कक्षा 9 हिंदी (गंगा) अध्याय 11 ‘झाँसी की रानी’ – प्रश्न-उत्तर, भावार्थ एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की नई पुस्तक गंगा (काव्य खंड) के अध्याय 11 ‘झाँसी की रानी’ (कवयित्री – सुभद्रा कुमारी चौहान) का पूरा समाधान देता है – कविता का भावार्थ, शब्दार्थ तथा सभी अभ्यास-प्रश्नों के उत्तर।
कवयित्री परिचय – सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। अपने समय की प्रसिद्ध रचनाकार होने के साथ-साथ वह एक स्वतंत्रता सेनानी भी थीं, जिसके कारण उन्हें दो बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस में राष्ट्रीय चेतना जगाई। उनके लेखन में देशप्रेम, स्त्री-केंद्रित विषयों तथा स्वाधीनता-संग्राम के प्रति गहन प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – मुकुल, त्रिधारा (कविता संग्रह), बिखरे मोती, उन्मादिनी, सीधे-सादे चित्र (कहानी संग्रह), कदंब का पेड़, सभा का खेल (बाल साहित्य)। उन्हें मुकुल तथा बिखरे मोती के लिए दो बार ‘सेकसरिया पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। सन् 1948 में उनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर रानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं वीरता का ओजपूर्ण चित्रण है। प्रत्येक छंद के अंत में टेक (refrain) दोहराई गई है।
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ उसको याद ज़बानी थीं। … (टेक)
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी। … (टेक)
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी। … (टेक)
उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी। … (टेक)
बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी। … (टेक)
अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फिरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी। … (टेक)
छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जब कि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो यही कहानी थी। … (टेक)
रानी रोईं रनिवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपुर के जेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’,
यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी। … (टेक)
कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी। … (टेक)
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी। … (टेक)
इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी। … (टेक)
इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख्मी होकर वॉकर भागा, उसे अजब हैरानी थी। … (टेक)
रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर, गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना-तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी। … (टेक)
विजय मिली, पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध-क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर, पीछे ह्यू रोज आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी। … (टेक)
तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया, था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गए सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर-गति पानी थी। … (टेक)
रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी। … (टेक)
जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
(टेक – प्रत्येक छंद के अंत में “बुंदेले हरबोलों के मुँह / हमने सुनी कहानी थी। / खूब लड़ी मर्दानी वह तो / झाँसी वाली रानी थी॥” दोहराई गई है।)
भावार्थ
कवयित्री बताती हैं कि सन् 1857 में पूरे भारत में स्वतंत्रता की नई चेतना जाग उठी; राजवंशों ने अंग्रेजों के विरुद्ध भौंहें तान लीं और सबने खोई हुई आज़ादी का मूल्य पहचानकर फिरंगियों (अंग्रेजों) को देश से बाहर करने का संकल्प लिया। इस संग्राम की सबसे तेजस्वी वीरांगना थी झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, जिसकी वीरगाथा बुंदेलखंड के हरबोले (लोकगायक) गाते रहे – “खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”
लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी। बचपन में बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी ही उसकी सहेलियाँ थीं; नकली युद्ध, व्यूह-रचना, शिकार, सैन्य घेरना और दुर्ग तोड़ना उसके प्रिय खेल थे। वीर शिवाजी की गाथाएँ उसे कंठस्थ थीं। विवाह के बाद वह रानी बनकर झाँसी आई और सुख-समृद्धि छा गई, किंतु शीघ्र ही राजा की निःसंतान मृत्यु से वह विधवा हो गई और झाँसी पर दुख के बादल छा गए।
राजा की मृत्यु पर लॉर्ड डलहौजी प्रसन्न हुआ और उसने अपनी ‘राज्य हड़प नीति’ (Doctrine of Lapse) के अंतर्गत झाँसी को ‘लावारिस’ बताकर हड़प लिया। अंग्रेज, जो व्यापारी बनकर भारत आए थे, अब दिल्ली, लखनऊ, नागपुर, सतारा, पंजाब, सिंध आदि अनेक राज्यों को हड़पने लगे; राजघरानों के गहने-कपड़े तक कलकत्ते के बाजार में सरे-आम नीलाम किए जाने लगे। इस अपमान एवं अन्याय से कुटियों (जनता) और महलों (राजवर्ग) – दोनों में विद्रोह की ज्वाला सुलग उठी।
नाना धुंधूपंत के साथ रानी लक्ष्मीबाई ने रण-चंडी का रूप धारण कर संग्राम छेड़ा। ताँतिया टोपे, अज़ीमुल्ला, मौलवी अहमद शाह, कुँवर सिंह जैसे अनेक वीरों ने बलिदान दिया। युद्धभूमि में रानी ने लेफ्टिनेंट वॉकर को घायल कर भगाया, सौ मील का सफर तय कर कालपी पहुँची और फिर ग्वालियर पर अधिकार किया। अंततः जनरल ह्यू रोज की सेना से घिरकर, अपनी सखियों काना और मंदरा के साथ वीरतापूर्वक लड़ते हुए, मात्र तेईस वर्ष की आयु में वह वीरगति को प्राप्त हुई।
कवयित्री श्रद्धांजलि देती हैं कि रानी कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की देवी का अवतार थी, जो भारत को जगाने आई थी। उसका बलिदान स्वतंत्रता की अमर प्रेरणा बनेगा; भले ही इतिहास चुप रहे, उसका स्मारक वह स्वयं है – वह अमिट निशानी थी। इस प्रकार यह कविता वीरता, देशप्रेम और बलिदान की भावना से ओत-प्रोत है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फिरंगी | अंग्रेज, विलायती |
| मर्दानी | बहादुर, पुरुषोचित (वीरता वाली) |
| छबीली | तेजस्वी, सुंदर, सजीली |
| बरछी | छोटा भाला |
| ढाल | वार रोकने का लोहे का साधन |
| कृपाण / कटारी | तलवार / छोटी कटार (शस्त्र) |
| गाथा | कथा, प्रशंसागीत |
| अवतार | ईश्वर/देवी का मनुष्य रूप में जन्म |
| भवानी | देवी दुर्गा |
| नाना | (यहाँ) नाना साहब; अनेक/विविध |
| दुर्ग | किला, गढ़ |
| सुभट | रणकुशल योद्धा |
| विरुदावलि | यशोगान, कीर्ति-गाथा |
| विधि | विधाता, भाग्य |
| बिरानी | पराई, सूनी |
| हरबोले | बुंदेलखंड के लोकगायक |
| अनुनय-विनय | प्रार्थना, विनती |
| माया | छल, कपट |
| बिसात | हैसियत, सामर्थ्य |
| वज्र-निपात | वज्र का गिरना (भारी आघात) |
| बेज़ार | दुखी, ऊबी हुई |
| सन्मुख | सामने, भिड़ने वाला |
| कृतज्ञ | उपकार मानने वाला, एहसानमंद |
| अविनाशी | नाशरहित, अमर |
| मदमाती | मस्त, मदमत्त |
| स्मारक | स्मृति-रक्षा हेतु बनाया स्तंभ/भवन |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं।
1. “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” में ‘नई जवानी’ शब्द किस भाव को व्यक्त करता है?
(क) देश का स्वाभिमान
(ख) विद्रोह की चिंगारी
(ग) स्वाधीनता का भय
(घ) भारत की युवावस्था
2. लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहना उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?
(क) विनम्रता
(ख) शोभायुक्त (तेजस्वी एवं सुंदर)
(ग) सहिष्णुता
(घ) कठोरता
3. “बुझा दीप झाँसी का” पंक्ति का भावार्थ है—
(क) अंग्रेजों का झाँसी पर अधिकार हो जाना
(ख) झाँसी राज्य की उम्मीदों का नष्ट हो जाना
(ग) राजा की आकस्मिक मृत्यु होना
(घ) रानी के जीवन में उदासी होना
4. “इस स्वतंत्रता-महायज्ञ में कई वीरवर आए काम” पंक्ति में किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत है?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) भारत छोड़ो आंदोलन
(ग) 1857 की क्रांति
(घ) सविनय अवज्ञा आंदोलन
5. “व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया” पंक्ति में ‘यह’ शब्द किसके लिए कहा गया है?
(क) नवाबों के लिए
(ख) जनरल डलहौजी के लिए
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के लिए
(घ) ब्रिटिश राज के लिए
मेरी समझ मेरे विचार
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल कौन-कौन से थे? उनका बचपन दूसरों से किस प्रकार भिन्न था?
2. “किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई” पंक्ति के माध्यम से किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
3. “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को दर्शाती है। इस एकता का स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्या महत्व है?
4. “सरे-आम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार” पंक्ति में ‘नीलाम छापते’ शब्द किसकी ओर संकेत करता है? किसकी नीलामी की जाती थी और क्यों?
5. “अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी” पंक्ति में ‘अवतारी’ शब्द व्यक्ति के विशेष गुणों की ओर इंगित करता है। कविता के आधार पर बताइए कि लक्ष्मीबाई के किन गुणों के कारण उन्हें ‘अवतारी’ कहा गया है?
व्याकरण की बात
शब्द एक – अर्थ अनेक (अनेकार्थी)
कविता के संदर्भ में रेखांकित शब्दों के सही अर्थ नीचे दिए गए हैं।
| काव्य-पंक्ति | संदर्भ में सही अर्थ |
|---|---|
| तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं | तीर = बाण |
| रानी विधवा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई | विधि = विधाता |
| रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में | द्वंद्व = युद्ध |
| हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी | गोले = तोप से दागने वाले गोले |
| मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी | तेज = आभा/शक्ति (दीप्ति) |
मुहावरे (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग)
| मुहावरा | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| मुँह की खाना | हार जाना, पराजित होना | मोहन ने सोचा था कि वह आसानी से जीतेगा, पर अंत में उसे मुँह की खानी पड़ी। |
| पैर पसारना | प्रभाव/अधिकार बढ़ाना, विस्तार करना | अंग्रेजों ने धीरे-धीरे पूरे भारत में पैर पसार लिए। |
| पैरों ठुकराना | अपमानित करना, तुच्छ समझना | अहंकारी व्यक्ति सबको पैरों ठुकराता है। |
| सोई ज्योति जगाना | निष्क्रिय चेतना/भावना को जागृत करना | वीरों के बलिदान ने देशवासियों की सोई ज्योति जगा दी। |
| धूम मचाना | हलचल/प्रसिद्धि फैलाना | उसकी विजय ने पूरे नगर में धूम मचा दी। |
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘झाँसी की रानी’ कविता की रचयिता कौन हैं?
2. कविता किस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है?
3. कविता में बार-बार दोहराई गई टेक (पंक्ति) कौन-सी है?
लघु उत्तरीय
4. अंग्रेजों ने झाँसी को किस आधार पर हड़प लिया?
5. कविता के अंत में कवयित्री रानी को किस रूप में स्मरण करती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
6. ‘झाँसी की रानी’ कविता की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. रानी लक्ष्मीबाई की वीरगति के समय उनकी आयु कितनी थी?
(क) तेईस वर्ष
(ख) तीस वर्ष
(ग) अठारह वर्ष
(घ) चालीस वर्ष
2. युद्ध-क्षेत्र में अंत तक रानी के साथ रहने वाली दो सखियाँ कौन थीं?
(क) चित्रा और भवानी
(ख) काना और मंदरा
(ग) छबीली और झलकारी
(घ) सुनयना और बेगम
3. ‘हरबोले’ किसे कहा गया है?
(क) अंग्रेज सैनिक
(ख) बुंदेलखंड के लोकगायक
(ग) रानी के सैनिक
(घ) दरबारी कवि
4. ‘फिरंगी’ शब्द का अर्थ है—
(क) मराठा
(ख) अंग्रेज
(ग) सैनिक
(घ) राजा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): डलहौजी ने झाँसी को हड़प लिया।
कारण (R): राजा की निःसंतान मृत्यु के बाद उसने राज्य हड़प नीति लागू की।
2. अभिकथन (A): लक्ष्मीबाई का बचपन सामान्य लड़कियों जैसा साधारण था।
कारण (R): उनके प्रिय खेल नकली युद्ध, शिकार और दुर्ग तोड़ना थे।
3. अभिकथन (A): यह कविता वीर-रस की कथात्मक कविता है।
कारण (R): इसमें रानी के बचपन से वीरगति तक की घटनाएँ क्रमबद्ध रूप में वर्णित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘झाँसी की रानी’ कविता की रचयिता कौन हैं?
इस प्रसिद्ध वीर-रस कविता की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान हैं।
कविता किस घटना पर आधारित है?
यह कविता सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन एवं बलिदान पर आधारित है।
“खूब लड़ी मर्दानी” पंक्ति का क्या आशय है?
इसका आशय है कि रानी लक्ष्मीबाई ने एक वीर पुरुष की भाँति अत्यंत बहादुरी से अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया।
अंग्रेजों ने झाँसी को कैसे हड़पा?
राजा की निःसंतान मृत्यु के बाद डलहौजी ने ‘राज्य हड़प नीति’ के अंतर्गत झाँसी को लावारिस बताकर हड़प लिया।
कविता एवं प्रश्न NCERT गंगा पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
