कक्षा 7 हिंदी (मल्हार) पाठ 9 – चिड़िया (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार के पाठ 9 ‘चिड़िया’ (कवि – आरसी प्रसाद सिंह) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों (मेरी समझ से, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, सोच-विचार के लिए आदि) के मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी उत्तर।
कवि परिचय – आरसी प्रसाद सिंह
आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) हिंदी एवं मैथिली के प्रसिद्ध कवि थे, जिन्होंने प्रकृति और जीवन-संघर्ष को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से चित्रित किया। उनकी कविताओं में प्रेम, करुणा, त्याग-बलिदान, मुक्ति तथा मिल-जुलकर एक सुंदर संसार रचने की कल्पना बार-बार दिखाई देती है – जैसा कि ‘चिड़िया’ कविता में भी देखने को मिलता है। उन्होंने चिड़िया के माध्यम से कितनी सुंदर बात कही है — “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!” कलापी और आरसी उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं।
कविता (मूल पाठ)
‘चिड़िया’ एक प्रेरक प्रकृति-कविता है, जिसमें कवि पक्षियों के स्वच्छंद, संतोषी एवं मिल-जुलकर रहने वाले जीवन के माध्यम से मनुष्य को स्वतंत्रता, प्रेम तथा लोभ-त्याग का संदेश देते हैं।
बैठी चिड़िया गाती है!
तुम्हें ज्ञात क्या अपनी
बोली में संदेश सुनाती है?
चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की
रीति हमें सिखलाती है!
वह जग के बंदी मानव को
मुक्ति-मंत्र बतलाती है!
वन में जितने पंछी हैं, खंजन,
कपोत, चातक, कोकिल;
काक, हंस, शुक आदि वास
करते सब आपस में हिलमिल!
सब मिल-जुलकर रहते हैं वे,
सब मिल-जुलकर खाते हैं;
आसमान ही उनका घर है;
जहाँ चाहते, जाते हैं!
रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी
दुनिया एक बसाते हैं;
दिन भर करते काम, रात में
पेड़ों पर सो जाते हैं!
उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं;
जग का सारा माल हड़पकर
जाने की भी चाह नहीं।
जो मिलता है अपने श्रम से,
उतना भर ले लेते हैं;
बच जाता जो, औरों के हित,
उसे छोड़ वे देते हैं!
सीमा-हीन गगन में उड़ते,
निर्भय विचरण करते हैं;
नहीं कमाई से औरों की
अपना घर वे भरते हैं!
वे कहते हैं, मानव! सीखो
तुम हमसे जीना जग में;
हम स्वच्छंद और क्यों तुमने
डाली है बेड़ी पग में?
तुम देखो हमको, फिर अपनी
सोने की कड़ियाँ तोड़ो;
ओ मानव! तुम मानवता से
द्रोह-भावना को छोड़ो!
पीपल की डाली पर चिड़िया
यही सुनाने आती है
बैठ घड़ी भर, हमें चकित कर,
गा-कर फिर उड़ जाती है।
— आरसी प्रसाद सिंह
कविता का सार
‘चिड़िया’ कविता में कवि आरसी प्रसाद सिंह ने एक छोटी-सी चिड़िया के माध्यम से मनुष्य को जीवन जीने की महान शिक्षा दी है। पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया जब मधुर स्वर में गाती है, तो वह केवल गीत नहीं गाती, बल्कि अपनी बोली में मनुष्य को गहरा संदेश भी सुनाती है। कवि कहते हैं कि चिड़िया हमें प्रेम और प्रीति की रीति सिखाती है तथा बंधनों में जकड़े मानव को मुक्ति का मंत्र देती है।
कवि बताते हैं कि वन में खंजन, कपोत, चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता आदि अनेक पक्षी रहते हैं, परंतु वे सब आपस में हिल-मिलकर, प्रेमपूर्वक रहते हैं। वे मिल-जुलकर खाते-पीते हैं; सारा आकाश उनका घर है और वे जहाँ चाहें, स्वतंत्र होकर उड़ जाते हैं। पक्षी दिन भर परिश्रम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं। उनके मन में न लोभ है, न पाप, न किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता। वे संसार का सारा धन हड़पने की चाह नहीं रखते; अपने श्रम से जितना मिलता है उतना ही ले लेते हैं और शेष दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।
असीम आकाश में निर्भय होकर विचरण करते ये पक्षी कभी दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते। इसी कारण वे मनुष्य को सीख देते हैं कि वह भी उनकी भाँति स्वतंत्र, संतोषी और प्रेममय जीवन जिए। पक्षी पूछते हैं कि हम तो स्वच्छंद हैं, फिर मनुष्य ने अपने पैरों में लोभ, स्वार्थ और बंधन की ‘सोने की बेड़ी’ क्यों डाल रखी है? वे मनुष्य से आग्रह करते हैं कि वह इन बेड़ियों को तोड़कर मानवता के प्रति द्रोह-भावना त्याग दे। इस प्रकार चिड़िया घड़ी भर डाली पर बैठकर, मनुष्य को चकित कर, यह अमूल्य संदेश सुनाकर फिर उड़ जाती है। पूरी कविता प्रेम, समानता, संतोष और स्वतंत्रता का संदेश देती है।
भावार्थ
(पहला अंश): कवि कहते हैं कि पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया मधुर स्वर में गा रही है। वह केवल गीत नहीं गाती, अपितु अपनी बोली में मनुष्य को एक संदेश भी देती है। चिड़िया हमें प्रेम और प्रीति से रहने की रीति सिखाती है तथा स्वार्थ एवं बंधनों में बँधे मनुष्य को मुक्ति (स्वतंत्रता) का मंत्र समझाती है।
(दूसरा अंश): वन में खंजन, कपोत (कबूतर), चातक, कोयल, कौआ, हंस, तोता आदि अनेक पक्षी रहते हैं और वे सब आपस में मिल-जुलकर प्रेम से रहते हैं। वे मिलकर खाते हैं, सारा आसमान उनका घर है और वे जहाँ चाहें स्वतंत्र होकर उड़ जाते हैं। जहाँ रहते हैं वहीं अपनी एक दुनिया बसा लेते हैं; दिन भर परिश्रम करते हैं और रात में पेड़ों पर सो जाते हैं।
(तीसरा अंश): पक्षियों के मन में न लोभ है, न पाप, न ही किसी प्रकार की व्यर्थ चिंता। वे संसार का सारा धन हड़पने की कोई इच्छा नहीं रखते। अपने परिश्रम से जितना मिलता है उतना ही ले लेते हैं और जो बच जाता है, उसे दूसरों के हित के लिए छोड़ देते हैं। असीम आकाश में निर्भय विचरण करते हुए वे कभी दूसरों की कमाई से अपना घर नहीं भरते।
(चौथा अंश): पक्षी मनुष्य को सीख देते हैं कि वह भी उनकी भाँति संसार में स्वतंत्र, संतोषी एवं प्रेममय जीवन जीना सीखे। वे पूछते हैं कि हम तो स्वच्छंद हैं, फिर मनुष्य ने अपने पैरों में स्वार्थ और लोभ की ‘सोने की बेड़ी’ क्यों डाल रखी है। वे आग्रह करते हैं कि मनुष्य इन सोने की कड़ियों (बंधनों) को तोड़ दे तथा मानवता के प्रति द्रोह-भावना त्याग दे। इस प्रकार चिड़िया घड़ी भर डाली पर बैठकर यह अमूल्य संदेश सुनाती है और फिर उड़ जाती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| डाली | पेड़ की शाखा, टहनी |
| ज्ञात | मालूम, जाना हुआ |
| संदेश | सीख, संदेसा |
| प्रीति | प्रेम, स्नेह |
| रीति | तरीका, ढंग, परंपरा |
| बंदी | बँधा हुआ, कैदी |
| मुक्ति-मंत्र | स्वतंत्रता का उपाय |
| पंछी / पंखी | पक्षी, चिड़िया |
| खंजन | एक छोटा सुंदर पक्षी |
| कपोत | कबूतर |
| चातक | पपीहा (वर्षा-बूँद पर पलने वाला पक्षी) |
| कोकिल | कोयल |
| काक | कौआ |
| शुक | तोता |
| हिलमिल | मिल-जुलकर, घुल-मिलकर |
| लोभ | लालच |
| हड़पकर | छीनकर, हथियाकर |
| श्रम | परिश्रम, मेहनत |
| हित | भला, कल्याण |
| सीमा-हीन गगन | असीम आकाश |
| निर्भय विचरण | निडर होकर घूमना |
| स्वच्छंद | स्वतंत्र, बंधन-रहित |
| बेड़ी / कड़ियाँ | बंधन, जंजीर |
| द्रोह-भावना | शत्रुता एवं विरोध का भाव |
| चकित | आश्चर्यचकित, हैरान |
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?
• प्रेम-प्रीति
• मिल-जुलकर रहना
• लोभ और पाप
• निर्भय विचरण
2. “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?
• असमानता और विभाजन
• प्रतिस्पर्धा और संघर्ष
• समानता और एकता
• स्वार्थ और ईर्ष्या
3. “वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?
• आकाश में उड़ते रहना
• बंधन में रहना
• स्वच्छंद रहना
• संचय करना
(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए।
| संदर्भ | भाव |
|---|---|
| 1. चिड़िया की बोली | प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |
| 2. सोने की कड़ियाँ | बंधन और लालच |
| 3. निर्भय विचरण | स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन |
| 4. मुक्ति-मंत्र | बंधन से मुक्ति |
| 5. दिनभर काम | श्रम और संतोष |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!”
(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं”
(ग) “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं”
सोच-विचार के लिए
नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रश्न दिए गए हैं। कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
(ख) “जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए।
1. चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?
2. चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है?
3. चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?
4. यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?
कविता की रचना
“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे / सब मिल-जुलकर खाते हैं” – रेखांकित शब्द (मिल-जुलकर) लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्रायः कविता में आती है। अब आप सब मिलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए—
संकेत— सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे / सब मिल-जुलकर गाते हैं…
सब मिल-जुलकर गाते हैं;
सब मिल-जुलकर उड़ते नभ में,
सब मिल-जुलकर खाते हैं!सब मिल-जुलकर श्रम करते हैं,
सब मिल-जुलकर सोते हैं;
प्रेम-प्रीति की डोर बाँधकर,
सुख-दुख साथ पिरोते हैं!(विद्यार्थी इसी लय में अपनी कल्पना से अन्य पंक्तियाँ जोड़ सकते हैं।)
भाषा की बात
(क) क्रिया शब्द पहचानना
“पीपल की ऊँची डाली पर / बैठी चिड़िया गाती है! / तुम्हें ज्ञात क्या अपनी / बोली में संदेश सुनाती है?” – रेखांकित शब्द ‘गाती’ और ‘सुनाती’ से चिड़िया के काम का बोध होता है। ऐसे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध हो, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया-शब्द ढूँढ़कर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
(ख) शब्द एक : अर्थ अनेक
“उनके मन में लोभ नहीं है” में ‘मन’ का अर्थ ‘चित्त’ (बुद्धि) है, किंतु ‘मन’ शब्द के अन्य अर्थ भी हो सकते हैं – जैसे “आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है” (इच्छा), “व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा” (तौल की इकाई)। नीचे दिए शब्दों का अलग-अलग अर्थों/संदर्भों में प्रयोग कीजिए— (क) कर (ख) जल (ग) अर्थ (घ) फल (ङ) आम
| शब्द | भिन्न अर्थ एवं प्रयोग-वाक्य |
|---|---|
| कर | (i) हाथ – भगवान ने अपने कर से आशीर्वाद दिया। (ii) टैक्स/कर – व्यापारी समय पर सरकार को कर चुकाता है। (iii) करना (क्रिया) – अपना कार्य ध्यान से कर। |
| जल | (i) पानी – प्यासे को शीतल जल पिलाओ। (ii) जलना (क्रिया) – दीपक रात भर जल रहा है। |
| अर्थ | (i) मतलब – इस शब्द का अर्थ बताओ। (ii) धन – अर्थ के बिना अनेक कार्य रुक जाते हैं। |
| फल | (i) खाने योग्य फल – आम मीठा फल है। (ii) परिणाम – परिश्रम का फल मीठा होता है। |
| आम | (i) एक फल – गर्मियों में आम खूब मिलते हैं। (ii) साधारण/सर्वसाधारण – यह आम बात है। |
पाठ से आगे (अन्य गतिविधियाँ)
भावों की बात
(क) दिए गए दृश्यों को देखकर आपको कैसा महसूस होता है? (प्रेम, करुणा, क्रोध, आनंद, घृणा, शांति आदि भावों में से चुनिए।) (ख) ये भाव आप कब-कब अनुभव करते हैं? उनके नाम लिखकर एक-एक वाक्य लिखिए।
आज की पहेली
कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़े। नीचे दी गई पहेलियों में छिपे पक्षियों को पहचानिए।
चित्र की बात
दिए गए तीनों चित्रों को ध्यान से देखकर बताइए – आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों?
साथ-साथ
“वन में जितने पंछी हैं… करते सब आपस में हिलमिल!” 1. वन के सभी पक्षी एक साथ रहते हैं; हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है? 2. हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
रचनात्मकता / हमारा पर्यावरण / परियोजना कार्य / झरोखे से / साझी समझ / खोजबीन के लिए
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘चिड़िया’ कविता के रचयिता कौन हैं और कविता का मुख्य भाव क्या है?
2. चिड़िया पीपल की डाली पर बैठकर मनुष्य को क्या-क्या संदेश देती है?
3. कविता के अनुसार पक्षियों के मन में किन बुराइयों का अभाव होता है?
4. पक्षी अपने श्रम से प्राप्त वस्तु का उपयोग किस प्रकार करते हैं?
5. ‘सोने की कड़ियाँ’ से कवि का क्या आशय है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘चिड़िया’ कविता का केंद्रीय भाव (मूल संदेश) अपने शब्दों में लिखिए।
7. कविता के आधार पर पक्षियों एवं मनुष्य के जीवन की तुलना कीजिए।
8. इस कविता के द्वारा कवि पर्यावरण एवं स्वतंत्रता के विषय में क्या प्रेरणा देते हैं?
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘चिड़िया’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) आरसी प्रसाद सिंह
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(घ) माखनलाल चतुर्वेदी
2. चिड़िया किस पेड़ की ऊँची डाली पर बैठकर गाती है?
(क) आम
(ख) नीम
(ग) पीपल
(घ) बरगद
3. कविता के अनुसार पक्षियों के मन में क्या नहीं है?
(क) प्रेम
(ख) लोभ और पाप
(ग) एकता
(घ) स्वतंत्रता
4. ‘कपोत’ किस पक्षी को कहते हैं?
(क) तोता
(ख) कौआ
(ग) कबूतर
(घ) कोयल
5. ‘शुक’ का अर्थ है—
(क) हंस
(ख) तोता
(ग) कोयल
(घ) खंजन
6. पक्षियों का घर कविता में किसे बताया गया है?
(क) पेड़ की डाली
(ख) घोंसला
(ग) आसमान
(घ) वन
7. पक्षी अपने श्रम से प्राप्त वस्तु में से जो बच जाता है, उसका क्या करते हैं?
(क) संग्रह कर लेते हैं
(ख) फेंक देते हैं
(ग) औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं
(घ) छिपा लेते हैं
8. ‘सोने की कड़ियाँ’ किसका प्रतीक हैं?
(क) आभूषण
(ख) लोभ एवं स्वार्थ के बंधन
(ग) धन-संपत्ति
(घ) मित्रता
9. कविता में चिड़िया मनुष्य से किस भावना को छोड़ने के लिए कहती है?
(क) प्रेम-भावना
(ख) द्रोह-भावना
(ग) दया-भावना
(घ) त्याग-भावना
10. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?
(क) धन कमाना ही जीवन है
(ख) प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता
(ग) अधिक से अधिक संग्रह करना
(घ) अकेले रहना
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): चिड़िया मनुष्य को मुक्ति-मंत्र (स्वतंत्रता का संदेश) देती है।
कारण (R): चिड़िया स्वयं असीम आकाश में निर्भय एवं स्वच्छंद होकर विचरण करती है।
2. अभिकथन (A): पक्षी संसार का सारा धन हड़पकर संग्रह करना चाहते हैं।
कारण (R): पक्षी अपने श्रम से आवश्यकता भर ही लेते हैं और शेष औरों के हित के लिए छोड़ देते हैं।
3. अभिकथन (A): वन के सभी पक्षी आपस में मिल-जुलकर रहते हैं।
कारण (R): उनके मन में प्रेम, एकता एवं भाईचारे का भाव होता है।
4. अभिकथन (A): मनुष्य ने स्वयं अपने पैरों में बंधन डाल रखे हैं।
कारण (R): मनुष्य लोभ एवं स्वार्थ की ‘सोने की कड़ियों’ में बँधा हुआ है।
5. अभिकथन (A): ‘चिड़िया’ एक प्रकृति-परक प्रेरक कविता है।
कारण (R): यह कविता पक्षियों के जीवन के माध्यम से मनुष्य को प्रेम, संतोष एवं स्वतंत्रता की प्रेरणा देती है।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
• कविता की मुख्य पंक्ति “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है” एवं कवि का नाम (आरसी प्रसाद सिंह) अवश्य याद रखें।
• कविता में आए पक्षियों के नाम और उनके अर्थ (खंजन, कपोत=कबूतर, चातक=पपीहा, कोकिल=कोयल, काक=कौआ, शुक=तोता, हंस) क्रमवार याद कर लें।
• कविता का संदेश तीन शब्दों में पकड़ें – प्रेम, संतोष, स्वतंत्रता; उत्तर लिखते समय इन्हीं को विस्तार दें।
• ‘सोने की कड़ियाँ’, ‘मुक्ति-मंत्र’, ‘द्रोह-भावना’ जैसे प्रतीकात्मक शब्दों का भाव स्पष्ट लिखें।
सामान्य गलतियाँ (इनसे बचें)
• कवि का नाम ‘आरसी प्रसाद सिंह’ है – इसे ‘रामधारी सिंह’ या अन्य कवि से न मिलाएँ।
• ‘चातक’ को कौआ एवं ‘कपोत’ को तोता लिख देना सामान्य भूल है – चातक = पपीहा, कपोत = कबूतर, शुक = तोता।
• ‘सोने की कड़ियाँ’ को सचमुच का सोना/आभूषण न समझें; यह लोभ एवं स्वार्थ के बंधन का प्रतीक है।
• कविता को केवल पक्षियों का वर्णन न समझें – इसका असली उद्देश्य मनुष्य को जीवन-शिक्षा देना है।
• देवनागरी वर्तनी ध्यान से लिखें (निर्भय, स्वच्छंद, द्रोह) – मात्रा-अशुद्धि से अंक कटते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘चिड़िया’ कविता के कवि कौन हैं?
‘चिड़िया’ कविता के कवि आरसी प्रसाद सिंह (1911–1996) हैं, जो हिंदी एवं मैथिली के प्रसिद्ध कवि थे और प्रकृति तथा जीवन-संघर्ष के सुंदर चित्रण के लिए जाने जाते हैं।
‘चिड़िया’ कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को पक्षियों की भाँति प्रेम, समानता, संतोष एवं स्वतंत्रता के साथ जीवन जीना चाहिए तथा लोभ, स्वार्थ एवं द्रोह-भावना त्याग देनी चाहिए।
कविता में ‘सोने की कड़ियाँ’ का क्या आशय है?
‘सोने की कड़ियाँ’ मनुष्य द्वारा स्वयं अपने ऊपर डाले गए लोभ एवं स्वार्थ के बंधनों का प्रतीक हैं, जो आकर्षक तो लगते हैं पर उसकी स्वतंत्रता छीन लेते हैं।
कविता एवं प्रश्न/गतिविधि-शीर्षक NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
