कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 7 ‘मैं और मेरा देश’ – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (गद्य खंड) के अध्याय 7 ‘मैं और मेरा देश’ (निबंध, लेखक – कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’) का पूरा समाधान देता है।
लेखक परिचय – कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था; उन्होंने नया जीवन और विकास पत्रों का संपादन किया। स्वतंत्रता-संग्राम और सामाजिक कार्यों में भाग लेने के कारण उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा भी करनी पड़ी। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह हैं – दीप जले शंख बजे, जिंदगी मुसकराई, बाजे पायलिया के घुँघरू, क्षण बोले कण मुसकाए, माटी हो गई सोना, आकाश के तारे धरती के फूल आदि, जो उनके मानवतावादी दृष्टिकोण एवं जीवन-दर्शन के परिचायक हैं। उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘मैं और मेरा देश’ कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का एक विचारप्रधान निबंध है, जो व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करता है। लेखक के अनुसार व्यक्ति की पूर्णता केवल उसकी निजता में नहीं, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र की पहचान से भी जुड़ी होती है। व्यक्ति का हर कार्य उसके साथ-साथ उसके देश की छवि से भी जुड़ा रहता है।
निबंध प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली में लिखा गया है। लेखक स्वामी रामतीर्थ और जापान के एक युवक का प्रसंग सुनाता है – युवक ने फल बेचने के बदले धन नहीं, बल्कि यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश लौटकर जापान की प्रशंसा के दो शब्द कहें। यह प्रसंग सच्ची देशभक्ति और राष्ट्र-गौरव की भावना को दर्शाता है।
लेखक बताता है कि पराधीनता के दिनों को ‘दीन’ इसलिए कहा गया, क्योंकि उस समय लोगों के आत्म-सम्मान और गौरव का दमन होता था। साधन-संपन्न होकर भी मनुष्य गौरव का अनुभव नहीं कर सकता यदि उसका देश परतंत्र हो। इस प्रकार देश का सम्मान और नागरिक का सम्मान एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं – यही वह ‘गाँठ’ है जो नागरिक और देश को बाँधती है।
निबंध में नागरिक के अधिकार एवं कर्तव्य, निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया का महत्व तथा योग्य नेतृत्व पर भी विचार किया गया है। लेखक बल देता है कि हर नागरिक देश के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है, यदि वह देश के ‘शक्तिबोध’ और ‘सौंदर्यबोध’ को हानि न पहुँचाकर उन्हें सशक्त करे – जैसे स्वच्छता बनाए रखना, सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता की रक्षा करना और ठीक व्यक्ति को मत देना।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संचित | इकट्ठा किया हुआ, जमा किया हुआ |
| मानस | मन, चित्त; मन से उत्पन्न |
| तेजस्वी | तेजवाला, प्रतापी, प्रभावशाली |
| ठसक | शान, ऐंठ, गर्व का बनावटीपन |
| धनिक | धनवान, धनी |
| रसद | अनाज, खाने का सामान, राशन |
| दाद देना | न्यायोचित प्रशंसा करना |
| साक्षी | गवाह, गवाही |
| लांछित | दोषयुक्त, कलंकित |
| हँडिया | मिट्टी का एक बर्तन |
| सुतली | सन/पटसन के रेशों से बनी डोरी |
| चौपाल | गाँव की खुली बैठक/चबूतरा जहाँ लोग एकत्र होते हैं |
| सघन | घना, ठोस |
| तरेड़ | दरार |
| ज़ीना | सीढ़ी, सोपान |
| अपूर्व | जो पहले न हुआ हो, अनोखा |
| शक्तिबोध | शक्ति का बोध/भाव |
| सौंदर्यबोध | सौंदर्य की समझ या अनुभूति |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई” – इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
3. “…पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए” – पराधीनता के दिनों को ‘दीन’ कहा गया क्योंकि पराधीन भारत में—
(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि—
(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है” – इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?
(क) देश और नागरिक
(ख) देश और संविधान
(ग) देश और विदेश
(घ) व्यवसाय और आजीविका
6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
मेरी समझ मेरे विचार
1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है?
3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है” – इस पंक्ति का भाव उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”
3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”
4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” (क) पास-पड़ोस के लोगों में कैसे संबंध रहे होंगे? (ख) वर्तमान में ऐसे संबंधों में क्या परिवर्तन आए हैं और क्यों?
5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी क्या-क्या करते हैं?
6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें?
मेरे प्रश्न (दी गई सामग्री से प्रश्न बनाइए)
व्याकरण की बात
संदर्भ में शब्द (एक शब्द – अनेक अर्थ)
मिलते-जुलते भाव वाले एवं पुनरुक्त शब्द-युग्म
उपसर्ग एवं प्रत्यय
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| अपूर्णता | अ | पूर्ण | ता |
| अलौकिक | अ | लोक | इक |
| निरक्षरता | निर् | अक्षर | ता |
| सम्मानित | सम् | मान | इत |
| अनावश्यक | अन् | आवश्यक | – |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| अभिमानी | अभि | मान | ई |
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के लेखक कौन हैं?
2. निबंध में किस स्वतंत्रता सेनानी का उल्लेख किया गया है?
3. लेखक के अनुसार देश की उच्चता और हीनता तोलने की कसौटी क्या है?
लघु उत्तरीय
4. निबंध की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषता क्या है?
5. लेखक के अनुसार एक नागरिक देश के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण कार्य कर सकता है?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. निबंध में किस स्वामी के जीवन-प्रसंग का उल्लेख है?
(क) स्वामी विवेकानंद
(ख) स्वामी रामतीर्थ
(ग) स्वामी दयानंद
(घ) स्वामी रामकृष्ण
2. जापानी युवक ने फलों के बदले क्या माँगा?
(क) अधिक धन
(ख) उपहार
(ग) अपने देश जापान की प्रशंसा के दो शब्द
(घ) नौकरी
3. लेखक के अनुसार देश की उच्चता तोलने की कसौटी क्या है?
(क) धन-संपत्ति
(ख) निष्पक्ष चुनाव-प्रक्रिया
(ग) सैन्य शक्ति
(घ) जनसंख्या
4. निबंध किस शैली में लिखा गया है?
(क) वर्णनात्मक
(ख) प्रश्नोत्तर (संवादात्मक)
(ग) काव्यात्मक
(घ) पत्र-शैली
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): व्यक्ति और उसका देश अलग-अलग नहीं हैं।
कारण (R): व्यक्ति का गौरव और हीनता उसके देश को तथा देश का गौरव-हीनता व्यक्ति को प्रभावित करते हैं।
2. अभिकथन (A): जापानी युवक ने धन के लोभ में फल बेचे।
कारण (R): उसने मूल्य के रूप में अपने देश की प्रशंसा के दो शब्द माँगे।
3. अभिकथन (A): नागरिक स्वच्छता और सौंदर्य की रक्षा करके देश की सेवा कर सकता है।
कारण (R): लेखक के अनुसार देश के शक्तिबोध और सौंदर्यबोध को सशक्त करना नागरिक का कर्तव्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मैं और मेरा देश’ किस विधा की रचना है?
यह कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित एक विचारप्रधान निबंध है, जो प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है।
निबंध का मूल भाव क्या है?
व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध – दोनों अभिन्न हैं और उनका सम्मान एक-दूसरे से जुड़ा है।
जापानी युवक के प्रसंग से क्या शिक्षा मिलती है?
सच्चा देशभक्त अपने राष्ट्र के सम्मान को धन से भी अधिक महत्व देता है।
नागरिक देश के लिए सबसे बड़ा योगदान कैसे दे सकता है?
देश के शक्तिबोध और सौंदर्यबोध को सशक्त करके – कर्तव्यपालन, स्वच्छता, ईमानदारी और निष्पक्ष मतदान द्वारा।
प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
