कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 6 ‘रीढ़ की हड्डी’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 6 ‘रीढ़ की हड्डी’ (एकांकी, लेखक – जगदीशचंद्र माथुर) का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – जगदीशचंद्र माथुर
जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ और शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई। वे इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए तथा बिहार के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक आदि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए आजीवन साहित्य-सृजन में सक्रिय रहे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनके एकांकी एवं नाटकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं – भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, पहला राजा, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना। कोणार्क उनका सर्वाधिक चर्चित और मंचित नाटक है। सन् 1978 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीशचंद्र माथुर द्वारा सन् 1939 में रचित एक सामाजिक एकांकी है, जो परंपरागत विवाह-व्यवस्था और स्त्री-शिक्षा को लेकर समाज की रूढ़िगत सोच पर तीखा व्यंग्य करती है। उस समय शिक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में स्त्रियों को समान अवसर नहीं मिलते थे।
बाबू रामस्वरूप अपनी पढ़ी-लिखी (बी.ए. पास) बेटी उमा के विवाह के लिए गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर को घर बुलाते हैं। वर पक्ष कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहता है, इसलिए रामस्वरूप उमा की शिक्षा छिपाकर उसे कम पढ़ी दिखाना चाहते हैं – यद्यपि वे समाज में आधुनिक होने का दिखावा करते हैं, उनके विचार रूढ़िवादी हैं।
गोपालप्रसाद दहेज, दिखावे और परंपरा के समर्थक हैं। बातचीत के दौरान उमा को सामने बुलाया जाता है। पता चलता है कि शंकर पहले भी कई लड़कियों को ‘देखने’ जा चुका है और एक बार छिपकर भाग गया था; वह शारीरिक एवं नैतिक रूप से दुर्बल है। उमा आत्म-सम्मान के साथ अपने विचार खुलकर रखती है और अंत में शंकर पर तीखा व्यंग्य करती है – “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं।”
एकांकी का अंत रतन के “बाबूजी, मक्खन…” कहने और परदा गिरने के साथ हास्य-व्यंग्यपूर्ण ढंग से होता है। यह एकांकी सच्ची शिक्षा, नारी के आत्म-सम्मान तथा दहेज एवं स्त्री-शिक्षा संबंधी कुरीतियों के विरोध का सशक्त संदेश देती है। यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है।
पात्र-परिचय
| पात्र | परिचय |
|---|---|
| उमा | पढ़ी-लिखी (बी.ए. पास), स्वाभिमानी एवं सशक्त नायिका; नारी-चेतना की प्रतीक। |
| रामस्वरूप | उमा के पिता; आधुनिकता का दिखावा करने वाले किंतु भीतर से रूढ़िवादी। |
| प्रेमा | उमा की माता; स्त्री-शिक्षा को ‘जंजाल’ मानने वाली परंपरागत सोच की प्रतिनिधि। |
| गोपालप्रसाद | शंकर के पिता; दहेज, दिखावे और परंपरा के समर्थक। |
| शंकर | गोपालप्रसाद का पुत्र; शारीरिक एवं नैतिक रूप से दुर्बल वर। |
| रतन | रामस्वरूप के घर का नौकर। |
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अधेड़ | आधी या ढलती उम्र का |
| तख्त | लकड़ी की बड़ी चौकी; सिंहासन |
| गंदुमी | गेहुएँ रंग का |
| डाट | टेक, अटकाव |
| जंजाल | झंझट, झमेला, बखेड़ा |
| ठठोली | हँसी, परिहास |
| करीने से | ढंग से, क्रम से |
| दकियानूसी | पुराने विचारों वाला, पुरातनपंथी |
| तालीम | शिक्षा |
| चौपट | नष्ट, बरबाद |
| दस्तक | दरवाजा खटखटाना |
| फितरती | चालबाज, प्रकृतिगत |
| खीस निपोरना | दाँत दिखाकर बेढंगी हँसी हँसना |
| खासियत | विशेषता, गुण |
| तशरीफ़ | आदर, सम्मान (पधारना) |
| मार्जिन | सीमा, किनारा |
| बालाई | ऊपर का हिस्सा |
| तकल्लुफ़ | बनावट, औपचारिक शिष्टाचार |
| माफिक | अनुकूल, अनुसार |
| मुखातिब | संबोधित करने वाला, बात करने वाला |
| निहायत | अत्यधिक, बहुत ज्यादा |
| जायचा | जन्मपत्री |
| अर्ज़ | निवेदन, प्रार्थना |
| अधीर | धैर्यरहित, उतावला |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” – यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त
मेरी समझ मेरे विचार
1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, तो वह क्या होगा और क्यों?
एकांकी की पड़ताल
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
| बिंदु | उदाहरण |
|---|---|
| एकांकी का नाम | रीढ़ की हड्डी |
| लेखक का नाम | जगदीशचंद्र माथुर |
| पात्र | उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, गोपालप्रसाद, शंकर, रतन |
| परिवेश/देश-काल | सन् 1939 के आसपास का भारतीय मध्यवर्गीय समाज; रामस्वरूप का घर |
| रंग-निर्देश/मंच-निर्देश | “मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा… एक तख्त को पकड़े हुए… कमरे में आते हैं।” |
| संवाद | “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” |
| समस्या | स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा, दहेज एवं कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग जैसी कुरीतियाँ |
| मुख्य विचार | नारी का आत्म-सम्मान और सच्ची शिक्षा का महत्व; सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य |
| समाधान/परिणाम | उमा स्वाभिमान से अपना पक्ष रखती है और शंकर पर व्यंग्य करती है; विवाह का प्रस्ताव टूट जाता है |
व्याकरण की बात – भाषा में मुहावरे
वाक्यों में आए मुहावरों की पहचान, अर्थ एवं नए वाक्य।
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| भीगी बिल्ली बनना | दब्बू/भयभीत हो जाना | पिता की डाँट सुनते ही वह भीगी बिल्ली बन गया। |
| मुँह फुलाना | नाराज होना, रूठना | जरा-सी बात पर बच्चा मुँह फुलाकर बैठ गया। |
| किस मर्ज की दवा होना | किसी काम का न होना, निकम्मा होना | जो परिश्रम न करे, वह किस मर्ज की दवा है! |
| सिर चढ़ाना | अधिक लाड़ देकर बिगाड़ना | माँ ने बेटे को बहुत सिर चढ़ा रखा है। |
| उगल देना | भेद/राज खोल देना | पूछताछ में चोर ने सब कुछ उगल दिया। |
| काँटों में घसीटना | संकट या मुश्किल में डालना | झूठा आरोप लगाकर उसने मुझे काँटों में घसीट दिया। |
| इज्जत उतारना | अपमान करना | सबके सामने किसी की इज्जत उतारना उचित नहीं। |
| मुँह छिपाकर भागना | लज्जावश सामना न कर पाना | हार के बाद वह मुँह छिपाकर भाग गया। |
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘रीढ़ की हड्डी’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?
2. एकांकी की मुख्य नायिका कौन है और वह कितनी पढ़ी-लिखी है?
3. इस एकांकी की रचना किस वर्ष हुई?
लघु उत्तरीय
4. रामस्वरूप उमा की शिक्षा को क्यों छिपाना चाहते थे?
5. उमा के संवादों से उसके व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का पता चलता है?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी किन सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती है? आज के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता बताइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. उमा किसके विरुद्ध अपना पक्ष दृढ़ता से रखती है?
(क) अपनी माँ प्रेमा के
(ख) दहेज एवं दिखावे की कुरीति और शंकर के
(ग) रतन के
(घ) अपने पिता रामस्वरूप के मित्रों के
2. एकांकी के अंत में रतन क्या कहता है, जिससे परदा गिरता है?
(क) “बाबूजी, चाय!”
(ख) “बाबूजी, मक्खन!”
(ग) “बाबूजी, मेहमान आ गए!”
(घ) “बाबूजी, चलिए!”
3. गोपालप्रसाद किसके पिता हैं?
(क) उमा के
(ख) रतन के
(ग) शंकर के
(घ) रामस्वरूप के
4. ‘तालीम’ शब्द का अर्थ है—
(क) शिक्षा
(ख) नौकरी
(ग) विवाह
(घ) दिखावा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): रामस्वरूप उमा की शिक्षा छिपाना चाहते थे।
कारण (R): वर पक्ष कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग कर रहा था।
2. अभिकथन (A): ‘रीढ़ की हड्डी’ में नारी-शिक्षा को व्यर्थ बताया गया है।
कारण (R): एकांकी उमा के माध्यम से शिक्षित नारी के आत्म-सम्मान को महत्व देती है।
3. अभिकथन (A): शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ उमा के अंतिम व्यंग्य से सार्थक हो उठता है।
कारण (R): उमा शंकर के नैतिक साहस के अभाव की ओर संकेत करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘रीढ़ की हड्डी’ किस विधा की रचना है?
यह जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित एक सामाजिक एकांकी (नाटक) है।
एकांकी का शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ क्यों रखा गया है?
यह आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है; जैसे रीढ़ शरीर को सीधा रखती है, वैसे ही आत्म-सम्मान चरित्र को सशक्त रखता है।
एकांकी किन सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य करती है?
दहेज-प्रथा, विवाह में दिखावा, कम पढ़ी-लिखी लड़की की माँग तथा स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा पर।
उमा का चरित्र किस प्रकार का है?
उमा स्वाभिमानी, शिक्षित, साहसी और स्पष्टवादी नायिका है, जो नारी-चेतना और आत्म-सम्मान की प्रतीक है।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
