कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 2 – दो गौरैया (कहानी) प्रश्न-उत्तर एवं सार (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (गद्य) के अध्याय 2 ‘दो गौरैया’ (लेखक – भीष्म साहनी) का पूरा समाधान देता है – पाठ का सार, शब्दार्थ, अभ्यास की सभी गतिविधियों के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – भीष्म साहनी
भीष्म साहनी (सन् 1915–2003) हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन की पीड़ा और मानवीय मूल्यों की मार्मिक अभिव्यक्ति की है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया था। बच्चों के लिए उन्होंने ‘गुलेल का खेल’ आदि कई कहानियाँ लिखी हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जीवंत है। ‘दो गौरैया’ कहानी में उन्होंने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से मनुष्य और पशु-पक्षियों के सहअस्तित्व तथा बदलते दृष्टिकोण को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।
पाठ का सार
‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की एक रोचक एवं हास्य-व्यंग्य से भरी कहानी है, जिसे घर का एक बालक सुना रहा है। उसके घर में केवल तीन व्यक्ति – माँ, पिताजी और वह स्वयं – रहते हैं, फिर भी पिताजी कहते हैं कि यह घर तो सराय बना हुआ है। आँगन के आम के पेड़ पर तोते, कौवे और तरह-तरह की गौरैयाँ डेरा डाले रहती हैं। घर के भीतर भी चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ, बर्रे और चींटियों की मानो फौज छावनी डाले रहती है।
एक दिन दो गौरैया घर में घुस आती हैं और मकान का निरीक्षण करने लगती हैं। दो दिन बाद वे बैठक की छत के पंखे के गोले में अपना घोंसला बना लेती हैं और मजे से गाना गाने लगती हैं। माँ हँसकर कहती हैं कि अब ये नहीं उड़ेंगी, पर पिताजी को गुस्सा आ जाता है और वे ताली बजाकर, ‘श…श’ करके, लाठी से ठोककर और दरवाजे बंद करके गौरैयों को बार-बार बाहर निकालने का प्रयास करते हैं। माँ हर बार व्यंग्य और मजाक करती हुई हँसती रहती हैं, जिससे पिताजी और भी झुँझला उठते हैं।
गौरैयाँ कभी दरवाजे के नीचे से तो कभी टूटे शीशे वाले रोशनदान से फिर-फिर भीतर आ जाती हैं। दिन में बाहर निकाल दी जातीं, पर रात को फिर घुस आतीं। अंत में तंग आकर पिताजी स्टूल पर चढ़कर लाठी से घोंसला तोड़ने लगते हैं। इसी बीच गौरैयाँ दुबली और काली पड़ जाती हैं और चहकना भी बंद कर देती हैं।
जैसे ही पिताजी घोंसला लपेटने लगते हैं, अचानक पंखे के गोले के ऊपर से ‘चीं-चीं’ की आवाज आती है – घोंसले में नन्हीं-नन्हीं गौरैयों के बच्चे थे, जो अपने माँ-बाप को पुकार रहे थे! यह देखकर पिताजी के हाथ ठिठक जाते हैं। वे चुपचाप लाठी एक ओर रखकर कुर्सी पर बैठ जाते हैं। माँ सभी दरवाजे खोल देती हैं और गौरैयों के माँ-बाप झट से उड़कर भीतर आकर अपने बच्चों की चोंचों में चुग्गा डालने लगते हैं। कमरे में फिर से शोर होने लगता है, पर इस बार पिताजी उन्हें देख-देखकर केवल मुसकराते रहते हैं। इस प्रकार यह कहानी हास्य के साथ-साथ संवेदना और बदलते दृष्टिकोण का सुंदर संदेश देती है।
शब्दार्थ
| कठिन शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सराय | यात्रियों के ठहरने का स्थान, धर्मशाला |
| डेरा डालना | अस्थायी रूप से ठहरना, रहने लगना |
| निरीक्षण | ध्यान से देख-परखकर जाँच करना |
| रोशनदान | दीवार के ऊपरी भाग में बना झरोखा जिससे हवा-प्रकाश आता है |
| बिछावन | बिछाने की वस्तु, बिस्तर |
| व्यंग्य | हँसी-मजाक या उपहास के द्वारा किसी कमी/विडंबना को उजागर करना |
| धमा-चौकड़ी | उछल-कूद और शोरगुल |
| अँगीठी | आग जलाकर सेंकने या पकाने का छोटा चूल्हा |
| कसरत | व्यायाम |
| छावनी | सेना के ठहरने का स्थान |
| हुक्म | आदेश |
| झिड़कना | डाँटकर बात करना, फटकारना |
| खदेड़ना | भगाना, दौड़ाना |
| सहनशीलता | सहने का गुण, धैर्य |
| स्टूल | बिना पीठ की ऊँची चौकी |
| झालर | सजावट के लिए लटकाई जाने वाली लड़ी |
| थिगली | कपड़े का छोटा टुकड़ा, पैबंद |
| गुमसुम | चुपचाप, उदास और शांत |
| अवाक् | हक्का-बक्का, चकित होकर बिना बोले |
| चुग्गा | पक्षियों का दाना-चारा |
| मुसकराना | हल्के-से हँसना, मुस्कुराना |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—
• घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
• घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
• पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
• घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
(2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
• माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
• लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
• जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
• मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
• दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
• पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
• दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
• माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
• माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
• माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
• माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
• माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
• दूसरों पर निर्भर रहना
• असफलताओं से हार मान लेना
• अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
• संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | सबसे उपयुक्त अर्थ |
|---|---|---|
| 1. | वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! | पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था। |
| 2. | आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। | आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं। |
| 3. | वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। | चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते। |
| 4. | वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। | पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| 5. | पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। | पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए। |
| 6. | इतने में रात पड़ गई। | कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया। |
| 7. | जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। | गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों। |
(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
सोच-विचार के लिए
पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा— घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया? (संकेत— कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)
(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों? (प्राणियों के नाम— चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
(ग) “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत— आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
(च) “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
संवाद और अभिनय
नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए— ये कल्पना एवं समूह-गतिविधियाँ हैं। नीचे संक्षिप्त नमूना-संवाद दिए गए हैं।
(क) नन्हीं दो गौरैया (बच्चे): “हम आ गई हैं! माँ, पिताजी, तुम कहाँ हो? हमें बहुत भूख लगी है। जल्दी आओ, हमें कुछ खिलाओ!”
(ख) घोंसले से झाँकती गौरैयाँ: “अरे देखो, यह आदमी ताली बजाकर कूद क्यों रहा है? कितना अजीब नाच रहा है! लगता है यह हमें डराना चाहता है, पर हम तो यहीं रहेंगे।”
(ग) पहली बार घर देखते समय: “यह जगह तो बड़ी अच्छी और सुरक्षित है। पंखे का गोला घोंसले के लिए बढ़िया रहेगा। क्यों न हम यहीं अपना घर बना लें?”
(घ) माँ-बाप और बच्चे: “डरो मत, बच्चो! हम आ गए हैं। यह लो दाना खाओ। अब कोई तुम्हें कुछ नहीं कहेगा, हम सब साथ-साथ रहेंगे।”
कहने के ढंग / क्रिया विशेषण
“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।” में ‘खिलखिलाकर’ क्रिया विशेषण है (कार्य कैसे किया गया, यह बताने वाला शब्द)। नीचे दिए रेखांकित शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
अब इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए। (संकेत— धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि)
घर के प्राणी
कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे? (पहला उदाहरण पुस्तक में दिया गया है।)
| प्राणी | मनुष्यों जैसा व्यवहार/कार्य |
|---|---|
| (क) बिल्ली | ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है। |
| (ख) चूहा (बूढ़ा) | अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, जैसे उसे सर्दी लगती हो। |
| (ग) दूसरा चूहा | बाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठना पसंद करता है, जैसे उसे गरमी लगती हो। |
| (घ) चमगादड़ | शाम पड़ते ही कमरों के आर-पार पर फैलाकर मानो कसरत करने लगते हैं। |
| (ङ) गौरैयाँ | मकान का निरीक्षण करती हैं, घोंसला बनाती हैं और मजे से बैठकर गाना (मल्हार) गाती हैं। |
हेर-फेर मात्रा का
शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से अर्थ बदल जाता है। नीचे दिए शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।
| शब्द | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| नाच / नाचा / नचा | नृत्य / नाचना (क्रिया) / नचवाना | मोर बारिश में सुंदर नाच दिखाता है। • वह मंच पर देर तक नाचा। • मदारी ने बंदर को खूब नचाया। |
| हार / हरा / हारा | पराजय/माला / हरे रंग का / पराजित हुआ | विजेता के गले में फूलों की हार डाली गई। • पेड़ों के हरा पत्ते सुंदर लगते हैं। • वह खेल में हारा पर हिम्मत नहीं हारी। |
| पिता / पीता | पिताजी / पीना (क्रिया) | मेरे पिता शिक्षक हैं। • वह रोज सवेरे दूध पीता है। |
| चूक / चुक | भूल/गलती / समाप्त होना | परीक्षा में एक छोटी चूक भारी पड़ गई। • उसका धैर्य अब चुक गया था। |
| नीचा / नीचे | निम्न/कम ऊँचाई का / निचली ओर | उसने सिर नीचा कर लिया। • किताब मेज के नीचे गिर गई। |
| सहसा / साहस | अचानक / हिम्मत | सहसा तेज आवाज सुनाई दी। • कठिनाई में साहस नहीं छोड़ना चाहिए। |
हास्य-व्यंग्य
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” – इस प्रकार बात को सीधे न कहकर उलटे या संकेतात्मक ढंग से कहना ‘व्यंग्य’ कहलाता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए। (ख) इनमें से कौन-से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं?
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. लेखक के घर में कौन-कौन से प्राणी रहते थे?
2. गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया था?
3. पिताजी ने गौरैयों को निकालने के लिए कौन-कौन से उपाय किए?
4. पिताजी का दृष्टिकोण कब और क्यों बदल गया?
5. कहानी का नाम ‘दो गौरैया’ तथा पुस्तक का नाम ‘मल्हार’ क्यों रखा गया है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. ‘दो गौरैया’ कहानी में माँ और पिताजी के स्वभाव की तुलना कीजिए।
2. इस कहानी से हमें क्या संदेश/शिक्षा मिलती है?
3. कहानी में लेखक ने हास्य-व्यंग्य का प्रयोग किस प्रकार किया है? उदाहरण देकर समझाइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
नीचे दिए बहुविकल्पीय प्रश्न पाठ की पुनरावृत्ति एवं स्वमूल्यांकन के लिए हैं। सही विकल्प चुनिए।
1. ‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद
(ख) भीष्म साहनी
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) हरिशंकर परसाई
2. लेखक के घर में कुल कितने व्यक्ति रहते थे?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) पाँच
3. गौरैयों ने घर में अपना घोंसला कहाँ बनाया?
(क) आम के पेड़ पर
(ख) खिड़की पर
(ग) पंखे के गोले में
(घ) रोशनदान में
4. पिताजी घर को क्या कहते थे?
(क) महल
(ख) सराय
(ग) चिड़ियाघर
(घ) किला
5. गौरैयों के प्रति माँ का व्यवहार कैसा था?
(क) क्रोधपूर्ण
(ख) उदासीन
(ग) स्नेहपूर्ण एवं विनोदपूर्ण
(घ) भयभीत
6. ‘मल्हार’ क्या है?
(क) एक नदी का नाम
(ख) एक पक्षी का नाम
(ग) वर्षा ऋतु से जुड़ा एक शास्त्रीय राग
(घ) एक त्योहार
7. पिताजी ने अंततः गौरैयों का घोंसला तोड़ने का प्रयास किस पर चढ़कर किया?
(क) कुर्सी
(ख) सोफे
(ग) मेज
(घ) स्टूल
8. घोंसला तोड़ते समय अचानक कौन-सी आवाज आई?
(क) ‘गुटर-गूँ’
(ख) ‘चीं-चीं’
(ग) ‘श…श’
(घ) ‘म्याऊँ’
9. कहानी के अंत में पिताजी का व्यवहार कैसा हो गया?
(क) वे और क्रोधित हो गए
(ख) उन्होंने घर छोड़ दिया
(ग) वे गौरैयों को देखकर केवल मुसकराते रहे
(घ) उन्होंने घोंसला पूरी तरह तोड़ दिया
10. गौरैयाँ घर में किस-किस रास्ते से प्रवेश करती थीं?
(क) केवल मुख्य दरवाजे से
(ख) केवल खिड़की से
(ग) दरवाजों के नीचे की जगह और टूटे रोशनदान से
(घ) चिमनी से
अभिकथन-कारण (Assertion–Reason)
नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए— (क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है; (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं; (ग) A सही, R गलत; (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): पिताजी ने अंत में घोंसला तोड़ना बंद कर दिया।
कारण (R): उन्हें घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चे दिखाई दे गए।
2. अभिकथन (A): माँ पिताजी के प्रयासों में सहायता नहीं करती थीं।
कारण (R): माँ नहीं चाहती थीं कि गौरैयों को घर से निकाला जाए।
3. अभिकथन (A): गौरैयाँ बार-बार घर लौट आती थीं।
कारण (R): उनके घोंसले में अंडे और बच्चे थे जिन्हें वे छोड़ नहीं सकती थीं।
4. अभिकथन (A): कुछ समय बाद गौरैयों ने चहकना और गाना बंद कर दिया।
कारण (R): गौरैयाँ ‘मल्हार’ राग सीख रही थीं।
5. अभिकथन (A): पिताजी ने घर को सराय कहा।
कारण (R): घर में अनेक जीव-जंतु बेरोक-टोक आते-जाते और रहते थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक कौन हैं और यह किस विधा की रचना है?
‘दो गौरैया’ कहानी के लेखक भीष्म साहनी हैं और यह कहानी (गद्य) विधा की रचना है। यह कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक ‘मल्हार’ का अध्याय 2 है।
‘दो गौरैया’ कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
यह कहानी पशु-पक्षियों के प्रति दया, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश देती है। यह सिखाती है कि किसी निर्दोष प्राणी का घर उजाड़ना कठोरता है और सच्ची मनुष्यता संवेदना में है। साथ ही यह घर-परिवार के प्रति अटूट लगाव को भी दर्शाती है।
कहानी के अंत में पिताजी मुसकराने क्यों लगे?
जब पिताजी ने घोंसले में नन्हें-नन्हें गौरैयों के बच्चों को अपने माँ-बाप को पुकारते देखा, तो उनका कठोर हृदय पिघल गया। उन्होंने लाठी रख दी और गौरैयों के परिवार को मिलते देखकर वे संतोष एवं स्नेह से केवल मुसकराते रहे।
पुस्तक एवं कहानी में ‘मल्हार’ शब्द का क्या अर्थ है?
‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है, जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। कहानी में गौरैयों के प्रसन्न होकर चहचहाने को ‘मल्हार गाना’ कहा गया है, और इसी राग के नाम पर पाठ्यपुस्तक का नाम भी ‘मल्हार’ रखा गया है।
