कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 5 ‘आखिरी चट्टान तक’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 5 ‘आखिरी चट्टान तक’ (यात्रा-वृत्तांत, लेखक – मोहन राकेश) का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – मोहन राकेश
हिंदी साहित्य के बहुमुखी रचनाकार मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में साहित्य-सृजन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (नाटक), अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल (उपन्यास), क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल (कहानी-संग्रह), मोहन राकेश की डायरी तथा आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)। आषाढ़ का एक दिन नाटक के लिए उन्हें ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार मिला। उन्होंने कुछ समय सारिका पत्रिका का संपादन भी किया। उनके लेखन में भावों की गहराई के साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। सन् 1972 में मात्र 48 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘आखिरी चट्टान तक’ मोहन राकेश का एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें उन्होंने कन्याकुमारी की अपनी यात्रा के अनुभवों को सजीव ढंग से व्यक्त किया है। कन्याकुमारी अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी – इन तीन सागरों के संगम-स्थल पर स्थित है। लेखक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान पर खड़ा होकर अथाह समुद्र को देखता है और ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ का अनुभव करता है।
सूर्यास्त का संपूर्ण दृश्य देखने के लिए लेखक यात्रियों के साथ ‘सैंड हिल’ पहुँचता है, पर वहाँ से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में छिपा था। इसलिए वह थकान की परवाह किए बिना एक के बाद एक कई टीले पार करता हुआ उस ऊँचे टीले पर पहुँचता है, जहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार और डूबता सूर्य दिखाई देता है। अपने प्रयत्न की सार्थकता से वह गहरी संतुष्टि अनुभव करता है।
लौटते समय अँधेरा घिरने लगता है और एक लहर के पैरों को भिगोते ही उसे खतरे का एहसास होता है; तब सुरक्षित लौटने की चिंता और भटक जाने का भय भी उसके मन में आता है। मार्ग में वह स्थानीय जीवन – शंख-मालाएँ बेचती नवयुवतियाँ, नावें चलाते मल्लाह और शिक्षा की ओर बढ़ते नवयुवक – को भी देखता है।
इस प्रकार यह यात्रा-वृत्तांत केवल कन्याकुमारी के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक सौंदर्य का वर्णन ही नहीं करता, बल्कि लेखक के मन में उठने वाले विस्मय, रोमांच, शांति और आत्मिक खोज को भी व्यक्त करता है। सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक भाषा के कारण पाठक को लगता है मानो वह भी लेखक के साथ यात्रा कर रहा हो।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्याह | काला, श्याम |
| चट्टान | शिला, बड़ा पत्थर |
| समाधिस्थ | समाधि में स्थित, ध्यानमग्न |
| चेतना | होश, बुद्धि-विवेक, सावधानी |
| क्षितिज | जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखते हैं; दृष्टि-सीमा |
| सिहरन | कंपन, सिहरने की क्रिया |
| पृष्ठभूमि | पीछे की भूमि या दृश्य; पहले की बातें |
| झुरमुट | पास-पास उगे पेड़ों/झाड़ियों का समूह |
| बीहड़ | ऊबड़-खाबड़, विकट |
| मद्धिम | मध्यम, मंद, धीमा |
| महुआ | एक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल-फल खाने तथा लकड़ी काम आती है |
| सीपियाँ | शंख-घोंघे की जाति का जलचर; जिसके खोल में मोती बनता है |
| दार्शनिक | दर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता |
| ओट | आड़, रोक, परदा |
| अर्घ्य | पूजा में देने योग्य जल/वस्तु |
| बाइनाक्युलर | दूरबीन, द्विनेत्री |
| सैंड हिल | बालू का टीला |
| सुरमई | हल्का नीला, सुरमे के रंग का |
| सिर धुनना | शोक/पश्चात्ताप में सिर पीटना, पछताना |
| बे-लाग | खरा, दो-टूक |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पच्छिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पच्छिमी क्षितिज का
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
मेरी समझ मेरे विचार
1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था, लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व
‘आखिरी चट्टान तक’ में यात्रा-वृत्तांत के विभिन्न तत्व इस प्रकार दिखाई देते हैं—
| तत्व | पाठ से उदाहरण |
|---|---|
| दृश्य-वर्णन | समुद्र, चट्टानें, बलखाती लहरें, रेत के टीले एवं रंग-बिरंगे आकाश का सजीव चित्रण। |
| आत्मानुभूति व भावनाएँ | विस्मय, रोमांच, भय तथा अपने अस्तित्व का बोध; प्रकृति से संवाद। |
| सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य | विवेकानंद चट्टान, स्थानीय लोग व नवयुवक, मंदिर एवं धार्मिक परंपराएँ। |
| जीवन-दर्शन | ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’; आत्म-चेतना तथा क्षणभंगुरता का बोध। |
| शैलीगत विशेषताएँ | सजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा; दृश्यात्मकता; रूपक, उपमा एवं रंगों का भावात्मक प्रयोग। |
| रोमांच व संघर्ष | लहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय और सुरक्षित लौटने की चिंता। |
व्याकरण की बात
क्रिया-विशेषण की पहचान
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई गई |
|---|---|---|
| बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। | कटती हुई | ‘आती थीं’ (रीतिवाचक) |
| यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। | उस दिशा में | ‘जा रही थीं’ (स्थानवाचक) |
| मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। | देर तक | ‘देखता रहा’ (कालवाचक) |
आओ नए वाक्य बनाएँ (अर्थ एवं प्रयोग)
| शब्द | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| क्षितिज | जहाँ धरती-आकाश मिलते दिखते हैं | सूर्य धीरे-धीरे क्षितिज पर अस्त हो रहा था। |
| झुरमुट | पेड़ों/झाड़ियों का घना समूह | चिड़ियाँ नारियल के झुरमुट में जा छिपीं। |
| ढलान | नीचे की ओर झुका भाग | बच्चे रेत की ढलान पर फिसलते रहे। |
| शृंखला | कड़ियों की लड़ी, सिलसिला | दूर तक पहाड़ियों की एक लंबी शृंखला फैली थी। |
| बीहड़ | ऊबड़-खाबड़, विकट | बीहड़ रास्ते पर चलना बहुत कठिन था। |
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?
2. कन्याकुमारी किन तीन जलराशियों के संगम-स्थल पर स्थित है?
3. कन्याकुमारी की प्रसिद्ध चट्टान को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
लघु उत्तरीय
4. लौटते समय लेखक के मन में किस प्रकार की चिंता और भय उत्पन्न हुआ?
5. ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ – इस अनुभूति का आशय स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय
6. यात्रा-वृत्तांत के रूप में ‘आखिरी चट्टान तक’ की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा-वृत्तांत किस स्थान पर आधारित है?
(क) प्रयागराज
(ख) कन्याकुमारी
(ग) किन्नौर
(घ) अमृतसर
2. लेखक ‘सैंड हिल’ से आगे क्यों बढ़ा?
(क) यात्रियों से बचने के लिए
(ख) पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार और पूरा सूर्यास्त देखने के लिए
(ग) नाव पकड़ने के लिए
(घ) मंदिर जाने के लिए
3. कन्याकुमारी भारत के किस राज्य में स्थित है?
(क) केरल
(ख) कर्नाटक
(ग) तमिलनाडु
(घ) आंध्र प्रदेश
4. ‘क्षितिज’ शब्द का अर्थ है—
(क) समुद्र की गहराई
(ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखते हैं
(ग) ऊँचा पर्वत
(घ) रेत का टीला
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक थककर भी एक के बाद एक कई टीले पार करता गया।
कारण (R): वह सूर्यास्त का संपूर्ण दृश्य देखने के लिए दृढ़ संकल्पित था।
2. अभिकथन (A): ‘आखिरी चट्टान तक’ केवल कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन है।
कारण (R): यह लेखक की वास्तविक यात्रा और अनुभूतियों पर आधारित यात्रा-वृत्तांत है।
3. अभिकथन (A): समुद्र की विशालता देखकर लेखक कुछ देर अपने अस्तित्व का बोध भूल गया।
कारण (R): अथाह विस्तार के समक्ष वह विस्मय से अभिभूत हो उठा था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है?
यह मोहन राकेश द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्तांत है, जो कन्याकुमारी की यात्रा पर आधारित है।
‘आखिरी चट्टान’ किसे कहा गया है?
कन्याकुमारी में भारत के स्थल-भाग की सबसे दक्षिणी चट्टान को, जिसे ‘विवेकानंद चट्टान’ भी कहते हैं।
‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ से लेखक का क्या आशय है?
तीनों ओर फैले अथाह समुद्र की असीम व्यापकता और उसकी अपार शक्ति का बोध इन शब्दों में व्यक्त हुआ है।
लेखक सैंड हिल से आगे क्यों गया?
क्योंकि सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था; पूरा सूर्यास्त देखने के लिए वह उस ऊँचे टीले तक गया।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
