Class 6 Sanskrit Deepakam Chapter 5 Solutions — संख्यागणना ननु सरला

संख्यागणना ननु सरला में संस्कृत गिनती सीखें। यहाँ पुस्तक के सात अभ्यासों के क्रम में उत्तर, 1–50 के संख्यापद, दस दिशाएँ और 52 खाने वाले परियोजना-पथ के उत्तर हैं। परिवार और दाँतों की संख्या अपने अनुसार लिखें।

Class: 6 Subject: Sanskrit Book: Deepakam (दीपकम्) Chapter: 5 (पञ्चमः पाठः) पाठ: संख्यागणना ननु सरला Session: 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

दीपकम् कक्षा 6 का पञ्चम पाठ ‘संख्यागणना ननु सरला’ (अर्थात् ‘गिनती तो सरल है’) एक रोचक एवं सरल पाठ है, जो छात्रों को खेल-खेल में संस्कृत में गिनती (संख्यागणना) सिखाता है। पाठ का आरम्भ कक्षा के एक संवाद से होता है, जहाँ छात्र अपने सहपाठियों को गिनते हैं और शिक्षक उन्हें एक सुन्दर संख्यागीत गाकर संस्कृत में गणना का अभ्यास कराते हैं। पाठ में दिए गए मनोहर श्लोकों के माध्यम से एक (सूर्य/ब्रह्म), दो (नेत्र/अयन), तीन (वचन), चार (मुख/युग), पञ्च (अङ्गुली), षट् (रस), सप्त (वासर/ऋषि/स्वर/लोक), अष्ट (दिग्गज/दिक्पाल), नव (ग्रह) एवं दश (दिशाः) जैसी प्रसिद्ध संख्याओं का परिचय दिया गया है। साथ ही एक से पञ्चाशत् (1–50) तक की संख्या-तालिका, दश दिशाओं के नाम तथा संख्या-प्रसिद्धि भी दी गई है। पाठ का केन्द्रीय भाव है – संस्कृत में गिनती सीखना सरल, सुखद एवं आनन्ददायक है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

यह पाठ डॉ. जनार्दन हेगडे द्वारा रचित है। पाठ की रचना गीत एवं श्लोकों के रूप में हुई है, जिससे छोटे विद्यार्थी आसानी से संस्कृत में गिनती कण्ठस्थ कर सकें। पाठ में संख्याओं को केवल अंक रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति एवं संस्कृति से जोड़कर बताया गया है – जैसे ‘एक सूर्य’, ‘दो नेत्र’, ‘सात वार’, ‘सात ऋषि’, ‘आठ दिग्गज’, ‘नौ ग्रह’ एवं ‘दश दिशाएँ’। अन्त में पाठ ‘संख्यागणना ननु सरला’ की पुनरावृत्ति करते हुए सबको आनन्दपूर्वक मिलकर ताली बजाते हुए संख्यागीत गाने की प्रेरणा देता है।

मूल पाठ (श्लोकाः) एवं अन्वय

(पाठ के श्लोकों के साथ सरल अन्वय और हिन्दी भाव। धार्मिक-सांस्कृतिक उदाहरणों को उसी संदर्भ में समझें।)

एकः सूर्यः चन्द्रोऽप्येकः मानवकुलमप्येकम् ।
द्वे नयने ननु जीविनि सकले प्रभवति सर्वो द्रष्टुम् ॥ १ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 1)

अन्वय – सूर्यः एकः, चन्द्रः अपि एकः, मानवकुलम् अपि एकम् । सकले जीविनि द्वे नयने (स्तः), (तैः) सर्वः ननु द्रष्टुं प्रभवति ।

हिन्दी भाव – सूर्य एक है, चन्द्रमा भी एक है तथा मानव-जाति भी एक ही है। गीत में दो नेत्रों के परिचित उदाहरण से द्वे संख्या समझाई गई है; यह सभी प्राणियों की शारीरिक बनावट का सार्वभौम वैज्ञानिक दावा नहीं है।

लोकशङ्करस्त्रिनयनमूर्तिः नमाम्यहं तं प्रतिदिवसम् ।
चतुर्मुखोऽयं जगतः स्रष्टा तेन हि सृष्टं जीवकुलम् ॥ २ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 2)

अन्वय – (यः) लोकशङ्करः त्रिनयनमूर्तिः (अस्ति), तं अहं प्रतिदिवसम् नमामि । अयं चतुर्मुखः जगतः स्रष्टा (अस्ति), तेन हि जीवकुलम् सृष्टम् ।

हिन्दी भाव – जो संसार का कल्याण करने वाले तीन नेत्रों वाले (शिव) हैं, उन्हें मैं प्रतिदिन प्रणाम करता हूँ। ये चार मुख वाले (ब्रह्मा) जगत् के रचयिता हैं, उन्होंने ही समस्त जीव-समुदाय की रचना की है।

पञ्चाङ्गुलयो मम करकमले लोके विदधति गणनाम् ।
सुरसेनानीः षण्मुखदेवः सततं पाति अमरगणम् ॥ ३ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 3)

अन्वय – मम करकमले पञ्च अङ्गुलयः (सन्ति, ये) लोके गणनां विदधति । सुरसेनानीः षण्मुखदेवः सततं अमरगणम् पाति ।

हिन्दी भाव – मेरे कमल जैसे हाथ में पाँच अंगुलियाँ हैं, जो संसार में गिनती करती हैं। देवताओं के सेनापति छह मुख वाले (कार्तिकेय) देवगण की निरन्तर रक्षा करते हैं।

सप्त वासराः सप्ताहे ननु स्वराः सुमधुराः सप्त ।
ऊर्ध्वमधस्तात् लोकाः सप्त ख्याता ऋषयः सप्त ॥ ४ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 4)

अन्वय – सप्ताहे ननु सप्त वासराः (भवन्ति), सप्त सुमधुराः स्वराः (सन्ति) । ऊर्ध्वम् अधस्तात् (परम्परागत लोकों का उल्लेख); लोकाः सप्त, सप्त ऋषयः ख्याताः (सन्ति) ।

हिन्दी भाव – सप्ताह में सात वार होते हैं और सात ही मधुर स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) होते हैं। श्लोक परम्परागत लोकों तथा सात प्रसिद्ध ऋषियों का उल्लेख करके सप्त संख्या सिखाता है।

अष्ट दिग्गजा धरन्ति धरणीम् उपकृतिशीला अतुलबलाः ।
नव ग्रहा ननु विपुले गगने चरन्ति सततं नियततया ॥ ५ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 5)

अन्वय – उपकृतिशीलाः अतुलबलाः अष्ट दिग्गजाः धरणीम् धरन्ति । नव ग्रहाः विपुले गगने सततं नियततया ननु चरन्ति ।

हिन्दी भाव – उपकार के स्वभाव वाले एवं अतुलनीय बल वाले परम्परागत कल्पना में आठ दिग्गज पृथ्वी को धारण करते हैं। गीत नवग्रहों की सांस्कृतिक धारणा से नव संख्या समझाता है।

पूर्वाद्या दश दिशः प्रसिद्धाः सङ्ख्यागणना ननु सरला ।
गायामो वयम् अमितामोदं कुर्मो बहुधा करतालम् ॥ ६ ॥ — संख्यागणना ननु सरला (श्लोकः 6) – डॉ. जनार्दनहेगडे

अन्वय – पूर्वाद्याः दश दिशः प्रसिद्धाः (सन्ति), सङ्ख्यागणना ननु सरला (अस्ति) । वयम् अमितामोदं गायामः, बहुधा करतालम् कुर्मः ।

हिन्दी भाव – पूर्व आदि दस दिशाएँ प्रसिद्ध हैं। निश्चय ही संख्या-गणना सरल है। हम अत्यन्त आनन्दपूर्वक गाते हैं और बार-बार ताली बजाते हैं।

सार (Hindi Summary)

‘संख्यागणना ननु सरला’ पाठ का आरम्भ कक्षा के एक रोचक संवाद से होता है। शिक्षक छात्रों से पूछते हैं कि कक्षा में कितने छात्र उपस्थित हैं। छात्र एक-एक करके गिनती करते हैं, परन्तु संस्कृत में गिनना नहीं जानते। तब शिक्षक उन्हें संस्कृत में संख्यागणना सिखाने के लिए एक सुन्दर संख्यागीत गाते हैं और छात्र उसके साथ गाते हैं। इस प्रकार खेल-खेल में संस्कृत की गिनती सरल हो जाती है।

पाठ के श्लोकों में प्रत्येक संख्या को प्रकृति एवं संस्कृति के सुन्दर उदाहरणों से जोड़कर बताया गया है। एक सूर्य, एक चन्द्र, एक मानव-कुल; दो नेत्र; तीन नेत्रों वाले शिव; चार मुख वाले ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता); पाँच अंगुलियाँ जो गिनती करती हैं; छह मुख वाले कार्तिकेय; सप्ताह के सात वार, सात स्वर, सात लोक एवं सात ऋषि; पृथ्वी को धारण करने वाले आठ दिग्गज; आकाश में नियमित चलने वाले नौ ग्रह; तथा पूर्व आदि दस दिशाएँ – इन सबके माध्यम से एक से दस तक की संख्याओं का परिचय दिया गया है।

पाठ में आगे एक से पञ्चाशत् (1–50) तक की संख्या-तालिका, दश दिशाओं के नाम तथा ‘संख्याप्रसिद्धिः’ (योग्यताविस्तरः) दी गई है, जिसमें प्रत्येक संख्या से जुड़ी प्रसिद्ध बातें बताई गई हैं – जैसे एक ब्रह्म, दो अयन, तीन वचन, चार युग, पञ्च अङ्ग, षट् रस, सप्त ऋषि, अष्ट दिक्पाल, नवग्रह एवं दश दिशाएँ। अन्त में एक सुन्दर संख्यागीत भी दिया गया है। पाठ का मुख्य संदेश है – संस्कृत में गिनती सीखना न केवल सरल है, बल्कि आनन्द एवं उत्साह से भरा हुआ भी है। इसीलिए हम सब मिलकर आनन्दपूर्वक गाते हैं और ताली बजाते हैं – ‘सङ्ख्यागणना ननु सरला’।

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)हिन्दी अर्थEnglish meaning
जीविनिप्राणी मेंIn the living being
स्रष्टासृष्टिकर्ता (ब्रह्मा)Creator of the universe
करकमलेकमल जैसे हाथ मेंIn the lotus-like hand
विदधतिकरते हैंFacilitate / do
गणनाम्गिनती कोCounting
सुरसेनानीःदेवों के सेनापति (कार्तिकेय)Commander-in-chief of Gods
पातिरक्षा करता हैProtects
सप्ताहेसप्ताह मेंIn a week
ऋषयःऋषि-गण, मुनिSages
ऊर्ध्वम्ऊपरAbove
अधःनीचेBelow
उपकृतिशीलाःउपकार के स्वभाव वालेThose who are of helpful nature
अतुलबलाःअतुलनीय बल वालेExtraordinarily strong
नियततयानियमित रूप सेContinuously / regularly
दिशःदिशाएँDirections
अमितामोदंअति आनन्दपूर्वकWith great / limitless delight
करतालम्तालीClap
नयनेदो नेत्रTwo eyes
त्रिनयनमूर्तिःतीन नेत्रों वाले (शिव)The three-eyed one (Śiva)
चतुर्मुखःचार मुख वाले (ब्रह्मा)The four-faced one (Brahmā)
धरणीम्पृथ्वी कोThe earth

पाठ और विज्ञान का अन्तर: नवग्रह इस पाठ का सांस्कृतिक संदर्भ है; सूर्य, चन्द्र, राहु और केतु सहित इसकी पारम्परिक सूची आगे दी है। इसे सौरमण्डल के नौ वैज्ञानिक ग्रहों की सूची न समझें। आधुनिक सौरमण्डल में आठ ग्रह हैं (NASA का ग्रह-परिचय)। दिग्गज, देवताओं के मुख और लोक भी गीत के सांस्कृतिक उदाहरण हैं। अभ्यास में “पाठ के अनुसार” उत्तर दें।

अभ्यासः (वयम् अभ्यासं कुर्मः)

1. पाठ के आधार पर एकपदेन उत्तराणि

प्रश्नएकपद उत्तर
(क) कः एकः अस्ति?सूर्यः। (चन्द्रः भी पाठानुसार मान्य है।)
(ख) कः षण्मुखदेवः अस्ति?सुरसेनानीः।
(ग) कः त्रिनयनमूर्तिः अस्ति?लोकशङ्करः।
(घ) का सरला अस्ति?सङ्ख्यागणना।
(ङ) के अतुलबलाः सन्ति?दिग्गजाः।

सुरसेनानीः = कार्तिकेयः; लोकशङ्करः = शिवः। उत्तर-पुस्तिका में माँगे जाने पर केवल एक शब्द लिखें।

2. उदाहरणानुगुणं शब्दानां पुरतः उचितां संख्यां लिखन्तु —

यथा – आकाशे एकः (१) सूर्यः विभाति । (विकल्प: १, २, ३, ४)

वाक्यम् (दत्त-विकल्पाः)उचिता संख्या (उत्तर)
(क) मम हस्ते ………. अङ्गुलयः सन्ति । (९, ५, ८, ७)५ (पञ्च)
(ख) सप्ताहे ………. वासराः भवन्ति । (६, १०, ७, ५)७ (सप्त)
(ग) कार्तिकेयस्य ………. मुखानि सन्ति । (१, ६, १०, ३)६ (षट्)
(घ) व्याकरणे ………. वचनानि सन्ति । (१०, ९, ३, ५)३ (त्रीणि)
(ङ) गगने ………. ग्रहाः सन्ति । (८, ७, ९, १०)९ (नव)

3. उदाहरणानुसारं सङ्ख्यां सङ्ख्यापदं च लिखन्तु —

यथा – भवतः परिवारे कति जनाः सन्ति ? – ५, (पञ्च)

प्रश्नःसङ्ख्यासङ्ख्यापदम्
(क) कति दिशः सन्ति ?१०दश
(ख) सप्ताहे कति वासराः भवन्ति ?७सप्त
(ग) वर्षे कति मासाः भवन्ति ?१२द्वादश
(घ) भवतः कति दन्ताः सन्ति ?अपनी वास्तविक संख्या; नमूना: ३२नमूना: द्वात्रिंशत्
(ङ) स्वराः कति भवन्ति ?७सप्त

(टिप्पणी: ‘स्वराः’ से यहाँ संगीत के सात स्वर अभिप्रेत हैं; इसे वर्णमाला के स्वरों की संख्या न समझें; यहाँ संगीत के स्वर हैं। दाँतों की संख्या व्यक्तिगत है; अपने दाँत गिनकर संख्या और संख्यापद लिखें। ३२ केवल एक नमूना है।)

4. अधः प्रदत्तेन पदेन सह सङ्ख्यां योजयन्तु —

‘अ’ (सङ्ख्यापदम्)‘ब’ (सङ्ख्या) – सही मिलान
(क) पञ्च५
(ख) एकम्१
(ग) अष्ट८
(घ) विंशतिः२०
(ङ) त्रयोदश१३

5. उपस्थितिपत्रं पश्यन्तु । संख्यां वदन्तु लिखन्तु च —

उपस्थिति-क्रमसंख्या: १-गणेशः, २-गीताञ्जलिः, ३-जगन्नाथः, ४-दिनेशः, ५-प्रज्ञा, ६-बलरामः, ७-मोहनः, ८-राधिका, ९-सुभद्रा, १०-स्वयंप्रभा ।

(क) गणेशस्य उपस्थितिसंख्या का ?

उत्तरगणेशस्य उपस्थितिसंख्या एकम् (१) अस्ति ।

(ख) सुभद्रायाः उपस्थितिसंख्या का ?

उत्तरसुभद्रायाः उपस्थितिसंख्या नव (९) अस्ति ।

(ग) स्वयंप्रभायाः उपस्थितिसंख्या का ?

उत्तरस्वयंप्रभायाः उपस्थितिसंख्या दश (१०) अस्ति ।

(घ) जगन्नाथस्य उपस्थितिसंख्या का ?

उत्तरजगन्नाथस्य उपस्थितिसंख्या त्रीणि (३) अस्ति ।

(ङ) बलरामस्य उपस्थितिसंख्या का ?

उत्तरबलरामस्य उपस्थितिसंख्या षट् (६) अस्ति ।

6. चित्रं पश्यन्तु, सङ्ख्याः वदन्तु, द्वितीयचित्रे अङ्कैः च ताः सङ्ख्याः लिखन्तु —

(चित्र में दिए संख्यापदों को अंकों में लिखिए।)

सङ्ख्यापदम्अङ्कैः (उत्तर)
पञ्च५
द्वाविंशतिः२२
चत्वारि४
त्रीणि३
षोडश१६
अष्ट८
पञ्चाशत्५०
चतुर्दश१४

7. चित्रं पश्यन्तु, संख्याः वदन्तु, द्वितीयचित्रे शब्दैः च ताः संख्याः लिखन्तु —

(चित्र में दिए अंकों को संख्यापद (शब्द) में लिखिए।)

अङ्कैःशब्दैः (सङ्ख्यापदम्) – उत्तर
३६षट्त्रिंशत्
२०विंशतिः
११एकादश
२५पञ्चविंशतिः
१४चतुर्दश
१७सप्तदश
९नव

संख्या-तालिका (1–50) एवं दश दिशाः

1. वयं सङ्ख्यां गणयामः (१ – ५०)

१ एकम्११ एकादश२१ एकविंशतिः३१ एकत्रिंशत्४१ एकचत्वारिंशत्
२ द्वे१२ द्वादश२२ द्वाविंशतिः३२ द्वात्रिंशत्४२ द्विचत्वारिंशत्
३ त्रीणि१३ त्रयोदश२३ त्रयोविंशतिः३३ त्रयस्त्रिंशत्४३ त्रिचत्वारिंशत्
४ चत्वारि१४ चतुर्दश२४ चतुर्विंशतिः३४ चतुस्त्रिंशत्४४ चतुश्चत्वारिंशत्
५ पञ्च१५ पञ्चदश२५ पञ्चविंशतिः३५ पञ्चत्रिंशत्४५ पञ्चचत्वारिंशत्
६ षट्१६ षोडश२६ षड्विंशतिः३६ षट्त्रिंशत्४६ षट्चत्वारिंशत्
७ सप्त१७ सप्तदश२७ सप्तविंशतिः३७ सप्तत्रिंशत्४७ सप्तचत्वारिंशत्
८ अष्ट१८ अष्टादश२८ अष्टाविंशतिः३८ अष्टात्रिंशत्४८ अष्टचत्वारिंशत्
९ नव१९ नवदश२९ नवविंशतिः३९ नवत्रिंशत्४९ नवचत्वारिंशत्
१० दश२० विंशतिः३० त्रिंशत्४० चत्वारिंशत्५० पञ्चाशत्

2. गृहस्य दश दिशाः

घर (या किसी भी स्थान) की दस दिशाएँ इस प्रकार हैं – पूर्वदिशा, पश्चिमदिशा, उत्तरदिशा, दक्षिणदिशा, ईशानदिशा, आग्नेयदिशा, नैर्ऋत्यदिशा, वायव्यदिशा, ऊर्ध्वम् (ऊपर) एवं अधः (नीचे)। चार मुख्य दिशाएँ, चार कोण (विदिशाएँ) तथा परम्परागत उल्लेख में कुल दश दिशाएँ होती हैं।

मुख्य दिशाः (४)कोणाः / विदिशाः (४)अन्ये (२)
पूर्वदिशा, पश्चिमदिशा, उत्तरदिशा, दक्षिणदिशाईशानदिशा, आग्नेयदिशा, नैर्ऋत्यदिशा, वायव्यदिशाऊर्ध्वम्, अधः

योग्यताविस्तरः & कार्यकलापः / परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरः – संख्याप्रसिद्धिः

पाठ में प्रत्येक संख्या से जुड़ी प्रसिद्ध बातें इस प्रकार दी गई हैं –

सङ्ख्यासंख्याप्रसिद्धिः (विवरणम्)
एकम् (1)एकं ब्रह्म
द्वे (2)द्वे अयने (उत्तरायणम्, दक्षिणायनम्)
त्रीणि (3)त्रीणि वचनानि (एकवचनम्, द्विवचनम्, बहुवचनम्)
चत्वारि (4)चत्वारि युगानि (कृतयुगम्, त्रेतायुगम्, द्वापरयुगम्, कलियुगम्)
पञ्च (5)पञ्च अङ्गानि (तिथिः, वासरः, नक्षत्रम्, योगः, करणम्)
षट् (6)षट् रसाः (मधुरः, अम्लः, लवणः, कटुः, तिक्तः, कषायः)
सप्त (7)सप्त ऋषयः (मरीचिः, अत्रिः, अङ्गिराः, पुलस्त्यः, पुलहः, क्रतुः, वसिष्ठः)
अष्ट (8)अष्ट दिक्पालाः (इन्द्रः, अग्निः, यमः, निर्ऋतिः, वरुणः, वायुः, कुबेरः, ईशानः)
नव (9)नवग्रहाः (सूर्यः, चन्द्रः, मङ्गलः, बुधः, गुरुः, शुक्रः, शनिः, राहुः, केतुः)
दश (10)दश दिशाः (पूर्वदिशा, पश्चिमदिशा, उत्तरदिशा, दक्षिणदिशा, आग्नेयकोणः, नैर्ऋत्यकोणः, वायव्यकोणः, ईशानकोणः, ऊर्ध्वम्, अधः)

कार्यकलापः – संख्यागीतम्

एकं द्वे, एकं द्वे । पश्यत किमस्ति मम हस्ते ।
त्रीणि चत्वारि, त्रीणि चत्वारि । हस्ते पात्रं, पात्रे वारि ।
पञ्च षट्, पञ्च षट् । जम्बीररसं योजयत ।
सप्त अष्ट, सप्त अष्ट । लवणं गुडं च मेलयत ।
नव दश, नव दश । शनैः शनैः मन्थयत ॥

यह संख्यागीत गाते हुए शरबत (जम्बीररस = नींबू-पानी) बनाने की क्रिया का अभिनय कर सकते हैं – इससे गिनती खेल-खेल में याद हो जाती है।

परियोजनाकार्यम् — 52 खानों का क्रम

पुस्तक पृष्ठ 69 के चित्र में १ से चलें और बढ़ती संख्या अगले जुड़े खाने में भरें। नीचे पूर्ण क्रम है; पुस्तक में पहले से लिखी संख्याएँ भी क्रम जाँचने के लिए शामिल हैं। अपने चार्ट में केवल खाली खाने भरें।

पुस्तक की परियोजना के 52 जुड़े खानों में १ से ५२ का पूरा क्रम; पहले से दिए अंक गहरे रंग में
मौलिक सहायक चित्र: पाठ के परियोजना-पथ का संख्यात्मक हल; गहरे खाने पुस्तक में पहले से दिए अंक हैं। यह अध्ययन-चार्ट है, मूल पुस्तक का चित्र नहीं।
चित्र में स्थान / चलने की दिशासंख्या-क्रम
बाईं लाल बाँह की ऊपरी पंक्ति, बाएँ से दाएँ१, २, ३, ४, ५
ऊपरी बाँह का बायाँ स्तम्भ, नीचे से ऊपर६, ७, ८, ९, १०, ११
सबसे ऊपरी पंक्ति के शेष दो खाने१२, १३
ऊपरी बाँह का दायाँ स्तम्भ, ऊपर से नीचे१४, १५, १६, १७, १८
दाईं बाँह की ऊपरी पंक्ति, बाएँ से दाएँ१९, २०, २१, २२, २३, २४
सबसे दाईं ओर के नीचे दो खाने२५, २६
दाईं बाँह की निचली पंक्ति, दाएँ से बाएँ२७, २८, २९, ३०, ३१
निचली बाँह का दायाँ स्तम्भ, ऊपर से नीचे३२, ३३, ३४, ३५, ३६, ३७
सबसे नीचे के शेष दो खाने, दाएँ से बाएँ३८, ३९
निचली बाँह का बायाँ स्तम्भ, नीचे से ऊपर४०, ४१, ४२, ४३, ४४
बाईं बाँह की निचली पंक्ति, दाएँ से बाएँ४५, ४६, ४७, ४८, ४९, ५०
सबसे बाईं ओर, नीचे से ऊपर के आखिरी खाने५१, ५२

गिनती का नियम: तालिका में 1–4 के लिए एकम्, द्वे, त्रीणि, चत्वारि स्वतंत्र गिनती के रूप हैं। किसी संज्ञा के साथ लिङ्ग के अनुसार रूप बदलते हैं: एकः छात्रः, एका छात्रा, एकं फलम्; द्वौ छात्रौ, द्वे छात्रे, द्वे फले; त्रयः छात्राः, तिस्रः छात्राः, त्रीणि फलानि; चत्वारः छात्राः, चतस्रः छात्राः, चत्वारि फलानि।

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

1. इस पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तरइस पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खेल-खेल में, गीत एवं श्लोकों के माध्यम से संस्कृत में गिनती (संख्यागणना) सिखाना है। पाठ यह बताता है कि संस्कृत में गिनती सीखना सरल एवं आनन्ददायक है।

2. पाठ के अनुसार ‘एक’ संख्या किन-किन से जुड़ी है?

उत्तरपाठ के अनुसार ‘एक’ संख्या सूर्य, चन्द्र एवं मानव-कुल से जुड़ी है – सूर्य एक है, चन्द्रमा एक है तथा मानव-जाति भी एक ही है। संख्याप्रसिद्धि में ‘एक ब्रह्म’ भी कहा गया है।

3. आठ दिग्गज क्या करते हैं?

उत्तरउपकार के स्वभाव वाले एवं अतुलनीय बल वाले आठ दिग्गज पाठ की परम्परागत कल्पना में पृथ्वी (धरणी) को धारण करते हैं। यह पौराणिक वर्णन है, पृथ्वी के टिके रहने की वैज्ञानिक व्याख्या नहीं।

4. सप्त (सात) संख्या से जुड़ी चार बातें लिखिए।

उत्तरसात से जुड़ी चार बातें हैं – (1) सप्ताह के सात वार, (2) संगीत के सात स्वर, (3) सात लोक (परम्परागत उल्लेख में), तथा (4) सात प्रसिद्ध ऋषि (सप्तर्षि)।

5. दश दिशाएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तरदश दिशाएँ हैं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण (चार मुख्य दिशाएँ); ईशान, आग्नेय, नैर्ऋत्य, वायव्य (चार कोण); तथा ऊर्ध्वम् (ऊपर) एवं अधः (नीचे)।

अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास

6. ‘संख्यागणना ननु सरला’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ में डॉ. जनार्दन हेगडे ने सरल एवं रोचक ढंग से संस्कृत में गिनती सिखाई है। पाठ का आरम्भ कक्षा के संवाद से होता है, जहाँ छात्र गिनती करते हैं पर संस्कृत में गिनना नहीं जानते। तब शिक्षक एक सुन्दर संख्यागीत गाकर उन्हें संस्कृत गणना सिखाते हैं।पाठ के श्लोकों में प्रत्येक संख्या को प्रकृति एवं संस्कृति से जोड़ा गया है – एक सूर्य, दो नेत्र, तीन नेत्रों वाले शिव, चार मुख वाले ब्रह्मा, पाँच अंगुलियाँ, छह मुख वाले कार्तिकेय, सात वार-स्वर-लोक-ऋषि, आठ दिग्गज, नौ ग्रह एवं दस दिशाएँ। साथ ही 1 से 50 तक की संख्या-तालिका एवं संख्याप्रसिद्धि भी दी गई है। पाठ का संदेश है कि संस्कृत में गिनती सीखना सरल एवं आनन्ददायक है।

7. पाठ में संख्याओं को प्रकृति एवं संस्कृति से किस प्रकार जोड़ा गया है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तरपाठ की विशेषता यह है कि इसमें संख्याओं को केवल अंक रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति एवं संस्कृति के सुन्दर उदाहरणों से जोड़कर सिखाया गया है, जिससे वे आसानी से याद रह जाती हैं।जैसे – एक के लिए सूर्य, चन्द्र एवं मानव-कुल; दो के लिए नेत्र; तीन के लिए शिव के तीन नेत्र एवं तीन वचन; चार के लिए ब्रह्मा के चार मुख एवं चार युग; पाँच के लिए हाथ की पाँच अंगुलियाँ; छह के लिए कार्तिकेय के छह मुख एवं छह रस; सात के लिए सप्ताह के वार, सात स्वर एवं सप्तर्षि; आठ के लिए दिग्गज एवं दिक्पाल; नौ के लिए नवग्रह; तथा दस के लिए दस दिशाएँ। इस प्रकार संख्या-ज्ञान सजीव एवं सार्थक बन जाता है।

8. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तरइस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी विषय यदि रोचक, सरल एवं आनन्ददायक ढंग से पढ़ाया-सीखा जाए, तो वह कठिन नहीं लगता। संस्कृत में गिनती जैसी बात को गीत, श्लोक एवं उदाहरणों के साथ सीखने से वह सरल हो जाती है।पाठ हमें यह भी सिखाता है कि हमारी प्राचीन परम्परा में संख्याएँ प्रकृति, ज्योतिष, संगीत एवं संस्कृति से गहराई से जुड़ी हैं। मिलकर, उत्साह एवं आनन्द के साथ (अमितामोदं गायामः, करतालं कुर्मः) सीखने पर ज्ञान सहज एवं स्थायी हो जाता है। इसीलिए पाठ कहता है – ‘सङ्ख्यागणना ननु सरला’ – गिनती तो सचमुच सरल है।

MCQ & अभिकथन-कारण

1. इस पाठ का शीर्षक क्या है?

(क) वयं गणयामः

(ख) संख्यागणना ननु सरला

(ग) दश दिशाः

(घ) संख्यागीतम्

उत्तर(ख) संख्यागणना ननु सरला।

2. पाठ के अनुसार त्रिनयनमूर्तिः कौन हैं?

(क) ब्रह्मा

(ख) कार्तिकेयः

(ग) लोकशङ्करः (शिवः)

(घ) विष्णुः

उत्तर(ग) लोकशङ्करः (शिवः)।

3. चतुर्मुखः (जगत् का रचयिता) कौन है?

(क) शिवः

(ख) ब्रह्मा

(ग) इन्द्रः

(घ) सूर्यः

उत्तर(ख) ब्रह्मा। (चतुर्मुखः जगतः स्रष्टा)

4. सप्ताह में कितने वार होते हैं?

(क) पञ्च

(ख) षट्

(ग) सप्त

(घ) अष्ट

उत्तर(ग) सप्त (सात)।

5. ‘षण्मुखदेवः’ किसे कहा गया है?

(क) ब्रह्मा

(ख) सुरसेनानीः (कार्तिकेयः)

(ग) शिवः

(घ) विष्णुः

उत्तर(ख) सुरसेनानीः (कार्तिकेयः)।

6. पृथ्वी (धरणी) को कौन धारण करते हैं?

(क) नव ग्रहाः

(ख) सप्त ऋषयः

(ग) अष्ट दिग्गजाः

(घ) दश दिशः

उत्तर(ग) अष्ट दिग्गजाः (आठ दिग्गज)।

7. पाठ के नवग्रह-संदर्भ में कितने ग्रह बताए गए हैं?

(क) सप्त

(ख) अष्ट

(ग) नव

(घ) दश

उत्तर(ग) नव (नौ ग्रह)।

8. ‘पञ्चाशत्’ का अर्थ कौन-सी संख्या है?

(क) पन्द्रह (१५)

(ख) पच्चीस (२५)

(ग) पचास (५०)

(घ) पाँच (५)

उत्तर(ग) पचास (५०)।

9. ‘षोडश’ किस संख्या का संख्यापद है?

(क) ६

(ख) १६

(ग) २६

(घ) ६०

उत्तर(ख) १६ (सोलह)।

10. इस पाठ के रचयिता कौन हैं?

(क) कालिदासः

(ख) डॉ. जनार्दन हेगडे

(ग) भासः

(घ) पाणिनिः

उत्तर(ख) डॉ. जनार्दन हेगडे।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ग), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): पाठ कहता है कि संख्यागणना सरल है।

कारण (R): पाठ में गिनती को गीत, श्लोक एवं रोचक उदाहरणों के माध्यम से सिखाया गया है, जिससे वह सरल लगती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): अष्ट दिग्गज पृथ्वी को धारण करते हैं।

कारण (R): वे उपकार के स्वभाव वाले एवं अतुलनीय बल वाले माने गए हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): सप्ताह में सात वार होते हैं।

कारण (R): संगीत में भी सात ही स्वर होते हैं।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता (दोनों स्वतन्त्र तथ्य हैं)।

4. अभिकथन (A): ‘चतुर्मुखः’ से तात्पर्य शिव से है।

कारण (R): पाठ में चतुर्मुख को जगत् का स्रष्टा (ब्रह्मा) कहा गया है।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – ‘चतुर्मुखः’ ब्रह्मा हैं, शिव नहीं; शिव त्रिनयनमूर्ति हैं।

5. अभिकथन (A): दश दिशाओं में ऊर्ध्वम् एवं अधः भी सम्मिलित हैं।

कारण (R): चार मुख्य दिशाएँ, चार कोण तथा परम्परागत उल्लेख में कुल दश दिशाएँ होती हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ

परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)

  • 1 से 50 तक की संख्या-तालिका कण्ठस्थ करें – अंक-से-शब्द एवं शब्द-से-अंक दोनों प्रकार के प्रश्न आते हैं।
  • शब्दार्थ (विदधति, गणनाम्, सुरसेनानीः, उपकृतिशीलाः, नियततया आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
  • संख्याप्रसिद्धि (एक ब्रह्म, दो अयन, तीन वचन… दश दिशाएँ) तालिका सहित याद करें।
  • दश दिशाओं के नाम (मुख्य + कोण + ऊर्ध्वम्/अधः) क्रम से याद रखें।
  • ‘एकपदेन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में केवल एक शब्द/पद ही लिखें।

सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)

  • संख्यापदों की वर्तनी की भूल – ‘चतुर्दश’, ‘षोडश’, ‘द्वाविंशतिः’, ‘पञ्चाशत्’ को शुद्ध लिखें।
  • ‘त्रिनयनमूर्तिः’ (शिव) एवं ‘चतुर्मुखः’ (ब्रह्मा) को आपस में मिला देना।
  • दिशाओं की संख्या आठ बता देना – ऊर्ध्वम् एवं अधः मिलाकर कुल दश दिशाएँ हैं।
  • ‘स्वराः कति?’ में संगीत-स्वर (सात) एवं वर्णमाला के स्वर में भ्रम – प्रसंग देखकर उत्तर दें।
  • लिंग के अनुसार संख्यापद का प्रयोग न करना (यथा – द्वे नयने, त्रीणि वचनानि, चत्वारि युगानि)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दीपकम् कक्षा 6 के पाँचवें पाठ ‘संख्यागणना ननु सरला’ में क्या सिखाया गया है?

इस पाठ में खेल-खेल में, गीत एवं श्लोकों के माध्यम से संस्कृत में गिनती (1 से 50 तक), दश दिशाओं के नाम तथा संख्याप्रसिद्धि सिखाई गई है। पाठ का संदेश है कि संस्कृत में गिनती सीखना सरल एवं आनन्ददायक है।

दश दिशाएँ कौन-कौन सी हैं?

दश दिशाएँ हैं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण (चार मुख्य दिशाएँ), ईशान, आग्नेय, नैर्ऋत्य, वायव्य (चार कोण) तथा ऊर्ध्वम् (ऊपर) एवं अधः (नीचे)।

इस पाठ के रचयिता कौन हैं?

इस पाठ के रचयिता डॉ. जनार्दन हेगडे हैं। उन्होंने सरल गीत एवं श्लोकों के माध्यम से छोटे विद्यार्थियों के लिए संस्कृत की संख्यागणना को रोचक एवं सरल बनाया है।

पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 6, पाठ 5, पृष्ठ 61–69; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। मूल गीत के रचयिता डॉ. जनार्दन हेगडे हैं। व्याख्याएँ, परियोजना-चार्ट और अतिरिक्त अभ्यास ClearStudy के स्वतंत्र अध्ययन-सहायक हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।

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