कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 7 ‘मैं और मेरा देश’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 7 ‘मैं और मेरा देश’ (निबंध, लेखक – कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’) का पूरा समाधान देता है।

कक्षा: 9 विषय: हिंदी पुस्तक: गंगा (गद्य खंड) अध्याय: 7 लेखक: कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ विधा: निबंध (प्रश्नोत्तर शैली) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’

हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था; उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया। स्वतंत्रता-संग्राम और सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह हैं – दीप जले शंख बजे, जिंदगी मुसकराई, बाजे पायलिया के घुँघरू, क्षण बोले कण मुसकाए, माटी हो गई सोना, आकाश के तारे धरती के फूल आदि, जो उनके मानवतावादी दृष्टिकोण एवं जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘मैं और मेरा देश’ कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का एक विचारप्रधान निबंध है, जो व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करता है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की पूर्णता केवल उसकी निजता में नहीं, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र की पहचान से भी जुड़ी होती है। व्यक्ति का हर कार्य उसके साथ-साथ उसके देश की छवि से भी जुड़ा रहता है।

निबंध प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है। लेखक स्वामी रामतीर्थ और जापान के एक युवक का प्रसंग सुनाता है – युवक ने फल बेचने के बदले धन नहीं, बल्कि यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश लौटकर जापान की प्रशंसा के दो शब्द कहें। यह प्रसंग सच्ची देशभक्ति और राष्ट्र-गौरव की भावना को दर्शाता है।

लेखक बताता है कि पराधीनता के दिनों को ‘दीन’ इसलिए कहा गया, क्योंकि उस समय लोगों के आत्म-सम्मान और गौरव का दमन होता था। साधन-संपन्न होकर भी मनुष्य गौरव का अनुभव नहीं कर सकता यदि उसका देश परतंत्र हो। इस प्रकार देश का सम्मान और नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं – यही वह ‘गाँठ’ है जो नागरिक और देश को बाँधती है।

निबंध में नागरिक के अधिकार एवं कर्तव्य, निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया का महत्व तथा योग्य नेतृत्व पर भी विचार किया गया है। लेखक बल देता है कि हर नागरिक देश के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है, यदि वह देश के ‘शक्तिबोध’ और ‘सौंदर्यबोध’ को हानि न पहुँचाकर उन्हें सशक्त करे – जैसे स्वच्छता बनाए रखना, सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता की रक्षा करना और ठीक व्यक्ति को मत देना।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
संचितइकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ
मानसमन, चित्त; मन से उत्पन्न
तेजस्वीतेजवाला, प्रतापी, प्रभावशाली
ठसकशान, ऐंठ, गर्व का बनावटीपन
धनिकधनवान, धनी
रसदअनाज, खाने का सामान, राशन
दाद देनान्यायोचित प्रशंसा करना
साक्षीगवाह, गवाही
लांछितदोषयुक्त, कलंकित
हँडियामिट्टी का एक बर्तन
सुतलीसन/पटसन के रेशों से बनी डोरी
चौपालगाँव की खुली बैठक/चबूतरा जहाँ लोग एकत्र होते हैं
सघनघना, ठोस
तरेड़दरार
ज़ीनासीढ़ी, सोपान
अपूर्वजो पहले न हुआ हो, अनोखा
शक्तिबोधशक्ति का बोध/भाव
सौंदर्यबोधसौंदर्य की समझ या अनुभूति

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।

1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई” – इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?

(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि

(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति

(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार

(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

उत्तर(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।लेखक स्वयं को पूर्ण (आनंद से भरा) मानता था, पर एक प्रश्न ने उसकी इसी पूर्णता की भावना पर चोट कर दी – यही ‘दरार’ का आशय है।

2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?

(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का

(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का

(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का

(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

उत्तर(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।लेखक के अनुसार ऐसे प्रश्न ‘बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर’ देते हैं, इसलिए उन्हें उत्तर देने में आनंद आता है।

3. “…पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए” – पराधीनता के दिनों को ‘दीन’ कहा गया क्योंकि पराधीन भारत में—

(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।

(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।

(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।परतंत्रता में व्यक्ति और राष्ट्र के स्वाभिमान एवं गौरव का हनन होता था, इसीलिए उन दिनों को ‘दीन’ कहा गया।

4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—

(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।

(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।

(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।देश की पराधीनता व्यक्ति के गौरव को छीन लेती है; अतः परतंत्र देश का नागरिक साधन-संपन्न होकर भी सच्चा गौरव अनुभव नहीं कर सकता।

5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है” – इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?

(क) देश और नागरिक

(ख) देश और संविधान

(ग) देश और विदेश

(घ) व्यवसाय और आजीविका

उत्तर(क) देश और नागरिक।यह ‘गाँठ’ देश और नागरिक के अटूट, अविभाज्य संबंध को व्यक्त करती है।

6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?

(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था

(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व

(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध

(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

उत्तर(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।पूरा निबंध इसी मूल भाव को विकसित करता है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तरजापान के युवक ने फल बेचने के बदले धन या कोई वस्तु नहीं माँगी।उसने केवल यह माँगा कि स्वामी रामतीर्थ अपने देश लौटकर जापान की अच्छाई के दो शब्द कहें।युवक की यह देशभक्ति और अपने राष्ट्र के सम्मान के प्रति गहरी भावना देखकर स्वामी जी मुग्ध हो गए।

2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है?

उत्तरयुवक ने फलों के मूल्य के रूप में यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश में जाकर जापान की प्रशंसा के दो शब्द कहें।इससे युवक एक सच्चे देशभक्त, स्वाभिमानी और अपने राष्ट्र के गौरव को धन से भी अधिक महत्व देने वाले व्यक्ति के रूप में उभरता है।

3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरव्यक्ति की पहचान उसके देश से जुड़ी होती है – विदेश में व्यक्ति को उसके देश के नाम से जाना जाता है।व्यक्ति का अच्छा या बुरा कार्य उसके देश की छवि को प्रभावित करता है, और देश का गौरव या हीनता व्यक्ति पर असर डालती है।उदाहरण – कोई खिलाड़ी ओलंपिक जीतता है तो पूरे देश का सम्मान बढ़ता है; इसके विपरीत कोई नागरिक विदेश में गलत आचरण करे तो देश बदनाम होता है। इसीलिए व्यक्ति और देश अभिन्न हैं।

मेरे अनुभव मेरे विचार

1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है” – इस पंक्ति का भाव उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरव्यक्ति और देश परस्पर जुड़े हैं – दोनों का गौरव और हीनता एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।उदाहरण – किसी खिलाड़ी या वैज्ञानिक की उपलब्धि से पूरे देश का गौरव बढ़ता है (व्यक्ति का गौरव देश को मिलता है)।और जब देश समृद्ध एवं सम्मानित हो, तो उसके नागरिक को विदेश में आदर मिलता है (देश का गौरव व्यक्ति को मिलता है)। इसी प्रकार हीनता भी दोनों को प्रभावित करती है।

2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”

उत्तर(क) दैनिक सहयोग: प्रातः से रात्रि तक मैं दूधवाले, सब्जीवाले, माता-पिता, शिक्षक, सहपाठियों और वाहन-चालकों आदि का सहयोग लेता हूँ; बदले में घर के कामों में सहायता, सहपाठियों को पढ़ाई में मदद और छोटों का मार्गदर्शन करके सहयोग देता हूँ।(ख) ‘बहुतों’ में सम्मिलित: किसान, मजदूर, दुकानदार, सफाईकर्मी, डॉक्टर, शिक्षक, वाहन-चालक आदि।(ग) रचनाकार: उसे भी भोजन, वस्त्र, पुस्तकें आदि के लिए अनेक लोगों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह अपने लेखन व विचारों से समाज को दिशा देकर सहयोग देता होगा।

3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”

उत्तर(क) देश के प्रति दायित्व: ईमानदारी से कर्तव्यपालन, कानून का पालन, स्वच्छता, पर्यावरण-रक्षा, करों का भुगतान, मतदान तथा आपसी एकता बनाए रखना।(ख) पशु-पक्षियों के संघर्ष: वे भोजन, सुरक्षा और जीवित रहने के लिए निरंतर संघर्ष करते हैं – जैसे ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा-मोती; यह जीवन-संघर्ष का प्रतीक है।(ग) जीवन ‘युद्ध’ क्यों: क्योंकि इसमें निरंतर कठिनाइयों से जूझना और कर्तव्य निभाना पड़ता है; केवल लड़ना नहीं, बल्कि रचना, सहयोग और निर्माण भी इसका भाग है।(घ) जीवन बेहतर बनाने वाले: किसान, डॉक्टर, शिक्षक, सफाईकर्मी, सैनिक, अभियंता आदि; हम उनका आदर करें, सहयोग दें और उनके कार्य को महत्व दें।

4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” (क) पास-पड़ोस के लोगों में कैसे संबंध रहे होंगे? (ख) वर्तमान में ऐसे संबंधों में क्या परिवर्तन आए हैं और क्यों?

उत्तर(क) पहले पड़ोसियों में आत्मीयता, प्रेम, सहयोग और अपनापन था; वे एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देते और बच्चों को अपने जैसा दुलार देते थे।(ख) आज व्यस्तता, शहरीकरण, फ्लैट-संस्कृति, तकनीक/मोबाइल और एकाकी जीवनशैली के कारण पड़ोसियों के बीच दूरी बढ़ गई है और मेल-जोल कम हो गया है।

5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी क्या-क्या करते हैं?

उत्तरहम कूड़ा कूड़ेदान में ही डालते हैं और इधर-उधर गंदगी नहीं फैलाते।सार्वजनिक स्थलों, स्मारकों एवं दीवारों पर कुछ लिखते या खुरचते नहीं; स्वच्छता-अभियान में भाग लेते हैं और पौधे लगाते हैं।साथ ही दूसरों को भी स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए जागरूक करते हैं।

6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें?

उत्तरकरें – कानून और नियमों का पालन, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान, स्वच्छता, ईमानदारी, परिश्रम तथा आपसी एकता एवं भाईचारा।न करें – भ्रष्टाचार, गंदगी फैलाना, राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान, सांप्रदायिक भेदभाव तथा ऐसा कोई आचरण जिससे देश की छवि धूमिल हो।

मेरे प्रश्न (दी गई सामग्री से प्रश्न बनाइए)

उत्तर (संभावित प्रश्न)1. क्या केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं?2. नागरिक के किसी गलत कार्य का देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?3. देश की सुरक्षा और संपन्नता में किन-किन नागरिकों का योगदान होता है?

व्याकरण की बात

संदर्भ में शब्द (एक शब्द – अनेक अर्थ)

उत्तरदरार – (i) दीवार में दरार पड़ गई (चटक/फाँक)। (ii) उनके संबंधों में दरार पड़ गई (मनमुटाव)।गाँठ – (i) धागे के सिरे पर गाँठ बाँधना (गिरह)। (ii) नागरिक और देश को बाँधने वाली गाँठ (संबंध)।पानी – (i) प्यास लगने पर पानी पीना (जल)। (ii) झूठ पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया (लज्जित)। (iii) उसका तो पानी ही उतर गया (मान/प्रतिष्ठा)।

मिलते-जुलते भाव वाले एवं पुनरुक्त शब्द-युग्म

उत्तरमिलते-जुलते अर्थ वाले: ममता-दुलार, भरा-पूरा, सुख-चैन, मान-सम्मान।पुनरुक्त (एक ही शब्द दोहराना): धीरे-धीरे, साफ-साफ, बार-बार, पानी-पानी।

उपसर्ग एवं प्रत्यय

शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णतापूर्णता
अलौकिकलोकइक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमान

अतिरिक्त प्रश्न

अति लघु उत्तरीय

1. ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के लेखक कौन हैं?

उत्तरइस निबंध के लेखक कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हैं।

2. निबंध में किस स्वतंत्रता सेनानी का उल्लेख किया गया है?

उत्तरनिबंध में स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय का उल्लेख किया गया है।

3. लेखक के अनुसार देश की उच्चता और हीनता तोलने की कसौटी क्या है?

उत्तरलेखक के अनुसार इसकी कसौटी निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया है – अर्थात् नागरिक ‘ठीक मनुष्य’ को अपना मत दें।

लघु उत्तरीय

4. निबंध की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?

उत्तरयह निबंध मुख्यतः प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है – पहले प्रश्न और फिर उसका उत्तर।इस शैली के कारण निबंध रोचक, सजीव और विचारोत्तेजक बन गया है तथा पाठक स्वयं को संवाद में सम्मिलित अनुभव करता है।

5. लेखक के अनुसार एक नागरिक देश के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है?

उत्तरयदि नागरिक देश के ‘शक्तिबोध’ और ‘सौंदर्यबोध’ को हानि न पहुँचाकर उन्हें सशक्त करे, तो वह देश के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है।जैसे – स्वच्छता बनाए रखना, सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता की रक्षा करना, कर्तव्य का पालन और योग्य व्यक्ति को मत देना।

दीर्घ उत्तरीय

6. ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?

उत्तरलेखक यह संदेश देता है कि व्यक्ति और देश अभिन्न हैं – दोनों का सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है।प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह ऐसा कोई कार्य न करे जिससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचे।हर नागरिक अपने स्तर पर देश की प्रगति में योगदान दे सकता है – चाहे वह संपन्न हो या सामान्य।अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन, स्वच्छता, ईमानदारी और निष्पक्ष मतदान से ही राष्ट्र का गौरव बढ़ता है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. निबंध में किस स्वामी के जीवन-प्रसंग का उल्लेख है?

(क) स्वामी विवेकानंद

(ख) स्वामी रामतीर्थ

(ग) स्वामी दयानंद

(घ) स्वामी रामकृष्ण

उत्तर(ख) स्वामी रामतीर्थ।

2. जापानी युवक ने फलों के बदले क्या माँगा?

(क) अधिक धन

(ख) उपहार

(ग) अपने देश जापान की प्रशंसा के दो शब्द

(घ) नौकरी

उत्तर(ग) अपने देश जापान की प्रशंसा के दो शब्द।

3. लेखक के अनुसार देश की उच्चता तोलने की कसौटी क्या है?

(क) धन-संपत्ति

(ख) निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया

(ग) सैन्य शक्ति

(घ) जनसंख्या

उत्तर(ख) निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया।

4. निबंध किस शैली में लिखा गया है?

(क) वर्णनात्मक

(ख) प्रश्नोत्तर (संवादात्मक)

(ग) काव्यात्मक

(घ) पत्र-शैली

उत्तर(ख) प्रश्नोत्तर (संवादात्मक)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): व्यक्ति और उसका देश अलग-अलग नहीं हैं।

कारण (R): व्यक्ति का गौरव और हीनता उसके देश को तथा देश का गौरव-हीनता व्यक्ति को प्रभावित करते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): जापानी युवक ने धन के लोभ में फल बेचे।

कारण (R): उसने मूल्य के रूप में अपने देश की प्रशंसा के दो शब्द माँगे।

उत्तर(घ) A गलत है (युवक धन-लोभी नहीं, देशभक्त था), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): नागरिक स्वच्छता और सौंदर्य की रक्षा करके देश की सेवा कर सकता है।

कारण (R): लेखक के अनुसार देश के शक्तिबोध और सौंदर्यबोध को सशक्त करना नागरिक का कर्तव्य है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मैं और मेरा देश’ किस विधा की रचना है?

यह कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित एक विचारप्रधान निबंध है, जो प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है।

निबंध का मूल भाव क्या है?

व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध – दोनों अभिन्न हैं और उनका सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है।

जापानी युवक के प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?

सच्चा देशभक्त अपने राष्ट्र के सम्मान को धन से भी अधिक महत्व देता है।

नागरिक देश के लिए सबसे बड़ा योगदान कैसे दे सकता है?

देश के शक्तिबोध और सौंदर्यबोध को सशक्त करके – कर्तव्यपालन, स्वच्छता, ईमानदारी और निष्पक्ष मतदान द्वारा।

प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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