कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 7 – वर्षा-बहार (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के पाठ 7 ‘वर्षा-बहार’ (कवि – मुकुटधर पाण्डेय) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, सार, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार के लिए, कविता की रचना, आपकी बात आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।

कक्षा: 7 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (काव्य) पाठ: 7 कवि: मुकुटधर पाण्डेय विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – मुकुटधर पाण्डेय

‘वर्षा-बहार’ का मनोरम दृश्य रचने वाले मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989) का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। प्रकृति-सौंदर्य की विभिन्न छवियाँ उनकी रचनाओं में देखने को मिलती हैं। किशोरावस्था में ही उन्होंने कविता और लेख आदि लिखना आरंभ कर दिया था। उस समय की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं — सरस्वती और माधुरी में उनकी रचनाएँ प्रमुखता से प्रकाशित होती थीं। हिंदी साहित्य में उन्हें छायावाद का पूर्व-प्रवर्तक भी माना जाता है। उनके मूल्यवान योगदान को देखते हुए भारत सरकार द्वारा इन्हें ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया गया था।

कविता (मूल पाठ)

‘वर्षा-बहार’ में कवि ने वर्षा ॠतु के मनोहारी दृश्यों का सजीव एवं उल्लासपूर्ण चित्रण किया है – आकाश, बादल, बिजली, झरने, हवा, पक्षी, मोर, मेंढक, फूल, हंस एवं किसान सभी इस ॠतु के आनंद में डूबे हुए हैं।

वर्षा-बहार सबके, मन को लुभा रही है,
नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है।
बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं,
पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।

चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब,
बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब।
तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते,
फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते।

करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे,
मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे।
खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है,
बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है।

चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर,
गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।
इस भाँति है अनोखी, वर्षा बहार भू पर,
सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर।

— मुकुटधर पाण्डेय

भावार्थ

पहला पद: कवि कहते हैं कि वर्षा रूपी बहार सबके मन को लुभा रही है। आकाश में अनूठी छटा छा गई है और घने काले बादल घनघोर रूप से घिर आए हैं। बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं, मूसलाधार पानी बरस रहा है और पहाड़ों से झरने बहने लगे हैं। चारों ओर वर्षा का सुहावना दृश्य छाया हुआ है।

दूसरा पद: ठंडी हवा बह रही है, जिससे पेड़ों की सभी डालियाँ हिल रही हैं। बागों में मालिनें सुंदर गीत गा रही हैं। तालाबों में रहने वाले जलचर जीव-जंतु अत्यंत प्रसन्न हो रहे हैं। लाखों पपीहे इधर-उधर उड़ते हुए गर्मी (ग्रीष्म) के ताप से छुटकारा पा रहे हैं अर्थात् वर्षा से सबको राहत मिल रही है।

तीसरा पद: वन में मोर नाच रहे हैं और मेंढक अपनी मधुर ध्वनि (टर्र-टर्र) रूपी प्यारे गीत गाकर सबको लुभा रहे हैं। गुलाब के फूल खिलकर चारों ओर सुगंध (सौरभ) फैला रहे हैं। बागों में खूब सुख एवं आनंद (आमोद) छाया हुआ है। पूरा वातावरण उल्लास से भरा है।

चौथा पद: कहीं हंस सुंदर कतार बाँधे (पंक्तिबद्ध होकर) चल रहे हैं। किसान कितने मनहर (मन को हरने वाले) गीत गा रहे हैं! इस प्रकार पृथ्वी पर वर्षा की यह बहार बड़ी अनोखी है। कवि अंत में कहते हैं कि सारे संसार की शोभा एवं समृद्धि इसी वर्षा पर ही निर्भर है – वर्षा से ही धरती पर जीवन, हरियाली एवं सुंदरता बनी रहती है।

कविता का सार

‘वर्षा-बहार’ कविता में कवि मुकुटधर पाण्डेय ने वर्षा ॠतु के सौंदर्य एवं उल्लास का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। कवि कहते हैं कि वर्षा रूपी बहार सभी के मन को मोह लेती है। जब आकाश में काले-घने बादल घिर आते हैं, बिजली चमकती है, बादल गरजते हैं और मूसलाधार वर्षा होती है, तब पहाड़ों से झरने बहने लगते हैं और चारों ओर एक अनूठी छटा छा जाती है।

वर्षा के आगमन से समूची प्रकृति आनंदित हो उठती है। ठंडी हवा चलने से पेड़ों की डालियाँ झूमने लगती हैं, बागों में मालिनें मधुर गीत गाती हैं, तालाबों के जलचर जीव प्रसन्न होते हैं और लाखों पपीहे ग्रीष्म ॠतु के ताप से राहत पाते हैं। वन में मोर नाचते हैं, मेंढक अपनी ध्वनि रूपी प्यारे गीत गाते हैं, गुलाब खिलकर सुगंध बिखेरते हैं और बागों में चारों ओर आमोद (आनंद) छा जाता है।

आकाश में हंस सुंदर कतार बाँधकर उड़ते हैं और खेतों में किसान मनभावन गीत गाते हुए हर्षित होते हैं। कवि कहते हैं कि पृथ्वी पर वर्षा की यह बहार वास्तव में अनोखी है, क्योंकि सारे संसार की शोभा, हरियाली एवं समृद्धि इसी वर्षा पर निर्भर करती है। वर्षा ही धरती को जीवन, जल एवं नई ताजगी प्रदान करती है। इस प्रकार यह कविता वर्षा ॠतु को एक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करती है और हमें प्रकृति के सौंदर्य के प्रति सजग एवं कृतज्ञ बनाती है। सरल भाषा, सुंदर बिंब एवं मधुर लय इस कविता को विशेष रूप से आकर्षक बनाते हैं।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
बहारवसंत; यहाँ रौनक, सौंदर्य का समय
नभआकाश, गगन
छटाशोभा, सुंदरता
अनूठीनिराली, अनोखी
घनघोरघना एवं गहरा (बादलों का घिरना)
जलचरजल में रहने वाले जीव
अतिबहुत, अत्यधिक
पपीहाएक वर्षा-प्रिय पक्षी (चातक)
ग्रीष्मगरमी की ॠतु
तापगरमी, तपन
मालिनमाली की पत्नी; फूल बेचने/चुनने वाली स्त्री
सुगीतमधुर गीत, सुंदर गान
सौरभसुगंध, खुशबू
आमोदआनंद, हर्ष, प्रसन्नता
कतारपंक्ति, क्रमबद्ध रूप
मनहरमन को हरने वाला, मनोहर
भाँतितरह, प्रकार
अनोखीविलक्षण, अद्भुत
भूपृथ्वी, धरती
जगतसंसार, दुनिया
शोभासुंदरता, छवि
निर्भरआश्रित, अवलंबित

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. इस कविता में वर्षा ॠतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?

• दुख और निराशा

• आनंद और प्रसन्नता

• भय और चिंता

• क्रोध और विरोध

उत्तर★ आनंद और प्रसन्नता।पूरी कविता में वर्षा के आगमन से प्रकृति, पशु-पक्षी एवं मनुष्य सभी आनंद एवं उल्लास से भरे दिखाए गए हैं – मोर नाचते हैं, मेंढक गाते हैं और किसान हर्षित होते हैं।

2. “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ॠतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?

• बादलों के घिरने का दृश्य

• बिजली के गिरने का दृश्य

• ठंडी हवा के बहने का दृश्य

• आमोद छा जाने का दृश्य

उत्तर★ बादलों के घिरने का दृश्य।‘नभ में अनूठी छटा’ एवं ‘घनघोर छा रही है’ से आकाश में घने काले बादलों के घिर आने का सुंदर दृश्य व्यक्त होता है।

3. कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्योंकि—

• कवि वर्षा को विशेष ॠतु मानता है।

• वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।

• वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।

• वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है।

उत्तर★ वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है तथा ★ वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।वर्षा के आगमन से पशु-पक्षी, पेड़-पौधे एवं मनुष्य सभी प्रसन्न एवं सक्रिय हो उठते हैं तथा सबको सुख एवं संतोष मिलता है; इसी कारण कवि इसे ‘अनोखी बहार’ कहते हैं।

4. “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

• प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

• वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।

• बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।

• हमें वर्षा ॠतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।

उत्तर★ वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।इस पंक्ति का अर्थ है कि संसार की समस्त शोभा, हरियाली एवं समृद्धि वर्षा पर ही आश्रित है; वर्षा के बिना जीवन एवं सौंदर्य की कल्पना भी कठिन है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह में मिलकर करने वाली गतिविधि है। उत्तर चुनते समय कविता के संदर्भ, शब्दों के भाव एवं दृश्य को आधार बनाना चाहिए – जैसे ‘मन को लुभा रही है’ तथा ‘आमोद छा रहा है’ जैसे शब्दों से आनंद का भाव स्पष्ट होता है।भिन्न उत्तर इसलिए संभव हैं क्योंकि एक ही पंक्ति को अलग-अलग दृष्टि से समझा जा सकता है; आपस में चर्चा करने से हम एक-दूसरे के तर्क समझते हैं और सही निष्कर्ष तक पहुँचते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—

(क) “फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते। करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में वर्षा के आगमन से पक्षियों एवं जीवों की प्रसन्नता का चित्रण है। लाखों पपीहे इधर-उधर उड़ते हुए ग्रीष्म ॠतु के ताप (गरमी) से छुटकारा पा रहे हैं।वन में सारे मोर खुशी से नृत्य कर रहे हैं। तात्पर्य यह कि वर्षा सभी जीवों के लिए राहत एवं आनंद लेकर आती है और प्रकृति में चारों ओर उल्लास भर देती है।

(ख) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर। गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”

अर्थ/विचारइन पंक्तियों में आकाश एवं खेतों के दो सुंदर दृश्य हैं। कहीं हंस सुंदर कतार (पंक्ति) बाँधकर पंक्तिबद्ध रूप से उड़ रहे हैं, जो प्रकृति के अनुशासन एवं सौंदर्य को दर्शाते हैं।दूसरी ओर खेतों में किसान वर्षा से प्रसन्न होकर मनभावन (मनहर) गीत गा रहे हैं। यह दृश्य वर्षा के कारण किसान के मन में उमड़े उत्साह एवं आशा को व्यक्त करता है, क्योंकि वर्षा उसकी फसल के लिए जीवनदायिनी है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए—

स्तंभ 1 (पंक्ति)स्तंभ 2 (भावार्थ)
1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैंवर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं।
2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सबठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।
3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होतेवर्षा ॠतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं।
4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोतेवर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं।
5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा हैवर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं।
6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदरहंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं।
सही मिलान1 → वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं।2 → ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।3 → वर्षा ॠतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं।4 → वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं।5 → वर्षा में खिले फूल (गुलाब) प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं।6 → हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों?

उत्तरकविता में बागों की मालिनें सुंदर गीत गा रही हैं, मेंढक अपनी ध्वनि रूपी प्यारे सुगीत गा रहे हैं और किसान खेतों में मनभावन गीत गा रहे हैं।ये सभी इसलिए गीत गा रहे हैं क्योंकि वर्षा के आगमन से इन्हें गर्मी से राहत, हरियाली, समृद्धि एवं आनंद की प्राप्ति होती है। वर्षा से उपजी प्रसन्नता ही गीत के रूप में फूट पड़ी है।

(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” तथा “तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” – दी गई दोनों पंक्तियों में वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए।

उत्तरअंतर: पहली पंक्ति आकाश में होने वाली घटना (बिजली चमकना, बादल गरजना) का दृश्य है, जो थोड़ा भयावह एवं तीव्र है; जबकि दूसरी पंक्ति जल में रहने वाले जीवों की प्रसन्नता का कोमल एवं सुखद दृश्य है।संबंध: दोनों दृश्य आपस में गहरे जुड़े हैं – बादल गरजने एवं बिजली चमकने के बाद ही वर्षा होती है, और उसी वर्षा से तालाब भर जाते हैं, जिससे जलचर जीव प्रसन्न होते हैं। इस प्रकार आकाश की घटना ही धरती के जीवों के आनंद का कारण बनती है।

(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरकविता में मुख्य रूप से यह बात कही गई है कि वर्षा ॠतु प्रकृति एवं समस्त जीव-जगत के लिए आनंद, राहत एवं नवजीवन लेकर आती है।वर्षा से धरती पर हरियाली, ताजगी एवं समृद्धि आती है। संसार की समस्त शोभा वर्षा पर ही निर्भर है, इसलिए कवि इसे एक अनोखी एवं उत्सव-जैसी बहार के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

(घ) “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिलते हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है?

उत्तरइस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता एवं सुगंध बताना ही नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा अर्थ भी है।गुलाब का खिलना एवं सुगंध फैलाना वर्षा से उत्पन्न नई ताजगी, उल्लास एवं जीवन-शक्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि वर्षा सम्पूर्ण प्रकृति में नवजीवन एवं प्रसन्नता भर देती है; जैसे गुलाब अपनी सुगंध सबमें बाँटता है, वैसे ही वर्षा भी अपना आनंद सब ओर बिखेर देती है।

(ङ) कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे— ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है?

उत्तरसकारात्मक गतिविधियों वाली पंक्तियाँ: “बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” (गीत गाना); “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” (नृत्य करना); “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” (गाना); “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” (सुगंध फैलाना); “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर” (गीत गाना)।शीर्षक का औचित्य: ‘बहार’ का अर्थ रौनक, उल्लास एवं सौंदर्य का समय है। चूँकि वर्षा के आगमन से चारों ओर गीत, नृत्य, सुगंध एवं आनंद की ये सभी सकारात्मक गतिविधियाँ छा जाती हैं और प्रकृति उत्सव-सी सज जाती है, इसलिए कवि ने इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ रखा है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” – कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तरवर्षा के अभाव में सूखा पड़ जाता है, नदियाँ-तालाब सूख जाते हैं और पीने तथा सिंचाई के लिए जल का संकट उत्पन्न हो जाता है। फसलें नष्ट हो जाती हैं, जिससे अन्न की कमी एवं अकाल की स्थिति बन सकती है।मनुष्य को भूख, प्यास एवं रोगों का सामना करना पड़ता है तथा किसान की आजीविका संकट में पड़ जाती है। पशु-पक्षियों को चारा एवं पानी नहीं मिलता, हरियाली समाप्त हो जाती है और अनेक जीव-जंतु पलायन कर जाते हैं या मर जाते हैं। इस प्रकार वर्षा के बिना सम्पूर्ण जीवन-चक्र बिगड़ जाता है।

(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” – बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत— आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।)

उत्तरसकारात्मक प्रभाव: बादल गरजने एवं बिजली चमकने के बाद वर्षा होती है, जिससे खेतों को पानी मिलता है, वातावरण ठंडा एवं स्वच्छ हो जाता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। आकाशीय बिजली से वायु में नाइट्रोजन भूमि की उर्वरता भी बढ़ाती है।नकारात्मक प्रभाव: कभी-कभी तेज बिजली गिरने से जान-माल की हानि, आग लगना तथा पेड़ों एवं भवनों को क्षति हो सकती है। बादलों की तेज गर्जना से छोटे बच्चे एवं पशु-पक्षी भयभीत हो जाते हैं। अतः इन घटनाओं के समय सावधानी बरतनी चाहिए।

(ग) “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” – इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे?

उत्तरवर्षा आने पर पक्षी एवं जीव अनेक प्रकार से अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। मोर अपने पंख फैलाकर वन में नृत्य करता है, पपीहा प्यासा पुकार करता है, मेंढक टर्र-टर्र कर अपना सुगीत गाते हैं और कोयल-पक्षी मधुर बोली बोलते हैं।तालाब के मेढक एवं मछलियाँ जल में उछल-कूद करती हैं, चिड़ियाँ चहचहाती हैं तथा पशु हरी घास पाकर हर्षित होते हैं। इस प्रकार सभी जीव अपनी-अपनी ध्वनियों, गति एवं क्रियाओं से वर्षा के आनंद को व्यक्त करते हैं।

आपकी रचनाएँ

(क) कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।

उत्तर (नमूना)वर्षा की पहली फुहार पड़ते ही वन का दृश्य जीवंत हो उठता है। नीले-काले बादलों को देखकर मोर अपने रंग-बिरंगे पंख छतरी की भाँति फैला लेता है और झूम-झूमकर नृत्य करने लगता है। उसकी ‘पिहू-पिहू’ ध्वनि वन में गूँज उठती है।पास के तालाब के किनारे मेंढक एक साथ टर्र-टर्र करके मानो कोई समूह-गान प्रस्तुत कर रहे हों। बूँदों की रिमझिम, मोर का नृत्य एवं मेंढकों का गान मिलकर वन में उत्सव-सा वातावरण बना देते हैं, जिसे देखकर मन प्रसन्नता से भर जाता है।

(ख) वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।

उत्तर (संकेत/मार्गदर्शन)यह रचनात्मक गतिविधि है, इसे अपने शब्दों में लिखिए। आप वर्षा से जुड़ी लोक-मान्यताओं को आधार बना सकते हैं, जैसे – पपीहे का स्वाति-बूँद की प्रतीक्षा करना, इंद्रदेव का वर्षा भेजना, या मेढक-विवाह जैसी ग्रामीण लोककथा।नमूना ढाँचा: एक गाँव में लंबे समय से वर्षा नहीं हुई। प्यासा पपीहा आकाश की ओर देखकर पुकारता रहा। गाँव वालों ने मिलकर प्रार्थना की। तभी बादल घिरे, बिजली चमकी और मूसलाधार वर्षा हुई। मोर नाच उठे, मेंढक गाने लगे और किसान खेतों में गीत गाते हुए हर्षित हो गए – जैसा कविता में वर्णित है।

(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह चित्रकला गतिविधि है। चित्र में आप कविता के दृश्य उतार सकते हैं – आकाश में काले बादल एवं चमकती बिजली, पहाड़ से बहता झरना, नृत्य करता मोर, तालाब में मेंढक, खिले हुए गुलाब, कतार में उड़ते हंस तथा खेत में गीत गाता किसान।इन्हें इसलिए बनाया क्योंकि ये सभी वर्षा-बहार के आनंद एवं प्रकृति के सौंदर्य को दर्शाते हैं और कविता के केंद्रीय भाव को सजीव रूप देते हैं।

शब्द से जुड़े शब्द

अपने समूह में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए। (पाठ में ‘उत्साह’ एवं ‘वर्षा’ शब्द-मंडल दिए गए हैं।)

उत्तर‘वर्षा’ से जुड़े शब्द: बादल, बिजली, झरना, रिमझिम, फुहार, बूँद, छाता, इंद्रधनुष, हरियाली, बरसात, सावन, मेघ, घटा, भीगना, पानी, तालाब, मोर, पपीहा, मेंढक, सीलन।‘उत्साह’ से जुड़े शब्द: उमंग, जोश, हर्ष, आनंद, प्रसन्नता, उल्लास, स्फूर्ति, खुशी, चाव।

कविता की रचना

“वर्षा-बहार सबके, मन को लुभा रही है” – इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘वर्षा’ एक ॠतु का नाम है। ‘बहार’ ‘वसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वर्षा’ और ‘बहार’ को एक साथ दिया गया है जिससे वर्षा ॠतु की सुंदरता को स्पष्ट किया जा सके। इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं। अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तरकविता की प्रमुख विशेषताएँ:तुकांत/लय: ‘रही-बहे’, ‘सब-अब’, ‘सारे-प्यारे’, ‘सुंदर-मनहर’ जैसे तुकांत शब्दों से कविता में मधुर लय एवं गेयता आ गई है।सजीव बिंब: बिजली चमकना, झरने बहना, मोर का नृत्य एवं गुलाब का खिलना – ये दृश्य आँखों के सामने सजीव चित्र खड़े कर देते हैं।मानवीकरण: मेंढक का गाना एवं डालियों का हिलना मानो वे मनुष्य की भाँति आनंद मना रहे हों।सरल एवं चित्रात्मक भाषा: कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य-रूप में हैं तो कुछ में शब्द-क्रम बदला हुआ है, जिससे काव्य-सौंदर्य बढ़ता है।

कविता का सौंदर्य

(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए।

पंक्ति (रिक्त स्थान सहित)विकल्पसबसे उपयुक्त (मूल पाठ का) शब्द
_____ बहार सबके, मन को लुभा रही हैबारिश, बरसात, बरखा, वृष्टिवर्षा (मूल पंक्ति में ‘वर्षा-बहार’)
_____ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही हैआकाश, गगन, अंबर, व्योमनभ (मूल पंक्ति में ‘नभ में छटा अनूठी’)
बिजली चमक रही है, _____ गरज रहे हैंमेघ, जलधर, घन, जलदबादल (मूल पंक्ति में ‘बादल गरज रहे हैं’)
_____ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैंजल, नीर, सलिल, तोयपानी (मूल पंक्ति में ‘पानी बरस रहा है’)

(दिए गए सभी विकल्प ‘वर्षा’, ‘आकाश’, ‘बादल’ एवं ‘पानी’ के पर्यायवाची हैं, अतः अर्थ की दृष्टि से सभी जँचते हैं; किंतु लय एवं मूल पाठ के अनुसार वर्षा, नभ, बादल तथा पानी सर्वाधिक उपयुक्त हैं।)

(ख) अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों?

उत्तर (मार्गदर्शन)यह समूह-चर्चा की गतिविधि है। प्रायः अधिकांश साथियों को मूल पाठ के शब्द (वर्षा, नभ, बादल, पानी) ही सर्वाधिक उपयुक्त लगते हैं, क्योंकि ये कविता की लय एवं प्रवाह के साथ सबसे अच्छी तरह घुल-मिल जाते हैं।यह गतिविधि सिखाती है कि पर्यायवाची शब्दों के बावजूद कविता में हर शब्द का चयन लय, मात्रा एवं भाव के अनुसार किया जाता है।

विशेषण

“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” – इस पंक्ति में ‘सुंदर’ शब्द ‘गीत’ की विशेषता बता रहा है, अतः यह ‘विशेषण’ है और ‘गीत’ ‘विशेष्य’ है।

(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए—

पंक्तिविशेषणविशेष्य
1. नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही हैअनूठीछटा
2. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदरसुंदरकतार
3. मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारेप्यारेसुगीत
4. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सबठंडीहवा

(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए—

विशेष्यउपयुक्त विशेषण (उदाहरण)
1. वर्षामूसलाधार, झमाझम, सुहानी
2. पानीठंडा, स्वच्छ, मीठा
3. बादलकाले, घने, गरजते
4. डालियाँहरी, झुकी, कोमल
5. गुलाबलाल, सुगंधित, खिला

ॠतु और शब्द

“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते” – ‘ताप’ शब्द ग्रीष्म ॠतु से जुड़ा है। भारत में मुख्य रूप से छह ॠतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर कौन-सी ॠतु का स्मरण होता है? इन शब्दों को तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए—

दिए गए शब्द: धूप, लू, बयार, हिमपात, वृष्टि, पाला, ताप, जाड़ा, झड़ी, ठिठुरन, धुंध, कोहरा, आँधी, उमस, हरियाली, बहार, तपन, जेठ, सावन, रिमझिम, शीतलता, ओस, ठंडक, बादल फटना, कड़ाके की ठंड।

ॠतु (समय)संबंधित शब्द
वसंत ॠतु (मार्च–अप्रैल)बयार, बहार, हरियाली
ग्रीष्म ॠतु (मई–जून)धूप, लू, ताप, तपन, उमस, जेठ
वर्षा ॠतु (जुलाई–अगस्त)वृष्टि, झड़ी, सावन, रिमझिम, बादल फटना
शरद ॠतु (सितंबर–अक्तूबर)शीतलता, ओस, ठंडक
हेमंत ॠतु (नवंबर–दिसंबर)धुंध, कोहरा, जाड़ा
शिशिर ॠतु (जनवरी–फरवरी)हिमपात, पाला, ठिठुरन, कड़ाके की ठंड

(‘आँधी’ प्रायः ग्रीष्म एवं वर्षा के पूर्व चलती है; अपने अनुभव के अनुसार शब्दों को उपयुक्त ॠतु में रखें।)

पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)

आपकी बात

(क) वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?

उत्तर (नमूना)वर्षा के समय आकाश में काले बादल छा जाते हैं, मौसम ठंडा एवं सुहावना हो जाता है। पेड़-पौधे हरे-भरे हो उठते हैं, तालाब एवं नदियाँ पानी से भर जाते हैं तथा खेतों में हरियाली छा जाती है।सड़कों पर पानी भर जाता है, मेंढकों एवं कीट-पतंगों की संख्या बढ़ जाती है और लोग छाता-बरसाती का प्रयोग करने लगते हैं। किसान खेती के कार्य में जुट जाते हैं।

(ख) बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह आपके निजी अनुभव पर आधारित गतिविधि है। आप छाता भीगने, रास्ते में पानी भरने, गड्ढों में छप-छप करने या दोस्तों के साथ बारिश का आनंद लेने जैसी किसी रोचक घटना को अपने शब्दों में लिख सकते हैं।उदाहरण – एक दिन तेज बारिश में मेरा छाता उलट गया और मैं पूरी तरह भीग गया; पर रास्ते में जमे पानी में चलना मुझे बहुत मज़ेदार लगा।

(ग) वर्षा ॠतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं?

उत्तर (नमूना)अच्छा लगता है: बारिश में भीगना, कागज़ की नाव चलाना, गरम पकौड़े खाना, इंद्रधनुष देखना तथा खिड़की से रिमझिम बारिश का आनंद लेना।नहीं कर पाते: बाहर खेलने जाना, साइकिल चलाना तथा लंबी सैर पर जाना कठिन हो जाता है, क्योंकि कीचड़ एवं पानी भरने से आवागमन में बाधा आती है।

(घ) बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?

उत्तरपशु-पक्षी अपनी सुरक्षा के लिए पेड़ों, छज्जों, बिलों एवं घोंसलों में शरण लेते हैं। पक्षी अपने पंख समेटकर सूखे स्थान पर छिप जाते हैं तथा कुत्ते-बिल्ली बरामदे या छत के नीचे आ जाते हैं।समस्याएँ: तेज वर्षा में उनके घोंसले एवं बिल पानी से भर जाते हैं या बह जाते हैं, भोजन ढूँढ़ना कठिन हो जाता है तथा ठंड एवं भीगने से वे बीमार पड़ सकते हैं।

(ङ) अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ॠतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह रचनात्मक गतिविधि है। तुकांत शब्दों का प्रयोग करते हुए सरल कविता बनाइए। नमूना: “रिमझिम-रिमझिम बरखा आई, / आँगन में हरियाली छाई। / मेंढक गाते, मोर नाचते, / बच्चे कागज़ की नाव चलाते।”

साक्षात्कार

“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” – मान लीजिए कि आप अपने विद्यालय की पत्रिका के पत्रकार हैं। आप एक किसान का साक्षात्कार कर रहे हैं जो वर्षा के आने पर अपने खेतों में गीत गा रहा है। (क) कुछ प्रश्न लिखिए। (ख) इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर (नमूना प्रश्न)• आपका क्या नाम है और आप कौन-सी फसल उगाते हैं?• वर्षा आने पर आपको कैसा अनुभव होता है?• आप काम करते समय गीत क्यों गाते हैं?• वर्षा आपके एवं आपके खेतों के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है?• यदि समय पर वर्षा न हो तो आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?(ख) यह अभिनय/भूमिका-निर्वाह की गतिविधि है – एक साथी किसान बने और अन्य पत्रकार बनकर ये प्रश्न पूछें।)

वर्षा के दृश्य

(क) वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे – आकाश में इंद्रधनुष।

उत्तरआकाश में इंद्रधनुष का बनना, सड़कों एवं गड्ढों में पानी भरना, बच्चों का कागज़ की नाव चलाना, छाता-बरसाती का प्रयोग, खेतों में हल चलाना, छतों से पानी टपकना, कीचड़ का बनना तथा वर्षा के बाद कीट-पतंगों का निकलना – इन दृश्यों का कविता में उल्लेख नहीं है।

(ख) वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है, या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए।

उत्तरबिजली की चमक पहले दिखाई देती है और उसकी कड़कने की ध्वनि बाद में सुनाई देती है।इसका कारण यह है कि प्रकाश की गति (लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) ध्वनि की गति (लगभग 343 मीटर प्रति सेकंड) से बहुत अधिक होती है। इसलिए प्रकाश हम तक तुरंत पहुँच जाता है, जबकि ध्वनि को आने में कुछ समय लगता है।

(ग) आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?

उत्तरवर्षा से पहले: पेड़-पौधों की पत्तियाँ धूल से भरी, मुरझाई एवं कुछ सूखी-सी दिखती हैं; मिट्टी सूखी एवं कठोर रहती है।वर्षा के बाद: पत्तियाँ धुलकर हरी, चमकदार एवं ताजा हो जाती हैं, नई कोंपलें फूटती हैं, फूल खिल उठते हैं और सम्पूर्ण पौधा जीवंत एवं स्वस्थ दिखाई देता है।

(घ) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” – कविता में हंसों के कतार में अर्थात् पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत – चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि)

उत्तरमैंने अनेक को पंक्तिबद्ध रूप में चलते देखा है – चींटियों को भोजन ले जाते समय, प्रार्थना-सभा एवं परीक्षा में विद्यार्थियों को, सड़क पर ट्रैफ़िक में गाड़ियों को, सैनिकों को परेड में तथा प्रवासी पक्षियों एवं हंसों को आकाश में उड़ते समय।पंक्तिबद्ध चलना अनुशासन, सहयोग एवं व्यवस्था का प्रतीक है।

वर्षा में ध्वनियाँ

(क) कविता में वर्षा के अनेक दृश्य दिए गए हैं। इन दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई दे रही होंगी?

उत्तरवर्षा के इन दृश्यों में अनेक ध्वनियाँ सुनाई देंगी – बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, पानी की रिमझिम एवं छप-छप, झरने की कल-कल, हवा की सरसराहट, मेंढकों की टर्र-टर्र, मोर की पिहू-पिहू, पपीहे की पुकार तथा मालिनों एवं किसानों के मधुर गीत।

(ख) “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” – कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?

उत्तरबेसुरी ध्वनियाँ भी तब अच्छी लगने लगती हैं जब वे किसी सुखद घटना या प्रिय वातावरण से जुड़ी हों। जैसे – वर्षा के साथ आने वाली मेंढकों की टर्र-टर्र, क्योंकि वह सुहावने मौसम एवं राहत का संकेत देती है।इसी प्रकार छोटे बच्चे की तुतलाती बोली, माँ की लोरी या उत्सव के समय बजने वाले ढोल-नगाड़े – भले ही पूरी तरह सुरीले न हों, पर अपनेपन एवं खुशी के कारण मन को भले लगते हैं।

सृजन

“बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है” – ‘आमोद’ या ‘मोद’ का अर्थ है आनंद, हर्ष, खुशी। नीचे दिए गए ‘आमोद’ से जुड़े विभिन्न दृश्यों का एक-एक अनुच्छेद में वर्णन कीजिए।

उत्तर (नमूना)बारिश के बाद उपवन में सैर: वर्षा थमते ही उपवन धुला-धुला, हरा-भरा एवं महकता हुआ लगता है; भीगी घास पर चलना एवं ठंडी हवा में साँस लेना मन को असीम आनंद देता है।किसी प्रिय सदस्य/मित्र से वर्षों बाद मिलना: जब कोई प्रिय मित्र वर्षों बाद मिलता है तो हृदय खुशी से भर उठता है; पुरानी यादें ताज़ा हो जाती हैं और बातों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं लेता।सर्दियों का पहला हिमपात: पहली बार बर्फ़ गिरते देखना अद्भुत होता है; चारों ओर सफ़ेद चादर-सी बिछ जाती है और बच्चे उछल-कूदकर इस अनोखे दृश्य का आनंद लेते हैं।(शेष दृश्य – मित्रों संग खेलना, प्रिय पुस्तक पढ़ना, कोई कार्य पूरा करना, समुद्र किनारे शांत सवेरा/शाम, कोई उत्सव – इन्हें भी इसी प्रकार अपने अनुभव के आधार पर एक-एक अनुच्छेद में लिखें।)

वर्षा से जुड़े गीत

हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत एवं लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़िए और लिखिए तथा एक पुस्तिका तैयार कीजिए।

उत्तर (मार्गदर्शन)यह संकलन-गतिविधि है। आप परिजनों, शिक्षकों, पुस्तकालय एवं इंटरनेट की सहायता से वर्षा से जुड़े गीत-लोकगीत एकत्र कर सकते हैं, जैसे – सावन के झूले के गीत, कजरी, मल्हार राग पर आधारित गीत तथा क्षेत्रीय वर्षा-लोकगीत।सभी समूहों के एकत्रित गीतों को मिलाकर एक सुंदर ‘वर्षा-गीत पुस्तिका’ तैयार करें और कक्षा में साझा करें।

आज की पहेली

भारत की विभिन्न ॠतुओं से जुड़ी पहेलियाँ पढ़कर इन्हें बूझिए।

उत्तर• “जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया…” → ग्रीष्म ॠतु• “पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरसे…” → वर्षा ॠतु• “हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी सबको भाए, नई फसल खेतों में लाए…” → शरद/हेमंत ॠतु• “फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए…” → वसंत ॠतु• “बर्फ़ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए…” → शिशिर ॠतु• “पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए…” → पतझड़/हेमंत ॠतु

झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए

उत्तर (गतिविधि)झरोखे से: इसमें इसी कवि मुकुटधर पाण्डेय की एक अन्य कविता ‘ग्रीष्म’ का अंश पढ़ने को दिया गया है, जिसमें गर्मी के ताप एवं उसकी कठिनाइयों का चित्रण है। ‘वर्षा-बहार’ से इसकी तुलना करने पर पता चलता है कि एक ही कवि ने दो ॠतुओं के विपरीत भावों (वर्षा का आनंद एवं ग्रीष्म का कष्ट) को कितनी कुशलता से व्यक्त किया है।साझी समझ: यह कविता पर साथियों के साथ विचार-विमर्श करने की गतिविधि है।खोजबीन के लिए: पुस्तक में दी गई इंटरनेट कड़ियों (वर्षा ॠतु, आँधी-पानी, वसंत, ॠतुएँ संबंधी वीडियो) को देखकर ॠतुओं के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘वर्षा-बहार’ कविता के रचयिता कौन हैं और उनका संबंध किस प्रदेश से है?

उत्तर‘वर्षा-बहार’ कविता के रचयिता मुकुटधर पाण्डेय हैं। उनका जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। वे प्रकृति-सौंदर्य के सुंदर चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं और उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।

2. वर्षा के आगमन से पपीहे को क्या लाभ होता है?

उत्तरवर्षा के आगमन से लाखों पपीहे ग्रीष्म ॠतु के ताप (गरमी) से छुटकारा पा जाते हैं। ठंडी हवा एवं वर्षा से उन्हें राहत मिलती है और वे प्रसन्न होकर इधर-उधर उड़ते हैं।

3. कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ क्यों कहा गया है?

उत्तरवर्षा को ‘अनोखी बहार’ इसलिए कहा गया है क्योंकि इसके आगमन से प्रकृति, पशु-पक्षी एवं मनुष्य सभी आनंद से भर जाते हैं तथा संसार की समस्त शोभा एवं हरियाली वर्षा पर ही निर्भर रहती है।

4. “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइसका आशय है कि सम्पूर्ण संसार की सुंदरता, हरियाली एवं जीवन वर्षा पर ही आश्रित है। वर्षा से ही धरती पर जल, अन्न एवं नवजीवन प्राप्त होता है, इसके बिना सृष्टि का सौंदर्य संभव नहीं।

5. वर्षा ॠतु में वन एवं बाग का दृश्य कैसा हो जाता है?

उत्तरवर्षा ॠतु में वन में मोर नृत्य करते हैं और मेंढक सुगीत गाते हैं। बागों में गुलाब खिलकर सुगंध फैलाते हैं, मालिनें गीत गाती हैं और चारों ओर आमोद (आनंद) एवं हरियाली छा जाती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘वर्षा-बहार’ कविता का मूल भाव (केंद्रीय संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर‘वर्षा-बहार’ कविता का मूल भाव वर्षा ॠतु के सौंदर्य एवं उसके महत्त्व का उल्लासपूर्ण चित्रण है। कवि बताते हैं कि वर्षा सबके मन को मोह लेती है। आकाश में बादल घिरते हैं, बिजली चमकती है, झरने बहते हैं तथा ठंडी हवा बहती है।वर्षा के आगमन से समूची प्रकृति आनंदित हो उठती है – मालिनें एवं किसान गीत गाते हैं, मोर नाचते हैं, मेंढक गाते हैं, गुलाब खिलते हैं और जलचर जीव प्रसन्न होते हैं। कवि अंत में कहते हैं कि संसार की समस्त शोभा वर्षा पर ही निर्भर है। इस प्रकार यह कविता वर्षा को एक उत्सव के रूप में प्रस्तुत करती है और हमें प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता एवं उसके संरक्षण की प्रेरणा देती है।

7. इस कविता के आधार पर वर्षा ॠतु में प्रकृति एवं प्राणी-जगत की प्रसन्नता का वर्णन कीजिए।

उत्तरवर्षा ॠतु में सम्पूर्ण प्रकृति एवं प्राणी-जगत आनंद से भर जाता है। आकाश में अनूठी छटा छा जाती है, झरने बहने लगते हैं, ठंडी हवा से पेड़ों की डालियाँ झूमने लगती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है।पशु-पक्षी एवं जीव-जंतु अपनी-अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं – वन में मोर नृत्य करते हैं, मेंढक मधुर ध्वनि में गाते हैं, पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं और तालाब के जलचर जीव उल्लसित होते हैं। बागों में गुलाब सुगंध बिखेरते हैं तथा मालिनें गीत गाती हैं। आकाश में हंस कतार बाँधकर उड़ते हैं और खेतों में किसान मनभावन गीत गाते हैं। इस प्रकार वर्षा प्रत्येक प्राणी के जीवन में नया उत्साह एवं उल्लास भर देती है।

8. इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ कहाँ तक सार्थक है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरकविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ पूर्णतः सार्थक एवं उपयुक्त है। ‘बहार’ का अर्थ रौनक, उल्लास एवं सौंदर्य का समय होता है। यहाँ कवि ने वर्षा ॠतु को वसंत के समान उल्लासमय एवं मनमोहक दिखाया है, इसी कारण इसे ‘वर्षा-बहार’ कहा गया है।कविता का प्रत्येक दृश्य इस शीर्षक को सिद्ध करता है – मोरों का नृत्य, मेंढकों एवं किसानों के गीत, गुलाब की सुगंध, हंसों की कतार तथा बागों में छाया आमोद। ये सभी सकारात्मक एवं आनंददायक गतिविधियाँ वर्षा के कारण घटित होती हैं। चूँकि वर्षा सम्पूर्ण प्रकृति में बहार (रौनक) ला देती है, अतः शीर्षक पूर्णतया उचित एवं भाव के अनुरूप है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘वर्षा-बहार’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुमित्रानंदन पंत

(ख) मुकुटधर पाण्डेय

(ग) सोहनलाल द्विवेदी

(घ) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर(ख) मुकुटधर पाण्डेय।

2. कवि मुकुटधर पाण्डेय का जन्म किस प्रदेश में हुआ था?

(क) उत्तर प्रदेश

(ख) मध्य प्रदेश

(ग) छत्तीसगढ़

(घ) बिहार

उत्तर(ग) छत्तीसगढ़ (बिलासपुर)।

3. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?

(क) ग्रीष्म ॠतु का कष्ट

(ख) वर्षा ॠतु का आनंद एवं सौंदर्य

(ग) देश-प्रेम

(घ) मित्रता

उत्तर(ख) वर्षा ॠतु का आनंद एवं सौंदर्य।

4. वर्षा आने पर वन में कौन नृत्य करते हैं?

(क) हंस

(ख) मोर

(ग) पपीहे

(घ) कोयल

उत्तर(ख) मोर।

5. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—

(क) ध्वनि

(ख) सुगंध

(ग) सुंदरता

(घ) ठंडक

उत्तर(ख) सुगंध।

6. कविता के अनुसार ग्रीष्म के ताप से किसे राहत मिलती है?

(क) मोर को

(ख) पपीहे को

(ग) मालिनों को

(घ) किसान को

उत्तर(ख) पपीहे को।

7. आकाश में हंस किस प्रकार उड़ते हैं?

(क) बिखरे हुए

(ख) अकेले-अकेले

(ग) सुंदर कतार बाँधे (पंक्तिबद्ध)

(घ) बहुत ऊँचाई पर छिपकर

उत्तर(ग) सुंदर कतार बाँधे (पंक्तिबद्ध)।

8. ‘आमोद’ शब्द का अर्थ है—

(क) क्रोध

(ख) भय

(ग) आनंद, हर्ष

(घ) निराशा

उत्तर(ग) आनंद, हर्ष।

9. कविता के अनुसार सारे जगत की शोभा किस पर निर्भर है?

(क) सूर्य पर

(ख) वर्षा पर

(ग) हवा पर

(घ) बिजली पर

उत्तर(ख) वर्षा पर।

10. ‘नभ’ शब्द का अर्थ है—

(क) पृथ्वी

(ख) आकाश

(ग) जल

(घ) वन

उत्तर(ख) आकाश।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ख), 5-(ख), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): वर्षा के आगमन से पपीहे ग्रीष्म के ताप से राहत पाते हैं।

कारण (R): वर्षा से वातावरण ठंडा एवं सुहावना हो जाता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता में वर्षा ॠतु को दुख एवं निराशा का काल बताया गया है।

कारण (R): वर्षा के आगमन से मोर नाचते हैं और किसान मनभावन गीत गाते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (कविता में वर्षा को आनंद एवं उल्लास का काल बताया गया है), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): संसार की समस्त शोभा एवं हरियाली वर्षा पर निर्भर है।

कारण (R): वर्षा से धरती को जल, अन्न एवं नवजीवन प्राप्त होता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): वर्षा के समय बिजली की चमक उसकी ध्वनि से पहले दिखाई देती है।

कारण (R): प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक होती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ सार्थक है।

कारण (R): वर्षा के आगमन से चारों ओर गीत, नृत्य, सुगंध एवं आनंद की बहार छा जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(घ), 3-(क), 4-(क), 5-(क)

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव (Exam Tips)

  • कविता की कुछ पंक्तियाँ (जैसे टेक एवं अंतिम पद) कंठस्थ कर लें – भावार्थ एवं उद्धरण-आधारित प्रश्नों में सहायक होंगी।
  • कवि का नाम, जन्म-स्थान (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) एवं ‘पद्मश्री’ सम्मान जैसे तथ्य याद रखें।
  • विशेषण-विशेष्य एवं पर्यायवाची (नभ, बादल, पानी, वर्षा) से जुड़े व्याकरण-प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं – इन्हें अवश्य दोहराएँ।
  • उत्तर लिखते समय कविता की पंक्ति उद्धृत करें – इससे उत्तर अधिक प्रभावशाली एवं अंक-योग्य बनता है।

सामान्य भूलें (Common Mistakes)

  • ‘बहार’ का अर्थ केवल ‘वसंत’ न लिखें; यहाँ यह वर्षा की रौनक एवं उल्लास के अर्थ में है।
  • कवि का नाम सुमित्रानंदन पंत या सोहनलाल द्विवेदी न लिख दें – सही नाम मुकुटधर पाण्डेय है।
  • ‘सौरभ’ (सुगंध) तथा ‘आमोद’ (आनंद) के अर्थ में भ्रम न करें।
  • शब्दों की वर्तनी सावधानी से लिखें – जैसे ‘ॠतु’, ‘निर्भर’, ‘जलचर’, ‘मनहर’।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘वर्षा-बहार’ कविता के कवि कौन हैं?

‘वर्षा-बहार’ कविता के कवि मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989) हैं, जिनका जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था और जिन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था।

‘वर्षा-बहार’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव वर्षा ॠतु के सौंदर्य एवं आनंद का चित्रण है। वर्षा से प्रकृति, पशु-पक्षी एवं मनुष्य सभी प्रसन्न हो उठते हैं और संसार की समस्त शोभा वर्षा पर ही निर्भर है।

कविता में वर्षा को ‘बहार’ क्यों कहा गया है?

‘बहार’ का अर्थ रौनक एवं उल्लास का समय है। चूँकि वर्षा के आगमन से चारों ओर गीत, नृत्य, सुगंध एवं आनंद छा जाता है, इसलिए कवि ने वर्षा को ‘बहार’ कहा है।

कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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