कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) पाठ 5 – रहीम के दोहे (दोहे) अर्थ, भावार्थ एवं प्रश्न-उत्तर (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 5 ‘रहीम के दोहे’ (रचनाकार – अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’) का पूरा समाधान देता है – सभी दोहों का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की समस्त गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, शब्दों की बात, पाठ से आगे आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
कवि परिचय – रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना)
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। वे भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था और मृत्यु 17वीं शताब्दी में। उन्होंने नीति, भक्ति एवं प्रेम से संबंधित सुंदर रचनाएँ कीं। रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा – दोनों भाषाओं में कविताएँ लिखीं। वे रामायण, महाभारत आदि प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में गिने जाने वाले रहीम के नीति-दोहे आज भी आम जन-जीवन में बहुत लोकप्रिय हैं और लोग अपनी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए इन्हें कहते हैं। (संदर्भ – रहीम ग्रंथावली, संपादक – विद्यानिवास मिश्र।)
दोहे (मूल पाठ)
पाठ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं। प्रत्येक दोहा जीवन की कोई-न-कोई सीख देता है। नीचे दोहे ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥1॥
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥2॥
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥3॥
रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥4॥
रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥5॥
रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥6॥
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥7॥
— अब्दुर्रहीम खानखाना
सार एवं भावार्थ
पाठ ‘रहीम के दोहे’ में रहीम द्वारा रचित सात नीति-दोहे संकलित हैं, जो छोटे-छोटे शब्दों में जीवन की बड़ी सीख देते हैं। पहले दोहे में रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देखकर छोटी वस्तु को त्याग नहीं देना चाहिए, क्योंकि जहाँ सुई से काम चलता है वहाँ तलवार बेकार है – अर्थात् हर छोटी-बड़ी वस्तु एवं व्यक्ति का अपना-अपना महत्व होता है। दूसरे दोहे में वे प्रकृति से सीख देते हैं कि पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते; इसी प्रकार सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति दूसरों के हित (परोपकार) के लिए संचित करते हैं।
तीसरे दोहे में रहीम प्रेम के धागे को सहेजकर रखने की बात कहते हैं – इसे झटके से तोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि टूटा धागा फिर जुड़ता भी है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है; अर्थात् रिश्तों में दरार आ जाने पर पहले जैसा प्रेम नहीं रहता। चौथे दोहे में वे ‘पानी’ (सम्मान, जल, चमक) की रक्षा करने को कहते हैं, क्योंकि पानी (मान) चले जाने पर मोती, मनुष्य और चूना – कोई भी अपना मूल्य नहीं रखता। पाँचवें दोहे में रहीम कहते हैं कि थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी है, क्योंकि उसमें हित (अपने) और अनहित (पराये) करने वालों की पहचान हो जाती है।
छठे दोहे में वे जीभ को संभालकर बोलने की सीख देते हैं – बावली जीभ तो कुछ भी कह जाती है (स्वर्ग-पाताल एक कर देती है) और स्वयं मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, परंतु उसके कहे का दंड (जूती की मार) सिर (कपाल) को भुगतना पड़ता है। सातवें दोहे में रहीम सच्चे मित्र की पहचान बताते हैं – संपत्ति (अच्छे दिनों) में तो अनेक प्रकार के सगे-संबंधी बन जाते हैं, परंतु जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरें, वही सच्चे मित्र होते हैं। इस प्रकार ये दोहे विनम्रता, परोपकार, प्रेम, मान-सम्मान, वाणी-संयम एवं सच्ची मित्रता का संदेश देते हैं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बड़ेन | बड़ों को, बड़ी वस्तु को |
| लघु | छोटा, छोटी वस्तु |
| डारि | त्याग देना, फेंक देना |
| तलवारि | तलवार |
| तरुवर | वृक्ष, पेड़ |
| सरवर | सरोवर, तालाब |
| पियहिं | पीते हैं |
| पर काज हित | दूसरों के काम/भले के लिए |
| सँचहि | संचित करते हैं, जोड़ते हैं |
| सुजान | सज्जन, समझदार व्यक्ति |
| छिटकाय | झटककर, झटके से |
| परि जाय | पड़ जाती है |
| पानी | (यहाँ) मान-सम्मान, जल, चमक |
| सून | सूना, व्यर्थ |
| न ऊबरै | नहीं उबरता, मूल्य नहीं रहता |
| मानुष | मनुष्य, मानव |
| चून | चूना, आटा |
| बिपदा / बिपति | विपत्ति, संकट |
| थोरे | थोड़े |
| हित-अनहित | भला करने वाले एवं बुरा चाहने वाले |
| जिह्वा | जीभ |
| बावरी | बावली, पागल |
| सरग-पताल | स्वर्ग एवं पाताल (एक कर देना) |
| कपाल | सिर, माथा |
| कसौटी | परख, जाँच का पैमाना |
| साँचे मीत | सच्चे मित्र |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—
(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।” दोहे का भाव है—
• सोच-समझकर बोलना चाहिए।
• मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
• धीरे-धीरे बोलना चाहिए।
• सदा सच बोलना चाहिए।
(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?
• तलवार सुई से बड़ी होती है।
• सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
• तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
• हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 (दोहा) | स्तंभ 2 (भाव) |
|---|---|
| 1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ | 1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। |
| 2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥ | 2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं। |
| 3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥ | 3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए। |
पंक्तियों पर चर्चा
नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥”
(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥”
सोच-विचार के लिए
दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”
(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे— “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।” इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित है। ऐसा क्यों होता है?
(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।
2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥” इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
शब्दों की बात
शब्द-संपदा
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। (यहाँ इनके सरल हिंदी अर्थ दिए गए हैं; आप अपनी मातृभाषा में इनके समानार्थक शब्द भी लिख सकते हैं।)
| कविता में आए शब्द | सरल अर्थ / समानार्थक शब्द |
|---|---|
| तरुवर | वृक्ष, पेड़ |
| बिपति | विपत्ति, मुसीबत, संकट |
| छिटकाय | झटककर, झटके के साथ |
| सुजान | सज्जन, समझदार |
| सरवर | सरोवर, तालाब |
| साँचे | सच्चे |
| कपाल | सिर, माथा |
शब्द एक अर्थ अनेक
“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥” इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं— सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए।
| शब्द | तीन अर्थ |
|---|---|
| कल | (1) बीता हुआ दिन / आने वाला दिन, (2) मशीन/यंत्र, (3) चैन या आराम (कल पड़ना) |
| पत्र | (1) चिट्ठी, (2) पत्ता (वृक्ष का), (3) समाचार-पत्र / पन्ना |
| कर | (1) हाथ, (2) किरण, (3) टैक्स/लगान |
| फल | (1) वृक्ष का फल, (2) परिणाम/नतीजा, (3) लाभ या प्राप्ति |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
आपकी बात
“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥” इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता एवं महत्ता है। अपने मनपसंद दोहे को इसी शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।
सरगम
रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने टी.वी.-रेडियो आदि माध्यमों से सुने होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की। दोहों को समूह में या अकेले गाकर मोबाइल से रिकॉर्ड कीजिए, स्वयं सुनिए और दूसरों को भी सुनाइए।
आज की पहेली
1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।
2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।
खोजबीन के लिए
रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं और वे किस काल के कवि माने जाते हैं?
2. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब और कैसे होती है?
3. ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ लिखिए, जो चौथे दोहे में प्रकट होते हैं।
4. पहले दोहे में सुई और तलवार के उदाहरण से रहीम क्या समझाना चाहते हैं?
5. ‘बिपदाहू भली’ कहकर रहीम क्या सीख देते हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. रहीम के दोहों से हमें कौन-कौन सी जीवन-शिक्षाएँ मिलती हैं? अपने शब्दों में लिखिए।
7. “रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून” दोहे का भावार्थ विस्तार से लिखिए।
8. दूसरे दोहे के आधार पर बताइए कि प्रकृति हमें परोपकार की शिक्षा किस प्रकार देती है?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
(क) कबीरदास
(ख) तुलसीदास
(ग) अब्दुर्रहीम खानखाना
(घ) सूरदास
2. रहीम किस काल के कवि माने जाते हैं?
(क) आदिकाल
(ख) भक्तिकाल
(ग) रीतिकाल
(घ) आधुनिक काल
3. “जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि” पंक्ति का भाव है—
(क) तलवार सबसे बड़ी होती है
(ख) सुई बेकार वस्तु है
(ग) हर वस्तु की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है
(घ) सुई और तलवार एक समान हैं
4. ‘तरुवर’ शब्द का अर्थ है—
(क) तालाब
(ख) वृक्ष
(ग) नदी
(घ) पर्वत
5. प्रेम के धागे को रहीम किस प्रकार रखने की सलाह देते हैं?
(क) झटककर तोड़ देना चाहिए
(ख) सहेजकर रखना चाहिए, तोड़ना नहीं चाहिए
(ग) बार-बार जोड़ना चाहिए
(घ) गाँठ बाँध देनी चाहिए
6. चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कितने अर्थ बताए गए हैं?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
7. “रहिमन बिपदाहू भली” – विपत्ति को अच्छा क्यों कहा गया है?
(क) क्योंकि वह धन देती है
(ख) क्योंकि वह अपने-पराये की पहचान करा देती है
(ग) क्योंकि वह सदा बनी रहती है
(घ) क्योंकि वह सुख देती है
8. ‘जिह्वा’ वाले दोहे की मुख्य सीख क्या है?
(क) ऊँचा बोलना चाहिए
(ख) सोच-समझकर बोलना चाहिए
(ग) कम खाना चाहिए
(घ) चुप रहना चाहिए
9. रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?
(क) संपत्ति (अच्छे दिनों) में
(ख) विपत्ति (संकट) के समय
(ग) उत्सव में
(घ) यात्रा के समय
10. ‘सुजान’ शब्द का अर्थ है—
(क) मूर्ख व्यक्ति
(ख) सज्जन/समझदार व्यक्ति
(ग) धनी व्यक्ति
(घ) बलवान व्यक्ति
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): रहीम के अनुसार छोटी वस्तु को त्याग नहीं देना चाहिए।
कारण (R): जहाँ सुई से काम बनता है, वहाँ तलवार किसी काम की नहीं होती।
2. अभिकथन (A): सज्जन व्यक्ति अपनी संपत्ति केवल अपने सुख के लिए संचित करते हैं।
कारण (R): पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते।
3. अभिकथन (A): प्रेम के टूटे धागे को जोड़ने पर भी गाँठ पड़ जाती है।
कारण (R): रिश्तों में दरार आ जाने पर पहले जैसा निर्मल प्रेम नहीं रहता।
4. अभिकथन (A): थोड़े दिन की विपत्ति भी अच्छी होती है।
कारण (R): विपत्ति के समय अपने-पराये (हित-अनहित चाहने वालों) की पहचान हो जाती है।
5. अभिकथन (A): बिना सोचे-समझे बोली गई बात का दंड जीभ को भुगतना पड़ता है।
कारण (R): जीभ कुछ भी कहकर मुँह के भीतर सुरक्षित रहती है, पर दंड (जूती की मार) सिर को भुगतना पड़ता है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- दोहों को लय एवं सही उच्चारण के साथ कंठस्थ कीजिए – परीक्षा में पंक्ति पूछे जाने पर सही शब्द लिख सकें।
- प्रत्येक दोहे की एक-पंक्तीय ‘सीख’ याद रखिए (जैसे – 1. हर वस्तु का महत्व, 2. परोपकार, 3. प्रेम सहेजना, 4. मान-सम्मान, 5. विपत्ति में पहचान, 6. सोच-समझकर बोलना, 7. सच्ची मित्रता)।
- ‘पानी’ के तीन अर्थ (सम्मान, जल, चमक) तथा शब्दार्थ अवश्य याद रखिए – ये बहुधा पूछे जाते हैं।
- भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए और संभव हो तो उदाहरण देकर समझाइए।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- रचनाकार का नाम गलत लिखना – ये दोहे रहीम (अब्दुर्रहीम खानखाना) के हैं, कबीर या तुलसी के नहीं।
- ‘कपाल’ का अर्थ ‘जीभ’ समझ लेना – कपाल का अर्थ है ‘सिर/माथा’।
- दोहे की पंक्तियों के शब्द बदल देना या मात्राएँ गलत लिखना।
- ‘पानी’ के केवल एक अर्थ (जल) तक सीमित रह जाना – इसके तीन अर्थ हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘रहीम के दोहे’ पाठ के रचनाकार कौन हैं?
इन दोहों के रचनाकार अब्दुर्रहीम खानखाना ‘रहीम’ हैं, जो भक्तिकाल के प्रसिद्ध नीति-कवि माने जाते हैं।
पाठ में रहीम के कितने दोहे संकलित हैं?
पाठ ‘रहीम के दोहे’ में रहीम के सात नीति-दोहे संकलित हैं, जो विनम्रता, परोपकार, प्रेम, मान-सम्मान, वाणी-संयम एवं सच्ची मित्रता की सीख देते हैं।
चौथे दोहे में ‘पानी’ शब्द के कौन-कौन से तीन अर्थ हैं?
“रहिमन पानी राखिये…” दोहे में ‘पानी’ के तीन अर्थ हैं – मान-सम्मान (मनुष्य के लिए), जल (चूने के लिए) तथा चमक (मोती के लिए)।
रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान कब होती है?
रहीम के अनुसार सच्चे मित्र की पहचान विपत्ति (संकट) के समय होती है; जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे, वही सच्चा मित्र है।
दोहे एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
