कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 4 ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 4 ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) – साक्षात्कारकर्ता यतींद्र मिश्र – का पूरा समाधान देता है।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 4 साक्षात्कारकर्ता: यतींद्र मिश्र विधा: साक्षात्कार (इंटरव्यू) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – यतींद्र मिश्र

यतींद्र मिश्र का जन्म सन् 1977 में अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। कविता, संगीत व अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में उनकी गहरी रुचि है। उनके तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए हैं – यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप। शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर उन्होंने गिरिजा नामक पुस्तक लिखी तथा कुँवर नारायण पर केंद्रित पुस्तकों का संपादन भी किया। वे अर्धवार्षिक पत्रिका सहित का संपादन करते हैं। प्रस्तुत पाठ भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया उनका साक्षात्कार है।

पाठ का सार

‘ऐसी भी बातें होती हैं’ यतींद्र मिश्र द्वारा स्वर-साम्राज्ञी, भारत रत्न लता मंगेशकर से लिया गया साक्षात्कार है। इंदौर में जन्मी लता जी ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और जीवनपर्यंत संगीत के प्रति समर्पित रहीं।

साक्षात्कार में लता जी बताती हैं कि उन्होंने अपने पिता से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा। पिता का अनुशासन कठोर होते हुए भी स्नेहपूर्ण था – वे सिखाने के बाद बच्चों को खेलने भी भेज देते थे। उनकी सीख थी कि सही बात पर डटे रहो और किसी के आगे हाथ मत पसारो।

सन् 1942 में पिता की मृत्यु के बाद मात्र तेरह वर्ष की आयु में लता जी ने माँ और छोटे भाई-बहनों का भार सँभाला तथा एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए कठिन संघर्ष किया, जबकि उस समय स्त्रियों का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। अपने सहयोगियों – कोरस की लड़कियों और संगीतकारों – के साथ उनके संबंध आत्मीय थे।

वे ‘मंगलागौर’ जैसे लोक-पर्वों, बदलती त्योहार-परंपराओं तथा संगीत की अपरिमित शक्ति (बाबा हरिदास और तानसेन के प्रसंग) की चर्चा करती हैं। एक मराठी कहावत ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ (गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है) का उल्लेख करते हुए वे विनम्रता से कहती हैं – “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” पूरे साक्षात्कार से लता जी की सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान से भरी छवि उभरती है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
अप्रतिमबेजोड़, अनुपम
आकंठकंठ तक, पूर्ण रूप से
समर्पितसमर्पण किया हुआ, सौंपा हुआ
स्मरणयाद, स्मृति
रागदारीठीक राग गाने का ढंग या क्रिया
रागताल-लययुक्त ध्वनि; प्रीति, अनुराग
स्वाभिमानआत्मसम्मान, अपनी प्रतिष्ठा का मान
बैकुंठस्वर्ग; एक ताल
अनुयायीपीछे चलने वाला, अनुगामी
मार्फतमाध्यम से, द्वारा
सबबकारण, हेतु
अलबत्तानिस्संदेह, बेशक
सूत्रपातकार्य का आरंभ
आमदआय, आना
पार्श्वगायननेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना
परहेजकिसी वस्तु से बचना, परहेज करना
वाकयाघटना
खैरियतकुशल, भलाई
फागफागुन में गाया जाने वाला गीत; होली का राग-रंग
धमारफाग का एक भेद; एक ताल
सोहरबच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला मंगलगीत
बधावामंगलाचार, बधाई; जन्म आदि पर भेजा उपहार
मसलनउदाहरण के रूप में
अप्रत्याशितजिसकी आशा न रही हो, आकस्मिक
अतिरेकआवश्यकता से अधिक, आधिक्य
वाजिबउचित, ठीक

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?

(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना

(ख) भय और संशय के साथ जीना

(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना

(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना

उत्तर(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।लता जी ने स्वयं बताया कि पिता ने उन्हें सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना सिखाया – यही स्वाभिमान और सच्चाई की सीख है।

2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?

(क) संघर्ष

(ख) निराशा

(ग) भौतिकता

(घ) कर्तव्यनिष्ठा

उत्तर(घ) कर्तव्यनिष्ठा।मात्र 13 वर्ष की आयु में माँ और छोटे भाई-बहनों का भार सँभालना परिवार के प्रति उनके कर्तव्य-बोध को दर्शाता है।

3. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?

(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव

(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी

(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व

(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका

उत्तर(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।मंगलागौर जैसे लोक-पर्वों में गीत-नृत्य और सौहार्द से पता चलता है कि संगीत समाज को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका निभाता है।

4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।

(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।

(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।

(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।

उत्तर(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।‘गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है’ – अर्थात् शरीर नश्वर है, पर व्यक्ति के अच्छे कर्म और नाम सदा बने रहते हैं।

5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?

(क) औपचारिक

(ख) कामकाजी

(ग) आत्मीय

(घ) प्रतिस्पर्धात्मक

उत्तर(ग) आत्मीय।लता जी अपने सहयोगियों के योगदान को महत्व देती थीं और उनके साथ प्रेमपूर्ण, आत्मीय संबंध रखती थीं।

6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।

(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।

(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।

(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।

उत्तर(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।ये कथाएँ प्रतीकात्मक रूप से संगीत की असीम एवं अद्भुत शक्ति की ओर संकेत करती हैं।

7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?

(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की

(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध

(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति

(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली

उत्तर(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।साक्षात्कार में लता जी सरल, संगीत के प्रति समर्पित और स्वाभिमानी व्यक्तित्व के रूप में उभरती हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)

उत्तरपिताजी संगीत सिखाते समय गंभीरता और अनुशासन बरतते थे – ‘समझ गए न?’ पूछकर वे सुनिश्चित करते कि बात ठीक से समझ ली गई।किंतु इसके तुरंत बाद वे बच्चों को खेलने भेज देते थे, जिससे पता चलता है कि उनके अनुशासन में भय नहीं, बल्कि सम्मान और स्नेह था।इस प्रकार सीख कठोरता से नहीं, अपितु प्रेमपूर्वक दी जाती थी – यही अनुशासन और स्नेह का सुंदर संतुलन है।

2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?

उत्तरपिता के व्यक्तित्व का लता जी पर गहरा प्रभाव पड़ा – उन्होंने पिता से संगीत, स्वाभिमान, सच्चाई और अनुशासन सीखा।सही बात पर डटे रहने, किसी के आगे हाथ न पसारने, संगीत के प्रति पूर्ण समर्पण और सादगीपूर्ण जीवन जीने में उनके पिता का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।पिता का नाम और संगीत-परंपरा आगे बढ़ाने का उत्तरदायित्व भी उन्होंने निष्ठापूर्वक निभाया।

3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?

उत्तरलता जी के लिए ‘नाम आगे बढ़ाना’ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है।इसका अर्थ है पिता के संगीत-संस्कार, मूल्यों और प्रतिष्ठा को सम्मानपूर्वक आगे ले जाना।इसमें एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व जुड़ा है – पिता के आदर्शों पर चलते हुए परिवार तथा संगीत-परंपरा का मान बढ़ाना।

4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?

उत्तरलता जी के अपने सहयोगियों – कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों तथा संगीतकारों – के साथ आत्मीय और सम्मानपूर्ण संबंध थे।वे सबके योगदान को महत्व देती थीं और सामूहिक प्रयास की सराहना करती थीं, इसी कारण उनके साथ सहयोग का भाव बना रहता था।

साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व

नीचे दी गई पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-से गुण उभरते हैं।

पंक्तिउभरता गुण/विशेषता
“मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”एकाग्रता, समर्पण, साधना
“अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”स्वाभिमान, दृढ़ता, स्पष्टवादिता
“आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”विनम्रता, कृतज्ञता
“मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”दार्शनिकता, सरलता

मेरे प्रश्न (दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए)

1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।

संभावित प्रश्न(क) मंगलागौर जैसे लोक-पर्वों में स्त्रियों के बीच कैसा वातावरण रहता था?(ख) मंगलागौर के उत्सव में कौन-कौन से भाव झलकते थे?

2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।

संभावित प्रश्न(क) लता जी पुराने संगीतकारों के विषय में क्या मानती थीं?(ख) तकनीकी प्रगति की तुलना में पुराने संगीत की क्या विशेषता थी?

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?

उत्तर (संभावित)हाँ, एक बार जब मेरे मित्र किसी कमजोर सहपाठी का मजाक उड़ा रहे थे, तब मैंने अकेले ही उसका विरोध किया, क्योंकि वह गलत था।आरंभ में सब मुझ पर हँसे, पर सही बात पर डटे रहने से मुझे आत्मसंतोष मिला। (विद्यार्थी अपना अनुभव लिखें।)

2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।

उत्तर (संभावित)मेरे परिवार में बड़ों का आदर करना, सत्य बोलना और प्रतिदिन समय पर पढ़ाई करना – ऐसी सीखें हैं जिनका मैं बिना याद दिलाए पालन करता हूँ।भोजन से पहले हाथ धोना और बड़ों को प्रणाम करना भी हमारी पारिवारिक आदतों का हिस्सा है। (विद्यार्थी अपने उदाहरण दें।)

3. “पहले दिन गुड़ियाँ बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।

उत्तर (संभावित)हमारे घर में दीपावली विशेष उत्साह से मनाई जाती है – घर की सफाई, रंगोली, दीप-सज्जा, पूजा और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।परिवार के सभी सदस्य मिलकर तैयारी करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और उल्लास बढ़ता है। (विद्यार्थी अपने पर्व का वर्णन करें।)

4. “…आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?

उत्तर (संभावित)पहले त्योहारों पर घर-घर मिलकर लोकगीत गाए जाते थे, पकवान घर पर बनते थे और सब एकत्र होते थे।अब बाजार के तैयार सामान, फोन व संदेशों से बधाई तथा छोटे आयोजन प्रचलित हो गए हैं; कुछ लोकगीत और सामूहिक परंपराएँ धीरे-धीरे कम हो रही हैं। (विद्यार्थी अपने परिवार से पता लगाकर लिखें।)

साक्षात्कार की पड़ताल

1. साक्षात्कार विधा के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर (उदाहरण)आमंत्रण/परिचय: “दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं…”प्रश्नोत्तर: साक्षात्कारकर्ता के प्रश्न और लता जी के उत्तर का क्रम।संस्मरण: पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर तथा बचपन से जुड़ी स्मृतियाँ।विचार और उदाहरण: संगीत की शक्ति पर बाबा हरिदास और तानसेन के प्रसंग।समापन: “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं” जैसी समापन-पंक्तियाँ।

2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है— क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।

उत्तरयह कथन दर्शाता है कि साक्षात्कार औपचारिक संवाद न होकर एक आत्मीय एवं सहज बातचीत है।लता जी अपने अनुभव खुले मन से बाँटना चाहती हैं; ‘दीदी’ संबोधन, संस्मरणों का प्रवाह और निजी भावनाओं की अभिव्यक्ति इसे एक अपनेपन से भरी, हार्दिक बातचीत बनाती है।

व्याकरण की बात – मुहावरे (‘हाथ’ से जुड़े)

मुहावराअर्थवाक्य-प्रयोग
हाथ पसारनाकुछ माँगना, याचना करनास्वाभिमानी व्यक्ति किसी के आगे हाथ नहीं पसारता।
हाथ में आनाअधिकार या पहुँच में आनाकठिन परिश्रम से ही सफलता हाथ में आती है।
हाथ का मैल होनातुच्छ या महत्वहीन होनासच्चे कलाकार के लिए धन हाथ का मैल है।
हाथ से हाथ मिलानासहयोग करनाविकास के लिए सबको हाथ से हाथ मिलाना चाहिए।
हाथ साफ करनाचुरा लेनाभीड़ में जेबकतरे ने उसका बटुआ साफ कर दिया।
हाथ से निकल जानाअवसर का छूट जानासमय पर निर्णय न लेने से मौका हाथ से निकल गया।
हाथ धो बैठनाकिसी वस्तु को खो देनालापरवाही से वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. इस साक्षात्कार को किसने लिया है?

उत्तरयह साक्षात्कार यतींद्र मिश्र ने लता मंगेशकर से लिया है।

2. लता मंगेशकर ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा किससे ली?

उत्तरउन्होंने अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली।

3. पिता की मृत्यु के समय लता जी की आयु कितनी थी?

उत्तरसन् 1942 में पिता की मृत्यु के समय लता जी की आयु मात्र तेरह वर्ष थी।

लघु उत्तरीय

4. पिता की मृत्यु के बाद लता जी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

उत्तरकम आयु में ही उन्हें माँ और छोटे भाई-बहनों का भार सँभालना पड़ा।सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागना पड़ता था और भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा एवं थकान जैसी अनेक चुनौतियाँ झेलनी पड़ीं।उस समय स्त्रियों का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था, फिर भी उन्होंने हिम्मत से संघर्ष किया।

5. ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ कहावत के माध्यम से लता जी क्या समझाना चाहती हैं?

उत्तरइस मराठी कहावत का अर्थ है – गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है।इसके द्वारा लता जी समझाना चाहती हैं कि शरीर नश्वर है, पर व्यक्ति के अच्छे कर्म और नाम सदा अमर रहते हैं।

दीर्घ उत्तरीय

6. साक्षात्कार के आधार पर लता मंगेशकर के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरसमर्पण एवं साधना: संगीत और रेकॉर्डिंग के अतिरिक्त उन्हें किसी की सुध न रहती थी।स्वाभिमान एवं दृढ़ता: सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना उनका स्वभाव था।कर्तव्यनिष्ठा: कम आयु में ही परिवार का भार सँभाला।विनम्रता एवं सादगी: अपार प्रसिद्धि के बावजूद वे सरल और विनम्र बनी रहीं – “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. प्रस्तुत पाठ किस विधा की रचना है?

(क) कहानी

(ख) निबंध

(ग) साक्षात्कार

(घ) संस्मरण

उत्तर(ग) साक्षात्कार।

2. लता मंगेशकर का जन्म किस नगर में हुआ था?

(क) इंदौर

(ख) अयोध्या

(ग) लखनऊ

(घ) पुणे

उत्तर(क) इंदौर (मध्यप्रदेश)।

3. लता मंगेशकर को किस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया गया?

(क) पद्मश्री

(ख) भारत रत्न

(ग) पद्म भूषण

(घ) साहित्य अकादमी

उत्तर(ख) भारत रत्न।

4. ‘पार्श्वगायन’ का अर्थ है—

(क) मंच पर सामने गाना

(ख) नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना

(ग) समूह में गाना

(घ) शास्त्रीय राग गाना

उत्तर(ख) नेपथ्य में बैठकर अभिनेता के बदले स्वर देना।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लता जी ने कम आयु में ही परिवार का भार सँभाल लिया।

कारण (R): सन् 1942 में उनके पिता की मृत्यु हो गई और वे सबसे बड़ी संतान थीं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): लता जी अपनी अपार प्रसिद्धि पर घमंड करती थीं।

कारण (R): उन्होंने कहा था कि उनका गाना अमर है पर शरीर अमर नहीं।

उत्तर(घ) A गलत है (वे विनम्र थीं, घमंडी नहीं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): लता जी ने अपने पिता से स्वाभिमान और सच्चाई सीखी।

कारण (R): पिता ने उन्हें सही बात पर डटे रहना और किसी के आगे न झुकना सिखाया।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘ऐसी भी बातें होती हैं’ किस विधा की रचना है और किसका साक्षात्कार है?

यह एक साक्षात्कार है, जो यतींद्र मिश्र ने स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर से लिया है।

लता मंगेशकर ने अपने पिता से क्या सीखा?

उन्होंने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत के साथ-साथ स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा।

‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है – गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है; अर्थात् शरीर नश्वर है, पर अच्छे कर्म और नाम अमर रहते हैं।

साक्षात्कार से लता जी की कैसी छवि बनती है?

सादगी, संगीत के प्रति समर्पण और आत्मसम्मान से भरी एक विनम्र व्यक्तित्व की छवि बनती है।

प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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