आखिरी चट्टान तक प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
आखिरी चट्टान तक प्रश्न उत्तर में मोहन राकेश के यात्रा-वृत्तांत का सार, पाठ-आधारित उत्तर, शब्दार्थ, व्याकरण तथा खोज और लेखन गतिविधियों के नमूने पढ़ें।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 84–99। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- लेखक परिचय – मोहन राकेश
- पाठ का सार
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व
- यात्रा और खोज
- मेरे देश की धरती
- हस्तशिल्प कौशल
- मिलकर चलें
- प्रकृति, अनुभव और चर्चा
- व्याकरण की बात
- भाषा संगम और पर्यटन विवरणिका
- आगे पढ़ें
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लेखक परिचय – मोहन राकेश
हिंदी साहित्य के बहुमुखी रचनाकार मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत आदि अनेक विधाओं में साहित्य-सृजन किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (नाटक), अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल (उपन्यास), क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल (कहानी-संग्रह), मोहन राकेश की डायरी तथा आखिरी चट्टान तक (यात्रा-वृत्तांत)। आषाढ़ का एक दिन नाटक के लिए उन्हें ‘संगीत नाटक अकादमी’ पुरस्कार मिला। उन्होंने कुछ समय सारिका पत्रिका का संपादन भी किया। उनके लेखन में भावों की गहराई के साथ आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म अंकन मिलता है। सन् 1972 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
मोहन राकेश कन्याकुमारी में समुद्र से उभरी एक चट्टान पर खड़े होकर विवेकानंद चट्टान और तीन दिशाओं में फैले जल को देखते हैं। प्रकृति की व्यापकता में वे स्वयं को भूल जाते हैं; बढ़ता पानी देखकर सुरक्षित किनारे लौटते हैं। सूर्यास्त देखने वे सैंड हिल से आगे कई टीले पार करते हैं। थकान के बाद खुला पश्चिमी क्षितिज मिलना उन्हें अपने प्रयास की सफलता का सुख देता है।
सूर्यास्त के बदलते रंगों के बाद अँधेरा उन्हें वापसी की चिंता में डालता है। वे टीलों में भटकने से बचने के लिए नीचे तट पर उतरते हैं। वहाँ की अनोखे रंगों वाली रेत उन्हें फिर रोक लेती है। बढ़ती लहरों से तट संकरा होने लगता है; घबराकर चलते हुए वे एक चट्टान से टकराते हैं और बाँहों पर हल्की खरोंच आती है। चट्टान पर चढ़ने के बाद दूसरी तरफ खुला तट, लोग और सड़क का रास्ता देखकर राहत मिलती है।
अगले सूर्योदय के समय लेखक, तीन स्थानीय युवक और चार मल्लाह विवेकानंद चट्टान पर हैं। एक स्नातक युवक शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी और छोटे-मोटे कामों की विवशता बताता है। शंख-मालाएँ बेचती युवतियाँ, सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु और सरकारी मेहमान भी दिखाई देते हैं। वृत्तांत प्रकृति के सौंदर्य के साथ सामाजिक विषमता तथा लेखक के विस्मय, डर और आत्मानुभूति को सामने लाता है। पाठ के जनसंख्या और बेरोजगारी के आँकड़े उस समय के युवक के कथन हैं, आज के आँकड़े नहीं।

शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्याह | काला, श्याम |
| चट्टान | शिला, बड़ा पत्थर |
| समाधिस्थ | समाधि में स्थित, ध्यानमग्न |
| चेतना | होश, बुद्धि-विवेक, सावधानी |
| क्षितिज | जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखते हैं; दृष्टि-सीमा |
| सिहरन | कंपन, सिहरने की क्रिया |
| पृष्ठभूमि | पीछे की भूमि या दृश्य; पहले की बातें |
| झुरमुट | पास-पास उगे पेड़ों/झाड़ियों का समूह |
| बीहड़ | ऊबड़-खाबड़, विकट |
| मद्धिम | मध्यम, मंद, धीमा |
| महुआ | एक प्रसिद्ध पेड़ जिसके फूल-फल खाने तथा लकड़ी काम आती है |
| सीपियाँ | शंख-घोंघे की जाति का जलचर; जिसके खोल में मोती बनता है |
| दार्शनिक | दर्शनशास्त्र का जानकार, तत्ववेत्ता |
| ओट | आड़, रोक, परदा |
| अर्घ्य | पूजा में देने योग्य जल/वस्तु |
| बाइनाक्युलर | दूरबीन, द्विनेत्री |
| सैंड हिल | बालू का टीला |
| सुरमई | हल्का नीला, सुरमे के रंग का |
| सिर धुनना | शोक/पश्चात्ताप में सिर पीटना, पछताना |
| बे-लाग | खरा, दो-टूक |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पच्छिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पच्छिमी क्षितिज का
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
मेरी समझ मेरे विचार
1. लेखक सैंड हिल से आगे क्यों बढ़ा?
2. स्थानीय लोगों के बारे में क्या बताया गया है?
3. प्रयत्न की सार्थकता का अर्थ क्या है?
4. कौन-सा अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था?
5. दृढ़ता दिखाने वाले दो अंश चुनिए।
- “टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था।”
- “हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है”।
पहला शारीरिक थकान पर मन की दृढ़ता और दूसरा लगातार आगे बढ़ने की आशा बताता है। पुस्तक में इन अंशों के आगे-पीछे का संदर्भ भी पढ़ें।
यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व
‘आखिरी चट्टान तक’ में यात्रा-वृत्तांत के विभिन्न तत्व इस प्रकार दिखाई देते हैं—
| तत्व | पाठ से उदाहरण |
|---|---|
| दृश्य-वर्णन | समुद्र, चट्टानें, बलखाती लहरें, रेत के टीले एवं रंग-बिरंगे आकाश का सजीव चित्रण। |
| आत्मानुभूति व भावनाएँ | विस्मय, रोमांच, भय तथा अपने अस्तित्व का बोध; प्रकृति से संवाद। |
| सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य | विवेकानंद चट्टान, स्थानीय लोग व नवयुवक, मंदिर एवं धार्मिक परंपराएँ। |
| जीवन-दर्शन | ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’; आत्म-चेतना तथा क्षणभंगुरता का बोध। |
| शैलीगत विशेषताएँ | सजीव, प्रवाहपूर्ण भाषा; दृश्यात्मकता; रूपक, उपमा एवं रंगों का भावात्मक प्रयोग। |
| रोमांच व संघर्ष | लहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय और सुरक्षित लौटने की चिंता। |
अपनी यात्रा में छह तत्व पहचानिए — नमूना
किसी झील की यात्रा में जल और पेड़ों का वर्णन दृश्य-वर्णन होगा; शांति और उत्साह आत्मानुभूति; स्थानीय लोगों का जीवन सांस्कृतिक पक्ष; जल बचाने का विचार जीवन-दर्शन; रंगों और उपमाओं का प्रयोग शैली; अचानक वर्षा में सुरक्षित आश्रय खोजना चुनौती। अपने वास्तविक अनुभव से उदाहरण बदलें।
यात्रा और खोज
पुस्तक का दिया उदाहरण: किन्नर देश में — किन्नौर, हिमाचल प्रदेश — राहुल सांकृत्यायन। इस पाठ का उदाहरण जोड़ सकते हैं: आखिरी चट्टान तक — कन्याकुमारी — मोहन राकेश। आगे पढ़ने के अंश का उदाहरण: प्रयाग : 1976 — प्रयाग — निर्मल वर्मा। अन्य रचनाओं के लिए पुस्तकालय में शीर्षक-पृष्ठ से लेखक और यात्रा-स्थल जाँचकर तालिका पूरी करें।
मेरे देश की धरती
1. समुद्री तट वाले अन्य राज्य और मानचित्र
2. पसंद के पर्यटन स्थलों की सूची — नमूना
| स्थल | राज्य | क्षेत्र | जलवायु | सामान्य अनुकूल समय |
|---|---|---|---|---|
| कन्याकुमारी | तमिलनाडु | समुद्री | उष्ण व आर्द्र | अक्टूबर–मार्च |
| जयपुर | राजस्थान | मैदानी/अर्धशुष्क | गर्म ग्रीष्म, अपेक्षाकृत ठंडी सर्दी | अक्टूबर–मार्च |
| शिमला | हिमाचल प्रदेश | पर्वतीय | ठंडी/समशीतोष्ण | मार्च–जून |
यह अभ्यास का नमूना है। वास्तविक यात्रा से पहले मौसम, स्थानीय चेतावनी और पहुँच की स्थिति जाँचें।
3. अपने स्थान से कन्याकुमारी की तुलना
4. भारत का दक्षिणतम बिंदु
5. विवेकानंद चट्टान के आसपास क्या विस्तार हुआ?
हस्तशिल्प कौशल
1. स्थानीय शिल्पकार से बातचीत की रूपरेखा
2. डिजिटल खरीददारी कैसे सहायक है?
3. सरकारी प्रयासों का उदाहरण
मिलकर चलें
1–2. सुगम यात्रा की चुनौतियाँ और उपाय
3–4. शिक्षक और साथियों की राय
प्रकृति, अनुभव और चर्चा
प्रकृति की ओर: सूर्योदय–सूर्यास्त तुलना — नमूना
अनुभव की साझेदारी: लघु यात्रा-संस्मरण — नमूना
चर्चा-परिचर्चा के तीन बिंदु
- यात्राएँ नई भाषा, भोजन, जीवन-पद्धति और प्रकृति से परिचय कराती हैं; सम्मानपूर्वक बातचीत और ध्यान से देखना अनुभव को समृद्ध करता है।
- अचानक चुनौती में संयम, स्थिति का आकलन, समय पर सहायता और सुरक्षित विकल्प जरूरी हैं। रोमांच के लिए चेतावनियों की अनदेखी न करें।
- अपना अनुभव हो तो घटना—निर्णय—परिणाम—सीख के क्रम में बताएँ; अनुभव न हो तो स्पष्ट रूप से कल्पित स्थिति पर चर्चा करें।
व्याकरण की बात
क्रिया-विशेषण की पहचान
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द ‘क्रिया-विशेषण’ कहलाते हैं।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई गई |
|---|---|---|
| बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। | कटती हुई | ‘आती थीं’ (रीतिवाचक) |
| यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। | उस दिशा में | ‘जा रही थीं’ (स्थानवाचक) |
| मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। | देर तक | ‘देखता रहा’ (कालवाचक) |
आओ नए वाक्य बनाएँ (अर्थ एवं प्रयोग)
| शब्द | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| क्षितिज | जहाँ धरती-आकाश मिलते दिखते हैं | सूर्य धीरे-धीरे क्षितिज पर अस्त हो रहा था। |
| झुरमुट | पेड़ों/झाड़ियों का घना समूह | चिड़ियाँ नारियल के झुरमुट में जा छिपीं। |
| ढलान | नीचे की ओर झुका भाग | बच्चे रेत की ढलान पर फिसलते रहे। |
| शृंखला | कड़ियों की लड़ी, सिलसिला | दूर तक पहाड़ियों की एक लंबी शृंखला फैली थी। |
| बीहड़ | ऊबड़-खाबड़, विकट | बीहड़ रास्ते पर चलना बहुत कठिन था। |
भाषा संगम और पर्यटन विवरणिका
1. भाषा न समझने वाले यात्री की सहायता
2. पधारो म्हारे देश: विवरणिका — प्रारूप
नाव के विभिन्न नाम और मातृभाषा
आगे पढ़ें
निर्मल वर्मा के ‘प्रयाग : 1976’ अंश में भोर, पुलिस की सीटी, यात्रियों की आवाजें और चाँद का बिंब पहचानें। मोहन राकेश के समुद्री अनुभव से उसकी संवेदनात्मक भाषा की तुलना करें। पुस्तकालय में पूरा वृत्तांत पढ़ें। स्वामी विवेकानंद पर शोध में जन्मदिवस 12 जनवरी, युवाओं के प्रति संदेश और सामाजिक कार्यों को अलग शीर्षकों में लिखें; स्रोत और पढ़ने की तारीख दें। अपनी बनाई जानकारी को मूल पाठ का कथन न बनाएँ।
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?
2. कन्याकुमारी किन तीन जलराशियों के संगम-स्थल पर स्थित है?
3. कन्याकुमारी की प्रसिद्ध चट्टान को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
लघु उत्तरीय
4. लौटते समय लेखक के मन में किस प्रकार की चिंता और भय उत्पन्न हुआ?
5. ‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ – इस अनुभूति का आशय स्पष्ट कीजिए।
दीर्घ उत्तरीय
6. यात्रा-वृत्तांत के रूप में ‘आखिरी चट्टान तक’ की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘आखिरी चट्टान तक’ यात्रा-वृत्तांत किस स्थान पर आधारित है?
(क) प्रयागराज
(ख) कन्याकुमारी
(ग) किन्नौर
(घ) अमृतसर
2. लेखक ‘सैंड हिल’ से आगे क्यों बढ़ा?
(क) यात्रियों से बचने के लिए
(ख) पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार और पूरा सूर्यास्त देखने के लिए
(ग) नाव पकड़ने के लिए
(घ) मंदिर जाने के लिए
3. कन्याकुमारी भारत के किस राज्य में स्थित है?
(क) केरल
(ख) कर्नाटक
(ग) तमिलनाडु
(घ) आंध्र प्रदेश
4. ‘क्षितिज’ शब्द का अर्थ है—
(क) समुद्र की गहराई
(ख) जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखते हैं
(ग) ऊँचा पर्वत
(घ) रेत का टीला
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक थककर भी एक के बाद एक कई टीले पार करता गया।
कारण (R): वह सूर्यास्त का संपूर्ण दृश्य देखने के लिए दृढ़ संकल्पित था।
2. अभिकथन (A): ‘आखिरी चट्टान तक’ केवल कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन है।
कारण (R): यह लेखक की वास्तविक यात्रा और अनुभूतियों पर आधारित यात्रा-वृत्तांत है।
3. अभिकथन (A): समुद्र की विशालता देखकर लेखक कुछ देर अपने अस्तित्व का बोध भूल गया।
कारण (R): अथाह विस्तार के समक्ष वह विस्मय से अभिभूत हो उठा था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘आखिरी चट्टान तक’ किस विधा की रचना है?
यह मोहन राकेश द्वारा रचित एक यात्रा-वृत्तांत है, जो कन्याकुमारी की यात्रा पर आधारित है।
‘आखिरी चट्टान’ किसे कहा गया है?
कन्याकुमारी में भारत के स्थल-भाग की सबसे दक्षिणी चट्टान को, जिसे ‘विवेकानंद चट्टान’ भी कहते हैं।
‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ से लेखक का क्या आशय है?
तीनों ओर फैले अथाह समुद्र की असीम व्यापकता और उसकी अपार शक्ति का बोध इन शब्दों में व्यक्त हुआ है।
लेखक सैंड हिल से आगे क्यों गया?
क्योंकि सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था; पूरा सूर्यास्त देखने के लिए वह उस ऊँचे टीले तक गया।
