कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 4 – पानी रे पानी (निबंध) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 4 ‘पानी रे पानी’ (लेखक – अनुपम मिश्र) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, शब्दों की बात, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर। यह एक रोचक निबंध है जो जल-चक्र, अकाल, बाढ़ और वर्षा-जल संग्रहण के महत्त्व को सरल भाषा में समझाता है।
लेखक परिचय – अनुपम मिश्र
अनुपम मिश्र (1948–2016) एक प्रखर लेखक, संपादक और जाने-माने पर्यावरणविद् होने के साथ-साथ छायाकार भी थे। पर्यावरण-संरक्षण, विशेषकर जल एवं पारंपरिक तालाबों के संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ है, जिसका अनुवाद ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में हो चुका है। ‘साफ माथे का समाज’ उनकी एक और महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक एवं संपादक भी थे। उनका लेखन सरल, रोचक एवं समाज को जल-संरक्षण के प्रति जागरूक करने वाला है।
पाठ का सार
‘पानी रे पानी’ निबंध में अनुपम मिश्र ने सरल एवं रोचक भाषा में यह समझाया है कि हमारा पानी कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है। लेखक बताते हैं कि भूगोल की पुस्तक में पढ़ाया जाने वाला जल-चक्र समुद्र से उठी भाप के बादल बनने, फिर वर्षा होकर नदियों के रास्ते पुनः समुद्र में मिल जाने की एक सतत प्रक्रिया है। यह तो जल-चक्र की किताबी बात है।
परंतु आज वास्तविकता कुछ अलग है। घरों, स्कूलों, कार्यालयों, कारखानों और खेतों में पानी का अजीब-सा चक्कर सामने आ रहा है। नलों में समय पर पानी नहीं आता; जब आता है तो बेवक्त। पानी को लेकर लोगों में आपस में झगड़े होने लगते हैं और कई लोग नलों में मोटर लगाकर दूसरों का हक छीन लेते हैं, जिससे पानी की कमी और बढ़ जाती है। शहरों में अब पानी भी बिकने लगा है और गरमी में देश के कई हिस्सों में अकाल जैसी स्थिति बन जाती है। दूसरी ओर बरसात में चारों ओर पानी ही पानी हो जाता है, सड़कें-रेलपटरियाँ डूब जाती हैं और बाढ़ आ जाती है। लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
लेखक धरती की तुलना एक बहुत बड़ी गुल्लक से करते हैं। जैसे हम गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर उपयोग करते हैं, वैसे ही प्रकृति वर्षा के रूप में धरती की गुल्लक में पानी भरती है। तालाब, झील आदि इस पानी को जमीन के नीचे छिपे भूजल-भंडार तक पहुँचाते हैं, जिससे हम पूरे साल पानी निकाल पाते हैं। परंतु जमीन के लालच में हमने तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर मकान, बाजार, स्टेडियम बना लिए, जिसकी सजा अब सूखते नलों और डूबती बस्तियों के रूप में मिल रही है। लेखक का संदेश है — जल-चक्र को ठीक से समझें, वर्षा होने पर जल को थाम लें, भूजल-भंडार सुरक्षित रखें और अपनी ‘गुल्लक’ भरते रहें, तभी हमें कभी पानी की कमी नहीं होगी।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जल-चक्र | पानी के समुद्र से भाप बनकर बादल बनने, बरसने और पुनः समुद्र में मिलने की सतत प्रक्रिया |
| गुल्लक | पैसे जमा करने का मिट्टी/धातु का पात्र; यहाँ पानी जमा करने वाली धरती का प्रतीक |
| बेवक्त | असमय, गलत समय पर |
| अकाल | सूखा, पानी/अन्न की भारी कमी का समय |
| हक | अधिकार |
| बस्ती | लोगों के रहने का इलाका |
| भूजल | जमीन के नीचे जमा हुआ पानी |
| जलस्रोत | पानी के साधन (नदी, तालाब, कुआँ आदि) |
| समृद्ध | भरा-पूरा, सम्पन्न |
| रिसना | धीरे-धीरे टपककर भीतर जाना |
| लालच | लोभ, अधिक पाने की इच्छा |
| पाटना | गड्ढे/तालाब को भरकर समतल कर देना |
| रखवाली | देखभाल, रक्षा |
| तू-तू, मैं-मैं | आपस में झगड़ा, कहासुनी |
| टंटा | झगड़ा, झंझट |
| वर्षा-जल संग्रहण | वर्षा के पानी को एकत्र कर भंडारण करना |
| उपसर्ग | शब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलने वाला शब्दांश |
| समानार्थी | समान अर्थ देने वाला शब्द (पर्यायवाची) |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?
• नल सूख जाने से।
• पानी बरसने से।
• तालाब और झीलों से।
• बाढ़ आने से।
(2) निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?
• वर्षा जल का संग्रह करना।
• समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
• नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
• बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।
(3) “इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?
• जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
• आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
• तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
• भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ शब्द-समूह या संदर्भ स्तंभ 1 में और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. वर्षा जल संग्रहण | वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से (मानवीय प्रयासों से) धरती में संग्रह करना। |
| 2. जल संकट | जल की अत्यधिक कमी होना। |
| 3. जल-चक्र | समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना। |
| 4. भूजल | जमीन के नीचे छिपा जल भंडार। |
पंक्तियों पर चर्चा
इस पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
• “पानी आता भी है तो बेवक्त।”
• “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”
• “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”
• “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”
सोच-विचार के लिए
लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।
(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
शीर्षक
(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
शब्दों की बात
बात पर बल देना
• “हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” • “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”
(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
समानार्थी शब्द
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। (दिए गए शब्द: सूर्य, मेघ, भास्कर, पवन, वारिद, वायु, दिवाकर, जलद, वाष्प, समीर, दिनकर, नीरद)
| वाक्य (रेखांकित शब्द) | उपयुक्त समानार्थी शब्द |
|---|---|
| (क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे। | सूर्य / भास्कर / दिवाकर / दिनकर |
| (ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है। | वाष्प |
| (ग) अचानक बादल गरजने लगे। | मेघ / वारिद / जलद / नीरद |
| (घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है। | पवन / वायु / समीर |
उपसर्ग
“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ में जुड़कर नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है – समय, मृत्यु; जबकि अकाल का अर्थ है – कुसमय, सूखा। किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसका अर्थ बदलने वाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं।
(क) ‘देश’ शब्द में उपसर्ग जोड़कर बने शब्द लिखिए।
(ख) उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए (सु, अ, वि + पात्र, ज्ञान)।
आपकी बात
(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं? सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें। (ग) अपने बनाए चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
सृजन
(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया… सार्वजनिक नल पर आप और पड़ोसी दोनों पहले बालटी भरना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपस में विवाद (तू-तू मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश-वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें… घर, गाँव या शहर।” इस वाक्य को पढ़कर उभरे चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।
पानी रे पानी / सबका पानी (परिचर्चा)
दैनिक गतिविधियों के चित्रों पर बातचीत कीजिए – कौन से कार्य पानी का संकट कम करते हैं और कौन गुल्लक को जल्दी खाली करते हैं? ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ विषय पर परिचर्चा कर रिपोर्ट तैयार करें।
दैनिक कार्यों में पानी / जन-सुविधा के रूप में जल
(क) पता लगाइए कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है, उसकी तालिका बनाइए। घर के सदस्य पानी बचाने के क्या-क्या उपाय करते हैं? (ख) क्या आपको आवश्यकतानुसार पानी मिल जाता है? (ग) घर में पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?
बिन पानी सब सून
(क) पाठ में भूजल स्तर कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं (जैसे तालाबों में कचरा भरना)। और क्या कारण हो सकते हैं? (ख) भूजल की कमी से किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है? (ग) आपके स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल बढ़ाने के क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
यह भी जानें – वर्षा-जल संग्रहण
वर्षा-जल संग्रहण क्या है और छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण कैसे किया जाता है?
आज की पहेली / खोजबीन के लिए / झरोखे से / साझी समझ
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं और वे किस क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध हैं?
2. लेखक ने धरती की तुलना गुल्लक से क्यों की है?
3. ‘अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं’ – इसका क्या अर्थ है?
4. नलों में मोटर लगाने से क्या हानि होती है?
5. लेखक का जल-चक्र के विषय में मुख्य संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘पानी रे पानी’ पाठ का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. पाठ के अनुसार पानी की समस्या के क्या-क्या कारण हैं और इनका समाधान कैसे हो सकता है?
8. भूजल-भंडार किस प्रकार समृद्ध होता है और उसके सूख जाने पर क्या परिणाम होंगे?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा
(ख) अनुपम मिश्र
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) प्रेमचंद
2. लेखक ने धरती की तुलना किससे की है?
(क) समुद्र से
(ख) गुल्लक से
(ग) बादल से
(घ) नदी से
3. जल-चक्र की शुरुआत किससे होती है?
(क) नदी से
(ख) समुद्र से उठी भाप से
(ग) तालाब से
(घ) कुएँ से
4. पाठ के अनुसार ‘अकाल’ का अर्थ है—
(क) बाढ़
(ख) सूखा / पानी की भारी कमी
(ग) वर्षा
(घ) समय
5. लेखक के अनुसार अकाल और बाढ़—
(क) बिलकुल अलग समस्याएँ हैं
(ख) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं
(ग) केवल गाँवों की समस्या हैं
(घ) केवल शहरों की समस्या हैं
6. भूजल-भंडार किससे समृद्ध होता है?
(क) नल सूखने से
(ख) तालाबों-झीलों एवं वर्षा से
(ग) तालाबों को पाटने से
(घ) मोटर लगाने से
7. पाठ में बताई गई ‘बड़ी गलती’ क्या है?
(क) अधिक पेड़ लगाना
(ख) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना
(ग) वर्षा-जल संग्रहण करना
(घ) नल बंद रखना
8. ‘वर्षा-जल संग्रहण’ का मूल उद्देश्य क्या है?
(क) जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए
(ख) पानी बहा देना
(ग) तालाब भरना मना है
(घ) पानी बेचना
9. ‘काल’ शब्द में ‘अ’ उपसर्ग जुड़ने से बना शब्द है—
(क) सुकाल
(ख) प्रकाल
(ग) अकाल
(घ) विकाल
10. इस पाठ की विधा क्या है?
(क) कविता
(ख) निबंध (गद्य)
(ग) नाटक
(घ) पत्र
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): लेखक ने धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक कहा है।
कारण (R): धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल उपयोग में लाते हैं।
2. अभिकथन (A): तालाबों को पाटना जल-संरक्षण के लिए लाभदायक है।
कारण (R): तालाब वर्षा-जल को भूजल-भंडार तक पहुँचाने का काम करते हैं।
3. अभिकथन (A): अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
कारण (R): दोनों का संबंध जल-चक्र को न समझने एवं जल के गलत प्रबंधन से है।
4. अभिकथन (A): वर्षा-जल संग्रहण से जल की उपलब्धता बढ़ती है।
कारण (R): वर्षा के जल को एकत्र कर भंडारण करके बाद में उपयोग किया जा सकता है।
5. अभिकथन (A): छत के वर्षा-जल का उपयोग बिना साफ किए ही कर लेना चाहिए।
कारण (R): छत पर एकत्रित जल में मिट्टी के कण मिल जाते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- जल-चक्र की प्रक्रिया (भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र) क्रम से याद रखें – यह बार-बार पूछा जाता है।
- ‘धरती रूपी गुल्लक’ की तुलना (रूपक) पर आधारित प्रश्न में संचय एवं उपयोग की समानता अवश्य लिखें।
- उत्तर में पाठ की मूल पंक्तियाँ (जैसे “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं”) उद्धृत करने से अंक बढ़ते हैं।
- उपसर्ग वाले प्रश्न में उपसर्ग को अलग दिखाकर (अ + काल = अकाल) लिखें।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
- लेखक का नाम ‘अनुपम मिश्र’ है – इसे किसी कवि/कहानीकार से न मिलाएँ; यह पाठ निबंध (गद्य) है, कविता नहीं।
- ‘अकाल’ का अर्थ ‘बाढ़’ न लिखें – अकाल का अर्थ सूखा/पानी की कमी है।
- गुल्लक की तुलना को केवल ‘पैसा जमा करना’ तक सीमित न रखें – इसका भाव ‘पानी का संचय एवं उपयोग’ है।
- तालाबों को पाटना समाधान नहीं, बल्कि समस्या का कारण है – इसे संरक्षण से अलग समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक अनुपम मिश्र (1948–2016) हैं, जो प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, लेखक एवं संपादक थे और जल तथा तालाबों के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।
‘पानी रे पानी’ पाठ की विधा क्या है?
यह पाठ एक निबंध (गद्य) है, जिसमें जल-चक्र, अकाल, बाढ़ तथा वर्षा-जल संग्रहण के महत्त्व को सरल भाषा में समझाया गया है।
लेखक ने धरती को गुल्लक क्यों कहा है?
क्योंकि जैसे गुल्लक में पैसा जमा होता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल जरूरत के अनुसार उपयोग करते हैं।
पाठ-गद्यांश एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
