कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 2 – गोल (संस्मरण) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 2 ‘गोल’ का पूरा समाधान देता है। यह पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की आत्मकथा/संस्मरण का एक अंश है। यहाँ आपको पाठ का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर मिलेंगे।
लेखक से परिचय – मेजर ध्यानचंद
यह पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले अमर खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद (1905–1979) के संस्मरण का एक अंश है। उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ था; बाद में उनका परिवार झाँसी आकर बस गया। केवल 16 वर्ष की आयु में वे सेना में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हो गए और वहीं उन्होंने हॉकी खेलना सीखा। सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्होंने भारतीय टीम के कप्तान के रूप में स्वर्ण पदक दिलाया। उनके अद्भुत खेल-कौशल के कारण लोग उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे। भारत उनके जन्मदिन (29 अगस्त) को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाता है और देश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ उन्हीं के नाम पर दिया जाता है।
पाठ का सार
‘गोल’ पाठ महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के संस्मरण का एक अंश है, जिसमें वे अपने जीवन एवं खेल-भावना से जुड़ी यादें पाठकों के साथ साझा करते हैं। पाठ का आरंभ एक रोचक प्रसंग से होता है। ध्यानचंद बताते हैं कि सन् 1933 में वे ‘पंजाब रेजिमेंट’ की ओर से खेलते थे। एक दिन ‘पंजाब रेजिमेंट’ और ‘सैंपर्स एंड माइनर्स टीम’ के बीच मुकाबला हो रहा था। माइनर्स टीम के खिलाड़ी उनसे गेंद छीन नहीं पा रहे थे, तो उनमें से एक खिलाड़ी ने गुस्से में आकर हॉकी स्टिक उनके सिर पर दे मारी और उन्हें घायल होकर मैदान से बाहर जाना पड़ा।
थोड़ी देर बाद ध्यानचंद सिर पर पट्टी बँधवाकर फिर मैदान में लौट आए। उन्होंने उस खिलाड़ी से कहा कि वे इसका बदला अवश्य लेंगे। इससे वह खिलाड़ी घबरा गया। परंतु ध्यानचंद ने बदले के रूप में मारपीट नहीं की, बल्कि एक के बाद एक छह गोल कर दिए। खेल के बाद उन्होंने उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाकर समझाया कि खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं; उन्होंने अपना बदला गोल करके ले लिया है। इस प्रसंग से ध्यानचंद यह संदेश देते हैं कि बुरा काम करने वाला व्यक्ति हमेशा इस डर में रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
आगे ध्यानचंद अपनी सफलता का रहस्य बताते हैं – लगन, साधना और खेल-भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं। वे बताते हैं कि आरंभ में उन्हें खेल में रुचि नहीं थी; सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके खेल में निखार आया और उन्हें तरक्की मिलती गई। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया और भारत को स्वर्ण पदक मिला। ध्यानचंद की सबसे बड़ी विशेषता उनकी टीम-भावना थी – वे गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने साथी को दे देते, ताकि गोल करने का श्रेय उसे मिले। वे हमेशा मानते थे कि हार या जीत उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। पाठ के अंत में जुड़ा अंश ‘डाँडी या गोथा’ भील-भिलाला बच्चों के हॉकी जैसे एक स्वदेशी खेल का परिचय देता है, जिससे यह संदेश मिलता है कि खेल हर समाज एवं संस्कृति की पहचान होते हैं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संस्मरण | बीते समय की यादें, स्मृति-लेख |
| आत्मकथा | स्वयं द्वारा लिखी अपनी जीवन-कथा |
| धक्का-मुक्की | एक-दूसरे को धकेलना |
| नोंक-झोंक | हल्की-फुल्की कहा-सुनी, तकरार |
| मुकाबला | प्रतियोगिता, स्पर्धा |
| बेकार जाना | व्यर्थ होना, असफल होना |
| शर्मिंदा | लज्जित, शर्मसार |
| गुरु-मंत्र | सफलता का कोई गुप्त उपाय/रहस्य |
| लगन | किसी काम के प्रति गहरी रुचि एवं तत्परता |
| साधना | निरंतर अभ्यास एवं परिश्रम |
| नौसिखिया | जिसने अभी-अभी सीखना आरंभ किया हो |
| निखार | सुधार, खूबसूरती बढ़ना |
| तरक्की | उन्नति, आगे बढ़ना |
| छावनी | सैनिकों के रहने का क्षेत्र |
| रेजिमेंट | सेना की एक टुकड़ी/दल |
| लांस नायक | भारतीय सेना का एक पद (रैंक) |
| सूबेदार | स्वतंत्रता से पहले भारतीय सैन्य अधिकारियों का एक बड़ा पद |
| स्वर्ण पदक | सोने का तमगा, प्रथम स्थान का पुरस्कार |
| श्रेय | किसी अच्छे काम का यश/सम्मान |
| खेल-भावना | हार-जीत को समान भाव से लेने का स्वभाव |
| भू का भार | धरती पर बोझ (व्यर्थ व्यक्ति) |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?
• वे अत्यंत क्रोधी थे।
• वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
• उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
• वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?
• उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
• उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
• हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
• उनकी खेल भावना के कारण
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुने गए कुछ शब्दों को उनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. लांस नायक | भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है। |
| 2. बर्लिन ओलंपिक | वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था। |
| 3. पंजाब रेजिमेंट | स्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल। |
| 4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीम | अंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल। |
| 5. सूबेदार | स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था। |
| 6. छावनी | सैनिकों के रहने का क्षेत्र। |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।”
(ख) “मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”
सोच-विचार के लिए
संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
संस्मरण की रचना
“उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।” इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक पाठक से अपनी यादें साझा कर रहा हो। इस संस्मरण में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देती हैं।
(क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के
(क) “जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।” इसमें ‘जैसे-जैसे’ एवं ‘वैसे-वैसे’ शब्द-युग्म हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार आया है। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।
(ख) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।” इसमें के शब्द-युग्मों के दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हों।
(ग) नीचे दिए गए शब्दों को योजक चिह्न (-) की सहायता से लिखिए – जैसे ‘हार या जीत’ → हार-जीत।
| दिए गए शब्द | योजक चिह्न से |
|---|---|
| अच्छा या बुरा | अच्छा-बुरा |
| उत्तर और दक्षिण | उत्तर-दक्षिण |
| छोटा या बड़ा | छोटा-बड़ा |
| गुरु और शिष्य | गुरु-शिष्य |
| अमीर और गरीब | अमीर-गरीब |
| अमृत या विष | अमृत-विष |
(योजक चिह्न दो शब्दों को जोड़कर लिखने तथा उनके परस्पर संबंध को स्पष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाता है।)
बात पर बल देना
“मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।” और “मैंने तो अपना बदला ले लिया है।” इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? हम बात पर बल देने के लिए ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्य चुनकर लिखिए और बताइए कि यदि ये शब्द न होते तो अर्थ पर क्या प्रभाव पड़ता।
आपकी बात
आपकी बात
(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?
(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
समाचार-पत्र से
(क) समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ छपता है। पिछले सप्ताह के समाचार-पत्रों से अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। (ख) मान लीजिए आप एक खेल-संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं – अपने समूह के साथ उसकी कमेंटरी प्रस्तुत कीजिए।
डायरी का प्रारंभ
क्या आप भी अपने मन की बातों एवं विचारों को प्रतिदिन लिखना चाहते हैं? आज से ही डायरी लिखना प्रारंभ कीजिए।
आज की पहेली / झरोखे से
साझी समझ
(क) ‘डाँडी’ या ‘गोथा’ खेल अपने मित्रों के साथ खेलिए। (ख) अपने क्षेत्र के किसी एक स्वदेशी खेल के नियम इस प्रकार लिखिए कि कोई भी बच्चा उसे पढ़कर खेल सके।
खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा जाता है?
2. ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया जिसने उन्हें हॉकी स्टिक मारी थी?
3. ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र कौन-से हैं?
4. ‘डाँडी या गोथा’ खेल किसका खेल है और यह हॉकी से किस प्रकार मिलता-जुलता है?
5. ध्यानचंद की खेल-भावना किन बातों से प्रकट होती है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘गोल’ पाठ से हमें कौन-कौन-सी प्रेरणाएँ मिलती हैं? विस्तार से लिखिए।
7. मेजर ध्यानचंद के जीवन एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
8. “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।” इस कथन को पाठ के आधार पर समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘गोल’ पाठ किसके संस्मरण/आत्मकथा का अंश है?
(क) सचिन तेंदुलकर
(ख) मेजर ध्यानचंद
(ग) मिल्खा सिंह
(घ) कपिल देव
2. मेजर ध्यानचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
(क) सन् 1905, प्रयाग में
(ख) सन् 1933, झाँसी में
(ग) सन् 1936, बर्लिन में
(घ) सन् 1979, दिल्ली में
3. ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया?
(क) उसके सिर पर हॉकी मारकर
(ख) उससे झगड़ा करके
(ग) एक के बाद एक छह गोल करके
(घ) खेल छोड़कर चले जाने से
4. ध्यानचंद के अनुसार सफलता के सबसे बड़े मंत्र क्या हैं?
(क) धन एवं प्रसिद्धि
(ख) लगन, साधना एवं खेल-भावना
(ग) भाग्य एवं अवसर
(घ) बल एवं क्रोध
5. किस ओलंपिक में ध्यानचंद को भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया?
(क) 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक
(ख) 1932 का लॉस एंजेल्स ओलंपिक
(ग) 1936 का बर्लिन ओलंपिक
(घ) 1948 का लंदन ओलंपिक
6. ध्यानचंद गेंद को गोल के पास ले जाकर साथी को क्यों दे देते थे?
(क) उन्हें गोल करना नहीं आता था
(ख) ताकि साथी को गोल करने का श्रेय मिले
(ग) वे थक जाते थे
(घ) कप्तान का आदेश था
7. ध्यानचंद हार या जीत को किसकी मानते थे?
(क) केवल अपनी
(ख) केवल टीम के कप्तान की
(ग) पूरे देश की
(घ) दर्शकों की
8. ‘डाँडी या गोथा’ किनका खेल है?
(क) नगर के बच्चों का
(ख) भील-भिलाला बच्चों का
(ग) केवल सैनिकों का
(घ) विदेशी खिलाड़ियों का
9. भारत में मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन को किस रूप में मनाया जाता है?
(क) गणतंत्र दिवस
(ख) राष्ट्रीय खेल दिवस
(ग) शिक्षक दिवस
(घ) बाल दिवस
10. पाठ के अनुसार बुरा काम करने वाला व्यक्ति किस बात से डरता रहता है?
(क) कि वह हार जाएगा
(ख) कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी
(ग) कि उसे पुरस्कार नहीं मिलेगा
(घ) कि वह बीमार पड़ जाएगा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है।
कारण (R): उनका हॉकी खेलने का कौशल अद्भुत एवं असाधारण था।
2. अभिकथन (A): ध्यानचंद ने उस खिलाड़ी से मारपीट करके बदला लिया।
कारण (R): ध्यानचंद सच्ची खेल-भावना में विश्वास रखते थे।
3. अभिकथन (A): ध्यानचंद स्वयं से पहले अपने साथियों एवं देश को रखते थे।
कारण (R): वे गेंद साथी को देकर उसे गोल का श्रेय दिलाते थे और हार-जीत को देश की मानते थे।
4. अभिकथन (A): ध्यानचंद को आरंभ से ही हॉकी खेलने में बहुत रुचि थी।
कारण (R): सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था।
5. अभिकथन (A): ‘डाँडी या गोथा’ खेल काफी-कुछ हॉकी जैसा है।
कारण (R): इस खेल में लकड़ी से गेंद को मारकर विरोधी दल के क्षेत्र में ले जाया जाता है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- पाठ की महत्त्वपूर्ण तिथियाँ याद रखें – जन्म 1905 (प्रयाग), 1933 का प्रसंग, 1936 बर्लिन ओलंपिक।
- ‘सफलता के मंत्र’ – लगन, साधना एवं खेल-भावना – प्रायः पूछे जाते हैं, इन्हें क्रम सहित लिखें।
- उत्तर में ध्यानचंद की खेल-भावना एवं टीम-भावना को उदाहरण (गेंद साथी को देना, हार-जीत देश की) के साथ बताएँ।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- ‘गोल’ पाठ की विधा को कहानी लिख देना – यह एक संस्मरण (आत्मकथा का अंश) है।
- लेखक का नाम भूल जाना या गलत लिखना – इस पाठ के लेखक मेजर ध्यानचंद स्वयं हैं।
- यह लिख देना कि ध्यानचंद ने मारकर बदला लिया – उन्होंने छह गोल करके बदला लिया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘गोल’ पाठ के लेखक कौन हैं और इसकी विधा क्या है?
‘गोल’ पाठ ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचंद (1905–1979) के संस्मरण/आत्मकथा का एक अंश है। इसकी विधा संस्मरण (गद्य) है।
मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा जाता है?
उनके हॉकी खेलने का ढंग इतना अद्भुत एवं कुशल था कि बर्लिन ओलंपिक में लोग प्रभावित होकर उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहने लगे।
ध्यानचंद ने हॉकी मारने वाले खिलाड़ी से किस प्रकार बदला लिया?
उन्होंने मारपीट नहीं की, बल्कि एक के बाद एक छह गोल करके अपना बदला लिया और बाद में उस खिलाड़ी को खेल-भावना का महत्त्व भी समझाया।
ध्यानचंद के अनुसार सफलता के मंत्र क्या हैं?
उनके अनुसार लगन, साधना (निरंतर अभ्यास) और सच्ची खेल-भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।
पाठ एवं गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
