झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर — कक्षा 9 हिंदी गंगा
कक्षा 9 गंगा की ‘झाँसी की रानी’ में सुभद्रा कुमारी चौहान लक्ष्मीबाई के साहस और स्वतंत्रता-संघर्ष को स्वर देती हैं। यहाँ कविता का भावार्थ, तर्कपूर्ण उत्तर, घटनाक्रम, भाषा-अभ्यास और रचनात्मक कार्यों के नमूने पढ़ें।
स्रोत: NCERT गंगा, कक्षा 9, प्रथम संस्करण मार्च 2026, पृष्ठ 176–193। खुले प्रश्नों, अनुभवों और रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं; अपने विचार जोड़ें। यह स्वतंत्र अध्ययन-सहायिका है, NCERT की आधिकारिक उत्तरमाला नहीं।
- कवयित्री परिचय – सुभद्रा कुमारी चौहान
- कविता-पाठ (दोहराई टेक संक्षिप्त)
- भावार्थ
- शब्दार्थ
- मेरे उत्तर मेरे तर्क
- मेरी समझ मेरे विचार
- कविता में कहानी — घटनाक्रम
- साझा साथ / साझा संघर्ष
- व्याकरण की बात
- पत्र, डायरी और समाचार
- लोकपरंपरा, भाषा और झलकारी बाई
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
कवयित्री परिचय – सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। अपने समय की प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी थीं, जिसके कारण उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना जगाई। उनके लेखन में देशप्रेम, स्त्री-केंद्रित विषयों तथा स्वाधीनता-संग्राम के प्रति गहन प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – मुकुल, त्रिधारा (कविता संग्रह), बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह), कदंब का पेड़, सभा का खेल (बाल साहित्य)। उन्हें मुकुल तथा बिखरे मोती के लिए दो बार ‘सेकसरिया पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।
कविता-पाठ (दोहराई टेक संक्षिप्त)
यह कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं वीरता का ओजपूर्ण चित्रण है। प्रत्येक छंद के अंत में टेक (refrain) दोहराई गई है।
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद ज़बानी थीं। … (टेक)
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी। … (टेक)
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी। … (टेक)
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी। … (टेक)
बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी। … (टेक)
अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फिरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी। … (टेक)
छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो यही कहानी थी। … (टेक)
रानी रोईं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपुर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’,
यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी। … (टेक)
कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी। … (टेक)
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी। … (टेक)
इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी। … (टेक)
इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी। … (टेक)
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना-तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी। … (टेक)
विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध-क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर, पीछे ह्यू रोज आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी। … (टेक)
तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी। … (टेक)
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी। … (टेक)
जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
(टेक – प्रत्येक छंद के अंत में “बुंदेले हरबोलों के मुँह / हमने सुनी कहानी थी। / खूब लड़ी मर्दानी वह तो / झाँसी वाली रानी थी॥” दोहराई गई है।)
भावार्थ
कविता का आरंभ 1857 में जागी स्वतंत्रता-चेतना से होता है। “नई जवानी” नई शक्ति और प्रतिरोध की उमंग का प्रतीक है। बुंदेली लोकगायकों की स्मृति के सहारे कवयित्री रानी की वीरगाथा सुनाती हैं।
बचपन में लक्ष्मीबाई युद्ध-कौशल सीखती, नाना के साथ पढ़ती-खेलती और शिवाजी की गाथाओं से प्रेरणा लेती हैं। विवाह के बाद झाँसी में उत्सव है, लेकिन पति की मृत्यु से शोक और राजनीतिक संकट आता है। कवयित्री इसे उजाले पर काली घटा छाने की तरह दिखाती हैं।
अंग्रेजी सत्ता के विस्तार, राजघरानों के अपमान और जनता की पीड़ा से प्रतिरोध बढ़ता है। महल और झोंपड़ी विभिन्न वर्गों के प्रतीक हैं। कविता नाना, ताँतिया, अज़ीमुल्ला, मौलवी और कुँवर सिंह जैसे सहयोगियों के त्याग को स्मरण करती है; सभी के जीवनांत की एक जैसी ऐतिहासिक घटना इससे नहीं माननी चाहिए।
काव्य-कथा में रानी वॉकर का सामना करती हैं, कालपी पहुँचती हैं, ग्वालियर पर अधिकार करती हैं और फिर घिर जाती हैं। नया घोड़ा नाले पर अड़ता है और अनेक आक्रमणों के बीच रानी घायल होकर वीरगति पाती हैं। “सिंहनी” और “अवतारी” उनके साहस का गौरवपूर्ण काव्य-चित्र हैं।
अंत में कवयित्री कहती हैं कि रानी का बलिदान लोगों को जगाता रहेगा। कोई सत्ता उनकी स्मृति दबाए भी तो उनके कार्य स्वयं उनका अमिट स्मारक हैं। कविता के वीर-रस, लय और बार-बार आती टेक से यह भाव प्रभावशाली बनता है।

कविता और इतिहास में अंतर
“अभी उम्र कुल तेइस की थी” कविता की पंक्ति है। पाठ-आधारित उत्तर में “कविता के अनुसार” लिखें; इसे ऐतिहासिक आयु का स्वतंत्र प्रमाण न मानें। इसी तरह “अवतारी” प्रशंसा का काव्यात्मक कथन है। राजा की मृत्यु के बाद दत्तक उत्तराधिकारी का प्रश्न था; झाँसी सचमुच किसी भी उत्तराधिकारी से रहित नहीं थी। अलग-अलग राज्यों का विलय अलग तरीकों से हुआ—सभी को एक ही नीति से जोड़ना उचित नहीं।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फिरंगी | अंग्रेज, विलायती |
| मर्दानी | बहादुर, पुरुषोचित (वीरता वाली) |
| छबीली | तेजस्वी, सुंदर, सजीली |
| बरछी | छोटा भाला |
| ढाल | वार रोकने का लोहे का साधन |
| कृपाण / कटारी | तलवार / छोटी कटार (शस्त्र) |
| गाथा | कथा, प्रशंसागीत |
| अवतार | ईश्वर/देवी का मनुष्य रूप में जन्म |
| भवानी | देवी दुर्गा |
| नाना | (यहाँ) नाना साहब; अनेक/विविध |
| दुर्ग | किला, गढ़ |
| सुभट | रणकुशल योद्धा |
| विरुदावलि | यशोगान, कीर्ति-गाथा |
| विधि | विधाता, भाग्य |
| बिरानी | पराई, सूनी |
| हरबोले | बुंदेलखंड के लोकगायक |
| अनुनय-विनय | प्रार्थना, विनती |
| माया | छल, कपट |
| बिसात | हैसियत, सामर्थ्य |
| वज्र-निपात | वज्र का गिरना (भारी आघात) |
| बेज़ार | दुखी, ऊबी हुई |
| सन्मुख | सामने, भिड़ने वाला |
| कृतज्ञ | उपकार मानने वाला, एहसानमंद |
| अविनाशी | नाशरहित, अमर |
| मदमाती | मस्त, मदमत्त |
| स्मारक | स्मृति-रक्षा हेतु बनाया स्तंभ/भवन |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान
(ख) विद्रोह की चिंगारी
(ग) स्वाधीनता का भय
(घ) भारत की युवावस्था
2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता
(ख) शोभायुक्त (तेजस्वी एवं सुंदर)
(ग) सहिष्णुता
(घ) कठोरता
3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
(क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना
4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत है?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन
(ग) 1857 की क्रांति
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए
(ख) जनरल डलहौजी के लिए
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
(घ) ब्रिटिश राज के लिए
मेरी समझ मेरे विचार
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है। इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित करता है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उन्हें ‘अवतारी’ कहा गया है?
कविता में कहानी — घटनाक्रम
- बचपन: नाना के साथ शिक्षा और खेल; युद्ध-कौशल में रुचि।
- विवाह: झाँसी की रानी बनना और उत्सव। जिला इतिहास के अनुसार विवाह 1842 में हुआ।
- पति की मृत्यु: शोक और उत्तराधिकार का संकट।
- अंग्रेजी अधिग्रहण: रानी तथा जनता में असंतोष।
- 1857: व्यापक विद्रोह और साझा संघर्ष।
- कविता का युद्ध-क्रम: झाँसी → कालपी → ग्वालियर।
- 1858: अंतिम संघर्ष और वीरगति; कविता में अमर स्मृति का संदेश।
यह कविता की घटनाओं की सरल समय-रेखा है; बिना स्रोत के हर घटना की तारीख न जोड़ें। ऐतिहासिक वर्ष: झाँसी जिला प्रशासन का इतिहास।
साझा साथ / साझा संघर्ष
1. “लावारिस का वारिस” और हड़प नीति
डलहौजी की हड़प नीति में कुछ आश्रित रियासतों के शासक की प्राकृतिक पुरुष संतान न होने पर दत्तक उत्तराधिकारी के शासन-अधिकार को अस्वीकार कर राज्य मिलाया गया। झाँसी में रानी अपने दत्तक पुत्र का अधिकार मान्यता दिलाना चाहती थीं। “लावारिस” अंग्रेजी औचित्य पर कवयित्री का व्यंग्य है। अवध के अधिग्रहण के लिए कुशासन का बहाना दिया गया था; वह इसी उत्तराधिकार नीति का उदाहरण नहीं है। NCERT इतिहास — 1857 और उसके बाद पढ़ें।
2. कविता में आए सहयोगी और उनका योगदान
कविता के नामों को इतिहास की जानकारी से मिलाकर संक्षिप्त परिचय लिखें:
| नाम | संक्षिप्त योगदान |
|---|---|
| नाना धुंधूपंत / नाना साहब | कानपुर में विद्रोह के नेतृत्व से जुड़े। |
| ताँतिया / तात्या टोपे | नाना के सेनानायक; लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों से संघर्ष किया। |
| अज़ीमुल्ला खान | नाना साहब के निकट सहयोगी और उनके दावों के प्रतिनिधि। |
| अहमद शाह मौलवी | ऐतिहासिक संदर्भ में मौलवी अहमदुल्लाह शाह; अवध में लोगों को संगठित कर संघर्ष किया। |
| कुँवर सिंह | बिहार में विद्रोही सिपाहियों के साथ अंग्रेजों से लड़े। |
| काना और मंदरा | कविता में रानी की साथ लड़ने वाली सखियाँ। |
स्रोत: उपर्युक्त NCERT इतिहास तथा संस्कृति मंत्रालय — नाना साहब और अज़ीमुल्ला। त्याग का अर्थ हर व्यक्ति की एक ही युद्ध में मृत्यु नहीं है।
3. विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान — उदाहरण
| कार्यक्षेत्र | नाम और परिचय |
|---|---|
| दमकल/अग्निशमन | हर्षिणी कान्हेकर — अग्निशमन प्रशिक्षण और सेवा में बाधाएँ तोड़ने वाली अग्रणी महिला। |
| रेलगाड़ी चालक | सुरेखा यादव — अनुभवी लोको पायलट; वंदे भारत चलाने वाली पहली महिला। |
| खेल | पी. वी. सिंधु — बैडमिंटन में रियो का रजत और टोक्यो का कांस्य ओलंपिक पदक। |
| व्यापार और प्रबंधन | किरण मजूमदार-शॉ — बायोकॉन की संस्थापक और जैव-प्रौद्योगिकी उद्यमी। |
| विज्ञान और तकनीक | कल्पना चावला — भारत में जन्मी एयरोस्पेस इंजीनियर और NASA अंतरिक्ष यात्री; दो अंतरिक्ष उड़ानों में गईं। |
ये वर्तमान और निकट अतीत से चुने उदाहरण हैं। अपनी स्थानीय महिला पेशेवर का वास्तविक परिचय भी जोड़ सकते हैं।
4. मानचित्र-कार्य के लिए स्थान-सूची
| स्थान | आज का राज्य/क्षेत्र |
|---|---|
| झाँसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, बिठूर, कालपी | उत्तर प्रदेश |
| दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली |
| ग्वालियर, जबलपुर | मध्य प्रदेश |
| पटना | बिहार |
| कोल्हापुर, नागपुर, सतारा | महाराष्ट्र |
| तंजोर / तंजावुर, मद्रास / चेन्नई | तमिलनाडु |
| कलकत्ता / कोलकाता | पश्चिम बंगाल |
पुस्तक के पृष्ठ 187 के मानचित्र और एटलस पर प्रमुख विद्रोह-केंद्र बिंदु से चिह्नित करें। कविता में कुछ प्रदेश और पुराने नाम भी हैं: सिंध आज पाकिस्तान में है, “ब्रह्म” का संदर्भ बर्मा/म्यांमार से है। इन्हें भारत के वर्तमान मानचित्र के भीतर न रखें। किसी पुराने या अस्पष्ट स्थान-नाम, जैसे “उदैपूर”, की पहचान ऐतिहासिक संदर्भ से शिक्षक के साथ जाँचें; केवल आधुनिक नाम-समानता से अनुमान न लगाएँ।
व्याकरण की बात
शब्द एक – अर्थ अनेक (अनेकार्थी)
कविता के संदर्भ में रेखांकित शब्दों के सही अर्थ नीचे दिए गए हैं।
| काव्य-पंक्ति | संदर्भ में सही अर्थ |
|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं | तीर = बाण |
| रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | विधि = विधाता |
| रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | द्वंद्व = युद्ध |
| हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | गोले = तोप से दागने वाले गोले |
| मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | तेज = आभा/शक्ति (दीप्ति) |
मुहावरे (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग)
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| मुँह की खाना | हार जाना, पराजित होना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीतेगा, पर अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। |
| पैर पसारना | प्रभाव/अधिकार बढ़ाना, विस्तार करना | अंग्रेजों ने धीरे-धीरे पूरे भारत में पैर पसार लिए। |
| पैरों ठुकराना | अपमानित करना, तुच्छ समझना | अहंकारी व्यक्ति सबको पैरों ठुकराता है। |
| सोई ज्योति जगाना | निष्क्रिय चेतना/भावना को जागृत करना | वीरों के बलिदान ने देशवासियों की सोई ज्योति जगा दी। |
| धूम मचाना | हलचल/प्रसिद्धि फैलाना | उसकी विजय ने पूरे नगर में धूम मचा दी। |
काव्य में वर्तनी के रूप
| पाठ का रूप | प्रचलित मानक रूप |
|---|---|
| कानपूर / कानपुर | कानपुर |
| देहली | दिल्ली |
| उदैपूर | उदयपुर |
| रजधानी | राजधानी |
| तेइस | तेईस |
| अध्याय 8: तीरथ, बरत, जोति | तीर्थ, व्रत, ज्योति |
लय, लोकभाषा और रचना की मूल शैली के कारण कुछ रूप अलग होते हैं। कविता उद्धृत करते समय पाठ का रूप रखें; अपने सामान्य गद्य में मानक वर्तनी लिखें। हर टाइपिंग की गलती को काव्य-स्वतंत्रता न मानें।
एक पंक्ति में दो मुहावरे
“डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया” में पैर पसारना के साथ काया पलटना भी है—रूप या स्थिति बहुत बदल जाना। नया वाक्य: नियमित देखभाल से उजड़े बगीचे की काया पलट गई। “मन में ठान लेना” का उदाहरण: मैंने प्रतिदिन पढ़ने की आदत बनाने की मन में ठान ली।
पत्र, डायरी और समाचार
1. काना और मंदरा का पत्र — साहित्यिक कल्पना
आदरणीय रानी साहिबा,
हम आपके साहस से प्रेरित हैं। संकट के समय साथियों में स्पष्ट संवाद, अनुशासन और पारस्परिक विश्वास आवश्यक हैं। घायल साथियों की देखभाल और नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। हम सबका मनोबल बनाए रखने तथा आवश्यक संदेश पहुँचाने में अपनी भूमिका निभाएँगी। कठिन परिस्थिति में भी हम एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगी।
आपकी सखियाँ,
काना और मंदरा
यह कक्षा के पत्र-लेखन का कल्पित नमूना है, कोई ऐतिहासिक पत्र या वास्तविक सैन्य योजना नहीं।
2. मानसिक ऊहापोह पर डायरी — नमूना
दिनांक: ___, समय: ___
प्रिय डायरी,
कल नई कक्षा में मेरा पहला दिन है। नए साथियों से मिलने का उत्साह है, पर मन में यह चिंता भी है कि मैं सबसे बात कर पाऊँगा/पाऊँगी या नहीं। मैंने अपनी किताबें व्यवस्थित कर ली हैं और निश्चय किया है कि पहले किसी एक साथी को नमस्ते कहूँगा/कहूँगी। तैयारी से चिंता थोड़ी कम हुई है। अब समय पर सोना है।
इसे अपना अनुभव बताकर न उतारें; अपने वास्तविक अवसर, भाव और समाधान लिखें।
शौर्य के समाचार — काव्य पर आधारित प्रस्तुति
नमस्कार! आज की कक्षा-प्रस्तुति में हम ‘झाँसी की रानी’ कविता की रणभूमि पर चलते हैं। कवयित्री लक्ष्मीबाई को साहस और नेतृत्व के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। झाँसी से कालपी और ग्वालियर तक उनकी संघर्ष-यात्रा वर्णित है। कठिन परिस्थिति में भी उनका मनोबल नहीं टूटता। कविता का संदेश है—स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए किया त्याग समाज को लंबे समय तक प्रेरित करता है।
प्रस्तुति शुरू करते समय स्पष्ट कहें कि यह कविता पर आधारित अभिनय है, आज की वास्तविक समाचार-रिपोर्ट नहीं।
लोकपरंपरा, भाषा और झलकारी बाई
हरबोलों और अपने क्षेत्र के गीतों का संकलन
घर के बुजुर्गों, स्थानीय कलाकारों या पुस्तकालय से गीत का नाम, भाषा, गायक-परंपरा, विषय और स्रोत जुटाएँ। किसी की आवाज रिकॉर्ड करने से पहले अनुमति लें। गीत की दो-तीन पंक्तियों का भाव अपने शब्दों में लिखें और बताएँ कि वह किस मूल्य या घटना को याद रखता है। संग्रह में सुने हुए वास्तविक गीत ही दर्ज करें।
भाषा संगम: बहन
हिंदी—बहन; मराठी—बहीण; गुजराती—बहेन; बांग्ला—बोन; संस्कृत—भगिनी। कुछ भाषाओं में बड़ी और छोटी बहन के लिए अलग शब्द हैं, इसलिए प्रसंग पूछकर सही रूप चुनें। पंक्ति का सरल हिंदी अर्थ है—छबीली कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन थी। अपनी मातृभाषा में इसका स्वाभाविक रूप लिखें।
विस्तार-पाठ: झलकारी बाई
पुस्तक के विस्तार-पाठ में झलकारी बाई को साधारण परिवार से आई साहसी योद्धा और रानी की विश्वस्त सहयोगी बताया गया है। वर्णन के अनुसार वे दुर्गा दल से जुड़ीं और रानी का वेश धारण कर अंग्रेजों को भ्रमित करती रहीं, जिससे लक्ष्मीबाई को निकलने का अवसर मिला। यह कथा बुंदेलखंड की लोकस्मृति का भी हिस्सा है।
सावधानी से पढ़ें: इसी विस्तार-पाठ में उनका 1890 तक जीवित रहना लिखा है; इसलिए यह उत्तर न जोड़ें कि वे निश्चित रूप से 1858 की उसी लड़ाई में मारी गई थीं। अलग स्रोतों की जीवन-तिथियाँ और कथाएँ मिलाते समय उनका अंतर स्पष्ट रखें।
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पुस्तक में दिए NCERT कार्यक्रम तथा प्रकाशन विभाग की ‘भारत की महान नारियाँ’ श्रृंखला से एक परिचय पढ़ें। घटना, स्रोत और उससे सीखे गुण अलग-अलग लिखें। वीरता के छोटे उदाहरणों—मदद, जिम्मेदारी और कठिन परिस्थिति में उचित निर्णय—पर भी चर्चा करें।
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की रचयिता कौन हैं?
2. कविता किस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है?
3. कविता में बार-बार दोहराई गई टेक (पंक्ति) कौन-सी है?
लघु उत्तरीय
4. अंग्रेजों ने झाँसी को किस आधार पर हड़प लिया?
5. कविता के अंत में कवयित्री रानी को किस रूप में स्मरण करती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘झाँसी की रानी’ कविता की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. कविता की पंक्ति के अनुसार रानी की आयु कितनी बताई गई है?
(क) तेईस वर्ष
(ख) तीस वर्ष
(ग) अठारह वर्ष
(घ) चालीस वर्ष
2. युद्ध-क्षेत्र में अंत तक रानी के साथ रहने वाली दो सखियाँ कौन थीं?
(क) चित्रा और भवानी
(ख) काना और मंदरा
(ग) छबीली और झलकारी
(घ) सुनयना और बेगम
3. ‘हरबोले’ किसे कहा गया है?
(क) अंग्रेज सैनिक
(ख) बुंदेलखंड के लोकगायक
(ग) रानी के सैनिक
(घ) दरबारी कवि
4. ‘फिरंगी’ शब्द का अर्थ है—
(क) मराठा
(ख) अंग्रेज
(ग) सैनिक
(घ) राजा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): डलहौजी ने झाँसी को हड़प लिया।
कारण (R): राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने दत्तक उत्तराधिकारी का राज्य-अधिकार अस्वीकार कर हड़प नीति लागू की।
2. अभिकथन (A): कविता लक्ष्मीबाई के बचपन को युद्ध-अभ्यास से रहित बताती है।
कारण (R): उनके प्रिय खेल नकली युद्ध, शिकार और दुर्ग तोड़ना थे।
3. अभिकथन (A): यह एक कथात्मक कविता है।
कारण (R): इसमें रानी के बचपन से वीरगति तक की घटनाएँ क्रमबद्ध रूप में वर्णित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘झाँसी की रानी’ कविता की रचयिता कौन हैं?
इस प्रसिद्ध वीर-रस कविता की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान हैं।
कविता किस घटना पर आधारित है?
यह कविता सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं बलिदान पर आधारित है।
“खूब लड़ी मर्दानी” पंक्ति का क्या आशय है?
इसका आशय रानी के अदम्य साहस और युद्ध-कौशल की प्रशंसा है। यह उस समय की वीरतासूचक भाषा है; साहस किसी एक लिंग का गुण नहीं है।
अंग्रेजों ने झाँसी को कैसे हड़पा?
राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने दत्तक उत्तराधिकारी का राज्य-अधिकार स्वीकार नहीं किया और हड़प नीति के अंतर्गत झाँसी का अधिग्रहण किया।
