कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 7 — मत बाँधो प्रश्न उत्तर और भावार्थ

मत बाँधो प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 7 की कविता का भावार्थ, शब्दार्थ, मिलान, भाषा-अभ्यास, काल परिवर्तन और रचनात्मक कार्यों के नमूने पढ़ें।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार अध्याय: 7 कवयित्री: महादेवी वर्मा विधा: कविता स्रोत प्रति: पुनर्मुद्रण 2026–27

स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 7 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 91–104, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।

कवयित्री परिचय – महादेवी वर्मा

हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभ मानी जाती हैं तथा अपनी करुणा एवं वेदना से भरी रचनाओं के कारण उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ भी कहा जाता है। बच्चों के लिए उन्होंने बारहमासा, आज खरीदेंगे हम ज्वाला, अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी जैसी अनेक कविताएँ लिखीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावपूर्ण गद्य – मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ तथा पथ के साथी की भी रचना की; उनके गद्य के चरित्र पाठकों को सदा याद रह जाते हैं। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत एवं दीपशिखा उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं। सन् 1987 में उनका निधन हुआ।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता सपनों की स्वतंत्रता का संदेश देती है। कवयित्री आग्रह करती हैं कि किसी के सपनों के पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए।

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!

सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!
सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!

मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो!

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
— महादेवी वर्मा

भावार्थ

महादेवी वर्मा सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह करती हैं। ‘पंख’ उड़ान और संभावना की छवि है; ‘पंख काटना’ कल्पना और आकांक्षा को रोकना है। सौरभ के ऊपर फैलने, बीज के धूलि में गिरने, धरती पर अग्नि और गगन में धूम के बिंब सपनों की विशेष गति समझाते हैं। ये काव्य-बिंब हैं, सुगंध या बीज के व्यवहार का सम्पूर्ण वैज्ञानिक नियम नहीं।

सपना ऊपर उठकर मुक्त विचरण भी कर सकता है और आँखों/धरती पर लौट भी सकता है। अध्ययन के भाव में आरोहण ऊँची कल्पना, अवरोहण उसे व्यवहार में लाने का संकेत है। तारों, मेघों के रंग और किरणों की दीप्ति से समृद्ध सपना धरती को सुंदर बनाने का शिल्प सिखाता है। ‘स्वर्ग’ यहाँ सुखद, सहयोगी और संवेदनशील संसार की कल्पना है। सपनों को अवसर और प्रयास से जोड़ने की प्रेरणा है; हर सपना निश्चित रूप से पूरा होने की गारंटी नहीं।

आरोहण और अवरोहण — कविता का अध्ययन-संकेत

↑ आरोहण: ऊपर उठना
नई कल्पना • ऊँचा लक्ष्य • संभावना

↓ अवरोहण: नीचे/व्यवहार में लौटना
योजना • कार्य • जीवन में उपयोग

कविता में सपनों की दोनों गतियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। यह भाव समझने का संकेत है, भौतिक उड़ान का नक्शा नहीं।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सपनेस्वप्न, कल्पनाएँ, आकांक्षाएँ
पंखपर, उड़ने का साधन
गतिचाल, प्रवाह, बढ़ने की शक्ति
सौरभसुगंध, खुशबू
नभआकाश, गगन
धूलिधूल, मिट्टी
अग्निआग
धूमधुआँ
गगनआकाश, नभ
मँडरानाचारों ओर घूमना/फैलना
आरोहणनीचे से ऊपर की ओर जाना, चढ़ना
अवरोहणऊपर से नीचे की ओर आना, उतरना
मुक्तस्वतंत्र, बंधनरहित
विचरणघूमना-फिरना, भ्रमण करना
मेघबादल
किरणप्रकाश की रेखा, रश्मि
दीप्तिचमक, प्रकाश, आभा
भू / भूमिधरती, पृथ्वी
शिल्पकारीगरी, कला, रचना-कौशल
स्वर्गसुखद स्थान, सुख-शांति का लोक

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?

• सपने मात्र कल्पनाएँ हैं

• सपनों को भूल जाना चाहिए

• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए

• सपने देखना अच्छी बात है

उत्तर• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए (तथा • सपने देखना अच्छी बात है)।कविता का मुख्य भाव यही है कि सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए – कवयित्री बार-बार सपनों के पंख न काटने तथा उनकी गति न बाँधने का आग्रह करती हैं, साथ ही सपने देखना एक सकारात्मक, अच्छी बात भी मानती हैं।

2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?

• प्रेम की

• शिक्षा की

• सपनों की

• अधिकारों की

उत्तर• सपनों की।पूरी कविता सपनों (स्वप्नों एवं कल्पनाओं) की स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश देती है।

3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं

• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं

• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं

• सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं

उत्तर• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं (तथा • सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं)।पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के विशाल आकाश में भ्रमण कराते हैं – इसीलिए सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना की गई है।

4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?

• जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो

• जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो

• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो

• जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों

उत्तर• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो (तथा • जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों)।यहाँ ‘स्वर्ग’ का अर्थ कोई भौतिक धन-वैभव वाला स्थान नहीं, बल्कि वह सुखद संसार है जहाँ आपसी सहयोग, सद्भाव एवं संवेदनशीलता हो।

5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?

• वह बहुत तेजी से उड़ सकता है

• वह और गहरा हो सकता है

• उसकी उड़ान रुक सकती है

• वह बढ़कर पौधा बन सकता है

उत्तर• उसकी उड़ान रुक सकती है (तथा • वह बढ़कर पौधा बन सकता है)।कविता के संदर्भ में धूल में गिरा बीज नभ में नहीं उड़ पाता – अर्थात् उसकी उड़ान रुक जाती है। वहीं दूसरी ओर, अनुकूल परिस्थिति मिलने पर वही बीज बढ़कर पौधा भी बन सकता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

सुझावयह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। अपने उत्तर का कारण कविता की पंक्तियों के आधार पर बताइए – जैसे ‘सपनों की स्वतंत्रता’ इसलिए चुना क्योंकि कवयित्री बार-बार ‘मत बाँधो’ कहती हैं। मित्रों के अलग उत्तर सुनकर अपने तर्क की पुष्टि या पुनर्विचार कीजिए।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) सौरभ का नभ में फैलना और बीज का धूलि में गिरना अलग दिशाओं की काव्य-छवियाँ हैं। इनके माध्यम से कवयित्री सपनों की विशेषता समझाती हैं: उनमें उठने और लौटने दोनों की संभावना है। बीज की छवि का अर्थ यह नहीं कि मिट्टी में गिरा बीज निरर्थक हो गया।

(ख) मुक्त गगन में विचरण करता सपना कल्पना की ऊँचाइयों तक पहुँचता है। रंग और दीप्ति लेकर धरती पर लौटना नए अनुभव और रचना से जीवन सुंदर बनाने का भाव है। यह कल्पनाशील मानवीकरण है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनी कुछ पंक्तियाँ (स्तंभ 1) तथा उनके भाव/संदर्भ (स्तंभ 2) नीचे दिए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।

क्रमस्तंभ 1 (पंक्ति)सही भाव (स्तंभ 2)
1.इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। (स्तंभ 2 का बिंदु 3)
2.सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है!सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। (बिंदु 5)
3.इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। (बिंदु 1)
4.नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो!सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। (बिंदु 2)
5.स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। (बिंदु 4)

सोच-विचार के लिए

(क) ‘मत बाँधो’ उन लोगों से कहा गया होगा जो किसी की कल्पना और संभावना सीमित करते हैं। समाज, संस्था या बड़े इसका संदर्भ हो सकते हैं; सभी माता-पिता बच्चों के सपने रोकते हैं, ऐसा निष्कर्ष नहीं।

(ख) सपनों को विचार और व्यवहार दोनों में बढ़ने का अवसर मिले, इसलिए गति न बाँधने का आग्रह है।

(ग) सपने बदल सकते हैं, दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं और नए काम का आधार बन सकते हैं। उनका ‘कभी समाप्त न होना’ या ‘हमेशा पूरा होना’ निश्चित नियम नहीं।

(घ) नमूना: पुस्तकालय बनाने का विचार ऊँची आकांक्षा था; पुस्तकों का संग्रह और व्यवस्था उसकी व्यवहार में वापसी। शाब्दिक उदाहरण में पहाड़ पर चढ़ना आरोहण और उतरना अवरोहण है।

(ङ) विचार का नमूना: योजना और सहयोग से हमारा छोटा पाठक-समूह शुरू हुआ। सपना व्यवहार में उतरा; केवल कल्पना से नहीं, काम करने से। अपने अनुभव और असहमति भी कारण सहित लिख सकते हैं।

शीर्षक

कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।

उत्तरमैं इस कविता को ‘सपनों की उड़ान’ अथवा ‘मुक्त सपने’ नाम देना चाहूँगा/चाहूँगी।यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि पूरी कविता का मुख्य भाव सपनों को स्वतंत्र रखने और उनकी उड़ान न रोकने का है। यह शीर्षक कविता के केंद्रीय संदेश – सपनों की स्वतंत्रता – को सीधे व्यक्त करता है।

अनुमान और कल्पना से

(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

उत्तरमैं अपने नए संसार में रखना चाहूँगा/चाहूँगी – प्रेम, समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण, परस्पर सहयोग एवं सद्भाव, क्योंकि इन्हीं से संसार सुखद एवं स्वर्ग-समान बनता है।नहीं रखना चाहूँगा/चाहूँगी – युद्ध, भेदभाव, हिंसा, अन्याय, प्रदूषण एवं अशिक्षा, क्योंकि ये मनुष्य की उन्नति एवं शांति में बाधक हैं।

(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा?

उत्तरमैं चित्रकला (अथवा संगीत/लेखन) सीखना चाहूँगा/चाहूँगी।इससे मेरी कल्पनाशीलता बढ़ेगी, मन में सकारात्मकता आएगी और मैं अपने विचारों एवं भावनाओं को सुंदर रूप में व्यक्त कर सकूँगा/सकूँगी। कला से जीवन में आनंद, धैर्य एवं सौंदर्य-दृष्टि विकसित होती है।

(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?

उत्तरयदि अवसर मिले तो मैं अपने बीते समय में और अधिक अनुशासन एवं नियमित अध्ययन करता/करती, समय बर्बाद न करता/करती, अपने माता-पिता एवं शिक्षकों का अधिक आदर करता/करती तथा अच्छी आदतें पहले ही अपनाता/अपनाती।साथ ही उन गलतियों से बचता/बचती जिनसे किसी को कष्ट हुआ। ऐसा करने से मेरा वर्तमान और भी बेहतर होता।

(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि)

उत्तरयदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने (साकार होने) के लिए चाहिए – धूप अर्थात् कठोर परिश्रम, पानी अर्थात् लगन एवं निरंतर अभ्यास, उपजाऊ मिट्टी अर्थात् उचित अवसर एवं वातावरण।इसके साथ धैर्य, आत्मविश्वास, सही मार्गदर्शन और परिवार-समाज का सहयोग भी आवश्यक है। इन्हीं के मिलने पर सपना रूपी बीज बढ़कर फलदायी वृक्ष बनता है।

(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?

उत्तरजैसे अच्छे विचारों से संसार सुंदर एवं स्वर्ग-समान बनता है, वैसे ही हानिकारक विचारों के आधार पर किए कार्य समाज को नुकसान पहुँचा सकते हैं; नींद में आया डरावना सपना अपने-आप बुरा कर्म नहीं – संसार नरक-समान बन जाता है।बुरे विचारों से बचने के लिए अच्छी संगति रखनी चाहिए, सद्ग्रंथ पढ़ने चाहिए, सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए, मन को रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहिए तथा बड़ों एवं शिक्षकों से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?

उत्तरयदि सबको सपने देखने एवं पूरा करने की स्वतंत्रता मिले तो दुनिया में नए-नए आविष्कार होंगे, हर व्यक्ति अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ेगा और समाज प्रगतिशील, सुखी एवं रचनात्मक बनेगा।उस दुनिया में समानता, परस्पर सम्मान, स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी, शिक्षा एवं सहयोग जैसी बातें सबसे महत्वपूर्ण होंगी, ताकि एक की स्वतंत्रता दूसरे के लिए बाधा न बने।

(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?

उत्तरमेरे विचार से यह एक विनम्र आग्रह एवं प्रार्थना है, जिसमें थोड़ा सुझाव का भाव भी है। कवयित्री किसी को कठोरता से आदेश नहीं देतीं, बल्कि कोमलता से अनुरोध करती हैं।यह बात उन सभी लोगों से कही जा रही है जो दूसरों के सपनों, कल्पनाओं एवं स्वतंत्रता पर रोक लगाते हैं – विशेषकर बड़ों, समाज एवं उन सबसे, जिनके हाथ में किसी की उड़ान सीमित करने की शक्ति है।

पृष्ठ 94 मिलान-कुंजी: 1→3, 2→5, 3→1, 4→2, 5→4।

कविता की रचना

(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।

क्रमकविता की विशेषतासही पंक्ति
1.एक-दूसरे के विपरीत अर्थवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है।इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! (आरोहण × अवरोहण)
2.एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है।नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! (‘मत’ की पुनरावृत्ति)
3.समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है।दीप्ति लिए भू पर आयेगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! (भू = भूमि)
4.प्रश्न पूछा गया है।वह नभ में कब उड़ पाता है?
5.संबोधन का प्रयोग किया गया है।इन सपनों के पंख न काटो
6.सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है (मानवीकरण)।स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!

पृष्ठ 96 विशेषता-मिलान: 1→2, 2→5, 3→6, 4→1, 5→4, 6→3। (क) में चित्रात्मकता, प्रकृति-बिंब, पुनरावृत्ति, प्रश्न और मानवीकरण की सूची बनाकर साझा करें।

शब्दों की बात

(क) आरोहण–अवरोहण

  1. पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
  2. नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
  3. बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखना अवरोहण क्रम कहलाता है।

अपने वाक्य: यात्रियों ने पहाड़ी पर आरोहण किया। चोटी से अवरोहण करते समय वे सावधानी से चले।

(ख) समानार्थी से पंक्ति

नभ/गगन के स्थान पर आकाश, अंबर, आसमान, व्योम। पुनर्लेखन के नमूने: ‘वह अंबर में कब उड़ पाता है?’ ‘धूम आकाश में मँडराता है।’ अर्थ समान है, पर शब्द के आकार से लय बदलती है; समूह में बोलकर सुनें और जरूरी समायोजन करें। ये बदली पंक्तियाँ हैं, मूल उद्धरण नहीं।

(ग) ‘मत’ के साथ क्रियाएँ

मत डरो, मत घबराओ, मत झगड़ो, मत भूलो, मत तोड़ो। प्रत्येक निषेध का संदर्भ जरूरी है।

(घ) बाँधने से संबंधित क्रियाएँ

जोड़ना, कसना, लपेटना, गाँठ लगाना, नत्थी करना, पिरोना। उदाहरण: उसने रस्सियों को जोड़ दिया। उपहार पर रिबन की गाँठ लगाई। इन क्रियाओं के सभी प्रयोग एक-दूसरे के पूर्ण पर्याय नहीं।

(ङ) उलटकर अर्थवाला शब्द

मत→तम (अँधेरा); कब→बक (‘बकना’ का क्रिया-रूप, बोलने का अर्थ); अक्षर/मात्रा के संयोजन को समझकर सदा→दास भी देख सकते हैं। हर परिणाम का मान्य अर्थ जाँचें। ‘नभ→भन’, ‘रंग→गंर’ और ‘नदी→दीन’ को इस अभ्यास के स्पष्ट मानक उत्तर न लिखें—अंतिम दो में सही उलटाव भी नहीं।

काल परिवर्तन

पुस्तक के उदाहरण में ‘उड़ गया है’ भूत की पूर्ण घटना बताता है। सीधे भूतकाल के लिए ‘उड़ गया’ भी उचित है। नमूने:

वर्तमानभूतभविष्य
सौरभ उड़ जाता है नभ में।सौरभ उड़ गया नभ में।सौरभ उड़ जाएगा नभ में।
फिर वह लौट कहाँ आता है?फिर वह लौट कहाँ आया?फिर वह लौट कहाँ आएगा?
बीज धूलि में गिर जाता जो।बीज धूलि में गिर गया जो।बीज धूलि में गिर जाएगा जो।
वह नभ में कब उड़ पाता है?वह नभ में कब उड़ पाया?वह नभ में कब उड़ पाएगा?
अग्नि सदा धरती पर जलती है।अग्नि सदा धरती पर जलती थी।अग्नि सदा धरती पर जलेगी।
धूम गगन में मँडराता है।धूम गगन में मँडराता था।धूम गगन में मँडराएगा।
सपनों में दोनों ही गति हैं।सपनों में दोनों ही गति थीं।सपनों में दोनों ही गति होंगी।
उड़कर आँखों में आता है।उड़कर आँखों में आया था।उड़कर आँखों में आएगा।

ये काल-अभ्यास के बदले रूप हैं; मूल कविता का पाठ नहीं। कविता की पंक्ति का विन्यास साधारण गद्य से अलग हो सकता है।

शब्दकोश से

‘शिल्प’ के कई अर्थ हैं। इस कविता में संसार सुंदर बनाने की कला/रचना-कौशल का अर्थ सबसे उपयुक्त है। संबंधित शब्द:

पुस्तक का समूहअर्थ
1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पक/शिल्पकारीशिल्प से चीजें बनाने वाला / शिल्प करने से संबंधित रूप; प्रसंग अनुसार शब्दकोश देखें।
2. शिल्पकलाहस्तकला और वस्तु-निर्माण की कला
3. शिल्पकौशलकारीगरी में दक्षता
4. शिल्पगृह/शिल्पगेहशिल्प-कार्य का घर/स्थान
5. शिल्पविद्याशिल्प-संबंधी ज्ञान
6. शिल्पशाला/शिल्पालयशिल्प का कार्य या अध्ययन करने का स्थान

आपकी बात (पाठ से आगे)

आपकी बात — तीन नमूने

(क) गाँठ बाँधना, फीता बाँधना, पट्टी बाँधना और आशा बाँधना—शाब्दिक तथा लाक्षणिक प्रयोग अलग हैं। (ख) घर में काम बाँटना, पड़ोस में सफाई और सहयोग, विद्यालय में सभी को बोलने/सीखने का अवसर देना सुखद परिवेश बना सकते हैं। (ग) मेरा नमूना सपना पुस्तक-पाठक समूह बनाना है ताकि साथी मिलकर पढ़ें। अपने लक्ष्य और अनुभव के अनुसार लिखें।

चर्चा-परिचर्चा

एक साझा सपना चुनें—जैसे साफ विद्यालय। उसमें सहमति से साथियों को जोड़ें; काम बाँटें, सुझाव सुनें और परिणाम देखें। किसी को अपना सपना अपनाने के लिए मजबूर न करें।

सृजन (क) विराम चिह्न का फेरबदल

‘रोको मत, जाने दो’: जाने की अनुमति। ‘रोको, मत जाने दो’: जाने से रोकना। पृष्ठ 99–100 के चित्र, ऊपर-बाएँ से क्रम में:

चित्रवाक्यसंभावित शीर्षक
1. कार आती सड़क पर बच्चेरोको, मत जाने दो।सड़क पर सावधानी
2. बाघ वाला क्षेत्ररोको, मत जाने दो।चेतावनी का सम्मान
3. सैनिक जाने को तैयाररोको मत, जाने दो।कर्तव्य की ओर
4. मतदान को जानारोको मत, जाने दो।मतदान का अवसर
5. एंबुलेंस के लिए यातायातरोको मत, जाने दो।एंबुलेंस को रास्ता
6. सहायता से सड़क पार करनारोको मत, जाने दो।सुलभ और सुरक्षित रास्ता

शीर्षक नमूने हैं। सड़क पार करने का निर्णय सुरक्षित संकेत और यातायात देखकर ही लें।

सृजन (ख) कविता आगे बढ़ाएँ

मूल दो पंक्तियों के बाद जोड़ने का मौलिक नमूना:
नए विचारों को अवसर दो,
मेहनत से उनको सँवारो।
अपने संग सबको सीखने दो,
मन में उजियारा उतारो।
ये ClearStudy के उदाहरण हैं, महादेवी वर्मा की पंक्तियाँ नहीं।

सृजन (ग) खोया-पाया — कल्पनात्मक पत्र

सेवा में, प्रधानाचार्य, [विद्यालय]
विषय: खोए सपने की खोज में सहायता
महोदय/महोदया, पहले मैं चित्र बनाना सीखना चाहता था, पर बार-बार तुलना होने से उत्साह घटा। मेरा ‘खोया सपना’ फिर खोजने में मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर दीजिए। मैं छोटी शुरुआत करके प्रयास करूँगा।
धन्यवाद, [नाम/कक्षा/तारीख]।
यह रचनात्मक पत्र है; किसी वास्तविक खोई वस्तु की रिपोर्ट नहीं।

वाद-विवाद

(क) पाँच-पाँच विद्यार्थियों के पक्ष/विपक्ष समूह बनें। स्वतंत्र विचार खोज के लिए जरूरी हैं; कार्य करते समय दूसरों की स्वतंत्रता और सुरक्षा का सम्मान भी जरूरी है। (ख) चर्चित तर्क, दूसरे समूह से सीखी बात और अपनी बदली/स्थिर राय का अनुच्छेद लिखें।

देखना–सुनना–समझना

(क) साथी की अनुमति और पसंद पूछकर वर्षा की ध्वनि/ठंडक का वर्णन करें, धुएँ की दिशा शब्दों में बताएँ और खेल की कमेंट्री करें। धुआँ सूँघने के लिए पास न ले जाएँ। (ख) ‘कल्पना’ और ‘आकांक्षा’ दलों से मूक अभिनय कराएँ; दूसरी टीम पंक्ति पहचाने। संकेत और समय पहले तय करें।

आपदा प्रबंधन

(क) शिक्षक के साथ विद्यालय की आपदा-योजना पर चर्चा करें। सरकारी मार्गदर्शन के अध्ययन-संकेत: आग में सुरक्षित निकास से बाहर जाएँ और अनुमति तक दोबारा प्रवेश न करें; बाढ़ में बहते पानी या जलमग्न सड़क पार न करें; भूकंप में भीतर हों तो झुककर मजबूत मेज की आड़ लें, पकड़कर रहें और झटके रुकने तक खिड़कियों/भारी वस्तुओं से दूर रहें। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का मार्गदर्शन देखें। (ख) स्थानीय योजना अनुसार निकास, सुरक्षित मिलन-स्थान और जिम्मेदार वयस्क के चिह्न वाला अभ्यास-पोस्टर बनाएँ। चित्र/संकेत शिक्षक से जाँचें।

शिल्प (क) चौदह मिलान — पृष्ठ 102

शिल्पदाएँ क्रमांकअर्थ का सार
1. काष्ठ4लकड़ी की वस्तुएँ
2. मृत्तिका5मिट्टी के बर्तन/दीये
3. धातु6धातु से दीपक/मूर्तियाँ/थालियाँ
4. काँच1काँच की सजावटी वस्तुएँ
5. वस्त्र2कढ़ाई/बुनाई/छपाई
6. कागज3कागज के खिलौने/सजावट
7. पत्थर13पत्थर की मूर्तियाँ/सजावट
8. चमड़ा12जूते/बेल्ट/बैग
9. बाँस और बेंत11टोकरी/कुर्सी/चटाई
10. मोती एवं आभूषण14मोतियों से गहने
11. लाख9लाख की चूड़ियाँ/वस्तुएँ
12. शीशा8सजावट में शीशों की जड़ाई
13. चित्रकला7मधुबनी/गोंड/वरली जैसी चित्रपरंपराएँ
14. नक्काशी10लकड़ी/पत्थर/धातु पर बारीक खुदाई

शिल्प (ख) भ्रमण या संग्रहालय

वास्तविक कार्यशाला में अनुमति से जाएँ और सामग्री, प्रक्रिया, कारीगर से सीखी बात, स्रोत/तारीख और अपनी राय की रिपोर्ट लिखें। विकल्प में राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की सामग्री पढ़ें। राय का नमूना: बाँस की टोकरी की बुनावट मुझे उपयोगी और सुंदर लगी। बिना देखे रिपोर्ट को अपने भ्रमण का अनुभव न बताएँ।

झरोखे से — गिल्लू

पृष्ठ 103 के अंश में गिल्लू का लेखिका से लगाव, थाली के पास बैठकर चावल खाना और काजू की पसंद दिखाई देती है। यह उनका संस्मरण है, सभी गिलहरियों के भोजन या पालतू बनाने की सलाह नहीं।

साझी समझ और खोजबीन

पुस्तकालय से पूरी ‘गिल्लू’ रचना पढ़कर कविता की कल्पना और गद्य के अनुभव-वर्णन का अंतर बताएँ। पृष्ठ 103–104 पर दिए महादेवी वर्मा के जीवन/रचना-संबंधी NCERT वीडियो-संदर्भों से और अध्ययन करें; अपना स्रोत लिखें।

ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न

यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।

अति लघु उत्तरीय

1. ‘मत बाँधो’ कविता की रचयिता कौन हैं?

उत्तरइस कविता की रचयिता महादेवी वर्मा हैं।

2. कविता किसकी स्वतंत्रता का संदेश देती है?

उत्तरयह कविता सपनों (स्वप्नों एवं कल्पनाओं) की स्वतंत्रता का संदेश देती है।

3. ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों का अर्थ बताइए।

उत्तरआरोहण = नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना); अवरोहण = ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)।

4. कविता में कौन-सी पंक्ति आरंभ और अंत दोनों में आती है?

उत्तर“इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!”

लघु उत्तरीय

5. कवयित्री ने सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की है?

उत्तरपंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। सपने भी पंखों की भाँति मनुष्य के मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के विशाल आकाश में भ्रमण कराते हैं।पंख कटने पर पक्षी उड़ नहीं सकता; इसी प्रकार सपनों पर रोक लगने से व्यक्ति की प्रगति रुक जाती है – यही भाव व्यक्त करने के लिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।

6. “सौरभ उड़ जाता है नभ में” उदाहरण से कवयित्री क्या समझाना चाहती हैं?

उत्तरसुगंध एक बार आकाश में उड़ जाने पर लौटकर नहीं आती – वह स्वतंत्र होकर दूर तक फैलती है।इसी प्रकार सपनों को भी मुक्त रहने देना चाहिए; बाँधे जाने पर वे अपनी ऊँचाई एवं विस्तार खो देते हैं। इस उदाहरण से कवयित्री सपनों की स्वतंत्रता का महत्व समझाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय

7. ‘मत बाँधो’ कविता का केंद्रीय भाव एवं उसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरकेंद्रीय भाव: कविता का मूल संदेश है कि मनुष्य के सपनों, कल्पनाओं एवं स्वतंत्र विचारों को बाँधना नहीं चाहिए; स्वतंत्र सपने ही प्रगति, सौंदर्य एवं सुखद संसार की नींव बनते हैं।प्रतीकात्मकता: सौरभ, बीज, अग्नि, धुआँ, तारे, मेघ आदि प्रतीकों से सपनों की स्वतंत्रता समझाई गई है।मानवीकरण: सपने को मनुष्य की भाँति विचरण करते एवं शिल्प सिखाते दिखाया गया है।लय एवं पुनरावृत्ति: ‘मत’ की पुनरावृत्ति तथा आरंभ-अंत में दोहराई गई टेक कविता को गेयता एवं प्रभाव देती है; भाषा सरल, भावपूर्ण एवं प्रेरक है।

ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण

1. ‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) सुभद्रा कुमारी चौहान

(ख) महादेवी वर्मा

(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(घ) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर(ख) महादेवी वर्मा।

2. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—

(क) सुंदरता

(ख) सुगंध

(ग) सूर्य

(घ) सपना

उत्तर(ख) सुगंध।

3. ‘नभ’ का समानार्थी शब्द है—

(क) धरती

(ख) सागर

(ग) गगन

(घ) पर्वत

उत्तर(ग) गगन।

4. ‘आरोहण’ का विपरीतार्थक शब्द है—

(क) चढ़ना

(ख) अवरोहण

(ग) विचरण

(घ) मँडराना

उत्तर(ख) अवरोहण।

5. कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज क्या नहीं कर पाता?

(क) पौधा बनना

(ख) नभ में उड़ना

(ग) अंकुरित होना

(घ) रंग बदलना

उत्तर(ख) नभ में उड़ना।

6. कविता में किसकी स्वतंत्रता न बाँधने का आग्रह है?

(क) पक्षियों की

(ख) नदियों की

(ग) सपनों की

(घ) हवाओं की

उत्तर(ग) सपनों की।

7. ‘दीप्ति’ शब्द का अर्थ है—

(क) अंधकार

(ख) चमक/आभा

(ग) बादल

(घ) धुआँ

उत्तर(ख) चमक/आभा।

8. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” में ‘शिल्प’ का आशय है—

(क) धन

(ख) रचना-कौशल/कला

(ग) युद्ध

(घ) यात्रा

उत्तर(ख) रचना-कौशल/कला।

9. महादेवी वर्मा को किस उपनाम से जाना जाता है?

(क) महाकवि

(ख) आधुनिक मीरा

(ग) राष्ट्रकवि

(घ) कविगुरु

उत्तर(ख) आधुनिक मीरा।

10. कविता में ‘मत’ शब्द को उलटने पर बनता है—

(क) तम (अँधेरा)

(ख) मन

(ग) तप

(घ) तन

उत्तर(क) तम (अँधेरा)।
उत्तर-कुंजी: 1-ख, 2-ख, 3-ग, 4-ख, 5-ख, 6-ग, 7-ख, 8-ख, 9-ख, 10-क।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): कवयित्री सपनों के पंख न काटने का आग्रह करती हैं।

कारण (R): सपनों की स्वतंत्रता ही व्यक्ति को प्रगति एवं ऊँचाई की ओर ले जाती है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): धूल में गिरा बीज आकाश में उड़ जाता है।

कारण (R): दबा या बाँधा हुआ सपना अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।

उत्तर(घ) A गलत है (कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज नभ में उड़ नहीं पाता), जबकि R सही है।

3. अभिकथन (A): सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों गतियाँ होती हैं।

कारण (R): सपना विचार की तरह जन्म लेता है (ऊपर उठता है) और व्यवहार में साकार होकर लौटता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): ‘मत बाँधो’ एक कठोर आदेश है।

कारण (R): कवयित्री विनम्र भाव से सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह/प्रार्थना करती हैं।

उत्तर(घ) A गलत है (यह कठोर आदेश नहीं, कोमल आग्रह/प्रार्थना है), जबकि R सही है।

5. अभिकथन (A): ‘नभ’ और ‘गगन’ समानार्थी शब्द हैं।

कारण (R): दोनों का अर्थ ‘आकाश’ है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-क, 2-घ, 3-क, 4-घ, 5-क।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?

इस कविता की रचयिता हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा हैं।

‘मत बाँधो’ कविता का मुख्य भाव क्या है?

कविता का मुख्य भाव है कि मनुष्य के सपनों एवं कल्पनाओं की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; उनके पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही प्रगति एवं सुंदर संसार की नींव बनते हैं।

‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का क्या अर्थ है?

आरोहण का अर्थ है नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना) तथा अवरोहण का अर्थ है ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)। ये एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं।

सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी पंखों की भाँति मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के आकाश में भ्रमण कराते हैं, इसीलिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।

कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

Scroll to Top