कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 6 — गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ प्रश्न उत्तर और भावार्थ
गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ प्रश्न उत्तर: कक्षा 7 हिंदी मल्हार पाठ 6 में दोनों कुंडलियों का भावार्थ, शब्दार्थ, अभ्यास, कविता की रचना, काल और एक-मात्रा वाले वाक्य समझें। कल्पना और निजी अनुभव के उत्तर नमूने हैं।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 6 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 73–82, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवि परिचय – गिरिधर कविराय
गिरिधर कविराय का जन्म अठारहवीं सदी में हुआ माना जाता है। वे अपनी लोकप्रचलित कुंडलियों के लिए हिंदी साहित्य में सदा याद किए जाते हैं। उनकी रचनाओं में बहुत-से ऐसे नीतिपरक पद मिलते हैं जो आज भी कहावत के रूप में जन-जन की जुबान पर रहते हैं – जैसे “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय” और “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” उन्होंने लाठी जैसी साधारण वस्तु के उपयोग से लेकर यह तक बताया कि धन अधिक हो जाए तो क्या करना चाहिए। लोकनीति एवं घर-गृहस्थी के सहज लोक-व्यवहार को सीधे, सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में कह देना उनकी कविता की प्रमुख विशेषता है।
कुंडलियाँ (मूल पाठ)
गिरिधर कविराय की ये दोनों कुंडलियाँ नीतिपरक हैं। पहली में बिना सोचे-समझे कार्य करने के दुष्परिणाम बताए गए हैं, और दूसरी में बीते हुए को भुलाकर भविष्य पर ध्यान देने की सीख दी गई है।
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय चित में चैन न पावै।
खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥
कह गिरिधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥
(2)
बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हँसै न कोइ चित में खता न पावै॥
कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती॥
— गिरिधर कविराय
भावार्थ
पहली कुंडलिया: कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-विचारे कोई काम करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा मनुष्य अपना काम बिगाड़ लेता है और संसार में हँसी का पात्र बन जाता है। दुनिया में उपहास का विषय बनने पर उसके मन में कभी चैन नहीं रहता; तब अच्छा खान-पान, सम्मान तथा राग-रंग (मनोरंजन) भी उसके मन को नहीं भाते। कवि गिरिधर कहते हैं कि बिना विचारे किए गए कार्य से उत्पन्न दुख टालने पर भी टलता नहीं और वह कार्य सदा हृदय में काँटे की तरह खटकता रहता है। तात्पर्य यह कि कोई भी काम सोच-समझकर ही करना चाहिए।
दूसरी कुंडलिया: कवि सीख देते हैं कि बीती हुई बातों (अतीत) को भूलकर आगे की सुधि (भविष्य की चिंता एवं तैयारी) करनी चाहिए। जो काम सहज रूप से बन पड़े, मनुष्य को अपना मन उसी में लगाना चाहिए। जो बात स्वाभाविक रूप से संभव हो, उसी में चित्त लगाने से न तो कोई दुष्ट (दुर्जन) हँसने का अवसर पाता है और न ही मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध (खता) रहता है। कवि गिरिधर कहते हैं – मन में यही विश्वास दृढ़ कर लो कि आगे का सुख इसी समझदारी में है; जो बीत गया, उसे ‘बीती सो बीती’ समझकर भुला देना ही श्रेयस्कर है।
पाठ की सीख अतीत के पछतावे में अटकने के बजाय आगे सुधार करना है; गलती से सीखना, जरूरी सुधार या क्षमा माँगना छोड़ देना नहीं। ‘सहज’ को मेहनत और हर चुनौती से बचने का बहाना न बनाएँ। कविता में उपहास का उल्लेख है; दूसरों की भूल पर उनका अपमान करना उचित नहीं।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बिना बिचारे | बिना सोचे-समझे, बिना विचार किए |
| पाछे | बाद में, पीछे |
| पछिताय | पछताना, पश्चात्ताप करना |
| बिगारे आपनो | अपना (काम) बिगाड़ लेना |
| होत हँसाय | हँसी का पात्र बनना, उपहास होना |
| चित्त / चित | मन, अंतःकरण |
| चैन | शांति, सुकून |
| सन्मान | सम्मान, आदर |
| राग रंग | मनोरंजन, हँसी-खुशी |
| मनहिं न भावै | मन को अच्छा न लगना |
| टरत न टारे | टालने पर भी न टलना |
| खटकत | चुभना, खलना |
| जिय / जिय माहिं | हृदय में, मन में |
| बीती | बीता हुआ समय, अतीत |
| बिसारि दे | भुला दे, विस्मृत कर दे |
| सुधि लेइ | सुध/ध्यान लेना, चिंता करना |
| बनि आवै | सहज रूप से बन पड़े, संभव हो |
| दुर्जन | दुष्ट व्यक्ति, बुरा व्यक्ति |
| खता | दोष, गलती, अपराधबोध |
| परतीती | प्रतीति, विश्वास, भरोसा |
| समुझि | समझकर |
मेरी समझ से
(क) पाठ के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “बिना बिचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
• दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
• मन में शांति बनी रहती है।
• अपना काम बिगड़ जाता है।
• खान-पान सम्मान मिलता है।
(2) “चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?
• प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख
• बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता
• खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव
• दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास
(3) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
• भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
• अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की
• अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
• अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की
(4) “जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है?
• हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
• हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
• हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
• हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥”
मिलकर करें मिलान
पृष्ठ 76 के दूसरे स्तंभ का मूल क्रम रखें।
| पंक्ति-समूह | अर्थ का क्रम | भाव |
|---|---|---|
| 1. जग में होत हँसाय…खान पान… | 2 | मन अशांत; सुख-सुविधाएँ भी अच्छी नहीं लगतीं |
| 2. कह गिरिधर…खटकत है जिय… | 1 | बिना सोचे किया काम मन में चुभता रहता है |
| 3. ताही में चित देइ…दुर्जन हँसै… | 4 | सोचकर काम करें, मन में दोष न रहे |
| 4. कह गिरिधर…आगे को सुख… | 3 | बीते दुख में अटके बिना आगे के सुख की ओर बढ़ें |
मिलान: 1→2, 2→1, 3→4, 4→3।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?
(ख) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कुंडलिया में जो बातें सैंकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए।
(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से देखकर लिखिए। प्रत्येक के लिए एक-एक उदाहरण भी दीजिए।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) आपने पढ़ा है कि “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय…।” कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी अपने साथियों के साथ मिलकर बनाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
(ख) कल्पना कीजिए कि “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ…।” कविता निम्नलिखित के लिए लिखी गई है – आप / आपका कोई सहपाठी / आपका कोई परिजन / आपके कोई शिक्षक / कोई पक्षी / कोई पशु। इनकी कौन-कौन सी समस्याएँ होंगी? यह कविता उन्हें कैसे प्रेरित करेगी?
(ग) कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे?
शब्द से जुड़े शब्द
पुस्तक में ‘चैन’ दिया है। छह और खाली स्थानों के लिए दोनों कुंडलियों से जुड़े शब्द चुन सकते हैं: पछिताय, दुःख, भावै, खटकत, सुधि, परतीती। इनके अर्थ क्रमशः पछतावा, दुख, अच्छा लगना, खलना, ध्यान/याद, विश्वास हैं। ‘जिय’ और ‘खता’ भी उपयुक्त संबंधित शब्द हैं; कारण बताएँ।
कविता की रचना
(क) समान और अलग विशेषताएँ
| दोनों में | विशेष रूप से एक में |
|---|---|
| छह पंक्तियाँ; लय; दो-दो पंक्तियों में भाव; कवि के नाम का उल्लेख; सीख और सीधे संबोधन का प्रभाव | पहली में बिना विचार काम करने का पछतावा; दूसरी में बीते दुख से आगे बढ़ने की प्रेरणा |
| दूसरी पंक्ति का अंतिम अंश तीसरी पंक्ति के आरंभ में लौटता है | पहली: “जग में होत हँसाय”; दूसरी: “ताही में चित देइ” |
| आरंभ का शब्द/अंश अंत में लौटता है | पहली: “बिना बिचारे”; दूसरी: “बीती” |
पहली: आरंभ बिना बिचारे → बीच में “जग में होत हँसाय” की पुनरावृत्ति → अंत बिना बिचारे
दूसरी: आरंभ बीती → बीच में “ताही में चित देइ” की पुनरावृत्ति → अंत “बीती सो बीती”
यह पाठ की बनावट का संक्षिप्त आरेख है; कविता का पूरा पाठ ऊपर पढ़ें। इसका चक्र जैसा लौटना याद रखने में सहायक है।
(ख) विशेषता–पंक्ति का सही मिलान
| विशेषता का मूल क्रम | पंक्ति का मूल क्रम | कारण |
|---|---|---|
| 1. अंतिम शब्दों की मिलती ध्वनि | 2 | आवे–पावे (अभ्यास में काव्य-वर्तनी आवै–पावै) |
| 2. कवि का नाम | 1 | “कह गिरिधर कविराय…” |
| 3. विपरीत विचार | 4 | बीती बात बनाम आगे की सुधि |
| 4. एक वर्ण से शुरू होते शब्द | 3 | “बिना बिचारे” दोनों ‘ब’ से शुरू |
मिलान: 1→2, 2→1, 3→4, 4→3। पंक्ति 3 के अकेले ‘पछिताय’ को तुक का पूरा जोड़ा न कहें।
काल से जुड़े शब्द
“बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” इस वाक्य में ‘बीती’ शब्द भूतकाल का तथा ‘आगे’ शब्द भविष्य का बोध कराता है। एक ही शब्द कभी-कभी भूत, वर्तमान एवं भविष्य – तीनों प्रकार के वाक्यों में आ सकता है।
(क) नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए तीनों प्रकार के ‘काल’ व्यक्त करने वाले तीन-तीन वाक्य बनाइए (कल, परसों, पहले, पिछला आदि)।
| काल | शब्द | नमूना वाक्य |
|---|---|---|
| भूतकाल | कल / परसों / पहले / पिछला / बीते हुए | • कल मैंने पुस्तक पढ़ी थी। • परसों वर्षा हुई थी। • पिछला सप्ताह बहुत व्यस्त रहा। |
| वर्तमान काल | आज / अभी-अभी / अब / हमेशा / आजकल | • आज मैं विद्यालय जा रहा हूँ। • अभी-अभी घंटी बजी है। • आजकल मौसम सुहावना है। |
| भविष्य काल | कल / परसों / अगले दिन / आगामी / जल्दी ही | • कल हम पिकनिक पर जाएँगे। • परसों परीक्षा होगी। • जल्दी ही नया सत्र आरंभ होगा। |
(ध्यान दें – ‘कल’ तथा ‘परसों’ जैसे शब्द भूतकाल एवं भविष्य काल – दोनों में प्रयुक्त हो सकते हैं; अर्थ वाक्य के अन्य शब्दों से स्पष्ट होता है।)
(ख) आपने जो वाक्य बनाए हैं, उन्हें ध्यान से देखिए। पहचानिए कि इन वाक्यों में किन शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य भूतकाल में हुआ, वर्तमान में हो रहा है या भविष्य में होगा? वाक्यों में उन शब्दों को रेखांकित कीजिए।
पाठ से आगे (आपकी बात आदि)
आपकी बात
(क) “खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए।
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” का अर्थ है ‘अतीत को भूलना और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।’ क्या आप इस बात से सहमत हैं? क्यों? उदाहरण देकर समझाइए।
(ग) पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों के आधार पर आप अपने जीवन में कौन-कौन से बदलाव लाना चाहेंगे?
(घ) “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥” इस पंक्ति में खान-पान, सम्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात की गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
हँसी — तीन प्रश्नों का मार्गदर्शन
(क) अपनी और किसी साथी की भूल पर हँसी आने की वास्तविक स्थिति लिखें, किसी का नाम देकर उसे नीचा न दिखाएँ। (ख) हँसने वाले को मजाक लग सकता है, पर सामने वाले को दुख/झिझक हो सकती है। (ग) नमूना उत्तर: “मुझे यह मजाक अच्छा नहीं लग रहा; मेरी भूल सुधारने में मदद करो।”
सोच-समझकर — जल्दबाजी के उदाहरण
बिना जाँच खबर भेजना भ्रम फैलाता है; बिना जरूरी सुरक्षा बाइक चलाना हानि पहुँचा सकता है; बिना अनुमति ऑनलाइन खर्च करने से पैसे और भरोसे का नुकसान हो सकता है। विद्यार्थी बड़ों की सहायता से निर्णय लें।
संदेशों की 12 स्थितियाँ — मूल क्रम
| स्थिति | उचित प्रतिक्रिया |
|---|---|
| 1. खाता बंद होने का डर | OTP न दें; संदेश के नंबर की जगह बैंक के आधिकारिक माध्यम से पूछें। |
| 2. लॉटरी और पहले ₹5000 | पैसे न भेजें; संदिग्ध संदेश सुरक्षित रखकर रिपोर्ट करें। |
| 3. गलती से ₹1000 भेजने का दावा | अपने आधिकारिक बैंक रिकॉर्ड से जाँचें; अनजान की बात पर तुरंत पैसा न लौटाएँ। |
| 4. SIM KYC के लिए आधार/PAN फोटो | न भेजें; अपने मोबाइल सेवा प्रदाता के आधिकारिक माध्यम से जाँचें। SIM के लिए बैंक उचित पहला संपर्क नहीं है। |
| 5. भारी मोबाइल छूट | संदिग्ध लिंक पर भुगतान न करें; विक्रेता और वेबसाइट की पहचान जाँचें। |
| 6. रिश्तेदार की तत्काल मदद | पहले से ज्ञात नंबर से रिश्तेदार/परिवार से पुष्टि करें। |
| 7. ऐप और कैशबैक | अज्ञात वेबसाइट से ऐप न लें; आधिकारिक स्रोत और अनुमति जाँचें। |
| 8. मुफ्त गिफ्ट | संदिग्ध विज्ञापन में निजी जानकारी न भरें। |
| 9. ऋण से पहले प्रोसेसिंग फीस | संदेश से आए ऋण-प्रस्ताव की संस्थागत पहचान जाँचें; अनजान को रकम न भेजें। |
| 10. मुफ्त रिचार्ज लिंक | अनजान लिंक पर क्लिक/जानकारी देने से बचें। |
| 11. ATM PIN माँगना | PIN न बताएँ। अगर गोपनीय जानकारी दे दी हो तो बैंक के आधिकारिक सहायता माध्यम से तुरंत संपर्क करें। |
| 12. रिफंड के लिए QR स्कैन | अनजान का QR या भुगतान अनुरोध स्वीकार न करें; पैसे पाने के लिए UPI PIN बताना/दर्ज करना आवश्यक नहीं। |
पैसे की साइबर ठगी हो तो तुरंत बैंक और 1930 से संपर्क करें तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दें। PIN, OTP या पासवर्ड साझा न करें। RBI की डिजिटल बैंकिंग सावधानियाँ देखें।
आज की पहेली — एक ही मात्रा वाले अर्थपूर्ण वाक्य
एक वाक्य में चुनी हुई मात्रा और बिना मात्रा वाले शब्द रख सकते हैं; दूसरी मात्रा न जोड़ें। ये नमूने हैं:
| मात्रा | नमूना वाक्य |
|---|---|
| आ | राम आज आम खा। |
| इ | रवि चित्र लिख। |
| ई | सीधी नदी धीमी थी। |
| उ | सुमन खुश रह। |
| ऊ | फूल खूब झूल। |
| ऋ | कृषक, वृक्ष तक चल। |
| ए | मेरे बेटे, खेल। |
| ऐ | हैदर पैदल चल। |
| ओ | मोहन बोल। |
| औ | गौरव, चौक तक चल। |
यह लिखित मात्रा का खेल है; शब्दों की अर्थपूर्णता भी जाँचें। ‘फूलों भूरी धूल उड़ी’ में ऊ के साथ ओ और ई हैं, इसलिए वह केवल ऊ-मात्रा का उत्तर नहीं है।
खोजबीन
पुस्तक में दिए ‘बिना विचारे करो न काम’ कहानी के वीडियो को शिक्षक/परिजन के साथ सुनें। पात्र, जल्दबाजी का काम, उसका परिणाम और कुंडलियों से मिलती सीख लिखें। वीडियो सुने बिना अपना सार वास्तविक कथानक न कहें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. गिरिधर कविराय किस विधा की रचना के लिए प्रसिद्ध हैं और उनकी रचनाएँ किस रूप में सुनी जाती हैं?
2. पहली कुंडलिया में बिना विचारे काम करने वाले व्यक्ति की क्या दशा बताई गई है?
3. ‘खटकत है जिय माहिं’ पंक्ति का क्या आशय है?
4. दूसरी कुंडलिया में कवि ने जीवन में सुख पाने का क्या उपाय बताया है?
5. ‘दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै’ पंक्ति से क्या सीख मिलती है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. गिरिधर कविराय की दोनों कुंडलियों का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. ‘कुंडलिया’ छंद की प्रमुख विशेषताएँ इन दोनों कुंडलियों के आधार पर समझाइए।
8. “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय” – यह सीख आज के समय में कैसे उपयोगी है? उदाहरण सहित समझाइए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. इन कुंडलियों के रचनाकार कौन हैं?
(क) कबीरदास
(ख) गिरिधर कविराय
(ग) रहीम
(घ) तुलसीदास
2. ये दोनों रचनाएँ किस छंद/विधा में हैं?
(क) दोहा
(ख) चौपाई
(ग) कुंडलिया
(घ) सोरठा
3. “बिना बिचारे जो करै” काम करने वाले को क्या भुगतना पड़ता है?
(क) धन की प्राप्ति
(ख) पछतावा और उपहास
(ग) सबका सम्मान
(घ) मन की शांति
4. गिरिधर कविराय का जन्म किस सदी में हुआ माना जाता है?
(क) सोलहवीं सदी
(ख) सत्रहवीं सदी
(ग) अठारहवीं सदी
(घ) उन्नीसवीं सदी
5. ‘बिसारि दे’ शब्द का अर्थ है—
(क) याद कर ले
(ख) भुला दे
(ग) सँभाल ले
(घ) सुना दे
6. दूसरी कुंडलिया के अनुसार किस काम में मन लगाना चाहिए?
(क) जो असंभव हो
(ख) जो सहज रूप से बन पड़े
(ग) जो बहुत कठिन हो
(घ) जो दूसरों का हो
7. ‘खटकत है जिय माहिं’ में ‘जिय’ का अर्थ है—
(क) शरीर
(ख) हृदय/मन
(ग) आँख
(घ) हाथ
8. कुंडलिया की एक प्रमुख विशेषता यह है कि—
(क) इसमें केवल दो पंक्तियाँ होती हैं
(ख) आरंभिक शब्द/अंश अंत में लौटता है
(ग) इसमें तुक नहीं मिलाई जाती
(घ) इसमें कवि का नाम नहीं आता
9. ‘दुर्जन’ शब्द का अर्थ है—
(क) सज्जन व्यक्ति
(ख) दुष्ट व्यक्ति
(ग) मित्र
(घ) गुरु
10. इन कुंडलियों का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति-वर्णन
(ख) वीर-रस का चित्रण
(ग) नीति एवं जीवन-व्यवहार की सीख
(घ) हास्य-व्यंग्य
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बिना विचारे काम करने वाले को बाद में पछताना पड़ता है।
कारण (R): बिना विचारे किया गया काम बिगड़ जाता है और व्यक्ति जग में हँसी का पात्र बनता है।
2. अभिकथन (A): कवि के अनुसार बीती बातों को सदा याद रखकर उन्हीं में डूबे रहना चाहिए।
कारण (R): कवि कहते हैं “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।”
3. अभिकथन (A): बिना विचारे किया गया काम मन में सदा खटकता रहता है।
कारण (R): कवि के अनुसार ऐसे काम का दुख टालने पर भी नहीं टलता।
4. अभिकथन (A): मनुष्य को सहज रूप से बन पड़ने वाले कार्य में मन लगाना चाहिए।
कारण (R): ऐसा करने से कोई दुष्ट हँस नहीं पाता और मन में कोई दोष नहीं रहता।
5. अभिकथन (A): ये दोनों रचनाएँ कुंडलिया छंद में हैं।
कारण (R): इनमें कवि के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है।
परीक्षा-टिप्स
• दोनों कुंडलियों की पहली पंक्ति (‘बिना बिचारे…’ तथा ‘बीती ताहि…’) कंठस्थ रखें – इनकी सीख और भावार्थ समझें।
• ‘कुंडलिया’ की पहचान याद रखें – आरंभिक शब्द/अंश का अंत में लौटना; दोहा + रोला का मेल; छह पंक्तियाँ; कवि का नाम भीतर आना।
• भावार्थ लिखते समय सरल हिंदी का प्रयोग करें और हर कुंडलिया की सीख (नीति) एक वाक्य में अवश्य लिखें।
सामान्य गलतियाँ – इनसे बचें
• ब्रजभाषा के पुराने शब्दों (बिचारे, बिसारि, सुधि, परतीती, जिय) का अर्थ गलत न समझें – इन्हें शब्दार्थ तालिका से याद रखें।
• कुंडलिया को ‘दोहा’ लिख देना सामान्य भूल है – इसकी विधा सदा ‘कुंडलिया’ लिखें।
• दूसरी कुंडलिया का अर्थ ‘अतीत को बिल्कुल याद न रखो’ न लिखें; सही भाव है – अतीत के दुख में उलझे न रहकर भविष्य पर ध्यान देना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस पाठ की कुंडलियों के रचनाकार कौन हैं?
इन कुंडलियों के रचनाकार गिरिधर कविराय हैं, जो अठारहवीं सदी में हुए और अपनी लोकप्रचलित नीतिपरक कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
पहली कुंडलिया का मुख्य संदेश क्या है?
पहली कुंडलिया का मुख्य संदेश है कि कोई भी काम बिना सोचे-विचारे नहीं करना चाहिए, अन्यथा काम बिगड़ता है, उपहास होता है और बाद में पछताना पड़ता है।
“बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि बीती हुई बातों (अतीत के दुख) को भुलाकर भविष्य पर ध्यान देना चाहिए तथा जो काम सहज रूप से बन पड़े, उसी में मन लगाना चाहिए।
‘कुंडलिया’ छंद की मुख्य पहचान क्या है?
कुंडलिया छह पंक्तियों का छंद है, जिसमें दोहा और रोला का मेल होता है तथा जिस शब्द से यह आरंभ होती है, उसी शब्द पर समाप्त भी होती है।
कुंडलियाँ एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
