कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 10 – परीक्षा (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 10 ‘परीक्षा’ (लेखक – प्रेमचंद) का पूरा समाधान देता है – कहानी का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, शीर्षक, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, खोजबीन, कहानी की रचना, समस्या और समाधान, मन के भाव, विपरीतार्थक शब्द, कहावत, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 10 लेखक: प्रेमचंद विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – प्रेमचंद

हिंदी के महान लेखक एवं ‘कथा-सम्राट’ के नाम से प्रसिद्ध प्रेमचंद (1880–1936) का वास्तविक नाम धनपतराय था। उन्होंने समाज-सुधार एवं राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिखे। उनकी अनेक कहानियाँ जैसे — ईदगाह, बड़े भाईसाहब, गुल्ली डंडा तथा दो बैलों की कथा बड़ों और बच्चों के बीच बहुत पढ़ी एवं सराही गई हैं। उनकी रचनाएँ सरल भाषा, सजीव चित्रण एवं मानवीय मूल्यों के लिए प्रसिद्ध हैं।

कहानी का सार

रियासत देवगढ़ के अनुभवी एवं नीतिकुशल दीवान सरदार सुजानसिंह जब वृद्ध हो गए, तो उन्होंने महाराज से अपनी सेवा से मुक्त होने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि चालीस वर्ष की सेवा के बाद अब उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही; कहीं भूल-चूक हो जाए तो बुढ़ापे में उनकी सारी नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी। महाराज ने बहुत समझाया, पर अंत में यह शर्त लगाकर प्रार्थना स्वीकार कर ली कि रियासत के लिए नया दीवान सुजानसिंह को ही खोजना होगा।

दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध समाचार-पत्रों में विज्ञापन निकला कि देवगढ़ को एक सुयोग्य दीवान की आवश्यकता है। शर्त यह थी कि उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं, परंतु हृष्ट-पुष्ट होना चाहिए; एक महीने तक उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की देखभाल की जाएगी और विद्या से अधिक कर्तव्य पर ध्यान दिया जाएगा। इस विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका मचा दिया और सैकड़ों उम्मीदवार देवगढ़ पहुँच गए। हर उम्मीदवार स्वयं को अच्छा दिखाने का दिखावा करने लगा – आलसी लोग सवेरे टहलने लगे, असभ्य लोग नम्र बन गए और किताबों से घृणा करने वाले ग्रंथ पढ़ने लगे। परंतु सुजानसिंह रूपी बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठकर परख रहा था कि इन बगुलों में असली हंस कौन है।

एक दिन उम्मीदवारों ने हॉकी का खेल आयोजित किया, जो संध्या तक बराबरी पर रहा। खेल के बाद पास के नाले में एक किसान अनाज से भरी गाड़ी लेकर फँस गया; कीचड़ एवं चढ़ाई के कारण गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ पा रही थी। अधिकांश खिलाड़ियों ने उसकी ओर स्वार्थ-भरी आँखों से देखा और चले गए, पर एक युवक – जिसके पैर में चोट लगी थी – ने कोट उतारकर कीचड़ में घुटनों तक धँसते हुए गाड़ी को बाहर निकाल दिया। किसान ने कृतज्ञ होकर कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” युवक को संदेह हुआ कि कहीं यह किसान सुजानसिंह तो नहीं; किसान ने मुस्कराकर कहा – “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”

महीना पूरा होने पर चुनाव का दिन आया। दरबार में सरदार सुजानसिंह ने घोषणा की कि इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी जिसके हृदय में दया हो और साथ ही आत्मबल; और यह गुण पंडित जानकीनाथ में मिला, जिन्होंने स्वयं घायल होकर भी एक गरीब किसान की गाड़ी दलदल से निकाली थी। ऐसा उदार, साहसी एवं दृढ़-संकल्प व्यक्ति ही गरीबों को कभी न सताएगा और दया एवं धर्म से कभी न हटेगा। इस प्रकार दिखावा करने वालों के बीच सच्चे गुण वाले जानकीनाथ इस अनोखी ‘परीक्षा’ में सफल हुए। कहानी यह संदेश देती है कि मनुष्य की असली परख उसके दिखावे से नहीं, बल्कि दया, उदारता एवं आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
रियासतराज्य, छोटा रजवाड़ा
दीवानराज्य का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी
विनयनम्र प्रार्थना
अवस्थाउम्र, आयु
नेकनामीअच्छी प्रतिष्ठा, सम्मान
नीतिकुशलनीति एवं प्रबंध में निपुण
सुयोग्यभली प्रकार योग्य
हृष्ट-पुष्टस्वस्थ एवं बलवान
मंदाग्निकमज़ोर पाचन-शक्ति
तहलका मचनाहलचल/खलबली मच जाना
सनदप्रमाण-पत्र, डिग्री
जौहरीरत्नों/हीरों का पारखी
बगुलादिखावा करने वाला (यहाँ ढोंगी)
हंसश्रेष्ठ/सच्चा गुणवान व्यक्ति
पुलनछोटा पुल
ललकारनाउत्साह से पुकारना/प्रेरित करना
उबारनासंकट से बचाना
वात्सल्यस्नेह, ममता
आत्मबलमन का बल, दृढ़ता
दृढ़ संकल्पपक्का इरादा
ईर्ष्यादूसरे की उन्नति से जलन
सत्कारआदर, सम्मान

मेरी समझ से

आइए, अब हम कहानी ‘परीक्षा’ के बारे में कुछ चर्चा कर लेते हैं।
(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए –

(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?

• सादगी

• उदारता

• बल

• नीतिकुशलता

उत्तर★ नीतिकुशलता।महाराज सुजानसिंह की नीतिकुशलता एवं अनुभव का बड़ा आदर करते थे, इसी कारण उन्हें ही नया दीवान खोजने (अपना उत्तराधिकारी चुनने) का कार्य सौंपा।

(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?

• परमात्मा की याद

• राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना

• बदनामी का भय

• चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना

उत्तर★ राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना (तथा ★ बदनामी का भय)।वृद्धावस्था के कारण उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही थी; साथ ही उन्हें यह भय भी था कि कोई भूल हो जाने पर उनकी जीवन-भर की नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तरयह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। हमने उत्तर कहानी के आरंभ में दिए गए दीवान के कथन के आधार पर चुने – उन्होंने स्वयं कहा कि अब उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही और कहीं भूल होने पर बुढ़ापे में दाग लग जाएगा।महाराज द्वारा उन्हें ही दीवान खोजने का कार्य सौंपने का कारण उनकी नीतिकुशलता एवं अनुभव बताया गया है। अलग-अलग साथी कहानी के अलग-अलग प्रसंगों पर ध्यान दे सकते हैं, इसलिए परस्पर चर्चा से सही तर्क स्पष्ट हो जाते हैं।

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।

उत्तरइस कहानी में दीवान का पद पाने के लिए उम्मीदवारों की एक महीने तक चुपचाप ‘परीक्षा’ ली जाती है, परंतु यह परीक्षा किसी कागज़ या लिखित प्रश्नों की नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण, दया, उदारता एवं आत्मबल की होती है।यही परीक्षा कहानी का केंद्र है; इसी से जानकीनाथ का असली गुण प्रकट होता है। इसलिए प्रेमचंद ने इस कहानी का नाम ‘परीक्षा’ रखा – क्योंकि पूरी कहानी एक सच्ची चरित्र-परीक्षा के इर्द-गिर्द घूमती है।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?

उत्तर (नमूना)मैं इस कहानी को ‘सच्चा गुण’ अथवा ‘असली परख’ नाम देना चाहूँगा।मैंने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि कहानी का संदेश यही है कि मनुष्य की असली पहचान उसके दिखावे से नहीं, बल्कि दया, उदारता एवं आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है। ये नाम कहानी के मूल भाव को सीधे प्रकट करते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

“इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में सुजानसिंह बताते हैं कि एक अच्छे दीवान (नेता) में दो गुणों का होना सबसे आवश्यक है – पहला, दया से भरा उदार हृदय और दूसरा, आत्मबल अर्थात् कठिनाई का साहस के साथ सामना करने की शक्ति।तात्पर्य यह कि केवल विद्या या डिग्री से कोई बड़ा पद का योग्य नहीं हो जाता; सच्चा गुणवान वही है जो दयालु भी हो और साहसी भी। ऐसे लोग संसार में बहुत कम मिलते हैं, और जो मिलते हैं वे अपने गुणों के कारण सम्मान के सर्वोच्च स्थान पर पहुँच जाते हैं।

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और लिखिए —

(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?

उत्तरनौकरी के इच्छुक लोगों ने स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए बनावटी प्रयत्न किए – जो नौ बजे तक सोते थे, वे सवेरे बगीचे में टहलकर ऊषा-दर्शन करने लगे; जो नौकरों पर रौब जमाते थे, वे ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर नम्रता से बात करने लगे।किताबों से घृणा करने वाले बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने में डूबे रहने लगे और हर कोई नम्रता एवं सदाचार का देवता बनने का दिखावा करने लगा। हॉकी का खेल आयोजित करना भी अपनी योग्यता दिखाने का ही एक प्रयत्न था। सभी यही सोचते थे कि किसी तरह एक महीना काट लें और पद पा लें।

(ख) “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं।” खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं?

उत्तरकिसान की घबराई हुई सूरत देखते ही युवक (खिलाड़ी) को समझ में आ गया कि किसान की अनाज से भरी गाड़ी नाले की चढ़ाई एवं कीचड़ में फँस गई है।उसे यह भी ज्ञात हो गया कि बैल कमज़ोर हैं, बोझ अधिक है, किसान अकेला है और बहुत देर से संकट में फँसा हुआ है; उसे किसी सहायक की तत्काल आवश्यकता है। इसीलिए वह बिना पूछे ही गाड़ी निकालने में जुट गया।

(ग) “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।” किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?

उत्तररियासत के कर्मचारियों एवं रईसों की आँखों में जानकीनाथ के लिए सत्कार (आदर) था, जबकि दूसरे उम्मीदवारों की आँखों में उनके प्रति ईर्ष्या थी।कर्मचारी एवं रईस जानकीनाथ के सच्चे गुणों एवं चयन का सम्मान कर रहे थे, इसलिए उनकी आँखों में आदर था। परंतु शेष उम्मीदवार स्वयं पद न पा सकने के कारण जलन अनुभव कर रहे थे, इसलिए उनकी आँखों में ईर्ष्या थी।

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि —

(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।

उत्तर“युवक ने किसान की तरफ़ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।”इस वाक्य से पता चलता है कि युवक को संदेह हो गया था कि किसान के वेश में स्वयं सुजानसिंह उनकी परीक्षा ले रहे हैं।

(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।

उत्तर“लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?”इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि उम्मीदवार सच्चे गुण अपनाना नहीं, बल्कि केवल एक महीने का दिखावा करके किसी तरह पद पा लेना चाहते थे।

कहानी की रचना

“लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।” इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं?

उत्तरचित्रात्मक भाषा: “प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक मेला-सा उतरता” तथा “गेंद किसी दफ्तर के अप्रेंटिस की तरह ठोकरें खाने लगी” जैसे वाक्य आँखों के सामने सजीव चित्र खड़ा कर देते हैं।मुहावरे एवं कहावतें: ‘तहलका मचाना’, ‘नाक में दम होना’, ‘बगुलों में हंस’ तथा ‘गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है’ जैसे प्रयोगों से भाषा प्रभावशाली बनी है।व्यंग्य एवं रोचकता: उम्मीदवारों के दिखावे का वर्णन हल्के व्यंग्य के साथ हुआ है। साथ ही किसान-वेश में सुजानसिंह की परीक्षा कहानी में रहस्य एवं उत्सुकता बनाए रखती है, जो प्रेमचंद की कहानी-कला की विशेषता है।

समस्या और समाधान

इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उसके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि —

(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तरसमस्या: उनके अनुभवी एवं योग्य दीवान सुजानसिंह वृद्धावस्था के कारण सेवा छोड़ रहे थे; अब रियासत के लिए वैसा ही योग्य नया दीवान खोजना कठिन था।समाधान: महाराज ने नया दीवान खोजने का कार्य स्वयं सुजानसिंह को ही सौंप दिया, क्योंकि वे ही योग्य व्यक्ति की सही परख कर सकते थे।

(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तरसमस्या: ऐसा योग्य उत्तराधिकारी खोजना जो केवल पढ़ा-लिखा न होकर सचमुच दयालु, उदार एवं आत्मबल वाला हो; क्योंकि सब उम्मीदवार दिखावा कर रहे थे।समाधान: सुजानसिंह ने एक महीने तक चुपचाप उम्मीदवारों के आचरण को परखा और किसान का वेश धारण कर वास्तविक परीक्षा ली, जिससे जानकीनाथ का सच्चा गुण प्रकट हो गया।

(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तरसमस्या: एक ही पद के लिए सैकड़ों उम्मीदवार थे और एक महीने तक उनके आचरण की देखभाल होनी थी; सबको स्वयं को सबसे योग्य सिद्ध करना था।समाधान (जो उन्होंने अपनाया): अधिकांश ने सच्चे गुण अपनाने के बजाय केवल अच्छा दिखने का दिखावा किया – नम्रता, पढ़ाई, सादगी आदि का बनावटी प्रदर्शन। परंतु यह झूठा समाधान असफल रहा, क्योंकि पद उसी को मिला जिसने सच्चे गुण दिखाए।

मन के भाव

“स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।” इस वाक्य में कुछ शब्द मन के भावों के नाम हैं (जो दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं)। कहानी में से ऐसे ही अन्य भावों के नाम खोजकर लिखिए।

उत्तर (भावों के नाम)स्वार्थ, मद (घमंड), उदारता, वात्सल्य, दया, साहस, आत्मबल, सहानुभूति, ईर्ष्या, सत्कार (आदर), संदेह, आशा, निराशा एवं नेकनामी।ये सभी शब्द किसी वस्तु या व्यक्ति के नहीं, बल्कि मन में उठने वाले भावों के नाम हैं, इसलिए इन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

अभिनय

कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)यह कक्षा में मिलकर करने वाली अभिनय गतिविधि है। इसके लिए गाड़ी फँसने वाला दृश्य चुनें – एक साथी ‘किसान’ तथा दूसरा ‘युवक’ बने।संवाद-नमूना: युवक – “मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?” किसान (झुककर) – “हुजूर, मैं आपसे कैसे कहूँ?” युवक – “तुम बैलों को साधो, मैं पहियों को ढकेलता हूँ।” किसान (हाथ जोड़कर) – “महाराज, आपने आज मुझे उबार लिया।” अभिनय करते समय हाव-भाव, स्वर एवं चेहरे के भाव पर ध्यान दें ताकि पात्रों की भावनाएँ सजीव लगें।

विपरीतार्थक शब्द

“विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।” ‘कम’ का विपरीत ‘अधिक’ है। इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों के सही विपरीतार्थक जोड़े बनाइए —

शब्द (स्तंभ 1)विपरीतार्थक शब्द (स्तंभ 2)
1. आनाजाना
2. गुणअवगुण
3. आदरअनादर
4. स्वस्थअस्वस्थ
5. कमअधिक
6. दयालुनिर्दयी
7. योग्यअयोग्य
8. हारजीत
9. आशानिराशा

कहावत

“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।” यह एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश/परिश्रम करने पर ही सफलता मिलती है। नीचे कुछ कहावतें एवं उनके भावार्थ दिए गए हैं। इन्हें कहानी से जोड़कर समझिए।

कहावतभावार्थ
अधजल गगरी छलकत जाएजिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा अधिक करता है।
अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेतसमय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।
एक अनार सौ बीमारकोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों।
जो गरजते हैं वे बरसते नहींजो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं, वे काम नहीं करते।
जहाँ चाह, वहाँ राहजब किसी काम को करने की सच्ची इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है।
कहानी से जोड़एक अनार सौ बीमार: विज्ञापन में तो एक ही नौकरी की बात थी, लेकिन उम्मीदवार हज़ारों आ गए – ठीक ‘एक अनार सौ बीमार’ की तरह।अधजल गगरी छलकत जाए: जिनमें वास्तविक गुण कम थे, वे ही दिखावा अधिक कर रहे थे।जो गरजते हैं वे बरसते नहीं: बढ़-चढ़कर दिखावा करने वाले उम्मीदवार असली परीक्षा में खरे नहीं उतरे, जबकि चुपचाप किसान की सहायता करने वाला जानकीनाथ सफल रहा।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

अनुमान या कल्पना से

(क) “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला” – यह विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उत्तरयह विज्ञापन सरदार सुजानसिंह ने निकलवाया होगा।ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि महाराज ने नया दीवान खोजने का कार्य उन्हीं को सौंपा था; विज्ञापन में लिखी सभी शर्तें (हृष्ट-पुष्ट होना, एक महीने तक आचार-विचार की देखभाल, विद्या से अधिक कर्तव्य पर ध्यान) उनकी अपनी परख-योजना से मेल खाती हैं।

(ख) “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।” विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?

उत्तरविज्ञापन में दीवान जैसा ऊँचा एवं प्रतिष्ठित पद दिया जा रहा था, जिसके लिए ग्रेजुएट होना भी अनिवार्य नहीं था और न ही कोई कड़ी शर्त (कैद) थी।इतना बड़ा अवसर सरल शर्तों पर मिलने के कारण देश भर के लोग अपना भाग्य आजमाने को उत्सुक हो उठे, इसीलिए विज्ञापन ने पूरे देश में हलचल मचा दी।

विज्ञापन

कहानी में दिए विज्ञापन को पढ़कर अपनी कल्पना से एक विज्ञापन बनाइए। साथ ही चर्चा कीजिए कि विज्ञापनों से लाभ होते हैं, हानि या दोनों?

उत्तर (नमूना विज्ञापन)आवश्यकता है – देवगढ़ रियासत के लिए सुयोग्य दीवान! ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं, परंतु हृष्ट-पुष्ट एवं स्वस्थ होना ज़रूरी। विद्या से अधिक कर्तव्य, दया एवं आत्मबल को महत्त्व दिया जाएगा। एक माह तक उम्मीदवारों के आचार-विचार की देखभाल होगी। इच्छुक सज्जन सरकार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थित हों।लाभ-हानि: विज्ञापन से सही जानकारी जल्दी एवं अधिक लोगों तक पहुँचती है तथा अच्छे अवसर/वस्तुओं का प्रचार होता है (लाभ); परंतु कभी-कभी विज्ञापन बढ़ा-चढ़ाकर या भ्रामक बातें भी दिखाते हैं और अनावश्यक खर्च के लिए प्रेरित करते हैं (हानि)। अतः विज्ञापनों से लाभ एवं हानि दोनों होते हैं।

आगे की कहानी

‘परीक्षा’ कहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा? आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए।

उत्तर (नमूना)दीवानी पाने के बाद पंडित जानकीनाथ ने अपने सच्चे गुणों के अनुसार ही काम किया। उन्होंने गरीब किसानों के लगान में राहत दी, न्याय को सरल बनाया और प्रजा की समस्याएँ स्वयं सुनने लगे।सुजानसिंह संतुष्ट होकर विश्राम करने लगे और रियासत दिन-प्रतिदिन उन्नति करने लगी। जो उम्मीदवार ईर्ष्या करते थे, वे भी जानकीनाथ की दयालुता एवं ईमानदारी देखकर उनका सम्मान करने लगे, और देवगढ़ में सुख-शांति बनी रही। (विद्यार्थी अपनी कल्पना से इसे अलग ढंग से भी लिख सकते हैं।)

आपकी बात

(क) यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते?

उत्तरमैं केवल डिग्री या बातचीत के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार एवं वास्तविक कर्मों को देखकर चुनता। उम्मीदवारों को कुछ समय तक साधारण परिस्थितियों में रखकर परखता कि वे संकट में दूसरों की सहायता करते हैं या नहीं।मैं उनकी सच्चाई, दया, परिश्रम एवं ज़िम्मेदारी की भावना पर ध्यान देता, क्योंकि असली योग्यता आचरण से प्रकट होती है, दिखावे से नहीं।

(ख) यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे?

उत्तरमॉनिटर चुनते समय मैं ऐसे साथी को चुनूँगा जो ईमानदार, अनुशासित, सहयोगी एवं सबके साथ समान व्यवहार करने वाला हो। उसमें नेतृत्व-क्षमता, साहस तथा दूसरों की सहायता करने की भावना होनी चाहिए।परख के लिए मैं देखूँगा कि वह कक्षा में किसकी मदद करता है, झगड़े सुलझाने में निष्पक्ष रहता है या नहीं, समय का पालन करता है या नहीं – और संभव हो तो छोटी-सी ज़िम्मेदारी देकर उसका आचरण जाँचूँगा।

नया-पुराना

“कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ।” अपने परिवार से चर्चा करके दी गई तालिका को पूरा कीजिए।

उत्तर (नमूना)
मेरे लिए नई वस्तुएँमेरे लिए पुरानी वस्तुएँबड़ों के लिए नई वस्तुएँबड़ों के लिए पुरानी वस्तुएँ
स्मार्टफोन ऐप, ऑनलाइन क्लासलट्टू, गिल्ली-डंडास्मार्टफोन, टी.वी.लालटेन, चक्की, रेडियो
यह व्यक्तिगत गतिविधि है; जो वस्तु बच्चों के लिए नई है वह बड़ों के लिए पुरानी हो सकती है, और इसके विपरीत भी। विद्यार्थी अपने परिवार से पूछकर तालिका भर सकते हैं।

वाद-विवाद

“आपस में हॉकी का खेल हो जाए। यह भी तो आखिर एक विद्या है।” क्या हॉकी जैसा खेल भी विद्या है? इस विषय पर कक्षा में वाद-विवाद कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)पक्ष में तर्क: हाँ, खेल भी एक विद्या है, क्योंकि इसमें अभ्यास, कौशल, अनुशासन, टीम-भावना एवं निर्णय-शक्ति की आवश्यकता होती है; खेल शरीर एवं मन दोनों को सशक्त बनाता है।विपक्ष में तर्क: कुछ लोग कह सकते हैं कि विद्या से तात्पर्य पुस्तकीय ज्ञान से है, और खेल मनोरंजन या व्यायाम तक सीमित है। (यह कक्षा में समूह बनाकर 5-5 मिनट बोलने वाली गतिविधि है, जिसमें हर सदस्य को भाग लेना चाहिए।)

अच्छाई और दिखावा

“हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था।” (क) लोग स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए क्या-क्या करते हैं? (ख) क्या ‘स्वयं को अच्छा दिखाने’ में और ‘स्वयं के अच्छा होने’ में कोई अंतर है?

उत्तर(क) लोग स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए साफ़-सुथरे रहना, मेहनत करना, कसरत करना, नम्रता से बात करना, अच्छे कपड़े पहनना तथा दूसरों की प्रशंसा करने जैसे कार्य करते हैं।(ख) हाँ, दोनों में बड़ा अंतर है। ‘स्वयं को अच्छा दिखाना’ केवल ऊपरी दिखावा है जो थोड़ी देर के लिए होता है, जबकि ‘स्वयं के अच्छा होने’ का अर्थ है मन एवं आचरण से सचमुच अच्छा होना – जो स्थायी एवं सच्चा गुण है। कहानी में जानकीनाथ सचमुच अच्छे थे, इसलिए परीक्षा में सफल हुए।

परिधान तरह-तरह के

“कोट उतार डाला” — ‘कोट’ एक परिधान है। कुछ अन्य परिधानों के नाम दिए गए हैं; उन्हें पहचानिए एवं बताइए कि आपके घर में इन्हें क्या कहते हैं।

उत्तर (परिचय)दुपट्टा – कंधे/सिर पर ओढ़ने का लंबा कपड़ा। गमछा – कंधे पर रखा जाने वाला पतला तौलिया-नुमा कपड़ा। लहँगा – घेरदार लंबा घाघरा।फिरन – कश्मीर में पहना जाने वाला लंबा ढीला चोगा। धोती – कमर पर लपेटा जाने वाला लंबा वस्त्र। अचकन – घुटनों तक लंबा बंद गले का कोट। पगड़ी – सिर पर बाँधा जाने वाला कपड़ा। (इन्हें अलग-अलग क्षेत्रों एवं घरों में भिन्न नामों से भी पुकारा जाता है – जैसे गमछा को ‘अंगोछा’ भी कहते हैं; विद्यार्थी अपने घर के नाम लिखें।)

आपकी परीक्षाएँ

हम सभी जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। अपने अनुभवों के आधार पर कुछ उदाहरण बताइए।

उत्तर (नमूना)जैसे – विद्यालय या घर में लिखित परीक्षा देना; किसी को साइकिल चलाकर दिखाकर अपनी सीख प्रमाणित करना; मित्र को किसी काम की चुनौती देना; अथवा माता-पिता द्वारा यह परखना कि बच्चा सौंपा गया काम ईमानदारी से करता है या नहीं।इन परीक्षाओं का उद्देश्य किसी की योग्यता, सच्चाई या सीखी हुई बात को जाँचना होता है। (विद्यार्थी अपने अनुभव लिखें कि किसने, कब, कैसे और क्यों परीक्षा ली।)

झरोखे से / खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)झरोखे से: पाठ के क्यू.आर. कोड से जुड़ी कहानी देश के होनहार बालक एवं उसके गुरु चाणक्य के बारे में है, जिसे प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है। इसमें भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है।खोजबीन के लिए: क्यू.आर. कोड की सहायता से प्रेमचंद के विषय में अधिक जाना जा सकता है तथा उनकी अन्य कहानियों — ईदगाह, नादान दोस्त एवं दो बैलों की कथा — का आनंद भी उठाया जा सकता है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. दीवान सुजानसिंह ने अपना पद छोड़ने का निश्चय क्यों किया?

उत्तरवृद्धावस्था के कारण उनमें राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही थी। उन्हें भय था कि कोई भूल हो जाने पर बुढ़ापे में उनकी जीवन-भर की नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निश्चय किया।

2. विज्ञापन में दीवान-पद के लिए कौन-सी मुख्य शर्तें रखी गई थीं?

उत्तरग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं था, परंतु उम्मीदवार का हृष्ट-पुष्ट एवं स्वस्थ होना ज़रूरी था। एक महीने तक उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की देखभाल होती तथा विद्या से अधिक कर्तव्य पर ध्यान दिया जाता।

3. युवक ने किसान की गाड़ी किस प्रकार नाले से बाहर निकाली?

उत्तरयुवक ने अपना कोट उतारकर डंडा एक ओर रख दिया और कीचड़ में घुटनों तक धँसते हुए पहियों को ज़ोर लगाकर ढकेला; उधर किसान ने बैलों को ललकारा। दोनों के साझा प्रयास से गाड़ी नाले के ऊपर चढ़ गई।

4. सुजानसिंह ने किसान का वेश क्यों धारण किया था?

उत्तरसुजानसिंह उम्मीदवारों की सच्ची परीक्षा लेना चाहते थे। किसान का वेश धारण कर वे यह परखना चाहते थे कि संकट में फँसे एक गरीब की सहायता कौन निःस्वार्थ भाव से करता है, क्योंकि असली दया एवं आत्मबल वैसे ही प्रकट होते हैं।

5. सुजानसिंह के अनुसार एक अच्छे दीवान में कौन-से दो गुण आवश्यक हैं?

उत्तरसुजानसिंह के अनुसार अच्छे दीवान में दो गुण आवश्यक हैं – पहला, दया से भरा उदार हृदय; और दूसरा, आत्मबल अर्थात् आपत्ति का वीरता के साथ सामना करने की शक्ति।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘परीक्षा’ कहानी का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘परीक्षा’ कहानी का मूल भाव यह है कि मनुष्य की असली पहचान उसके दिखावे या डिग्री से नहीं, बल्कि उसके सच्चे गुणों – दया, उदारता एवं आत्मबल – से होती है। दीवान-पद पाने आए सैकड़ों उम्मीदवार एक महीने तक स्वयं को अच्छा दिखाने का दिखावा करते रहे, परंतु उनका हृदय बदला नहीं।दूसरी ओर जानकीनाथ ने बिना किसी स्वार्थ के, घायल होते हुए भी एक गरीब किसान की गाड़ी कीचड़ से निकाली। इसी सच्चे आचरण के कारण वे चुने गए। कहानी सिखाती है कि सच्चा गुण कठिन समय में स्वयं प्रकट हो जाता है, और जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा आचरण की परीक्षा है, पुस्तकीय ज्ञान की नहीं।

7. इस कहानी के आधार पर बताइए कि सच्ची योग्यता क्या है और इसे कैसे परखा जा सकता है?

उत्तरकहानी के अनुसार सच्ची योग्यता केवल पढ़ाई-लिखाई या ऊपरी व्यवहार में नहीं, बल्कि व्यक्ति के हृदय की दया, उदारता, साहस एवं ज़िम्मेदारी की भावना में निहित है। ऐसा व्यक्ति संकट में दूसरों की सहायता करता है, स्वार्थ से ऊपर उठता है और दया एवं धर्म से कभी नहीं हटता।इसे केवल बातचीत या परीक्षाफल से नहीं परखा जा सकता; इसकी परख वास्तविक परिस्थितियों में व्यक्ति के कर्मों से होती है। सुजानसिंह ने किसान बनकर ऐसी ही व्यावहारिक परीक्षा ली। इससे सीख मिलती है कि किसी की योग्यता जाँचने के लिए उसके आचरण को कठिन एवं वास्तविक परिस्थितियों में देखना सबसे विश्वसनीय तरीका है।

8. कहानी में अधिकांश उम्मीदवारों और जानकीनाथ के व्यवहार में क्या अंतर था? इससे हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तरअधिकांश उम्मीदवार केवल दिखावे में लगे थे – आलसी लोग टहलने लगे, असभ्य लोग नम्र बनने लगे और किताबों से चिढ़ने वाले ग्रंथ पढ़ने का अभिनय करने लगे; जब किसान संकट में था, तब वे स्वार्थ-भरी आँखों से देखकर चले गए। उनमें मद एवं स्वार्थ था, पर उदारता एवं वात्सल्य नहीं।इसके विपरीत जानकीनाथ ने स्वयं घायल होते हुए भी निःस्वार्थ भाव से किसान की सहायता की। यह अंतर बताता है कि सच्चे गुण भीतर से आते हैं, बनावट से नहीं। इससे शिक्षा मिलती है कि हमें केवल अच्छा दिखने का नहीं, बल्कि सचमुच अच्छा बनने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि सच्चाई ही अंत में सफलता दिलाती है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘परीक्षा’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) जयशंकर प्रसाद

(ख) प्रेमचंद

(ग) सूरदास

(घ) रहीम

उत्तर(ख) प्रेमचंद।

2. कहानी की रियासत का नाम क्या था?

(क) देवगढ़

(ख) चित्तौड़

(ग) कानपुर

(घ) उज्जैन

उत्तर(क) देवगढ़।

3. दीवान सुजानसिंह ने अपना पद छोड़ने का क्या मुख्य कारण बताया?

(क) धन की कमी

(ख) वृद्धावस्था में राज-काज की शक्ति न रहना

(ग) महाराज से नाराज़गी

(घ) तीर्थ-यात्रा पर जाना

उत्तर(ख) वृद्धावस्था में राज-काज की शक्ति न रहना।

4. महाराज ने सुजानसिंह की प्रार्थना किस शर्त पर स्वीकार की?

(क) वे अपना सारा धन दान कर दें

(ख) वे रियासत के लिए नया दीवान स्वयं खोजें

(ग) वे एक वर्ष और काम करें

(घ) वे अपने पुत्र को दीवान बनाएँ

उत्तर(ख) वे रियासत के लिए नया दीवान स्वयं खोजें।

5. उम्मीदवारों की एक महीने तक किस बात की देखभाल की जानी थी?

(क) उनके धन की

(ख) उनकी डिग्रियों की

(ग) उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की

(घ) उनके पहनावे की

उत्तर(ग) उनके रहन-सहन एवं आचार-विचार की।

6. नाले में किसकी गाड़ी फँस गई थी?

(क) एक व्यापारी की

(ख) एक किसान की

(ग) एक सैनिक की

(घ) एक उम्मीदवार की

उत्तर(ख) एक किसान की।

7. गाड़ी निकालने वाले युवक के साथ उस समय क्या हुआ था?

(क) उसके पैर में चोट लगी थी

(ख) वह बहुत धनी था

(ग) वह ग्रेजुएट नहीं था

(घ) वह सोया हुआ था

उत्तर(क) उसके पैर में चोट लगी थी (फिर भी उसने किसान की सहायता की)।

8. “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” – यह क्या है?

(क) एक प्रश्न

(ख) एक कहावत

(ग) एक गीत

(घ) एक आदेश

उत्तर(ख) एक कहावत – जिसका अर्थ है कि परिश्रम करने पर ही सफलता मिलती है।

9. दीवानी (दीवान का पद) किसे मिली?

(क) मिस्टर ‘अ’ को

(ख) पंडित जानकीनाथ को

(ग) किसान को

(घ) किसी ग्रेजुएट को

उत्तर(ख) पंडित जानकीनाथ को।

10. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

(क) धन ही सबसे बड़ा गुण है

(ख) डिग्री से ही योग्यता मिलती है

(ग) मनुष्य की असली परख उसके सच्चे गुणों से होती है

(घ) दिखावा करना अच्छी बात है

उत्तर(ग) मनुष्य की असली परख उसके सच्चे गुणों से होती है।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(क), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(क), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा किसान का वेश धारण करके ली।

कारण (R): असली दया एवं आत्मबल वास्तविक संकट की स्थिति में ही प्रकट होते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): अधिकांश उम्मीदवार सचमुच सद्गुणी हो गए थे।

कारण (R): वे केवल एक महीने तक स्वयं को अच्छा दिखाने का दिखावा कर रहे थे।

उत्तर(घ) A गलत है (वे सचमुच सद्गुणी नहीं हुए, केवल दिखावा कर रहे थे), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): दीवानी पंडित जानकीनाथ को मिली।

कारण (R): उन्होंने घायल होते हुए भी निःस्वार्थ भाव से किसान की गाड़ी दलदल से निकाली थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): विज्ञापन के लिए ग्रेजुएट होना अनिवार्य था।

कारण (R): विज्ञापन में विद्या से अधिक कर्तव्य का विचार करने की बात कही गई थी।

उत्तर(घ) A गलत है (ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं था), जबकि R सही है।

5. अभिकथन (A): रियासत के कर्मचारियों की आँखों में जानकीनाथ के लिए सत्कार था।

कारण (R): वे जानकीनाथ के सच्चे गुणों एवं उनके चयन का सम्मान कर रहे थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • कहानी के पात्र याद रखें – महाराज, दीवान सुजानसिंह तथा सफल उम्मीदवार पंडित जानकीनाथ।
  • केंद्रीय संदेश दोहराएँ: असली परख दिखावे से नहीं, दया-उदारता-आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।
  • महत्त्वपूर्ण कथन याद रखें – “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है” तथा दया + आत्मबल वाला गुण।
  • उत्तर लिखते समय कहानी का उदाहरण (गाड़ी निकालने का प्रसंग) अवश्य जोड़ें।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

  • लेखक का नाम गड़बड़ न करें – कहानी ‘परीक्षा’ प्रेमचंद की है (क्यू.आर. वाली चाणक्य कथा जयशंकर प्रसाद की है)।
  • यह न लिखें कि जानकीनाथ को पद उनकी डिग्री के कारण मिला – उन्हें उनके सच्चे गुणों के कारण मिला।
  • किसान को साधारण किसान न समझें – वह वेश धारण किए स्वयं सुजानसिंह थे।
  • ‘बगुलों में हंस’ का अर्थ उलटा न लिखें – ‘हंस’ सच्चे गुणवान को कहा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘परीक्षा’ कहानी के लेखक कौन हैं?

‘परीक्षा’ कहानी के लेखक हिंदी के कथा-सम्राट प्रेमचंद (1880–1936) हैं, जिनका वास्तविक नाम धनपतराय था।

‘परीक्षा’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

कहानी का संदेश है कि मनुष्य की असली पहचान उसके दिखावे या डिग्री से नहीं, बल्कि दया, उदारता एवं आत्मबल जैसे सच्चे गुणों से होती है।

दीवानी (दीवान का पद) किसे और क्यों मिली?

दीवानी पंडित जानकीनाथ को मिली, क्योंकि उन्होंने स्वयं घायल होते हुए भी निःस्वार्थ भाव से एक गरीब किसान की फँसी गाड़ी दलदल से निकाली थी।

सुजानसिंह ने किसान का वेश क्यों धारण किया?

वे उम्मीदवारों की सच्ची परीक्षा लेना चाहते थे – यह परखने के लिए कि संकट में फँसे गरीब की निःस्वार्थ सहायता कौन करता है, क्योंकि दया एवं आत्मबल वास्तविक संकट में ही प्रकट होते हैं।

कहानी एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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