कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 7 — मत बाँधो प्रश्न उत्तर और भावार्थ
मत बाँधो प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 7 की कविता का भावार्थ, शब्दार्थ, मिलान, भाषा-अभ्यास, काल परिवर्तन और रचनात्मक कार्यों के नमूने पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 7 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 91–104, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
कवयित्री परिचय – महादेवी वर्मा
हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभ मानी जाती हैं तथा अपनी करुणा एवं वेदना से भरी रचनाओं के कारण उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ भी कहा जाता है। बच्चों के लिए उन्होंने बारहमासा, आज खरीदेंगे हम ज्वाला, अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी जैसी अनेक कविताएँ लिखीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावपूर्ण गद्य – मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ तथा पथ के साथी की भी रचना की; उनके गद्य के चरित्र पाठकों को सदा याद रह जाते हैं। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत एवं दीपशिखा उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं। सन् 1987 में उनका निधन हुआ।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता सपनों की स्वतंत्रता का संदेश देती है। कवयित्री आग्रह करती हैं कि किसी के सपनों के पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए।
इन सपनों की गति मत बाँधो!
सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!
सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!
मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो!
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
— महादेवी वर्मा
भावार्थ
महादेवी वर्मा सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह करती हैं। ‘पंख’ उड़ान और संभावना की छवि है; ‘पंख काटना’ कल्पना और आकांक्षा को रोकना है। सौरभ के ऊपर फैलने, बीज के धूलि में गिरने, धरती पर अग्नि और गगन में धूम के बिंब सपनों की विशेष गति समझाते हैं। ये काव्य-बिंब हैं, सुगंध या बीज के व्यवहार का सम्पूर्ण वैज्ञानिक नियम नहीं।
सपना ऊपर उठकर मुक्त विचरण भी कर सकता है और आँखों/धरती पर लौट भी सकता है। अध्ययन के भाव में आरोहण ऊँची कल्पना, अवरोहण उसे व्यवहार में लाने का संकेत है। तारों, मेघों के रंग और किरणों की दीप्ति से समृद्ध सपना धरती को सुंदर बनाने का शिल्प सिखाता है। ‘स्वर्ग’ यहाँ सुखद, सहयोगी और संवेदनशील संसार की कल्पना है। सपनों को अवसर और प्रयास से जोड़ने की प्रेरणा है; हर सपना निश्चित रूप से पूरा होने की गारंटी नहीं।
↑ आरोहण: ऊपर उठना
नई कल्पना • ऊँचा लक्ष्य • संभावना
↓ अवरोहण: नीचे/व्यवहार में लौटना
योजना • कार्य • जीवन में उपयोग
कविता में सपनों की दोनों गतियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। यह भाव समझने का संकेत है, भौतिक उड़ान का नक्शा नहीं।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सपने | स्वप्न, कल्पनाएँ, आकांक्षाएँ |
| पंख | पर, उड़ने का साधन |
| गति | चाल, प्रवाह, बढ़ने की शक्ति |
| सौरभ | सुगंध, खुशबू |
| नभ | आकाश, गगन |
| धूलि | धूल, मिट्टी |
| अग्नि | आग |
| धूम | धुआँ |
| गगन | आकाश, नभ |
| मँडराना | चारों ओर घूमना/फैलना |
| आरोहण | नीचे से ऊपर की ओर जाना, चढ़ना |
| अवरोहण | ऊपर से नीचे की ओर आना, उतरना |
| मुक्त | स्वतंत्र, बंधनरहित |
| विचरण | घूमना-फिरना, भ्रमण करना |
| मेघ | बादल |
| किरण | प्रकाश की रेखा, रश्मि |
| दीप्ति | चमक, प्रकाश, आभा |
| भू / भूमि | धरती, पृथ्वी |
| शिल्प | कारीगरी, कला, रचना-कौशल |
| स्वर्ग | सुखद स्थान, सुख-शांति का लोक |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
• सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
• सपनों को भूल जाना चाहिए
• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
• सपने देखना अच्छी बात है
2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
• प्रेम की
• शिक्षा की
• सपनों की
• अधिकारों की
3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
• सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?
• जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
• जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
• जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
• वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
• वह और गहरा हो सकता है
• उसकी उड़ान रुक सकती है
• वह बढ़कर पौधा बन सकता है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
(क) सौरभ का नभ में फैलना और बीज का धूलि में गिरना अलग दिशाओं की काव्य-छवियाँ हैं। इनके माध्यम से कवयित्री सपनों की विशेषता समझाती हैं: उनमें उठने और लौटने दोनों की संभावना है। बीज की छवि का अर्थ यह नहीं कि मिट्टी में गिरा बीज निरर्थक हो गया।
(ख) मुक्त गगन में विचरण करता सपना कल्पना की ऊँचाइयों तक पहुँचता है। रंग और दीप्ति लेकर धरती पर लौटना नए अनुभव और रचना से जीवन सुंदर बनाने का भाव है। यह कल्पनाशील मानवीकरण है।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनी कुछ पंक्तियाँ (स्तंभ 1) तथा उनके भाव/संदर्भ (स्तंभ 2) नीचे दिए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।
| क्रम | स्तंभ 1 (पंक्ति) | सही भाव (स्तंभ 2) |
|---|---|---|
| 1. | इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो! | किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। (स्तंभ 2 का बिंदु 3) |
| 2. | सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है! | सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। (बिंदु 5) |
| 3. | इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! | सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। (बिंदु 1) |
| 4. | नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! | सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। (बिंदु 2) |
| 5. | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! | रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। (बिंदु 4) |
सोच-विचार के लिए
(क) ‘मत बाँधो’ उन लोगों से कहा गया होगा जो किसी की कल्पना और संभावना सीमित करते हैं। समाज, संस्था या बड़े इसका संदर्भ हो सकते हैं; सभी माता-पिता बच्चों के सपने रोकते हैं, ऐसा निष्कर्ष नहीं।
(ख) सपनों को विचार और व्यवहार दोनों में बढ़ने का अवसर मिले, इसलिए गति न बाँधने का आग्रह है।
(ग) सपने बदल सकते हैं, दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं और नए काम का आधार बन सकते हैं। उनका ‘कभी समाप्त न होना’ या ‘हमेशा पूरा होना’ निश्चित नियम नहीं।
(घ) नमूना: पुस्तकालय बनाने का विचार ऊँची आकांक्षा था; पुस्तकों का संग्रह और व्यवस्था उसकी व्यवहार में वापसी। शाब्दिक उदाहरण में पहाड़ पर चढ़ना आरोहण और उतरना अवरोहण है।
(ङ) विचार का नमूना: योजना और सहयोग से हमारा छोटा पाठक-समूह शुरू हुआ। सपना व्यवहार में उतरा; केवल कल्पना से नहीं, काम करने से। अपने अनुभव और असहमति भी कारण सहित लिख सकते हैं।
शीर्षक
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा?
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि)
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
पृष्ठ 94 मिलान-कुंजी: 1→3, 2→5, 3→1, 4→2, 5→4।
कविता की रचना
(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| क्रम | कविता की विशेषता | सही पंक्ति |
|---|---|---|
| 1. | एक-दूसरे के विपरीत अर्थवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! (आरोहण × अवरोहण) |
| 2. | एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है। | नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! (‘मत’ की पुनरावृत्ति) |
| 3. | समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | दीप्ति लिए भू पर आयेगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! (भू = भूमि) |
| 4. | प्रश्न पूछा गया है। | वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 5. | संबोधन का प्रयोग किया गया है। | इन सपनों के पंख न काटो |
| 6. | सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है (मानवीकरण)। | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! |
पृष्ठ 96 विशेषता-मिलान: 1→2, 2→5, 3→6, 4→1, 5→4, 6→3। (क) में चित्रात्मकता, प्रकृति-बिंब, पुनरावृत्ति, प्रश्न और मानवीकरण की सूची बनाकर साझा करें।
शब्दों की बात
(क) आरोहण–अवरोहण
- पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
- नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
- बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखना अवरोहण क्रम कहलाता है।
अपने वाक्य: यात्रियों ने पहाड़ी पर आरोहण किया। चोटी से अवरोहण करते समय वे सावधानी से चले।
(ख) समानार्थी से पंक्ति
नभ/गगन के स्थान पर आकाश, अंबर, आसमान, व्योम। पुनर्लेखन के नमूने: ‘वह अंबर में कब उड़ पाता है?’ ‘धूम आकाश में मँडराता है।’ अर्थ समान है, पर शब्द के आकार से लय बदलती है; समूह में बोलकर सुनें और जरूरी समायोजन करें। ये बदली पंक्तियाँ हैं, मूल उद्धरण नहीं।
(ग) ‘मत’ के साथ क्रियाएँ
मत डरो, मत घबराओ, मत झगड़ो, मत भूलो, मत तोड़ो। प्रत्येक निषेध का संदर्भ जरूरी है।
(घ) बाँधने से संबंधित क्रियाएँ
जोड़ना, कसना, लपेटना, गाँठ लगाना, नत्थी करना, पिरोना। उदाहरण: उसने रस्सियों को जोड़ दिया। उपहार पर रिबन की गाँठ लगाई। इन क्रियाओं के सभी प्रयोग एक-दूसरे के पूर्ण पर्याय नहीं।
(ङ) उलटकर अर्थवाला शब्द
मत→तम (अँधेरा); कब→बक (‘बकना’ का क्रिया-रूप, बोलने का अर्थ); अक्षर/मात्रा के संयोजन को समझकर सदा→दास भी देख सकते हैं। हर परिणाम का मान्य अर्थ जाँचें। ‘नभ→भन’, ‘रंग→गंर’ और ‘नदी→दीन’ को इस अभ्यास के स्पष्ट मानक उत्तर न लिखें—अंतिम दो में सही उलटाव भी नहीं।
काल परिवर्तन
पुस्तक के उदाहरण में ‘उड़ गया है’ भूत की पूर्ण घटना बताता है। सीधे भूतकाल के लिए ‘उड़ गया’ भी उचित है। नमूने:
| वर्तमान | भूत | भविष्य |
|---|---|---|
| सौरभ उड़ जाता है नभ में। | सौरभ उड़ गया नभ में। | सौरभ उड़ जाएगा नभ में। |
| फिर वह लौट कहाँ आता है? | फिर वह लौट कहाँ आया? | फिर वह लौट कहाँ आएगा? |
| बीज धूलि में गिर जाता जो। | बीज धूलि में गिर गया जो। | बीज धूलि में गिर जाएगा जो। |
| वह नभ में कब उड़ पाता है? | वह नभ में कब उड़ पाया? | वह नभ में कब उड़ पाएगा? |
| अग्नि सदा धरती पर जलती है। | अग्नि सदा धरती पर जलती थी। | अग्नि सदा धरती पर जलेगी। |
| धूम गगन में मँडराता है। | धूम गगन में मँडराता था। | धूम गगन में मँडराएगा। |
| सपनों में दोनों ही गति हैं। | सपनों में दोनों ही गति थीं। | सपनों में दोनों ही गति होंगी। |
| उड़कर आँखों में आता है। | उड़कर आँखों में आया था। | उड़कर आँखों में आएगा। |
ये काल-अभ्यास के बदले रूप हैं; मूल कविता का पाठ नहीं। कविता की पंक्ति का विन्यास साधारण गद्य से अलग हो सकता है।
शब्दकोश से
‘शिल्प’ के कई अर्थ हैं। इस कविता में संसार सुंदर बनाने की कला/रचना-कौशल का अर्थ सबसे उपयुक्त है। संबंधित शब्द:
| पुस्तक का समूह | अर्थ |
|---|---|
| 1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पक/शिल्पकारी | शिल्प से चीजें बनाने वाला / शिल्प करने से संबंधित रूप; प्रसंग अनुसार शब्दकोश देखें। |
| 2. शिल्पकला | हस्तकला और वस्तु-निर्माण की कला |
| 3. शिल्पकौशल | कारीगरी में दक्षता |
| 4. शिल्पगृह/शिल्पगेह | शिल्प-कार्य का घर/स्थान |
| 5. शिल्पविद्या | शिल्प-संबंधी ज्ञान |
| 6. शिल्पशाला/शिल्पालय | शिल्प का कार्य या अध्ययन करने का स्थान |
आपकी बात (पाठ से आगे)
आपकी बात — तीन नमूने
(क) गाँठ बाँधना, फीता बाँधना, पट्टी बाँधना और आशा बाँधना—शाब्दिक तथा लाक्षणिक प्रयोग अलग हैं। (ख) घर में काम बाँटना, पड़ोस में सफाई और सहयोग, विद्यालय में सभी को बोलने/सीखने का अवसर देना सुखद परिवेश बना सकते हैं। (ग) मेरा नमूना सपना पुस्तक-पाठक समूह बनाना है ताकि साथी मिलकर पढ़ें। अपने लक्ष्य और अनुभव के अनुसार लिखें।
चर्चा-परिचर्चा
एक साझा सपना चुनें—जैसे साफ विद्यालय। उसमें सहमति से साथियों को जोड़ें; काम बाँटें, सुझाव सुनें और परिणाम देखें। किसी को अपना सपना अपनाने के लिए मजबूर न करें।
सृजन (क) विराम चिह्न का फेरबदल
‘रोको मत, जाने दो’: जाने की अनुमति। ‘रोको, मत जाने दो’: जाने से रोकना। पृष्ठ 99–100 के चित्र, ऊपर-बाएँ से क्रम में:
| चित्र | वाक्य | संभावित शीर्षक |
|---|---|---|
| 1. कार आती सड़क पर बच्चे | रोको, मत जाने दो। | सड़क पर सावधानी |
| 2. बाघ वाला क्षेत्र | रोको, मत जाने दो। | चेतावनी का सम्मान |
| 3. सैनिक जाने को तैयार | रोको मत, जाने दो। | कर्तव्य की ओर |
| 4. मतदान को जाना | रोको मत, जाने दो। | मतदान का अवसर |
| 5. एंबुलेंस के लिए यातायात | रोको मत, जाने दो। | एंबुलेंस को रास्ता |
| 6. सहायता से सड़क पार करना | रोको मत, जाने दो। | सुलभ और सुरक्षित रास्ता |
शीर्षक नमूने हैं। सड़क पार करने का निर्णय सुरक्षित संकेत और यातायात देखकर ही लें।
सृजन (ख) कविता आगे बढ़ाएँ
मूल दो पंक्तियों के बाद जोड़ने का मौलिक नमूना:
नए विचारों को अवसर दो,
मेहनत से उनको सँवारो।
अपने संग सबको सीखने दो,
मन में उजियारा उतारो।
ये ClearStudy के उदाहरण हैं, महादेवी वर्मा की पंक्तियाँ नहीं।
सृजन (ग) खोया-पाया — कल्पनात्मक पत्र
सेवा में, प्रधानाचार्य, [विद्यालय]
विषय: खोए सपने की खोज में सहायता
महोदय/महोदया, पहले मैं चित्र बनाना सीखना चाहता था, पर बार-बार तुलना होने से उत्साह घटा। मेरा ‘खोया सपना’ फिर खोजने में मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर दीजिए। मैं छोटी शुरुआत करके प्रयास करूँगा।
धन्यवाद, [नाम/कक्षा/तारीख]।
यह रचनात्मक पत्र है; किसी वास्तविक खोई वस्तु की रिपोर्ट नहीं।
वाद-विवाद
(क) पाँच-पाँच विद्यार्थियों के पक्ष/विपक्ष समूह बनें। स्वतंत्र विचार खोज के लिए जरूरी हैं; कार्य करते समय दूसरों की स्वतंत्रता और सुरक्षा का सम्मान भी जरूरी है। (ख) चर्चित तर्क, दूसरे समूह से सीखी बात और अपनी बदली/स्थिर राय का अनुच्छेद लिखें।
देखना–सुनना–समझना
(क) साथी की अनुमति और पसंद पूछकर वर्षा की ध्वनि/ठंडक का वर्णन करें, धुएँ की दिशा शब्दों में बताएँ और खेल की कमेंट्री करें। धुआँ सूँघने के लिए पास न ले जाएँ। (ख) ‘कल्पना’ और ‘आकांक्षा’ दलों से मूक अभिनय कराएँ; दूसरी टीम पंक्ति पहचाने। संकेत और समय पहले तय करें।
आपदा प्रबंधन
(क) शिक्षक के साथ विद्यालय की आपदा-योजना पर चर्चा करें। सरकारी मार्गदर्शन के अध्ययन-संकेत: आग में सुरक्षित निकास से बाहर जाएँ और अनुमति तक दोबारा प्रवेश न करें; बाढ़ में बहते पानी या जलमग्न सड़क पार न करें; भूकंप में भीतर हों तो झुककर मजबूत मेज की आड़ लें, पकड़कर रहें और झटके रुकने तक खिड़कियों/भारी वस्तुओं से दूर रहें। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का मार्गदर्शन देखें। (ख) स्थानीय योजना अनुसार निकास, सुरक्षित मिलन-स्थान और जिम्मेदार वयस्क के चिह्न वाला अभ्यास-पोस्टर बनाएँ। चित्र/संकेत शिक्षक से जाँचें।
शिल्प (क) चौदह मिलान — पृष्ठ 102
| शिल्प | दाएँ क्रमांक | अर्थ का सार |
|---|---|---|
| 1. काष्ठ | 4 | लकड़ी की वस्तुएँ |
| 2. मृत्तिका | 5 | मिट्टी के बर्तन/दीये |
| 3. धातु | 6 | धातु से दीपक/मूर्तियाँ/थालियाँ |
| 4. काँच | 1 | काँच की सजावटी वस्तुएँ |
| 5. वस्त्र | 2 | कढ़ाई/बुनाई/छपाई |
| 6. कागज | 3 | कागज के खिलौने/सजावट |
| 7. पत्थर | 13 | पत्थर की मूर्तियाँ/सजावट |
| 8. चमड़ा | 12 | जूते/बेल्ट/बैग |
| 9. बाँस और बेंत | 11 | टोकरी/कुर्सी/चटाई |
| 10. मोती एवं आभूषण | 14 | मोतियों से गहने |
| 11. लाख | 9 | लाख की चूड़ियाँ/वस्तुएँ |
| 12. शीशा | 8 | सजावट में शीशों की जड़ाई |
| 13. चित्रकला | 7 | मधुबनी/गोंड/वरली जैसी चित्रपरंपराएँ |
| 14. नक्काशी | 10 | लकड़ी/पत्थर/धातु पर बारीक खुदाई |
शिल्प (ख) भ्रमण या संग्रहालय
वास्तविक कार्यशाला में अनुमति से जाएँ और सामग्री, प्रक्रिया, कारीगर से सीखी बात, स्रोत/तारीख और अपनी राय की रिपोर्ट लिखें। विकल्प में राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की सामग्री पढ़ें। राय का नमूना: बाँस की टोकरी की बुनावट मुझे उपयोगी और सुंदर लगी। बिना देखे रिपोर्ट को अपने भ्रमण का अनुभव न बताएँ।
झरोखे से — गिल्लू
पृष्ठ 103 के अंश में गिल्लू का लेखिका से लगाव, थाली के पास बैठकर चावल खाना और काजू की पसंद दिखाई देती है। यह उनका संस्मरण है, सभी गिलहरियों के भोजन या पालतू बनाने की सलाह नहीं।
साझी समझ और खोजबीन
पुस्तकालय से पूरी ‘गिल्लू’ रचना पढ़कर कविता की कल्पना और गद्य के अनुभव-वर्णन का अंतर बताएँ। पृष्ठ 103–104 पर दिए महादेवी वर्मा के जीवन/रचना-संबंधी NCERT वीडियो-संदर्भों से और अध्ययन करें; अपना स्रोत लिखें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
अति लघु उत्तरीय
1. ‘मत बाँधो’ कविता की रचयिता कौन हैं?
2. कविता किसकी स्वतंत्रता का संदेश देती है?
3. ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों का अर्थ बताइए।
4. कविता में कौन-सी पंक्ति आरंभ और अंत दोनों में आती है?
लघु उत्तरीय
5. कवयित्री ने सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की है?
6. “सौरभ उड़ जाता है नभ में” उदाहरण से कवयित्री क्या समझाना चाहती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
7. ‘मत बाँधो’ कविता का केंद्रीय भाव एवं उसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(घ) सुमित्रानंदन पंत
2. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—
(क) सुंदरता
(ख) सुगंध
(ग) सूर्य
(घ) सपना
3. ‘नभ’ का समानार्थी शब्द है—
(क) धरती
(ख) सागर
(ग) गगन
(घ) पर्वत
4. ‘आरोहण’ का विपरीतार्थक शब्द है—
(क) चढ़ना
(ख) अवरोहण
(ग) विचरण
(घ) मँडराना
5. कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज क्या नहीं कर पाता?
(क) पौधा बनना
(ख) नभ में उड़ना
(ग) अंकुरित होना
(घ) रंग बदलना
6. कविता में किसकी स्वतंत्रता न बाँधने का आग्रह है?
(क) पक्षियों की
(ख) नदियों की
(ग) सपनों की
(घ) हवाओं की
7. ‘दीप्ति’ शब्द का अर्थ है—
(क) अंधकार
(ख) चमक/आभा
(ग) बादल
(घ) धुआँ
8. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” में ‘शिल्प’ का आशय है—
(क) धन
(ख) रचना-कौशल/कला
(ग) युद्ध
(घ) यात्रा
9. महादेवी वर्मा को किस उपनाम से जाना जाता है?
(क) महाकवि
(ख) आधुनिक मीरा
(ग) राष्ट्रकवि
(घ) कविगुरु
10. कविता में ‘मत’ शब्द को उलटने पर बनता है—
(क) तम (अँधेरा)
(ख) मन
(ग) तप
(घ) तन
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): कवयित्री सपनों के पंख न काटने का आग्रह करती हैं।
कारण (R): सपनों की स्वतंत्रता ही व्यक्ति को प्रगति एवं ऊँचाई की ओर ले जाती है।
2. अभिकथन (A): धूल में गिरा बीज आकाश में उड़ जाता है।
कारण (R): दबा या बाँधा हुआ सपना अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।
3. अभिकथन (A): सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों गतियाँ होती हैं।
कारण (R): सपना विचार की तरह जन्म लेता है (ऊपर उठता है) और व्यवहार में साकार होकर लौटता है।
4. अभिकथन (A): ‘मत बाँधो’ एक कठोर आदेश है।
कारण (R): कवयित्री विनम्र भाव से सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह/प्रार्थना करती हैं।
5. अभिकथन (A): ‘नभ’ और ‘गगन’ समानार्थी शब्द हैं।
कारण (R): दोनों का अर्थ ‘आकाश’ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?
इस कविता की रचयिता हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा हैं।
‘मत बाँधो’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव है कि मनुष्य के सपनों एवं कल्पनाओं की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; उनके पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही प्रगति एवं सुंदर संसार की नींव बनते हैं।
‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का क्या अर्थ है?
आरोहण का अर्थ है नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना) तथा अवरोहण का अर्थ है ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)। ये एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं।
सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी पंखों की भाँति मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के आकाश में भ्रमण कराते हैं, इसीलिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।
कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
