस्यै | एकस्मै |
| पञ्चमी | एकस्मात् | एकस्याः | एकस्मात् |
| षष्ठी | एकस्य | एकस्याः | एकस्य |
| सप्तमी | एकस्मिन् | एकस्याम् | एकस्मिन् |
द्वि — द्विवचन, तीन लिङ्ग
| विभक्ति | पुल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | द्वौ | द्वे | द्वे |
| द्वितीया | द्वौ | द्वे | द्वे |
| तृतीया | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| पञ्चमी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
त्रि — बहुवचन, तीन लिङ्ग
| विभक्ति | पुल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | त्रयः | तिस्रः | त्रीणि |
| द्वितीया | त्रीन् | तिस्रः | त्रीणि |
| तृतीया | त्रिभिः | तिसृभिः | त्रिभिः |
| चतुर्थी | त्रिभ्यः | तिसृभ्यः | त्रिभ्यः |
| पञ्चमी | त्रिभ्यः | तिसृभ्यः | त्रिभ्यः |
| षष्ठी | त्रयाणाम् | तिसृणाम् | त्रयाणाम् |
| सप्तमी | त्रिषु | तिसृषु | त्रिषु |
चतुर् — बहुवचन, तीन लिङ्ग
| विभक्ति | पुल्लिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | चत्वारः | चतस्रः | चत्वारि |
| द्वितीया | चतुरः | चतस्रः | चत्वारि |
| तृतीया | चतुर्भिः | चतसृभिः | चतुर्भिः |
| चतुर्थी | चतुर्भ्यः | चतसृभ्यः | चतुर्भ्यः |
| पञ्चमी | चतुर्भ्यः | चतसृभ्यः | चतुर्भ्यः |
| षष्ठी | चतुर्णाम् | चतसृणाम् | चतुर्णाम् |
| सप्तमी | चतुर्षु | चतसृषु | चतुर्षु |
मौलिक उदाहरण: द्वौ बालकौ, द्वे बालिके, द्वे पुस्तके; त्रयः बालकाः, तिस्रः बालिकाः, त्रीणि पुस्तकानि; चत्वारः बालकाः, चतस्रः बालिकाः, चत्वारि पुस्तकानि।
ClearStudy अभ्यास — रूप और वाक्य
ये मौलिक अभ्यास हैं; पाठ्यपुस्तक में इनका प्रश्न-क्रम नहीं है।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. दधि की तृतीया एकवचन? | दध्ना। |
| 2. राजन् की प्रथमा एकवचन और तृतीया एकवचन? | राजा; राज्ञा। |
| 3. भवती ___। (पठति / पठसि) | पठति; आदरसूचक भवती के साथ प्रथमपुरुष क्रिया। |
| 4. ___ बालिका। (अयम् / इयम्) | इयम्; बालिका स्त्रीलिङ्ग है। |
| 5. यद् की षष्ठी बहुवचन, स्त्रीलिङ्ग? | यासाम्। |
| 6. दो पुस्तकों के लिए द्वि का सही रूप? | द्वे पुस्तके। |
| 7. तीन बालिकाओं के लिए सही संख्या-रूप? | तिस्रः बालिकाः। |
| 8. चार पुस्तकों के लिए सही संख्या-रूप? | चत्वारि पुस्तकानि। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह दीपकम् का पाठ 15 है?
नहीं। फाइल hsde115.pdf में परिशिष्टम् २ — शब्दरूपाणि है। पुस्तक के मुख्य पाठ 1–13 हैं; यह पृष्ठ शब्दरूपों का सहायक अध्ययन है।
भवती और भवति में क्या अन्तर है?
भवती, दीर्घ ई के साथ, सम्मानपूर्वक किसी स्त्री को सम्बोधित करने वाला सर्वनाम है। भवति, ह्रस्व इ के साथ, भू धातु का क्रियारूप हो सकता है। भवत् की सप्तमी एकवचन भी भवति है; प्रसंग से पहचानें।
क्या संख्याओं की सारणी में तीन स्तम्भ तीन वचन हैं?
नहीं। एक, द्वि, त्रि और चतुर् की इन सारणियों में स्तम्भ पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग हैं। द्वि के रूप द्विवचन और त्रि/चतुर् के रूप बहुवचन में दिए हैं।
दधि की सप्तमी एकवचन कौन-सी है?
पुस्तक में दध्नि और दधनि, दोनों रूप दिए हैं। यहाँ दोनों विकल्प रखे गए हैं।
मूल पुस्तक का स्रोत: NCERT का आधिकारिक पाठ्यपुस्तक पोर्टल। इस पृष्ठ की व्याख्या और मौलिक अभ्यास ClearStudy के हैं।
