कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 4 – पानी रे पानी (निबंध) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 4 ‘पानी रे पानी’ (लेखक – अनुपम मिश्र) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए, शब्दों की बात, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर। यह एक रोचक निबंध है जो जल-चक्र, अकाल, बाढ़ और वर्षा-जल संग्रहण के महत्त्व को सरल भाषा में समझाता है।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार पाठ: 4 शीर्षक: पानी रे पानी विधा: निबंध (गद्य) रचनाकार: अनुपम मिश्र सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – अनुपम मिश्र

अनुपम मिश्र (1948–2016) एक प्रखर लेखक, संपादक और जाने-माने पर्यावरणविद् होने के साथ-साथ छायाकार भी थे। पर्यावरण-संरक्षण, विशेषकर जल एवं पारंपरिक तालाबों के संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ है, जिसका अनुवाद ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में हो चुका है। ‘साफ माथे का समाज’ उनकी एक और महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक एवं संपादक भी थे। उनका लेखन सरल, रोचक एवं समाज को जल-संरक्षण के प्रति जागरूक करने वाला है।

पाठ का सार

‘पानी रे पानी’ निबंध में अनुपम मिश्र ने सरल एवं रोचक भाषा में यह समझाया है कि हमारा पानी कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है। लेखक बताते हैं कि भूगोल की पुस्तक में पढ़ाया जाने वाला जल-चक्र समुद्र से उठी भाप के बादल बनने, फिर वर्षा होकर नदियों के रास्ते पुनः समुद्र में मिल जाने की एक सतत प्रक्रिया है। यह तो जल-चक्र की किताबी बात है।

परंतु आज वास्तविकता कुछ अलग है। घरों, स्कूलों, कार्यालयों, कारखानों और खेतों में पानी का अजीब-सा चक्कर सामने आ रहा है। नलों में समय पर पानी नहीं आता; जब आता है तो बेवक्त। पानी को लेकर लोगों में आपस में झगड़े होने लगते हैं और कई लोग नलों में मोटर लगाकर दूसरों का हक छीन लेते हैं, जिससे पानी की कमी और बढ़ जाती है। शहरों में अब पानी भी बिकने लगा है और गरमी में देश के कई हिस्सों में अकाल जैसी स्थिति बन जाती है। दूसरी ओर बरसात में चारों ओर पानी ही पानी हो जाता है, सड़कें-रेलपटरियाँ डूब जाती हैं और बाढ़ आ जाती है। लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं

लेखक धरती की तुलना एक बहुत बड़ी गुल्लक से करते हैं। जैसे हम गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर उपयोग करते हैं, वैसे ही प्रकृति वर्षा के रूप में धरती की गुल्लक में पानी भरती है। तालाब, झील आदि इस पानी को जमीन के नीचे छिपे भूजल-भंडार तक पहुँचाते हैं, जिससे हम पूरे साल पानी निकाल पाते हैं। परंतु जमीन के लालच में हमने तालाबों को कचरे से पाटकर उन पर मकान, बाजार, स्टेडियम बना लिए, जिसकी सजा अब सूखते नलों और डूबती बस्तियों के रूप में मिल रही है। लेखक का संदेश है — जल-चक्र को ठीक से समझें, वर्षा होने पर जल को थाम लें, भूजल-भंडार सुरक्षित रखें और अपनी ‘गुल्लक’ भरते रहें, तभी हमें कभी पानी की कमी नहीं होगी।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
जल-चक्रपानी के समुद्र से भाप बनकर बादल बनने, बरसने और पुनः समुद्र में मिलने की सतत प्रक्रिया
गुल्लकपैसे जमा करने का मिट्टी/धातु का पात्र; यहाँ पानी जमा करने वाली धरती का प्रतीक
बेवक्तअसमय, गलत समय पर
अकालसूखा, पानी/अन्न की भारी कमी का समय
हकअधिकार
बस्तीलोगों के रहने का इलाका
भूजलजमीन के नीचे जमा हुआ पानी
जलस्रोतपानी के साधन (नदी, तालाब, कुआँ आदि)
समृद्धभरा-पूरा, सम्पन्न
रिसनाधीरे-धीरे टपककर भीतर जाना
लालचलोभ, अधिक पाने की इच्छा
पाटनागड्ढे/तालाब को भरकर समतल कर देना
रखवालीदेखभाल, रक्षा
तू-तू, मैं-मैंआपस में झगड़ा, कहासुनी
टंटाझगड़ा, झंझट
वर्षा-जल संग्रहणवर्षा के पानी को एकत्र कर भंडारण करना
उपसर्गशब्द के आरंभ में जुड़कर अर्थ बदलने वाला शब्दांश
समानार्थीसमान अर्थ देने वाला शब्द (पर्यायवाची)

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?

• नल सूख जाने से।

• पानी बरसने से।

• तालाब और झीलों से।

• बाढ़ आने से।

उत्तर★ पानी बरसने से तथा ★ तालाब और झीलों से।वर्षा का पानी तालाबों और झीलों में जमा होकर धीरे-धीरे रिसकर जमीन के नीचे भूजल-भंडार तक पहुँचता है और उसे समृद्ध बनाता है।

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?

• वर्षा जल का संग्रह करना।

• समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।

• नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।

• बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।

उत्तर★ समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना तथा ★ नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।जल-चक्र में समुद्र से भाप उठती है, बादल बनकर बरसती है, और नदियों के रास्ते पानी पुनः समुद्र में मिल जाता है – यही दोनों बातें जल-चक्र की प्रक्रिया का भाग हैं।

(3) “इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?

• जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।

• आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।

• तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।

• भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।

उत्तर★ तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।पाठ में यह ‘बड़ी गलती’ तालाबों को कचरे से भरकर उन पर मकान, बाजार आदि बना देना है। इसी कारण आज गरमी में नल सूखते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबती हैं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर चर्चा करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय हमने पाठ के तथ्यों को आधार बनाया – जैसे भूजल वर्षा एवं तालाबों से बढ़ता है, इसलिए वे ही उत्तर चुने।मित्रों के उत्तर भिन्न हो सकते हैं; परस्पर चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ शब्द-समूह या संदर्भ स्तंभ 1 में और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके सही मिलान कीजिए।

स्तंभ 1स्तंभ 2
1. वर्षा जल संग्रहणवर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से (मानवीय प्रयासों से) धरती में संग्रह करना।
2. जल संकटजल की अत्यधिक कमी होना।
3. जल-चक्रसमुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना।
4. भूजलजमीन के नीचे छिपा जल भंडार।
सही मिलान1 (वर्षा जल संग्रहण) → वर्षा के जल को प्राकृतिक/कृत्रिम रूप से धरती में संग्रह करना।2 (जल संकट) → जल की अत्यधिक कमी होना।3 (जल-चक्र) → समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा द्वारा पुनः समुद्र में मिलना।4 (भूजल) → जमीन के नीचे छिपा जल भंडार।

पंक्तियों पर चर्चा

इस पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?

• “पानी आता भी है तो बेवक्त।”

अर्थ/विचारइसका अर्थ है कि नलों में पानी अब निश्चित समय पर नहीं, बल्कि गलत समय (असमय) पर आता है – कभी देर रात तो कभी बहुत सबेरे। इससे लोगों को मीठी नींद छोड़कर बालटियाँ-घड़े भरने पड़ते हैं, जो पानी की कमी एवं अव्यवस्था को दर्शाता है।

• “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”

अर्थ/विचारगरमी के मौसम में पानी की भारी कमी के कारण देश के अनेक भागों में सूखे (अकाल) जैसी स्थिति बन जाती है – न पीने को पर्याप्त पानी मिलता है, न खेती के लिए। यह जल-संकट की गंभीरता को बताता है।

• “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”

अर्थ/विचारबरसात के मौसम में बाढ़ आने पर घर, स्कूल, सड़कें, रेलपटरियाँ डूब जाती हैं और जन-जीवन कुछ दिनों के लिए ठप (थम) हो जाता है; सब कुछ बह जाता है। यह बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाता है।

• “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

अर्थ/विचारइसका भाव है कि पानी का बहुत कम हो जाना (अकाल) और बहुत अधिक हो जाना (बाढ़) – दोनों एक ही समस्या के दो रूप हैं, जिनका कारण है जल-चक्र को न समझना और जल का सही प्रबंधन न करना। यदि हम वर्षा-जल को सँभाल लें तो दोनों ही समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

सोच-विचार के लिए

लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।

(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?

उत्तरजैसे हम गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करते हैं और जरूरत पड़ने पर निकालकर उपयोग करते हैं, वैसे ही धरती में वर्षा के रूप में पानी जमा होता रहता है।तालाब, झील आदि से रिसकर यह पानी भूजल-भंडार में संचित हो जाता है, जिसे हम पूरे साल भर निकालकर काम में लाते हैं। इसी संचय एवं उपयोग की समानता के कारण लेखक ने धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक कहा है।

(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?

उत्तरसमुद्र के पानी से सूरज की गरमी से भाप उठती है, जो ऊपर जाकर बादल बन जाती है। बादल हवा के साथ चलते हैं और ठंडे होकर वर्षा के रूप में बरसते हैं।वर्षा का यह पानी नदियों, नालों के रास्ते बहकर पुनः समुद्र में जा मिलता है। इस प्रकार पानी की यह यात्रा एक तरफ से शुरू होकर वापस समुद्र पर समाप्त होती है और जल-चक्र पूरा हो जाता है।

(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?

उत्तरयदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो पीने, खेती, उद्योग एवं दैनिक उपयोग के लिए पानी नहीं बचेगा। भूजल-भंडार में पानी रिसना बंद हो जाएगा, जिससे कुएँ और नल भी सूख जाएँगे।फसलें नष्ट हो जाएँगी, अकाल पड़ेगा, पेड़-पौधे और जीव-जंतु मरने लगेंगे तथा जीवन का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। इसलिए जलस्रोतों को बचाना अत्यंत आवश्यक है।

(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?

उत्तररुपये से हम केवल वस्तुएँ खरीद सकते हैं, परंतु पानी के बिना जीवन ही संभव नहीं है। पीने, खाना बनाने, खेती, सफाई – हर काम पानी पर निर्भर है।पानी प्रकृति का अमूल्य उपहार है, जिसे रुपयों से बना या वापस नहीं लाया जा सकता। इसीलिए लेखक कहते हैं कि वर्षा रूपी जल रुपयों से भी कई गुना कीमती है और इसे धरती की बड़ी गुल्लक में जमा कर लेना चाहिए।

शीर्षक

(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।

उत्तरइस पाठ का मूल विषय पानी ही है – पानी कहाँ से आता है, कहाँ जाता है, उसकी कमी (अकाल) और अधिकता (बाढ़) तथा उसके संरक्षण की बात। पूरे निबंध में पानी की महत्ता एवं उसके संकट पर ही चर्चा है।‘पानी रे पानी’ में ‘रे’ शब्द एक पुकार एवं चिंता का भाव जगाता है, मानो लेखक पानी को संबोधित करते हुए हमें उसके मूल्य के प्रति सचेत कर रहे हों। इसलिए यह शीर्षक पाठ के भाव से पूर्णतः मेल खाता है।

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।

उत्तर (नमूना)मैं इस पाठ को ‘धरती की गुल्लक’ अथवा ‘जल ही जीवन’ नाम देना चाहूँगा।कारण: ‘धरती की गुल्लक’ नाम पाठ के मुख्य प्रतीक को दर्शाता है, जिसमें धरती को पानी जमा करने वाली बड़ी गुल्लक कहा गया है; जबकि ‘जल ही जीवन’ पानी के महत्त्व एवं संरक्षण के संदेश को सीधे व्यक्त करता है।

शब्दों की बात

बात पर बल देना

• “हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” • “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”

(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।

उत्तरदूसरे वाक्य में ‘भी’ शब्द हटा दिया गया है।‘भी’ शब्द के रहने से वाक्य में यह बल आता है कि जैसे हमारी गुल्लक पैसे जमा करती है, ठीक उसी प्रकार धरती भी (उसी की तरह) पानी जमा करने वाली गुल्लक है – अर्थात् धरती की गुल्लक से तुलना पर जोर पड़ता है। ‘भी’ हटा देने पर यह तुलनात्मक बल समाप्त हो जाता है और वाक्य केवल एक साधारण कथन बनकर रह जाता है।

(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।

उत्तर (उदाहरण)• “नलों में अब पूरे समय पानी नहीं आता।” – यहाँ ‘अब’ पहले एवं वर्तमान स्थिति के अंतर पर बल देता है।• “शहरों में तो अब पानी भी बिकने लगा है।” – ‘तो’ एवं ‘भी’ आश्चर्य एवं गंभीरता पर बल देते हैं।• “यह बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को।” – ‘न…न’ बाढ़ की व्यापकता पर बल देता है। (इस प्रकार के और वाक्य भी पाठ से चुने जा सकते हैं।)

समानार्थी शब्द

नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। (दिए गए शब्द: सूर्य, मेघ, भास्कर, पवन, वारिद, वायु, दिवाकर, जलद, वाष्प, समीर, दिनकर, नीरद)

वाक्य (रेखांकित शब्द)उपयुक्त समानार्थी शब्द
(क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।सूर्य / भास्कर / दिवाकर / दिनकर
(ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है।वाष्प
(ग) अचानक बादल गरजने लगे।मेघ / वारिद / जलद / नीरद
(घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है।पवन / वायु / समीर

उपसर्ग

“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द में ‘अ’ ने ‘काल’ में जुड़कर नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है – समय, मृत्यु; जबकि अकाल का अर्थ है – कुसमय, सूखा। किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसका अर्थ बदलने वाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं।

(क) ‘देश’ शब्द में उपसर्ग जोड़कर बने शब्द लिखिए।

उत्तरप्र + देश = प्रदेश; वि + देश = विदेश; पर + देश = परदेश; स्व + देश = स्वदेश।

(ख) उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए (सु, अ, वि + पात्र, ज्ञान)।

उत्तरसुपात्र: (सु + पात्र = योग्य व्यक्ति) – दान सदा सुपात्र को ही देना चाहिए।अज्ञान: (अ + ज्ञान = ज्ञान का अभाव) – अज्ञान के कारण मनुष्य अनेक भूलें करता है।विज्ञान: (वि + ज्ञान = विशेष ज्ञान) – विज्ञान ने हमारे जीवन को सरल बना दिया है। (‘सुज्ञान’, ‘अपात्र’ आदि शब्द भी बनाए जा सकते हैं।)

आपकी बात

(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं? सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।

उत्तर• नल को आवश्यकता से अधिक न खोलें और टपकते नलों को ठीक कराएँ। • ब्रश करते या नहाते समय पानी बचाएँ। • वर्षा-जल को छत एवं गड्ढों के माध्यम से संग्रह करें (वर्षा जल संग्रहण)।• तालाबों, कुओं एवं नदियों को साफ रखें और उनमें कचरा न डालें। • अधिक-से-अधिक पेड़ लगाएँ ताकि भूजल बढ़े। • पानी की बर्बादी रोकने एवं संरक्षण के लिए दूसरों को भी जागरूक करें।

(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें। (ग) अपने बनाए चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)जल-चक्र का वर्णन पाठ के आरंभिक खंड में है – जिसमें सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, वर्षा की बूँदें, नदी और तीरों द्वारा जल की यात्रा का चित्र बताया गया है।चित्र-विवरण: चित्र में नीचे समुद्र, ऊपर सूरज, समुद्र से उठती भाप, फिर बादल, बादल से वर्षा की बूँदें, धरती पर बहती नदी और तीरों (→) से दर्शाया जा सकता है कि भाप कैसे बादल बनकर बरसती है और नदी का पानी पुनः समुद्र में मिल जाता है। यह एक रचनात्मक चित्रांकन गतिविधि है, जिसे विद्यार्थी स्वयं बनाकर समझाएँ।

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

सृजन

(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया… सार्वजनिक नल पर आप और पड़ोसी दोनों पहले बालटी भरना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपस में विवाद (तू-तू मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश-वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।

उत्तर (नमूना स्लोगन)1. “पानी सबका साझा है, धैर्य से भरें बारी-बारी।”2. “झगड़ा नहीं, सहयोग करें – पानी मिल-बाँटकर लें।”3. “पहले आओ, पहले पाओ – पंक्ति में रहकर पानी पाओ।”4. “बूँद-बूँद कीमती है, मिलकर इसे बचाएँ।”5. “पड़ोसी का हक भी समझें, जल बचाएँ, मेल बढ़ाएँ।”

(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें… घर, गाँव या शहर।” इस वाक्य को पढ़कर उभरे चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।

उत्तर (गतिविधि)यह एक रचनात्मक चित्रांकन गतिविधि है। इसमें ऊपर चमकता सूरज, नीला समुद्र, सफेद-स्याह बादल, बहती नदी, उसके किनारे बसा हरा-भरा गाँव/शहर और बरसती बूँदें बनाकर उपयुक्त रंग भरे जा सकते हैं।

पानी रे पानी / सबका पानी (परिचर्चा)

दैनिक गतिविधियों के चित्रों पर बातचीत कीजिए – कौन से कार्य पानी का संकट कम करते हैं और कौन गुल्लक को जल्दी खाली करते हैं? ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ विषय पर परिचर्चा कर रिपोर्ट तैयार करें।

उत्तर (मार्गदर्शन)पानी बचाने वाले कार्य: वर्षा-जल संग्रहण, टपकते नल ठीक कराना, मापकर पानी का उपयोग, पेड़ लगाना, तालाबों की सफाई।गुल्लक खाली करने वाले कार्य: नल खुला छोड़ना, पाइप से वाहन धोना, पानी की बर्बादी, तालाबों को पाटना।रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: पानी की बर्बादी रोकना, समान वितरण, वर्षा-जल संग्रहण को बढ़ावा देना तथा सबमें जल-संरक्षण की आदत विकसित करना – तभी सबको पर्याप्त पानी मिल सकता है।

दैनिक कार्यों में पानी / जन-सुविधा के रूप में जल

(क) पता लगाइए कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है, उसकी तालिका बनाइए। घर के सदस्य पानी बचाने के क्या-क्या उपाय करते हैं? (ख) क्या आपको आवश्यकतानुसार पानी मिल जाता है? (ग) घर में पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?

उत्तर (मार्गदर्शन)नमूना तालिका: पीने-खाना बनाने में – लगभग 15–20 लीटर; नहाने में – 20–25 लीटर; बर्तन धोने में – 15 लीटर; कपड़े धोने में – 20 लीटर; सफाई/पौधों में – 10 लीटर। (विद्यार्थी अपने घर के अनुसार सही मात्रा भरें।)बचत के उपाय: बाल्टी से नहाना, टपकते नल ठीक कराना, बचे पानी से पौधे सींचना।(ख) यह उत्तर अपने अनुभव के आधार पर दें – यदि पानी पर्याप्त मिलता है तो नियमित आपूर्ति के कारण, यदि नहीं तो आपूर्ति की कमी/अनियमितता के कारण। (ग) पानी का संचयन प्रायः टंकी, ड्रम, घड़े, बाल्टी एवं मटके आदि पात्रों में किया जाता है।

बिन पानी सब सून

(क) पाठ में भूजल स्तर कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं (जैसे तालाबों में कचरा भरना)। और क्या कारण हो सकते हैं? (ख) भूजल की कमी से किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है? (ग) आपके स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल बढ़ाने के क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

उत्तर(क) भूजल कम होने के अन्य कारण: अत्यधिक बोरवेल/नलकूप लगाकर पानी खींचना; तालाबों-कुओं का सूखना; जंगलों एवं पेड़ों की कटाई; पक्के निर्माण (सड़क, मकान) से वर्षा-जल का जमीन में न रिस पाना; पानी की बर्बादी।(ख) कठिनाइयाँ: नल एवं कुएँ सूखना, पीने एवं खेती के पानी की कमी, अकाल जैसी स्थिति, पानी के लिए दूर जाना एवं झगड़े, पानी का महँगा हो जाना।(ग) यह उत्तर अपने क्षेत्र के अनुसार दें – प्रशासन प्रायः वर्षा-जल संग्रहण को अनिवार्य करना, तालाबों का गहरीकरण, वृक्षारोपण, पुराने कुओं का पुनरुद्धार जैसे प्रयास करता है।

यह भी जानें – वर्षा-जल संग्रहण

वर्षा-जल संग्रहण क्या है और छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण कैसे किया जाता है?

उत्तरवर्षा के जल को एकत्र करना और भंडारण करके बाद में प्रयोग करना ‘वर्षा-जल संग्रहण’ कहलाता है। इसका मूल उद्देश्य है – “जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए।”छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण: इसमें भवन की छत पर एकत्रित वर्षा-जल को पाइप द्वारा भंडारण-टंकी में पहुँचाया जाता है। चूँकि इस जल में छत की मिट्टी के कण मिल जाते हैं, इसलिए उपयोग से पहले इसे स्वच्छ (साफ) करना आवश्यक होता है।

आज की पहेली / खोजबीन के लिए / झरोखे से / साझी समझ

उत्तर (गतिविधि)आज की पहेली: दिए गए वर्ग-पहेली में जल एवं प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढ़ने हैं, जैसे – जल, नीर, अंबु, वारि (पानी); सरि, सरिता, तरंगिणी, प्रवाहिनी (नदी); ताल, सरोवर (तालाब/झील); बारिश (वर्षा)।खोजबीन के लिए: पानी से संबंधित गीत/कविताएँ (जैसे ‘रिमझिम-रिमझिम’, ‘बादल राग’) संकलित कर कक्षा में प्रस्तुत करने की गतिविधि है।झरोखे से: इसमें अनुपम मिश्र के लेख ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ का अंश दिया गया है, जिसमें कूड़न आदि चार भाइयों एवं पारस-पत्थर की कथा के माध्यम से तालाब बनाने की परंपरा बताई गई है।साझी समझ: ‘पानी रे पानी’ और ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ दोनों में समान बात यह है कि दोनों जल-संरक्षण एवं तालाबों के महत्त्व पर बल देते हैं तथा समाज को जल बचाने के लिए प्रेरित करते हैं।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं और वे किस क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध हैं?

उत्तरइस पाठ के लेखक अनुपम मिश्र (1948–2016) हैं। वे प्रखर लेखक, संपादक एवं प्रसिद्ध पर्यावरणविद् थे और जल तथा पारंपरिक तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ उनकी प्रसिद्ध पुस्तक है।

2. लेखक ने धरती की तुलना गुल्लक से क्यों की है?

उत्तरजैसे गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा होकर जरूरत पर काम आता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है और पूरे साल उपयोग में आता है। इसी संचय एवं उपयोग की समानता के कारण लेखक ने धरती को गुल्लक कहा है।

3. ‘अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं’ – इसका क्या अर्थ है?

उत्तरइसका अर्थ है कि पानी का बहुत कम होना (अकाल) और बहुत अधिक होना (बाढ़) – दोनों एक ही समस्या के दो रूप हैं। दोनों का कारण है जल-चक्र को न समझना एवं जल का सही प्रबंधन न करना।

4. नलों में मोटर लगाने से क्या हानि होती है?

उत्तरनल के पाइप में मोटर लगाने से कई घरों का पानी खिंचकर एक ही घर में आ जाता है। यह दूसरों का हक छीनने जैसा काम है, जिससे आस-पास के घरों में पानी की कमी और बढ़ जाती है तथा आपस में झगड़े होने लगते हैं।

5. लेखक का जल-चक्र के विषय में मुख्य संदेश क्या है?

उत्तरलेखक का संदेश है कि हम जल-चक्र को ठीक से समझें, वर्षा होने पर जल को थाम लें, भूजल-भंडार को सुरक्षित रखें और अपनी ‘गुल्लक’ (धरती) भरते रहें, तभी जरूरत के समय पानी की कोई कमी नहीं रहेगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘पानी रे पानी’ पाठ का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘पानी रे पानी’ निबंध का मूल भाव जल-संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। लेखक बताते हैं कि जल-चक्र एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, परंतु आज मानव की लापरवाही से कहीं अकाल तो कहीं बाढ़ की स्थिति बन गई है।लेखक धरती को एक बड़ी गुल्लक मानते हैं, जिसमें वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है। तालाबों को पाटकर हमने यह संचय बिगाड़ दिया, जिसकी सजा हमें सूखते नलों एवं बाढ़ के रूप में मिल रही है। पाठ का संदेश है कि हम जल-चक्र को समझें, वर्षा-जल को थामें, तालाबों एवं जलस्रोतों की रखवाली करें तथा भूजल-भंडार सुरक्षित रखें। तभी हमें पानी की कमी से छुटकारा मिलेगा – यही इस पाठ की मूल प्रेरणा है।

7. पाठ के अनुसार पानी की समस्या के क्या-क्या कारण हैं और इनका समाधान कैसे हो सकता है?

उत्तरकारण: नलों में समय पर पानी न आना, मोटर लगाकर दूसरों का पानी खींचना, पानी का बिकना, तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना, भूजल का अत्यधिक दोहन एवं पानी की बर्बादी – इन्हीं कारणों से कहीं अकाल तो कहीं बाढ़ की स्थिति बनती है।समाधान: वर्षा-जल संग्रहण को अपनाना; तालाबों, झीलों एवं कुओं की सफाई एवं रखवाली करना; पेड़ लगाना; पानी की बर्बादी रोकना; भूजल का संतुलित उपयोग करना तथा लोगों को जल-संरक्षण के प्रति जागरूक करना। इन उपायों से धरती की गुल्लक भरी रहेगी और पानी की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।

8. भूजल-भंडार किस प्रकार समृद्ध होता है और उसके सूख जाने पर क्या परिणाम होंगे?

उत्तरवर्षा का पानी तालाबों, झीलों एवं नदियों में जमा होता है। वहाँ से यह पानी धीरे-धीरे रिसकर, छनकर जमीन के नीचे छिपे भूजल-भंडार में जा मिलता है, जिससे भूजल-भंडार समृद्ध होता जाता है। पेड़-पौधे एवं हरियाली भी जल को जमीन में रिसने में मदद करते हैं।यदि यह भूजल-भंडार सूख जाए तो कुएँ एवं नल सूख जाएँगे, पीने एवं खेती के लिए पानी नहीं बचेगा, फसलें नष्ट होंगी और अकाल जैसी स्थिति बन जाएगी। जीव-जंतु एवं पेड़-पौधे मरने लगेंगे तथा जन-जीवन कठिन हो जाएगा। इसलिए तालाबों एवं जलस्रोतों की रक्षा करके भूजल-भंडार को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) महादेवी वर्मा

(ख) अनुपम मिश्र

(ग) रामधारी सिंह दिनकर

(घ) प्रेमचंद

उत्तर(ख) अनुपम मिश्र।

2. लेखक ने धरती की तुलना किससे की है?

(क) समुद्र से

(ख) गुल्लक से

(ग) बादल से

(घ) नदी से

उत्तर(ख) गुल्लक से।

3. जल-चक्र की शुरुआत किससे होती है?

(क) नदी से

(ख) समुद्र से उठी भाप से

(ग) तालाब से

(घ) कुएँ से

उत्तर(ख) समुद्र से उठी भाप से।

4. पाठ के अनुसार ‘अकाल’ का अर्थ है—

(क) बाढ़

(ख) सूखा / पानी की भारी कमी

(ग) वर्षा

(घ) समय

उत्तर(ख) सूखा / पानी की भारी कमी।

5. लेखक के अनुसार अकाल और बाढ़—

(क) बिलकुल अलग समस्याएँ हैं

(ख) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं

(ग) केवल गाँवों की समस्या हैं

(घ) केवल शहरों की समस्या हैं

उत्तर(ख) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

6. भूजल-भंडार किससे समृद्ध होता है?

(क) नल सूखने से

(ख) तालाबों-झीलों एवं वर्षा से

(ग) तालाबों को पाटने से

(घ) मोटर लगाने से

उत्तर(ख) तालाबों-झीलों एवं वर्षा से।

7. पाठ में बताई गई ‘बड़ी गलती’ क्या है?

(क) अधिक पेड़ लगाना

(ख) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना

(ग) वर्षा-जल संग्रहण करना

(घ) नल बंद रखना

उत्तर(ख) तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।

8. ‘वर्षा-जल संग्रहण’ का मूल उद्देश्य क्या है?

(क) जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए

(ख) पानी बहा देना

(ग) तालाब भरना मना है

(घ) पानी बेचना

उत्तर(क) जल जहाँ गिरे, वहीं एकत्र कीजिए।

9. ‘काल’ शब्द में ‘अ’ उपसर्ग जुड़ने से बना शब्द है—

(क) सुकाल

(ख) प्रकाल

(ग) अकाल

(घ) विकाल

उत्तर(ग) अकाल।

10. इस पाठ की विधा क्या है?

(क) कविता

(ख) निबंध (गद्य)

(ग) नाटक

(घ) पत्र

उत्तर(ख) निबंध (गद्य)।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ख), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ख), 8-(क), 9-(ग), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): लेखक ने धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक कहा है।

कारण (R): धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल उपयोग में लाते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): तालाबों को पाटना जल-संरक्षण के लिए लाभदायक है।

कारण (R): तालाब वर्षा-जल को भूजल-भंडार तक पहुँचाने का काम करते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (तालाबों को पाटना हानिकारक है, उन्हें बचाना चाहिए), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

कारण (R): दोनों का संबंध जल-चक्र को न समझने एवं जल के गलत प्रबंधन से है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): वर्षा-जल संग्रहण से जल की उपलब्धता बढ़ती है।

कारण (R): वर्षा के जल को एकत्र कर भंडारण करके बाद में उपयोग किया जा सकता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): छत के वर्षा-जल का उपयोग बिना साफ किए ही कर लेना चाहिए।

कारण (R): छत पर एकत्रित जल में मिट्टी के कण मिल जाते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (इस जल को उपयोग से पहले स्वच्छ करना आवश्यक है), जबकि R सही है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • जल-चक्र की प्रक्रिया (भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र) क्रम से याद रखें – यह बार-बार पूछा जाता है।
  • ‘धरती रूपी गुल्लक’ की तुलना (रूपक) पर आधारित प्रश्न में संचय एवं उपयोग की समानता अवश्य लिखें।
  • उत्तर में पाठ की मूल पंक्तियाँ (जैसे “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं”) उद्धृत करने से अंक बढ़ते हैं।
  • उपसर्ग वाले प्रश्न में उपसर्ग को अलग दिखाकर (अ + काल = अकाल) लिखें।

सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)

  • लेखक का नाम ‘अनुपम मिश्र’ है – इसे किसी कवि/कहानीकार से न मिलाएँ; यह पाठ निबंध (गद्य) है, कविता नहीं।
  • ‘अकाल’ का अर्थ ‘बाढ़’ न लिखें – अकाल का अर्थ सूखा/पानी की कमी है।
  • गुल्लक की तुलना को केवल ‘पैसा जमा करना’ तक सीमित न रखें – इसका भाव ‘पानी का संचय एवं उपयोग’ है।
  • तालाबों को पाटना समाधान नहीं, बल्कि समस्या का कारण है – इसे संरक्षण से अलग समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?

‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक अनुपम मिश्र (1948–2016) हैं, जो प्रसिद्ध पर्यावरणविद्, लेखक एवं संपादक थे और जल तथा तालाबों के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।

‘पानी रे पानी’ पाठ की विधा क्या है?

यह पाठ एक निबंध (गद्य) है, जिसमें जल-चक्र, अकाल, बाढ़ तथा वर्षा-जल संग्रहण के महत्त्व को सरल भाषा में समझाया गया है।

लेखक ने धरती को गुल्लक क्यों कहा है?

क्योंकि जैसे गुल्लक में पैसा जमा होता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होकर भूजल बनता है, जिसे हम पूरे साल जरूरत के अनुसार उपयोग करते हैं।

पाठ-गद्यांश एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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