कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 7 – मत बाँधो (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 7 ‘मत बाँधो’ (कवयित्री – महादेवी वर्मा) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा ‘मेरी समझ से’, ‘पंक्तियों पर चर्चा’, ‘मिलकर करें मिलान’, ‘सोच-विचार के लिए’ आदि सभी अभ्यास-गतिविधियों के उत्तर।
कवयित्री परिचय – महादेवी वर्मा
हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभ मानी जाती हैं तथा अपनी करुणा एवं वेदना से भरी रचनाओं के कारण उन्हें ‘आधुनिक मीरा’ भी कहा जाता है। बच्चों के लिए उन्होंने बारहमासा, आज खरीदेंगे हम ज्वाला, अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी जैसी अनेक कविताएँ लिखीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावपूर्ण गद्य – मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ तथा पथ के साथी की भी रचना की; उनके गद्य के चरित्र पाठकों को सदा याद रह जाते हैं। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत एवं दीपशिखा उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं। सन् 1987 में उनका निधन हुआ।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता सपनों की स्वतंत्रता का संदेश देती है। कवयित्री आग्रह करती हैं कि किसी के सपनों के पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए।
इन सपनों की गति मत बाँधो!
सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!
सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!
मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो!
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
— महादेवी वर्मा
भावार्थ
कवयित्री महादेवी वर्मा इस कविता में सपनों की स्वतंत्रता की रक्षा का आग्रह करती हैं। वे कहती हैं कि किसी के सपनों के ‘पंख’ मत काटो और उनकी गति को मत बाँधो; सपने पंखों की भाँति उड़ान भरते हैं, अतः उन्हें मुक्त रहने दो। जिस प्रकार सुगंध (सौरभ) एक बार आकाश में उड़ जाने पर लौटकर नहीं आती, और धूल में गिरा बीज फिर आकाश में नहीं उड़ पाता – उसी प्रकार दबा या बाँधा हुआ सपना भी अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।
कवयित्री बताती हैं कि अग्नि सदा धरती पर जलती है, किंतु उसका धुआँ आकाश में फैलता है – अर्थात् सपनों में भी दोनों गतियाँ (नीचे टिकना और ऊपर उठना) विद्यमान रहती हैं। सपना ऊपर उठता है (आरोहण) और फिर अनुभव/व्यवहार में लौटकर आँखों में साकार होता है (अवरोहण)। इसलिए वे कहती हैं कि सपने के आरोहण को मत रोको और उसके अवरोहण को मत बाँधो – अर्थात् उसके उठने और साकार होने, दोनों में बाधा मत डालो।
कवयित्री विश्वास व्यक्त करती हैं कि यदि सपने को मुक्त आकाश में विचरण करने दिया जाए तो वह तारों में मिलकर मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर पुनः धरती पर लौट आएगा और स्वर्ग जैसा सुंदर संसार रचने का शिल्प (कला) भूमि को सिखा देगा। इसलिए सपनों को नभ तक जाने से मत रोको और उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। संक्षेप में, यह कविता संदेश देती है कि मनुष्य की कल्पनाशीलता एवं स्वप्न-शक्ति को बाँधना नहीं चाहिए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही सुंदर, समृद्ध एवं प्रगतिशील संसार की नींव बनते हैं।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सपने | स्वप्न, कल्पनाएँ, आकांक्षाएँ |
| पंख | पर, उड़ने का साधन |
| गति | चाल, प्रवाह, बढ़ने की शक्ति |
| सौरभ | सुगंध, खुशबू |
| नभ | आकाश, गगन |
| धूलि | धूल, मिट्टी |
| अग्नि | आग |
| धूम | धुआँ |
| गगन | आकाश, नभ |
| मँडराना | चारों ओर घूमना/फैलना |
| आरोहण | नीचे से ऊपर की ओर जाना, चढ़ना |
| अवरोहण | ऊपर से नीचे की ओर आना, उतरना |
| मुक्त | स्वतंत्र, बंधनरहित |
| विचरण | घूमना-फिरना, भ्रमण करना |
| मेघ | बादल |
| किरण | प्रकाश की रेखा, रश्मि |
| दीप्ति | चमक, प्रकाश, आभा |
| भू / भूमि | धरती, पृथ्वी |
| शिल्प | कारीगरी, कला, रचना-कौशल |
| स्वर्ग | सुखद स्थान, सुख-शांति का लोक |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
• सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
• सपनों को भूल जाना चाहिए
• सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
• सपने देखना अच्छी बात है
2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
• प्रेम की
• शिक्षा की
• सपनों की
• अधिकारों की
3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
• सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
• सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
• सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
• सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?
• जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
• जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
• जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
• जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
• वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
• वह और गहरा हो सकता है
• उसकी उड़ान रुक सकती है
• वह बढ़कर पौधा बन सकता है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है? / बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?”
(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह / तारों में फिर मिल जायेगा, / मेघों से रंग औ’ किरणों से / दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनी कुछ पंक्तियाँ (स्तंभ 1) तथा उनके भाव/संदर्भ (स्तंभ 2) नीचे दिए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।
| क्रम | स्तंभ 1 (पंक्ति) | सही भाव (स्तंभ 2) |
|---|---|---|
| 1. | इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो! | किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही किसी के सपनों को बाधित करें तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। (स्तंभ 2 का बिंदु 3) |
| 2. | सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है! | सपनों में ऊपर उठने (आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और फिर व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। (बिंदु 5) |
| 3. | इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! | सपनों के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। (बिंदु 1) |
| 4. | नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! | सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। (बिंदु 2) |
| 5. | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! | रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। (बिंदु 4) |
सोच-विचार के लिए
(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?
(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है / उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
शीर्षक
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा?
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि)
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
कविता की रचना
(ख) नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| क्रम | कविता की विशेषता | सही पंक्ति |
|---|---|---|
| 1. | एक-दूसरे के विपरीत अर्थवाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! (आरोहण × अवरोहण) |
| 2. | एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है। | नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! (‘मत’ की पुनरावृत्ति) |
| 3. | समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | दीप्ति लिए भू पर आयेगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! (भू = भूमि) |
| 4. | प्रश्न पूछा गया है। | वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 5. | संबोधन का प्रयोग किया गया है। | इन सपनों के पंख न काटो |
| 6. | सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है (मानवीकरण)। | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! |
शब्दों की बात
“इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!” – ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण = नीचे से ऊपर की ओर जाना/चढ़ना; अवरोहण = ऊपर से नीचे की ओर आना/उतरना।
(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।
(ख) “वह नभ में कब उड़ पाता है?” / “धूम गगन में मँडराता है।” – ‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए।
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? (संकेत— ‘मत डरो’)
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? (संकेत— जोड़ना)
(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से बनता है ‘तम’ (अर्थ – अँधेरा)। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
काल परिवर्तन
“सौरभ उड़ जाता है नभ में” – यह वर्तमान काल की पंक्ति है। इसे भूतकाल एवं भविष्य काल में बदलिए तथा कविता की अन्य वर्तमानकालीन पंक्तियों को भी इन कालों में लिखिए।
| वर्तमान काल | भूतकाल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| सौरभ उड़ जाता है नभ में। | सौरभ उड़ गया है नभ में। | सौरभ उड़ जाएगा नभ में। |
| धूम गगन में मँडराता है। | धूम गगन में मँडराया है। | धूम गगन में मँडराएगा। |
| अग्नि सदा धरती पर जलती (है)। | अग्नि धरती पर जली है। | अग्नि धरती पर जलेगी। |
| उड़ कर आँखों में आता है। | उड़ कर आँखों में आया है। | उड़ कर आँखों में आएगा। |
शब्दकोश से
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” – शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ के अर्थ हैं – हाथ से चीज बनाने का काम (दस्तकारी/हुनर), कला-संबंधी व्यवसाय, दक्षता/कौशल, निर्माण/रचना आदि। नीचे ‘शिल्प’ से जुड़े शब्दों के अर्थ दिए गए हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| शिल्पकार / शिल्पी / शिल्पजीवी / शिल्पकारी | हस्तकला से वस्तुएँ बनाने वाला कारीगर; दस्तकार |
| शिल्पकला | हाथ से सुंदर वस्तुएँ बनाने की कला; हस्तकला |
| शिल्पकौशल | शिल्प/कारीगरी में निपुणता एवं दक्षता |
| शिल्पगृह / शिल्पगेह | वह स्थान जहाँ शिल्प-कार्य किया जाता है; कारखाना/कार्यशाला |
| शिल्पविद्या | शिल्प (कारीगरी) से संबंधित ज्ञान/विद्या |
| शिल्पशाला / शिल्पालय | शिल्प/कलाकृति बनाने का स्थान या विद्यालय |
आपकी बात (पाठ से आगे)
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? (संकेत— गाँठ बाँधना)
(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए।
(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।
अतिरिक्त प्रश्न
अति लघु उत्तरीय
1. ‘मत बाँधो’ कविता की रचयिता कौन हैं?
2. कविता किसकी स्वतंत्रता का संदेश देती है?
3. ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों का अर्थ बताइए।
4. कविता में कौन-सी पंक्ति आरंभ और अंत दोनों में आती है?
लघु उत्तरीय
5. कवयित्री ने सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की है?
6. “सौरभ उड़ जाता है नभ में” उदाहरण से कवयित्री क्या समझाना चाहती हैं?
दीर्घ उत्तरीय
7. ‘मत बाँधो’ कविता का केंद्रीय भाव एवं उसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ख) महादेवी वर्मा
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(घ) सुमित्रानंदन पंत
2. ‘सौरभ’ शब्द का अर्थ है—
(क) सुंदरता
(ख) सुगंध
(ग) सूर्य
(घ) सपना
3. ‘नभ’ का समानार्थी शब्द है—
(क) धरती
(ख) सागर
(ग) गगन
(घ) पर्वत
4. ‘आरोहण’ का विपरीतार्थक शब्द है—
(क) चढ़ना
(ख) अवरोहण
(ग) विचरण
(घ) मँडराना
5. कविता के अनुसार धूल में गिरा बीज क्या नहीं कर पाता?
(क) पौधा बनना
(ख) नभ में उड़ना
(ग) अंकुरित होना
(घ) रंग बदलना
6. कविता में किसकी स्वतंत्रता न बाँधने का आग्रह है?
(क) पक्षियों की
(ख) नदियों की
(ग) सपनों की
(घ) हवाओं की
7. ‘दीप्ति’ शब्द का अर्थ है—
(क) अंधकार
(ख) चमक/आभा
(ग) बादल
(घ) धुआँ
8. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” में ‘शिल्प’ का आशय है—
(क) धन
(ख) रचना-कौशल/कला
(ग) युद्ध
(घ) यात्रा
9. महादेवी वर्मा को किस उपनाम से जाना जाता है?
(क) महाकवि
(ख) आधुनिक मीरा
(ग) राष्ट्रकवि
(घ) कविगुरु
10. कविता में ‘मत’ शब्द को उलटने पर बनता है—
(क) तम (अँधेरा)
(ख) मन
(ग) तप
(घ) तन
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): कवयित्री सपनों के पंख न काटने का आग्रह करती हैं।
कारण (R): सपनों की स्वतंत्रता ही व्यक्ति को प्रगति एवं ऊँचाई की ओर ले जाती है।
2. अभिकथन (A): धूल में गिरा बीज आकाश में उड़ जाता है।
कारण (R): दबा या बाँधा हुआ सपना अपनी ऊँचाई नहीं छू पाता।
3. अभिकथन (A): सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों गतियाँ होती हैं।
कारण (R): सपना विचार की तरह जन्म लेता है (ऊपर उठता है) और व्यवहार में साकार होकर लौटता है।
4. अभिकथन (A): ‘मत बाँधो’ एक कठोर आदेश है।
कारण (R): कवयित्री विनम्र भाव से सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह/प्रार्थना करती हैं।
5. अभिकथन (A): ‘नभ’ और ‘गगन’ समानार्थी शब्द हैं।
कारण (R): दोनों का अर्थ ‘आकाश’ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘मत बाँधो’ कविता के रचयिता कौन हैं?
इस कविता की रचयिता हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा हैं।
‘मत बाँधो’ कविता का मुख्य भाव क्या है?
कविता का मुख्य भाव है कि मनुष्य के सपनों एवं कल्पनाओं की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; उनके पंख न काटे जाएँ और उनकी गति न बाँधी जाए, क्योंकि स्वतंत्र सपने ही प्रगति एवं सुंदर संसार की नींव बनते हैं।
‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का क्या अर्थ है?
आरोहण का अर्थ है नीचे से ऊपर की ओर जाना (चढ़ना) तथा अवरोहण का अर्थ है ऊपर से नीचे की ओर आना (उतरना)। ये एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं।
सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
पंख उड़ान एवं स्वतंत्रता के प्रतीक हैं; सपने भी पंखों की भाँति मन को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और कल्पना के आकाश में भ्रमण कराते हैं, इसीलिए सपनों के ‘पंख’ की कल्पना की गई है।
कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
