रीढ़ की हड्डी प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा

रीढ़ की हड्डी प्रश्न उत्तर में जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी का सार, उमा का चरित्र, पाठ-आधारित समाधान, मुहावरे और अभिनय व संवाददाता गतिविधियों के नमूने पढ़ें।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 6 लेखक: जगदीशचंद्र माथुर विधा: एकांकी (नाटक) स्रोत संस्करण: मार्च 2026

स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 100–119। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।

लेखक परिचय – जगदीशचंद्र माथुर

जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ और शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। वे इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए तथा बिहार के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक आदि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए आजीवन साहित्य-सृजन में सक्रिय रहे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनके एकांकी एवं नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं – भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, पहला राजा, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना। कोणार्क उनका सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक है। सन् 1978 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

1939 में रचित ‘रीढ़ की हड्डी’ विवाह के नाम पर लड़की की परख, स्त्री-शिक्षा के विरोध और सामाजिक दोहरे मानदंडों पर व्यंग्य है। रामस्वरूप अपनी बी.ए. पास बेटी उमा के लिए गोपालप्रसाद और उनके पुत्र शंकर का स्वागत करने की तैयारी करते हैं। गोपालप्रसाद बेटे की उच्च शिक्षा को जरूरी, पर बहू की उच्च शिक्षा को अनावश्यक मानते हैं। रामस्वरूप इस सोच से असहमत होते हुए भी विवाह तय कराने के लिए उमा को केवल मैट्रिक तक पढ़ी बताते हैं।

उमा से रूप, गाने-बजाने, चित्रकारी और सिलाई के बारे में पूछकर उसका मूल्यांकन किया जाता है। वह लड़की को सामान की तरह परखे जाने का विरोध करती है। वह बताती है कि शंकर पिछली फरवरी में लड़कियों के हॉस्टल के आसपास ताक-झाँक करते हुए भगाया गया था। पाठ में यह नहीं कहा गया कि वह कई भावी वधुओं को देखने गया था। उमा अपनी बी.ए. की शिक्षा और आत्मसम्मान स्वीकारती है। नाराज गोपालप्रसाद बेटे को लेकर चले जाते हैं।

उमा शंकर की ‘बैकबोन’ पर व्यंग्य करके उसके नैतिक साहस की कमी उजागर करती है। फिर वह सिसकने लगती है—उसका साहस उसकी संवेदनशीलता को मिटाता नहीं। रतन मक्खन लेकर लौटता है और परदा गिरता है। नाश्ते की छोटी चिंता और बड़े मानवीय अपमान का यह विरोध हास्य के साथ करुणा और व्यंग्य उत्पन्न करता है।

चश्मा पहने उमा अपनी गरिमा के पक्ष में बोलती है; सामने बैठे गोपालप्रसाद और शंकर सुन रहे हैं।
एकांकी से प्रेरित कल्पनात्मक दृश्य: उमा का आत्मसम्मान और स्वतंत्र विचार। पात्रों का यह मौलिक जलरंग रूपांकन है।

पात्र-परिचय

पात्रपरिचय
उमापढ़ी-लिखी (बी.ए. पास), स्वाभिमानी एवं सशक्त नायिका; नारी-चेतना की प्रतीक।
रामस्वरूपउमा के पिता; आधुनिकता का दिखावा करने वाले किंतु भीतर से रूढ़िवादी।
प्रेमाउमा की माता; स्त्री-शिक्षा को ‘जंजाल’ मानने वाली परंपरागत सोच की प्रतिनिधि।
गोपालप्रसादशंकर के पिता; दहेज, दिखावे और परंपरा के समर्थक।
शंकरगोपालप्रसाद का पुत्र; पिता की रूढ़िवादी सोच से सहमत युवक; उमा उसके अनुचित व्यवहार और नैतिक साहस की कमी की आलोचना करती है।
रतनरामस्वरूप का घरेलू सहायक।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
अधेड़आधी या ढलती उम्र का
तख्तलकड़ी की बड़ी चौकी; सिंहासन
गंदुमीगेहुएँ रंग का
डाटटेक, अटकाव
जंजालझंझट, झमेला, बखेड़ा
ठठोलीहँसी, परिहास
करीने सेढंग से, क्रम से
दकियानूसीपुराने विचारों वाला, पुरातनपंथी
तालीमशिक्षा
चौपटनष्ट, बरबाद
दस्तकदरवाजा खटखटाना
फितरतीचालबाज, प्रकृतिगत
खीस निपोरनादाँत दिखाकर बेढंगी हँसी हँसना
खासियतविशेषता, गुण
तशरीफ़आदर, सम्मान (पधारना)
मार्जिनसीमा, किनारा
बालाईऊपर का हिस्सा
तकल्लुफ़बनावट, औपचारिक शिष्टाचार
माफिकअनुकूल, अनुसार
मुखातिबसंबोधित करने वाला, बात करने वाला
निहायतअत्यधिक, बहुत ज्यादा
जायचाजन्मपत्री
अर्ज़निवेदन, प्रार्थना
अधीरधैर्यरहित, उतावला

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?

(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का

(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का

(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

उत्तर(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।जैसे रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा खड़ा रखती है, वैसे ही आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता मनुष्य के चरित्र को सशक्त बनाती है – यही शीर्षक का प्रतीकार्थ है।

2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर

(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर

(ग) विवाह और अशिक्षा पर

(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

उत्तर(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।एकांकी दहेज, दिखावे और कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग जैसी समाज की रूढ़िगत एवं अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य करती है।

3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” – यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता

(ख) अनुभव और विवेक की कमी

(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता

(घ) उदासीनता और एकाकीपन

उत्तर(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।यह व्यंग्य शंकर के नैतिक साहस के अभाव और कमजोर चरित्र की ओर संकेत करता है, जिसके लड़कियों के हॉस्टल के आसपास ताक-झाँक करने और वहाँ से भगाए जाने का प्रसंग उमा बताती है।

4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?

(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना

(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना

(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना

(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

उत्तर(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।उमा के लिए शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मबल, स्वाभिमान और स्वतंत्र रूप से सोचने-बोलने की शक्ति है।

5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।

(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।

(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

उत्तर(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।गोपालप्रसाद कम पढ़ी बहू चाहते हैं; रामस्वरूप इस विचार की आलोचना करते हुए भी बेटी की शिक्षा छिपाते हैं। दोनों व्यवहार में दिखावे और परंपरा के दबाव से मुक्त नहीं हैं।

6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

(क) औपचारिक और शुष्क

(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण

(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक

(घ) भावुक और संक्षिप्त

उत्तर(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।एकांकी के संवाद सहज, बोलचाल की भाषा में हैं और उनमें सामाजिक कुरीतियों पर तीखा व्यंग्य भी निहित है।

मेरी समझ मेरे विचार

1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।

उत्तर(क) रामस्वरूप ने उमा को कॉलेज तक पढ़ाया, पर विवाह के समय वर पक्ष के सामने उसकी शिक्षा छिपाकर उसे कम पढ़ी-लिखी दिखाना चाहते हैं।(ख) वे उमा से दिखावटी ढंग से काम (गाना सुनाना आदि) करवाने की चेष्टा करते हैं, ताकि वर पक्ष प्रभावित हो।(ग) वे वर पक्ष के विचारों को दकियानूसी कहते हैं, फिर उसके सामने सहमति जताते और बेटी की योग्यता को छिपाने की कोशिश करते हैं। पाठ में दहेज की कोई निश्चित रकम तय होने का दृश्य नहीं है।यही उनके आधुनिक दिखावे और भीतरी रूढ़िवादी सोच का अंतर्द्वंद्व है।

2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तरशंकर के संदर्भ में – शाब्दिक रूप से उसकी झुकी हुई, कमजोर रीढ़ (शारीरिक दुर्बलता) तथा प्रतीकात्मक रूप से उसमें नैतिक साहस एवं चारित्रिक दृढ़ता का अभाव।उमा के संदर्भ में – ‘रीढ़ की हड्डी’ आत्म-सम्मान, नैतिक दृढ़ता और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो उमा में भरपूर है।उमा का अंतिम व्यंग्य दोनों अर्थों को एक साथ व्यक्त करता है।

3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तरप्रेमा की यह सोच दर्शाती है कि उस समय समाज में स्त्री-शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था और उसे झंझट या व्यर्थ माना जाता था।लड़कियों को पढ़ाना आवश्यक नहीं समझा जाता था; बल्कि शिक्षित लड़की को विवाह में बाधा माना जाता था।इससे तत्कालीन स्त्री-शिक्षा की उपेक्षित एवं पिछड़ी हुई स्थिति का पता चलता है।

4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तरजैसे रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा खड़ा रखती है, वैसे ही आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता मनुष्य के चरित्र को सीधा (सशक्त) बनाए रखती है।शंकर में इसी ‘रीढ़’ (नैतिक दृढ़ता) का अभाव है, जबकि उमा में यह प्रबल है – इसीलिए लेखक ने यह सार्थक एवं व्यंग्यपूर्ण शीर्षक चुना।वैकल्पिक शीर्षक: ‘स्वाभिमानी उमा’ या ‘नारी का स्वाभिमान’ अथवा ‘सच्ची शिक्षा’ – क्योंकि ये एकांकी के मूल भाव (शिक्षित नारी के आत्म-सम्मान) को स्पष्ट दर्शाते हैं। (अपना मत कारण सहित लिखें।)

एकांकी की पड़ताल

क्रम और बिंदुपाठ से उदाहरण
1. नामरीढ़ की हड्डी
2. लेखकजगदीशचंद्र माथुर
3. पात्रउमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन
4. परिवेश/देश-कालरामस्वरूप के घर का बैठक-कमरा; 1939 में लिखी रचना का रूढ़ियों से प्रभावित सामाजिक परिवेश।
5. रंग/मंच-निर्देशआरंभ में साधारण कमरा और रामस्वरूप तथा रतन का तख्त लाना।
6. संवाद-निर्देशउमा के लिए “हल्की लेकिन मजबूत आवाज में”; इससे बोलने का ढंग स्पष्ट है।
7. समस्यालड़की को वस्तु की तरह परखना, शिक्षा में भेदभाव और विवाह की सौदेबाजी वाली दृष्टि।
8. संवादउमा अपनी बी.ए. की शिक्षा को पाप या चोरी मानने से इंकार करती है।
9. मुख्य विचारस्त्री की गरिमा, स्वतंत्र विचार और आत्मसम्मान का समर्थन।
10. परिणामपिता-पुत्र चले जाते हैं; उमा सिसकती है और रतन मक्खन लाता है। सभी सामाजिक समस्याएँ हल हो गईं—ऐसा अंत नहीं है।

रंग-निर्देश और मंचन

एक दृश्य की प्रस्तुति — तैयारी

उमा के प्रतिवाद का दृश्य चुनें। पात्र, निर्देशक और मंच-सहायता की भूमिकाएँ बाँटें। साधारण कुर्सियाँ, मेज और खाली कप पर्याप्त हैं। संवाद धीमे अभ्यास करके फिर भाव सहित बोलें। उमा की आवाज दृढ़ रहे; शंकर असहज और गोपालप्रसाद नाराज दिख सकते हैं। पर्दे/प्रकाश का संकेत तय करें। स्थान के अनुसार मंच-सज्जा बदलें और इसे अपना मंचन-रूपांतरण बताएँ; शारीरिक बनावट का मजाक न बनाएँ।

मेरी टिप्पणी

उमा के अंतिम व्यंग्य पर टिप्पणी — नमूना

उमा की “बैकबोन” वाली टिप्पणी शंकर के नैतिक साहस की कमी को उजागर करती है। ऊँची पढ़ाई के बावजूद उसका आचरण और स्त्री-शिक्षा पर विचार संकीर्ण हैं। उमा अपने मान के लिए बोलती है; इसलिए वास्तविक शिक्षा को केवल डिग्री से नहीं, विवेक और सम्मानजनक व्यवहार से जोड़ना चाहिए। यहाँ रीढ़ एक साहित्यिक प्रतीक है।

तुलना और विचार

1. लड़कों और लड़कियों के प्रति अलग दृष्टि

गोपालप्रसाद कहते हैं कि पुरुषों को पढ़ना और काबिल होना चाहिए, पर बहू अधिकतम मैट्रिक पास हो। शंकर लड़की की पढ़ाई को नौकरी न कराने के तर्क से अनावश्यक मानता है। प्रेमा उच्च शिक्षा को जंजाल कहती है। ये कथन अवसरों में असमानता दिखाते हैं। मेरी दृष्टि में शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति के विकास के लिए है; घर सँभालने और रोजगार की जिम्मेदारियाँ केवल लिंग से तय नहीं होनी चाहिए।

2. उमा का व्यक्तित्व और उसके विकास के कारण

उमा शिक्षित, स्वाभिमानी, साहसी और संवेदनशील है। वह वस्तु की तरह निरीक्षण का विरोध करती है और अपने मान की रक्षा करती है। कॉलेज की शिक्षा, अपने अनुभव और परिवार द्वारा दिए गए सीखने के अवसरों ने उसका आत्मबल बढ़ाया होगा; यह कारणों का विवेचन है, पाठ में दी गई पूरी जीवन-कथा नहीं। माता-पिता के विरोधाभासी व्यवहार को देखकर उसका स्वतंत्र चिंतन भी उभरा होगा।

एकांकी का विस्तार

1. मक्खन वाले संवाद से अंत क्यों?

जिस मक्खन की शुरुआत से चिंता थी, वह मेहमानों के जाने और उमा के रोने के बाद पहुँचता है। रतन स्थिति से अनजान है। उसकी साधारण सूचना पूरे तनाव के बीच असंगत लगती है; यही हास्य और व्यंग्य का प्रभाव पैदा करती है। उमा की चोट और परिवार की निराशा के कारण अंत करुण भी है।

2. परदा दोबारा उठे तो — कल्पित अगला दृश्य

यह मूल लेखक का अंत नहीं, विद्यार्थी का रचनात्मक विस्तार है।

प्रेमा: उमा, तुम्हारी बात पहले सुननी चाहिए थी।
रामस्वरूप: मुझे तुम्हारी शिक्षा छिपाने के बजाय उस पर गर्व करना चाहिए था।
उमा: मैं आपका सम्मान करती हूँ, पर मेरा सम्मान और मेरी इच्छा भी जरूरी है।
रतन: तो यह मक्खन रख दूँ?
प्रेमा: हाँ, और हम पहले शांत होकर बात करेंगे।

व्याकरण की बात – भाषा में मुहावरे

वाक्यों में आए मुहावरों की पहचान, अर्थ एवं नए वाक्य।

मुहावराअर्थनया वाक्य
भीगी बिल्ली बननादब्बू/भयभीत हो जानापिता की डाँट सुनते ही वह भीगी बिल्ली बन गया।
मुँह फुलानानाराज होना, रूठनाजरा-सी बात पर बच्चा मुँह फुलाकर बैठ गया।
किस मर्ज की दवा होनाकिस काम आना या किस समस्या को हल करना; प्रश्न में उलाहना भीतुम्हें हिसाब आता है; इस काम में मदद नहीं करोगे तो किस मर्ज की दवा हो?
सिर चढ़ानाअधिक लाड़ देकर बिगाड़नामाँ ने बेटे को बहुत सिर चढ़ा रखा है।
उगल देनाभेद/राज खोल देनापूछताछ में चोर ने सब कुछ उगल दिया।
काँटों में घसीटनाइस संदर्भ में प्रशंसा/उपकार की बात से संकोच में डालनासबके सामने इतना धन्यवाद देकर आप मुझे काँटों में घसीट रहे हैं।
इज्जत उतारनाअपमान करनासबके सामने किसी की इज्जत उतारना उचित नहीं।
मुँह छिपाकर भागनालज्जावश सामना न कर पानाहार के बाद वह मुँह छिपाकर भाग गया।

मेरे शब्द और संदर्भ में शब्द

पाँच नए शब्द — नमूना अभ्यास

शब्दसंदर्भ-संकेतअनुमान/अर्थ
तालीमपढ़ाई और विवाह पर चर्चाशिक्षा
दकियानूसीवर पक्ष की सोचपुराने/रूढ़ विचारों वाला
तकल्लुफ़नाश्ते की औपचारिकताऔपचारिक शिष्टाचार या बनावट
जायचाविवाह में मिलाने की चर्चाजन्मपत्री
मुखातिबकिसी से बात करते हुएसंबोधित करते हुए

अपने लिए नए शब्द चुनकर उनके पूरे वाक्य पुस्तक से लिखें। पहले अनुमान, फिर शब्दकोश का अर्थ और दोनों में अंतर लिखें। ऊपर दिए अर्थ अभ्यास का नमूना हैं।

“बाप सेर तो बेटा सवा सेर” का सकारात्मक प्रयोग

पिता कुशल चित्रकार हैं, पर बेटे ने अपनी मौलिक चित्रकला से नई पहचान बनाई—सचमुच बाप सेर तो बेटा सवा सेर! यहाँ कहावत एक से बढ़कर एक योग्यता के लिए है; पाठ में इसका प्रयोग नकारात्मक सोच की तुलना के लिए है।

आप भी संवाददाता

1. पात्रों के साक्षात्कार — भूमिका-अभिनय का नमूना

संवाददाता—उमा, आपने विरोध क्यों किया?
उमा—मुझे बिना मेरी राय पूछे वस्तु की तरह परखा जा रहा था।

संवाददाता—रामस्वरूप, शिक्षा क्यों छिपाई?
रामस्वरूप—विवाह तय कराने के दबाव में मैंने समझौता किया।

संवाददाता—गोपालप्रसाद, बेटे और बहू की शिक्षा के अलग मानदंड क्यों?
गोपालप्रसाद—मैं उच्च शिक्षा को पुरुषों का काम मानता था।
संवाददाता—यह दृष्टि समान अवसरों को सीमित करती है।

प्रेमा और शंकर से उनके विचारों पर भी प्रश्न पूछें। ये पाठ के आधार पर बनाए गए काल्पनिक उत्तर हैं, मूल संवाद या वास्तविक साक्षात्कार नहीं।

2. लाइव रिपोर्ट — काल्पनिक प्रस्तुति

“हम रामस्वरूप के घर की नाटकीय घटना का कक्षा में पुनर्निर्माण प्रस्तुत कर रहे हैं। आए हुए गोपालप्रसाद और शंकर उमा का मूल्यांकन कर रहे हैं। अब उमा अपनी शिक्षा और गरिमा के पक्ष में बोल रही है। उसने शंकर के हॉस्टल के आसपास के व्यवहार का उल्लेख किया है। पिता-पुत्र नाराज होकर निकल गए हैं। उमा दुखी है और रतन मक्खन लेकर पहुँचा है। यह घटना विवाह में समानता और सम्मान पर प्रश्न उठाती है।” इसे वास्तविक समाचार की तरह प्रस्तुत न करें।

भाषा संगम

मक्खन के नाम और मातृभाषा का वाक्य

पुस्तक में हिंदी—मक्खन, संस्कृत—नवनीतम्, मराठी—लोणी और गुजराती—माखण/नवनीत जैसे उदाहरण हैं। अपनी बोली का शब्द परिवार या शिक्षक से जाँचें। नमूना मराठी वाक्य: “लोणीवाल्याचे दुकान दूर आहे.” अपने मातृभाषा के प्रयोग को प्राथमिकता दें।

आगे पढ़ने के लिए पुस्तक में दिए एकांकी और “रीढ़ की हड्डी” के शैक्षिक वीडियो देखें। मंचन की भंगिमा, विराम और मूल संवादों की तुलना अपनी प्रस्तुति से करें।

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘रीढ़ की हड्डी’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?

उत्तरयह एक एकांकी (नाटक) है, जिसके लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं।

2. एकांकी की मुख्य नायिका कौन है और वह कितनी पढ़ी-लिखी है?

उत्तरएकांकी की मुख्य नायिका उमा है, जो बी.ए. पास (कॉलेज तक पढ़ी हुई) है।

3. इस एकांकी की रचना किस वर्ष हुई?

उत्तरइस एकांकी की रचना सन् 1939 में हुई।

लघु उत्तरीय

4. रामस्वरूप उमा की शिक्षा को क्यों छिपाना चाहते थे?

उत्तरवर पक्ष (गोपालप्रसाद) कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहता था, क्योंकि उस समय अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को विवाह में बाधा माना जाता था।इसलिए विवाह तय कराने के लिए रामस्वरूप उमा की उच्च शिक्षा छिपाकर उसे कम पढ़ी-लिखी दिखाना चाहते थे।

5. उमा के संवादों से उसके व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का पता चलता है?

उत्तरउमा स्वाभिमानी, साहसी और स्पष्टवादी है; वह अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है।वह दिखावे और अन्याय का विरोध करती है तथा सच्ची शिक्षा से प्राप्त आत्मबल का परिचय देती है। ये विशेषताएँ उसकी शिक्षा और चेतना का परिणाम हैं।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी किन सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती है? आज के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता बताइए।

उत्तरयह एकांकी दहेज-प्रथा, विवाह में दिखावे, कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग तथा स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा जैसी कुरीतियों पर प्रहार करती है।यह संदेश देती है कि नारी को शिक्षा और आत्म-सम्मान का पूरा अधिकार है।आज भी दहेज और लैंगिक भेदभाव की समस्याएँ कहीं-न-कहीं मौजूद हैं, इसलिए स्त्री-शिक्षा एवं नारी-सम्मान का यह संदेश आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. उमा किसके विरुद्ध अपना पक्ष दृढ़ता से रखती है?

(क) अपनी माँ प्रेमा के

(ख) वस्तु की तरह परखे जाने, भेदभाव और शंकर के अनुचित व्यवहार के

(ग) रतन के

(घ) अपने पिता रामस्वरूप के मित्रों के

उत्तर(ख) वस्तु की तरह परखे जाने, भेदभाव और शंकर के अनुचित व्यवहार के।

2. एकांकी के अंत में रतन क्या कहता है, जिससे परदा गिरता है?

(क) “बाबूजी, चाय!”

(ख) “बाबूजी, मक्खन!”

(ग) “बाबूजी, मेहमान आ गए!”

(घ) “बाबूजी, चलिए!”

उत्तर(ख) “बाबूजी, मक्खन!” – यह हास्य-व्यंग्यपूर्ण अंत है।

3. गोपालप्रसाद किसके पिता हैं?

(क) उमा के

(ख) रतन के

(ग) शंकर के

(घ) रामस्वरूप के

उत्तर(ग) शंकर के।

4. ‘तालीम’ शब्द का अर्थ है—

(क) शिक्षा

(ख) नौकरी

(ग) विवाह

(घ) दिखावा

उत्तर(क) शिक्षा।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): रामस्वरूप उमा की शिक्षा छिपाना चाहते थे।

कारण (R): वर पक्ष कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग कर रहा था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): ‘रीढ़ की हड्डी’ में नारी-शिक्षा को व्यर्थ बताया गया है।

कारण (R): एकांकी उमा के माध्यम से शिक्षित नारी के आत्म-सम्मान को महत्व देती है।

उत्तर(घ) A गलत है (एकांकी नारी-शिक्षा का समर्थन करती है, उसे व्यर्थ नहीं बताती), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ उमा के अंतिम व्यंग्य से सार्थक हो उठता है।

कारण (R): उमा शंकर के नैतिक साहस के अभाव की ओर संकेत करती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘रीढ़ की हड्डी’ किस विधा की रचना है?

यह जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक सामाजिक एकांकी (नाटक) है।

एकांकी का शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ क्यों रखा गया है?

यह आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है; जैसे रीढ़ शरीर को सीधा रखती है, वैसे ही आत्म-सम्मान चरित्र को सशक्त रखता है।

एकांकी किन सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य करती है?

दहेज-प्रथा, विवाह में दिखावा, कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग तथा स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा पर।

उमा का चरित्र किस प्रकार का है?

उमा स्वाभिमानी, शिक्षित, साहसी और स्पष्टवादी नायिका है, जो नारी-चेतना और आत्म-सम्मान की प्रतीक है।

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