आखिरी चट्टान तक प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा

आखिरी चट्टान तक प्रश्न उत्तर में मोहन राकेश के यात्रा-वृत्तांत का सार, पाठ-आधारित उत्तर, शब्दार्थ, व्याकरण तथा खोज और लेखन गतिविधियों के नमूने पढ़ें।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 5 लेखक: मोहन राकेश विधा: यात्रा-वृत्तांत स्रोत संस्करण: मार्च 2026

स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 84–99। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।

लेखक परिचय – मोहन राकेश

हिंदी साहित्य के बहुमुखी रचनाकार मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में साहित्य-सृजन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (नाटक), अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल (उपन्यास), क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल (कहानी-संग्रह), मोहन राकेश की डायरी तथा आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)। आषाढ़ का एक दिन नाटक के लिए उन्हें ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार मिला। उन्होंने कुछ समय सारिका पत्रिका का संपादन भी किया। उनके लेखन में भावों की गहराई के साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। सन् 1972 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

मोहन राकेश कन्याकुमारी में समुद्र से उभरी एक चट्टान पर खड़े होकर विवेकानंद चट्टान और तीन दिशाओं में फैले जल को देखते हैं। प्रकृति की व्यापकता में वे स्वयं को भूल जाते हैं; बढ़ता पानी देखकर सुरक्षित किनारे लौटते हैं। सूर्यास्त देखने वे सैंड हिल से आगे कई टीले पार करते हैं। थकान के बाद खुला पश्चिमी क्षितिज मिलना उन्हें अपने प्रयास की सफलता का सुख देता है।

सूर्यास्त के बदलते रंगों के बाद अँधेरा उन्हें वापसी की चिंता में डालता है। वे टीलों में भटकने से बचने के लिए नीचे तट पर उतरते हैं। वहाँ की अनोखे रंगों वाली रेत उन्हें फिर रोक लेती है। बढ़ती लहरों से तट संकरा होने लगता है; घबराकर चलते हुए वे एक चट्टान से टकराते हैं और बाँहों पर हल्की खरोंच आती है। चट्टान पर चढ़ने के बाद दूसरी तरफ खुला तट, लोग और सड़क का रास्ता देखकर राहत मिलती है।

अगले सूर्योदय के समय लेखक, तीन स्थानीय युवक और चार मल्लाह विवेकानंद चट्टान पर हैं। एक स्नातक युवक शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी और छोटे-मोटे कामों की विवशता बताता है। शंख-मालाएँ बेचती युवतियाँ, सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु और सरकारी मेहमान भी दिखाई देते हैं। वृत्तांत प्रकृति के सौंदर्य के साथ सामाजिक विषमता तथा लेखक के विस्मय, डर और आत्मानुभूति को सामने लाता है। पाठ के जनसंख्या और बेरोजगारी के आँकड़े उस समय के युवक के कथन हैं, आज के आँकड़े नहीं।

रेत के टीले पर बैठा यात्री समुद्र पर डूबते सूर्य और सुनहरी लहरों को देखता है।
पाठ से प्रेरित कल्पनात्मक जलरंग चित्र: कई टीले पार करने के बाद सूर्यास्त का खुला दृश्य। यह लेखक का वास्तविक चित्र या स्थान का सटीक नक्शा नहीं है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
स्याहकाला, श्याम
चट्टानशिला, बड़ा पत्थर
समाधिस्थसमाधि में स्थित, ध्यानमग्न
चेतनाहोश, बुद्धि-विवेक, सावधानी
क्षितिजजहाँ धरती और आकाश मिलते दिखते हैं; दृष्टि-सीमा
सिहरनकंपन, सिहरने की क्रिया
पृष्ठभूमिपीछे की भूमि या दृश्य; पहले की बातें
झुरमुटपास-पास उगे पेड़ों/झाड़ियों का समूह
बीहड़ऊबड़-खाबड़, विकट
मद्धिममध्यम, मंद, धीमा
महुआएक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल-फल खाने तथा लकड़ी काम आती है
सीपियाँशंख-घोंघे की जाति का जलचर; जिसके खोल में मोती बनता है
दार्शनिकदर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता
ओटआड़, रोक, परदा
अर्घ्यपूजा में देने योग्य जल/वस्तु
बाइनाक्युलरदूरबीन, द्विनेत्री
सैंड हिलबालू का टीला
सुरमईहल्का नीला, सुरमे के रंग का
सिर धुननाशोक/पश्चात्ताप में सिर पीटना, पछताना
बे-लागखरा, दो-टूक

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?

(क) विवेकानंद चट्टान से

(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से

(ग) पच्छिमी क्षितिज से

(घ) सैंड हिल से

उत्तर(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था, इसलिए लेखक कई टीले पार कर उस ऊँचे टीले पर पहुँचा और वहीं से सूर्यास्त का पूरा दृश्य देखा।

2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?

(क) मौन हो जाना

(ख) विस्मित हो जाना

(ग) भ्रमित हो जाना

(घ) आशंकित होना

उत्तर(ख) विस्मित हो जाना।समुद्र की विशालता देखकर लेखक इतना विस्मय-विभोर हो गया कि कुछ देर के लिए अपने अस्तित्व का बोध ही भूल गया।

3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?

(क) करुणा

(ख) विनम्रता

(ग) आत्मीयता

(घ) संतुष्टि

उत्तर(घ) संतुष्टि।कई टीले पार कर लक्ष्य तक पहुँचने पर लेखक को ऐसी विजय-भरी संतुष्टि मिली मानो उसने किसी ऊँची चोटी को पहली बार सर किया हो।

4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—

(क) बलखाती लहरों का

(ख) सागर की व्यापकता का

(ग) सूर्यास्त के दृश्य का

(घ) पच्छिमी क्षितिज का

उत्तर(ख) सागर की व्यापकता का।तीनों ओर क्षितिज तक फैले अथाह समुद्र की असीम व्यापकता और उसकी शक्ति को लेखक ने इस वाक्य में व्यक्त किया है।

5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—

(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।

(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।

(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।

(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

उत्तर(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।वृत्तांत में केवल स्थान-वर्णन नहीं, बल्कि लेखक के विस्मय, रोमांच, शांति और आत्मिक अनुभूतियाँ भी सजीव रूप से जुड़ी हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. लेखक सैंड हिल से आगे क्यों बढ़ा?

सैंड हिल से अरब सागर की दिशा का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था। लेखक पूरे खुले क्षितिज की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहता था, इसलिए आगे बढ़ता गया।

2. स्थानीय लोगों के बारे में क्या बताया गया है?

स्थानीय युवतियाँ शंख-मालाएँ बेचती थीं और मल्लाह लहरों व नुकीली चट्टानों से बचाकर नाव चलाते थे। एक स्नातक युवक फोटो-एल्बम बेचता था। उसके अनुसार उस समय वहाँ अनेक शिक्षित युवक बेरोजगार थे; नौकरी के आवेदन देना, चर्चा करना और छोटे-मोटे काम करना उनका जीवन था। इसलिए केवल शिक्षा या पर्यटन का उल्लेख करना अधूरा उत्तर होगा।

3. प्रयत्न की सार्थकता का अर्थ क्या है?

लेखक की इच्छा पूरा सूर्यास्त देखने की थी। कई टीले पार करने की मेहनत के बाद खुला दृश्य मिल गया; लक्ष्य पूरा होने की संतुष्टि से उसे अपना प्रयास सार्थक लगा।

4. कौन-सा अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था?

सबसे स्पष्ट उदाहरण तट की रेत के अनगिनत अनाम रंग हैं। वह पहले भी अलग-अलग रंगों की रेत देख चुका था, पर ऐसे मिश्रित रंग कहीं नहीं देखे थे। सूर्यास्त के क्षण-क्षण बदलते रंग और उस स्थान से दिखने वाला विस्तृत समुद्री दृश्य भी उसे नई अनुभूति देते हैं। यह लिखना उचित नहीं कि उसने पहले कभी समुद्र या सूर्यास्त देखा ही नहीं था।

5. दृढ़ता दिखाने वाले दो अंश चुनिए।

  1. “टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।”
  2. “हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है”।

पहला शारीरिक थकान पर मन की दृढ़ता और दूसरा लगातार आगे बढ़ने की आशा बताता है। पुस्तक में इन अंशों के आगे-पीछे का संदर्भ भी पढ़ें।

यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व

‘आखिरी चट्टान तक’ में यात्रा-वृत्तांत के विभिन्न तत्व इस प्रकार दिखाई देते हैं—

तत्वपाठ से उदाहरण
दृश्य-वर्णनसमुद्र, चट्टानें, बलखाती लहरें, रेत के टीले एवं रंग-बिरंगे आकाश का सजीव चित्रण।
आत्मानुभूति व भावनाएँविस्मय, रोमांच, भय तथा अपने अस्तित्व का बोध; प्रकृति से संवाद।
सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यविवेकानंद चट्टान, स्थानीय लोग व नवयुवक, मंदिर एवं धार्मिक परंपराएँ।
जीवन-दर्शन‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’; आत्म-चेतना तथा क्षणभंगुरता का बोध।
शैलीगत विशेषताएँसजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा; दृश्यात्मकता; रूपक, उपमा एवं रंगों का भावात्मक प्रयोग।
रोमांच व संघर्षलहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय और सुरक्षित लौटने की चिंता।

अपनी यात्रा में छह तत्व पहचानिए — नमूना

किसी झील की यात्रा में जल और पेड़ों का वर्णन दृश्य-वर्णन होगा; शांति और उत्साह आत्मानुभूति; स्थानीय लोगों का जीवन सांस्कृतिक पक्ष; जल बचाने का विचार जीवन-दर्शन; रंगों और उपमाओं का प्रयोग शैली; अचानक वर्षा में सुरक्षित आश्रय खोजना चुनौती। अपने वास्तविक अनुभव से उदाहरण बदलें।

यात्रा और खोज

पुस्तक का दिया उदाहरण: किन्नर देश में — किन्नौर, हिमाचल प्रदेश — राहुल सांकृत्यायन। इस पाठ का उदाहरण जोड़ सकते हैं: आखिरी चट्टान तक — कन्याकुमारी — मोहन राकेश। आगे पढ़ने के अंश का उदाहरण: प्रयाग : 1976 — प्रयाग — निर्मल वर्मा। अन्य रचनाओं के लिए पुस्तकालय में शीर्षक-पृष्ठ से लेखक और यात्रा-स्थल जाँचकर तालिका पूरी करें।

मेरे देश की धरती

1. समुद्री तट वाले अन्य राज्य और मानचित्र

तमिलनाडु के अतिरिक्त पश्चिमी तट पर उत्तर से दक्षिण गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल; पूर्वी तट पर दक्षिण से उत्तर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल चिह्नित करें। कुल नौ तटीय राज्य हैं। केंद्रशासित प्रदेशों को राज्यों की सूची में न मिलाएँ। आधिकारिक भारत-मानचित्र पर पहले तटरेखा, फिर राज्य और संकेत-सूची बनाएँ।

2. पसंद के पर्यटन स्थलों की सूची — नमूना

स्थलराज्यक्षेत्रजलवायुसामान्य अनुकूल समय
कन्याकुमारीतमिलनाडुसमुद्रीउष्ण व आर्द्रअक्टूबर–मार्च
जयपुरराजस्थानमैदानी/अर्धशुष्कगर्म ग्रीष्म, अपेक्षाकृत ठंडी सर्दीअक्टूबर–मार्च
शिमलाहिमाचल प्रदेशपर्वतीयठंडी/समशीतोष्णमार्च–जून

यह अभ्यास का नमूना है। वास्तविक यात्रा से पहले मौसम, स्थानीय चेतावनी और पहुँच की स्थिति जाँचें।

3. अपने स्थान से कन्याकुमारी की तुलना

नमूना—कन्याकुमारी तमिलनाडु का तटीय नगर है; वहाँ समुद्र, आर्द्र हवा, तटीय व्यवसाय और पर्यटन प्रमुख दिखते हैं। विवेकानंद शिला स्मारक, तिरुवल्लुवर प्रतिमा और भगवती अम्मन मंदिर उल्लेखनीय स्थल हैं। यदि मेरा नगर अंतर्देशीय है तो वहाँ समुद्र नहीं होगा, तापांतर अधिक हो सकता है और व्यवसाय अलग होंगे। अपने वास्तविक नगर की जलवायु, भाषा, रोजगार और परिवेश जोड़ें।

4. भारत का दक्षिणतम बिंदु

भारत के संपूर्ण भूभाग का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा प्वाइंट, ग्रेट निकोबार द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में है। कन्याकुमारी मुख्यभूमि के दक्षिणी छोर पर है; दोनों को एक न मानें। दीपस्तंभ महानिदेशालय का परिचय इस भेद की पुष्टि करता है।

5. विवेकानंद चट्टान के आसपास क्या विस्तार हुआ?

विवेकानंद शिला स्मारक बना है और पास की अलग चट्टान पर तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा स्थापित है। वर्तमान जिला पर्यटन पृष्ठ दोनों स्थलों को जोड़ने वाला काँच का पुल भी दिखाता है। यह बाद का विकसित स्वरूप है; यात्रा-वृत्तांत के पुराने दृश्य में इन सभी निर्माणों को न जोड़ें। कन्याकुमारी जिला पर्यटन (देखा: 14 अक्टूबर 2026)।

हस्तशिल्प कौशल

1. स्थानीय शिल्पकार से बातचीत की रूपरेखा

जोड़ी में अनुमति लेकर पूछें: शिल्प का नाम, काम करने की अवधि, प्रशिक्षण किससे मिला, महिलाओं की भागीदारी, सामग्री व तकनीक, लागत, बिक्री के साधन और औपचारिक प्रशिक्षण। उत्तर, तारीख और सहमति नोट करें। किसी काल्पनिक कारीगर के अनुभव को वास्तविक सर्वेक्षण न लिखें।

2. डिजिटल खरीददारी कैसे सहायक है?

चित्रों और विवरण से उत्पाद दूर के खरीदारों तक पहुँचते हैं, सीधे ऑर्डर व भुगतान मिल सकते हैं और प्रतिक्रिया से सुधार होता है। साथ में पैकिंग, परिवहन, मंच-शुल्क, डिजिटल कौशल और धोखाधड़ी की चुनौतियाँ भी रहती हैं। साफ कीमत, विश्वसनीय भुगतान और उचित श्रम-मूल्य जरूरी हैं।

3. सरकारी प्रयासों का उदाहरण

राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम में प्रशिक्षण, डिजाइन और विपणन सहयोग जैसे प्रयास हैं। वस्त्र मंत्रालय की जानकारी से योजना का उद्देश्य पढ़ें; स्थानीय कार्यालय से वर्तमान पात्रता और सुविधा पूछकर कक्षा में साझा करें। लाभ सबको स्वतः मिलना न मानें।

मिलकर चलें

1–2. सुगम यात्रा की चुनौतियाँ और उपाय

सीढ़ियाँ, असमतल रास्ते, अनुपलब्ध सुलभ शौचालय, केवल ध्वनि या केवल लिखित सूचना और भीड़ अलग-अलग साथियों के लिए बाधाएँ हो सकती हैं। पहले साथी से उसकी आवश्यकता पूछें; सुलभ वाहन/रैंप, विश्राम, स्पष्ट दृश्य व श्रव्य सूचना, शांत स्थान और सहयोग की व्यवस्था करें। हर दिव्यांग व्यक्ति की जरूरत समान नहीं होती।

3–4. शिक्षक और साथियों की राय

विशेष शिक्षक से योजना की व्यवहार्यता जाँचें और संबंधित साथी की राय के अनुसार संशोधन करें। बिना पूछे व्हीलचेयर न धकेलें, न किसी की ओर से फैसला करें। कार्यपत्रक रखें: बाधा—सुझाव—साथी की राय—संशोधित व्यवस्था। वास्तविक बातचीत के बाद भरें।

प्रकृति, अनुभव और चर्चा

प्रकृति की ओर: सूर्योदय–सूर्यास्त तुलना — नमूना

सुबह आकाश में हल्की लालिमा फैली और पक्षियों की आवाजें बढ़ीं। शाम को रोशनी धीरे-धीरे धुँधली हुई और घर लौटते लोगों की आहट सुनाई दी। दोनों दृश्य सुंदर थे; सुबह नई शुरुआत और शाम विश्राम का भाव लाई। अपने देखे रंग, ध्वनि और भाव लिखें; सूर्य को सीधे या दूरबीन से न देखें।

अनुभव की साझेदारी: लघु यात्रा-संस्मरण — नमूना

पिछले रविवार हम झील गए। किनारे के पेड़ों की परछाईं पानी में काँप रही थी। एक दुकानदार ने बताया कि सप्ताहांत में अधिक लोग आते हैं। कुछ देर बाद वर्षा हुई तो हम निर्धारित शरण-स्थल में रुक गए। लौटते समय अपना कचरा साथ लिया। उस यात्रा से समझा कि किसी स्थान की सुंदरता उसके पर्यावरण और लोगों से मिलकर बनती है। यह काल्पनिक नमूना है; अपना स्थान, घटना, अनुभव और सीख लिखें।

चर्चा-परिचर्चा के तीन बिंदु

  1. यात्राएँ नई भाषा, भोजन, जीवन-पद्धति और प्रकृति से परिचय कराती हैं; सम्मानपूर्वक बातचीत और ध्यान से देखना अनुभव को समृद्ध करता है।
  2. अचानक चुनौती में संयम, स्थिति का आकलन, समय पर सहायता और सुरक्षित विकल्प जरूरी हैं। रोमांच के लिए चेतावनियों की अनदेखी न करें।
  3. अपना अनुभव हो तो घटना—निर्णय—परिणाम—सीख के क्रम में बताएँ; अनुभव न हो तो स्पष्ट रूप से कल्पित स्थिति पर चर्चा करें।

व्याकरण की बात

क्रिया-विशेषण की पहचान

क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं।

वाक्यक्रिया-विशेषणक्रिया, जिसकी विशेषता बताई गई
बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं।कटती हुई‘आती थीं’ (रीतिवाचक)
यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं।उस दिशा में‘जा रही थीं’ (स्थानवाचक)
मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा।देर तक‘देखता रहा’ (कालवाचक)

आओ नए वाक्य बनाएँ (अर्थ एवं प्रयोग)

शब्दअर्थनया वाक्य
क्षितिजजहाँ धरती-आकाश मिलते दिखते हैंसूर्य धीरे-धीरे क्षितिज पर अस्त हो रहा था।
झुरमुटपेड़ों/झाड़ियों का घना समूहचिड़ियाँ नारियल के झुरमुट में जा छिपीं।
ढलाननीचे की ओर झुका भागबच्चे रेत की ढलान पर फिसलते रहे।
शृंखलाकड़ियों की लड़ी, सिलसिलादूर तक पहाड़ियों की एक लंबी शृंखला फैली थी।
बीहड़ऊबड़-खाबड़, विकटबीहड़ रास्ते पर चलना बहुत कठिन था।

भाषा संगम और पर्यटन विवरणिका

1. भाषा न समझने वाले यात्री की सहायता

नक्शा, संकेत, चित्र, सरल शब्द और विश्वसनीय अनुवाद सहायता लें; जानकारी की पुष्टि करें। सुरक्षित सार्वजनिक सहायता-केंद्र तक मार्ग बताएँ। सहमति के बिना यात्री की निजी जानकारी या तस्वीर साझा न करें।

2. पधारो म्हारे देश: विवरणिका — प्रारूप

शीर्षक: हमारे क्षेत्र में आपका स्वागत है। प्रत्येक स्थल के नीचे नाम, स्थान, विशेषता, पहुँचने का साधन, सुलभता और स्थानीय पर्यावरण-संबंधी निर्देश लिखें। समय/शुल्क आधिकारिक स्रोत से जाँचकर जाँच की तारीख दें। उदाहरण: कन्याकुमारी—समुद्री दृश्य, विवेकानंद स्मारक और तिरुवल्लुवर प्रतिमा; नाव सेवा मौसम पर निर्भर हो सकती है। अपने क्षेत्र की वास्तविक सूची जोड़ें।

नाव के विभिन्न नाम और मातृभाषा

पुस्तक से उदाहरण: हिंदी—नाव; संस्कृत—नौ/नौका; मराठी—होडी/नाव; बांग्ला—नाओ/नौका। अपनी मातृभाषा के शब्द की परिवार या शिक्षक से पुष्टि करें। नमूना मराठी अनुवाद: “उंच उंच लाटांपासून वाचवत नावाडी नाव आणत होते.” स्थानीय प्रयोग अलग हो सकता है।

आगे पढ़ें

निर्मल वर्मा के ‘प्रयाग : 1976’ अंश में भोर, पुलिस की सीटी, यात्रियों की आवाजें और चाँद का बिंब पहचानें। मोहन राकेश के समुद्री अनुभव से उसकी संवेदनात्मक भाषा की तुलना करें। पुस्तकालय में पूरा वृत्तांत पढ़ें। स्वामी विवेकानंद पर शोध में जन्मदिवस 12 जनवरी, युवाओं के प्रति संदेश और सामाजिक कार्यों को अलग शीर्षकों में लिखें; स्रोत और पढ़ने की तारीख दें। अपनी बनाई जानकारी को मूल पाठ का कथन न बनाएँ।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?

उत्तरयह एक यात्रा-वृत्तांत है, जिसके लेखक मोहन राकेश हैं।

2. कन्याकुमारी किन तीन जलराशियों के संगम-स्थल पर स्थित है?

उत्तरअरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के संगम-स्थल पर।

3. कन्याकुमारी की प्रसिद्ध चट्टान को किस अन्य नाम से जाना जाता है?

उत्तरइसे ‘विवेकानंद चट्टान’ (विवेकानंद स्मारक शिला) के नाम से भी जाना जाता है।

लघु उत्तरीय

4. लौटते समय लेखक के मन में किस प्रकार की चिंता और भय उत्पन्न हुआ?

उत्तरपहले अँधेरा देखकर टीलों में भटकने की चिंता हुई। बाद में तट पर उतरने पर बढ़ती लहरों से अलग खतरा पैदा हुआ।उसके मन में यह भय समा गया कि कहीं अँधेरा होने से पहले वह सब टीले पार न कर सका तो भटक जाएगा; अतः सुरक्षित लौटने की चिंता उसे सताने लगी।

5. ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ – इस अनुभूति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तरतीनों ओर क्षितिज तक फैले अथाह समुद्र को देखकर लेखक को उसकी असीम व्यापकता (विस्तार) का बोध हुआ।यह विशाल विस्तार स्वयं में एक अपार शक्ति का प्रतीक था – अर्थात् सागर का विस्तार ही उसकी शक्ति है और उसकी शक्ति ही उसका विस्तार। इसी भावना को लेखक ने इन शब्दों में व्यक्त किया।

दीर्घ उत्तरीय

6. यात्रा-वृत्तांत के रूप में ‘आखिरी चट्टान तक’ की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरसजीव दृश्य-वर्णन: समुद्र, चट्टानों, लहरों, रेत के टीलों और सूर्यास्त का चित्रात्मक चित्रण।आत्मानुभूति: केवल स्थान-वर्णन नहीं, बल्कि लेखक के विस्मय, रोमांच, भय और आत्मिक अनुभूतियों का समावेश।सांस्कृतिक झलक: स्थानीय जीवन, विवेकानंद चट्टान और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख।भाषा-शैली: सहज, प्रवाहपूर्ण एवं चित्रात्मक भाषा, जिससे पाठक स्वयं को यात्रा में सम्मिलित अनुभव करता है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा-वृत्तांत किस स्थान पर आधारित है?

(क) प्रयागराज

(ख) कन्याकुमारी

(ग) किन्नौर

(घ) अमृतसर

उत्तर(ख) कन्याकुमारी।

2. लेखक ‘सैंड हिल’ से आगे क्यों बढ़ा?

(क) यात्रियों से बचने के लिए

(ख) पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार और पूरा सूर्यास्त देखने के लिए

(ग) नाव पकड़ने के लिए

(घ) मंदिर जाने के लिए

उत्तर(ख) पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार और पूरा सूर्यास्त देखने के लिए।

3. कन्याकुमारी भारत के किस राज्य में स्थित है?

(क) केरल

(ख) कर्नाटक

(ग) तमिलनाडु

(घ) आंध्र प्रदेश

उत्तर(ग) तमिलनाडु।

4. ‘क्षितिज’ शब्द का अर्थ है—

(क) समुद्र की गहराई

(ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखते हैं

(ग) ऊँचा पर्वत

(घ) रेत का टीला

उत्तर(ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखते हैं।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लेखक थककर भी एक के बाद एक कई टीले पार करता गया।

कारण (R): वह सूर्यास्त का संपूर्ण दृश्य देखने के लिए दृढ़ संकल्पित था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ‘आखिरी चट्टान तक’ केवल कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन है।

कारण (R): यह लेखक की वास्तविक यात्रा और अनुभूतियों पर आधारित यात्रा-वृत्तांत है।

उत्तर(घ) A गलत है (यह काल्पनिक नहीं, वास्तविक यात्रा का वृत्तांत है), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): समुद्र की विशालता देखकर लेखक कुछ देर अपने अस्तित्व का बोध भूल गया।

कारण (R): अथाह विस्तार के समक्ष वह विस्मय से अभिभूत हो उठा था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है?

यह मोहन राकेश द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्तांत है, जो कन्याकुमारी की यात्रा पर आधारित है।

‘आखिरी चट्टान’ किसे कहा गया है?

कन्याकुमारी में भारत के स्थल-भाग की सबसे दक्षिणी चट्टान को, जिसे ‘विवेकानंद चट्टान’ भी कहते हैं।

‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ से लेखक का क्या आशय है?

तीनों ओर फैले अथाह समुद्र की असीम व्यापकता और उसकी अपार शक्ति का बोध इन शब्दों में व्यक्त हुआ है।

लेखक सैंड हिल से आगे क्यों गया?

क्योंकि सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था; पूरा सूर्यास्त देखने के लिए वह उस ऊँचे टीले तक गया।

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