कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 2 – दो गौरैया (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 2 ‘दो गौरैया’ (लेखक – भीष्म साहनी) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, अभ्यास की सभी गतिविधियों के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (गद्य) अध्याय: 2 लेखक: भीष्म साहनी विधा: कहानी सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – भीष्म साहनी

भीष्म साहनी (सन् 1915–2003) हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन की पीड़ा और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया था। बच्चों के लिए उन्होंने ‘गुलेल का खेल’ आदि कई कहानियाँ लिखी हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जीवंत है। ‘दो गौरैया’ कहानी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से मनुष्य और पशु-पक्षियों के सहअस्तित्व तथा बदलते दृष्टिकोण को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।

पाठ का सार

‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की एक रोचक एवं हास्य-व्यंग्य से भरी कहानी है, जिसे घर का एक बालक सुना रहा है। उसके घर में केवल तीन व्यक्ति – माँ, पिताजी और वह स्वयं – रहते हैं, फिर भी पिताजी कहते हैं कि यह घर तो सराय बना हुआ है। आँगन के आम के पेड़ पर तोते, कौवे और तरह-तरह की गौरैयाँ डेरा डाले रहती हैं। घर के भीतर भी चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ, बर्रे और चींटियों की मानो फौज छावनी डाले रहती है।

एक दिन दो गौरैया घर में घुस आती हैं और मकान का निरीक्षण करने लगती हैं। दो दिन बाद वे बैठक की छत के पंखे के गोले में अपना घोंसला बना लेती हैं और मजे से गाना गाने लगती हैं। माँ हँसकर कहती हैं कि अब ये नहीं उड़ेंगी, पर पिताजी को गुस्सा आ जाता है और वे ताली बजाकर, ‘श…श’ करके, लाठी से ठोककर और दरवाजे बंद करके गौरैयों को बार-बार बाहर निकालने का प्रयास करते हैं। माँ हर बार व्यंग्य और मजाक करती हुई हँसती रहती हैं, जिससे पिताजी और भी झुँझला उठते हैं।

गौरैयाँ कभी दरवाजे के नीचे से तो कभी टूटे शीशे वाले रोशनदान से फिर-फिर भीतर आ जाती हैं। दिन में बाहर निकाल दी जातीं, पर रात को फिर घुस आतीं। अंत में तंग आकर पिताजी स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला तोड़ने लगते हैं। इसी बीच गौरैयाँ दुबली और काली पड़ जाती हैं और चहकना भी बंद कर देती हैं।

जैसे ही पिताजी घोंसला लपेटने लगते हैं, अचानक पंखे के गोले के ऊपर से ‘चीं-चीं’ की आवाज आती है – घोंसले में नन्हीं-नन्हीं गौरैयों के बच्चे थे, जो अपने माँ-बाप को पुकार रहे थे! यह देखकर पिताजी के हाथ ठिठक जाते हैं। वे चुपचाप लाठी एक ओर रखकर कुर्सी पर बैठ जाते हैं। माँ सभी दरवाजे खोल देती हैं और गौरैयों के माँ-बाप झट से उड़कर भीतर आकर अपने बच्चों की चोंचों में चुग्गा डालने लगते हैं। कमरे में फिर से शोर होने लगता है, पर इस बार पिताजी उन्हें देख-देखकर केवल मुसकराते रहते हैं। इस प्रकार यह कहानी हास्य के साथ-साथ संवेदना और बदलते दृष्टिकोण का सुंदर संदेश देती है।

शब्दार्थ

कठिन शब्दअर्थ
सराययात्रियों के ठहरने का स्थान, धर्मशाला
डेरा डालनाअस्थायी रूप से ठहरना, रहने लगना
निरीक्षणध्यान से देख-परखकर जाँच करना
रोशनदानदीवार के ऊपरी भाग में बना झरोखा जिससे हवा-प्रकाश आता है
बिछावनबिछाने की वस्तु, बिस्तर
व्यंग्यहँसी-मजाक या उपहास के द्वारा किसी कमी/विडंबना को उजागर करना
धमा-चौकड़ीउछल-कूद और शोरगुल
अँगीठीआग जलाकर सेंकने या पकाने का छोटा चूल्हा
कसरतव्यायाम
छावनीसेना के ठहरने का स्थान
हुक्मआदेश
झिड़कनाडाँटकर बात करना, फटकारना
खदेड़नाभगाना, दौड़ाना
सहनशीलतासहने का गुण, धैर्य
स्टूलबिना पीठ की ऊँची चौकी
झालरसजावट के लिए लटकाई जाने वाली लड़ी
थिगलीकपड़े का छोटा टुकड़ा, पैबंद
गुमसुमचुपचाप, उदास और शांत
अवाक्हक्का-बक्का, चकित होकर बिना बोले
चुग्गापक्षियों का दाना-चारा
मुसकरानाहल्के-से हँसना, मुस्कुराना

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—

• घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है

• घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं

• पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं

• घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं

उत्तरसही उत्तर– ‘घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं’ तथा ‘घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं’।पिताजी के घर में पक्षी, चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर आदि निरंतर आते-जाते और रहते थे, जिससे घर सराय (धर्मशाला) जैसा लगता था जहाँ सब अपने हैं ही नहीं।

(2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?

• माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है

• लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है

• जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे

• मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे

उत्तरसही उत्तर– ‘जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।’पिताजी कहते हैं कि वे लोग तो मेहमान हैं और घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं – अर्थात् वहाँ बसने वाले अनगिनत जीव-जंतु ही मानो घर के असली स्वामी बन गए थे।

(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?

• दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया

• पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया

• दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया

• माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया

उत्तरसही उत्तर– ‘पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।’पिताजी बार-बार लाठी, ताली और दरवाजे बंद करके गौरैयों को निकालने में लगे रहे, जबकि माँ हँसकर मना करती रहीं कि चिड़ियों को मत निकालो।

(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?

• माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ

• माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे

• माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी

• माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था

उत्तरसही उत्तर– ‘माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ’ तथा ‘माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे’।माँ हृदय से चाहती थीं कि गौरैयाँ घर में रहें; इसीलिए वे पिताजी के असफल प्रयासों पर मजाक करतीं और मुसकराती रहती थीं।

(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?

• दूसरों पर निर्भर रहना

• असफलताओं से हार मान लेना

• अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना

• संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना

उत्तरसही उत्तर– ‘अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।’गौरैयाँ बार-बार निकाली जाने पर भी हार नहीं मानतीं और फिर-फिर लौट आती हैं। यह सिखाता है कि लक्ष्य पाने के लिए निरंतर प्रयास और धैर्य आवश्यक है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर (संकेत)यह समूह-चर्चा का कार्य है। विद्यार्थी अपने चुने उत्तर के पीछे का कारण कहानी की घटनाओं से जोड़कर बताएँ और साथियों के तर्क ध्यान से सुनकर अपने उत्तर की पुष्टि या पुनर्विचार करें। इससे समझ में आता है कि एक ही प्रश्न को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जा सकता है।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।

क्रमवाक्यसबसे उपयुक्त अर्थ
1.वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं!पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था।
2.आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
3.वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4.वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5.पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे।पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
6.इतने में रात पड़ गई।कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7.जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों।
मिलान कुंजी: 1 → शोर को लोगों का संगीत समझना; 2 → पेड़ पर पक्षियों का निरंतर निवास; 3 → चूहों के शोर से नींद में बाधा; 4 → पिताजी का माँ की बातों को उपहास समझना; 5 → पिताजी का गर्व/विजयी मुद्रा में बैठना; 6 → धीरे-धीरे रात होना; 7 → गौरैयों का प्रसन्न होकर चहचहाना।

(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?

उत्तर (संकेत)यह चर्चा-कार्य है। विद्यार्थी ऊपर दिए गए उपयुक्त अर्थों से अपने उत्तर मिलाएँ। ध्यान दें कि सही अर्थ वही है जो वाक्य के संदर्भ और भाव से मेल खाता हो, न कि उसका शाब्दिक/अतिशयोक्तिपूर्ण अर्थ।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”

उत्तरइस पंक्ति में माँ की समझदारी झलकती है। उनका आशय है कि जब तक गौरैयाँ केवल आ-जा रही थीं, तभी तक उन्हें आसानी से उड़ाया जा सकता था।अब जब उन्होंने घोंसला बना लिया है, तो उन्होंने इस घर को अपना घर मान लिया है; इसलिए वे अब आसानी से नहीं जाएँगी। किसी से लगाव/अपनापन जुड़ जाने पर उस स्थान को छोड़ना कठिन हो जाता है।

(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”

उत्तरयह पिताजी का कथन है, जिसमें उनका हठ और आत्मविश्वास झलकता है। वे मानते हैं कि यदि एक दिन भी गौरैयों को भीतर न आने दिया जाए, तो वे निराश होकर घर छोड़ देंगी।किंतु यह उनका भ्रम सिद्ध होता है, क्योंकि गौरैयाँ बार-बार लौट आती हैं। इससे पता चलता है कि अपने घोंसले और बच्चों के प्रति लगाव किसी भी रुकावट से बड़ा होता है।

(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”

उत्तरयह पिताजी का क्रोध और झुँझलाहट भरा कथन है। हर उपाय असफल होने पर वे गौरैयों का घोंसला (घर) ही तोड़ देने की बात करते हैं।यह पंक्ति यह भी संकेत देती है कि किसी का घर उजाड़ देना कितना कठोर और निर्दयी कार्य है। आगे जब उन्हें घोंसले में नन्हें बच्चे दिखाई देते हैं, तब उनका हृदय बदल जाता है और वे अपना यह कठोर निर्णय छोड़ देते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा— घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?

उत्तर (संभावित)मुझे कहानी में ‘माँ’ का पात्र सबसे अच्छा लगा।माँ दयालु, सहृदय और समझदार हैं। वे चाहती हैं कि नन्ही गौरैयाँ घर में सुरक्षित रहें और इसीलिए वे हँसी-मजाक करके पिताजी के कठोर प्रयासों को रोकती रहती हैं।उनकी विनोदप्रियता और जीवों के प्रति करुणा बहुत प्रभावित करती है। (विद्यार्थी अपनी पसंद का पात्र चुनकर कारण लिख सकते हैं।)

(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?

उत्तरगौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया।यह स्थान ऊँचा, सुरक्षित और छिपा हुआ था, जहाँ बिल्ली या अन्य शत्रु आसानी से नहीं पहुँच सकते थे। साथ ही वहाँ धूप, वर्षा और हवा से भी बचाव था, इसलिए अंडे देने और बच्चे पालने के लिए वह उपयुक्त जगह थी।

(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।

उत्तरहाँ, पशु-पक्षी भी मनुष्यों की तरह परिवार और घर का महत्व समझते हैं।कहानी में गौरैयाँ बार-बार निकाले जाने पर भी अपने घोंसले में लौट आती हैं, क्योंकि वहाँ उनके अंडे और बच्चे थे।बच्चों की ‘चीं-चीं’ सुनते ही माँ-बाप गौरैया झट से उड़कर आते हैं और उनकी चोंचों में चुग्गा डालने लगते हैं – यह उनके पारिवारिक प्रेम और दायित्व-बोध को सिद्ध करता है।

(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?

उत्तरइस कथन से पिताजी का हठी, दृढ़निश्चयी और जिद्दी स्वभाव उभरकर आता है।वे एक बार जो ठान लेते हैं, उसे आसानी से छोड़ना नहीं चाहते और बार-बार असफल होने पर भी प्रयास करते रहते हैं।यद्यपि यह जिद कुछ अव्यावहारिक है, फिर भी इसमें उनके आत्मविश्वास और अपनी बात पर अड़े रहने का गुण भी दिखाई देता है।

(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया? (संकेत— कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)

उत्तरआरंभ में गौरैयाँ प्रसन्न होकर मजे से गाना (मल्हार) गाती थीं। पर जब पिताजी ने लगातार उन्हें परेशान किया, दरवाजे-रोशनदान बंद किए और घोंसला तोड़ने लगे, तब उनके व्यवहार में बदलाव आया।वे कुछ-कुछ दुबली और काली पड़ गईं और चहकना तथा गाना बंद कर दिया, चुपचाप दीवार पर गुमसुम बैठी रहतीं।यह बदलाव निरंतर डर, तनाव और घोंसला उजड़ने की आशंका के कारण आया, जिससे उनकी प्रसन्नता समाप्त हो गई।

(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।

उत्तर(क) सीधे खुले दरवाजे से अंदर घुसकर;(ख) किचन की ओर खुलने वाले दरवाजे से;(ग) दरवाजों के नीचे की थोड़ी-सी खाली जगह से;(घ) टूटे हुए शीशे वाले रोशनदान से।

(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?

उत्तरइस कहानी को घर का बालक (लेखक के रूप में ‘मैं’) सुना रहा है।यह बात इन वाक्यों से पता चलती है – “घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं— माँ, पिताजी और मैं”, तथा “पिताजी ने मुझे झिड़ककर कहा, ‘तू खड़ा क्या देख रहा है? जा, दोनों दरवाजे बंद कर दे!’” – यानी कहानी प्रथम पुरुष में, घर के बेटे की दृष्टि से कही गई है।

(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?

उत्तरमाँ समझती थीं कि गौरैयों ने घोंसला बनाकर अंडे दे दिए हैं, इसलिए वे अपने बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाएँगी।साथ ही, माँ स्वयं भी हृदय से चाहती थीं कि नन्ही गौरैयाँ घर में बनी रहें; इसीलिए वे बार-बार पिताजी को समझातीं कि ये नहीं जाएँगी और उन्हें तंग करना व्यर्थ है।

अनुमान और कल्पना से

(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?

उत्तर (संभावित)मैं उन्हें न भगाता, बल्कि शांति से अपना घोंसला बनाने देता।मैं उनके लिए पानी और थोड़ा दाना रख देता तथा बिल्ली आदि से उनकी रक्षा करता, ताकि वे सुरक्षित रहकर अपने बच्चे पाल सकें।इस प्रकार मैं प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ मिल-जुलकर रहने का सुख अनुभव करता।

(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों? (प्राणियों के नाम— चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)

उत्तर (संभावित)कुत्ता– घर के लोग सावधान हो जाते और या तो उसे पुचकारकर पालते या डरकर बाहर निकालते, क्योंकि वह आकार में बड़ा प्राणी है।मच्छर/मक्खी/कॉकरोच– लोग इन्हें हानिकारक मानकर तुरंत मारने या भगाने का प्रयास करते, क्योंकि ये बीमारी फैला सकते हैं।तितली– लोग प्रसन्न होते और उसे देखकर आनंदित होते, क्योंकि वह सुंदर एवं हानिरहित है। इस प्रकार व्यवहार प्राणी के स्वभाव और हानि-लाभ पर निर्भर करता है।

(ग) “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?

उत्तरलेखक (बालक) को घोंसले में से झाँकती नन्हीं-नन्हीं गौरैयों (बच्चों) को देखकर विस्मय हुआ।अब तक सब समझ रहे थे कि वहाँ केवल दो गौरैयाँ हैं; पर घोंसले में उनके नन्हें बच्चे निकल आना सबके लिए अप्रत्याशित था। इसी कारण लेखक हक्का-बक्का रह गया और देखता ही रह गया।

(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?

उत्तरमाँ स्वयं नहीं चाहती थीं कि नन्ही गौरैयों को घर से निकाला जाए।उन्हें पिताजी का बार-बार उछलना, ताली बजाना और लाठी घुमाना व्यर्थ तथा हास्यास्पद लगता था, इसलिए वे सहायता करने के बजाय मजाक करती और हँसती रहीं।उनकी हँसी में जीवों के प्रति करुणा और पिताजी के हठ पर हल्का व्यंग्य दोनों छिपे थे।

(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत— आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)

उत्तर (संभावित)मैंने बस-स्टॉप पर एक व्यक्ति को देखा जो बार-बार घड़ी देख रहा था और इधर-उधर टहल रहा था।उसके व्यवहार से मैंने अनुमान लगाया कि वह किसी जरूरी काम के लिए कहीं जल्दी पहुँचना चाहता होगा और बस के विलंब से चिंतित या व्याकुल होगा।(विद्यार्थी अपने अवलोकन के आधार पर उत्तर लिखें।)

(च) “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?

उत्तरघर– स्थायी निवास होता है, जहाँ अपने परिवार के लोग प्रेम और अपनेपन के साथ रहते हैं और जिस पर उनका अधिकार होता है।सराय– अस्थायी ठहरने का स्थान है, जहाँ अनजान यात्री थोड़े समय के लिए आते-जाते रहते हैं और किसी का स्थायी अधिकार नहीं होता।पिताजी अपने घर को सराय इसलिए कहते हैं क्योंकि वहाँ इतने जीव-जंतु बेरोक-टोक आते-जाते रहते हैं कि घर अपना-सा कम और सबका ठहराव-स्थल अधिक लगने लगा था।

संवाद और अभिनय

नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए— ये कल्पना एवं समूह-गतिविधियाँ हैं। नीचे संक्षिप्त नमूना-संवाद दिए गए हैं।

(क) नन्हीं दो गौरैया (बच्चे): “हम आ गई हैं! माँ, पिताजी, तुम कहाँ हो? हमें बहुत भूख लगी है। जल्दी आओ, हमें कुछ खिलाओ!”

(ख) घोंसले से झाँकती गौरैयाँ: “अरे देखो, यह आदमी ताली बजाकर कूद क्यों रहा है? कितना अजीब नाच रहा है! लगता है यह हमें डराना चाहता है, पर हम तो यहीं रहेंगे।”

(ग) पहली बार घर देखते समय: “यह जगह तो बड़ी अच्छी और सुरक्षित है। पंखे का गोला घोंसले के लिए बढ़िया रहेगा। क्यों न हम यहीं अपना घर बना लें?”

(घ) माँ-बाप और बच्चे: “डरो मत, बच्चो! हम आ गए हैं। यह लो दाना खाओ। अब कोई तुम्हें कुछ नहीं कहेगा, हम सब साथ-साथ रहेंगे।”

कहने के ढंग / क्रिया विशेषण

“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।” में ‘खिलखिलाकर’ क्रिया विशेषण है (कार्य कैसे किया गया, यह बताने वाला शब्द)। नीचे दिए रेखांकित शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”

वाक्यअध्यापक ने देर से आए छात्र को झिड़ककर अपनी सीट पर बैठने को कहा।

(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।

वाक्यडॉक्टर ने गंभीरता से रोगी को नियमित दवा लेने की सलाह दी।

(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।

वाक्यअपनी बात अनसुनी होते देख वह गुस्से में कमरे से बाहर चला गया।

अब इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए। (संकेत— धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि)

उदाहरण वाक्यधीरे से– उसने धीरे से दरवाजा खोला ताकि कोई जाग न जाए।चिल्लाकर– बच्चे मैदान में चिल्लाकर एक-दूसरे को बुला रहे थे।शरमाकर– पुरस्कार पाकर वह शरमाकर मुस्कुरा दी।फुसफुसाते हुए– दोनों मित्र कक्षा में फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे।

घर के प्राणी

कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे? (पहला उदाहरण पुस्तक में दिया गया है।)

प्राणीमनुष्यों जैसा व्यवहार/कार्य
(क) बिल्ली‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) चूहा (बूढ़ा)अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, जैसे उसे सर्दी लगती हो।
(ग) दूसरा चूहाबाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठना पसंद करता है, जैसे उसे गरमी लगती हो।
(घ) चमगादड़शाम पड़ते ही कमरों के आर-पार पर फैलाकर मानो कसरत करने लगते हैं।
(ङ) गौरैयाँमकान का निरीक्षण करती हैं, घोंसला बनाती हैं और मजे से बैठकर गाना (मल्हार) गाती हैं।

हेर-फेर मात्रा का

शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से अर्थ बदल जाता है। नीचे दिए शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

शब्दअर्थवाक्य
नाच / नाचा / नचानृत्य / नाचना (क्रिया) / नचवानामोर बारिश में सुंदर नाच दिखाता है। • वह मंच पर देर तक नाचा। • मदारी ने बंदर को खूब नचाया।
हार / हरा / हारापराजय/माला / हरे रंग का / पराजित हुआविजेता के गले में फूलों की हार डाली गई। • पेड़ों के हरा पत्ते सुंदर लगते हैं। • वह खेल में हारा पर हिम्मत नहीं हारी।
पिता / पीतापिताजी / पीना (क्रिया)मेरे पिता शिक्षक हैं। • वह रोज सवेरे दूध पीता है।
चूक / चुकभूल/गलती / समाप्त होनापरीक्षा में एक छोटी चूक भारी पड़ गई। • उसका धैर्य अब चुक गया था।
नीचा / नीचेनिम्न/कम ऊँचाई का / निचली ओरउसने सिर नीचा कर लिया। • किताब मेज के नीचे गिर गई।
सहसा / साहसअचानक / हिम्मतसहसा तेज आवाज सुनाई दी। • कठिनाई में साहस नहीं छोड़ना चाहिए।

हास्य-व्यंग्य

“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” – इस प्रकार बात को सीधे न कहकर उलटे या संकेतात्मक ढंग से कहना ‘व्यंग्य’ कहलाता है।

(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए। (ख) इनमें से कौन-से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं?

उत्तरहँसी आने वाले/व्यंग्य वाले वाक्य–• “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” (व्यंग्य) – माँ संकेत में कहती हैं कि पिताजी चिड़ियों को भी नहीं निकाल पाएँगे।• “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” (व्यंग्य) – पिताजी के उछलने का मजाक।• “चलो, दो तिनके तो निकल गए… अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!” (व्यंग्य) – पिताजी के व्यर्थ परिश्रम पर चुटकी।• “तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।” (व्यंग्य)(विद्यार्थी इनमें से चुनकर लिख सकते हैं तथा व्यंग्य वाले वाक्यों पर सही (✓) का चिह्न लगा सकते हैं।)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. लेखक के घर में कौन-कौन से प्राणी रहते थे?

उत्तरलेखक के घर में पक्षी (तोते, कौवे, गौरैयाँ), चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ, बर्रे और चींटियाँ रहती थीं।

2. गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया था?

उत्तरगौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया था।

3. पिताजी ने गौरैयों को निकालने के लिए कौन-कौन से उपाय किए?

उत्तरपिताजी ने ताली बजाई, ‘श…श’ किया, उछल-कूद की, लाठी से गोले को ठोका, दरवाजे बंद किए, उनके नीचे कपड़े ठूँसे, रोशनदान में कपड़ा भरा और अंत में स्टूल पर चढ़कर घोंसला तोड़ने का प्रयास किया।

4. पिताजी का दृष्टिकोण कब और क्यों बदल गया?

उत्तरजब घोंसला तोड़ते समय पिताजी ने देखा कि उसमें नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चे अपने माँ-बाप को पुकार रहे हैं, तब उनका हृदय द्रवित हो गया और दृष्टिकोण बदल गया। उन्होंने लाठी रख दी और मुसकराते रहे।

5. कहानी का नाम ‘दो गौरैया’ तथा पुस्तक का नाम ‘मल्हार’ क्यों रखा गया है?

उत्तरकहानी की मुख्य पात्र दो गौरैया हैं, इसलिए इसका नाम ‘दो गौरैया’ है। ‘मल्हार’ वर्षा ऋतु से जुड़ा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक राग है; कहानी में गौरैयों का प्रसन्न होकर गाना ‘मल्हार गाना’ कहा गया है और इसी राग के नाम पर पाठ्यपुस्तक का नाम भी रखा गया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. ‘दो गौरैया’ कहानी में माँ और पिताजी के स्वभाव की तुलना कीजिए।

उत्तरपिताजी हठी, जिद्दी और दृढ़निश्चयी हैं। एक बार गौरैयों को निकालने की ठान लेने पर वे बार-बार असफल होते हुए भी हार नहीं मानते और कठोर उपायों तक पहुँच जाते हैं।इसके विपरीत माँ दयालु, सहृदय, समझदार और विनोदप्रिय हैं। वे जीवों के प्रति करुणा रखती हैं और चाहती हैं कि गौरैयाँ घर में बनी रहें, इसलिए हँसी-मजाक करके पिताजी के प्रयासों को रोकती हैं।अंत में दोनों का हृदय बच्चों को देखकर पिघल जाता है – पिताजी मुसकराने लगते हैं और माँ दरवाजे खोल देती हैं। इस प्रकार भिन्न स्वभाव होते हुए भी दोनों में संवेदनशीलता समान रूप से विद्यमान है।

2. इस कहानी से हमें क्या संदेश/शिक्षा मिलती है?

उत्तरयह कहानी सिखाती है कि हमें पशु-पक्षियों और छोटे जीवों के प्रति दया एवं संवेदना रखनी चाहिए और उनके साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।पिताजी का घोंसला तोड़ने से रुक जाना यह बताता है कि निर्दोष प्राणियों का घर उजाड़ना कठोरता है, और सच्ची मनुष्यता करुणा में है।साथ ही गौरैयों का बार-बार लौट आना यह संदेश देता है कि अपने घर-परिवार के प्रति लगाव अटूट होता है और निरंतर प्रयास से लक्ष्य पाया जा सकता है।

3. कहानी में लेखक ने हास्य-व्यंग्य का प्रयोग किस प्रकार किया है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तरलेखक ने पूरी कहानी को हल्के-फुल्के हास्य और व्यंग्य के साथ बुना है। पिताजी का ताली बजाना, उछलना और लाठी घुमाना अपने आप में हास्यपूर्ण दृश्य उत्पन्न करता है।माँ के व्यंग्य-वाक्य इस हास्य को और बढ़ाते हैं, जैसे – “चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” और “दो तिनके तो निकल गए, अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!”पिताजी की हर असफलता और माँ की खिलखिलाहट के बीच कहानी हँसाती चलती है, पर अंत में बच्चों का दृश्य इस हास्य को कोमल संवेदना में बदल देता है – यही लेखक की कुशलता है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

नीचे दिए बहुविकल्पीय प्रश्न पाठ की पुनरावृत्ति एवं स्वमूल्यांकन के लिए हैं। सही विकल्प चुनिए।

1. ‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) भीष्म साहनी

(ग) महादेवी वर्मा

(घ) हरिशंकर परसाई

2. लेखक के घर में कुल कितने व्यक्ति रहते थे?

(क) दो

(ख) तीन

(ग) चार

(घ) पाँच

3. गौरैयों ने घर में अपना घोंसला कहाँ बनाया?

(क) आम के पेड़ पर

(ख) खिड़की पर

(ग) पंखे के गोले में

(घ) रोशनदान में

4. पिताजी घर को क्या कहते थे?

(क) महल

(ख) सराय

(ग) चिड़ियाघर

(घ) किला

5. गौरैयों के प्रति माँ का व्यवहार कैसा था?

(क) क्रोधपूर्ण

(ख) उदासीन

(ग) स्नेहपूर्ण एवं विनोदपूर्ण

(घ) भयभीत

6. ‘मल्हार’ क्या है?

(क) एक नदी का नाम

(ख) एक पक्षी का नाम

(ग) वर्षा ऋतु से जुड़ा एक शास्त्रीय राग

(घ) एक त्योहार

7. पिताजी ने अंततः गौरैयों का घोंसला तोड़ने का प्रयास किस पर चढ़कर किया?

(क) कुर्सी

(ख) सोफे

(ग) मेज

(घ) स्टूल

8. घोंसला तोड़ते समय अचानक कौन-सी आवाज आई?

(क) ‘गुटर-गूँ’

(ख) ‘चीं-चीं’

(ग) ‘श…श’

(घ) ‘म्याऊँ’

9. कहानी के अंत में पिताजी का व्यवहार कैसा हो गया?

(क) वे और क्रोधित हो गए

(ख) उन्होंने घर छोड़ दिया

(ग) वे गौरैयों को देखकर केवल मुसकराते रहे

(घ) उन्होंने घोंसला पूरी तरह तोड़ दिया

10. गौरैयाँ घर में किस-किस रास्ते से प्रवेश करती थीं?

(क) केवल मुख्य दरवाजे से

(ख) केवल खिड़की से

(ग) दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से

(घ) चिमनी से

उत्तर कुंजी: 1–(ख), 2–(ख), 3–(ग), 4–(ख), 5–(ग), 6–(ग), 7–(घ), 8–(ख), 9–(ग), 10–(ग)।

अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)

नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए— (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है; (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): पिताजी ने अंत में घोंसला तोड़ना बंद कर दिया।

कारण (R): उन्हें घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चे दिखाई दे गए।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। बच्चों को देखकर ही पिताजी का हृदय बदला।

2. अभिकथन (A): माँ पिताजी के प्रयासों में सहायता नहीं करती थीं।

कारण (R): माँ नहीं चाहती थीं कि गौरैयों को घर से निकाला जाए।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

3. अभिकथन (A): गौरैयाँ बार-बार घर लौट आती थीं।

कारण (R): उनके घोंसले में अंडे और बच्चे थे जिन्हें वे छोड़ नहीं सकती थीं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

4. अभिकथन (A): कुछ समय बाद गौरैयों ने चहकना और गाना बंद कर दिया।

कारण (R): गौरैयाँ ‘मल्हार’ राग सीख रही थीं।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है। उन्होंने चहकना निरंतर तंग किए जाने और तनाव के कारण बंद किया, न कि राग सीखने के लिए।

5. अभिकथन (A): पिताजी ने घर को सराय कहा।

कारण (R): घर में अनेक जीव-जंतु बेरोक-टोक आते-जाते और रहते थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?

‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक भीष्म साहनी हैं और यह कहानी (गद्य) विधा की रचना है। यह कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक ‘मल्हार’ का अध्याय 2 है।

‘दो गौरैया’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?

यह कहानी पशु-पक्षियों के प्रति दया, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश देती है। यह सिखाती है कि किसी निर्दोष प्राणी का घर उजाड़ना कठोरता है और सच्ची मनुष्यता संवेदना में है। साथ ही यह घर-परिवार के प्रति अटूट लगाव को भी दर्शाती है।

कहानी के अंत में पिताजी मुसकराने क्यों लगे?

जब पिताजी ने घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चों को अपने माँ-बाप को पुकारते देखा, तो उनका कठोर हृदय पिघल गया। उन्होंने लाठी रख दी और गौरैयों के परिवार को मिलते देखकर वे संतोष एवं स्नेह से केवल मुसकराते रहे।

पुस्तक एवं कहानी में ‘मल्हार’ शब्द का क्या अर्थ है?

‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है, जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। कहानी में गौरैयों के प्रसन्न होकर चहचहाने को ‘मल्हार गाना’ कहा गया है, और इसी राग के नाम पर पाठ्यपुस्तक का नाम भी ‘मल्हार’ रखा गया है।

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