कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 10 — परीक्षा प्रश्न उत्तर और सार
परीक्षा प्रश्न उत्तर: कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 10 में प्रेमचंद दिखावे और सच्चे आचरण का अंतर समझाते हैं। कहानी का सार, शीर्षक, सभी अभ्यास, विलोम, कहावतें, विज्ञापन और परिधान-चित्रों के हल यहाँ पढ़ें। रचनात्मक कार्यों के उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 10 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 105–121, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
लेखक परिचय – प्रेमचंद
हिंदी के महान लेखक एवं ‘कथा-सम्राट’ के नाम से प्रसिद्ध प्रेमचंद (1880–1936) का वास्तविक नाम धनपतराय था। उन्होंने समाज-सुधार एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिखे। उनकी अनेक कहानियाँ जैसे — ईदगाह, बड़े भाईसाहब, गुल्ली डंडा तथा दो बैलों की कथा बड़ों और बच्चों के बीच बहुत पढ़ी एवं सराही गई हैं। उनकी रचनाएँ सरल भाषा, सजीव चित्रण एवं मानवीय मूल्यों के लिए प्रसिद्ध हैं।
कहानी का सार
रियासत देवगढ़ के अनुभवी एवं नीतिकुशल दीवान सरदार सुजानसिंह जब वृद्ध हो गए, तो उन्होंने महाराज से अपनी सेवा से मुक्त होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि चालीस वर्ष की सेवा के बाद अब उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही; कहीं भूल-चूक हो जाए तो बुढ़ापे में उनकी सारी नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी। महाराज ने बहुत समझाया, पर अंत में यह शर्त लगाकर प्रार्थना स्वीकार कर ली कि रियासत के लिए नया दीवान सुजानसिंह को ही खोजना होगा।
दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध समाचार-पत्रों में विज्ञापन निकला कि देवगढ़ को एक सुयोग्य दीवान की आवश्यकता है। शर्त यह थी कि उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं, परंतु हृष्ट-पुष्ट होना चाहिए; एक महीने तक उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की देखभाल की जाएगी और विद्या से अधिक कर्तव्य पर ध्यान दिया जाएगा। इस विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका मचा दिया और सैकड़ों उम्मीदवार देवगढ़ पहुँच गए। हर उम्मीदवार स्वयं को अच्छा दिखाने का दिखावा करने लगा – आलसी लोग सवेरे टहलने लगे, असभ्य लोग नम्र बन गए और किताबों से घृणा करने वाले ग्रंथ पढ़ने लगे। परंतु सुजानसिंह रूपी बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठकर परख रहा था कि इन बगुलों में असली हंस कौन है।
एक दिन उम्मीदवारों ने हॉकी का खेल आयोजित किया, जो संध्या तक बराबरी पर रहा। खेल के बाद पास के नाले में एक किसान अनाज से भरी गाड़ी लेकर फँस गया; कीचड़ एवं चढ़ाई के कारण गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ पा रही थी। अधिकांश खिलाड़ियों ने उसकी ओर स्वार्थ-भरी आँखों से देखा और चले गए, पर एक युवक – जिसके पैर में चोट लगी थी – ने कोट उतारकर कीचड़ में घुटनों तक धँसते हुए गाड़ी को बाहर निकाल दिया। किसान ने कृतज्ञ होकर कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” युवक को संदेह हुआ कि कहीं यह किसान सुजानसिंह तो नहीं; किसान ने मुस्कराकर कहा – “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
महीना पूरा होने पर चुनाव का दिन आया। दरबार में सरदार सुजानसिंह ने घोषणा की कि इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी जिसके हृदय में दया हो और साथ ही आत्मबल; और यह गुण पंडित जानकीनाथ में मिला, जिन्होंने स्वयं घायल होकर भी एक गरीब किसान की गाड़ी दलदल से निकाली थी। ऐसा उदार, साहसी एवं दृढ़-संकल्प व्यक्ति ही गरीबों को कभी न सताएगा और दया एवं धर्म से कभी न हटेगा। इस प्रकार दिखावा करने वालों के बीच सच्चे गुण वाले जानकीनाथ इस अनोखी ‘परीक्षा’ में सफल हुए। कहानी यह संदेश देती है कि मनुष्य की असली परख उसके दिखावे से नहीं, बल्कि दया, उदारता एवं आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।

शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रियासत | राज्य, छोटा रजवाड़ा |
| दीवान | राज्य का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी |
| विनय | नम्र प्रार्थना |
| अवस्था | उम्र, आयु |
| नेकनामी | अच्छी प्रतिष्ठा, सम्मान |
| नीतिकुशल | नीति एवं प्रबंध में निपुण |
| सुयोग्य | भली प्रकार योग्य |
| हृष्ट-पुष्ट | स्वस्थ एवं बलवान |
| मंदाग्नि | कमज़ोर पाचन-शक्ति |
| तहलका मचना | हलचल/खलबली मच जाना |
| सनद | प्रमाण-पत्र, डिग्री |
| जौहरी | रत्नों/हीरों का पारखी |
| बगुला | दिखावा करने वाला (यहाँ ढोंगी) |
| हंस | श्रेष्ठ/सच्चा गुणवान व्यक्ति |
| पुलन | छोटा पुल |
| ललकारना | उत्साह से पुकारना/प्रेरित करना |
| उबारना | संकट से बचाना |
| वात्सल्य | स्नेह, ममता |
| आत्मबल | मन का बल, दृढ़ता |
| दृढ़ संकल्प | पक्का इरादा |
| ईर्ष्या | दूसरे की उन्नति से जलन |
| सत्कार | आदर, सम्मान |
मेरी समझ से
आइए, अब हम कहानी ‘परीक्षा’ के बारे में कुछ चर्चा कर लेते हैं।
(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए –
(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?
• सादगी
• उदारता
• बल
• नीतिकुशलता
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?
• परमात्मा की याद
• राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना
• बदनामी का भय
• चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
शीर्षक
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?
पंक्तियों पर चर्चा
कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
“इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।”
सोच-विचार के लिए
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और लिखिए —
(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?
(ख) “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं।” खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं?
(ग) “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।” किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?
खोजबीन
कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि —
(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।
कहानी की रचना
“लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।” इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं?
समस्या और समाधान
इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उसके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि —
(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?
मन के भाव
“स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।” इस वाक्य में कुछ शब्द मन के भावों के नाम हैं (जो दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं)। कहानी में से ऐसे ही अन्य भावों के नाम खोजकर लिखिए।
अभिनय
कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
विपरीतार्थक शब्द
“विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।” ‘कम’ का विपरीत ‘अधिक’ है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों के सही विपरीतार्थक जोड़े बनाइए —
| शब्द (स्तंभ 1) | विपरीतार्थक शब्द (स्तंभ 2) |
|---|---|
| 1. आना | जाना |
| 2. गुण | अवगुण |
| 3. आदर | अनादर |
| 4. स्वस्थ | अस्वस्थ |
| 5. कम | अधिक |
| 6. दयालु | निर्दयी |
| 7. योग्य | अयोग्य |
| 8. हार | जीत |
| 9. आशा | निराशा |
कहावत
“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।” यह एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश/परिश्रम करने पर ही सफलता मिलती है। नीचे कुछ कहावतें एवं उनके भावार्थ दिए गए हैं। इन्हें कहानी से जोड़कर समझिए।
| कहावत | भावार्थ |
|---|---|
| अधजल गगरी छलकत जाए | जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा अधिक करता है। |
| अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत | समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है। |
| एक अनार सौ बीमार | कोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों। |
| जो गरजते हैं वे बरसते नहीं | जो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं, वे काम नहीं करते। |
| जहाँ चाह, वहाँ राह | जब किसी काम को करने की सच्ची इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है। |
शेष कहावतों का कहानी से संबंध: ‘अब पछताए होत क्या…’—अवसर खो देने के बाद अन्य उम्मीदवारों का पछतावा काम नहीं आएगा (यह संभावित भाव है, अलग घटना नहीं)। ‘जहाँ चाह, वहाँ राह’—जानकीनाथ ने चोट के बावजूद मदद की राह निकाली। कहावतें अनुभव का सामान्य संदेश देती हैं; हर परिस्थिति की अचूक गारंटी नहीं।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
अनुमान या कल्पना से
(क) “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला” – यह विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?
(ख) “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।” विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?
विज्ञापन
कहानी में दिए विज्ञापन को पढ़कर अपनी कल्पना से एक विज्ञापन बनाइए। साथ ही चर्चा कीजिए कि विज्ञापनों से लाभ होते हैं, हानि या दोनों?
विज्ञापन (ख) — पसंद का नमूना: मुझे पुस्तक मेले का विज्ञापन पसंद है, क्योंकि उसमें स्थान, दिनांक और प्रवेश की जानकारी स्पष्ट है। अपना वास्तव में देखा विज्ञापन चुनें और कारण लिखें।
विज्ञापन (ग) — लाभ और हानि: सही विज्ञापन वस्तु, सेवा या अवसर की जानकारी देता है। भ्रामक दावे, अधूरी शर्तें और अनावश्यक खरीद की प्रेरणा नुकसान पहुँचा सकती है। स्रोत, तारीख और दावों का आधार जाँचने की बात समूह में करें।
आगे की कहानी — कल्पनात्मक नमूना
‘परीक्षा’ कहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा? आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए।
आपकी बात
(क) यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते?
(ख) यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे?
नया-पुराना
“कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ।” अपने परिवार से चर्चा करके दी गई तालिका को पूरा कीजिए।
| मेरे लिए नई वस्तुएँ | मेरे लिए पुरानी वस्तुएँ | बड़ों के लिए नई वस्तुएँ | बड़ों के लिए पुरानी वस्तुएँ |
|---|---|---|---|
| स्मार्टफोन ऐप, ऑनलाइन क्लास | लट्टू, गिल्ली-डंडा | स्मार्टफोन, टी.वी. | लालटेन, चक्की, रेडियो |
वाद-विवाद
“आपस में हॉकी का खेल हो जाए। यह भी तो आखिर एक विद्या है।” क्या हॉकी जैसा खेल भी विद्या है? इस विषय पर कक्षा में वाद-विवाद कीजिए।
अच्छाई और दिखावा
“हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था।” (क) लोग स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए क्या-क्या करते हैं? (ख) क्या ‘स्वयं को अच्छा दिखाने’ में और ‘स्वयं के अच्छा होने’ में कोई अंतर है?
परिधान तरह-तरह के — चित्रों का सही मिलान
नाम पुस्तक में चित्रों के सामने सही क्रम में नहीं हैं। चित्रों को ऊपर से नीचे देखें:
| चित्र क्रम | सही परिधान | पहचान / अन्य नाम |
|---|---|---|
| 1 | लहँगा | घेरदार निचला वस्त्र; घाघरा |
| 2 | गमछा | कंधे पर रखा कपड़ा; अंगोछा |
| 3 | दुपट्टा | कंधे/सिर पर ओढ़ने का लंबा कपड़ा; चुन्नी |
| 4 | धोती | कमर और पैरों पर लपेटा वस्त्र |
| 5 | फिरन | कश्मीर का ढीला लंबा परिधान; फ़ेरन भी लिखा जाता है |
| 6 | पगड़ी | सिर पर बाँधा कपड़ा; स्थानीय रूप में साफा |
| 7 | अचकन | बंद गले का लंबा कोट |
घर में प्रयुक्त नाम पूछकर लिखें। स्थानीय नाम हर जगह एक जैसे नहीं होते।
आपकी परीक्षाएँ
हम सभी जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। अपने अनुभवों के आधार पर कुछ उदाहरण बताइए।
आज की पहेली — चित्रों के स्पष्ट अंतर
दोनों चित्र एक जैसे नहीं हैं। बाएँ और दाएँ चित्र की तुलना में: (1) ट्रैफिक संकेत में जलता रंग हरे से लाल होता है; (2) पीछे चलते व्यक्ति का पीला थैला बड़ा/छोटा है; (3) बीच की इमारत की खिड़कियाँ अलग हैं; (4) बकरी विपरीत दिशा में मुँह किए है; (5) लड़की के बालों में दाएँ चित्र में लाल फीता है। हर अंतर दोनों चित्रों में उसी स्थान पर दिखाकर लिखें।
झरोखे से / खोजबीन के लिए
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. दीवान सुजानसिंह ने अपना पद छोड़ने का निश्चय क्यों किया?
2. विज्ञापन में दीवान-पद के लिए कौन-सी मुख्य शर्तें रखी गई थीं?
3. युवक ने किसान की गाड़ी किस प्रकार नाले से बाहर निकाली?
4. सुजानसिंह ने किसान का वेश क्यों धारण किया था?
5. सुजानसिंह के अनुसार एक अच्छे दीवान में कौन-से दो गुण आवश्यक हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘परीक्षा’ कहानी का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कहानी के आधार पर बताइए कि सच्ची योग्यता क्या है और इसे कैसे परखा जा सकता है?
8. कहानी में अधिकांश उम्मीदवारों और जानकीनाथ के व्यवहार में क्या अंतर था? इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘परीक्षा’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) प्रेमचंद
(ग) सूरदास
(घ) रहीम
2. कहानी की रियासत का नाम क्या था?
(क) देवगढ़
(ख) चित्तौड़
(ग) कानपुर
(घ) उज्जैन
3. दीवान सुजानसिंह ने अपना पद छोड़ने का क्या मुख्य कारण बताया?
(क) धन की कमी
(ख) वृद्धावस्था में राज-काज की शक्ति न रहना
(ग) महाराज से नाराज़गी
(घ) तीर्थ-यात्रा पर जाना
4. महाराज ने सुजानसिंह की प्रार्थना किस शर्त पर स्वीकार की?
(क) वे अपना सारा धन दान कर दें
(ख) वे रियासत के लिए नया दीवान स्वयं खोजें
(ग) वे एक वर्ष और काम करें
(घ) वे अपने पुत्र को दीवान बनाएँ
5. उम्मीदवारों की एक महीने तक किस बात की देखभाल की जानी थी?
(क) उनके धन की
(ख) उनकी डिग्रियों की
(ग) उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की
(घ) उनके पहनावे की
6. नाले में किसकी गाड़ी फँस गई थी?
(क) एक व्यापारी की
(ख) एक किसान की
(ग) एक सैनिक की
(घ) एक उम्मीदवार की
7. गाड़ी निकालने वाले युवक के साथ उस समय क्या हुआ था?
(क) उसके पैर में चोट लगी थी
(ख) वह बहुत धनी था
(ग) वह ग्रेजुएट नहीं था
(घ) वह सोया हुआ था
8. “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” – यह क्या है?
(क) एक प्रश्न
(ख) एक कहावत
(ग) एक गीत
(घ) एक आदेश
9. दीवानी (दीवान का पद) किसे मिली?
(क) मिस्टर ‘अ’ को
(ख) पंडित जानकीनाथ को
(ग) किसान को
(घ) किसी ग्रेजुएट को
10. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
(क) धन ही सबसे बड़ा गुण है
(ख) डिग्री से ही योग्यता मिलती है
(ग) मनुष्य की असली परख उसके सच्चे गुणों से होती है
(घ) दिखावा करना अच्छी बात है
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा किसान का वेश धारण करके ली।
कारण (R): वास्तविक कठिनाई में मदद करना दया और आत्मबल का प्रमाण देता है।
2. अभिकथन (A): अधिकांश उम्मीदवार सचमुच सद्गुणी हो गए थे।
कारण (R): वे केवल एक महीने तक स्वयं को अच्छा दिखाने का दिखावा कर रहे थे।
3. अभिकथन (A): दीवानी पंडित जानकीनाथ को मिली।
कारण (R): उन्होंने घायल होते हुए भी निःस्वार्थ भाव से किसान की गाड़ी दलदल से निकाली थी।
4. अभिकथन (A): विज्ञापन के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य था।
कारण (R): विज्ञापन में विद्या से अधिक कर्तव्य का विचार करने की बात कही गई थी।
5. अभिकथन (A): रियासत के कर्मचारियों की आँखों में जानकीनाथ के लिए सत्कार था।
कारण (R): वे जानकीनाथ के सच्चे गुणों एवं उनके चयन का सम्मान कर रहे थे।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- कहानी के पात्र याद रखें – महाराज, दीवान सुजानसिंह तथा सफल उम्मीदवार पंडित जानकीनाथ।
- केंद्रीय संदेश दोहराएँ: असली परख दिखावे से नहीं, दया-उदारता-आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।
- महत्त्वपूर्ण कथन याद रखें – “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” तथा दया + आत्मबल वाला गुण।
- उत्तर लिखते समय कहानी का उदाहरण (गाड़ी निकालने का प्रसंग) अवश्य जोड़ें।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- लेखक का नाम गड़बड़ न करें – कहानी ‘परीक्षा’ प्रेमचंद की है (क्यू.आर. वाली चाणक्य कथा जयशंकर प्रसाद की है)।
- यह न लिखें कि जानकीनाथ को पद उनकी डिग्री के कारण मिला – उन्हें उनके सच्चे गुणों के कारण मिला।
- किसान को साधारण किसान न समझें – वह वेश धारण किए स्वयं सुजानसिंह थे।
- ‘बगुलों में हंस’ का अर्थ उलटा न लिखें – ‘हंस’ सच्चे गुणवान को कहा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘परीक्षा’ कहानी के लेखक कौन हैं?
‘परीक्षा’ कहानी के लेखक हिंदी के कथा-सम्राट प्रेमचंद (1880–1936) हैं, जिनका वास्तविक नाम धनपतराय था।
‘परीक्षा’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
कहानी का संदेश है कि मनुष्य की असली पहचान उसके दिखावे या डिग्री से नहीं, बल्कि दया, उदारता एवं आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।
दीवानी (दीवान का पद) किसे और क्यों मिली?
दीवानी पंडित जानकीनाथ को मिली, क्योंकि उन्होंने स्वयं घायल होते हुए भी निःस्वार्थ भाव से एक गरीब किसान की फँसी गाड़ी दलदल से निकाली थी।
सुजानसिंह ने किसान का वेश क्यों धारण किया?
वे उम्मीदवारों की सच्ची परीक्षा लेना चाहते थे – यह परखने के लिए कि संकट में फँसे गरीब की निःस्वार्थ सहायता कौन करता है, क्योंकि दया एवं आत्मबल वास्तविक संकट में ही प्रकट होते हैं।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
