कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 4 ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 4 ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) – साक्षात्कारकर्ता यतींद्र मिश्र – का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र
यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। कविता, संगीत व अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उनकी गहरी रुचि है। उनके तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं – यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर उन्होंने गिरिजा नामक पुस्तक लिखी तथा कुँवर नारायण पर केंद्रित पुस्तकों का संपादन भी किया। वे अर्धवार्षिक पत्रिका सहित का संपादन करते हैं। प्रस्तुत पाठ भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया उनका साक्षात्कार है।
पाठ का सार
‘ऐसी भी बातें होती हैं’ यतींद्र मिश्र द्वारा स्वर-साम्राज्ञी, भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया साक्षात्कार है। इंदौर में जन्मी लता जी ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पित रहीं।
साक्षात्कार में लता जी बताती हैं कि उन्होंने अपने पिता से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा। पिता का अनुशासन कठोर होते हुए भी स्नेहपूर्ण था – वे सिखाने के बाद बच्चों को खेलने भी भेज देते थे। उनकी सीख थी कि सही बात पर डटे रहो और किसी के आगे हाथ मत पसारो।
सन् 1942 में पिता की मृत्यु के बाद मात्र तेरह वर्ष की आयु में लता जी ने माँ और छोटे भाई-बहनों का भार सँभाला तथा एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए कठिन संघर्ष किया, जबकि उस समय स्त्रियों का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। अपने सहयोगियों – कोरस की लड़कियों और संगीतकारों – के साथ उनके संबंध आत्मीय थे।
वे ‘मंगलागौर’ जैसे लोक-पर्वों, बदलती त्योहार-परंपराओं तथा संगीत की अपरिमित शक्ति (बाबा हरिदास और तानसेन के प्रसंग) की चर्चा करती हैं। एक मराठी कहावत ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ (गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है) का उल्लेख करते हुए वे विनम्रता से कहती हैं – “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” पूरे साक्षात्कार से लता जी की सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान से भरी छवि उभरती है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अप्रतिम | बेजोड़, अनुपम |
| आकंठ | कंठ तक, पूर्ण रूप से |
| समर्पित | समर्पण किया हुआ, सौंपा हुआ |
| स्मरण | याद, स्मृति |
| रागदारी | ठीक राग गाने का ढंग या क्रिया |
| राग | ताल-लययुक्त ध्वनि; प्रीति, अनुराग |
| स्वाभिमान | आत्मसम्मान, अपनी प्रतिष्ठा का मान |
| बैकुंठ | स्वर्ग; एक ताल |
| अनुयायी | पीछे चलने वाला, अनुगामी |
| मार्फत | माध्यम से, द्वारा |
| सबब | कारण, हेतु |
| अलबत्ता | निस्संदेह, बेशक |
| सूत्रपात | कार्य का आरंभ |
| आमद | आय, आना |
| पार्श्वगायन | नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना |
| परहेज | किसी वस्तु से बचना, परहेज करना |
| वाकया | घटना |
| खैरियत | कुशल, भलाई |
| फाग | फागुन में गाया जाने वाला गीत; होली का राग-रंग |
| धमार | फाग का एक भेद; एक ताल |
| सोहर | बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला मंगलगीत |
| बधावा | मंगलाचार, बधाई; जन्म आदि पर भेजा उपहार |
| मसलन | उदाहरण के रूप में |
| अप्रत्याशित | जिसकी आशा न रही हो, आकस्मिक |
| अतिरेक | आवश्यकता से अधिक, आधिक्य |
| वाजिब | उचित, ठीक |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
मेरी समझ मेरे विचार
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व
नीचे दी गई पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-से गुण उभरते हैं।
| पंक्ति | उभरता गुण/विशेषता |
|---|---|
| “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।” | एकाग्रता, समर्पण, साधना |
| “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” | स्वाभिमान, दृढ़ता, स्पष्टवादिता |
| “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” | विनम्रता, कृतज्ञता |
| “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” | दार्शनिकता, सरलता |
मेरे प्रश्न (दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए)
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
3. “पहले दिन गुड़ियाँ बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
4. “…आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
साक्षात्कार की पड़ताल
1. साक्षात्कार विधा के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर लिखिए।
2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है— क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
व्याकरण की बात – मुहावरे (‘हाथ’ से जुड़े)
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| हाथ पसारना | कुछ माँगना, याचना करना | स्वाभिमानी व्यक्ति किसी के आगे हाथ नहीं पसारता। |
| हाथ में आना | अधिकार या पहुँच में आना | कठिन परिश्रम से ही सफलता हाथ में आती है। |
| हाथ का मैल होना | तुच्छ या महत्वहीन होना | सच्चे कलाकार के लिए धन हाथ का मैल है। |
| हाथ से हाथ मिलाना | सहयोग करना | विकास के लिए सबको हाथ से हाथ मिलाना चाहिए। |
| हाथ साफ करना | चुरा लेना | भीड़ में जेबकतरे ने उसका बटुआ साफ कर दिया। |
| हाथ से निकल जाना | अवसर का छूट जाना | समय पर निर्णय न लेने से मौका हाथ से निकल गया। |
| हाथ धो बैठना | किसी वस्तु को खो देना | लापरवाही से वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा। |
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. इस साक्षात्कार को किसने लिया है?
2. लता मंगेशकर ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा किससे ली?
3. पिता की मृत्यु के समय लता जी की आयु कितनी थी?
लघु उत्तरीय
4. पिता की मृत्यु के बाद लता जी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
5. ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ कहावत के माध्यम से लता जी क्या समझाना चाहती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
6. साक्षात्कार के आधार पर लता मंगेशकर के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. प्रस्तुत पाठ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) साक्षात्कार
(घ) संस्मरण
2. लता मंगेशकर का जन्म किस नगर में हुआ था?
(क) इंदौर
(ख) अयोध्या
(ग) लखनऊ
(घ) पुणे
3. लता मंगेशकर को किस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया गया?
(क) पद्मश्री
(ख) भारत रत्न
(ग) पद्म भूषण
(घ) साहित्य अकादमी
4. ‘पार्श्वगायन’ का अर्थ है—
(क) मंच पर सामने गाना
(ख) नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना
(ग) समूह में गाना
(घ) शास्त्रीय राग गाना
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लता जी ने कम आयु में ही परिवार का भार सँभाल लिया।
कारण (R): सन् 1942 में उनके पिता की मृत्यु हो गई और वे सबसे बड़ी संतान थीं।
2. अभिकथन (A): लता जी अपनी अपार प्रसिद्धि पर घमंड करती थीं।
कारण (R): उन्होंने कहा था कि उनका गाना अमर है पर शरीर अमर नहीं।
3. अभिकथन (A): लता जी ने अपने पिता से स्वाभिमान और सच्चाई सीखी।
कारण (R): पिता ने उन्हें सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना सिखाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘ऐसी भी बातें होती हैं’ किस विधा की रचना है और किसका साक्षात्कार है?
यह एक साक्षात्कार है, जो यतींद्र मिश्र ने स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर से लिया है।
लता मंगेशकर ने अपने पिता से क्या सीखा?
उन्होंने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा।
‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है; अर्थात् शरीर नश्वर है, पर अच्छे कर्म और नाम अमर रहते हैं।
साक्षात्कार से लता जी की कैसी छवि बनती है?
सादगी, संगीत के प्रति समर्पण और आत्मसम्मान से भरी एक विनम्र व्यक्तित्व की छवि बनती है।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
