कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 3 – पहली बूँद (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 3 ‘पहली बूँद’ (कवि – गोपालकृष्ण कौल) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, शब्द एक अर्थ अनेक, शब्द पहेली आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 3 कवि: गोपालकृष्ण कौल विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – गोपालकृष्ण कौल

गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हिंदी के प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति तथा जीव-जंतुओं से जुड़ी अनेक मनोरम एवं सरल कविताएँ लिखीं। उनकी रचनाओं में सहज भाषा, सुंदर चित्र-विधान एवं कोमल भावनाएँ मिलती हैं, जो बच्चों के मन को सहज ही छू लेती हैं। अपनी एक अन्य कविता ‘हम कुछ सीखें’ में वे कहते हैं— “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।” प्रस्तुत कविता ‘पहली बूँद’ में उन्होंने वर्षा की पहली बूँद के धरती पर गिरने और सूखी धरती के पुनः हरी-भरी होने के अद्भुत दृश्य को बड़ी ही सजीवता से चित्रित किया है।

कविता (मूल पाठ)

‘पहली बूँद’ एक प्रकृति-वर्णन की कविता है, जिसमें वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद के हर्ष एवं सौंदर्य को दर्शाया गया है। “पहली बूँद धरा पर आई।।” पंक्ति टेक के रूप में बार-बार दोहराई गई है।

वह पावस का प्रथम दिवस जब,
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।

धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।

आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।

नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।

— गोपालकृष्ण कौल

कविता का सार

‘पहली बूँद’ कविता में कवि गोपालकृष्ण कौल ने वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद का अत्यंत सजीव एवं मनोरम चित्र खींचा है। ग्रीष्म की भीषण गर्मी से धरती सूख जाती है, उसके होंठ (अधर) मानो प्यास से फट जाते हैं। ऐसे में जब वर्षा-ऋतु का पहला दिन आता है और आकाश से पहली बूँद धरती पर गिरती है, तो सारी प्रकृति में एक नया उल्लास भर जाता है।

पहली बूँद के स्पर्श से ही धरती में से नया अंकुर फूट पड़ता है, मानो नया जीवन अँगड़ाई लेकर जाग उठा हो। यह बूँद सूखी धरती के लिए अमृत के समान है। धरती पर उगी हरी-हरी दूब (घास) ऐसी दिखती है मानो वसुंधरा के शरीर पर रोमावलि (रोएँ) उग आई हो; वह पुलकित होकर मुस्कुरा उठती है।

कवि आकाश और बादलों का बड़ा सुंदर चित्र खींचते हैं—आकाश में मानो सागर बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा हो। बादल नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई (यौवन) को जगा रहे हैं। नीला आकाश आँखों जैसा और काले बादल उसकी काली पुतलियों जैसे प्रतीत होते हैं। बादल करुणा से भरकर वर्षा रूपी आँसू बहाते हैं और इस प्रकार धरती की बहुत समय से चली आ रही प्यास को बुझा देते हैं।

वर्षा पाकर वही बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से शस्य-श्यामला अर्थात् हरी-भरी फसलों से लहलहाने को ललचा उठती है। इस प्रकार कविता पहली बूँद के माध्यम से प्रकृति में आए नवजीवन, हर्ष एवं सौंदर्य का सुंदर वर्णन करती है और हमें यह संदेश देती है कि जल जीवन का आधार है तथा वर्षा प्रकृति एवं जीव-जगत के लिए कितनी अमूल्य है।

भावार्थ

पहला पद: कवि कहते हैं कि वह वर्षा-ऋतु (पावस) का पहला दिन था जब आकाश से पहली बूँद धरती पर आई। उस पहली बूँद के पड़ते ही धरती में से नया अंकुर फूट पड़ा, मानो नया जीवन अँगड़ाई लेकर जाग उठा हो। अर्थात् वर्षा की एक ही बूँद ने सूखी धरती में नवजीवन का संचार कर दिया।

दूसरा पद: गर्मी से सूखी धरती के होंठ मानो प्यास से फट गए थे। उन सूखे होंठों पर वर्षा की बूँद अमृत के समान आकर गिरी। उससे धरती पर उगी हरी-हरी दूब (घास) ऐसी लगने लगी मानो वसुंधरा (धरती) के शरीर पर रोएँ (रोमावलि) उग आए हों; पुलकित होकर वह दूब मानो मुस्कुरा उठी।

तीसरा पद: कवि कल्पना करते हैं कि आकाश में मानो सागर बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा है (अर्थात् समुद्र का जल वाष्प बनकर बादलों के रूप में आकाश में छा गया है)। बादल नगाड़े बजाकर (गरजकर) धरती की तरुणाई अर्थात् यौवन एवं उत्साह को जगा रहे हैं।

चौथा पद: नीला आकाश आँखों के समान और काले बादल उन आँखों की काली पुतलियों के समान प्रतीत होते हैं। ये बादल करुणा से द्रवित होकर वर्षा रूपी आँसू बहाते हैं और इस प्रकार धरती की बहुत समय से चली आ रही (चिर) प्यास बुझा देते हैं। वर्षा पाकर वही बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से शस्य-श्यामला (हरी-भरी फसलों वाली) बनने को ललचा उठती है। इस प्रकार पहली बूँद धरती में नवजीवन एवं हर्ष भर देती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
पावसवर्षा-ऋतु, बरसात का मौसम
प्रथम दिवसपहला दिन
धरा / धरती / वसुंधरापृथ्वी, भूमि
अंकुरबीज से निकलने वाला नया कोंपल/पौधा
नव-जीवननया जीवन
अँगड़ाईआलस्य या नींद के बाद अंगों को तानना; यहाँ जाग उठने का भाव
अधरहोंठ
अमृतजीवन देने वाला रस; अमर बनाने वाला पेय
रोमावलिशरीर पर उगे रोओं की पंक्ति
दूबएक प्रकार की हरी घास
पुलकी-मुसकाईप्रसन्न होकर मुस्कुराई, रोमांचित हुई
अंबरआकाश, आसमान
जलधरजल धारण करने वाला; बादल अथवा समुद्र
नयनआँख, नेत्र
स्वर्णिमसुनहरा, सोने जैसा
परपंख
नगाड़ेएक प्रकार का बड़ा ढोल/वाद्ययंत्र
तरुणाईयौवन, जवानी
करुणा-विगलितदया से पिघला हुआ, दया से द्रवित
अश्रुआँसू
चिर-प्यासबहुत समय से लगी प्यास
शस्य-श्यामलाहरी-भरी फसलों से लहलहाती (धरती)
ललचाईलालायित हुई, इच्छुक हुई

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

• बादल

• अंकुर

• बूँद

• पावस

उत्तर★ अंकुर।पहली बूँद पड़ते ही धरती से जो नया अंकुर फूटता है, वही ‘नव-जीवन की अँगड़ाई’ लेता है, अर्थात् नया जीवन उसी अंकुर के रूप में जागता है।

2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है—

• बारिश की बूँदें

• नगाड़ा

• वृद्ध धरती

• बादल

उत्तर★ बादल।कवि ने नीले आकाश की तुलना नीली आँख से और उसमें छाए काले बादलों (जलधर) की तुलना आँख की काली पुतली से की है। अतः यहाँ ‘काली पुतली’ बादल हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली चर्चा-गतिविधि है। हमने उत्तर कविता के संदर्भ एवं शब्दों के भाव को आधार बनाकर चुने।पहले प्रश्न में ‘अँगड़ाई’ का अर्थ जाग उठना है और जागने वाली वस्तु ‘अंकुर’ ही है; दूसरे प्रश्न में नीले आकाश को आँख कहा गया है, इसलिए उसमें छाए काले बादल ही उसकी ‘काली पुतली’ हैं। मित्रों के साथ चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझ पाते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।

कविता की पंक्तियाँभावार्थ
1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम परमेघ-गर्जना
2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाईबादल
3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधरहरी दूब
4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाईआकाश
सही मिलान1. ‘उड़ता सागर’ (आकाश में छाए बादल) → बादल2. ‘नगाड़े’ (बादलों की गरज) → मेघ-गर्जना3. ‘जलधर’ (नीले आकाश में जल धारण करने वाले) → आकाश (यहाँ आकाश में छाए जलधर)4. ‘वसुंधरा की रोमावलि-सी’ → हरी दूब(संकेत: ‘सागर’ आकाश में उड़ता दिखाई देता है, इसलिए वह बादल है; ‘नगाड़े’ की ध्वनि मेघ-गर्जना है; ‘जलधर’ नीले आकाश में फैला है; और धरती की रोमावलि के समान हरी दूब है।)

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

(क) “आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में कवि कल्पना करते हैं कि मानो सागर बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है, अर्थात् समुद्र का जल वाष्प बनकर बादलों के रूप में आकाश में छा गया है।बादल नगाड़े बजाकर (जोर से गरजकर) धरती की तरुणाई अर्थात् यौवन, उत्साह एवं नवजीवन को जगा रहे हैं। यह प्रकृति में वर्षा के आगमन के उल्लास का सुंदर चित्र है।

(ख) “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।”

अर्थ/विचारकवि नीले आकाश की तुलना नीली आँख से और उसमें छाए काले बादलों की तुलना आँख की काली पुतली से करते हैं।ये बादल मानो दया से द्रवित होकर वर्षा रूपी आँसू बहाते हैं और इस प्रकार धरती की बहुत समय से लगी (चिर) प्यास बुझा देते हैं। यह मानवीकरण (बादलों का करुणा से रोना) कविता को सजीव एवं भावपूर्ण बना देता है।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर लिखिए—

(क) बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?

उत्तरबारिश की पहली बूँद पड़ते ही सूखी धरती से नया अंकुर फूट पड़ता है, मानो नया जीवन अँगड़ाई लेकर जाग उठा हो।धरती पर हरी-हरी दूब उग आती है, जो वसुंधरा की रोमावलि के समान पुलकित होकर मुस्कुराती है। बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से शस्य-श्यामला (हरी-भरी) बनने को ललचा उठती है। इस प्रकार अंकुर का फूटना, दूब का मुस्कुराना तथा धरती का हरा-भरा होने को लालायित होना—ये सब धरती के हर्ष को प्रकट करते हैं।

(ख) कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?

उत्तरकविता में नीले आकाश को नीली आँख (नयन) के समान और काले बादलों (जलधर) को उस आँख की काली पुतली के समान बताया गया है।इसके अतिरिक्त आकाश में छाए बादलों को बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ता हुआ सागर भी कहा गया है तथा बादलों की गरज को नगाड़ों की ध्वनि के समान बताया गया है।

कविता की रचना

‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव है, परंतु इसका भावार्थ समझने पर सुंदर अर्थ निकलता है। ऐसे प्रयोग कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं। इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानिए।

उत्तर1. “आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर” – भावार्थ: समुद्र का जल बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर बादल बनकर आकाश में छा गया है।2. “धरती के सूखे अधरों पर” – भावार्थ: सूखी धरती की दरारें मानो उसके प्यास से फटे हुए होंठ हैं।3. “वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई” – भावार्थ: धरती पर उगी हरी घास मानो वसुंधरा के शरीर के रोएँ हैं जो प्रसन्न होकर मुस्कुरा उठे।4. “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर” – भावार्थ: नीला आकाश आँख और काले बादल उसकी काली पुतली के समान हैं।5. “बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई” – भावार्थ: बादल नगाड़ों जैसी गरज से धरती की तरुणाई (यौवन) को जगा रहे हैं। ऐसे प्रयोग कविता को आनंददायक एवं सजीव बना देते हैं।

शब्द एक अर्थ अनेक

‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ पंक्ति में ‘फूटने’ का अर्थ पौधे का अंकुरण है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में होता है। अब ‘फूट’ शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों।

उत्तरअंकुरित होना: वर्षा होते ही खेत में बीज फूट पड़े।टूटना: हाथ से गिरकर मिट्टी का घड़ा फूट गया।आपसी मतभेद/दरार: अंग्रेज़ों की नीति थी—फूट डालो और राज करो।निकल पड़ना (आँसू/रोना): दुखद समाचार सुनते ही वह फूट-फूटकर रोने लगा।एक रोग (नेत्र-रोग): गंदे पानी से आँखें फूट सकती हैं।

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ पंक्ति में ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’ = जल + धर, अर्थात् जल को धारण करने वाला। ‘धर’ से बने कुछ शब्द एवं उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।

शब्दअर्थ (किसको धारण करने वाला)
जलधरजल को धारण करने वाला – बादल/समुद्र
गिरिधरगिरि (पर्वत) को धारण करने वाला – श्रीकृष्ण
विषधरविष को धारण करने वाला – साँप
हलधरहल को धारण करने वाला – किसान/बलराम
धुरंधरधुरी (भार/दायित्व) को धारण करने वाला – श्रेष्ठ, निपुण
वसुंधराधन/रत्नों को धारण करने वाली – पृथ्वी

शब्द पहेली

दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजिए—

गादूअं
ड़ाश्रु
उत्तरक. एक प्रकार का वाद्य यंत्र – नगाड़ाख. आँख के लिए एक अन्य शब्द – नयनग. जल को धारण करने वाला – जलधरघ. एक प्रकार की घास – दूबङ. आँसू का समानार्थी – अश्रुच. आसमान का समानार्थी शब्द – अंबर

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

आपकी बात

(i) बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए। (ii) आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों?

उत्तर (नमूना)बारिश आने पर: बारिश आने पर मन प्रसन्नता एवं ताज़गी से भर जाता है। गर्मी से राहत मिलती है, चारों ओर हरियाली छा जाती है, मिट्टी की सोंधी महक मन मोह लेती है और कागज़ की नाव चलाने, झूला झूलने एवं वर्षा में भीगने का आनंद आता है।प्रिय ऋतु: मुझे वर्षा-ऋतु सबसे अधिक प्रिय है, क्योंकि यह गर्मी से राहत देती है, धरती को हरा-भरा बनाती है, खेतों में फसलें लहलहाती हैं और पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं को नया जीवन मिलता है। (यह आपका अपना अनुभव-आधारित उत्तर है; आप अपनी पसंद की ऋतु भी लिख सकते हैं।)

समाचार माध्यमों से

अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है, उसका आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह संवाददाता (रिपोर्टर) की तरह ‘आँखों देखा हाल’ सुनाने की गतिविधि है। आप किसी एक मौसम-घटना (जैसे भारी बारिश से जल-भराव या भीषण गर्मी) को चुनिए।नमूना: “नमस्कार! मैं अपने मोहल्ले से बता रहा हूँ। कल रात से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से गलियों में पानी भर गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा सके, वाहन रुक गए हैं, परंतु किसान भाई प्रसन्न हैं क्योंकि उनके खेतों को भरपूर पानी मिल गया है।” इसी प्रकार स्थान, समय एवं लोगों की प्रतिक्रिया जोड़कर अपना समाचार तैयार कीजिए।

इन्हें भी जानें (नगाड़ा)

कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है। नगाड़े के विषय में जानिए।

जानकारीनगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है। ढोलक, नगाड़ा, डमरू एवं डफली जैसे कुछ वाद्ययंत्रों को उन पर चोट कर बजाया जाता है।नगाड़ा प्रायः लोक-उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है; होली जैसे लोकपर्व के गीतों में इसका प्रयोग होता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है, जिसमें एक की ध्वनि पतली तथा दूसरे की मोटी होती है।

खोजबीन

आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह खोजबीन एवं समूह-चर्चा की गतिविधि है। उत्सवों में प्रायः ढोल, नगाड़ा, शहनाई, ढोलक, तबला, मंजीरा, बैंड-बाजा एवं हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं।इनमें से किसी एक को चुनकर पता लगाइए कि वह कैसे बजाया जाता है, किस अवसर पर प्रयोग होता है तथा किस सामग्री से बनता है, और अपने समूह में चर्चा कीजिए।

सृजन / आइए इंद्रधनुष बनाएँ

चित्र को ध्यान से देखकर उसे एक नाम दीजिए तथा एक सुंदर इंद्रधनुष बनाकर उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)ये रचनात्मक (सृजन) गतिविधियाँ हैं। चित्र को देखकर उसका कोई सार्थक नाम दीजिए, जैसे – ‘वर्षा का उपहार’ या ‘पहली फुहार’।नमूना कविता: “सात रंगों का प्यारा धनुष, आसमान पर छाया है। / वर्षा के बाद धरती ने, मानो हार पहना पाया है।” आप इसे कोई प्यारा-सा नाम भी दीजिए, जैसे – ‘रंगों की पुलिया’।

झरोखे से

‘झरोखे से’ में अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता ‘एक बूँद’ दी गई है। इसका भाव बताइए।

उत्तर‘एक बूँद’ में कवि एक बूँद की कल्पना करते हैं जो बादल की गोद से निकलकर थोड़ा आगे बढ़ती है, तो मन-ही-मन सोचने लगती है—“आह! मैंने अपना घर (बादल) क्यों छोड़ दिया?”यह छोटी-सी कविता बताती है कि नया एवं अनजाना मार्ग चुनने पर मन में आशंका एवं संकोच होना स्वाभाविक है, फिर भी आगे बढ़ना ही जीवन है। (पहली बूँद से इसका सुंदर संबंध है—दोनों में ‘बूँद’ ही केंद्र में है।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘पहली बूँद’ कविता के कवि कौन हैं और कविता का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर‘पहली बूँद’ कविता के कवि गोपालकृष्ण कौल हैं। इसका मुख्य विषय वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद से प्रकृति में आए नवजीवन, हर्ष एवं सौंदर्य का वर्णन है।

2. पहली बूँद को कवि ने ‘अमृत-सी’ क्यों कहा है?

उत्तरगर्मी से सूखी एवं प्यासी धरती के लिए वर्षा की पहली बूँद जीवनदायिनी होती है। जैसे अमृत मृतप्राय को जीवन देता है, वैसे ही यह बूँद सूखी धरती में नवजीवन भर देती है, इसलिए कवि ने इसे ‘अमृत-सी’ कहा है।

3. ‘धरती के सूखे अधरों’ से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तरगर्मी में धरती की मिट्टी सूखकर फट जाती है। कवि इन सूखी दरारों को धरती के प्यास से फटे हुए होंठ (अधर) कहते हैं। इस मानवीकरण से धरती की प्यास एवं व्याकुलता का सजीव चित्र उभरता है।

4. बादलों को ‘करुणा-विगलित अश्रु बहाने वाला’ क्यों कहा गया है?

उत्तरकवि बादलों का मानवीकरण करते हैं। बादल मानो धरती की प्यास देखकर दया से पिघल जाते हैं और वर्षा रूपी आँसू बहाकर उसकी बहुत समय से लगी प्यास बुझा देते हैं—इसी कारण उन्हें ‘करुणा-विगलित अश्रु बहाने वाला’ कहा गया है।

5. ‘शस्य-श्यामला’ का क्या अर्थ है और कविता में यह किसके लिए आया है?

उत्तर‘शस्य-श्यामला’ का अर्थ है हरी-भरी फसलों से लहलहाती हुई। कविता में यह धरती के लिए आया है—वर्षा पाकर बूढ़ी एवं सूखी धरती फिर से हरी-भरी फसलों वाली बनने को ललचा उठती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘पहली बूँद’ कविता का सार/मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘पहली बूँद’ कविता में कवि गोपालकृष्ण कौल वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद का मनोरम चित्र खींचते हैं। गर्मी से सूखी धरती के होंठ मानो प्यास से फट गए थे। ऐसे में पहली बूँद अमृत के समान आकर गिरती है और धरती से नया अंकुर फूट पड़ता है, मानो नया जीवन अँगड़ाई ले रहा हो।हरी दूब वसुंधरा की रोमावलि-सी पुलकित होकर मुस्कुरा उठती है। आकाश में बादल बिजली रूपी सुनहरे पंख लगाकर उड़ते सागर जैसे दिखते हैं और नगाड़ों-सी गरज से धरती की तरुणाई जगाते हैं। नीला आकाश आँख और काले बादल उसकी पुतली जैसे हैं, जो करुणा से वर्षा रूपी आँसू बहाकर धरती की चिर-प्यास बुझाते हैं। अंततः धरती फिर से शस्य-श्यामला बनने को ललचा उठती है। यह कविता प्रकृति के सौंदर्य एवं जल के महत्त्व का सुंदर संदेश देती है।

7. इस कविता में प्रयुक्त मानवीकरण (प्रकृति को मनुष्य की तरह दिखाना) के सौंदर्य को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरइस कविता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कवि ने प्रकृति को मनुष्य की तरह सजीव रूप में चित्रित किया है, जिसे ‘मानवीकरण’ कहते हैं। इससे निर्जीव प्रकृति भी सजीव एवं भावपूर्ण लगने लगती है।कवि धरती के ‘सूखे अधरों’ (होंठ) की बात करते हैं, मानो धरती प्यासी एक स्त्री हो। हरी दूब ‘पुलकी-मुसकाई’, अर्थात् मानो वह प्रसन्न होकर मुस्कुराई। बादल ‘करुणा-विगलित’ होकर आँसू बहाते हैं, मानो वे दयालु प्राणी हों। बूढ़ी धरती फिर हरी-भरी बनने को ‘ललचाई’। इन सभी प्रयोगों से कविता में सजीवता, कोमलता एवं भावुकता आ जाती है और वर्षा का दृश्य पाठक की आँखों के सामने साकार हो उठता है। यही इस कविता का काव्य-सौंदर्य है।

8. वर्षा (पानी) हमारे जीवन एवं प्रकृति के लिए क्यों आवश्यक है? कविता के आधार पर लिखिए।

उत्तर‘पहली बूँद’ कविता हमें वर्षा एवं जल का महत्त्व समझाती है। कविता में पहली बूँद के गिरते ही सूखी धरती में नवजीवन भर जाता है—अंकुर फूटते हैं, दूब उगती है और धरती की चिर-प्यास बुझ जाती है। इससे स्पष्ट होता है कि जल जीवन का आधार है।वर्षा से नदियाँ, तालाब एवं कुएँ भर जाते हैं, खेतों में फसलें लहलहाती हैं, पेड़-पौधे हरे-भरे होते हैं तथा मनुष्य, पशु-पक्षी एवं समस्त जीव-जंतुओं को पीने का पानी मिलता है। वर्षा के बिना धरती सूखकर बंजर हो जाएगी, फसलें नहीं उगेंगी और जीवन कठिन हो जाएगा। इसलिए हमें जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए, वर्षा-जल को संचित करना चाहिए तथा पेड़ लगाकर वर्षा को बढ़ावा देना चाहिए। यही इस कविता का व्यावहारिक संदेश है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘पहली बूँद’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुमित्रानंदन पंत

(ख) गोपालकृष्ण कौल

(ग) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

(घ) सूरदास

उत्तर(ख) गोपालकृष्ण कौल।

2. कविता के अनुसार पहली बूँद किस दिन धरती पर आई?

(क) ग्रीष्म के अंतिम दिन

(ख) पावस (वर्षा) के पहले दिन

(ग) शरद के पहले दिन

(घ) बसंत के पहले दिन

उत्तर(ख) पावस (वर्षा) के पहले दिन।

3. पहली बूँद पड़ते ही धरती से क्या फूट पड़ा?

(क) फूल

(ख) अंकुर

(ग) झरना

(घ) पत्थर

उत्तर(ख) अंकुर।

4. कवि ने वर्षा की बूँद की तुलना किससे की है?

(क) मोती से

(ख) अमृत से

(ग) हीरे से

(घ) ओस से

उत्तर(ख) अमृत से।

5. ‘अधर’ शब्द का अर्थ है—

(क) आँख

(ख) होंठ

(ग) हाथ

(घ) कान

उत्तर(ख) होंठ।

6. ‘वसुंधरा की रोमावलि-सी’ किसे कहा गया है?

(क) बादल को

(ख) हरी दूब को

(ग) बिजली को

(घ) नगाड़े को

उत्तर(ख) हरी दूब को।

7. कविता में नीले आकाश (अंबर) की तुलना किससे की गई है?

(क) सागर से

(ख) नीली आँख (नयन) से

(ग) फूल से

(घ) दर्पण से

उत्तर(ख) नीली आँख (नयन) से।

8. ‘जलधर’ का शाब्दिक अर्थ है—

(क) जल में रहने वाला

(ख) जल को धारण करने वाला

(ग) जल पीने वाला

(घ) जल बहाने वाला

उत्तर(ख) जल को धारण करने वाला (बादल/समुद्र)।

9. बादल नगाड़े बजाकर धरती की किसे जगा रहे हैं?

(क) नींद को

(ख) तरुणाई (यौवन) को

(ग) प्यास को

(घ) उदासी को

उत्तर(ख) तरुणाई (यौवन) को।

10. वर्षा पाकर बूढ़ी धरती फिर से क्या बनने को ललचाई?

(क) मरुस्थल

(ख) शस्य-श्यामला (हरी-भरी)

(ग) पथरीली

(घ) सूखी

उत्तर(ख) शस्य-श्यामला (हरी-भरी)।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): पहली बूँद को कवि ने अमृत के समान कहा है।

कारण (R): वर्षा की बूँद सूखी एवं प्यासी धरती में नवजीवन भर देती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता में आकाश को आँख और बादलों को उसकी काली पुतली बताया गया है।

कारण (R): कवि ने “नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर” पंक्ति लिखी है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): पहली बूँद पड़ते ही धरती से फूल खिल उठा।

कारण (R): कविता में “अंकुर फूट पड़ा धरती से” पंक्ति आई है।

उत्तर(घ) A गलत है (धरती से फूल नहीं, बल्कि अंकुर फूटा), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): कविता में बादलों का मानवीकरण किया गया है।

कारण (R): बादल ‘करुणा-विगलित’ होकर अश्रु (आँसू) बहाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘पहली बूँद’ एक प्रकृति-वर्णन की कविता है।

कारण (R): यह कविता देश-प्रेम एवं वीरता का वर्णन करती है।

उत्तर(ग) A सही है, परंतु R गलत है (यह कविता प्रकृति एवं वर्षा का वर्णन करती है, देश-प्रेम या वीरता का नहीं)।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव (Exam Tips)

  • कविता का मूल पाठ एवं टेक “पहली बूँद धरा पर आई।।” अच्छी तरह याद रखें—इससे भाव-स्पष्टीकरण के प्रश्न सरल हो जाते हैं।
  • मानवीकरण के उदाहरण (सूखे अधर, दूब का मुस्कुराना, बादलों का अश्रु बहाना) रटने के बजाय भाव सहित समझें।
  • शब्दार्थ—पावस, अधर, वसुंधरा, जलधर, अंबर, शस्य-श्यामला—ये बार-बार पूछे जाते हैं, अतः सटीक अर्थ याद रखें।
  • ‘जलधर’, ‘गिरिधर’ जैसे ‘धर’ वाले शब्द व्याकरण-खंड में भी काम आते हैं।

सामान्य भूलें (Common Mistakes)

  • ‘पावस’ को ‘प्रातःकाल’ समझ लेना—इसका सही अर्थ वर्षा-ऋतु है।
  • पहली बूँद से ‘फूल’ खिलने लिखना—कविता में ‘अंकुर’ फूटता है, फूल नहीं।
  • ‘अधर’ का अर्थ ‘आधा/अधूरा’ लिखना—यहाँ इसका अर्थ ‘होंठ’ है।
  • ‘काली पुतली’ को बारिश की बूँद समझना—यह वास्तव में बादल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘पहली बूँद’ कविता के कवि कौन हैं?

‘पहली बूँद’ कविता के कवि गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) हैं, जो बच्चों के लिए प्रकृति एवं देश-प्रेम से जुड़ी सरल कविताएँ लिखने वाले प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार थे।

‘पहली बूँद’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव वर्षा-ऋतु के पहले दिन धरती पर गिरने वाली पहली बूँद से प्रकृति में आए नवजीवन, हर्ष एवं सौंदर्य का वर्णन है। यह जल के महत्त्व को भी दर्शाती है।

कवि ने पहली बूँद को ‘अमृत-सी’ क्यों कहा है?

क्योंकि सूखी एवं प्यासी धरती के लिए वर्षा की पहली बूँद जीवनदायिनी होती है; जैसे अमृत जीवन देता है, वैसे ही यह बूँद धरती में नवजीवन भर देती है।

कविता में ‘जलधर’ का क्या अर्थ है?

‘जलधर’ का अर्थ है जल को धारण करने वाला, अर्थात् बादल अथवा समुद्र। कविता में आकाश में छाए बादलों के लिए यह शब्द आया है।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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