कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 3 — फूल और काँटा प्रश्न उत्तर और भावार्थ
फूल और काँटा प्रश्न उत्तर: कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 3 में हरिऔध की कविता का भावार्थ, सार, शब्दार्थ, अभ्यास, मुहावरे, विशेषण और पौधों की चित्र-पहेली समझें। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 3 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 29–40, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
- कवि परिचय – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- कविता का सार
- शब्दार्थ
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- शब्द से जुड़े शब्द / बड़प्पन
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
- विशेषण
- आपकी बात / सृजन
- पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि परिचय – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद में हुआ था। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक रोचक एवं सरल कविताएँ लिखीं; प्रसिद्ध बाल-कविता “उठो लाल, अब आँखें खोलो” भी उन्हीं की रचना है। उनकी चर्चित काव्य-कृति प्रियप्रवास को खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है। बच्चों के लिए उनके अनेक कविता-संकलन प्रकाशित हैं, जिनमें चंद्र-खिलौना तथा खेल-तमाशा उल्लेखनीय हैं। सरल, मधुर एवं भावपूर्ण भाषा उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता है।
कविता (मूल पाठ)
‘फूल और काँटा’ में कवि एक ही पौधे पर उगने वाले फूल और काँटे के उदाहरण से यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके कुल से नहीं, उसके गुणों एवं कर्मों से पहचाना जाता है।
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता।
मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवायें हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।
छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन।
फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी की खिला।
है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।
— अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

पाठांतर ध्यान दें: मुद्रित पृष्ठ 29 की मूल कविता में “है सदा देता कली जी की खिला।” है; पृष्ठ 34 की गतिविधि में “है सदा देता कली का जी खिला।” उद्धृत है। यहाँ मूल कविता के अनुसार “जी की कली खिलाना” का भाव मन को प्रसन्न करना लिया गया है।
भावार्थ
पहला पद: कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा दोनों का पालन-पोषण करता है। रात में चाँद भी दोनों पर समान रूप से चमकता है और एक-सी चाँदनी बरसाता है। आशय यह कि कविता में दोनों को समान परिस्थितियाँ मिलती हैं; कवि आगे उनके भिन्न व्यवहार की तुलना करते हैं।
दूसरा पद: वर्षा (मेह) भी दोनों पर समान रूप से बरसती है और एक-सी हवाएँ दोनों पर बहती हैं। फिर भी यह सदा दिखाई देता है कि फूल और काँटे का स्वभाव (ढंग) एक-सा नहीं होता। समान देखभाल पाकर भी दोनों के गुण एवं व्यवहार भिन्न होते हैं।
तीसरा पद: काँटा किसी की उँगलियों में चुभकर उन्हें छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र (वर बसन) फाड़ देता है, प्यार में डूबी तितलियों के पंख काट देता है तथा भौंरे के काले शरीर (श्याम तन) को भी बेध (छेद) देता है। अर्थात् काँटे का स्वभाव दूसरों को कष्ट एवं हानि पहुँचाने वाला है।
चौथा पद: इसके विपरीत फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा (अद्भुत) रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध एवं निराले रंगों से मन की कली खिला देता है, अर्थात् सबका मन प्रसन्न करता है। अर्थात् फूल का स्वभाव दूसरों को सुख, सुगंध एवं प्रसन्नता देने वाला है।
पाँचवाँ पद: इसी भिन्न स्वभाव के कारण काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवता के शीश (सिर) पर सुशोभित होता है। अंत में कवि प्रश्न करते हैं कि किसी का कुल (वंश) उसके किस काम आ सकता है, यदि उस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की कमी (कसर) है। तात्पर्य यह कि व्यक्ति का सम्मान उसके ऊँचे कुल से नहीं, बल्कि उसके अच्छे गुणों एवं कर्मों से होता है।
कविता का सार
‘फूल और काँटा’ अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित एक प्रेरक एवं प्रतीकात्मक कविता है, जिसमें कवि ने फूल और काँटे के उदाहरण द्वारा यह गंभीर जीवन-संदेश दिया है कि मनुष्य का बड़प्पन उसके कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं कर्मों से आँका जाता है। कवि बताते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उनका पालन-पोषण करता है। चाँद की चाँदनी, वर्षा की बूँदें और बहती हवाएँ — प्रकृति की ये सारी देन दोनों को समान रूप से मिलती हैं। कविता में समान पौधा, चाँदनी, वर्षा और हवा उनकी समान परिस्थिति के संकेत हैं।
फिर भी दोनों का स्वभाव सर्वथा भिन्न है। काँटा अपने कठोर स्वभाव के कारण किसी की उँगलियों को छेद देता है, किसी का सुंदर वस्त्र फाड़ देता है, तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के शरीर को भी बेध देता है — अर्थात् वह दूसरों को केवल कष्ट एवं हानि पहुँचाता है। इसके विपरीत फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से तितलियों को गोद में स्थान देता है, भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है तथा अपनी सुगंध और निराले रंगों से सबका मन प्रसन्न कर देता है। इसी भिन्नता का परिणाम यह होता है कि काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि वही फूल देवता के शीश पर चढ़कर सम्मान पाता है।
कविता के अंत में कवि एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं — जिस व्यक्ति में बड़प्पन (श्रेष्ठता) की ही कमी हो, उसका ऊँचा कुल भला किस काम आएगा? इस प्रकार कविता हमें यह शिक्षा देती है कि समान परिस्थितियाँ पाकर भी व्यक्ति अपने स्वभाव एवं कर्मों से ही महान या तुच्छ बनता है। सच्चा सम्मान कुल या जन्म से नहीं, बल्कि अच्छे गुणों, उदारता एवं परोपकार से प्राप्त होता है। सरल भाषा, मधुर लय एवं सटीक प्रतीकों के कारण यह कविता बाल-मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
कविता फूल और काँटे को मानवीय गुणों के प्रतीक बनाती है। इसका अर्थ वास्तविक काँटों को बुरा या व्यर्थ कहना नहीं है; अनेक पौधों के काँटे रक्षा में सहायक होते हैं। पाठ के आगे के संवाद और वाद-विवाद में इसी दूसरे पक्ष पर सोचिए।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जनम | जन्म, उत्पत्ति |
| पालता | पालन-पोषण करता है |
| चाँदनी | चाँद का प्रकाश |
| मेह | वर्षा, बारिश |
| हवायें | हवाएँ, पवन |
| ढंग | तरीका, स्वभाव |
| छेद कर | चुभाकर, छेदकर |
| उँगलियाँ | अँगुलियाँ |
| वर बसन | सुंदर/उत्तम वस्त्र |
| कतर | काट देना |
| भौंर | भौंरा, भ्रमर |
| बेध देता | छेद देता है, बींध देता है |
| श्याम तन | काला शरीर (भौंरे का) |
| अनूठा | अद्भुत, अनोखा |
| रस | मकरंद, मधु |
| निज | अपना |
| सुगंध | अच्छी महक, खुशबू |
| निराले | अनोखे, विशेष |
| कली का जी खिला देना | कली का मन प्रसन्न करना/खिलाना |
| खटकता | आँखों में चुभता, अप्रिय लगता |
| सोहता | सुशोभित होता, शोभा देता |
| सुर शीश | देवता के सिर (पर) |
| कुल | वंश, परिवार-परंपरा |
| बड़ाई | प्रशंसा, गौरव |
| बड़प्पन | श्रेष्ठता, महानता, बड़ा होने का भाव |
| कसर | कमी, अभाव |
मेरी समझ से
(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?
• काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
• काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।
• काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
• काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।
(2) कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?
• फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का।
• फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
• फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
• फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
(3) कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है?
• व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
• व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
• कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
• यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।
(4) कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
• धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
• कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
• बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
• कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही। पर सदा ही यह दिखाता है हमें, ढंग उनके एक से होते नहीं।”
(ख) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”
मिलकर करें मिलान
इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ प्रतीक के रूप में प्रयोग किए गए हैं। अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए कि फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। दिए गए भावों को उपयुक्त प्रतीक (फूल/काँटा) से जोड़िए।
| प्रतीक | जुड़े भाव (मिलान) |
|---|---|
| फूल (कोमल, परोपकारी स्वभाव) | दया, परोपकार, प्रेम, अच्छाई, सुख, सुंदरता, कोमलता, प्रसन्नता, आनंद |
| काँटा (कठोर, कष्ट देने वाला स्वभाव) | स्वार्थ, बुराई, दुख, कठोरता, पीड़ा |
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो (फूल और काँटे) दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं?
(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया?
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
(घ) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” उदाहरण देकर समझाइए।
(ङ) “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर शीश पर।” लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?
(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।
शब्द से जुड़े शब्द / बड़प्पन
‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है — बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्त्व, गौरव।
‘बड़प्पन’ से जुड़े (भाव व्यक्त करने वाले) शब्द लिखिए।
नीचे दिए गए शब्दों में से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते हैं उन पर गोला बनाइए, और जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते उनके नीचे रेखा खींचिए।
| बड़प्पन के भाव (◯ गोला) | बड़प्पन के विपरीत भाव (रेखा) |
|---|---|
| सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना | अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन |
कविता की रचना
पृष्ठ 34 की गतिविधि में “निज सुगंधों औ निराले रंग से, है सदा देता कली का जी खिला।” उद्धृत है। मूल कविता के पाठांतर का नोट ऊपर देखें।
(क) कविता की विशेषताएँ
“औ” का अर्थ “और” है। “प्यार-डूबी” का विस्तार “प्यार में डूबी” है। संक्षिप्त शब्द कविता की लय में बैठते हैं। तुकांत जोड़े: पालता–डालता, बही–नहीं, बसन–तन, पिला–खिला, पर–कसर। फूल और काँटे प्रतीक हैं; उन्हें गोद लेने, रस पिलाने जैसे मानवीय काम करते दिखाया गया है।
(ख) विशेषता और पंक्ति का मिलान
| विशेषता का मूल क्रम | पंक्ति का मूल क्रम और कारण |
|---|---|
| 1. एक ही वर्ण से शुरू होते पास-पास शब्द | 2 — “अपना अनूठा” दोनों ‘अ’ से शुरू। पंक्ति 4 में “सोहता सुर” और गतिविधि की पंक्ति 5 में “कली का” भी उदाहरण हैं। |
| 2. मुहावरा | 4 — “आँख में खटकना”: अप्रिय लगना। “वर बसन फाड़ देना” वस्त्र फटने का सीधा वर्णन है, मुहावरा नहीं। |
| 3. प्रश्न | 1 — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे” |
| 4. मानवीकरण | 6 — “फूल लेकर तितलियों को गोद में”; पंक्ति 2 का रस पिलाना भी उपयुक्त है। |
| 5. विपरीत प्रभाव | 4 — काँटा आँख में खटकता है, फूल देवता के शीश पर सोहता है। ये प्रसंग में विपरीत भाव हैं; “एक” और “दूसरा” शब्दकोशीय विलोम नहीं हैं। |
मुख्य मिलान: 1→2, 2→4, 3→1, 4→6, 5→4। जहाँ उपयुक्त हो, कारण सहित अन्य पंक्ति भी स्वीकार की जा सकती है।
कविता का सौंदर्य
(क) सबसे उपयुक्त शब्द चुनिए
| मूल कविता की पंक्ति | चुने शब्द |
|---|---|
| रात में उन पर चमकता चाँद भी | रात; चाँद |
| मेह उन पर है बरसता एक सा | मेह — वर्षा |
| एक सी उन पर हवायें हैं बही | हवायें — आज की सामान्य वर्तनी ‘हवाएँ’ |
(ख) समूह में चर्चा — नमूना कारण
मूल कविता के शब्द अर्थ और लय के साथ बैठते हैं। ‘मेह’ यहाँ वर्षा है; ‘मेघ’ बादल है, इसलिए दोनों को हर प्रसंग में एक जैसा नहीं मानेंगे। ‘हवाएँ’ स्त्रीलिंग बहुवचन है और ‘हैं बही’ से मेल खाता है। ‘पवन’ या ‘समीर’ रखने पर क्रिया भी बदलनी पड़ती। समूह में अलग चुनाव करें तो अर्थ, लय और व्याकरण का कारण दें; यह दावा न करें कि बिना चर्चा सभी साथी एक ही शब्द चुनेंगे।
विशेषण
जो शब्द संज्ञा की विशेषता बताए वह विशेषण है; जिस संज्ञा की विशेषता बताई जाए वह विशेष्य है।
(क) विशेषण–विशेष्य
| अभ्यास की पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. भौंर का है बेध देता श्याम तन | श्याम | तन |
| 2. फाड़ देता है किसी का वर बसन | वर — उत्तम / सुंदर | बसन |
| 3. भौंर को अपना अनूठा रस पिला | अनूठा; ‘अपना’ भी संबंध बताता है | रस |
| 4. निज सुगंधों औ निराले ढंग से | निराले; ‘निज’ भी संबंध बताता है | ढंग; निज→सुगंधों |
पृष्ठ 35 के विशेषण अभ्यास में ‘ढंग’ है, जबकि पृष्ठ 29 की मूल कविता में ‘रंग’ है। अभ्यास के अनुसार निराले→ढंग; मूल कविता का संदर्भ लें तो निराले→रंग लिखें। ‘निज’ और ‘अपना’ यहाँ संज्ञा के साथ आए सार्वनामिक विशेषण हैं।
(ख) अपने विशेषण लिखिए — नमूने
फूल—सुगंधित; काँटा—नुकीला; मेह—मूसलाधार; चाँद—चमकीला; रात—शांत। अन्य उचित विशेषण भी लिख सकते हैं।
आपकी बात / सृजन
(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध एवं व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता एवं आनंद फैला देता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता एवं आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
(ग) ‘फूल’ और ‘काँटा’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए। (संकेत — नमक-चीनी; शांत-क्रोधी; खट्टा-मीठा; काला-सफेद; सुख-दुख आदि)
(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
सृजन
(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। (ख) मान लीजिए कि फूल और काँटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत (संवाद) अपनी कल्पना से लिखिए।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
वाद-विवाद
विषय — ‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है।’ इस पर विभिन्न समूह बनाकर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
आज की पहेली — चित्रों का सही मिलान
पृष्ठ 39 के चित्रों को ऊपर से नीचे 1 नागफनी, 2 बेर, 3 नीबू, 4 गुलाब, 5 बबूल, 6 करौंदा गिनें। बाईं ओर दिए नामों का मूल क्रम बनाए रखने पर मिलान:
| नाम का मूल क्रम | चित्र का क्रम | पहचान का संकेत |
|---|---|---|
| 1. बबूल | 5 | छोटी संयुक्त पत्तियाँ, पीले गोल पुष्प-गुच्छे |
| 2. गुलाब | 4 | गुलाबी फूल और तने पर काँटे |
| 3. नागफनी | 1 | मोटे चपटे हरे खंड और काँटे |
| 4. बेर | 2 | डाल पर गोल पीले-हरे फल |
| 5. करौंदा | 6 | लाल, कुछ लंबे फल |
| 6. नीबू | 3 | पीले नीबू के फल |
मिलान: 1→5, 2→4, 3→1, 4→2, 5→6, 6→3। फूलों का रंग और पौधे का रूप प्रजाति व अवस्था के अनुसार बदल सकते हैं; चित्रों की पहचान इस पृष्ठ में दिखे संकेतों पर आधारित है। पौधों को बिना तोड़े देखें और काँटे न छुएँ।
खोजबीन के लिए
रंग-बिरंगे फूलों एवं फूलों की घाटी से संबंधित कविताएँ/वीडियो खोजिए।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
2. कविता में फूल और काँटे को कौन-कौन सी समान चीज़ें मिलती हैं?
3. काँटे का स्वभाव कैसा है? कविता के आधार पर बताइए।
4. फूल अपने व्यवहार से दूसरों को क्या-क्या देता है?
5. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. फूल और काँटे के स्वभाव की तुलना कीजिए और बताइए कि उनसे हमें क्या शिक्षा मिलती है।
7. “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि सच्चा बड़प्पन किसे कहते हैं।
8. इस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ किसके प्रतीक हैं? प्रतीकों के माध्यम से कवि क्या समझाना चाहते हैं?
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘फूल और काँटा’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
2. कवि ‘हरिऔध’ का जन्म उत्तर प्रदेश के किस जनपद में हुआ था?
(क) आजमगढ़
(ख) वाराणसी
(ग) उन्नाव
(घ) प्रयागराज
3. फूल और काँटा दोनों को क्या समान रूप से मिलता है?
(क) केवल चाँदनी
(ख) केवल वर्षा
(ग) चाँदनी, वर्षा और हवा
(घ) कुछ भी समान नहीं
4. कविता में काँटा किसको हानि पहुँचाता है?
(क) केवल उँगलियों को
(ख) उँगलियों, वस्त्र, तितली और भौंरे को
(ग) केवल फूल को
(घ) किसी को नहीं
5. ‘श्याम तन’ में ‘श्याम’ का अर्थ है—
(क) सुंदर
(ख) काला
(ग) कोमल
(घ) बड़ा
6. कविता के अनुसार फूल कहाँ सुशोभित होता है?
(क) सबकी आँखों में
(ख) देवता के शीश (सिर) पर
(ग) काँटे के पास
(घ) पानी में
7. ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ शब्द का अर्थ है—
(क) अधिकता
(ख) कमी, अभाव
(ग) सुंदरता
(घ) सम्मान
8. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
(क) कुल ही सम्मान का आधार है
(ख) गुण एवं कर्म ही सम्मान का आधार हैं
(ग) धन ही सबसे बड़ा है
(घ) काँटा फूल से श्रेष्ठ है
9. कविता में ‘फूल’ किसका प्रतीक है?
(क) बुराई एवं कठोरता का
(ख) अच्छाई, कोमलता एवं परोपकार का
(ग) स्वार्थ का
(घ) क्रोध का
10. कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ क्यों लिखा गया है?
(क) वर्तनी की भूल के कारण
(ख) कविता की लय बनाए रखने के लिए
(ग) शब्द का अर्थ बदलने के लिए
(घ) कठिन बनाने के लिए
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): फूल और काँटे को प्रकृति से समान देखभाल मिलती है।
कारण (R): दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं और दोनों पर समान चाँदनी, वर्षा एवं हवा पड़ती है।
2. अभिकथन (A): कविता के अनुसार व्यक्ति का सम्मान उसके कुल से होता है।
कारण (R): कवि कहते हैं — “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”
3. अभिकथन (A): काँटा सबकी आँखों में खटकता है।
कारण (R): काँटा अपने कठोर स्वभाव से उँगलियों को छेदता, वस्त्र फाड़ता तथा तितली-भौंरे को हानि पहुँचाता है।
4. अभिकथन (A): फूल देवता के शीश पर सुशोभित होता है।
कारण (R): फूल अपने कोमल एवं परोपकारी स्वभाव से सबको सुगंध एवं प्रसन्नता देता है।
5. अभिकथन (A): कविता में ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ का प्रयोग हुआ है।
कारण (R): यह कविता गद्य में लिखी गई है, इसलिए शब्द अधूरे हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- कविता की मुख्य पंक्तियाँ (“ढंग उनके एक से होते नहीं”, “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे…”) कंठस्थ रखें — भावार्थ एवं संदेश के प्रश्नों में ये बहुत काम आती हैं।
- फूल और काँटे की समानताएँ (एक पौधा, चाँदनी, वर्षा, हवा) तथा विभिन्नताएँ (स्वभाव) को अलग-अलग बिंदुओं में याद रखें।
- कविता का केंद्रीय संदेश — “सम्मान कुल से नहीं, गुण-कर्म से” — हर प्रकार के प्रश्न में उत्तर का आधार बनाएँ।
- शब्दार्थ एवं प्रतीकों (फूल = अच्छाई, काँटा = बुराई) को उदाहरण सहित लिखें, इससे उत्तर प्रभावशाली बनता है।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- कवि का नाम गलत न लिखें — सही नाम अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ है, न कि ‘हरिवंश’ या ‘हरिऔम’।
- यह मत समझें कि कविता काँटे को बुरा एवं फूल को अच्छा ‘ठहराने’ तक सीमित है — इसका असली संदेश गुण-कर्म से सम्मान है।
- ‘बड़प्पन की कसर’ में ‘कसर’ का अर्थ ‘कमी’ है, ‘अधिकता’ नहीं — अर्थ उलटकर मत लिखें।
- ‘श्याम तन’ को फूल/पौधे का नहीं, बल्कि भौंरे के काले शरीर का वर्णन समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘फूल और काँटा’ कविता के कवि कौन हैं?
‘फूल और काँटा’ कविता के कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1865–1947) हैं, जो बच्चों के लिए लिखी सरल एवं मधुर कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
‘फूल और काँटा’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश यह है कि व्यक्ति का सम्मान एवं बड़प्पन उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों, स्वभाव एवं अच्छे कर्मों से होता है।
कविता में फूल और काँटे में मुख्य अंतर क्या है?
फूल कोमल एवं परोपकारी है — वह सबको सुगंध एवं सुख देता है; जबकि काँटा कठोर एवं कष्टदायी है — वह दूसरों को हानि पहुँचाता है। इसी कारण फूल देवता के शीश पर सजता है और काँटा सबकी आँखों में खटकता है।
पाठ्यपुस्तक के अभ्यास और ClearStudy के अतिरिक्त अभ्यास अलग दिए हैं। उत्तर और व्याख्याएँ अध्ययन-सहायता हैं, आधिकारिक NCERT उत्तर-कुंजी नहीं।
