कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 9 – आदमी का अनुपात (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 9 ‘आदमी का अनुपात’ (कवि – गिरिजा कुमार माथुर) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों एवं अभ्यास-प्रश्नों के उत्तर।
- कवि से परिचय – गिरिजा कुमार माथुर
- कविता (मूल पाठ)
- भावार्थ
- शब्दार्थ
- पाठ से – मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना
- सृजन
- कविता की रचना (मिलान)
- विशेषण-विशेष्य एवं संख्यातीत शंख
- पाठ से आगे – आपकी बात
- अतिरिक्त प्रश्न
- अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कवि से परिचय – गिरिजा कुमार माथुर
गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) का जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ था। उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। गिरिजा कुमार माथुर आकाशवाणी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने कई नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे। उनकी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं, जिनमें मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले और मैं वक्त के हूँ सामने प्रमुख हैं। उन्होंने प्रसिद्ध भावांतर गीत ‘होंगे कामयाब’ (We Shall Overcome) की भी रचना की थी, जो आज भी आशा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। उनकी रचनाओं में आधुनिक संवेदना, चिंतन और मानवीय मूल्यों का गहरा स्वर मिलता है।
कविता (मूल पाठ)
यह कविता छोटी-छोटी पंक्तियों में कमरे से लेकर असंख्य ब्रह्मांडों तक के विस्तार को दिखाते हुए मनुष्य की लघुता एवं उसके अहंकार के बीच के ‘अनुपात’ पर मार्मिक व्यंग्य करती है।
कमरे से छोटे —
कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
नगर है प्रदेश में
प्रदेश कई देश में
देश कई पृथ्वी पर
अनगिन नक्षत्रों में
पृथ्वी एक छोटी
करोड़ों में एक ही
सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की
लाखों ब्रह्मांडों में
अपना एक ब्रह्मांड
हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ
यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है
— गिरिजा कुमार माथुर
भावार्थ
कवि एक साधारण-से दृश्य से कविता आरंभ करता है – एक कमरे में दो व्यक्ति हैं, जो कमरे से भी छोटे हैं। यहाँ से कवि क्रमशः विस्तार बढ़ाता चला जाता है: कमरा घर का एक भाग है, घर मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में और प्रदेश कई देशों के विशाल समूह में समाया है। इस प्रकार छोटे से बड़े की ओर बढ़ते हुए कवि हमें मनुष्य के सीमित अस्तित्व का बोध कराता है।
आगे कवि बताता है कि अनेक देश मिलकर पृथ्वी बनाते हैं, और यही पृथ्वी असंख्य नक्षत्रों के बीच एक अत्यंत छोटा-सा ग्रह है – करोड़ों में बस एक। इन सबको आकाशगंगा (नभ गंगा) की परिधि अपने में समेटे हुए है। फिर वह कहता है कि ऐसे लाखों ब्रह्मांडों के बीच हमारा एक ब्रह्मांड है, और हर ब्रह्मांड में न जाने कितनी ही पृथ्वियाँ, कितनी ही भूमियाँ और कितनी ही सृष्टियाँ हैं।
इस विशाल वर्णन के बाद कवि निष्कर्ष देता है – यही है आदमी का विराट (अनंत सृष्टि) से अनुपात; अर्थात् इस अपार ब्रह्मांड के सामने मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म और तुच्छ है। परंतु इतना छोटा होकर भी मनुष्य ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसी नकारात्मक भावनाओं में डूबा रहता है।
कवि व्यंग्य करता है कि यही अहंकारी मनुष्य अनगिनत (संख्यातीत शंख जैसी) कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है, स्वयं को दूसरों का स्वामी घोषित करता है, और देशों के बीच की दूरी तो दूर, एक ही कमरे में रहते हुए भी दो अलग-अलग दुनियाएँ (मतभेद एवं अलगाव) रच देता है। इस प्रकार कविता हमें अपनी लघुता पहचानकर अहंकार त्यागने तथा प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनाने की प्रेरणा देती है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अनुपात | दो वस्तुओं के बीच का सापेक्ष मान/तुलना |
| मुहल्ला | नगर का एक छोटा भाग, पड़ोस |
| प्रदेश | राज्य, क्षेत्र |
| अनगिन | जिसकी गिनती न हो सके, असंख्य |
| नक्षत्र | तारा, ग्रह आदि आकाशीय पिंड |
| परिधि | घेरा, सीमा-रेखा |
| नभ गंगा | आकाशगंगा (Milky Way) |
| ब्रह्मांड | समूचा विश्व, सृष्टि (Universe) |
| भूमि | धरती, भूखंड |
| सृष्टि | संसार, रचना |
| विराट | अत्यंत विशाल, असीम |
| ईर्ष्या | जलन, द्वेष |
| अहं / अहंकार | घमंड, मैं-पन |
| स्वार्थ | अपना ही हित देखना |
| घृणा | नफरत, द्वेष |
| अविश्वास | भरोसे का अभाव, संदेह |
| लीन | डूबा हुआ, मग्न |
| संख्यातीत | संख्या से परे, असंख्य |
| शंख | (यहाँ) 100 पद्म की संख्या (1017) का प्रतीक |
| दूजा | दूसरा |
| स्वामी | मालिक, अधिपति |
| रचाता है | बनाता है, खड़ी कर देता है |
पाठ से – मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
• पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म• सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा• समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
• पृथ्वी और सूर्य• देश और नगर• घर और कमरा• मानव और ब्रह्मांड
(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
• त्याग, ज्ञान और प्रेम में• सेवा और परोपकार में• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में• उदारता, धर्म और न्याय में
(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
• वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।• वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।• वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए—
(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।”
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”
मिलकर करें मिलान
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।
| क्रम | स्तंभ 1 | सही अर्थ (स्तंभ 2) |
|---|---|---|
| 1. | संख्यातीत शंख सी दीवारें | मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 2. | पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक | पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 3. | ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा | मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
| 4. | दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | आदमी के संकुचित होने का प्रतीक |
| 5. | परिधि नभ गंगा की | ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 6. | एक कमरे में दो दुनिया रचाता | सीमित स्थान में भी मतभेद और अलगाव की प्रवृत्ति |
अनुपात
इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने?
सोच-विचार के लिए
कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
अनुमान और कल्पना
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?
(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।
सृजन
(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
(घ) एक चित्र शृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
कविता की रचना (मिलान)
नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए—
| क्रम | कविता की विशेषताएँ | सही मिलान (पंक्ति) |
|---|---|---|
| 1. | सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | कमरा है घर में |
| 2. | मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
| 3. | छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 4. | प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है |
| 5. | अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है |
| 6. | मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | यह है अनुपात आदमी का विराट से |
(निदेशक चिह्न ‘—’: “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश एक विराम चिह्न है, जो ठहराव देकर आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान खींचता है। कविता की अन्य विशेषताएँ – अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है और पंक्तियाँ बहुत छोटी-छोटी हैं।)
विशेषण-विशेष्य एवं संख्यातीत शंख
विशेषण और विशेष्य (पाठ से आगे)
नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए।
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| दो व्यक्ति कमरे में | दो | व्यक्ति |
| अनगिन नक्षत्रों में | अनगिन | नक्षत्रों |
| लाखों ब्रह्मांडों में | लाखों | ब्रह्मांडों |
| अपना एक ब्रह्मांड | एक | ब्रह्मांड |
| संख्यातीत शंख सी | संख्यातीत | शंख |
| एक कमरे में | एक | कमरे |
| दो दुनिया रचाता है | दो | दुनिया |
संख्यातीत शंख (भारतीय संख्या प्रणाली पर आधारित प्रश्न)
पाठ में दी गई तालिका के अनुसार – शंख का अर्थ है 100 पद्म की संख्या (1017)।
1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?
4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
पाठ से आगे – आपकी बात
(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो— जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।
(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत— किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)
(ग) ‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’— इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?
(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?
(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे— डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता में किन दो वस्तुओं की तुलना की गई है?
2. ‘नभ गंगा’ से कवि का क्या आशय है?
3. कविता में मनुष्य की कौन-कौन सी नकारात्मक भावनाएँ बताई गई हैं?
4. ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ से कवि क्या कहना चाहता है?
5. कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
6. कविता में कवि ने मनुष्य की लघुता को किस प्रकार क्रमबद्ध रूप से दिखाया है? समझाइए।
7. कविता मनुष्य के अहंकार पर किस प्रकार व्यंग्य करती है? अपने शब्दों में लिखिए।
8. इस कविता की प्रमुख काव्यगत विशेषताएँ लिखिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?
(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ख) गिरिजा कुमार माथुर
(ग) रामधारी सिंह दिनकर
(घ) हरिवंशराय बच्चन
2. कविता के अनुसार पृथ्वी कैसी है?
(क) सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण
(ख) करोड़ों में एक छोटी
(ग) ब्रह्मांड से भी बड़ी
(घ) सूर्य के समान
3. ‘नभ गंगा’ का अर्थ है—
(क) पवित्र नदी गंगा
(ख) आकाशगंगा
(ग) वर्षा
(घ) समुद्र
4. कविता के अनुसार मनुष्य किन भावों में लीन रहता है?
(क) प्रेम, दया, करुणा
(ख) त्याग और सेवा
(ग) ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास
(घ) ज्ञान और न्याय
5. ‘शंख’ भारतीय संख्या प्रणाली में किस संख्या का सूचक है?
(क) 1015
(ख) 1017
(ग) 1019
(घ) 109
6. कविता में ‘विराट’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) मनुष्य के लिए
(ख) पृथ्वी के लिए
(ग) अनंत ब्रह्मांड/सृष्टि के लिए
(घ) कमरे के लिए
7. ‘दीवारें उठाना’ मुख्यतः किसका प्रतीक है?
(क) घर बनाना
(ख) भेदभाव एवं अलगाव की कृत्रिम सीमाएँ
(ग) किला बनाना
(घ) खेती करना
8. “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश (—) चिह्न को क्या कहते हैं?
(क) अल्पविराम
(ख) निदेशक चिह्न
(ग) प्रश्नवाचक चिह्न
(घ) विस्मयादिबोधक चिह्न
9. कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति का सौंदर्य
(ख) मनुष्य की लघुता तथा उसके अहंकार पर व्यंग्य
(ग) देशप्रेम
(घ) ऋतु-वर्णन
10. गिरिजा कुमार माथुर द्वारा रचित प्रसिद्ध भावांतर गीत कौन-सा है?
(क) सारे जहाँ से अच्छा
(ख) होंगे कामयाब
(ग) वंदे मातरम्
(घ) झंडा ऊँचा रहे हमारा
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म है।
कारण (R): पृथ्वी स्वयं करोड़ों नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है।
2. अभिकथन (A): कविता में मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य किया गया है।
कारण (R): मनुष्य अपने को दूजे का स्वामी बताता है और दीवारें उठाता है।
3. अभिकथन (A): ‘नभ गंगा’ का अर्थ पवित्र नदी गंगा है।
कारण (R): कविता में ‘परिधि नभ गंगा की’ पंक्ति सबको समेटने वाली विशालता दर्शाती है।
4. अभिकथन (A): कविता बहुत छोटी-छोटी पंक्तियों में रची गई है।
कारण (R): इसमें अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है।
5. अभिकथन (A): मनुष्य एक कमरे में भी दो दुनिया रच लेता है।
कारण (R): आपसी अविश्वास, स्वार्थ और अहं के कारण लोग साथ रहते हुए भी मन से बँटे रहते हैं।
परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें
परीक्षा-उपयोगी सुझाव
- विस्तार-क्रम (कमरा → घर → … → ब्रह्मांड) क्रमबद्ध याद रखें – इस पर सीधे प्रश्न आते हैं।
- मनुष्य की पाँच नकारात्मक भावनाएँ – ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास – ज्यों-की-त्यों लिखें।
- ‘नभ गंगा = आकाशगंगा’ और ‘शंख = 1017’ जैसे तथ्य भावार्थ में जोड़ने से उत्तर सशक्त होता है।
- व्यंग्य, अतिशयोक्ति एवं प्रश्न शैली जैसी काव्यगत विशेषताएँ उदाहरण-सहित लिखें।
सामान्य भूलें (इनसे बचें)
- ‘नभ गंगा’ को नदी गंगा समझ लेना – यह आकाशगंगा है।
- कविता का भाव केवल ‘प्रकृति-वर्णन’ बता देना – इसका मूल भाव मनुष्य की लघुता एवं अहंकार पर व्यंग्य है।
- ‘दीवारें उठाना’ को केवल ईंट की दीवार मान लेना – यह भेदभाव की मानसिक दीवारों का प्रतीक है।
- कवि का नाम गलत लिखना – सही नाम ‘गिरिजा कुमार माथुर’ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब’ की भी रचना की थी।
कविता में किन दो चीज़ों का अनुपात दिखाया गया है?
कविता में मानव और विराट ब्रह्मांड का अनुपात दिखाया गया है, जिससे मनुष्य की लघुता स्पष्ट होती है।
‘नभ गंगा’ का क्या अर्थ है?
‘नभ गंगा’ का अर्थ आकाशगंगा (Milky Way) है, जो असंख्य तारों एवं ग्रहों को अपनी परिधि में समेटे है।
कविता का मुख्य संदेश क्या है?
विराट सृष्टि के सामने मनुष्य अत्यंत छोटा है, इसलिए उसे अहंकार, स्वार्थ और भेदभाव त्यागकर प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनानी चाहिए।
कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
