कक्षा 8 हिंदी (मल्हार) अध्याय 9 – आदमी का अनुपात (कविता) प्रश्न-उत्तर एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की नई पुस्तक मल्हार (काव्य) के अध्याय 9 ‘आदमी का अनुपात’ (कवि – गिरिजा कुमार माथुर) का पूरा समाधान देता है – कविता का मूल पाठ, भावार्थ, शब्दार्थ तथा पाठ की सभी गतिविधियों एवं अभ्यास-प्रश्नों के उत्तर।

कक्षा: 8 विषय: हिंदी पुस्तक: मल्हार (काव्य) अध्याय: 9 कवि: गिरिजा कुमार माथुर विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि से परिचय – गिरिजा कुमार माथुर

गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) का जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ था। उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। गिरिजा कुमार माथुर आकाशवाणी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने कई नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे। उनकी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं, जिनमें मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले और मैं वक्त के हूँ सामने प्रमुख हैं। उन्होंने प्रसिद्ध भावांतर गीत ‘होंगे कामयाब’ (We Shall Overcome) की भी रचना की थी, जो आज भी आशा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। उनकी रचनाओं में आधुनिक संवेदना, चिंतन और मानवीय मूल्यों का गहरा स्वर मिलता है।

कविता (मूल पाठ)

यह कविता छोटी-छोटी पंक्तियों में कमरे से लेकर असंख्य ब्रह्मांडों तक के विस्तार को दिखाते हुए मनुष्य की लघुता एवं उसके अहंकार के बीच के ‘अनुपात’ पर मार्मिक व्यंग्य करती है।

दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे —

कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
नगर है प्रदेश में
प्रदेश कई देश में
देश कई पृथ्वी पर
अनगिन नक्षत्रों में
पृथ्वी एक छोटी
करोड़ों में एक ही
सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की
लाखों ब्रह्मांडों में
अपना एक ब्रह्मांड
हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ

यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है
— गिरिजा कुमार माथुर

भावार्थ

कवि एक साधारण-से दृश्य से कविता आरंभ करता है – एक कमरे में दो व्यक्ति हैं, जो कमरे से भी छोटे हैं। यहाँ से कवि क्रमशः विस्तार बढ़ाता चला जाता है: कमरा घर का एक भाग है, घर मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में और प्रदेश कई देशों के विशाल समूह में समाया है। इस प्रकार छोटे से बड़े की ओर बढ़ते हुए कवि हमें मनुष्य के सीमित अस्तित्व का बोध कराता है।

आगे कवि बताता है कि अनेक देश मिलकर पृथ्वी बनाते हैं, और यही पृथ्वी असंख्य नक्षत्रों के बीच एक अत्यंत छोटा-सा ग्रह है – करोड़ों में बस एक। इन सबको आकाशगंगा (नभ गंगा) की परिधि अपने में समेटे हुए है। फिर वह कहता है कि ऐसे लाखों ब्रह्मांडों के बीच हमारा एक ब्रह्मांड है, और हर ब्रह्मांड में न जाने कितनी ही पृथ्वियाँ, कितनी ही भूमियाँ और कितनी ही सृष्टियाँ हैं।

इस विशाल वर्णन के बाद कवि निष्कर्ष देता है – यही है आदमी का विराट (अनंत सृष्टि) से अनुपात; अर्थात् इस अपार ब्रह्मांड के सामने मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म और तुच्छ है। परंतु इतना छोटा होकर भी मनुष्य ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसी नकारात्मक भावनाओं में डूबा रहता है।

कवि व्यंग्य करता है कि यही अहंकारी मनुष्य अनगिनत (संख्यातीत शंख जैसी) कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है, स्वयं को दूसरों का स्वामी घोषित करता है, और देशों के बीच की दूरी तो दूर, एक ही कमरे में रहते हुए भी दो अलग-अलग दुनियाएँ (मतभेद एवं अलगाव) रच देता है। इस प्रकार कविता हमें अपनी लघुता पहचानकर अहंकार त्यागने तथा प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनाने की प्रेरणा देती है।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
अनुपातदो वस्तुओं के बीच का सापेक्ष मान/तुलना
मुहल्लानगर का एक छोटा भाग, पड़ोस
प्रदेशराज्य, क्षेत्र
अनगिनजिसकी गिनती न हो सके, असंख्य
नक्षत्रतारा, ग्रह आदि आकाशीय पिंड
परिधिघेरा, सीमा-रेखा
नभ गंगाआकाशगंगा (Milky Way)
ब्रह्मांडसमूचा विश्व, सृष्टि (Universe)
भूमिधरती, भूखंड
सृष्टिसंसार, रचना
विराटअत्यंत विशाल, असीम
ईर्ष्याजलन, द्वेष
अहं / अहंकारघमंड, मैं-पन
स्वार्थअपना ही हित देखना
घृणानफरत, द्वेष
अविश्वासभरोसे का अभाव, संदेह
लीनडूबा हुआ, मग्न
संख्यातीतसंख्या से परे, असंख्य
शंख(यहाँ) 100 पद्म की संख्या (1017) का प्रतीक
दूजादूसरा
स्वामीमालिक, अधिपति
रचाता हैबनाता है, खड़ी कर देता है

पाठ से – मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?

• पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म• सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा• समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला

उत्तर• ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म।कविता पूरे ब्रह्मांड के विशाल विस्तार के सामने मनुष्य को अत्यंत छोटा एवं नगण्य बताती है – “यह है अनुपात / आदमी का विराट से”।

(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?

• पृथ्वी और सूर्य• देश और नगर• घर और कमरा• मानव और ब्रह्मांड

उत्तर• मानव और ब्रह्मांड।कविता का केंद्रीय भाव मनुष्य की लघुता और ब्रह्मांड की विशालता के बीच के अनुपात को दिखाना है।

(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?

• त्याग, ज्ञान और प्रेम में• सेवा और परोपकार में• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में• उदारता, धर्म और न्याय में

उत्तर• ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में।कविता में स्पष्ट कहा गया है – “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन”, अर्थात् मनुष्य इन्हीं नकारात्मक भावों में डूबा रहता है।

(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?

• वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।• वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।• वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

उत्तर• वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है। (तथा • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।)ब्रह्मांड के सामने अत्यंत सूक्ष्म होते हुए भी मनुष्य अपनी लघुता भूलकर अहंकार में पड़ जाता है और स्वयं को दूसरों का स्वामी बताने लगता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तरहमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि ये सीधे कविता की पंक्तियों से प्रमाणित होते हैं – “यह है अनुपात आदमी का विराट से” तथा “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा…”।मित्रों से चर्चा करने पर सबको यह समझ में आता है कि कविता का मूल भाव मनुष्य की लघुता और उसके अहंकार के अंतर्विरोध को दिखाना है, इसलिए तर्कसंगत उत्तर वही हैं जो इसी भाव की पुष्टि करते हों।

पंक्तियों पर चर्चा

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए—

(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।”

उत्तरइन पंक्तियों में कवि बताता है कि असंख्य तारों एवं ग्रहों के बीच हमारी पृथ्वी एक अत्यंत छोटा-सा ग्रह है – करोड़ों ग्रहों में से केवल एक।इससे एक ओर पृथ्वी की लघुता का बोध होता है, तो दूसरी ओर यह भी संकेत मिलता है कि जीवन से भरी यह पृथ्वी अनोखी एवं दुर्लभ है, इसलिए इसका मूल्य समझना चाहिए।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”

उत्तरयहाँ कवि कहता है कि मनुष्य अनगिनत (शंख जैसी बड़ी संख्या वाली) कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है – अर्थात् जाति, धर्म, रंग, भाषा और सीमाओं के आधार पर भेदभाव एवं अलगाव की दीवारें बनाता है।साथ ही वह अहंकारवश स्वयं को दूसरों का मालिक समझने लगता है, जबकि विराट सृष्टि के सामने वह स्वयं ही नगण्य है।

(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”

उत्तरकवि व्यंग्य करता है कि देशों के बीच के विशाल मतभेदों की तो बात ही क्या – मनुष्य तो एक ही छोटे-से कमरे में रहते हुए भी दो अलग-अलग दुनियाएँ बना लेता है।अर्थात् सीमित स्थान में साथ रहते हुए भी लोग आपसी अविश्वास, स्वार्थ और अहं के कारण मन से दूर एवं बँटे रहते हैं। यह मनुष्य की संकीर्ण मानसिकता पर करारा व्यंग्य है।

मिलकर करें मिलान

नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।

क्रमस्तंभ 1सही अर्थ (स्तंभ 2)
1.संख्यातीत शंख सी दीवारेंमनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ
2.पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एकपृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत
3.ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणामनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
4.दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटेआदमी के संकुचित होने का प्रतीक
5.परिधि नभ गंगा कीब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक
6.एक कमरे में दो दुनिया रचातासीमित स्थान में भी मतभेद और अलगाव की प्रवृत्ति

अनुपात

इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने?

उत्तरमानव को आंतरिक रूप से ‘ब्रह्मांड जैसा विस्तार’ पाने के लिए इन गुणों की आवश्यकता है – प्रेम, सहयोग, सहिष्णुता, उदारता, समानता का भाव, करुणा, विनम्रता और विशाल दृष्टिकोण।हमने ये गुण इसलिए चुने क्योंकि ये कविता में वर्णित नकारात्मक भावों (ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास) के ठीक विपरीत हैं। जब मनुष्य अहंकार और संकीर्णता त्यागकर सबको अपनाता है, तभी उसका हृदय विशाल बनता है और वह छोटे शरीर में भी विराट व्यक्तित्व का स्वामी बन जाता है।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—

(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?

उत्तरमानव ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसी नकारात्मक भावनाओं के कारण स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है।इन्हीं भावों के वशीभूत होकर वह जाति, धर्म, रंग, देश और ‘मेरा-तेरा’ की कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है और स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ एवं उनका स्वामी मान बैठता है।

(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तरमैं पंक्ति चुनूँगा/चुनूँगी – “यह है अनुपात / आदमी का विराट से”।यह पंक्ति प्रतिदिन यह याद दिलाएगी कि इस विशाल ब्रह्मांड के सामने मैं बहुत छोटा हूँ, इसलिए मुझे अहंकार छोड़कर विनम्र, सहयोगी और उदार बने रहना चाहिए। (विद्यार्थी अपनी पसंद की पंक्ति एवं कारण भी लिख सकते हैं।)

(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?

उत्तरमुझे इस कविता का भाव मुख्यतः व्यंग्य एवं चिंता से युक्त लगा, जिसमें करुणा भी छिपी है।कवि क्रोधित हुए बिना, शांत भाव से मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य करता है और चिंता प्रकट करता है कि इतना सूक्ष्म प्राणी भी भेदभाव एवं अलगाव क्यों फैलाता है। यह कोमल व्यंग्य पाठक को आहत किए बिना सोचने और सुधरने की प्रेरणा देता है।

(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।

उत्तर‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर की दीवारें बनाना नहीं है, बल्कि मन में बनने वाली अदृश्य दीवारों से भी इसका संबंध है।ये मानसिक दीवारें हैं – भेदभाव, अविश्वास, ऊँच-नीच, जाति-धर्म और स्वार्थ की दीवारें, जो मनुष्य को मनुष्य से अलग कर देती हैं। कवि इन्हीं अदृश्य दीवारों की ओर संकेत करता है, जो असली ईंट की दीवारों से कहीं अधिक हानिकारक हैं।

(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?

उत्तरसहयोग एवं सहिष्णुता ने मानव समाज को सदा आगे बढ़ाया है। उदाहरणस्वरूप – गाँवों में लोग मिलकर श्रमदान से तालाब, सड़क और विद्यालय बनाते हैं, जिससे पूरे गाँव का जीवन सुधरता है।महात्मा गांधी ने अहिंसा एवं सहिष्णुता के बल पर लोगों को एकजुट कर स्वतंत्रता-संग्राम को सफल बनाया। आपदा के समय भिन्न-भिन्न धर्मों और प्रांतों के लोग मिलकर एक-दूसरे की सहायता करते हैं। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि सहयोग और सहनशीलता से समाज में शांति, प्रगति एवं एकता आती है।

अनुमान और कल्पना

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—

(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?

उत्तरमैं मनुष्य की ईर्ष्या, घमंड, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसी आदतों को बदलना चाहूँगा/चाहूँगी।इनके स्थान पर मैं प्रेम, सहयोग, ईमानदारी और सहिष्णुता का भाव भर देना चाहूँगा/चाहूँगी, क्योंकि यही आदतें युद्ध, भेदभाव और दुख का कारण बनती हैं; इन्हें बदलने से धरती पर शांति एवं समानता आएगी।

(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?

उत्तरमैं अपने घर को सबसे अधिक याद करूँगा/करूँगी, क्योंकि वहीं मेरे माता-पिता, भाई-बहन और अपनापन है।अंतरिक्ष के सूने विस्तार में घर की गर्माहट, परिवार का स्नेह और जानी-पहचानी चीज़ें सबसे अधिक प्रिय एवं स्मरणीय लगेंगी। (विद्यार्थी अपनी कल्पना के अनुसार उत्तर लिख सकते हैं।)

(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।

उत्तर(कल्पनात्मक) अपने कमरे से निकलकर मैं घर, मुहल्ले और नगर को पार करते हुए ऊपर उठती गई। पृथ्वी एक नीली गेंद-सी छोटी दिखाई दी, फिर सूर्य, चंद्र और असंख्य तारे पीछे छूटते गए।आकाशगंगा को पार कर मैंने लाखों ब्रह्मांड देखे, जिनमें कितनी ही पृथ्वियाँ और सृष्टियाँ थीं। उस अनंत विस्तार में मुझे लगा कि मैं कितनी छोटी हूँ, फिर भी इस विराट का हिस्सा हूँ। वापस लौटकर मैंने ठान लिया कि अब कभी किसी से घृणा या भेदभाव नहीं करूँगी। (विद्यार्थी अपनी कल्पना से वृत्तांत और बढ़ा सकते हैं।)

(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”

उत्तर“मैं ब्रह्मांड में एक नन्हा-सा कण हूँ। असंख्य तारों और लाखों ब्रह्मांडों के सामने मेरा अस्तित्व बूँद के समान है।फिर भी मैं इस विराट सृष्टि का अनोखा भाग हूँ, जिसके पास सोचने, प्रेम करने और अच्छे कर्म करने की शक्ति है। इसलिए मैं अहंकार छोड़कर विनम्रता से जिऊँगा/जिऊँगी और इस छोटी-सी, सुंदर पृथ्वी की रक्षा करूँगा/करूँगी।”

(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?

उत्तरमैं ऐसे व्यक्ति को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी जो दयालु, ज्ञानी, सहनशील और शांतिप्रिय हो – जैसे कोई महान वैज्ञानिक, शिक्षक या समाज-सुधारक।क्योंकि ऐसा व्यक्ति उस संसार में पृथ्वी की अच्छाई, ज्ञान और सहयोग का संदेश पहुँचाएगा तथा वहाँ भी प्रेम एवं शांति का विस्तार करेगा। (विद्यार्थी अपने विचार से उत्तर दे सकते हैं।)

(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?

उत्तरयदि एक दिन के लिए ये भाव समाप्त हो जाएँ, तो उस दिन कोई झगड़ा, युद्ध या भेदभाव नहीं होगा; लोग एक-दूसरे की सहायता करेंगे और सब प्रेमपूर्वक रहेंगे।चोरी, धोखा और लालच रुक जाएँगे, चारों ओर शांति, विश्वास और भाईचारा फैल जाएगा। समाज स्वर्ग-सा सुखमय और न्यायपूर्ण बन जाएगा।

(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।

उत्तरचित्र: एक ओर विशाल तारों भरा अंतरिक्ष एवं छोटी-सी नीली पृथ्वी; दूसरी ओर एक छोटे कमरे में अकड़कर खड़ा एक नन्हा व्यक्ति।प्रतीक: घमंड दिखाने के लिए ऊँचा उठा हाथ/मुकुट, और बीच में ईंट की दीवार। शब्द: “यह है अनुपात आदमी का विराट से”, “मैं बड़ा? नहीं—मैं तो एक कण हूँ!”। इस प्रकार पोस्टर विराटता और मनुष्य के भ्रम का अंतर स्पष्ट दर्शाएगा।

सृजन

(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”

उत्तरविस्तार-सीढ़ी: कमरा → घर → मुहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र/आकाशगंगा → ब्रह्मांड → लाखों ब्रह्मांड।प्रत्येक स्तर पर विशेषता – मुहल्ला: पड़ोसियों का अपनापन; नगर: कोई प्रसिद्ध स्थान/बाज़ार; देश: अनेक भाषाएँ एवं विविधता; पृथ्वी: जीवन से भरा अनोखा ग्रह।मैं इस चित्र में कहाँ हूँ? – मैं सबसे नीचे, कमरे में एक छोटे बिंदु के रूप में हूँ, क्योंकि इस विराट विस्तार में मेरा अस्तित्व अत्यंत सूक्ष्म है।

(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।

उत्तर(आरंभ) “एक छोटे-से कमरे में बैठा अमन रात के आकाश को निहार रहा था। तारों को देखते-देखते उसके मन में एक प्रश्न उठा – इस असीम ब्रह्मांड में मैं कहाँ हूँ?तभी एक चमकीली रोशनी ने उसे पुकारा और वह कमरे से निकलकर तारों की यात्रा पर चल पड़ा…” (विद्यार्थी आगे कहानी अपनी कल्पना से बढ़ा सकते हैं।)

(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।

उत्तरबिना दीवार वाली दुनिया में न जाति की दीवार होगी, न धर्म की, न अमीर-गरीब की और न रंग या भाषा की।वहाँ सब एक-दूसरे पर विश्वास करेंगे, मिल-बाँटकर रहेंगे और किसी से भेदभाव नहीं होगा। ऐसी दुनिया प्रेम, समानता और शांति से भरी होगी, जहाँ हर व्यक्ति स्वतंत्र एवं सुरक्षित अनुभव करेगा।

(घ) एक चित्र शृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।

उत्तर(रचनात्मक) पहले चित्र में बड़ा आदमी, फिर कमरे में वही छोटा, घर में और छोटा, नगर में बिंदु जैसा, देश के नक्शे में लगभग अदृश्य, पृथ्वी पर बिल्कुल न दिखने वाला और ब्रह्मांड में पूर्णतः लुप्त।इस घटते आकार से स्पष्ट होगा कि विराट सृष्टि के सामने मनुष्य कितना सूक्ष्म है। (विद्यार्थी अपनी कॉपी में यह चित्र-शृंखला बनाएँ।)

कविता की रचना (मिलान)

नीचे कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए—

क्रमकविता की विशेषताएँसही मिलान (पंक्ति)
1.सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है।कमरा है घर में
2.मुहावरे का प्रयोग किया गया है।अपने को दूजे का स्वामी बताता है
3.छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है।कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में…
4.प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है।देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है
5.अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)।संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
6.मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है।यह है अनुपात आदमी का विराट से

(निदेशक चिह्न ‘—’: “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश एक विराम चिह्न है, जो ठहराव देकर आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान खींचता है। कविता की अन्य विशेषताएँ – अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है और पंक्तियाँ बहुत छोटी-छोटी हैं।)

विशेषण-विशेष्य एवं संख्यातीत शंख

विशेषण और विशेष्य (पाठ से आगे)

नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए।

पंक्तिविशेषणविशेष्य
दो व्यक्ति कमरे मेंदोव्यक्ति
अनगिन नक्षत्रों मेंअनगिननक्षत्रों
लाखों ब्रह्मांडों मेंलाखोंब्रह्मांडों
अपना एक ब्रह्मांडएकब्रह्मांड
संख्यातीत शंख सीसंख्यातीतशंख
एक कमरे मेंएककमरे
दो दुनिया रचाता हैदोदुनिया

संख्यातीत शंख (भारतीय संख्या प्रणाली पर आधारित प्रश्न)

पाठ में दी गई तालिका के अनुसार – शंख का अर्थ है 100 पद्म की संख्या (1017)।

1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?

उत्तर15 शून्य वाली संख्या को पद्म (1,00,00,00,00,00,00,000 = 1015) कहते हैं।

2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?

उत्तरमहाशंख में 19 शून्य होते हैं (1019)।

3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?

उत्तरएक लाख में 100 (सौ) हजार होते हैं (1,00,000 ÷ 1,000 = 100)।

4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?

उत्तरसबसे छोटी संख्या एक (इकाई = 100) और सबसे बड़ी संख्या महाशंख (1019) है।

5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?

उत्तरदस करोड़ (10,00,00,000) + एक अरब (1,00,00,00,000) = 1,10,00,00,000 अर्थात् एक अरब दस करोड़

पाठ से आगे – आपकी बात

(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो— जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।

उत्तरपरीक्षा के समय जब पढ़ने को बहुत सारा पाठ्यक्रम बचा हो और तैयारी के लिए केवल एक-दो दिन ही शेष हों, तब काम और समय का अनुपात बिगड़ जाता है।ऐसी ही स्थिति तब भी होती है जब घर में मेहमान अधिक हों पर भोजन कम पड़ जाए, या एक व्यक्ति पर बहुत-सी ज़िम्मेदारियाँ आ जाएँ।

(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत— किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)

उत्तरहम सबको समान दृष्टि से देखें, किसी को अनदेखा या अलग न करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।मतभेद होने पर शांति से बातचीत करें, दूसरों के विचारों का सम्मान करें, सफाई एवं भलाई के कामों में मिलकर भाग लें – ऐसा करने से परिवार, विद्यालय और मोहल्ले में विशाल एवं उदार दृष्टिकोण विकसित होगा।

(ग) ‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’— इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?

उत्तरइस पंक्ति को पढ़कर मन में हमारी पृथ्वी के प्रति प्रेम, गर्व और उसे बचाने की जिम्मेदारी का भाव जागता है, क्योंकि करोड़ों ग्रहों में केवल यही जीवन से भरी है।पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए मैं अधिक पेड़ लगाऊँगा/लगाऊँगी, पानी एवं बिजली बचाऊँगा/बचाऊँगी, कूड़ा इधर-उधर नहीं फैलाऊँगा/फैलाऊँगी, प्लास्टिक का कम उपयोग करूँगा/करूँगी और प्रदूषण रोकने में सहयोग दूँगा/दूँगी।

(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?

उत्तरमैं विनम्रता, सहयोग, सहनशीलता, समानता का भाव और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे गुणों को प्रबल करूँगा/करूँगी।इन गुणों के कारण मैं किसी को अपने से नीचा नहीं समझूँगा/समझूँगी और न ही स्वयं को किसी का स्वामी मानूँगा/मानूँगी, बल्कि सबके साथ मित्रवत् एवं बराबरी का व्यवहार करूँगा/करूँगी।

(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे— डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?

उत्तरमेरी तीन व्यक्तिगत दीवारें हैं – (1) मंच पर बोलने का डर, (2) नए लोगों से बात करने में संकोच, और (3) गलती मान लेने में झिझक।योजना: रोज़ थोड़ा-थोड़ा बोलने का अभ्यास करूँगा/करूँगी, साथियों से खुलकर बात करूँगा/करूँगी और गलती होने पर तुरंत स्वीकार करूँगा/करूँगी।समाज में भी जाति, धर्म, रंग और ऊँच-नीच की दीवारें होती हैं। इन्हें गिराने के लिए हम सबको समान मानें, भेदभाव न करें, मिल-जुलकर रहें और दूसरों को भी समानता एवं भाईचारे का पाठ सिखाएँ।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता में किन दो वस्तुओं की तुलना की गई है?

उत्तरइस कविता में मनुष्य (आदमी) और विराट ब्रह्मांड की तुलना (अनुपात) की गई है, जिससे मनुष्य की लघुता स्पष्ट होती है।

2. ‘नभ गंगा’ से कवि का क्या आशय है?

उत्तर‘नभ गंगा’ से कवि का आशय आकाशगंगा (Milky Way) से है, जिसकी विशाल परिधि असंख्य तारों एवं ग्रहों को अपने में समेटे हुए है।

3. कविता में मनुष्य की कौन-कौन सी नकारात्मक भावनाएँ बताई गई हैं?

उत्तरकविता में मनुष्य की पाँच नकारात्मक भावनाएँ बताई गई हैं – ईर्ष्या, अहं (घमंड), स्वार्थ, घृणा और अविश्वास।

4. ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तरकवि कहना चाहता है कि मनुष्य एक ही कमरे में साथ रहते हुए भी आपसी मतभेद एवं अलगाव के कारण मन से दो अलग-अलग दुनियाओं में बँट जाता है।

5. कविता का केंद्रीय संदेश क्या है?

उत्तरकविता का संदेश है कि विराट ब्रह्मांड के सामने मनुष्य अत्यंत छोटा है, इसलिए उसे अहंकार, स्वार्थ और भेदभाव त्यागकर प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनानी चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

6. कविता में कवि ने मनुष्य की लघुता को किस प्रकार क्रमबद्ध रूप से दिखाया है? समझाइए।

उत्तरकवि छोटे से बड़े की ओर क्रमशः विस्तार बढ़ाता है – कमरा, घर, मुहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी, नक्षत्र, आकाशगंगा और फिर लाखों ब्रह्मांड।हर स्तर पर पिछली वस्तु अगली के सामने छोटी पड़ती जाती है। अंत में पृथ्वी असंख्य ग्रहों में एक छोटी-सी और मनुष्य उसका भी अति सूक्ष्म भाग सिद्ध होता है।इस क्रमबद्ध विस्तार से कवि यह बोध कराता है कि विराट सृष्टि की तुलना में मनुष्य का अस्तित्व नगण्य है, इसलिए उसे अहंकार नहीं करना चाहिए।

7. कविता मनुष्य के अहंकार पर किस प्रकार व्यंग्य करती है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरकविता दिखाती है कि इतना छोटा प्राणी होकर भी मनुष्य ईर्ष्या, अहं और स्वार्थ में डूबा रहता है, अनगिनत कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है और स्वयं को दूसरों का स्वामी मान बैठता है।कवि प्रश्न शैली में व्यंग्य करता है – “देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है”, अर्थात् साथ रहते हुए भी मनुष्य बँटा रहता है।इस प्रकार बिना क्रोध के, शांत व्यंग्य द्वारा कवि मनुष्य के अहंकार और संकीर्णता पर तीखी चोट करता है और उसे आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।

8. इस कविता की प्रमुख काव्यगत विशेषताएँ लिखिए।

उत्तरछोटी पंक्तियाँ: कविता बहुत छोटी-छोटी पंक्तियों में रची गई है, जिससे विचार स्पष्ट एवं प्रभावी बनते हैं।क्रमिक विस्तार एवं पुनरावृत्ति: शब्दों को दोहराकर छोटे से बड़े की ओर विस्तार दिखाया गया है; अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है।व्यंग्य एवं अतिशयोक्ति: ‘संख्यातीत शंख सी दीवारें’ में अतिशयोक्ति तथा प्रश्न शैली में अहंकार पर तीखा व्यंग्य है। भाषा सरल, चिंतनप्रधान एवं प्रतीकात्मक है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?

(क) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(ख) गिरिजा कुमार माथुर

(ग) रामधारी सिंह दिनकर

(घ) हरिवंशराय बच्चन

उत्तर(ख) गिरिजा कुमार माथुर।

2. कविता के अनुसार पृथ्वी कैसी है?

(क) सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण

(ख) करोड़ों में एक छोटी

(ग) ब्रह्मांड से भी बड़ी

(घ) सूर्य के समान

उत्तर(ख) करोड़ों में एक छोटी।

3. ‘नभ गंगा’ का अर्थ है—

(क) पवित्र नदी गंगा

(ख) आकाशगंगा

(ग) वर्षा

(घ) समुद्र

उत्तर(ख) आकाशगंगा।

4. कविता के अनुसार मनुष्य किन भावों में लीन रहता है?

(क) प्रेम, दया, करुणा

(ख) त्याग और सेवा

(ग) ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास

(घ) ज्ञान और न्याय

उत्तर(ग) ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास।

5. ‘शंख’ भारतीय संख्या प्रणाली में किस संख्या का सूचक है?

(क) 1015

(ख) 1017

(ग) 1019

(घ) 109

उत्तर(ख) 1017 (100 पद्म)।

6. कविता में ‘विराट’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

(क) मनुष्य के लिए

(ख) पृथ्वी के लिए

(ग) अनंत ब्रह्मांड/सृष्टि के लिए

(घ) कमरे के लिए

उत्तर(ग) अनंत ब्रह्मांड/सृष्टि के लिए।

7. ‘दीवारें उठाना’ मुख्यतः किसका प्रतीक है?

(क) घर बनाना

(ख) भेदभाव एवं अलगाव की कृत्रिम सीमाएँ

(ग) किला बनाना

(घ) खेती करना

उत्तर(ख) भेदभाव एवं अलगाव की कृत्रिम सीमाएँ।

8. “दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—” में प्रयुक्त डैश (—) चिह्न को क्या कहते हैं?

(क) अल्पविराम

(ख) निदेशक चिह्न

(ग) प्रश्नवाचक चिह्न

(घ) विस्मयादिबोधक चिह्न

उत्तर(ख) निदेशक चिह्न।

9. कविता का मुख्य भाव क्या है?

(क) प्रकृति का सौंदर्य

(ख) मनुष्य की लघुता तथा उसके अहंकार पर व्यंग्य

(ग) देशप्रेम

(घ) ऋतु-वर्णन

उत्तर(ख) मनुष्य की लघुता तथा उसके अहंकार पर व्यंग्य।

10. गिरिजा कुमार माथुर द्वारा रचित प्रसिद्ध भावांतर गीत कौन-सा है?

(क) सारे जहाँ से अच्छा

(ख) होंगे कामयाब

(ग) वंदे मातरम्

(घ) झंडा ऊँचा रहे हमारा

उत्तर(ख) होंगे कामयाब।
उत्तर-कुंजी: 1-ख, 2-ख, 3-ख, 4-ग, 5-ख, 6-ग, 7-ख, 8-ख, 9-ख, 10-ख।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य अत्यंत सूक्ष्म है।

कारण (R): पृथ्वी स्वयं करोड़ों नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): कविता में मनुष्य के अहंकार पर व्यंग्य किया गया है।

कारण (R): मनुष्य अपने को दूजे का स्वामी बताता है और दीवारें उठाता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

3. अभिकथन (A): ‘नभ गंगा’ का अर्थ पवित्र नदी गंगा है।

कारण (R): कविता में ‘परिधि नभ गंगा की’ पंक्ति सबको समेटने वाली विशालता दर्शाती है।

उत्तर(घ) A गलत है (‘नभ गंगा’ का अर्थ आकाशगंगा है, नदी गंगा नहीं), जबकि R सही है।

4. अभिकथन (A): कविता बहुत छोटी-छोटी पंक्तियों में रची गई है।

कारण (R): इसमें अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है (दोनों अलग-अलग काव्यगत विशेषताएँ हैं)।

5. अभिकथन (A): मनुष्य एक कमरे में भी दो दुनिया रच लेता है।

कारण (R): आपसी अविश्वास, स्वार्थ और अहं के कारण लोग साथ रहते हुए भी मन से बँटे रहते हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-उपयोगी सुझाव एवं सामान्य भूलें

परीक्षा-उपयोगी सुझाव

  • विस्तार-क्रम (कमरा → घर → … → ब्रह्मांड) क्रमबद्ध याद रखें – इस पर सीधे प्रश्न आते हैं।
  • मनुष्य की पाँच नकारात्मक भावनाएँ – ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास – ज्यों-की-त्यों लिखें।
  • ‘नभ गंगा = आकाशगंगा’ और ‘शंख = 1017’ जैसे तथ्य भावार्थ में जोड़ने से उत्तर सशक्त होता है।
  • व्यंग्य, अतिशयोक्ति एवं प्रश्न शैली जैसी काव्यगत विशेषताएँ उदाहरण-सहित लिखें।

सामान्य भूलें (इनसे बचें)

  • ‘नभ गंगा’ को नदी गंगा समझ लेना – यह आकाशगंगा है।
  • कविता का भाव केवल ‘प्रकृति-वर्णन’ बता देना – इसका मूल भाव मनुष्य की लघुता एवं अहंकार पर व्यंग्य है।
  • ‘दीवारें उठाना’ को केवल ईंट की दीवार मान लेना – यह भेदभाव की मानसिक दीवारों का प्रतीक है।
  • कवि का नाम गलत लिखना – सही नाम ‘गिरिजा कुमार माथुर’ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘आदमी का अनुपात’ कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि गिरिजा कुमार माथुर (1919–1994) हैं, जिन्होंने प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब’ की भी रचना की थी।

कविता में किन दो चीज़ों का अनुपात दिखाया गया है?

कविता में मानव और विराट ब्रह्मांड का अनुपात दिखाया गया है, जिससे मनुष्य की लघुता स्पष्ट होती है।

‘नभ गंगा’ का क्या अर्थ है?

‘नभ गंगा’ का अर्थ आकाशगंगा (Milky Way) है, जो असंख्य तारों एवं ग्रहों को अपनी परिधि में समेटे है।

कविता का मुख्य संदेश क्या है?

विराट सृष्टि के सामने मनुष्य अत्यंत छोटा है, इसलिए उसे अहंकार, स्वार्थ और भेदभाव त्यागकर प्रेम, सहयोग एवं समानता अपनानी चाहिए।

कविता एवं प्रश्न NCERT मल्हार पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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