कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 3 ‘संवादहीन’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 3 ‘संवादहीन’ (लेखक – शेखर जोशी) का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – शेखर जोशी
शेखर जोशी का जन्म सन् 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनका पहला कहानी संग्रह कोसी का घटवार सन् 1958 में प्रकाशित हुआ। उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं – साथ के लोग, दाज्यू, हलवाहा, नौरंगी बीमार है, आदमी का डर, डांगरी वाले, मेरा पहाड़ (कहानी संग्रह), एक पेड़ की याद (शब्दचित्र-संग्रह), स्मृति में रहें वे (संस्मरण), मेरा ओलिया गाँव (आत्मवृत्त)। उन्होंने ग्रामीण एवं शहरी मध्यवर्गीय समाज के जीवन-मूल्यों तथा कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के संघर्षों को अपनी कहानियों में प्रमुखता से उभारा है। उन्हें ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, ‘मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’ तथा ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। सन् 2022 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘संवादहीन’ एक ग्रामीण वृद्धा के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी है। कहानी के दो मुख्य पात्र हैं – ताई और मिट्ठू (तोता)। कभी ताई का बड़ा घर पूत-परिवार, बहू-बेटियों, नौकर-चाकर और गाय-ढोर से भरा-पूरा था, पर समय के साथ बहू-बेटे शहर चले गए, बेटियाँ अपनी गृहस्थी में रम गईं और सारी संपत्ति धीरे-धीरे पराए हाथों में चली गई। अब उस सूने खंडहर जैसे घर में अकेली ताई रह गईं।
गनपत एक पहाड़ी तोता ले आया, जो ताई के अकेलेपन का सहारा बन गया। ताई की सारी ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ी – वे उसके लिए दाल-भात बनातीं, रोटी बचातीं और उसे राम-राम, सीताराम बोलना सिखातीं। मिट्ठू उनका संवाद-साथी बन गया; उससे बातें करके सूना घर फिर रौनक से भर उठा।
एक बार ताई कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जाने लगीं तो मिट्ठू को जगन मास्टर की पत्नी (मास्टराइन) के पास छोड़ गईं। जगन मास्टर आदर्शवादी और स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे; पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर वे बेचैन हो जाते। उन्होंने मिट्ठू को रोज खुली हवा में छोड़ना शुरू किया, और एक दिन मिट्ठू रोशनदान से होकर उड़ गया। जगन मास्टर बहुत पछताए पर मिट्ठू न लौटा।
ताई के लौटने पर सदमे की आशंका से गाँववालों ने गनपत की सलाह पर मिट्ठू जैसा ही एक दूसरा (एवजी) तोता ला रखा। जगन मास्टर उसे भी राम-राम सिखाने का प्रयास करते रहे, पर वह कुछ न बोला। कुंभ-स्नान से लौटकर ताई सीधे जगन मास्टर के घर पहुँचीं, पर एवजी तोता उन्हें देखकर चुप ही रहा। ताई अपने मिट्ठू को पुकारती रह गईं, पर उनके सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में खो चुका था। इस प्रकार कहानी पलायन, अकेलेपन तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ढोर | पालतू गोजातीय पशु, चौपाया, डंगर |
| तकाजा | आवश्यकता, अनुरोध, बार-बार माँगना |
| कुशाग्र | तीव्र बुद्धि, कुश की नोंक जैसा तीक्ष्ण |
| पौ फटना | प्रातःकाल का प्रकाश होना, तड़का होना |
| अचकचाना | भौचक्का होना, चौंक उठना |
| निहाल | प्रसन्न, हर तरह से तृप्त |
| सत्ता | अस्तित्व, अधिकार, प्रभुत्व |
| अतल | अथाह, तलहीन |
| प्रसंग | प्रकरण, संबंध, विषय का तारतम्य |
| रोबीला | प्रभावशाली, रौब वाला |
| तुनकमिजाज | छोटी बातों पर नाराज हो जाने वाला, चिड़चिड़ा |
| वियोग | विछोह, विरह, अभाव |
| साँकल | जंजीर, सिकड़ी, शृंखला |
| टोह | खोज, पता, देखभाल |
| देहरी | दरवाजे की चौखट की निचली लकड़ी |
| मिजाज | स्वभाव, तबीयत, प्रकृति, घमंड |
| प्रायश्चित | पाप का शोधन करने के लिए किया गया कर्म |
| कौतूहलवश | उत्सुकता या जिज्ञासावश |
| मशगूल | कार्यरत, किसी काम में लगा हुआ |
| अर्जन | कमाना, संग्रह करना |
| एवजी | बदले में काम करने वाला, स्थानापन्न |
| आग्नेय | अग्नि से उत्पन्न, अग्नि जैसा (क्रोधभरी दृष्टि) |
| जून | वक्त, वेला, दिन का एक भाग |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
2. जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
3. मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद
5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
मेरी समझ मेरे विचार
1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
3. “ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े-से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
मेरे प्रश्न (उपयुक्त प्रश्न पहचानिए)
नीचे दिए गए उत्तर के लिए कौन-सा प्रश्न उपयुक्त है, पहचानिए।
| उत्तर | उपयुक्त प्रश्न |
|---|---|
| ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। | प्रश्न क – ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? |
| ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। | प्रश्न ख – ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? |
| गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। | प्रश्न क – गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? |
| कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। | प्रश्न ख – शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? |
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
5. “मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
कहानी का अंत
‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? कारण सहित बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
व्याकरण की बात
जीव-जंतु वाले मुहावरे
ध्वन्यात्मक शब्द
शब्द-युग्म (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग)
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | समय-असमय (विपरीतार्थक) | मिट्ठू वक्त-बेवक्त भोजन का तकाजा करता था। |
| नियम-सिद्धांत | नियम और आदर्श (समानार्थक) | जगन मास्टर ने अपने नियम-सिद्धांत बना रखे थे। |
| शादी-ब्याह | विवाह-संबंधी आयोजन (समानार्थक) | गाँव में शादी-ब्याह की धूम रहती है। |
| तीज-त्योहार | पर्व-उत्सव (समानार्थक) | तीज-त्योहार पर सब परिवार मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। |
खोजबीन शब्दों की (दिए गए अनुच्छेद से)
अर्थ के आधार पर वाक्य (पुस्तक से उदाहरण)
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘संवादहीन’ कहानी के लेखक कौन हैं?
2. ताई को मिट्ठू किसने लाकर दिया था?
3. ताई किस तीर्थ पर स्नान के लिए गई थीं?
लघु उत्तरीय
4. मिट्ठू ताई के लिए केवल एक तोता क्यों नहीं था?
5. जगन मास्टर मिट्ठू को पिंजरे से बाहर क्यों निकालते थे और इसका क्या परिणाम हुआ?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘संवादहीन’ कहानी आधुनिक जीवन की किन समस्याओं को उजागर करती है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ताई और मिट्ठू किस घर में रहते थे?
(क) जगन मास्टर के घर
(ख) गाँव के बीच स्थित सूने बड़े घर में
(ग) गनपत के घर
(घ) शहर के एक मकान में
2. मिट्ठू कैसे उड़ गया?
(क) ताई ने उसे छोड़ दिया
(ख) पिंजरा टूट गया
(ग) जगन मास्टर के बाहर निकालने पर रोशनदान से होकर
(घ) किसी ने चुरा लिया
3. ‘एवजी मिट्ठू’ का क्या अर्थ है?
(क) असली मिट्ठू
(ख) मिट्ठू के बदले लाया गया दूसरा तोता
(ग) मिट्ठू का बच्चा
(घ) पिंजरे का नाम
4. कहानी में जगन मास्टर किस ग्रंथ का अध्ययन करते दिखाए गए हैं?
(क) रामायण
(ख) गीता-रहस्य
(ग) महाभारत
(घ) वेद
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ताई की सारी ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ी।
कारण (R): ताई अकेली थीं और मिट्ठू उनके अकेलेपन का एकमात्र सहारा बन गया था।
2. अभिकथन (A): जगन मास्टर ने जान-बूझकर मिट्ठू को उड़ा दिया।
कारण (R): वे मिट्ठू से ईर्ष्या करते थे।
3. अभिकथन (A): कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ ताई की अंतिम स्थिति के लिए सार्थक है।
कारण (R): मिट्ठू के खो जाने के बाद ताई का कोई संवाद-साथी नहीं रहता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘संवादहीन’ कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक शेखर जोशी हैं, जो ग्रामीण एवं मध्यवर्गीय जीवन के संवेदनशील चित्रण के लिए जाने जाते हैं।
कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?
कहानी के मुख्य पात्र ताई और मिट्ठू (तोता) हैं; जगन मास्टर और उनकी पत्नी (मास्टराइन) सहायक पात्र हैं।
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों रखा गया है?
क्योंकि मिट्ठू के उड़ जाने के बाद ताई का एकमात्र संवाद-साथी छिन जाता है और एवजी तोता मौन रहता है; इस तरह ताई का जीवन संवादहीन हो जाता है।
कहानी कौन-सी सामाजिक समस्याओं को उजागर करती है?
यह कहानी पलायन, बुजुर्गों का अकेलापन तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व जैसी समकालीन समस्याओं को उजागर करती है।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
