कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 5 – रहीम के दोहे (दोहे) अर्थ, भावार्थ एवं प्रश्न-उत्तर (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 5 ‘रहीम के दोहे’ (रचनाकार – अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’) का पूरा समाधान देता है – सभी दोहों का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की समस्त गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, शब्दों की बात, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 6 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 5 रचनाकार: अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ विधा: दोहे सत्र: 2026–27

कवि परिचय – रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना)

रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। वे भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था और मृत्यु 17वीं शताब्दी में। उन्होंने नीति, भक्ति एवं प्रेम से संबंधित सुंदर रचनाएँ कीं। रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा – दोनों भाषाओं में कविताएँ लिखीं। वे रामायण, महाभारत आदि प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में गिने जाने वाले रहीम के नीति-दोहे आज भी आम जन-जीवन में बहुत लोकप्रिय हैं और लोग अपनी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए इन्हें कहते हैं। (संदर्भ – रहीम ग्रंथावली, संपादक – विद्यानिवास मिश्र।)

दोहे (मूल पाठ)

पाठ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं। प्रत्येक दोहा जीवन की कोई-न-कोई सीख देता है। नीचे दोहे ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं।

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥1॥

तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥2॥

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥3॥

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥4॥

रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥5॥

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥6॥

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥7॥

— अब्दुर्रहीम खानखाना

सार एवं भावार्थ

पाठ ‘रहीम के दोहे’ में रहीम द्वारा रचित सात नीति-दोहे संकलित हैं, जो छोटे-छोटे शब्दों में जीवन की बड़ी सीख देते हैं। पहले दोहे में रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देखकर छोटी वस्तु को त्याग नहीं देना चाहिए, क्योंकि जहाँ सुई से काम चलता है वहाँ तलवार बेकार है – अर्थात् हर छोटी-बड़ी वस्तु एवं व्यक्ति का अपना-अपना महत्व होता है। दूसरे दोहे में वे प्रकृति से सीख देते हैं कि पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते; इसी प्रकार सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के हित (परोपकार) के लिए संचित करते हैं।

तीसरे दोहे में रहीम प्रेम के धागे को सहेजकर रखने की बात कहते हैं – इसे झटके से तोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि टूटा धागा फिर जुड़ता भी है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है; अर्थात् रिश्तों में दरार आ जाने पर पहले जैसा प्रेम नहीं रहता। चौथे दोहे में वे ‘पानी’ (सम्मान, जल, चमक) की रक्षा करने को कहते हैं, क्योंकि पानी (मान) चले जाने पर मोती, मनुष्य और चूना – कोई भी अपना मूल्य नहीं रखता। पाँचवें दोहे में रहीम कहते हैं कि थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी है, क्योंकि उसमें हित (अपने) और अनहित (पराये) करने वालों की पहचान हो जाती है।

छठे दोहे में वे जीभ को संभालकर बोलने की सीख देते हैं – बावली जीभ तो कुछ भी कह जाती है (स्वर्ग-पाताल एक कर देती है) और स्वयं मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, परंतु उसके कहे का दंड (जूती की मार) सिर (कपाल) को भुगतना पड़ता है। सातवें दोहे में रहीम सच्चे मित्र की पहचान बताते हैं – संपत्ति (अच्छे दिनों) में तो अनेक प्रकार के सगे-संबंधी बन जाते हैं, परंतु जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरें, वही सच्चे मित्र होते हैं। इस प्रकार ये दोहे विनम्रता, परोपकार, प्रेम, मान-सम्मान, वाणी-संयम एवं सच्ची मित्रता का संदेश देते हैं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
बड़ेनबड़ों को, बड़ी वस्तु को
लघुछोटा, छोटी वस्तु
डारित्याग देना, फेंक देना
तलवारितलवार
तरुवरवृक्ष, पेड़
सरवरसरोवर, तालाब
पियहिंपीते हैं
पर काज हितदूसरों के काम/भले के लिए
सँचहिसंचित करते हैं, जोड़ते हैं
सुजानसज्जन, समझदार व्यक्ति
छिटकायझटककर, झटके से
परि जायपड़ जाती है
पानी(यहाँ) मान-सम्मान, जल, चमक
सूनसूना, व्यर्थ
न ऊबरैनहीं उबरता, मूल्य नहीं रहता
मानुषमनुष्य, मानव
चूनचूना, आटा
बिपदा / बिपतिविपत्ति, संकट
थोरेथोड़े
हित-अनहितभला करने वाले एवं बुरा चाहने वाले
जिह्वाजीभ
बावरीबावली, पागल
सरग-पतालस्वर्ग एवं पाताल (एक कर देना)
कपालसिर, माथा
कसौटीपरख, जाँच का पैमाना
साँचे मीतसच्चे मित्र

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है—

• सोच-समझकर बोलना चाहिए।

• मधुर वाणी में बोलना चाहिए।

• धीरे-धीरे बोलना चाहिए।

• सदा सच बोलना चाहिए।

उत्तर★ सोच-समझकर बोलना चाहिए।इस दोहे में रहीम कहते हैं कि बिना सोचे-समझे बोली गई बात स्वयं जीभ को तो कुछ नहीं होता, पर उसका दंड सिर को भुगतना पड़ता है। इसलिए सीख यही है कि हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए।

(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?

• तलवार सुई से बड़ी होती है।

• सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।

• तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।

• हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।

उत्तर★ हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु पाकर छोटी को त्यागना ठीक नहीं; जहाँ सुई से काम बनता है वहाँ तलवार किसी काम की नहीं। अतः हर छोटी-बड़ी वस्तु एवं व्यक्ति का अपना-अपना महत्व होता है।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने हर दोहे के शब्दों एवं उनके मूल भाव को आधार बनाया।पहले दोहे (छठे दोहे के प्रश्न) में ‘जीभ का स्वयं बचना पर कपाल का दंड भुगतना’ यह संकेत देता है कि बिना सोचे बोलने से हानि होती है, इसलिए ‘सोच-समझकर बोलना चाहिए’ उत्तर चुना। दूसरे दोहे में सुई-तलवार के उदाहरण से स्पष्ट है कि हर वस्तु की अपनी उपयोगिता है, इसलिए ‘हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है’ उत्तर चुना। चर्चा करने पर मित्रों के तर्क समझकर हम सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।

स्तंभ 1 (दोहा)स्तंभ 2 (भाव)
1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।
2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।
3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
सही मिलान1 → 3 – ‘रहिमन धागा प्रेम का…’ का भाव है कि प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।2 → 2 – ‘कहि रहीम संपति सगे…’ का भाव है कि सच्चे मित्र विपत्ति में भी साथ रहते हैं।3 → 1 – ‘तरुवर फल नहिं खात हैं…’ का भाव है कि सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥”

अर्थ/भावार्थरहीम कहते हैं कि थोड़े दिनों के लिए आने वाली विपत्ति (संकट) भी अच्छी होती है।क्योंकि संकट के समय में ही यह पता चल जाता है कि इस संसार में कौन हमारा हित (भला) चाहने वाला अपना है और कौन अनहित (बुरा) चाहने वाला पराया। अर्थात् विपत्ति अपने-पराये की सच्ची पहचान करा देती है।

(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”

अर्थ/भावार्थरहीम कहते हैं कि यह बावली (नासमझ) जीभ तो बिना सोचे-समझे कुछ भी कह जाती है – कभी स्वर्ग की बात तो कभी पाताल की, अर्थात् वह कोई भी अनुचित बात कह डालती है।बात कहकर जीभ तो स्वयं मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, परंतु उसके कहे का दंड (जूती की मार) बेचारे सिर (कपाल) को भुगतना पड़ता है। इसलिए हमें हमेशा सोच-समझकर ही बोलना चाहिए।

सोच-विचार के लिए

दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—

1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”
(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे— “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।” इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित है। ऐसा क्यों होता है?

उत्तरऐसा इसलिए होता है क्योंकि दोहे बहुत पुराने हैं और सैकड़ों वर्षों से लोग इन्हें मुख से सुनकर याद करते एवं दोहराते आए हैं। बोलने (मौखिक परंपरा) में शब्दों के उच्चारण थोड़े-बहुत बदल जाते हैं।अलग-अलग क्षेत्रों, बोलियों एवं समय के अनुसार एक ही शब्द के थोड़े भिन्न रूप (जैसे – मिले/जुड़े, छिटकाय/चटकाय, तलवारि/तरवार, मानुष/मानस) प्रचलित हो जाते हैं, जबकि दोहे का अर्थ एवं भाव वही बना रहता है।

(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।

उत्तरधागा कोमल, पतला एवं नाजुक होता है; प्रेम भी ऐसा ही कोमल एवं नाजुक होता है। जैसे धागा टूटने पर जुड़ता तो है पर उसमें गाँठ पड़ जाती है, वैसे ही रूठने या झगड़े से प्रेम में दरार आ जाए तो वह पहले जैसा निर्मल नहीं रहता। इसी समानता के कारण रहीम ने धागे का उदाहरण चुना।अन्य उदाहरण: प्रेम को काँच, दर्पण या मिट्टी के घड़े जैसा भी कहा जा सकता है, क्योंकि ये भी एक बार टूट जाएँ तो जुड़ने पर भी उनमें दरार के निशान रह जाते हैं – ठीक वैसे ही जैसे टूटे रिश्ते में मन की दरार बनी रहती है।

2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?

उत्तरइस दोहे में प्रकृति (पेड़ एवं तालाब) के माध्यम से मनुष्य के परोपकार (दूसरों के हित में जीने) के गुण की बात की गई है। जैसे पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते, बल्कि दूसरों के काम आते हैं, वैसे ही सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति परोपकार के लिए जोड़ते हैं।प्रकृति से अन्य सीखें: नदी से निरंतर बहते रहना (परिश्रम), सूरज से समय पर अपना कर्तव्य निभाना, फूलों से सबको सुगंध एवं प्रसन्नता बाँटना, मधुमक्खी से मिल-जुलकर परिश्रम करना तथा धरती से सहनशीलता एवं देने का भाव – ये सब हम प्रकृति से सीख सकते हैं।

शब्दों की बात

शब्द-संपदा

कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। (यहाँ इनके सरल हिंदी अर्थ दिए गए हैं; आप अपनी मातृभाषा में इनके समानार्थक शब्द भी लिख सकते हैं।)

कविता में आए शब्दसरल अर्थ / समानार्थक शब्द
तरुवरवृक्ष, पेड़
बिपतिविपत्ति, मुसीबत, संकट
छिटकायझटककर, झटके के साथ
सुजानसज्जन, समझदार
सरवरसरोवर, तालाब
साँचेसच्चे
कपालसिर, माथा

शब्द एक अर्थ अनेक

“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥” इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं— सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए।

शब्दतीन अर्थ
कल(1) बीता हुआ दिन / आने वाला दिन, (2) मशीन/यंत्र, (3) चैन या आराम (कल पड़ना)
पत्र(1) चिट्ठी, (2) पत्ता (वृक्ष का), (3) समाचार-पत्र / पन्ना
कर(1) हाथ, (2) किरण, (3) टैक्स/लगान
फल(1) वृक्ष का फल, (2) परिणाम/नतीजा, (3) लाभ या प्राप्ति

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

आपकी बात

“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥” इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता एवं महत्ता है। अपने मनपसंद दोहे को इसी शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।

उत्तर (नमूना)दोहा: “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”अपने शब्दों में भाव: प्रेम के धागे को कभी झटके से तोड़ना नहीं चाहिए। जैसे कोई धागा एक बार टूट जाए तो उसे जोड़ने पर भी उसमें गाँठ पड़ ही जाती है, वैसे ही रिश्तों में एक बार दरार आ जाए तो वे पहले जैसे निर्मल नहीं रह पाते। इसलिए हमें अपने प्रेम एवं रिश्तों को संभालकर, धैर्य एवं समझदारी से सहेजकर रखना चाहिए।

सरगम

रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने टी.वी.-रेडियो आदि माध्यमों से सुने होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की। दोहों को समूह में या अकेले गाकर मोबाइल से रिकॉर्ड कीजिए, स्वयं सुनिए और दूसरों को भी सुनाइए।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)यह सुनने-गाने एवं रिकॉर्डिंग की रचनात्मक गतिविधि है। पाठ के किसी दोहे (जैसे ‘रहिमन पानी राखिये…’) को सही लय एवं उच्चारण के साथ कंठस्थ कीजिए और उसे मधुर स्वर में गाकर मोबाइल से रिकॉर्ड कर लीजिए।संभव हो तो ढोलक, हारमोनियम या ताली के साथ समूह में गाइए, फिर रिकॉर्डिंग स्वयं सुनकर अपनी आवाज़, लय एवं उच्चारण में सुधार कीजिए। इस गतिविधि के लिए कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता।

आज की पहेली

1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।

उत्तरचना – यह दो अक्षर का है और खाने के काम आता है; इसे उल्टा पढ़ने पर ‘नाच’ बन जाता है।

2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।

उत्तरमाचिस – माचिस की डिबिया रूपी किले के दो ओर रगड़ने वाली सतहें (द्वार) हैं और भीतर लकड़ी की तीलियाँ (सैनिक) हैं; तीली को रगड़ने पर आग जल उठती है।

खोजबीन के लिए

रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

उत्तर (गतिविधि-मार्गदर्शन)यह खोजबीन एवं पठन की गतिविधि है। पुस्तकालय की पुस्तकों या इंटरनेट की सहायता से रहीम के अन्य प्रसिद्ध दोहे खोजिए, जैसे – “बिगरी बात बने नहिं, लाख करौ किन कोय…” तथा “रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय…”।इन दोहों को पढ़कर इनका अर्थ समझिए तथा इन्हें अपनी लेखन पुस्तिका में उतारकर कक्षा में मित्रों के साथ साझा कीजिए।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं और वे किस काल के कवि माने जाते हैं?

उत्तरइन दोहों के रचनाकार अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ हैं। वे भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं, जिन्होंने नीति, भक्ति एवं प्रेम संबंधी दोहे अवधी एवं ब्रजभाषा में लिखे।

2. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब और कैसे होती है?

उत्तररहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान विपत्ति (संकट) के समय होती है। अच्छे दिनों में तो अनेक सगे-संबंधी बन जाते हैं, परंतु जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे, वही सच्चा मित्र होता है।

3. ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ लिखिए, जो चौथे दोहे में प्रकट होते हैं।

उत्तरचौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं – (1) मान-सम्मान (मनुष्य के लिए), (2) चमक (मोती के लिए) तथा (3) जल (चूने के लिए)। रहीम कहते हैं कि पानी (मान) चले जाने पर इनका मूल्य नहीं रहता।

4. पहले दोहे में सुई और तलवार के उदाहरण से रहीम क्या समझाना चाहते हैं?

उत्तररहीम समझाना चाहते हैं कि हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है। बड़ी वस्तु पाकर छोटी को त्यागना ठीक नहीं; जहाँ सिलाई जैसी सूक्ष्म जगह सुई से काम बनता है, वहाँ बड़ी तलवार बेकार है।

5. ‘बिपदाहू भली’ कहकर रहीम क्या सीख देते हैं?

उत्तररहीम सीख देते हैं कि थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी होती है, क्योंकि संकट के समय में ही अपने (हित चाहने वाले) और पराये (अनहित चाहने वाले) की सच्ची पहचान हो जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. रहीम के दोहों से हमें कौन-कौन सी जीवन-शिक्षाएँ मिलती हैं? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तररहीम के दोहे थोड़े शब्दों में जीवन की बड़ी सीख देते हैं। पहले दोहे से हमें विनम्रता एवं हर छोटी-बड़ी वस्तु का सम्मान करना सीखने को मिलता है, क्योंकि सबकी अपनी उपयोगिता है। दूसरे दोहे से परोपकार की प्रेरणा मिलती है – जैसे पेड़ एवं तालाब दूसरों के काम आते हैं।तीसरे दोहे से प्रेम एवं रिश्तों को सहेजकर रखने, चौथे से मान-सम्मान की रक्षा करने, पाँचवें से संकट में धैर्य रखने एवं अपने-पराये को पहचानने, छठे से सोच-समझकर बोलने तथा सातवें दोहे से सच्ची मित्रता की परख करने की शिक्षा मिलती है। इस प्रकार ये दोहे हमें विनम्र, परोपकारी, संयमी एवं अच्छा मनुष्य बनना सिखाते हैं।

7. “रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून” दोहे का भावार्थ विस्तार से लिखिए।

उत्तरइस प्रसिद्ध दोहे में रहीम कहते हैं कि मनुष्य को सदा अपना ‘पानी’ बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ सूना (व्यर्थ) हो जाता है। यहाँ ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं – मनुष्य के लिए मान-सम्मान, मोती के लिए उसकी चमक तथा चूने के लिए जल।रहीम का आशय है कि जैसे जल (पानी) चले जाने पर चूना बेकार हो जाता है और चमक (पानी) जाने पर मोती का मूल्य नहीं रहता, वैसे ही मान-सम्मान (पानी) चले जाने पर मनुष्य का जीवन व्यर्थ हो जाता है। इसलिए हमें अपने आचरण, सच्चाई एवं अच्छे व्यवहार से अपना मान-सम्मान सदैव बनाए रखना चाहिए।

8. दूसरे दोहे के आधार पर बताइए कि प्रकृति हमें परोपकार की शिक्षा किस प्रकार देती है?

उत्तरदूसरे दोहे में रहीम प्रकृति के सुंदर उदाहरणों से परोपकार की शिक्षा देते हैं। वे कहते हैं कि पेड़ कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब (सरोवर) अपना जल स्वयं नहीं पीते; ये दोनों दूसरों के लिए ही फल एवं जल प्रदान करते हैं।इसी प्रकार समझदार एवं सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के भले (परोपकार) के लिए जोड़ते एवं खर्च करते हैं। प्रकृति निःस्वार्थ भाव से देती रहती है – नदी जल देती है, सूर्य प्रकाश एवं फूल सुगंध। इन्हीं उदाहरणों से रहीम यह सिखाते हैं कि सच्चा जीवन वही है जो दूसरों के काम आए। परोपकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?

(क) कबीरदास

(ख) तुलसीदास

(ग) अब्दुर्रहीम खानखाना

(घ) सूरदास

उत्तर(ग) अब्दुर्रहीम खानखाना।

2. रहीम किस काल के कवि माने जाते हैं?

(क) आदिकाल

(ख) भक्तिकाल

(ग) रीतिकाल

(घ) आधुनिक काल

उत्तर(ख) भक्तिकाल।

3. “जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि” पंक्ति का भाव है—

(क) तलवार सबसे बड़ी होती है

(ख) सुई बेकार वस्तु है

(ग) हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है

(घ) सुई और तलवार एक समान हैं

उत्तर(ग) हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है।

4. ‘तरुवर’ शब्द का अर्थ है—

(क) तालाब

(ख) वृक्ष

(ग) नदी

(घ) पर्वत

उत्तर(ख) वृक्ष।

5. प्रेम के धागे को रहीम किस प्रकार रखने की सलाह देते हैं?

(क) झटककर तोड़ देना चाहिए

(ख) सहेजकर रखना चाहिए, तोड़ना नहीं चाहिए

(ग) बार-बार जोड़ना चाहिए

(घ) गाँठ बाँध देनी चाहिए

उत्तर(ख) सहेजकर रखना चाहिए, तोड़ना नहीं चाहिए।

6. चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कितने अर्थ बताए गए हैं?

(क) एक

(ख) दो

(ग) तीन

(घ) चार

उत्तर(ग) तीन (सम्मान, जल, चमक)।

7. “रहिमन बिपदाहू भली” – विपत्ति को अच्छा क्यों कहा गया है?

(क) क्योंकि वह धन देती है

(ख) क्योंकि वह अपने-पराये की पहचान करा देती है

(ग) क्योंकि वह सदा बनी रहती है

(घ) क्योंकि वह सुख देती है

उत्तर(ख) क्योंकि वह अपने-पराये की पहचान करा देती है।

8. ‘जिह्वा’ वाले दोहे की मुख्य सीख क्या है?

(क) ऊँचा बोलना चाहिए

(ख) सोच-समझकर बोलना चाहिए

(ग) कम खाना चाहिए

(घ) चुप रहना चाहिए

उत्तर(ख) सोच-समझकर बोलना चाहिए।

9. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?

(क) संपत्ति (अच्छे दिनों) में

(ख) विपत्ति (संकट) के समय

(ग) उत्सव में

(घ) यात्रा के समय

उत्तर(ख) विपत्ति (संकट) के समय।

10. ‘सुजान’ शब्द का अर्थ है—

(क) मूर्ख व्यक्ति

(ख) सज्जन/समझदार व्यक्ति

(ग) धनी व्यक्ति

(घ) बलवान व्यक्ति

उत्तर(ख) सज्जन/समझदार व्यक्ति।
उत्तर-कुंजी: 1-(ग), 2-(ख), 3-(ग), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ख), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): रहीम के अनुसार छोटी वस्तु को त्याग नहीं देना चाहिए।

कारण (R): जहाँ सुई से काम बनता है, वहाँ तलवार किसी काम की नहीं होती।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति केवल अपने सुख के लिए संचित करते हैं।

कारण (R): पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते।

उत्तर(घ) A गलत है (सज्जन अपनी संपत्ति दूसरों के हित/परोपकार के लिए संचित करते हैं), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): प्रेम के टूटे धागे को जोड़ने पर भी गाँठ पड़ जाती है।

कारण (R): रिश्तों में दरार आ जाने पर पहले जैसा निर्मल प्रेम नहीं रहता।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी होती है।

कारण (R): विपत्ति के समय अपने-पराये (हित-अनहित चाहने वालों) की पहचान हो जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): बिना सोचे-समझे बोली गई बात का दंड जीभ को भुगतना पड़ता है।

कारण (R): जीभ कुछ भी कहकर मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, पर दंड (जूती की मार) सिर को भुगतना पड़ता है।

उत्तर(घ) A गलत है (दंड जीभ को नहीं, बल्कि कपाल अर्थात् सिर को भुगतना पड़ता है), जबकि R सही है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • दोहों को लय एवं सही उच्चारण के साथ कंठस्थ कीजिए – परीक्षा में पंक्ति पूछे जाने पर सही शब्द लिख सकें।
  • प्रत्येक दोहे की एक-पंक्तीय ‘सीख’ याद रखिए (जैसे – 1. हर वस्तु का महत्व, 2. परोपकार, 3. प्रेम सहेजना, 4. मान-सम्मान, 5. विपत्ति में पहचान, 6. सोच-समझकर बोलना, 7. सच्ची मित्रता)।
  • ‘पानी’ के तीन अर्थ (सम्मान, जल, चमक) तथा शब्दार्थ अवश्य याद रखिए – ये बहुधा पूछे जाते हैं।
  • भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए और संभव हो तो उदाहरण देकर समझाइए।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • रचनाकार का नाम गलत लिखना – ये दोहे रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना) के हैं, कबीर या तुलसी के नहीं।
  • ‘कपाल’ का अर्थ ‘जीभ’ समझ लेना – कपाल का अर्थ है ‘सिर/माथा’।
  • दोहे की पंक्तियों के शब्द बदल देना या मात्राएँ गलत लिखना।
  • ‘पानी’ के केवल एक अर्थ (जल) तक सीमित रह जाना – इसके तीन अर्थ हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?

इन दोहों के रचनाकार अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ हैं, जो भक्तिकाल के प्रसिद्ध नीति-कवि माने जाते हैं।

पाठ में रहीम के कितने दोहे संकलित हैं?

पाठ ‘रहीम के दोहे’ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं, जो विनम्रता, परोपकार, प्रेम, मान-सम्मान, वाणी-संयम एवं सच्ची मित्रता की सीख देते हैं।

चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कौन-कौन से तीन अर्थ हैं?

“रहिमन पानी राखिये…” दोहे में ‘पानी’ के तीन अर्थ हैं – मान-सम्मान (मनुष्य के लिए), जल (चूने के लिए) तथा चमक (मोती के लिए)।

रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?

रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान विपत्ति (संकट) के समय होती है; जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे, वही सच्चा मित्र है।

दोहे एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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