कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् पाठ 3 मित्राय नमः के NCERT हल (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् (दीपकम्) के तृतीय पाठ ‘मित्राय नमः’ का सम्पूर्ण समाधान देता है – मूल पाठ, अन्वय/भावार्थ, सार (Hindi Summary), शब्दार्थ, तथा ‘वयम् अभ्यासं कुर्मः’ के प्रत्येक प्रश्न एवं उप-भाग के मौलिक, परीक्षा-उपयोगी उत्तर। साथ ही चतुर्थी-विभक्ति, शब्दरूप एवं दा-धातु (लट्/लोट्) की तालिकाएँ, अतिरिक्त प्रश्न, 10 MCQ (उत्तर-कुंजी सहित), 5 अभिकथन-कारण एवं FAQ भी दिए गए हैं। यह पाठ सूर्यनमस्कार के द्वादश मन्त्रों एवं ‘नमः’ के योग में चतुर्थी-विभक्ति पर आधारित है।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पाठ + अन्वय/भावार्थ
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
- अत्र इदम् अवधेयम् (व्याकरण-तालिकाः)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 7 का तृतीय पाठ ‘मित्राय नमः’ एक रोचक संवाद-शैली में लिखा गया है। योगिता प्रतिदिन प्रातःकाल अपने पिता के साथ उद्यान जाती है, जहाँ अनेक लोग व्यायाम एवं योगासन करते हैं। मित्रों के मन में भी योगासन सीखने की इच्छा जागती है, अतः सब उत्साहपूर्वक योगशिक्षिका (आचार्या) के पास जाते हैं। आचार्या उन्हें सूर्यनमस्कार सिखाती हैं। वे बताती हैं कि सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है तथा प्रत्येक आसन से पूर्व एक-एक मन्त्र (ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः … ॐ भास्कराय नमः) बोला जाता है। पाठ का केन्द्रीय भाव है – योग एवं सूर्यनमस्कार से शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक बल की वृद्धि तथा ‘स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन’ की प्राप्ति। व्याकरण की दृष्टि से यह पाठ ‘नमः’ एवं दान-अर्थ में चतुर्थी-विभक्ति का अभ्यास कराता है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ योग एवं सूर्यनमस्कार विषय पर आधारित एक सरल संस्कृत-संवाद है, जिसमें छात्र-छात्राएँ योगशिक्षिका से सूर्यनमस्कार सीखते हैं। सूर्यनमस्कार में सूर्य के बारह नामों (मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क, भास्कर) को सम्बोधित करते हुए ‘नमः’-युक्त मन्त्र बोले जाते हैं। पाठ में बताया गया है कि 21 जून को सम्पूर्ण विश्व में ‘विश्व योग दिवस’ मनाया जाता है। महर्षि पतञ्जलि ‘योगसूत्र’ के प्रणेता हैं, जिसमें 196 सूत्र हैं। व्याकरण में यह पाठ सिखाता है कि ‘नमः’ शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है (यथा – भास्कराय नमः) तथा दान-अर्थ (दा एवं यच्छ् धातु के योग) में भी चतुर्थी होती है (यथा – शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति)।
मूल पाठ + अन्वय/भावार्थ
(पाठ संवाद-शैली में है। नीचे आचार्या एवं छात्रों के प्रमुख संवाद तथा सूर्यनमस्कार के बारह मन्त्र ज्यों-के-त्यों दिए गए हैं, साथ में हिन्दी भावार्थ।)
योगिता & मित्रसंवादः
(मित्रम्) – अहो ! योगिते, त्वं प्रातः किं करोषि ?
योगिता – अहं प्रतिदिनं प्रातः पित्रा सह उद्यानं गच्छामि ।
(मित्रम्) – उद्याने किं करोषि भोः ?
योगिता – अहं तु भ्रमणं करोमि । किन्तु बहवः जनाः तत्र व्यायामं योगासनानि च कुर्वन्ति ।
(मित्राणि) – अहो योगासनानि ! वयम् अपि ज्ञातुम् इच्छामः ।
योगिता – तर्हि वयं सर्वे योगशिक्षिकायाः समीपं गच्छामः ।
(सर्वे उत्साहेन योगशिक्षिकायाः समीपं गच्छन्ति ।)
आचार्या-छात्र-संवादः
छात्राः – नमो नमः आचार्ये !
आचार्या – शुभं भवतु । उपविशन्तु सर्वे ।
छात्राः – आचार्ये ! किम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शिक्षयति ?
आचार्या – निश्चयेन, वदन्तु किम् आसनं शिक्षितुम् इच्छन्ति ?
योगिता – आचार्ये ! अद्य सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु ।
आचार्या – समीचीनम् । सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति । प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति । तेषु प्रथमः मन्त्रः अस्ति – ‘ॐ मित्राय नमः’ इति ।
छात्राः – आम् महोदये ! वयं स्मरामः …… ।
१. ॐ मित्राय नमः । २. ॐ रवये नमः । ३. ॐ सूर्याय नमः ।
४. ॐ भानवे नमः । ५. ॐ खगाय नमः । ६. ॐ पूष्णे नमः ।
७. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः । ८. ॐ मरीचये नमः । ९. ॐ आदित्याय नमः ।
१०. ॐ सवित्रे नमः । ११. ॐ अर्काय नमः । १२. ॐ भास्कराय नमः ।
(सर्वान्ते) ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः । — सूर्यनमस्कार-मन्त्राः (दीपकम्, पाठः ३)
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥ — (पाठे उद्धृतः श्लोकः)
सार (Hindi Summary)
‘मित्राय नमः’ पाठ एक सरल एवं रोचक संवाद से आरम्भ होता है। योगिता प्रतिदिन प्रातःकाल अपने पिता के साथ उद्यान जाती है। वहाँ वह भ्रमण करती है, परन्तु अनेक लोग व्यायाम एवं योगासन करते हैं। योगिता के मित्र भी योगासन सीखने की इच्छा प्रकट करते हैं, अतः सब उत्साहपूर्वक योगशिक्षिका (आचार्या) के पास जाते हैं।
आचार्या छात्रों को सूर्यनमस्कार सिखाती हैं। वे बताती हैं कि सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है और प्रत्येक आसन से पूर्व एक मन्त्र बोला जाता है। ये बारह मन्त्र सूर्य के बारह नामों – मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क एवं भास्कर – को सम्बोधित करते हैं, जैसे ‘ॐ मित्राय नमः’, ‘ॐ रवये नमः’ आदि। अन्त में ‘ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः’ बोला जाता है।
आचार्या एक श्लोक के माध्यम से सूर्यनमस्कार के लाभ बताती हैं – जो लोग प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उनमें आयु, बुद्धि, बल, पराक्रम एवं तेज की वृद्धि होती है। सूर्यनमस्कार से शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक तीनों प्रकार के बल बढ़ते हैं तथा ‘स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन’ की प्राप्ति होती है। व्याकरण की दृष्टि से यह पाठ ‘नमः’ तथा दान-अर्थ में चतुर्थी-विभक्ति का सुन्दर अभ्यास कराता है। संक्षेप में, यह पाठ हमें योग एवं सूर्यनमस्कार के द्वारा स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन की प्रेरणा देता है।
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रातः | प्रातःकाल, सुबह | In the morning |
| पित्रा सह | पिता के साथ | With (one’s) father |
| उद्यानम् | बगीचा, उपवन | Garden |
| भ्रमणम् | टहलना, घूमना | Walking / strolling |
| व्यायामम् | कसरत, व्यायाम | Exercise |
| योगासनानि | योग के आसन | Yoga postures |
| ज्ञातुम् इच्छामः | जानना/सीखना चाहते हैं | (We) wish to learn |
| योगशिक्षिका / आचार्या | योग सिखाने वाली शिक्षिका | Yoga teacher (female) |
| उपविशन्तु | बैठ जाएँ | Please sit down |
| शिक्षयतु | सिखाइए | Please teach |
| द्वादशानाम् आसनानाम् | बारह आसनों का | Of twelve postures |
| समाहारः | समूह, संग्रह | Collection / group |
| प्रत्येकस्मात् पूर्वम् | प्रत्येक से पहले | Before each one |
| स्मरामः | याद करते/रखते हैं | (We) remember |
| अनुवदन्तु | पीछे (बाद में) दोहराएँ | Repeat (after) |
| अग्रिम-कक्षायाम् | अगली कक्षा में | In the next class |
| प्रज्ञा | बुद्धि, मेधा | Intelligence / wisdom |
| वीर्यम् | पराक्रम, वीरता | Vigour |
| तेजः | कान्ति, दीप्ति | Brilliance |
| आध्यात्मिकम् | अध्यात्म-विषयक | Spiritual |
| स्वस्थम् | नीरोग, स्वस्थ | Healthy |
| मित्रः, खगः, पूषा, रविः, भानुः, हिरण्यगर्भः, मरीचिः, सविता, अर्कः, भास्करः | सूर्य (के नाम) | Sun (its names) |
वयम् अभ्यासं कुर्मः (अभ्यासः)
1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
(क) शुभं भवतु इति कः वदति ?
(ख) योगिता आचार्यां ‘किं शिक्षयतु’ इति वदति ?
(ग) सूर्यनमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अस्ति ?
(घ) केषु सूर्यनमस्कारः श्रेष्ठः ?
(ङ) सूर्यनमस्कारेण जनाः कीदृशं शरीरं प्राप्नुवन्ति ?
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु —
(क) सर्वे छात्राः आचार्यां किं पृच्छन्ति ?
(ख) सूर्यनमस्कारः इत्यनेन कः आशयः ?
(ग) आचार्या कं श्लोकं पाठयति ?
(घ) सूर्यनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः कः ?
(ङ) सूर्यनमस्कारेण कीदृशं बलं वर्धते ?
3. पाठात् समुचितं पदं चित्वा अधः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
4. पाठे विद्यमानानां ‘नमः’-युक्तशब्दानां सङ्ग्रहं कृत्वा लिखन्तु —
यथा – मित्राय नमः ।
5. उदाहरणानुसारं कोष्ठकात् पदानि स्वीकृत्य वाक्यानि रचयन्तु —
कोष्ठकात् पदानि – अग्निः, आचार्या, त्रिवर्णध्वजः, जनकः, वृक्षः, देवी, भगिनी, मातामही, जननी, पृथिवी, नदी ।
यथा – अग्नये नमः ।
ध्यातव्यम् – ‘नमः’ के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है। आकारान्त एवं ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों की चतुर्थी एकवचन में ‘यै’ प्रत्यय लगता है (आचार्या → आचार्यायै, देवी → देव्यै)।
6. कोष्ठके विद्यमानानां शब्दानां चतुर्थी-विभक्तेः रूपाणि प्रयुज्य वाक्यानि पुनः लिखन्तु —
यथा – सैनिकः (देश) जीवनं प्रयच्छति । → सैनिकः देशाय जीवनं प्रयच्छति ।
7. उदाहरणानुसारं ‘माता कस्मै/कस्यै धनं ददाति’ इति कोष्ठके विद्यमानानि पदानि उपयुज्य लिखन्तु —
कोष्ठके पदानि – पुत्री, पुत्रः, पाचिका, आपणिकः, याचकः, पितामही ।
यथा – माता पुत्र्यै धनं ददाति ।
8. उदाहरणानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
यथा – गणेश → गणेशाय, गणेशाभ्याम्, गणेशेभ्यः ।
(क्रम – चतुर्थी एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम्)
| शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| (यथा) गणेश | गणेशाय | गणेशाभ्याम् | गणेशेभ्यः |
| (क) भक्त | भक्ताय | भक्ताभ्याम् | भक्तेभ्यः |
| (ख) सेविका | सेविकायै | सेविकाभ्याम् | सेविकाभ्यः |
| (ग) अनुजा | अनुजायै | अनुजाभ्याम् | अनुजाभ्यः |
| (घ) गृहिणी | गृहिण्यै | गृहिणीभ्याम् | गृहिणीभ्यः |
| (ङ) कुमारी | कुमार्यै | कुमारीभ्याम् | कुमारीभ्यः |
| (च) वन | वनाय | वनाभ्याम् | वनेभ्यः |
| (छ) मित्र | मित्राय | मित्राभ्याम् | मित्रेभ्यः |
(मोटे अक्षरों में दिए गए रूप विद्यार्थी द्वारा भरे जाने वाले रिक्तस्थानों के उत्तर हैं।)
अत्र इदम् अवधेयम् (व्याकरण-तालिकाः)
1. ‘नमः’ एवं दान-अर्थ में चतुर्थी विभक्ति
(क) ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुर्थी विभक्तिः भवति ।
यथा – भास्कराय नमः । (भास्कर को नमस्कार)
(ख) दानार्थे (दा-धातोः तथा च यच्छ्-धातोः योगे) चतुर्थी-विभक्तेः प्रयोगः भवति ।
यथा – शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति । | शिक्षकः छात्राय पुस्तकं यच्छति ।
2. चतुर्थी विभक्ति-रूपाणि (शब्दरूपाणि)
| लिङ्गम् | शब्दः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| अकारान्त-पुंलिङ्गम् | छात्र | छात्राय | छात्राभ्याम् | छात्रेभ्यः |
| नायक | नायकाय | नायकाभ्याम् | नायकेभ्यः | |
| आदित्य | आदित्याय | आदित्याभ्याम् | आदित्येभ्यः | |
| आकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् | आचार्या | आचार्यायै | आचार्याभ्याम् | आचार्याभ्यः |
| योगिता | योगितायै | योगिताभ्याम् | योगिताभ्यः | |
| बालिका | बालिकायै | बालिकाभ्याम् | बालिकाभ्यः | |
| ईकारान्त-स्त्रीलिङ्गम् | शालिनी | शालिन्यै | शालिनीभ्याम् | शालिनीभ्यः |
| नदी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः | |
| भगिनी | भगिन्यै | भगिनीभ्याम् | भगिनीभ्यः | |
| अकारान्त-नपुंसकलिङ्गम् | आसन | आसनाय | आसनाभ्याम् | आसनेभ्यः |
| भोजन | भोजनाय | भोजनाभ्याम् | भोजनेभ्यः | |
| फल | फलाय | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
3. दा-धातुः (परस्मैपदम्) – लट्-लकारः एवं लोट्-लकारः
लट्-लकारः (वर्तमानकालः)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ददाति | दत्तः | ददति |
| मध्यमपुरुषः | ददासि | दत्थः | दत्थ |
| उत्तमपुरुषः | ददामि | दद्वः | दद्मः |
लोट्-लकारः (आज्ञार्थः)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ददातु | दत्ताम् | ददतु |
| मध्यमपुरुषः | देहि | दत्तम् | दत्त |
| उत्तमपुरुषः | ददानि | ददाव | ददाम |
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः (ज्ञान-विस्तार)
| विषयः | विवरणम् |
|---|---|
| विश्वयोगदिवसः | सम्पूर्ण विश्व में 21 जून को ‘विश्व योग दिवस’ मनाया जाता है। |
| योगसूत्रम् | इसके प्रणेता महर्षि पतञ्जलि हैं। इस ग्रन्थ में 196 सूत्र हैं, जिनमें शरीर एवं मन के स्वास्थ्य से सम्बद्ध विषय हैं। |
| हठयोगप्रदीपिका | यह ग्रन्थ ‘स्वात्माराम’ स्वामी द्वारा रचित है। इसमें विविध आसनों का विवरण मिलता है – यथा वज्रासन, पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन, हलासन, ताडासन। |
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. सूर्यनमस्कारस्य द्वादशानाम् आसनानां भित्तिपत्राणि रचयन्तु । मन्त्रान् अपि लिखन्तु ।
2. प्रतिदिनं सकुटुम्बं सूर्यनमस्कारस्य अभ्यासं कुर्वन्तु ।
3. ‘विद्या विवादाय धनं मदाय…’ अस्मिन् श्लोके विद्यमानानि चतुर्थी-विभक्त्यन्तरूपाणि चित्वा लिखन्तु ।
श्लोक – विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय । खलस्य साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. योगिता प्रातःकाल कहाँ और किसके साथ जाती है?
2. सूर्यनमस्कार क्या है तथा उसमें कितने आसन एवं मन्त्र होते हैं?
3. सूर्यनमस्कार से कौन-कौन से लाभ होते हैं?
4. ‘नमः’ शब्द के योग में कौन-सी विभक्ति होती है? उदाहरण दीजिए।
5. विश्व योग दिवस कब मनाया जाता है तथा योगसूत्र के प्रणेता कौन हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘मित्राय नमः’ पाठ का केन्द्रीय संदेश अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस पाठ के आधार पर चतुर्थी-विभक्ति के दोनों प्रयोगों को उदाहरण सहित समझाइए।
8. सूर्य के बारह नाम लिखिए तथा बताइए कि सूर्यनमस्कार के अन्त में कौन-सा मन्त्र बोला जाता है।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. योगिता प्रातःकाल किसके साथ उद्यान जाती है?
(क) मित्रेण सह
(ख) पित्रा सह
(ग) भगिन्या सह
(घ) आचार्यया सह
2. सूर्यनमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अस्ति?
(क) दशानाम्
(ख) एकादशानाम्
(ग) द्वादशानाम्
(घ) षण्णाम्
3. सूर्यनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः कः?
(क) ॐ भास्कराय नमः
(ख) ॐ मित्राय नमः
(ग) ॐ रवये नमः
(घ) ॐ सूर्याय नमः
4. ‘नमः’ शब्द के योग में कौन-सी विभक्ति होती है?
(क) द्वितीया
(ख) तृतीया
(ग) चतुर्थी
(घ) षष्ठी
5. सूर्यनमस्कारेण कीदृशं बलं वर्धते?
(क) केवलं शारीरिकम्
(ख) केवलं मानसिकम्
(ग) शारीरिकं, मानसिकम्, आध्यात्मिकं च
(घ) किमपि न
6. ‘पूषा’ शब्दस्य चतुर्थी एकवचनरूपं किम्?
(क) पूषाय
(ख) पूष्णे
(ग) पूषाये
(घ) पूषेभ्यः
7. विश्व योग दिवस किस दिन मनाया जाता है?
(क) 14 मई
(ख) 21 जून
(ग) 2 अक्टूबर
(घ) 5 सितम्बर
8. योगसूत्र के प्रणेता कौन हैं?
(क) स्वात्माराम
(ख) महर्षि पतञ्जलि
(ग) महर्षि वाल्मीकि
(घ) महर्षि व्यास
9. दान-अर्थ में किन धातुओं के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है?
(क) गम्-धातु एवं स्था-धातु
(ख) दा-धातु एवं यच्छ्-धातु
(ग) पठ्-धातु एवं लिख्-धातु
(घ) भू-धातु एवं अस्-धातु
10. सूर्यनमस्कार के अन्त में कौन-सा मन्त्र बोला जाता है?
(क) ॐ मित्राय नमः
(ख) ॐ अर्काय नमः
(ग) ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः
(घ) ॐ भानवे नमः
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है।
कारण (R): प्रत्येक आसन से पूर्व सूर्य के एक नाम को सम्बोधित करते हुए एक मन्त्र बोला जाता है।
2. अभिकथन (A): ‘नमः’ शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
कारण (R): ‘नमः’ के योग में सदैव द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
3. अभिकथन (A): प्रतिदिन सूर्यनमस्कार करने वाले की आयु, बुद्धि, बल एवं तेज बढ़ता है।
कारण (R): सूर्यनमस्कार से शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक बल की वृद्धि होती है।
4. अभिकथन (A): दा-धातु एवं यच्छ्-धातु के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
कारण (R): दान-अर्थ में जिसको कुछ दिया जाता है, वह सम्प्रदान कारक में चतुर्थी लेता है।
5. अभिकथन (A): योगिता ने आचार्या से सूर्यनमस्कार सिखाने का अनुरोध किया।
कारण (R): आचार्या ने उत्तर में बताया कि सूर्यनमस्कार द्वादश आसनों का समाहार है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- सूर्य के बारह नाम (मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क, भास्कर) क्रम सहित याद रखें।
- बारह मन्त्र (ॐ मित्राय नमः … ॐ भास्कराय नमः) कण्ठस्थ करें – ‘नमः’-संग्रह एवं रिक्तस्थान-पूर्ति के प्रश्न इन्हीं से आते हैं।
- ‘नमः’ एवं दान-अर्थ में चतुर्थी विभक्ति का नियम उदाहरण सहित याद करें।
- चतुर्थी के शब्दरूप (छात्र → छात्राय, आचार्या → आचार्यायै, नदी → नद्यै, फल → फलाय) तालिका सहित याद रखें।
- ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ वाले प्रश्नों में पूरा वाक्य लिखें, ‘एकपदेन’ में केवल एक पद।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- स्त्रीलिङ्ग चतुर्थी रूप में ‘यै’ के स्थान पर ‘य’ लिख देना (आचार्यायै को आचार्याय लिखना) – यह त्रुटि है।
- विशेष शब्दरूप भूलना – पूषा → पूष्णे, रवि → रवये, भानु → भानवे, सविता → सवित्रे शुद्ध रूप से लिखें।
- ‘नमः’ के साथ द्वितीया/षष्ठी का प्रयोग करना – सदैव चतुर्थी होगी।
- दा-धातु के लोट्-लकार रूप (देहि, ददातु, ददाम) तथा लट्-लकार रूप (ददाति, ददति) में भ्रम करना।
- विश्व योग दिवस की तिथि गलत लिखना – यह 21 जून है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 7 पाठ 3 ‘मित्राय नमः’ किस विषय पर आधारित है?
यह पाठ योग एवं सूर्यनमस्कार पर आधारित एक संवाद है, जिसमें छात्र योगशिक्षिका से सूर्यनमस्कार सीखते हैं। व्याकरण की दृष्टि से यह ‘नमः’ एवं दान-अर्थ में चतुर्थी विभक्ति का अभ्यास कराता है।
सूर्यनमस्कार में कितने मन्त्र होते हैं और पहला मन्त्र कौन-सा है?
सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है और इसमें बारह मन्त्र होते हैं, जो सूर्य के बारह नामों को सम्बोधित करते हैं। पहला मन्त्र है – ‘ॐ मित्राय नमः’।
‘नमः’ शब्द के योग में कौन-सी विभक्ति होती है?
‘नमः’ शब्द के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है, जैसे – मित्राय नमः, भास्कराय नमः, आचार्यायै नमः। इसी प्रकार दान-अर्थ (दा/यच्छ् धातु) में भी चतुर्थी होती है।
पाठ, मन्त्र, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT दीपकम् पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
