कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 9 — आदमी का अनुपात प्रश्न उत्तर और भावार्थ
आदमी का अनुपात प्रश्न उत्तर: कक्षा 8 हिंदी मल्हार पाठ 9 का भावार्थ, शब्दार्थ, दोनों मिलान, विशेषण–विशेष्य, भारतीय संख्या-तालिका और रचनात्मक गतिविधियाँ पढ़ें।
स्रोत: NCERT मल्हार पाठ 9 की PDF, मुद्रित पृष्ठ 126–139, पुनर्मुद्रण 2026–27। व्यक्तिगत, कल्पनात्मक और समूह-कार्य वाले उत्तर नमूने हैं; अपने अनुभव के अनुसार लिखें।
- कवि से परिचय – गिरिजा कुमार माथुर
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- शब्दार्थ
- पाठ से – मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना
- सृजन
- कविता की रचना (मिलान)
- विशेषण-विशेष्य एवं संख्यातीत शंख
- पाठ से आगे – आपकी बात
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि से परिचय – गिरिजा कुमार माथुर
गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) का जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ था। उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। गिरिजा कुमार माथुर आकाशवाणी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने कई नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे। उनकी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं, जिनमें मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले और मैं वक्त के हूँ सामने प्रमुख हैं। उन्होंने प्रसिद्ध भावांतर गीत ‘होंगे कामयाब’ (We Shall Overcome) की भी रचना की थी, जो आज भी आशा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। उनकी रचनाओं में आधुनिक संवेदना, चिंतन और मानवीय मूल्यों का गहरा स्वर मिलता है।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता छोटी-छोटी पंक्तियों में कमरे से लेकर असंख्य ब्रह्मांडों तक के विस्तार को दिखाते हुए मनुष्य की लघुता एवं उसके अहंकार के बीच के ‘अनुपात’ पर मार्मिक व्यंग्य करती है।
कमरे से छोटे —
कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
नगर है प्रदेश में
प्रदेश कई देश में
देश कई पृथ्वी पर
अनगिन नक्षत्रों में
पृथ्वी एक छोटी
करोड़ों में एक ही
सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की
लाखों ब्रह्मांडों में
अपना एक ब्रह्मांड
हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ
यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है
— गिरिजा कुमार माथुर
भावार्थ
गिरिजा कुमार माथुर कमरे के दो व्यक्तियों से शुरुआत करके घर, मुहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी और विराट सृष्टि तक दृष्टि फैलाते हैं। इस विस्तार में मनुष्य का शारीरिक अस्तित्व छोटा है, फिर भी वह ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में उलझकर दूसरों पर अधिकार जताता है। ‘दीवारें’ भेदभाव और मानसिक अलगाव की प्रतीक हैं। एक ही कमरे में दो दुनियाएँ बनाने से साथ रहते हुए भी मन से बँटे रहने पर व्यंग्य है।
कविता विनम्रता, सहयोग और व्यापक दृष्टि की प्रेरणा देती है। छोटा आकार मनुष्य के सम्मान या मूल्य को कम नहीं करता। विविधता और अलग राय अपने-आप बुराई नहीं; दूसरों को कमतर मानना तथा अविश्वास से दूरी बनाना आलोचना का विषय है।
काव्य और विज्ञान: ‘लाखों ब्रह्मांड’ तथा ‘कितनी ही पृथ्वियाँ’ विराटता की काव्यात्मक कल्पना के रूप में पढ़ें, प्रमाणित खगोलीय संख्या के रूप में नहीं। आधुनिक विज्ञान में हमारी आकाशगंगा ब्रह्मांड के भीतर अनेक आकाशगंगाओं में एक है; आकाशगंगा और ब्रह्मांड एक ही वस्तु नहीं। NASA — ब्रह्मांड का परिचय।
- व्यक्ति
- कमरा
- घर
- मुहल्ला
- नगर
- प्रदेश
- देश
- पृथ्वी
- नभ गंगा / विराट सृष्टि
यह पढ़ने का क्रम-संकेत है, मापानुसार खगोलीय मानचित्र नहीं। कविता के व्यापक बिंब का उद्देश्य अहंकार पर विचार कराना है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अनुपात | दो वस्तुओं के बीच का सापेक्ष मान/तुलना |
| मुहल्ला | नगर का एक छोटा भाग, पड़ोस |
| प्रदेश | राज्य, क्षेत्र |
| अनगिन | जिसकी गिनती न हो सके, असंख्य |
| नक्षत्र | यहाँ तारों/आकाशीय विस्तार का काव्य-संदर्भ; ग्रह और तारा अलग वैज्ञानिक श्रेणियाँ हैं |
| परिधि | घेरा, सीमा-रेखा |
| नभ गंगा | आकाशगंगा (Milky Way) |
| ब्रह्मांड | समूचा विश्व, सृष्टि (Universe) |
| भूमि | धरती, भूखंड |
| सृष्टि | संसार, रचना |
| विराट | अत्यंत विशाल, असीम |
| ईर्ष्या | जलन, द्वेष |
| अहं / अहंकार | घमंड, मैं-पन |
| स्वार्थ | अपना ही हित देखना |
| घृणा | नफरत, द्वेष |
| अविश्वास | भरोसे का अभाव, संदेह |
| लीन | डूबा हुआ, मग्न |
| संख्यातीत | संख्या से परे, असंख्य |
| शंख | (यहाँ) 100 पद्म की संख्या (1017) का प्रतीक |
| दूजा | दूसरा |
| स्वामी | मालिक, अधिपति |
| रचाता है | बनाता है, खड़ी कर देता है |
पाठ से – मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
• पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म• सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा• समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
• पृथ्वी और सूर्य• देश और नगर• घर और कमरा• मानव और ब्रह्मांड
(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
• त्याग, ज्ञान और प्रेम में• सेवा और परोपकार में• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में• उदारता, धर्म और न्याय में
(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
• वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।• वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।• वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
(क) पृथ्वी की छोटी स्थिति कवि विशाल अंतरिक्ष की तुलना में बताते हैं। इससे उसके प्रति विनम्रता और जिम्मेदारी का भाव बनता है। ‘करोड़ों’ यहाँ काव्य-विस्तार है, किसी सूची का गिना हुआ परिणाम नहीं।
(ख) ‘संख्यातीत शंख सी’ बहुत बड़ी संख्या में सीमाएँ बनाने की अतिशयोक्ति है। ये मानसिक/सामाजिक दीवारें हो सकती हैं; स्वयं को दूजे का स्वामी बताना अहंकार का संकेत है।
(ग) देशों का अंतर छोड़िए, एक कमरे के दो व्यक्ति भी स्वार्थ और अविश्वास से अलग दुनियाएँ बना लेते हैं। कवि इसी संकीर्णता पर व्यंग्य करते हैं। स्वस्थ निजता और अलग राय को इस भेदभाव से अलग समझें।
मिलकर करें मिलान
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।
| क्रम | स्तंभ 1 | सही अर्थ (स्तंभ 2) |
|---|---|---|
| 1. | संख्यातीत शंख सी दीवारें | मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 2. | पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक | पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 3. | ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा | मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
| 4. | दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | आदमी के संकुचित होने का प्रतीक |
| 5. | परिधि नभ गंगा की | ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 6. | एक कमरे में दो दुनिया रचाता | सीमित स्थान में भी मतभेद और अलगाव की प्रवृत्ति |
अनुपात
इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने?
पृष्ठ 129 मिलान-कुंजी: 1→3, 2→5, 3→6, 4→2, 5→1, 6→4।
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
अनुमान और कल्पना
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?
(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।
सृजन
(क) विस्तार का मानसिक-चित्र
व्यक्ति → कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → विराट सृष्टि। प्रत्येक स्तर की विशेषता लिखें: घर—परिवार/साथ रहना; मुहल्ला—पड़ोसी; नगर—सार्वजनिक स्थल; देश—विविध भाषाएँ; पृथ्वी—हमारा जीवन-परिवेश। नमूना: मैं कमरे में व्यक्ति हूँ; अनेक स्तरों से जुड़ा हूँ, इसलिए दूसरों के प्रति जिम्मेदारी भी है। कविता की अनेक-ब्रह्मांड वाली कल्पना को आधुनिक वैज्ञानिक नक्शा न बताएँ।
(ख) ‘ब्रह्मांड में मानव’ कहानी का आरंभ
मौलिक कल्पना: अमन अपने छोटे कमरे से रात का आकाश देख रहा था। उसने सोचा—इतने विस्तार में मेरा स्थान क्या है? कल्पना में वह तारों की यात्रा पर निकला और समझा कि दूसरों से सहयोग उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। आगे अपनी कहानी बढ़ाएँ।
(ग) बिना मानसिक दीवारों की दुनिया
नमूना: हर व्यक्ति को बोलने, सीखने और अपनी पहचान के साथ रहने का अवसर होगा। लोगों के विचार अलग हो सकते हैं; मतभेद पर बातचीत होगी, भेदभाव नहीं। घर की सुरक्षा/निजता की वास्तविक दीवार हटाना इस कल्पना का अनिवार्य अर्थ नहीं।
(घ) चित्र-शृंखला
पुस्तक का क्रम: आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। हर अगला दृश्य व्यापक हो; पिछले दृश्य को उसमें छोटे संकेत से दिखाएँ। सभी चित्रों को ‘प्रतीकात्मक, मापानुसार नहीं’ लिखें। वास्तविक अंतरिक्ष का सही माप इस छोटी शृंखला में नहीं समा सकता।
कविता की रचना (मिलान)
नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए—
| क्रम | कविता की विशेषताएँ | सही मिलान (पंक्ति) |
|---|---|---|
| 1. | सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | कमरा है घर में |
| 2. | मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
| 3. | छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 4. | प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है |
| 5. | अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है |
| 6. | मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | यह है अनुपात आदमी का विराट से |
(निदेशक चिह्न ‘—’: “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश एक विराम चिह्न है, जो ठहराव देकर आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान खींचता है। कविता की अन्य विशेषताएँ – कई पंक्तियों में ‘में’ बार-बार आता है और पंक्तियाँ बहुत छोटी-छोटी हैं।)
पृष्ठ 133 विशेषता-मिलान: 1→4, 2→6, 3→2, 4→3, 5→1, 6→5।
कविता का सौंदर्य
(क) छोटे-बड़े स्थानों का क्रम, अनगिन/करोड़ों/लाखों जैसे शब्द और नभ गंगा की परिधि विराटता व्यक्त करते हैं। (ख) नकारात्मक क्रियाओं के स्थान पर सकारात्मक क्रियाओं से अपनी कविता बनाएँ। मौलिक नमूना: ‘मन की दीवारें घटाता है / दूजे का साथी बन जाता है / एक कमरे में / मिलकर संसार सँवारता है।’ ये गिरिजा कुमार माथुर की मूल पंक्तियाँ नहीं।
आपके शब्द और आपके प्रश्न
दो शब्द मिलाकर: नभ+गंगा=नभ गंगा; ज्ञान+दीप=ज्ञानदीप; तारा+लोक=तारालोक। अर्थ और प्रयोग पर चर्चा करें। अपने प्रश्न: आकाशगंगा और ब्रह्मांड में क्या अंतर है? दूसरे ग्रहों पर जीवन कैसे खोजते हैं? स्रोत जाँचकर ज्ञात उत्तर और अनसुलझा प्रश्न अलग लिखें।
विशेषण-विशेष्य एवं संख्यातीत शंख
विशेषण और विशेष्य — पृष्ठ 135
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| दो व्यक्ति कमरे में | दो | व्यक्ति |
| अनगिन नक्षत्रों में | अनगिन | नक्षत्र |
| लाखों ब्रह्मांडों में | लाखों | ब्रह्मांड |
| अपना एक ब्रह्मांड | अपना (सार्वनामिक), एक (संख्यावाचक) | ब्रह्मांड |
| संख्यातीत शंख सी | संख्यातीत | शंख—दिए अधूरे खंड के अंदर। पूरी पंक्ति में ‘संख्यातीत शंख सी’ विशेषण-पद और ‘दीवारें’ मुख्य विशेष्य है। |
| एक कमरे में | एक | कमरा |
| दो दुनिया रचाता है | दो | दुनिया |
संख्यातीत शंख — पुस्तक की संख्या-तालिका
यहाँ शंख शंखवाद्य/समुद्री खोल नहीं, बड़ी संख्या का नाम है। पृष्ठ 136 की प्रणाली में शंख = 100 पद्म = 1017। नीचे बिना अल्पविराम वाले अंकों से शून्य गिनना आसान है:
| नाम | संख्या | घात / शून्य |
|---|---|---|
| एक (इकाई) | 1 | 100; 0 शून्य |
| दस (दहाई) | 10 | 101; 1 शून्य |
| सौ (सैकड़ा) | 100 | 102; 2 शून्य |
| सहस्र (हजार) | 1000 | 103; 3 शून्य |
| दस हजार | 10000 | 104; 4 शून्य |
| लाख | 100000 | 105; 5 शून्य |
| दस लाख | 1000000 | 106; 6 शून्य |
| करोड़ | 10000000 | 107; 7 शून्य |
| दस करोड़ | 100000000 | 108; 8 शून्य |
| अरब | 1000000000 | 109; 9 शून्य |
| दस अरब | 10000000000 | 1010; 10 शून्य |
| खरब | 100000000000 | 1011; 11 शून्य |
| दस खरब | 1000000000000 | 1012; 12 शून्य |
| नील | 10000000000000 | 1013; 13 शून्य |
| दस नील | 100000000000000 | 1014; 14 शून्य |
| पद्म | 1000000000000000 | 1015; 15 शून्य |
| दस पद्म | 10000000000000000 | 1016; 16 शून्य |
| शंख | 100000000000000000 | 1017; 17 शून्य |
| दस शंख | 1000000000000000000 | 1018; 18 शून्य |
| महाशंख | 10000000000000000000 | 1019; 19 शून्य |
तालिका के पाँच उत्तर
- पद्म: 1 के बाद 15 शून्य = 1000000000000000 = 1015। ‘जिस संख्या में 15 शून्य’ का आशय तालिका के अनुसार है, हर मनमानी 15 शून्य वाली संख्या नहीं।
- महाशंख में 19 शून्य: 1 के बाद 19 शून्य = 1019।
- एक लाख में 100 हजार: 100000÷1000=100।
- इस तालिका में सबसे छोटी एक (1=100); सबसे बड़ी महाशंख (1019)। गणित की सभी संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या होने का दावा नहीं।
- दस करोड़ + एक अरब: 100000000+1000000000=1100000000 = 1,10,00,00,000 = एक अरब दस करोड़।
पाठ से आगे – आपकी बात
आपकी बात — पाँच नमूने
(क) काम अधिक और समय कम: बहुत पढ़ाई एक दिन में करने की कोशिश से कठिनाई हुई; कार्य छोटे हिस्सों में बाँटूँगा। (ख) सभी को सुनना, नया विद्यार्थी साथ लेना और सामूहिक काम में अवसर देना व्यापक दृष्टि है। (ग) पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी: पानी/बिजली बचाना, कचरा सही स्थान पर डालना और स्थानीय प्रकृति की रक्षा करना। कविता के शब्द से दूसरे ग्रहों पर जीवन असंभव सिद्ध नहीं होता। NASA के पृथ्वी-संबंधी तथ्य पढ़ें। (घ) विनम्रता, समानता और सहयोग से दूसरों पर अधिकार जताने की प्रवृत्ति घट सकती है। (ङ) डर, संकोच और गलती मानने की झिझक—छोटे अभ्यास, भरोसेमंद साथी और खुली बातचीत से काम करूँगा। अपने वास्तविक अनुभव से बदलें।
समावेशन और समानता
विचार-चर्चा में उम्र, लिंग, विश्वास, रूप, रंग, आकार या सहायता की जरूरत के कारण अवसर न रोकने पर बात करें। हर व्यक्ति सम्मान का पात्र है। अलग जरूरत के अनुसार सुलभ सामग्री/सहयोग समान अवसर का हिस्सा है।
आज की पहेली — पृष्ठ 137
यह उलझी रेखाएँ पहचानने का चित्र-अभ्यास है, वास्तविक अंतरिक्ष मार्ग या ग्रहों का वैज्ञानिक नक्शा नहीं। किसी एक यान से आरंभ करें, उसकी रेखा की दिशा लगातार देखते हुए अंत तक जाएँ। जहाँ रेखाएँ कटती हैं, दूसरे मार्ग पर न मुड़ें; उसी रेखा को जारी रखें। चार यानों के मार्ग अलग रंग से ट्रेस करके साथी/शिक्षक से मिलाएँ। बिना रेखा का अंत जाँचे ग्रह का नाम अनुमान से न लिखें।
झरोखे से — होंगे कामयाब
पृष्ठ 138 पर गिरिजा कुमार माथुर का भावांतर गीत विश्वास, शांति, निर्भयता और साथ चलने का संदेश देता है। मुख्य कविता भेदभाव/अहंकार की आलोचना करती है; गीत सामूहिक आशा व्यक्त करता है। दोनों को सहयोग के भाव से जोड़ सकते हैं।
साझी समझ और खोजबीन
कवि की दूसरी रचना पुस्तकालय से पढ़ें और शीर्षक/स्रोत सहित साझा करें। पृष्ठ 139 के गीत, अंतरिक्ष और मंगलयान-संबंधी NCERT वीडियो-संदर्भों को अध्ययन के लिए देखें। तथ्य, कविता और कल्पना को अलग रखें।
ClearStudy के अतिरिक्त प्रश्न
यह अतिरिक्त अभ्यास NCERT के मुद्रित अभ्यास से अलग है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता में किन दो वस्तुओं की तुलना की गई है?
2. ‘नभ गंगा’ से कवि का क्या आशय है?
3. कविता में मनुष्य की कौन-कौन सी नकारात्मक भावनाएँ बताई गई हैं?
4. ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ से कवि क्या कहना चाहता है?
5. कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. कविता में कवि ने मनुष्य की लघुता को किस प्रकार क्रमबद्ध रूप से दिखाया है? समझाइए।
7. कविता मनुष्य के अहंकार पर किस प्रकार व्यंग्य करती है? अपने शब्दों में लिखिए।
8. इस कविता की प्रमुख काव्यगत विशेषताएँ लिखिए।
ClearStudy अभ्यास MCQ और अभिकथन-कारण
1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) हरिवंशराय बच्चन
2. कविता के अनुसार पृथ्वी कैसी है?
(क) सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण
(ख) करोड़ों में एक छोटी
(ग) ब्रह्मांड से भी बड़ी
(घ) सूर्य के समान
3. ‘नभ गंगा’ का अर्थ है—
(क) पवित्र नदी गंगा
(ख) आकाशगंगा
(ग) वर्षा
(घ) समुद्र
4. कविता के अनुसार मनुष्य किन भावों में लीन रहता है?
(क) प्रेम, दया, करुणा
(ख) त्याग और सेवा
(ग) ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास
(घ) ज्ञान और न्याय
5. ‘शंख’ भारतीय संख्या प्रणाली में किस संख्या का सूचक है?
(क) 1015
(ख) 1017
(ग) 1019
(घ) 109
6. कविता में ‘विराट’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) मनुष्य के लिए
(ख) पृथ्वी के लिए
(ग) अनंत ब्रह्मांड/सृष्टि के लिए
(घ) कमरे के लिए
7. ‘दीवारें उठाना’ मुख्यतः किसका प्रतीक है?
(क) घर बनाना
(ख) भेदभाव एवं अलगाव की कृत्रिम सीमाएँ
(ग) किला बनाना
(घ) खेती करना
8. “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश (—) चिह्न को क्या कहते हैं?
(क) अल्पविराम
(ख) निदेशक चिह्न
(ग) प्रश्नवाचक चिह्न
(घ) विस्मयादिबोधक चिह्न
9. कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति का सौंदर्य
(ख) मनुष्य की लघुता तथा उसके अहंकार पर व्यंग्य
(ग) देशप्रेम
(घ) ऋतु-वर्णन
10. गिरिजा कुमार माथुर द्वारा रचित प्रसिद्ध भावांतर गीत कौन-सा है?
(क) सारे जहाँ से अच्छा
(ख) होंगे कामयाब
(ग) वंदे मातरम्
(घ) झंडा ऊँचा रहे हमारा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म है।
कारण (R): पृथ्वी स्वयं करोड़ों नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है।
2. अभिकथन (A): कविता में मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य किया गया है।
कारण (R): मनुष्य अपने को दूजे का स्वामी बताता है और दीवारें उठाता है।
3. अभिकथन (A): ‘नभ गंगा’ का अर्थ पवित्र नदी गंगा है।
कारण (R): कविता में ‘परिधि नभ गंगा की’ पंक्ति सबको समेटने वाली विशालता दर्शाती है।
4. अभिकथन (A): कविता बहुत छोटी-छोटी पंक्तियों में रची गई है।
कारण (R): इसमें कई पंक्तियों में ‘में’ बार-बार आता है।
5. अभिकथन (A): मनुष्य एक कमरे में भी दो दुनिया रच लेता है।
कारण (R): आपसी अविश्वास, स्वार्थ और अहं के कारण लोग साथ रहते हुए भी मन से बँटे रहते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- विस्तार-क्रम (कमरा → घर → … → ब्रह्मांड) क्रमबद्ध याद रखें – इस पर सीधे प्रश्न आते हैं।
- मनुष्य की पाँच नकारात्मक भावनाएँ – ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास – ज्यों-की-त्यों लिखें।
- ‘नभ गंगा = आकाशगंगा’ और ‘शंख = 1017’ जैसे तथ्य भावार्थ में जोड़ने से उत्तर सशक्त होता है।
- व्यंग्य, अतिशयोक्ति एवं प्रश्न शैली जैसी काव्यगत विशेषताएँ उदाहरण-सहित लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘नभ गंगा’ को नदी गंगा समझ लेना – यह आकाशगंगा है।
- कविता का भाव केवल ‘प्रकृति-वर्णन’ बता देना – इसका मूल भाव मनुष्य की लघुता एवं अहंकार पर व्यंग्य है।
- ‘दीवारें उठाना’ को केवल ईंट की दीवार मान लेना – यह भेदभाव की मानसिक दीवारों का प्रतीक है।
- कवि का नाम गलत लिखना – सही नाम ‘गिरिजा कुमार माथुर’ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब’ की भी रचना की थी।
कविता में किन दो चीज़ों का अनुपात दिखाया गया है?
कविता में मानव और विराट ब्रह्मांड का अनुपात दिखाया गया है, जिससे मनुष्य की लघुता स्पष्ट होती है।
‘नभ गंगा’ का क्या अर्थ है?
‘नभ गंगा’ का अर्थ आकाशगंगा (Milky Way) है, जो असंख्य तारों एवं ग्रहों को अपनी परिधि में समेटे है।
कविता का मुख्य संदेश क्या है?
विराट सृष्टि के सामने मनुष्य अत्यंत छोटा है, इसलिए उसे अहंकार, स्वार्थ और भेदभाव त्यागकर प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनानी चाहिए।
कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
