ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
ऐसी भी बातें होती हैं प्रश्न उत्तर में यतींद्र मिश्र द्वारा लता मंगेशकर से लिए गए साक्षात्कार का सार, व्यक्तित्व-विश्लेषण, संगीत, भाषा और रचनात्मक गतिविधियों के नमूने पढ़िए।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 62–83। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व
- मेरे प्रश्न (दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए)
- मेरे अनुभव मेरे विचार
- साक्षात्कार की पड़ताल
- आपका साक्षात्कार — पृष्ठ 78
- शास्त्रीय संगीत और लोकगीत — पृष्ठ 79
- साइबर सुरक्षा — आवाज की नकल से धोखाधड़ी
- हम ऐसे भी बोलते हैं — पृष्ठ 80
- रचनात्मक कार्य — पृष्ठ 80
- व्याकरण की बात – मुहावरे (‘हाथ’ से जुड़े)
- हमारी भाषाएँ — पृष्ठ 81
- समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 81
- भाषा संगम और सुनकर समझना — पृष्ठ 82
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र
यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। कविता, संगीत व अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उनकी गहरी रुचि है। पाठ के परिचय में उनके तीन काव्य-संग्रहों का उल्लेख है – यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर उन्होंने गिरिजा नामक पुस्तक लिखी तथा कुँवर नारायण पर केंद्रित पुस्तकों का संपादन भी किया। पाठ के परिचय में अर्धवार्षिक पत्रिका सहित के संपादन का भी उल्लेख है। प्रस्तुत पाठ भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया उनका साक्षात्कार है।
पाठ का सार
‘ऐसी भी बातें होती हैं’ यतींद्र मिश्र द्वारा स्वर-साम्राज्ञी, भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया साक्षात्कार है। इंदौर में जन्मी लता जी ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पित रहीं।
साक्षात्कार में लता जी बताती हैं कि उन्होंने अपने पिता से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा। पिता का अनुशासन कठोर होते हुए भी स्नेहपूर्ण था – शरारत पर समझाने के बाद वे बच्चों को खेलने भी भेज देते थे। उनकी सीख थी कि सही बात पर डटे रहो और किसी के आगे हाथ मत पसारो।
सन् 1942 में पिता की मृत्यु के बाद मात्र तेरह वर्ष की आयु में लता जी ने माँ और छोटे भाई-बहनों का भार सँभाला तथा एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए कठिन संघर्ष किया, जबकि उस समय स्त्रियों का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। अपने सहयोगियों – कोरस की लड़कियों और संगीतकारों – के साथ उनके संबंध आत्मीय थे।
वे ‘मंगलागौर’ जैसे लोक-पर्वों, बदलती त्योहार-परंपराओं तथा संगीत की अपरिमित शक्ति (बाबा हरिदास और तानसेन के प्रसंग) की चर्चा करती हैं। एक मराठी कहावत ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ (गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है) का उल्लेख करते हुए वे विनम्रता से कहती हैं – “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” पूरे साक्षात्कार से लता जी की सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान से भरी छवि उभरती है।
लता जी पुराने संगीतकारों की सूझबूझ और आधुनिक संगीतकारों की प्रतिभा दोनों का सम्मान करती हैं। वे बताती हैं कि “आएगा आने वाला” में दूर से माइक्रोफोन तक चलकर आवाज का प्रभाव बनाया गया था। बदलती तकनीक के साथ काम के ढंग भी बदले। कोरस-कलाकार उनके घर आते थे; मीना की शादी में शामिल हुए और स्टूडियो में वे उनके साथ जमीन पर बैठकर बातें करती थीं।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अप्रतिम | बेजोड़, अनुपम |
| आकंठ | कंठ तक, पूर्ण रूप से |
| समर्पित | समर्पण किया हुआ, सौंपा हुआ |
| स्मरण | याद, स्मृति |
| रागदारी | ठीक राग गाने का ढंग या क्रिया |
| राग | ताल-लययुक्त ध्वनि; प्रीति, अनुराग |
| स्वाभिमान | आत्मसम्मान, अपनी प्रतिष्ठा का मान |
| बैकुंठ | स्वर्ग; एक ताल |
| अनुयायी | पीछे चलने वाला, अनुगामी |
| मार्फत | माध्यम से, द्वारा |
| सबब | कारण, हेतु |
| अलबत्ता | निस्संदेह, बेशक |
| सूत्रपात | कार्य का आरंभ |
| आमद | आय, आना |
| पार्श्वगायन | नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना |
| परहेज | किसी वस्तु से बचना, परहेज करना |
| वाकया | घटना |
| खैरियत | कुशल, भलाई |
| फाग | फागुन में गाया जाने वाला गीत; होली का राग-रंग |
| धमार | फाग का एक भेद; एक ताल |
| सोहर | बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला मंगलगीत |
| बधावा | मंगलाचार, बधाई; जन्म आदि पर भेजा उपहार |
| मसलन | उदाहरण के रूप में |
| अप्रत्याशित | जिसकी आशा न रही हो, आकस्मिक |
| अतिरेक | आवश्यकता से अधिक, आधिक्य |
| वाजिब | उचित, ठीक |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष
(ख) निराशा
(ग) भौतिकता
(घ) कर्तव्यनिष्ठा
3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक
(ख) कामकाजी
(ग) आत्मीय
(घ) प्रतिस्पर्धात्मक
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
मेरी समझ मेरे विचार
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व
नीचे दी गई पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-से गुण उभरते हैं।
| पंक्ति | उभरता गुण/विशेषता |
|---|---|
| “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।” | एकाग्रता, समर्पण, साधना |
| “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” | स्वाभिमान, दृढ़ता, स्पष्टवादिता |
| “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” | विनम्रता, कृतज्ञता |
| “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” | दार्शनिकता, सरलता |
मेरे प्रश्न (दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए)
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
3. “पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
4. “…आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
साक्षात्कार की पड़ताल
1. साक्षात्कार विधा के आठ मुख्य बिंदु
| बिंदु | पाठ में पहचान |
|---|---|
| नाम | प्रश्नों के पहले यतींद्र मिश्र और उत्तरों के पहले लता मंगेशकर का नाम दिया है। |
| प्रश्नोत्तर | पिता से संगीत के अलावा क्या सीख मिली—इस प्रश्न के उत्तर में स्वाभिमान की बात आती है। |
| भावनात्मक वातावरण | प्रशंसकों के प्रेम के प्रति आभार और पिता की स्मृतियाँ आत्मीय वातावरण बनाती हैं। |
| आमंत्रण, स्वागत और परिचय | आरंभ में “दीदी” संबोधन से संगीत-यात्रा पर बातचीत शुरू होती है और प्रश्न पूछने की अनुमति ली जाती है। |
| उत्तर देने की शैली | “हँसते हुए” तथा “खिलखिलाकर हँसती हैं” जैसे संकेत उत्तर के साथ हावभाव बताते हैं। |
| विचार और उदाहरण | संगीत की शक्ति पर विचार के साथ अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने का अनुभव आता है। |
| संस्मरण | बचपन में संत तुकाराम फिल्म की नकल करना और दिवाली पर नौशाद के घर मिठाई ले जाना। |
| समापन | अपने पिता का नाम आगे बढ़ाने की खुशी और सभी कलाकारों तथा नेक इंसानों के लिए ईश्वर से प्रार्थना। |
2. औपचारिक संवाद या आत्मीय बातचीत?
योजनाबद्ध साक्षात्कार होने पर भी बातचीत का स्वर आत्मीय है। “दीदी” संबोधन, हँसी के संकेत, बचपन की यादें और अनुभव बाँटने की इच्छा इसका प्रमाण हैं। लता जी प्रश्न सुनकर सोचती हैं और अपने अनुभव से उदाहरण देती हैं। इस प्रकार औपचारिक उद्देश्य के भीतर सहज मानवीय संवाद विकसित होता है।
आपका साक्षात्कार — पृष्ठ 78
यह कल्पना की गतिविधि है। अलग प्रश्न और उनके उद्देश्य के नमूने:
| प्रश्न | क्यों पूछूँगा/पूछूँगी? |
|---|---|
| नया गीत सीखते समय शब्दों और भावों को कैसे समझती थीं? | गीत की तैयारी जानने के लिए। |
| किसी कठिन अभ्यास में गलती होने पर फिर कैसे शुरू करती थीं? | धैर्य और सीखने का तरीका समझने के लिए। |
| अलग भाषा में गाते समय उच्चारण कैसे सीखती थीं? | भाषाई सम्मान और तैयारी समझने के लिए। |
| नए गायक अपने सहयोगियों से क्या सीख सकते हैं? | सामूहिक काम की भूमिका जानने के लिए। |
इन कल्पित प्रश्नों के मनगढ़ंत उत्तर लता जी के नाम से न लिखें।
1. संघर्ष के दिनों का एक दिन — कल्पित विवरण
सुबह जल्दी तैयार होकर वे रिकॉर्डिंग के लिए निकलती होंगी। समय पर स्टूडियो पहुँचना, यात्रा-भाड़ा जुटाना, अभ्यास और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखना चुनौती रहा होगा। अगले काम की चिंता के बीच भोजन और विश्राम के लिए समय निकालना भी कठिन पड़ता होगा। यह पाठ के संकेतों पर आधारित कल्पना है; किसी विशेष दिन का प्रमाणित वृत्तांत नहीं। कम उम्र में उनका संघर्ष समझें, बच्चों के श्रम को सामान्य आदर्श न मानें।
2. सहयोग और सामूहिकता वाले कार्य
विद्यालय की प्रदर्शनी में सामग्री जुटाना, चित्र बनाना, जानकारी जाँचना और समझाना अलग जिम्मेदारियाँ हैं। खेल-टीम में खिलाड़ी, प्रशिक्षक और व्यवस्था संभालने वाले मिलकर काम करते हैं। घर में भोजन बनाना, परोसना और साफ-सफाई बाँटने से सबका काम सरल होता है। कोरस की तरह सफलता अनेक लोगों के योगदान से बनती है।
शास्त्रीय संगीत और लोकगीत — पृष्ठ 79
| शब्द | अर्थ और उदाहरण |
|---|---|
| राग | स्वरों के विशेष नियम, चलन और भाव वाला संगीत-रूप; उदाहरण: यमन, भैरव। केवल कोई भी तालबद्ध ध्वनि राग नहीं होती। |
| सुर | स्वर की सही ऊँचाई और उसका सुरीला प्रयोग; उदाहरण: सा, रे, ग। |
| बंदिश | राग और ताल में बँधी गायन-रचना; जैसे किसी राग में तीनताल की बंदिश। |
| अभंग | मराठी भक्ति-काव्य और गायन का रूप; संत तुकाराम के विठ्ठल-भक्ति अभंग उदाहरण हैं। |
| सोहर | शिशु के जन्म के अवसर का लोक-मंगलगीत। |
| फाग | फागुन और होली से जुड़ा गीत। |
| बधावा | शुभ अवसर पर बधाई और मंगलकामना का गीत। |
क्षेत्रीय गीत का कार्य: परिवार में गाए जाने वाले एक गीत का अवसर, भाषा, गाने वालों का परिचय और अर्थ लिखें। सुनकर संकलन करें; अपनी रचना को परंपरागत लोकगीत न बताएँ। निजी संकलन और वेबसाइट पर गीत प्रकाशित करना अलग कार्य हैं।
साइबर सुरक्षा — आवाज की नकल से धोखाधड़ी
केवल पहचानी हुई आवाज सुनकर पहचान पक्की न मानें। पैसे या गोपनीय जानकारी की जल्दबाजी वाली माँग पर बातचीत रोकें और उस व्यक्ति के पहले से ज्ञात नंबर पर अलग से संपर्क करें। OTP, PIN और पासवर्ड साझा न करें। अनजान लिंक न खोलें; किसी भरोसेमंद बड़े को बताएँ। संदेश और कॉल का विवरण सुरक्षित रखें तथा आधिकारिक शिकायत माध्यम का उपयोग करें। पाठ का संसाधन: राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल की सुरक्षा पुस्तिका।
हम ऐसे भी बोलते हैं — पृष्ठ 80
1. हावभाव से समझना — नमूना
कक्षा में शोर बढ़ा तो शिक्षक ने होंठों पर उँगली रखी। हमने चुप रहने का संकेत समझा। यह व्यक्तिगत अनुभव का नमूना है; अपनी घटना लिखें।
2. बिना बोले संवाद में व्यवहार
धैर्य से सामने वाले के संकेत देखें, समझ न आने पर विनम्रता से दोबारा पूछें और उनका मजाक न बनाएँ। जरूरत हो तो लिखकर या चित्र से बात करें। भारतीय सांकेतिक भाषा अपनी व्याकरण वाली भाषा है; उसे केवल सामान्य हावभाव मानना ठीक नहीं।
रचनात्मक कार्य — पृष्ठ 80
1. टाइम मशीन की डायरी — काल्पनिक नमूना
आज कल्पना में 1949 के एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुँचा। लता जी और कलाकार अभ्यास कर रहे थे। साधारण साड़ी, कागज पर गीत और सामने माइक्रोफोन देखकर आज के स्टूडियो से अंतर लगा। विराम में सादा भोजन और चाय रखी थी। सब स्वरों और उच्चारण पर ध्यान दे रहे थे। मुझे महसूस हुआ कि तकनीक के साथ मेहनत, सुनने की क्षमता और सहयोग भी जरूरी हैं। यह कल्पित दिन है; वेशभूषा और भोजन का विवरण ऐतिहासिक प्रमाण का दावा नहीं है।
2. कल्पित अंतिम संदेश पर प्रतिक्रिया
यह पढ़कर मन कृतज्ञता से भरता है कि लता जी अपनी प्रसिद्धि को श्रोताओं का प्रेम मानती हैं। उनके गीत, साधना और विनम्रता से प्रेरणा मिलती है। मैं समझता हूँ कि अच्छी कला लोगों की स्मृति में जीवित रहती है और सफलता के साथ विनम्र होना भी जरूरी है। यह पाठ की कल्पना-गतिविधि है; उद्धृत कथन को उनका प्रमाणित अंतिम संदेश न कहें।
व्याकरण की बात – मुहावरे (‘हाथ’ से जुड़े)
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| हाथ पसारना | कुछ माँगना, याचना करना | कहानी के पात्र ने सहायता के लिए सेठ के आगे हाथ पसारे। |
| हाथ में आना | अधिकार या पहुँच में आना | कठिन परिश्रम से ही सफलता हाथ में आती है। |
| हाथ का मैल होना | तुच्छ या महत्वहीन होना | सच्चे कलाकार के लिए धन हाथ का मैल है। |
| हाथ से हाथ मिलाना | सहयोग करना | विकास के लिए सबको हाथ से हाथ मिलाना चाहिए। |
| हाथ साफ करना | चुरा लेना | भीड़ में जेबकतरे ने उसके बटुए पर हाथ साफ कर दिया। |
| हाथ से निकल जाना | अवसर का छूट जाना | समय पर निर्णय न लेने से मौका हाथ से निकल गया। |
| हाथ धो बैठना | किसी वस्तु को खो देना | लापरवाही से वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा। |
हमारी भाषाएँ — पृष्ठ 81
1. कहावत का भाव अपनी भाषा में
हिंदी भाव: जीवन और वस्तुएँ नष्ट हो सकती हैं, पर व्यक्ति का अच्छा नाम और योगदान याद रहता है। मराठी में भाव का नमूना: “माणूस निघून जातो, पण त्याचे चांगले नाव आणि कार्य आठवणीत राहते.” अपनी घरेलू भाषा के वक्ता से शब्दों की जाँच करें।
2. मातृभाषा की कहावत का अनुवाद — नमूना
मराठी उदाहरण: “थेंबे थेंबे तळे साचे।” हिंदी भाव: बूँद-बूँद से तालाब भरता है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिणाम देते हैं। अनुवाद में ध्वनि और लय बदलती है, मूल सीख बनी रहती है। मातृभाषा अलग हो तो अपनी कहावत चुनें।
3. सेतु-चित्र
कागज के एक किनारे “हिंदी”, दूसरे पर अपनी भाषा लिखें। बीच में समान अर्थ वाले शब्द रखें। हिंदी–मराठी उदाहरण: घर–घर, नाम–नाव, पानी–पाणी, मित्र–मित्र। ये शब्द दोनों भाषाओं को जोड़ने वाली पट्टियाँ बन सकते हैं।
समूह गतिविधियाँ — पृष्ठ 81
1. “नाम रह जाता है…” पोस्टर
शीर्षक के नीचे लिख सकते हैं: नाम (हिंदी), नाव (मराठी), નામ (गुजराती), নাম (बांग्ला), பெயர் (तमिल)। संबंधित भाषा जानने वाले से वर्तनी जाँचें। अंत में प्रतिज्ञा लिखें: “हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।”
2. भाषा-वृक्ष
जड़ में “भारतीय संस्कृति”, शाखाओं पर हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला और गुजराती लिखें। उदाहरण-शब्द: मित्र (हिंदी), मैत्री (मराठी), அன்பு—प्रेम (तमिल), ভালোবাসা—प्रेम (बांग्ला), મિત્ર—मित्र (गुजराती)। सभी शाखाओं को समान स्थान दें।
3. बहुभाषी समाचार बुलेटिन — कल्पित नमूना
हिंदी: नमस्कार! आज हमारी कक्षा में विभिन्न भाषाओं के गीतों पर बातचीत हुई।
English: Students shared the meanings of songs and listened to one another.
मराठी: कला आपल्याला जोडते.
हिंदी: संदेश है—कला जोड़ती है, बाँटती नहीं। यह अभ्यास के लिए कल्पित समाचार है।
4. भाषाई स्मृति पोटली
परिवार से पाँच वास्तविक शब्द पूछें। हर कार्ड पर शब्द, भाषा, अर्थ, किससे सुना और एक वाक्य लिखें। उदाहरण-प्रारूप: [शब्द] | [भाषा] | [अर्थ] | [परिवार का सदस्य]। अपने परिवार की भाषाएँ अनुमान से न भरें।
5. स्वर-कोलाज
संगीत-साधना, परिवार, सहयोग और विनम्रता के चार हिस्से बनाएँ। माइक्रोफोन, सुरों का अभ्यास, साथ काम करते कलाकार और परिवार के प्रतीक जोड़ें। गीतों के नाम और अपने शब्दों में उनके भाव लिखें; लंबे गीतांश उतारना जरूरी नहीं।
6. लता मंगेशकर की समय-रेखा और प्रमुख सम्मान
| वर्ष/तिथि | घटना |
|---|---|
| 28 सितंबर 1929 | जन्म |
| 1942 | पिता का निधन; कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी |
| 1949 | महल के गीत से व्यापक पहचान का दौर |
| 1969 | पद्म भूषण |
| 1989 | दादासाहेब फाल्के पुरस्कार |
| 1999 | पद्म विभूषण |
| 2001 | भारत रत्न |
| 6 फरवरी 2022 | निधन |
यह चुनिंदा प्रमुख घटनाओं और सम्मानों की सूची है, सभी पुरस्कारों की पूर्ण सूची नहीं। स्रोत: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जीवन-परिचय। सम्मानों की तिथियों के लिए न्यू इंडिया समाचार, सितंबर 2022 भी देखें। लता जी को मिले सम्मान और उनके नाम पर शुरू किए गए पुरस्कार अलग हैं।
भाषा संगम और सुनकर समझना — पृष्ठ 82
संगीत के लिए पुस्तक में सङ्गीतम् (संस्कृत), संगीत कला (मराठी), मूसीकी/मौसिकी (उर्दू) जैसे शब्द हैं। अंग्रेज़ी वाक्य का नमूना: There would be a musical gathering at home that day. अपनी मातृभाषा में अनुवाद भी लिखें।
फिल्म और गीत पर प्रतिक्रिया: पाठ में उल्लिखित एक गीत अधिकृत माध्यम से सुनें। गीत/फिल्म का नाम, आवाज और भाव की विशेषता तथा अपनी पसंद का कारण लिखें। पूरा गीत सुनने और पूरी फिल्म देखने के अनुभव अलग रखें। पुस्तक में “ऐ मेरे वतन के लोगो” सुनने का सुझाव भी है; सुनकर अपनी प्रतिक्रिया लिखें, बिना सुने सुनने का दावा न करें।
अतिरिक्त प्रश्न
नीचे ClearStudy का अतिरिक्त अभ्यास है।
अति लघु उत्तरीय
1. इस साक्षात्कार को किसने लिया है?
2. लता मंगेशकर ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा किससे ली?
3. पिता की मृत्यु के समय लता जी की आयु कितनी थी?
लघु उत्तरीय
4. पिता की मृत्यु के बाद लता जी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
5. ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ कहावत के माध्यम से लता जी क्या समझाना चाहती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
6. साक्षात्कार के आधार पर लता मंगेशकर के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. प्रस्तुत पाठ किस विधा की रचना है?
(क) कहानी
(ख) निबंध
(ग) साक्षात्कार
(घ) संस्मरण
2. लता मंगेशकर का जन्म किस नगर में हुआ था?
(क) इंदौर
(ख) अयोध्या
(ग) लखनऊ
(घ) पुणे
3. लता मंगेशकर को किस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया गया?
(क) पद्मश्री
(ख) भारत रत्न
(ग) पद्म भूषण
(घ) साहित्य अकादमी
4. ‘पार्श्वगायन’ का अर्थ है—
(क) मंच पर सामने गाना
(ख) नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना
(ग) समूह में गाना
(घ) शास्त्रीय राग गाना
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लता जी ने कम आयु में ही परिवार का भार सँभाल लिया।
कारण (R): सन् 1942 में उनके पिता की मृत्यु हो गई और वे सबसे बड़ी संतान थीं।
2. अभिकथन (A): लता जी अपनी अपार प्रसिद्धि पर घमंड करती थीं।
कारण (R): उन्होंने कहा था कि उनका गाना अमर है पर शरीर अमर नहीं।
3. अभिकथन (A): लता जी ने अपने पिता से स्वाभिमान और सच्चाई सीखी।
कारण (R): पिता ने उन्हें सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना सिखाया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘ऐसी भी बातें होती हैं’ किस विधा की रचना है और किसका साक्षात्कार है?
यह एक साक्षात्कार है, जो यतींद्र मिश्र ने स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर से लिया है।
लता मंगेशकर ने अपने पिता से क्या सीखा?
उन्होंने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा।
‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है; अर्थात् शरीर नश्वर है, पर अच्छे कर्म और नाम अमर रहते हैं।
साक्षात्कार से लता जी की कैसी छवि बनती है?
सादगी, संगीत के प्रति समर्पण और आत्मसम्मान से भरी एक विनम्र व्यक्तित्व की छवि बनती है।
